मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 के तहत 30 जून 2026 (मंगलवार) को आयोजित होगा विशेष सोशल मीडिया अभियान।
सरायकेला/खरसावां
जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 के अंतर्गत जिले में व्यापक जनजागरूकता एवं नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विशेष प्रचार-प्रसार अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में दिनांक 30 जून, 2026 को जिले भर में #JharkhandSIR हैशटैग के साथ वृहद सोशल मीडिया अभियान आयोजित किया जाएगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 30 जून, 2026 (मंगलवार) को पूर्वाह्न 11:00 बजे से अपराह्न 1:00 बजे तक फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम एवं यूट्यूब सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आधिकारिक हैशटैग #JharkhandSIR के माध्यम से विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों , प्रखंड विकास पदाधिकारियों एवं अंचल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के निकटतम मतदान केंद्रों पर उपस्थित होकर अथवा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से निर्धारित पोस्टर एवं लीफलेट में निहित संदेशों का वाचन करते हुए वीडियो एवं तस्वीरें साझा करें, ताकि मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की जानकारी अधिकाधिक नागरिकों तक पहुँच सके।
साथ ही, जिले के सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस विशेष सोशल मीडिया अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें, #JharkhandSIR हैशटैग का उपयोग करते हुए जागरूकता संबंधी सामग्री साझा करें तथा मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम-2026 को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
ओत गुरु कोल लाको बोदरा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, भाषा-संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प।
सरायकेला/खरसावां
वारंग चिति लिपि के खोजकर्ता, समाज सुधारक एवं हो भाषा के महान पुरोधा कोल लाको बोदरा की पुण्यतिथि पर सोमवार को खरसावां स्थित आदिवासी सांस्कृतिक एवं कला केंद्र परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा भाषा, साहित्य, संस्कृति और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद किया गया।
श्रद्धांजलि सभा में आदिवासी हो समाज महासभा के जिलाध्यक्ष मनोज सोय, हो भाषा के शिक्षक सिद्धेश्वर कुदादा, मानसिंह बांकिरा, श्याम सोय, गणेश बांकिरा, बादल हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवियों और समाज के लोगों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने ओत गुरु के आदर्शों पर चलने तथा मातृभाषा एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मनोज सोय ने कहा कि ओत गुरु कोल लाको बोदरा ने वारंग चिति लिपि की खोज कर हो भाषा को नई पहचान दिलाई। उनका योगदान केवल एक लिपि के निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने समाज में शिक्षा, जागरूकता और सांस्कृतिक अस्मिता को भी नई दिशा दी।
वक्ताओं ने युवाओं से अपनी मातृभाषा, साहित्य, संस्कृति और पारंपरिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। कार्यक्रम का समापन ओत गुरु कोल लाको बोदरा के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करने तथा उनके बताए मार्ग पर चलने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
देव स्नान पूर्णिमा पर 108 घड़ों के जल से हुआ महाप्रभु जगन्नाथ का शाही स्नान, 15 दिनों तक रहेंगे अणसर गृह में।
सरायकेला/खरसावां
देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर खरसावां के राजमहल परिसर स्थित जगन्नाथ मंदिर एवं हरिभंजा स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ 108 घड़ों के पवित्र जल से शाही स्नान कराया गया।
सोमवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखनाद, मृदंग और अन्य वाद्य यंत्रों की मंगलध्वनि के बीच महाप्रभु के विग्रहों को रत्न सिंहासन से स्नान मंडप तक लाया गया। यहां राजपुरोहित अमुजाख्यो आचार्य एवं राजाराम शतपथी ने विधि-विधान से 108 घड़ों के जल से महाप्रभु का अभिषेक किया।
स्नान के उपरांत भगवान को सादे वस्त्र पहनाए गए तथा नित्य भोग अर्पित किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा पर अत्यधिक स्नान के कारण भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद उन्हें 15 दिनों के लिए अणसर गृह में विश्राम एवं उपचार हेतु रखा जाता है। इस अवधि में श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं होते।
रथयात्रा से पूर्व नेत्र उत्सव के दिन भगवान स्वस्थ होकर भक्तों को नवयौवन दर्शन देंगे। इसके बाद खरसावां नगर एवं हरिभंजा क्षेत्र में पारंपरिक उल्लास के साथ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी।इस अवसर पर रानी विजया देवी, राजकुमार गोपाल नारायण सिंहदेव, अमुजाख्यो आचार्य, विमला प्रसाद सांड़गी, राकेश दास, सुशील सांड़गी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
रेफरल अस्पताल की छवि से बाहर निकल रहा है सरायकेला का सदर अस्पताल : मनोज कुमार चौधरी
सरायकेला-खरसावां
नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने अपने नियमित साप्ताहिक निरीक्षण के क्रम में सदर अस्पताल, सरायकेला का भ्रमण कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न वार्डों में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों से मुलाकात कर उपचार, चिकित्सकीय व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता तथा अस्पताल की अन्य सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान अधिकांश मरीजों एवं उनके परिजनों ने अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के व्यवहार तथा उपचार व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। यह जानकर मनोज कुमार चौधरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरायकेला का सदर अस्पताल अब धीरे-धीरे केवल “रेफरल अस्पताल” की पुरानी छवि से बाहर निकलकर बेहतर उपचार और जनविश्वास का केंद्र बनता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सिविल सर्जन के साथ नियमित समन्वय बनाकर अस्पताल में कई आवश्यक सुधार कार्य किए जा रहे हैं। जल्द ही अस्पताल में एक आधुनिक डिजिटल एक्स-रे मशीन स्थापित की जाएगी। साथ ही आपातकालीन कक्ष के बाहर डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग चेंबर का निर्माण कराया जा रहा है। इससे आपात स्थिति में मरीजों को डॉक्टर से संपर्क करने में होने वाली देरी समाप्त होगी और उपचार और अधिक त्वरित एवं प्रभावी ढंग से उपलब्ध हो सकेगा।
मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि सरायकेला एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिच्छू एवं सर्पदंश के मामले अक्सर सामने आते हैं। ऐसे मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक जीवनरक्षक इंजेक्शन एवं दवाइयां सदर अस्पताल में उपलब्ध हैं तथा जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सरकार की जनहितकारी नीतियों एवं जिला प्रशासन के सहयोग से सरायकेला सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे आम लोगों को अपने जिले में ही बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है।
अंत में उन्होंने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनसेवा की इसी भावना के साथ अस्पताल को और अधिक सक्षम एवं आधुनिक बनाने के लिए हरसंभव प्रयास जारी रहेंगे।
जेएलकेएम के प्रखंड स्तरीय बैठक का आयोजन, संगठन मजबूती को लेकर हुई चर्चा।
सरायकेला/ईचागढ़
ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के डुमटांड़ बाजार मैदान में सोमवार को जेएलकेएम का प्रखंड स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में आगामी वर्ष 2027 में होने वाली पंचायत चुनाव, आगामी विधानसभा चुनाव से संबंधित विस्तार पूर्वक चर्चा किया गया।
साथ ही ईचागढ़ थाना क्षेत्र से अवैध बालू खनन तथा परिवहन को लेकर भी चर्चा किया गया और बैठक में अवैध खनन और परिवहन को रोकने हेतु चरणबद आंदोलन करने का भी रुप रेखा तैयार किया गया। ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो ने बताया कि आने वाले पंचायत चुनाव में पार्टी की ओर से वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद के पद पर प्रत्याशी दिया जाएगा एवं उनके जीत सुनिश्चित करने हेतु वार्ड स्तर पर मतदाताओं से बैठक कर उनकी मुलभुत समस्याओं का निदान हेतु प्रयास किया जाएगा। साथ ही कहा कि ईचागढ़ थाना क्षेत्र से अवैध बालू का खनन और परिवहन किया जा रहा है, इसे रोकने के लिए भी जेएलकेएम पार्टी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
मौके जिला अध्यक्ष दीपक महतो,अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष साबीर अंसारी,जिला उपाध्यक्ष गुरुपद महतो,जिला सचिव अजय महतो,प्रखंड अध्यक्ष नंदकिशोर महतो, लाल मोहन महतो,नकुल महतो,रुपेश महतो सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पत्नी कल्पना सोरेन संग किया झारखंड के पर्यटन स्थलों का भ्रमण।
झारखंड की इस अनुपम धरती पर सभी सैलानियों का हार्दिक स्वागत है, जोहार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड
झारखंड की हरियाली का व्याख्या करना यह शब्दों के बाहर की बात है:- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड
झारखंड/रांची
( सोनू कुमार सिंह )
साथियों काफी वर्षों ( 1982 ) पहले बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्रीज में एक फिल्म आई थी “नदिया के पार” और फिल्म का एक गाना बेहद ही प्रसिद्ध हुआ था जिसे आज भी हम और आप गुनगुनाते हैं उस गाने की एक लाइन मुख्यमंत्री के इस मनमोहन कार्य में फिट बैठती है “ठहेर ठहेर ये सुहानी सी डगर तनी देखने दे”। कैने दिशा में लेके चला रहे बटोहिया।
प्राकृतिक की गोद में बसा 24 जिलों वाला झारखंड राज्य अपने आप में एक हरियाली का प्रतीक है। जहां नजर घुमाओ बड़े-बड़े पहाड़ बड़े-बड़े पेड़ पौधे फूल पत्तियां पक्षियां जानवर यह सब एक अलग ही मनमोहक दृश्य दिखाई देती है जिसे देखने के बाद हर किसी का मन प्रसन्न हो जाता है फिर और किसी नजारे को देखने की चाहत नहीं रहती।
प्रकृति की गोद में बहती निर्मल जलधारा, घने जंगलों की हरियाली और पहाड़ों का शांत सौंदर्य बार-बार यह एहसास कराता है कि झारखंड प्रकृति का अनुपम उपहार है। यह हमारी साझी धरोहर है, जिसे सहेजना और संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। झारखंड के किसी भी कोने में आप चले जाइए, प्रकृति अपने अलग-अलग रंगों में आपका स्वागत करती दिखाई देगी।
आपको बताते चलें कि झारखंड हमारे भारत देश का एक पर्यटक स्थल के नाम से भी जाना जाता है यहां के पर्यटक स्थल बाहरी सैलानियों को काफी आकर्षित करती है जिससे कि बाहर से भी लाखों की संख्या में सैलानी खासकर मानसून के महीने में झारखंड के पर्यटन स्थलों का नजारा देखने के लिए हजारों मील दूर से यात्रा कर झारखंड प्रदेश में प्रवेश करते हैं।
वहीं रविवार का दिन झारखंड के लिए बेहद ही खास दिन रहा जिसमें की झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के संग सेल्फ ड्राइव करते हुए झारखंड के कुछ चुनिंदा पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया।
वहीं मुख्यमंत्री के पर्यटन स्थलों का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जिसे देखने के बाद यूजर्स की मानो कमेंट करने का तांता लग गया। किसी ने जोहार झारखंड कहा तो किसी ने जोहार झारखोंड कहा है।
साथियों आपको बताते चलें कि 24 जिलों वाला राज्य झारखंड के मुख्यमंत्री का एक-एक क्षण काफी कीमती माना जाता है उनके ऊपर 24 जिलों का कार्यभार की जिम्मेदारी है फिर भी वे काफी व्यस्त होने के बावजूद भी रांची से लौटने के क्रम में जोन्हा जलप्रपात का दृश्य देखकर वह खुद को रोक नहीं पाएं और वही अपनी गाड़ी को खड़ी कर प्राकृतिक का नजारा देखने के लिए कुछ क्षण अपनी पत्नी कल्पना सोरेन संघ रुक गए और कुछ देर प्रकृतिक के मनमोहक नजारे का अवलोकन करने के बाद कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा है कि रांची शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित जोन्हा फ़ॉल की हरी-भरी वादियों के बीच कुछ पल बिताने का अवसर मिला। इस बीच वहां फलों का भी आनंद लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत भी हुई।
साथियों फुर्सत के क्षण मे से कुछ समय प्रकृति के गोद में अवश्य जाना चाहिए, वहां शांतिपूर्ण आनन्द एवं चिन्तन-मनन प्रदेश के खुशहाली में मील का पत्थर साबित होता है । प्रकृति की गोद में समय बिताना सबसे अच्छा है, यह हमारे जीवन को नई दिशा देता है। झारखंड की प्रकृतिक वातावरण का अनुभव प्राप्त करना बहुत ही प्रभावित करता है मन को बस उसे समझने की आवश्यकता है।
सरायकेला में पेट्रोल पंप के सामने शॉर्ट सर्किट से लगी आग, मची अफरा तफरी।
सरायकेला-खरसावां
( सोनू कुमार सिंह )
रविवार कोसरायकेला में पेट्रोल पंप के सामने जुस्को की विद्युत केबल में शॉर्ट सर्किट होने से अचानक आग लग गई। घटना के बाद कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पेट्रोल पंप के समीप आग लगने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल पेट्रोल पंप को खाली कराया गया।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर नियंत्रण पा लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
घटना की जानकारी मिलने पर नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मनोज कुमार चौधरी ने मौके का जायजा लेते हुए कहा कि जुस्को की लापरवाही एवं घटिया विद्युत सेवा के कारण नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है। इस प्रकार की घटनाएं अत्यंत गंभीर हैं और भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इस मामले में जुस्को की कार्यप्रणाली एवं लापरवाही के विरुद्ध संबंधित विभाग के समक्ष शिकायत दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने संबंधित एजेंसी से विद्युत केबलों एवं अन्य विद्युत संरचनाओं की तत्काल जांच कर आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की।
वन विभाग को मिली बड़ी सफलता, ग्रामीणों की सहायता से जंगली हाथी को निकाला।
सरायकेला/ईचागढ़
साथियों लगातार कई दिनों से हाथियों के हमले से हो रहे मौत की खबर न्यूज़ चैनलों, अखबारों अथवा न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से भी हम सभी को प्राप्त हो रहे थी।
इसके साथ ही एक खबर और निकलकर सामने आ रही थी कि 10 दिनों से एक जंगली हाथी मैसाड़ा- कालीचामदा में डेरा जमा हुए था जिसे उक्त स्थान से निकलकर घने जंगल की ओर भेजने का प्रयास लगातार 10 दिनों से वन विभाग द्वारा किया जा रहा था वन विभाग ही नहीं ग्रामीणों के द्वारा भी लगातार हाथी को घने जंगल की ओर भेजने का प्रयास किया जा रहा था लेकिन वन विभाग अथवा ग्रामीणों की प्रयास विफल साबित हो रही थी।
साथ ही वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के बीच सुरक्षा के दृष्टिकोण से और हाथी को भगाने हेतु क्षेत्र में लगातार टॉर्च, पटाखा, मोबिल, बोरा आदि का वितरण कर हाथी भगाने में जन सहभागिता को बढ़ाया जा रहा था।
लेकिन वह दिन आ ही गया जब वन विभाग की मेहनत रंग लाई और हाथी को उक्त स्थान से खदेड़ कर वर्तमान में सालबनी के जंगल में भेजा गया। वहीं वन विभाग एवं QRT टीम हाथी पर लगातार नजर बनाई हुई है ताकि हाथी को सुरक्षित घने जंगल की और ले जाया जा सके।
आपको बताते चले की 10 दिनों से मैसाड़ा- कालीचामदा में डेरा डाले इस जंगली हाथी को वन विभाग, पालना का लोकल QRT टीम और बंगाल का QRT टीम तथा ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से इस जटिल भौगालिक क्षेत्र से निकालने में सफलता प्राप्त की है।
इस मामले में प्रभारी वनपाल पातकुम कैलाश चंद्र महतो की अगुवाई में अन्य वन कर्मी , हाथी भगाओ दस्ता, तथा ग्रामीणों द्वारा लगातार 10 दिनों तक प्रयास किया जा रहा था। साथ ही लागातार माइकिंग के माध्यम से ग्रामीणों को सुचना, और जागरूकता बढ़ाया गया।
इस अभियान में वनपाल कैलाश चंद्र महतो, सुरेन्द्र कुमार गोप, मुन्ना सोरेन, वनरक्षी लखीचरण सिंह मुंडा, राजेश किस्कू, भागवत टुडू, राम चरण महतो आदि शामिल हुए।
पूर्व विधायक मलखान सिंह का जन्मदिन सादगीपूर्ण माहौल में मनाया गया, शुभचिंतकों ने दी दीर्घायु की शुभकामनाएं।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह )
ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व विधायक अरविंद कुमार सिंह उर्फ़ मलखान सिंह का जन्मदिन रविवार को आदित्यपुर स्थित ओल्ड हाउसिंग कॉलोनी के एम-9 आवास पर सादगीपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, समर्थकों एवं शुभचिंतकों ने पहुंचकर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के विधायक मंगल कालिंदी, वरीय कांग्रेसी नेता अजय सिंह, भाजपा नेता शैलेंद्र सिंह सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संस्थाओं, महिला संगठनों एवं सैकड़ों समर्थकों ने भाग लिया। सभी ने केक काटकर जन्मदिन की खुशियां साझा कीं और मलखान सिंह को पुष्पगुच्छ, पौधा एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुख-समृद्धि की कामना करते हुए मिठाई खिलाकर अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। समर्थकों ने पटाखे छोड़कर भी अपनी खुशी का इजहार किया।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि मलखान सिंह लंबे समय से जनसेवा एवं क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य करते रहे हैं। उनके नेतृत्व और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता को लोगों ने सराहा तथा ईश्वर से प्रार्थना की कि वे स्वस्थ एवं दीर्घायु रहें और भविष्य में भी समाज तथा क्षेत्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहें।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
फ़िर पेपर लीक: अंदरूनी विश्वासघात- घर का भेदी लंका ढाए -युवाओं के भविष्य की चोरी या व्यवस्था की सबसे बड़ी विफ़लता व कमजोरी?
लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी, यात्रा, मानसिक तनाव और भविष्य एक झटके में अधर में लटक जाना,पूरे देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और संबंधित अधिकारियों क़ो भी केंद्रीय बजट तैयार करने वाली टीम की तरह एग्जाम होने तक पूर्ण गोपनीय वातावरण में रखने की तात्कालिक आवश्यकता।
गोंदिया/महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर घर का भेदी लंका ढाए,यह कहावत आज भारत की परीक्षा प्रणाली पर पहले से कहीं अधिक सटीक बैठती दिखाई देती है।कभी पानी की पाइपलाइन,गैस लाइन या टैंकर लीक होने की खबरें चर्चा का विषय होती थीं, लेकिन आज लीक शब्द सुनते ही लोगों के मन में पहला प्रश्न आता है, आज किस परीक्षा का पेपर लीक हुआ? यह स्थिति किसी भी लोकतांत्रिक और ज्ञान- आधारित समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक है। किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होना केवल एक प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के वर्षों के परिश्रम, सपनों और भविष्य की खुली चोरी है। जब एक विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करके परीक्षा केंद्र तक पहुंचता है और अंतिम क्षणों में परीक्षा रद्द या स्थगित कर दी जाती है, तो उसका केवल समय और धन ही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर विश्वास भी टूटता है। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (महा टेट 2026) का परीक्षा से ठीक पहले स्थगित होना इसी गहरी बीमारी का सटीक ताजा उदाहरण है।महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा रविवार 28 जून 2026 को आयोजित थी, किंतु एक दिन पहले ठाणे के भिवंडी क्षेत्र में पुलिस द्वारा पेपर लीक रैकेट का भंडाफोड़ किए जाने के बाद सरकार को परीक्षा तत्काल स्थगित करनी पड़ी। प्रारंभिक जांच में वास्तविक प्रश्नपत्र आरोपियों के पास मिलने की पुष्टि ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कोई अफवाह नहीं, बल्कि संगठित अपराध था। लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी,यात्रा, मानसिक तनाव और भविष्य एक झटके में अधर में लटक गया। यह घटना केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक की घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ बनाने के दावे किए गए थे,तब फिर ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं? यदि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो चुकी है,तो प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अपराधियों तक कैसे पहुंच गया?इसका उत्तर केवल तकनीकी कमजोरी में नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर मौजूद मानवीय भ्रष्टाचार और संस्थागत मिलीभगत में छिपा है। पेपर लीक की लगभग हर बड़ी घटना यह संकेत देती है कि यह केवल बाहरी अपराधियों का काम नहीं होता। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर मुद्रण, पैकेजिंग, परिवहन, सुरक्षित भंडारण और वितरण तक अनेक चरण होते हैं। इनमें किसी भी स्तर पर यदि कोई व्यक्ति धन, प्रभाव या लालच के कारण गोपनीयता तोड़ देता है, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अधिकांश पेपर लीक बाहरी हमला नहीं, बल्कि अंदरूनी विश्वासघात होते हैं। वास्तव में घर का भेदी लंका ढाए वाली स्थिति ही इस समस्या का मूल है।
साथियों, महाराष्ट्र मामले की जांच में सामने आए तथ्यों ने भी इसी ओर संकेत किया। पुलिस को गुप्त सूचना मिलने के बाद अंडरकवर ऑपरेशन चलाया गया। अधिकारियों ने स्वयं को पेपर खरीदने वाला ग्राहक बताकर आरोपियों से संपर्क किया और दो दिनों तक उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी। बड़ी धनराशि का लालच देकर सौदे के लिए बुलाया गया और जैसे ही प्रश्नपत्र सौंपा गया, तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में दिल्ली सहित कई राज्यों तक फैले अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले, जिसके बाद विशेष जांच दल ने विभिन्न राज्यों में जांच शुरू की। इससे स्पष्ट है कि पेपर लीक अब छोटे स्तर का अपराध नहीं रहा, बल्कि यह करोड़ों रुपये के संगठित आपराधिक नेटवर्क का रूप ले चुका है।आज डिजिटलतकनीक ने जहां सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं अपराधियों को भी नए माध्यम उपलब्ध करा दिए हैं। व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर कुछ ही मिनटों में प्रश्नपत्र हजारों लोगों तक पहुंच सकता है। इसलिए केवल प्रिंटिंग प्रेस की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। साइबर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और डेटा सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। यदि डिजिटल चैनल सुरक्षित नहीं होंगे, तो कोई भी गोपनीय दस्तावेज सुरक्षित नहीं रह सकता। साथियों, पेपर लीक का सबसे बड़ा नुकसान केवल परीक्षा स्थगित होना नहीं है। इसका सबसे गंभीर प्रभाव युवाओं के मनोविज्ञान पर पड़ता है। वर्षों की मेहनत करने वाला छात्र स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है। वह सोचने लगता है कि मेहनत से अधिक महत्व पैसे, पहुंच और भ्रष्ट नेटवर्क का है। यह भावना प्रतिभाशाली युवाओं में निराशा, अविश्वास और मानसिक तनाव को जन्म देती है। यदि यह स्थिति लगातार बनी रही,तोइसका प्रभाव केवल शिक्षा पर नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक गुणवत्ता,सामाजिक विश्वास और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।भारत के लिए यह समय केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली के पुनर्गठन का है। केवल पेपर लीक होने के बाद एसआईटी बनाना और कुछ गिरफ्तारियां करना पर्याप्त समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें पेपर लीक होना तकनीकी और प्रशासनिक रूप से लगभग सटीकता से असंभव हो जाए। साथियों, इस संदर्भ में विश्व के अनेक देशों ने अत्यंत प्रभावी मॉडल विकसित किए हैं, जिनसे भारत महत्वपूर्ण सीख ले सकता है। चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा “गाओकाओ” को दुनिया की सबसे सुरक्षित परीक्षाओं में माना जाता है। वहां प्रश्नपत्रों को राष्ट्रीय गोपनीय दस्तावेज का दर्जा प्राप्त है। प्रश्नपत्रों की छपाई अत्यधिक सुरक्षित परिसरों में होती है और उनका परिवहन बख्तरबंद वाहनों, जीपीएस ट्रैकिंग, वीडियो निगरानी तथा सशस्त्र सुरक्षा के बीच किया जाता है। परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन, एआई कैमरे, रेडियो जैमर और इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्शन सिस्टम का उपयोग किया जाता है। वहां पेपर लीक केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध गंभीर अपराध माना जाता है।अमेरिका ने एक अलग रास्ता अपनाया है। वहां विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षाओं में तेजी से डिजिटल प्रणाली लागू की गई है। प्रश्नपत्रों की लंबी अवधि तक भौतिक रूप में उपलब्धता समाप्त कर दी गई है। परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले एन्क्रिप्टेड माध्यम से प्रश्न उपलब्ध कराए जाते हैं। विशेष लॉकडाउन सॉफ्टवेयर के कारण परीक्षार्थी अन्यवेबसाइट स्क्रीनशॉट या बाहरी एप्लिकेशन का उपयोग नहीं कर सकता।इससे पारंपरिक पेपर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।ऑस्ट्रेलिया ने भी ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया है। वहां लॉकडाउन ब्राउज़र, प्रश्नों का अलग-अलग क्रम, एआई आधारित निगरानी तथा अधिकृत अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। यदि कोई अधिकारी सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई होती है।दक्षिण कोरिया का मॉडल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वहां राष्ट्रीय परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले शिक्षकों और विशेषज्ञों को परीक्षा समाप्त होने तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग रखा जाता है। उनके मोबाइल, इंटरनेट और बाहरी संपर्क बंद कर दिए जाते हैं। यह व्यवस्था कठोर अवश्य है, किंतु प्रश्नपत्र की गोपनीयता सुनिश्चित करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई है।
साथियों, यहीं पर भारत के लिए एक व्यावहारिक सुझाव भी सामने आता है। जिस प्रकार केंद्रीय बजट तैयार करने वाली टीम को बजट प्रस्तुत होने तक पूर्ण गोपनीय वातावरण में रखा जाता है, उसी प्रकार प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, मॉडरेटरों और संबंधित अधिकारियों के लिए भी सीमित अवधि का नियंत्रित एवं सुरक्षित वातावरण बनाया जा सकता है।यह व्यवस्था केवल उच्च जोखिम वाली राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए लागू की जा सकती है। इससे प्रश्नपत्र निर्माण के दौरान बाहरी संपर्क और संभावित लीक की संभावना काफी कम हो सकती है। हालांकि केवल मानव नियंत्रण पर्याप्त नहीं होगा। अब समय आ गया है कि प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्र तक प्रत्येक चरण का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाए। ब्लॉकचेन जैसी तकनीक दस्तावेजों की सुरक्षा और प्रत्येक गतिविधि का अपरिवर्तनीय रिकॉर्ड रखने में सहायक हो सकती है। यदि प्रत्येक एक्सेस, डाउनलोड, प्रिंट और ट्रांसफर का डिजिटल लॉग सुरक्षित रहेगा, तो किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी तय करना आसान होगा। साथियों, इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में जीरो ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल अपनाने की आवश्यकता है।अर्थात कोई भी व्यक्ति केवल पद के आधार पर पूर्ण विश्वास का पात्र न माना जाए।प्रत्येक चरण में बहुस्तरीय प्रमाणीकरण डिजिटल ऑडिट और स्वतंत्र निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। संवेदनशील कार्यों में एकल व्यक्ति के बजाय बहु-अधिकारी प्रणाली अपनाई जानी चाहिए ताकि कोई अकेला व्यक्ति पूरीe प्रक्रिया से समझौता न कर सके।कानूनी स्तर पर भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में जांच लंबी चलती है और दोषियों को वर्षों तक सजा नहीं मिलती। इससे अपराधियों में भय पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।
साथियों, पेपर लीक को केवल सामान्य आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और राष्ट्रीय संसाधनों के विरुद्ध संगठित आर्थिक अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके लिए विशेष कानून, अनिवार्य संपत्ति जब्ती आजीवन परीक्षा प्रतिबंध, सरकारी सेवा से स्थायी निष्कासन और फास्ट-ट्रैक न्यायालयों में समयबद्ध सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं लागू की जानी चाहिए।परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही भी स्पष्ट होनी चाहिए।यदिकिसी एजेंसी की लापरवाही सिद्ध होती है,तो केवल निचलेस्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की भी व्यक्तिगत जवाबदेही तय करनी होगी।जब तक जवाबदेही ऊपर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक सुधार केवल कागजों तक सीमित रहेगा।
साथियों, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश को अपने युवाओं का विश्वास वापस जीतना होगा।प्रत्येक पेपर लीक केवल एक परीक्षा रद्द नहीं करता, बल्कि यह संदेश देता है कि व्यवस्था अभी भी ईमानदार प्रतिभा की पूरी तरह रक्षा नहीं कर पा रही है। यदि यह विश्वास टूट गया, तो इसका प्रभाव आने वाले दशकों तक सटीकता से दिखाई देगा।आज आवश्यकता केवल नई घोषणाओं की नहीं, बल्कि कठोर क्रियान्वयन की है। भारत के पास तकनीक भी है, प्रशासनिक क्षमता भी और वैश्विक उदाहरण भी। अब आवश्यकता राजनीतिक इच्छाशक्ति,संस्थागत ईमानदारी और शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने की है। यदि प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परिणाम घोषित होने तक प्रत्येक चरण को वैज्ञानिक, पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाया जाए, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह समझना होगा कि परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का चयन तंत्र है। यदि यही व्यवस्था भ्रष्ट हो जाएगी, तो प्रशासन, शिक्षा, न्याय और विकास की पूरी नींव कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए पेपर लीक के विरुद्ध संघर्ष केवल परीक्षा बचाने का अभियान नहीं, बल्कि युवा प्रतिभा, सामाजिक न्याय और भारत के भविष्य की रक्षा का राष्ट्रीय संकल्प होना चाहिए। तभी प्रत्येक विद्यार्थी यह विश्वास कर सकेगा कि उसकी सफलता का आधार केवल उसकी मेहनत होगी, किसी लीक हुए प्रश्नपत्र या भ्रष्ट नेटवर्क का प्रभाव नहीं।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
ग्राम स्वसाशन व्यवस्था की ग्राम पद के लिए लोगों का चयन किया गया।
सरायकेला/खरसावां
सरायकेला खरसावां जिला के नीमडीह प्रखंड के चलीयामा पंचायत के बांधटाड गांव में आदिवासी कल्याण समिति समुदायिक भवन की बैठक। जिसमें ग्राम सभा भानु सिंह सरदार की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई। बैठक में मानकी/ मंडा स्वशासन व्यवस्था के तहत गांव व्यवस्था हेतु विभिन्न पद के रूप लोग का चयनित किया गया। चयनित लोग को प्रमाण पत्र भी संयोजक मंडली द्वारा जारी की गई।मुख्य अतिथि में बड़ेदा पंचायत के मुखिया बरुण सिंह उपस्थित थे।
संयोजक मंडली में सुधाकर सिंह, भोला सिंह सरदार,भानु सिंह,मदन सिंह, इंद्रजीत सिंह, दुर्योधन सिंह, जनार्दन सिंह, बैधनाथ सिंह, उपस्थित थे । बैठक में निर्णय लिया कि आगमी २९ तारिख को सभी लोग मिलकर नीमडीह प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक पत्र सौंपा जाएगा।
अटल पार्क के संवेदक राजमणि इंटरप्राइजेज की संविदा रद्द, जमानत राशि लगभग 6 लख रुपए जप्त करने का भी निर्देश।
सरायकेला/आदित्यपुर
3 वर्षों के कार्यकाल में दूसरे वर्ष की राशि बकाया, जीएसटी बिल भी भी बकाया।
अटल पार्क संबंधित तस्वीर
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 22 स्थित अटल पार्क के संवेदक राजमणि इंटरप्राइजेज की संविदा को आदित्यपुर नगर निगम के नगर आयुक्त एजाज अहमद द्वारा रद्द करने का निर्देश दिया गया है। जो की आदित्यपुर क्षेत्र में अलग ही एक चर्चा का विषय बना हुआ है। हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है कि आखिर संवेदक राजमणि इंटरप्राइजेज की संविदा को रद्द करने का कारण क्या है आखिर क्यों रद्द किया गया।
आपको बताते चलें कि उक्त पार्क का इस्तेमाल सदियों, पार्टियों, रक्तदान शिविर, राजनीतिक पार्टियों की बैठक इत्यादि इसी तरह के और भी कई कार्यक्रम के आयोजन के लिए इस पार्क का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए पर्याप्त राशि अटल पार्क द्वारा लीया जाता है। इसके अलावा इस पार्क में व्यायाम के भी कुछ उपकरण लगाए गए हैं जिसके इस्तेमाल बच्चे बूढ़े बुजुर्ग युवा सभी करते हैं।
यह रहा मामला:-
मामले के संबंध में मेरी जानकारी के अनुसार संवेदक राजमणि इंटरप्राइजेज को 3 वर्षों के लिए उक्त पार्क के संचालन का ठेका दिया गया था लेकिन संवेदक द्वारा दूसरे वर्ष की राशि जमा नहीं की गई। साथ ही जीएसटी बिल भी जमा नहीं किया गया। जिसके लिए कई बार संवेदक को चेतावनी के साथ नोटिस भी दिया गया जिस पर संवेदक द्वारा किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। सूत्रों द्वारा खबर यह भी मिल रही है कि अब संवेदक को काली सूची ( BLACKLIST ) में भी डाल दिया जाएगा।
इतना ही नहीं आदित्यपुर नगर निगम के आयुक्त द्वारा संवेदक राजमणि इंटरप्राइजेज की जमानत राशि लगभग 6 लख रुपए जप्त करने का निर्देश भी दिया है।
इस मामले पर सूत्र बताते हैं कि उक्त पार्क का ठेका द प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने राजमणि इंटरप्राइजेज के नाम पर 3 वर्षों के लिए लिया था लेकिन दूसरे वर्ष की राशि जमा करने में वह असफल रहे जिसकी वजह से नगर निगम के आयुक्त द्वारा उनकी संविदा रद्द करने का निर्देश दिया है। यह कहीं ना कहीं अपने आप में एक असफलता की निशानी प्रतीत हो रही है।