परिसदन सभागार सरायकेला में झारखंड विधानसभा की प्राक्कलन समिति की अध्यक्षता में विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक संपन्न।

परिसदन सभागार सरायकेला में झारखंड विधानसभा की प्राक्कलन समिति की अध्यक्षता में विकास योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक संपन्न।

सरायकेला-खरसावां

झारखंड विधानसभा की प्राक्कलन समिति का सरायकेला-खरसावां जिले में दौरा हुआ। इस क्रम में सरायकेला परिसदन सभागार में समिति के माननीय सभापति हेमलाल मुर्मू की अध्यक्षता में जिले में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं एवं विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के माननीय सदस्य नागेंद्र महतो, माननीय सदस्य मथुरा प्रसाद महतो एवं माननीय सदस्य सोमेश सोरेन उपस्थित रहे तथा सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक श्री दशरथ गागराई उपस्थित रहे।

बैठक से पूर्व समिति के माननीय सभापति एवं माननीय सदस्यों, माननीय विधायक का उपायुक्त नितिश कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वांगीयारी द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। साथ ही परियोजना निदेशक, ITDA उषा मुंडू, अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार समेत विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में विभिन्न विकास योजनाओं की समीक्षा के क्रम में संबंधित विभागों के पदाधिकारियों एवं कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया कि जिले में संचालित योजनाओं की समुचित जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों, यथा माननीय विधायक एवं माननीय सांसद को भी उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि उनके स्तर से भी समय-समय पर योजनाओं की समीक्षा की जा सके तथा योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा सकें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का यथाशीघ्र स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उद्घाटन एवं नई योजनाओं का शिलान्यास कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।

लंबित योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए सभी कार्यदायी एजेंसियों के कार्यपालक अभियंताओं को योजनाओं की नियमित निगरानी करने तथा जवाबदेही तय करते हुए कार्यों को निश्चित समय में पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया।

सभी कार्यपालक अभियंताओं को लंबित योजनाओं पर विशेष निगरानी रखने, संवेदकों के साथ नियमित बैठक करने तथा योजनाओं का स्थल निरीक्षण कर कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। राज्य संपोषित योजनाओं में निर्धारित समय-सीमा से विलंबित कार्यों को दिसंबर माह तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, ऐसे संवेदक जिनके द्वारा विभिन्न विभागों में आवंटित कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण नहीं किए जा रहे हैं अथवा अनावश्यक विलंब किया जा रहा है, उन्हें आगामी योजनाओं में कार्य नहीं देने तथा विभागीय दिशा-निर्देशों के आलोक में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

जिन योजनाओं में काफी विलंब से कार्य संचालित हैं, उनके संबंध में संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंताओं को कार्यशैली में सुधार लाने, संवेदकों के साथ समन्वय स्थापित कर योजनाओं को यथाशीघ्र पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया। साथ ही, ऐसी योजनाओं की उपायुक्त स्तर से नियमित समीक्षा करते हुए आवश्यक ठोस निर्णय लेने एवं लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

खनन एवं भूतत्व की समीक्षा के क्रम में खनन गतिविधियों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित ग्राम एवं टोलों का नियमानुसार विकास सुनिश्चित करने तथा अवैध खनन एवं परिचालन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

पर्यटन विकास की समीक्षा के क्रम में जिले में पर्यटन विकास की दिशा में सकारात्मक पहल करने तथा पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के अनुरूप आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के क्रम में सदर अस्पताल, सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक एवं आवश्यक दल-बल के साथ उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों को सुगम एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएं, यह सुनिश्चित करने को कहा गया। मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना समेत सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ योग्य लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

स्कूली शिक्षा विभाग की समीक्षा के क्रम में विद्यालयों में खेल-खेल में शिक्षा, स्वच्छता एवं बच्चों को गुड बिहेवियर का ज्ञान देने की दिशा में आवश्यक पहल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों की समीक्षा के क्रम में निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूर्ण करने तथा विभाग की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पात्र लाभुकों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। लंबित कार्यों एवं योजनाओं में अनावश्यक विलंब नहीं हो, कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों तथा योजनाओं के निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित हो, इस दिशा में विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

बैठक के अंत में अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार द्वारा माननीय सभापति एवं समिति के अन्य माननीय सदस्यों द्वारा विभिन्न विभागों की समीक्षा के क्रम में दिए गए दिशा-निर्देशों एवं सुधार संबंधी बिंदुओं पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आश्वस्त किया गया। साथ ही, समिति को अनुपालन से अवगत कराने की बात कही गई।

तीन दिन की बैंक महा हड़ताल :पांच-दिवसीय बैंकिंग से कर्मचारियों के बढ़ते बोझ तक -सरकार,बैंककर्मी और जनता के बीच क्यों गहराया टकराव?

तीन दिन की बैंक महा हड़ताल :पांच-दिवसीय बैंकिंग से कर्मचारियों के बढ़ते बोझ तक -सरकार,बैंककर्मी और जनता के बीच क्यों गहराया टकराव?

राष्ट्रव्यापी बैंक महाहड़ताल 28-30 सितंबर 2026: क्या थमेगी देश की वित्तीय धड़कन? -8 लाख कर्मचारी आंदोलन की राह पर -जनता -कारोबार और अर्थव्यवस्था पर कितना असर? 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन का बड़ा अल्टीमेटम -समग्र व्यापक विश्लेषण

भारतीय बैंकिंग के सामने बड़ा सवाल -काम का बढ़ता बोझ या कर्मचारियों की घटती ताकत? 8 लाख बैंक कर्मियों की 3 दिवसीय बैंक महा हड़ताल ने खोली भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की बड़ी बहस -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत का मामला गूंज उठा हैक़ि बैंकिंग क्षेत्र 28 से 30 सितंबर 2026 के बीच एक बड़े औद्योगिक टकराव की दहलीज पर खड़ा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है और मांगों का समाधान नहीं होने पर 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी भी दी है।यूएफबीयू सात बैंक यूनियनों का साझा मंच है औरउसके अनुसार लगभग आठ लाख कर्मचारी- अधिकारी तथा बैंकिंग कार्यबल का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा उसके दायरे में आता है।यह आंदोलन इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि 30 सितंबर बैंकों की छमाही लेखा- बंदी का दिन है। ऐसे समय में लगातार तीन कार्यदिवस शाखा-स्तरीय गतिविधियों में व्यवधान का असर केवल बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों तक सीमित न रहकर व्यापार, चेक निपटान, नकदी प्रबंधन,ऋण संबंधी प्रक्रियाओं और व्यापक वित्तीय गतिविधियों तक पहुंच सकता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं  गोंदिया महाराष्ट्र मीडिया में आई खबरों के अनुसार बताना चाहूंगा क़ि,हड़ताल के केंद्र में सबसे बड़ी मांग पांच-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की है। वर्तमान व्यवस्था में बैंक दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं, जबकि पहले, तीसरे और जहां लागू हो पांचवें शनिवार को शाखाएं खुलती हैं।यूनियनें सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की मांग कर रही हैं।उनका तर्क है कि सोमवार से शुक्रवार तक दैनिक कार्य- अवधि बढ़ाकर इसकी भरपाई की जा सकती है,जिससे ग्राहकों के लिए कुल बैंकिंग समय में उल्लेखनीय कमी आवश्यक नहीं होगी। मार्च 2024 के वेतन संशोधन समझौते के दौरान भारतीय बैंक संघ और यूनियनों के बीच पांच-दिवसीय बैंकिंग पर सहमति बनी और प्रस्ताव सरकारी स्वीकृति के लिए भेजा गया था; लेकिन अंतिम सरकारी मंजूरी और आवश्यक अधिसूचना अभी लंबित है। यही वह बिंदु है जहां दोनों पक्षों की व्याख्या अलग हो जाती है,यूनियनें इसे सहमत मांग के क्रियान्वयन में दो वर्ष से अधिक की देरी मानती हैं,जबकि सरकार का कहना है कि प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम निर्णय के लिए विभिन्न हितधारकों के पहलुओं को देखना आवश्यक है।

साथियों, विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा प्रदर्शन- आधारित प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई रहा है।वर्ष 2020 के वेतन समझौते से जुड़ी प्रोत्साहन व्यवस्था के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के लिए संशोधित योजना को लेकर अधिकारी संगठनों ने आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने पीएलआई योजना को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्रालय ने 21 सितंबर को स्पष्ट किया कि यूनियनों की दो प्रमुख मांगों पांच- दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई वापस लेने,में से पीएलआई को स्थगित करके एक प्रमुख मुद्दे कासमाधान किया जा चुका है;अब मुख्य विवाद पांच- दिवसीय कार्य सप्ताह पर केंद्रित है। सरकार ने यूनियनों से आंदोलन स्थगित कर बातचीत जारी रखने की अपील भी की है।  पेंशन संशोधन, समान पेंशन व्यवस्था तथा कर्मचारियों की कुछ अन्य सेवा-शर्तें भी व्यापक श्रमिक असंतोष का हिस्सा रही हैं।

साथियों, इस आंदोलन के पीछे कार्यबल और बढ़ते काम के बोझ का प्रश्न भी गंभीर है।सरकारी आँकड़ों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों की संख्या 2020- 21 में लगभग 7.90 लाख थी,जो 2024- 25 में घटकर करीब 7.58 लाख रह गई, अर्थात लगभग 32 हजार अथवा करीब 4 प्रतिशत की कमी।जून 2025 तक इन बैंकों में 32,567 पद रिक्त थे,जिनमें 17,500 अधिकारी 12,861 लिपिक और 2,206 अधीनस्थ कर्मचारी पद शामिल थे।हालांकि सरकार का पक्ष है कि आवश्यक कार्यबल का लगभग 96 प्रतिशत उपलब्ध था, पिछले पांच वर्षों में 1,48,687 कर्मचारियों की भर्ती की गई और 2025-26 के लिए 48,570 कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। इसलिए कर्मचारियों की कमी के प्रश्न पर भी दो दृष्टिकोण हैं,यूनियनें बढ़ते कारोबार और लक्ष्य के मुकाबले अपर्याप्त मानव संसाधन का मुद्दा उठाती हैं,जबकि सरकार उपलब्ध कार्यबल और जारी भर्तियों की ओर संकेत करती है।
साथियों,बैंक कर्मचारियों के मानसिक दबाव का मुद्दा फरवरी 2026 में राज्यसभा तक पहुंचा था। केरल से सीपीआई (एम) सांसद ने सदन में दावा किया कि पिछले एक दशक में काम के दबाव,उत्पीड़न और अत्यधिक लक्ष्यों जैसी परिस्थितियों से जुड़े मामलों में करीब 500 बैंक कर्मचारियों ने आत्महत्या की।उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हजारों रिक्त पदों और कर्मचारियों पर बढ़ते दबाव का भी उल्लेख किया तथा गुजरात, तमिलनाडु और केरल के कुछ मामलों का उदाहरण दिया।यहां सावधानी आवश्यक है,करीब 500 आत्महत्याओं की संख्या को आरबीआई अथवा सरकार द्वारा जारी प्रमाणित राष्ट्रीय आधिकारिक आँकड़े के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा; यह संसद में सांसद द्वारा उठाया गया दावा है,जिसकी पृष्ठभूमि में बैंक कर्मचारियों की कार्यस्थितियों पर पहले प्रकाशित रिपोर्टें भी रही हैं।

साथियों, तीन दिवसीय हड़ताल का सर्वाधिक प्रत्यक्ष प्रभाव सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में दिखाई देने की संभावना है।नकद जमा-निकासी,चेक समाशोधन खाते से संबंधित दस्तावेजी कार्य,ऋण प्रक्रियाएं और शाखा- आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।30 सितंबर छमाही समापन का दिन होने के कारण लेखा- मिलान,प्रावधान तथा कोष और बाजार संबंधी गतिविधियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि इसका अर्थ पूरे भारतीय बैंकिंग तंत्र का ठप हो जाना नहीं है। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाओं के सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की अपेक्षा है।निजी बैंकों पर प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहने की संभावना है, हालांकि जिन निजी बैंकों में संबंधित यूनियनों के सदस्य हैं वहां कुछ स्थानीय व्यवधान संभव है। सहकारी बैंकों पर प्रभाव भी उनकी यूनियन-संबद्धता और स्थानीय भागीदारी पर निर्भर करेगा; अतः सभी निजी और सहकारी बैंक स्वतः तीन दिन बंद रहेंगे, ऐसा कहना सही नहीं होगा।

साथियों सरकार ने संभावित परेशानी कम करने के लिए एक असाधारण कदम उठाते हुए रविवार 27 सितंबर 2026 को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सामान्य रूप से खोलने का निर्णय लिया रविवार को बैंक के खुली रही। रिजर्व बैंक ने शाखाओं, कार्यालयों, एटीएम से संबद्ध शाखाओं और मुद्रा-कोषों को पूर्ण संचालन की अनुमति दी थीं।सरकार का तर्क था कि 26 सितंबर के सप्ताहांत अवकाश और 28-30 सितंबर की प्रस्तावित हड़ताल के बीच रविवार भी बंद रहने पर जनता को लंबी अवधि तक शाखा सेवाओं में व्यवधान झेलना पड़ सकता था। लेकिन इस निर्णय का कर्मचारी संगठनों के एक हिस्से ने विरोध किया था।ऑल संभवतः इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से रविवार को काम पर न आने की सलाह देते हुए कहा था कि 27 सितंबर औद्योगिक व्यवस्था के तहत अवकाश का दिन है और पहले से तय सेवा-शर्तों में एकतरफा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

साथियों यह आंदोलन भारतीय बैंकिंग व्यवस्था के सामने एक व्यापक प्रश्न खड़ा करता है, जब डिजिटल बैंकिंग खातों, ऋण, सरकारी योजनाओं बीमा-वितरण और वित्तीय समावेशन के कारण बैंकों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, तब कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन और ग्राहक-सुविधा के बीच नया संतुलन कैसे बनाया जाए? पांच-दिवसीय बैंकिंग के समर्थक कहते हैं कि भारतीय बैंकिंग को अन्य आधुनिक वित्तीय संस्थानों की कार्य-संस्कृति के अनुरूप लाने का समय आ गया है; दूसरी ओर सरकार को ग्राहक पहुंच,ग्रामीण बैंकिंग, कार्य -घंटों और अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव सहित कई पक्षों का आकलन करना है।उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों से कर्मचारियों की संख्या में 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग चार प्रतिशत गिरावट जरूर दिखाई देती है, लेकिन 2026 तक बैंक खातों, मुनाफे और काम में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई” का एकल समेकित तुलनीय आरबीआई आँकड़ा उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं मिला; इसलिए अपुष्ट प्रतिशत जोड़ना उचित नहीं होगा।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरी विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यदि कहा जाए कि 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित तीन दिवसीय बैंक हड़ताल केवल शनिवार की छुट्टी का संघर्ष नहीं, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में कार्य-जीवन संतुलन, मानव संसाधन, बढ़ते कार्यभार, कर्मचारी कल्याण और ग्राहक सुविधा के बीच संतुलन की बड़ी बहस बन चुकी है, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। सरकार ने पीएलआई को स्थगित करके एक विवाद को फिलहाल शांत किया है,लेकिन पांच-दिवसीय बैंकिंग का मूल प्रश्न अभी अनसुलझा है। तीन दिवसीय हड़ताल के बाद 26 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी इस विवाद को और गंभीर बनाती है।इसलिए सरकार, भारतीय बैंक संघ और कर्मचारी संगठनों के बीच समयबद्ध समाधान केवल बैंक कर्मचारियों के हित में नहीं, बल्कि करोड़ों खाताधारकों व्यापार-जगत और भारतीय अर्थव्यवस्था की निर्बाध वित्तीय धड़कन के लिए भी आवश्यक है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

बैंक हड़ताल पर ब्रेक, यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन वापस लिया।

बैंक हड़ताल पर ब्रेक, यूनियनों ने विरोध प्रदर्शन वापस लिया।

जमशेदपुर

बैंक कर्मियों और अधिकारियों द्वारा घोषित हड़ताल अभी नहीं होगी। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बन गई, जिसके बाद हड़ताल के साथ-साथ विरोध से जुड़े सभी कार्यक्रमों को रोकने का फैसला लिया गया।

यूएफबीयू की जानकारी के मुताबिक, बैठक में पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग पर गंभीरता से विचार करने हेतु आईबीए और यूएफबीयू की एक संयुक्त उच्चस्तरीय कमेटी तुरंत बनाने पर सहमति हुई है। यह कमेटी सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर इसका हल निकालने की कोशिश करेगी।

वहीं स्केल-4 और उससे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए लागू परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम में बदलाव को लेकर आईबीए सरकार के सामने सिफारिश रखेगा। इसके अलावा 8 मार्च 2024 के समझौते में अटके हुए विषयों को जल्द निपटाने पर भी दोनों पक्षों में सहमति बनी।

वार्ता सफल रहने के बाद यूएफबीयू ने प्रस्तावित हड़ताल और आंदोलन संबंधी कार्यक्रमों को फिलहाल टाल दिया है। इस संबंध में 27 सितंबर 2026 को परिपत्र जारी किया गया। इससे बैंक स्टाफ और अधिकारियों में आंदोलन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर होने की संभावना है।

90% लाने वाला जमशेदपुर का होनहार छात्र 9वीं मंजिल से कैसे गिरा? शरीर पर चोटें कहानी से अलग, पिता ने लगाई CBI जांच की गुहार।

90% लाने वाला जमशेदपुर का होनहार छात्र 9वीं मंजिल से कैसे गिरा? शरीर पर चोटें कहानी से अलग, पिता ने लगाई CBI जांच की गुहार।

जमशेदपुर

जमशेदपुर के डीबीएमएस स्कूल से लगभग 90% अंक लाकर मणिपाल इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे लक्ष्य मिश्रा की 6-7 अप्रैल की रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कॉलेज प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी कि छात्र 9वें फ्लोर से गिर गया।

पिता का कहना है कि बेटे के शरीर पर लगी चोटें 9वें फ्लोर से गिरने से मेल नहीं खातीं। घटनास्थल पर खून का कोई निशान नहीं था। आरोप है कि फॉरेंसिक टीम के आने से पहले ही हॉस्टल के फ्लोर को धो दिया गया और शव को चादर-तकिए में लपेट दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल – हादसे के बाद बच्चे को 20 किमी दूर सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय कॉलेज के ही निजी अस्पताल में क्यों रखा गया? और हॉस्टल का अटेंडेंस रजिस्टर 5.25 बता रहा है जबकि हॉस्पिटल का रजिस्टर 30 दिन का अटेंडेंस दिखा रहा है।

परिजनों ने कर्नाटक पुलिस से निष्पक्ष जांच और बिसरा को सुरक्षित रख कर दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों से दोबारा पोस्टमार्टम जांच की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से भी गुहार लगाई है।

साथ ही इस पुरे मामले पर पिता ने CBI जांच की गुहार लगाई है।

ईचागढ़ के बिस्टाटांड गांव में गरीबों के हक पर डाका: आवास योजना से वंचित हैं धनंजय और भजोहरि, जर्जर छतों के नीचे और हाथियों के खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं परिवार।

ईचागढ़ के बिस्टाटांड गांव में गरीबों के हक पर डाका: आवास योजना से वंचित हैं धनंजय और भजोहरि, जर्जर छतों के नीचे और हाथियों के खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं परिवार।

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो )

प्रखंड अंतर्गत बिस्टाटांड गांव से प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) गरीबों के लिए महज़ एक छलावा बनकर रह गई है। कागजों पर विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले प्रशासन की नाक के नीचे बिस्टाटांड गांव के असली जरूरतमंद आज भी नारकीय जीवन जीने को विवश हैं।
गांव के अत्यंत गरीब और लाचार ग्रामीण धनंजय महतो और भजोहरि महतो का जीवन आज गंभीर संकट में है। दोनों परिवारों के कच्चे मकान पूरी तरह से जर्जर और ढलने की कगार पर पहुंच चुके हैं। स्थिति इतनी दयनीय है कि घरों की छतें पूरी तरह टूट चुकी हैं, जिसके कारण उन्हें बारिश और धूप से बचने के लिए बांस और प्लास्टिक शीट (तिरपाल) का सहारा लेना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह पूरा इलाका हाथी प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहाँ अक्सर जंगली हाथियों का आतंक बना रहता है। ऐसे संवेदनशील और खतरनाक इलाके में जर्जर और कच्चे मकानों में रहना इन गरीब परिवारों के लिए मौत को दावत देने जैसा है। सिर पर पक्की छत न होने और हाथियों के हमले के लगातार बने रहने वाले खौफ के कारण इन परिवारों को हर पल अनहोनी का डर सताता रहता है और उनका हर दिन जान हथेली पर लेकर गुजर रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक गरीबों तक पहुंचने के बजाय, बिचौलियों और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले अपात्र लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। जरूरतमंदों के हक को ताक पर रखकर उन लोगों को आवास आवंटित किए जा रहे हैं जो आर्थिक रूप से पहले से ही सक्षम हैं, जबकि असली हकदार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

इस गंभीर मामले को लेकर बिस्टाटांड गांव के लोगों ने कई बार स्थानीय प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटे और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब तक कोई सुध नहीं ली गई है। अधिकारियों की इस गहरी उदासीनता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

अब ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके। इसके साथ ही, हाथी प्रभावित इस संवेदनशील क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पीड़ित धनंजय महतो और भजोहरि महतो को फौरन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुरक्षित पक्का मकान मुहैया कराया जाए, और इस योजना में गड़बड़ी करने वाले तथा अपात्रों को लाभ दिलाने वाले भ्रष्ट तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर : शिक्षा और समाज सुधार के महान पुरोधा।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर : शिक्षा और समाज सुधार के महान पुरोधा।

कोलकाता

भारत के सामाजिक और शैक्षिक इतिहास में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का नाम उन महान व्यक्तित्वों में लिया जाता है, जिन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया और रूढ़ियों के विरुद्ध तर्क, मानवीयता तथा सुधार का रास्ता अपनाया। उनकी जयंती पर देश उन्हें श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ याद करता है। वे केवल महान शिक्षाशास्त्री ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक, लेखक, संस्कृत विद्वान और मानवीय मूल्यों के प्रबल समर्थक थे।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर 1820 को पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के वीरसिंह गांव में हुआ था। उनका मूल नाम ईश्वर चंद्र बंद्योपाध्याय था। साधारण आर्थिक परिस्थितियों में पले-बढ़े ईश्वर चंद्र ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और अध्ययन के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण प्रतिष्ठा प्राप्त की। संस्कृत के गहन ज्ञान के कारण उन्हें ‘विद्यासागर’ की उपाधि मिली, जिसका अर्थ है—‘विद्या का सागर’।

उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां प्रतिभा और संकल्प के मार्ग में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। उन्होंने शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन न मानकर समाज को जागरूक और सशक्त बनाने का माध्यम माना। विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण अपने समय से काफी आगे था। उन्होंने महिला शिक्षा को सामाजिक विकास के लिए आवश्यक माना और बालिकाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना तथा उनके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का सबसे महत्वपूर्ण योगदान सामाजिक सुधार के क्षेत्र में माना जाता है। उस समय हिंदू समाज में विधवा महिलाओं की स्थिति अत्यंत कठिन थी। बाल विवाह और कम उम्र में विधवापन जैसी समस्याओं ने बड़ी संख्या में महिलाओं के जीवन को प्रभावित किया था। विद्यासागर ने विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में मजबूत सामाजिक और वैचारिक अभियान चलाया। उन्होंने शास्त्रों के अध्ययन और तर्क के आधार पर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि विधवा पुनर्विवाह का विरोध धार्मिक रूप से अनिवार्य नहीं है।उनके प्रयासों का प्रभाव व्यापक हुआ और अंततः हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह कानून भारतीय सामाजिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। हालांकि कानून बन जाना सामाजिक सोच बदलने के लिए पर्याप्त नहीं था, फिर भी विद्यासागर ने अपने प्रयासों से सुधार की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया।

बाल विवाह और महिलाओं की शिक्षा के प्रश्न पर भी उन्होंने समाज को सोचने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना था कि किसी समाज की प्रगति का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वहां महिलाओं को कितने अवसर और सम्मान प्राप्त हैं। इसी विचार के अनुरूप उन्होंने शिक्षा के प्रसार को सामाजिक सुधार से जोड़ा।शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। संस्कृत कॉलेज से जुड़े रहते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में कई सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। वे ऐसी शिक्षा के पक्षधर थे, जो केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यार्थियों में तर्क, भाषा-बोध और व्यावहारिक समझ विकसित करे। बंगाली भाषा और साहित्य के विकास में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘बर्ण परिचय’ ने बंगाली भाषा सीखने की प्रक्रिया को सरल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लंबे समय तक बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा का आधार बनी रही।विद्यासागर की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी सरलता और मानवीय संवेदना शामिल थी। वे जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे। गरीब विद्यार्थियों की मदद, शिक्षा के लिए सहयोग और वंचित वर्गों के प्रति सहानुभूति उनके व्यक्तित्व का हिस्सा थी। उनके लिए समाज सुधार केवल भाषण या लेखन का विषय नहीं था, बल्कि जीवन में उतारने वाला संकल्प था।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का व्यक्तित्व भारतीय पुनर्जागरण की उस धारा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें शिक्षा, तर्क और सामाजिक चेतना के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया। उन्होंने परंपराओं का अंधानुकरण करने के बजाय उनके सामाजिक प्रभाव पर विचार करने की आवश्यकता बताई। जहां परंपरा मानव कल्याण में सहायक थी, वहां उसका सम्मान किया और जहां सामाजिक कुरीतियां लोगों के जीवन को प्रभावित करती थीं, वहां सुधार की आवाज उठाई।

उनका जीवन आज भी शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में प्रेरणा देता है। आधुनिक भारत में जब शिक्षा को समान अवसर, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक न्याय से जोड़ा जा रहा है, तब विद्यासागर के विचार और कार्य विशेष रूप से प्रासंगिक दिखाई देते हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति और समाज में विवेक, संवेदना और जिम्मेदारी का विकास करना भी है।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि एक व्यक्ति दृढ़ इच्छाशक्ति, ज्ञान और मानवीय संवेदना के बल पर सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रख सकता है। उनका योगदान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। शिक्षा, भाषा, महिला अधिकार, सामाजिक सुधार और मानवीय सेवा—हर क्षेत्र में उन्होंने अपने समय पर गहरी छाप छोड़ी। आज उनकी जयंती पर उन्हें याद करना केवल एक महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उन मूल्यों को स्मरण करना भी है जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया।

शिक्षा का विस्तार, महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता तथा जरूरतमंदों के प्रति संवेदना—ये सभी उनके जीवन से मिलने वाली महत्वपूर्ण सीख हैं। ईश्वर चंद्र विद्यासागर भारतीय समाज सुधार आंदोलन के ऐसे पुरोधा थे, जिनकी विद्या के साथ मानवता भी उतनी ही विशाल थी। उनकी स्मृति आने वाली पीढ़ियों को यह प्रेरणा देती रहेगी कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज के कल्याण और मानव जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दे।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।

वरुण कुमार
लेखक एवं कवि

ईचागढ़ में पशुपालन विभाग की विशेष पहल: टीकर पंचायत में आयोजित हुआ आवारा कुत्तों का टीकाकरण सह जागरूकता शिविर।

ईचागढ़ में पशुपालन विभाग की विशेष पहल: टीकर पंचायत में आयोजित हुआ आवारा कुत्तों का टीकाकरण सह जागरूकता शिविर।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टीकर पंचायत सचिवालय परिसर में शनिवार को पशुपालन विभाग की ओर से एक महत्वपूर्ण और जनहितकारी कदम उठाते हुए आवारा कुत्तों का एंटी रेबीज टीकाकरण सह जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को रेबीज जैसी घातक बीमारी के प्रति सतर्क करना और आवारा श्वानों का टीकाकरण कर क्षेत्र को सुरक्षित बनाना था।

शिविर के दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को विस्तार से बताया कि आवारा कुत्तों के काटने से किस प्रकार रेबीज का संक्रमण फैलता है और इससे बचाव के लिए क्या उपाय करने चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. हरेलाल महतो ने कहा कि इन दिनों आवारा कुत्तों द्वारा इंसानों और पालतू पशुओं को काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो कि एक चिंता का विषय बनता जा रहा है।

डॉ. महतो ने ग्रामीणों को आगाह करते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को आवारा कुत्ता काट ले, तो लापरवाही बिल्कुल न बरतें और समय पर एंटी रेबीज का टीका अवश्य लगवाएं। समय पर टीका न लगाने से यह संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग की ओर से विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को एंटी रेबीज का टीका लगाया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाने और प्रशासन का सहयोग करने की जोरदार अपील की, ताकि समाज को रेबीज मुक्त बनाया जा सके।

इस विशेष जागरूकता एवं टीकाकरण शिविर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान प्रखंड प्रमुख गुरूपद मार्डी, चलंत पशु चिकित्सक डॉ. राहुल कुमार, टीकर पंचायत की मुखिया गंगामनी देवी, जेएसएलपीएस (JSLPS) के बीपीएम, रोजगार सेवक सहित बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना की।

झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर: आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह ईचागढ़ के पूर्व प्रत्याशी हरेलाल महतो ने दिया इस्तीफा।

झारखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर: आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह ईचागढ़ के पूर्व प्रत्याशी हरेलाल महतो ने दिया इस्तीफा।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ झारखंड की सियासत से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव और ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2019 तथा 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी रहे हरेलाल महतो ने आजसू पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो को भेज दिया है। उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और कयासों का दौर शुरू हो गया है।

निजी कारणों और वर्तमान परिस्थितियों का दिया हवाला
अपने त्यागपत्र में हरेलाल महतो ने पार्टी छोड़ने के पीछे मुख्य रूप से वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और कुछ निजी कारणों का हवाला दिया है। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में खुलकर विस्तृत राजनीतिक कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके इस कदम को पार्टी के भीतर एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

मजबूत सांगठनिक पकड़ और लंबा राजनीतिक सफर
हरेलाल महतो का आजसू पार्टी के संगठन में एक मजबूत और प्रभावशाली वजूद रहा है। वह वर्ष 2019 और हाल ही में संपन्न हुए 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में आजसू पार्टी के टिकट पर ईचागढ़ विधानसभा सीट से प्रमुख दावेदार और प्रत्याशी रहे थे।
ईचागढ़ के अलावा भी पार्टी संगठन ने उन्हें कई राज्यों और महत्वपूर्ण चुनावों में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं:
उपचुनावों में जिम्मेदारी: वर्ष 2019 के बाद झारखंड के विभिन्न महत्वपूर्ण विधानसभा उपचुनावों—जैसे डुमरी, रामगढ़ और घाटशिला—में उन्हें पार्टी की ओर से प्रभारी एवं सह-प्रभारी जैसी अहम जिम्मेदारी दी गई थी।

अंतर-राज्यीय चुनाव प्रबंधन: झारखंड के बाहर भी उन्होंने पार्टी का दायित्व संभाला। पश्चिम बंगाल के बाघमुंडी विधानसभा क्षेत्र में वे पार्टी के चुनाव प्रभारी रहे, वहीं ओड़िशा के पंचायत चुनावों में भी उन्होंने अपनी सांगठनिक कुशलता का लोहा मनवाया था।

अब आगे क्या? राजनीतिक भविष्य पर टिकी निगाहें
पार्टी के केंद्रीय महासचिव जैसे सर्वोच्च पदों में शुमार शख्सियत का इस्तीफा देना आजसू पार्टी के लिए एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। इस इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि हरेलाल महतो का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वे किसी अन्य राजनीतिक दल का दामन थामेंगे, अपनी कोई नई राजनीतिक रणनीति बनाएंगे या फिर कुछ समय के लिए सक्रिय राजनीति से दूरी बना लेंगे। आने वाले दिनों में उनके अगले कदम पर पूरे झारखंड, विशेषकर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों और हर राजनीतिक दल की पैनी नजर बनी रहेगी।

पीआईबी रांची द्वारा ‘वार्तालाप’ मीडिया कार्यशाला का भव्य आयोजन, पत्रकारों को किया गया सम्मानित।

पीआईबी रांची द्वारा ‘वार्तालाप’ मीडिया कार्यशाला का भव्य आयोजन, पत्रकारों को किया गया सम्मानित।

सरायकेला/आदित्यपुर

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (PIB), रांची द्वारा होटल द क्रूज, आदित्यपुर में ‘वार्तालाप’ मीडिया कार्यशाला-2026 का सफल आयोजन किया गया।

कार्यशाला का मुख्य विषय पोषण माह, स्वच्छता ही सेवा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 रहा।

कार्यक्रम में PIB रांची के अधिकारियों के साथ-साथ सरायकेला-खरसावां जिले के वरिष्ठ पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अधिकारियों ने सरकारी योजनाओं में मीडिया की भूमिका और अफवाहों से बचाव पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी पत्रकारों को प्रतिभागिता प्रमाण पत्र और PIB का विशेष स्मृति फोल्डर (वार्तालाप-2026) प्रदान किया गया। सामूहिक फोटो सत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

PIB के अधिकारियों ने सभी पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।

कवरेज — भरत सिंह, आदित्यपुर

गोलमुरी बैंक डकैती का असर: सरायकेला-खरसावां में पुलिस अलर्ट, एसपी ने बैंक शाखाओं का किया सेफ्टी ऑडिट।

गोलमुरी बैंक डकैती का असर: सरायकेला-खरसावां में पुलिस अलर्ट, एसपी ने बैंक शाखाओं का किया सेफ्टी ऑडिट।

सरायकेला/आदित्यपुर

जमशेदपुर के गोलमुरी इलाके में दिन के उजाले में हुई बैंक डकैती की घटना ने पड़ोसी जिला सरायकेला-खरसावां की पुलिस को भी चौकन्ना कर दिया है। सीमावर्ती औद्योगिक एवं शहरी क्षेत्रों में किसी भी संभावित वारदात को रोकने के लिए जिला पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है।

इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने टीम के साथ आदित्यपुर और आरआईटी थाना क्षेत्रों में स्थित कई बैंक शाखाओं का आकस्मिक दौरा कर सुरक्षा इंतजामों की गहन समीक्षा की।

जांच के दौरान एसपी ने बैंक परिसरों की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से पड़ताल की। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों की पहुंच, बैकअप व्यवस्था और आपातकालीन अलार्म सिस्टम के क्रियाशील होने की स्थिति देखी। साथ ही विभिन्न शाखाओं में तैनात प्राइवेट सुरक्षा गार्डों के हथियार लाइसेंस और असलहों की हालत की भी जांच की।

मीडिया से चर्चा में एसपी मनोज स्वर्गीयारी ने कहा, “एसडीपीओ और संबंधित थाना प्रभारियों के साथ मिलकर आदित्यपुर क्षेत्र के बैंकों का सुरक्षा ऑडिट किया गया है। बैंक अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और गश्ती दल को जरूरी सुरक्षा दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और आम नागरिक सुरक्षित रहें। यह नियमित निरीक्षण का हिस्सा था, लेकिन ताजा घटना को देखते हुए अतिरिक्त एहतियात बरता जा रहा है। आरबीआई और पुलिस विभाग के जारी सभी सुरक्षा नियमों का पूर्ण पालन अनिवार्य किया गया है।”

एसपी ने शाखा प्रबंधकों को संदिग्ध गतिविधियों और व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी आशंका की स्थिति में तुरंत स्थानीय थाने को सूचना देने के निर्देश दिए। इसके अलावा पुलिस पीसीआर और पेट्रोलिंग वाहनों को बैंकों के आसपास लगातार गश्त करने को कहा गया है।

इस औचक निरीक्षण अभियान में एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज, आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार और आरआईटी थाना प्रभारी रविकांत पाराशर प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

प्रोजेक्ट डिवाइस के तहत सरायकेला पुलिस की बड़ी कार्रवाई, गुम व चोरी के 103 मोबाइल फोन असली मालिकों को सौंपे।

प्रोजेक्ट डिवाइस के तहत सरायकेला पुलिस की बड़ी कार्रवाई, गुम व चोरी के 103 मोबाइल फोन असली मालिकों को सौंपे।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला-खरसावां पुलिस ने चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिला पुलिस की तकनीकी टीम के सहयोग से विभिन्न थानों से ट्रैक किए गए 103 मोबाइल फोन आरआईटी थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके वास्तविक धारकों को सुपुर्द किए गए। खोए हुए फोन महीनों बाद पाकर लाभार्थियों के चेहरे पर संतोष और प्रसन्नता साफ देखी गई।

इस वितरण समारोह में जिले के पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी, सरायकेला के अनुमंडल पदाधिकारी अनुभव भारद्वाज, आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार और आरआईटी थाना प्रभारी रविकांत पाराशर प्रमुख रूप से मौजूद थे।

मीडिया से बातचीत के दौरान एसपी स्वर्गियारी ने बताया कि सितंबर माह में तकनीकी शाखा और स्थानीय थानों के संयुक्त प्रयासों से कुल 103 मोबाइल फोन ढूंढकर बरामद किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में भी इस तरह की कार्रवाई कर फोन मालिकों को लौटाए गए थे, लेकिन इस बार बरामदगी का आंकड़ा अब तक का सबसे अधिक है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यह अभियान आगे भी पूर्ण सक्रियता के साथ चलाया जाएगा।

एसपी ने कहा कि चोरी या गुम हुए फोन का साइबर ठगी समेत संगठित अपराधों में दुरुपयोग होने का गंभीर खतरा रहता है। ऐसे में फोन की शीघ्र बरामदगी से साइबर अपराधों पर प्रभावी लगाम लगाने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम में अधिकारियों ने आम लोगों से आग्रह किया कि मोबाइल के खोने या चोरी होने पर तुरंत भारत सरकार के CEIR पोर्टल या संचार साथी ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराएं, जिससे फोन को तुरंत ब्लॉक व ट्रैक किया जा सके।

साप्ताहिक जनता दरबार में उपायुक्त ने सुनी आम नागरिकों की समस्याएं, संबंधित पदाधिकारियों को जांचोपरांत नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश।

साप्ताहिक जनता दरबार में उपायुक्त ने सुनी आम नागरिकों की समस्याएं, संबंधित पदाधिकारियों को जांचोपरांत नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश।

सरायकेला-खरसावां

समाहरणालय परिसर स्थित उपायुक्त कार्यालय कक्ष में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया। जनता दरबार प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को कार्यालय दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जिसमें आम नागरिकों एवं फरियादियों की समस्याओं एवं शिकायतों को सीधे सुना जाता है तथा उनके निराकरण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाती है। इसी क्रम में आज आयोजित जनता दरबार में उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए आम नागरिकों एवं फरियादियों की समस्याओं एवं शिकायतों को सुना।

जनता दरबार में छोटा गम्हरिया स्थित शराब दुकान के आसपास असामाजिक तत्वों द्वारा सड़क पर शराब का सेवन करने, छोटा गम्हरिया स्थित केरला पब्लिक स्कूल के समीप मुख्य सड़क पर नाली के पानी के अत्यधिक बहाव, गम्हरिया अंचल अंतर्गत मौजा आदित्यपुर, आशियाना मोड़ के समीप अतिक्रमित भूमि एवं दुकान पर नियमानुसार करवाई करने, आदित्यपुर रेलवे टनल के नॉर्थ साइड में नई रेलवे लाइन निर्माण कार्य के दौरान सड़क पर मिट्टी फैलने से उत्पन्न फिसलन तथा आदित्यपुर-कांड्रा सड़क के प्रथम किलोमीटर में पान दुकान चौक के समीप सड़क निर्माण के समय से बने कट एवं उससे संबंधित यातायात व्यवस्था सहित अन्य मामलों से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए।

प्राप्त शिकायतों एवं आवेदनों पर उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह द्वारा संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। संबंधित पदाधिकारियों को आवेदन हस्तांतरित करते हुए तथा आवश्यकतानुसार दूरभाष के माध्यम से मामलों से अवगत कराते हुए, संबंधित स्थलों एवं मामलों की जांच कर तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, की गई कार्रवाई से संबंधित आवेदकों को अवगत कराने हेतु भी निर्देशित किया गया।

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