प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां का वार्षिक वन भोज सह मिलन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न।

प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां का वार्षिक वन भोज सह मिलन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न।

सरायकेला/आदित्यपुर

प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां का पारिवारिक मिलन समारोह सह वार्षिक वन भोज आदित्यपुर के जयप्रकाश उद्यान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए इचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद सिंह।

आपको बताते चलें की प्रेस क्लबऑफ सरायकेला खरसावां नित्य निरंतर सामाजिक घटनाओं को उजागर करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती चली आ रही है एवं समय-समय पर तरह-तरह के कार्यक्रम का आयोजन भी प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां की ओर से आयोजित किया जाता है।

वहीं बुधवार को प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां का वार्षिक वनभोज एवं मिलन समारोह बड़े ही धूमधाम के साथ संपन्न किया गया।

उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के साथ-साथ सरायकेला खरसावां के श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर एवं सरायकेला खरसावां जिले के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पदाधिकारी अविनाश कुमार एवं नंदन उपाध्याय उपस्थित रहे इनके साथ-साथ सरायकेला खरसावां जिले के तहसील अस्तर के एवं प्रखंड स्तर के तमाम पत्रकार उक्त कार्यक्रम में उपस्थित होकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सह प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के संरक्षक अरविंद सिंह का क्लब के अध्यक्ष भरत सिंह ने पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया एवं क्लब के माध्यम से पत्रकारों को समाज में और अग्रसर होकर कार्य करने के लिए अरविंद सिंह ने शुभकामनाएं दी।

वहीं कार्यक्रम में अरविंद सिंह ने कहा कि पत्रकार समाज का एक आईना है पत्रकार भारत देश का चौथा स्तंभ ही नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण अंग भी है जिसके बिना यह समाज अधूरा है पत्रकार ही है जो ठंड हो गर्मी हो या बरसात हो अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटकर हर एक मुश्किल घड़ी में समाज में घट रही घटनाओं को उजागर करते हैं एवं हम सभी तक पहुंचाते हैं जिसमें पत्रकारों को काफी तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है लेकिन फिर भी पत्रकार अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हैं।

आगे उन्होंने कहा कि कई ऐसी जानकारियां हैं कई ऐसी सूचनाएं हैं जो हमें पत्रकारों के माध्यम से ही प्राप्त होती है उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की भी जानकारी हमें पत्रकारों के माध्यम से ही प्राप्त होती है और तभी हम उन योजनाओं का लाभ ले पाते हैं और अगर किसी को योजनाओं का लाभ न मिल रहा हो तो उसकी खबर भी हमें पत्रकारों से ही प्राप्त होती है एवं पत्रकार ही दवे कुचले लोगों की समस्याओं को ऊंचे स्तर के अधिकारी एवं सरकार तक पहुंचने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इंडिया से भारत नाम परिवर्तन प्राइवेट मेंबर बिल 2025 – संवैधानिक प्रावधानों,ऐतिहासिक आधारों और सांस्कृतिक पहचान का समग्र विश्लेषण

इंडिया से भारत नाम परिवर्तन प्राइवेट मेंबर बिल 2025 – संवैधानिक प्रावधानों,ऐतिहासिक आधारों और सांस्कृतिक पहचान का समग्र विश्लेषण

भारत नाम प्रस्ताव देश की आत्मा, ऐतिहासिक पहचान और समकालीन राष्ट्रीयता के बीच एक संवाद स्थापित करता है।

भारत नाम वेदों,पुराणों, महाभारत और कूटनीतिक साहित्य में हजारों वर्षों से मौजूद है,जो केवल एक नाम नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर यह गूंज उठना शुरू हुई है क़ि भारत का नाम क्या होना चाहिए,इंडिया या भारत यह प्रश्न भारतीय राजनीतिक इतिहास में भी समय-समय पर चर्चा का विषय रहा है। दिसंबर 2025 के शीतकालीन सत्र में जयपुर से एक सांसद द्वारा एक महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में यह प्रस्ताव फिर से संसद के केंद्र में आ गया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत कहा है। इस प्रस्ताव ने न केवल संसद बल्कि विशेषज्ञों,इतिहासकारों, संवैधानिक विद्वानों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी एक नई बहस को जन्म दिया है। प्रस्ताव में कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई तर्क प्रस्तुत किए गए,जिनके आधार पर भारत को राष्ट्र का एकमात्र आधिकारिक नाम घोषित करने की मांग उठाई गई है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि प्रस्ताव देश की आत्मा ऐतिहासिक पहचान और समकालीन राष्ट्रीयता के बीच एक संवाद स्थापित करता है।इस प्रस्ताव के अनुसार, यह तथ्य सर्वविदित है कि भारतीय उपमहाद्वीप को सदियों से विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग- अलग नामों से जाना जाता रहा है,सिंधु घाटी सभ्यता के कारण इंडस, फ़ारसी भाषाई प्रभाव के कारण हिंदोस से हिंदुस्तान, और वैदिक परंपरा के मूल में भारत नाम।भारत शब्द का उल्लेख वेदों पुराणों उपनिषदों से लेकर महाभारत और कूटनीतिक साहित्य तक प्राचीन काल से मिलता है।प्रस्ताव का पहला मुख्य तर्क यही है कि भारत वह प्राचीन, सभ्यतागत और सांस्कृतिक नाम है, जिससे यह भूमि सहस्राब्दियों से पहचानी जाती रही है। संसद में दिए गए वक्तव्य में कहा गया कि जिस देश को हम सदियों से मदर इंडिया या मदर लैंड कहते रहे हैं, उसका वास्तविक, ऐतिहासिक और साहित्यिक नाम भारत ही है।दिसंबर 2025 में जयपुर से एक सांसद द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में एक महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह प्रस्ताव रखा गया कि राष्ट्र का नाम इंडिया से बदलकर भारत कर दिया जाए। यह प्रस्ताव केवल भाषाई या शब्दावली परिवर्तन नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, औपनिवेशिक इतिहास, संवैधानिक प्राथमिकताओं और सांस्कृतिक आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है।बिल में कई संरचनात्मक तर्क,ऐतिहासिक साक्ष्य अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और संविधान आधारित प्रावधान शामिल किए गए, जो भारत को राष्ट्र का एकमात्र आधिकारिक नाम घोषित करने की मांग करते हैं।मैं इस लेख के माध्यम से इस बिल के मुख्य प्रावधानों, ऐतिहासिक दावों, तर्कों और उनके प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
साथियों बात अगर हम भारत नाम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ें इसको समझने की करें तो,बिल के प्रारंभिक भाग में यह उल्लेख किया गया है कि जिस देश को हम सदियों से भारतवर्ष कहते आए हैं, उसका मूल नाम भारत ही है। बिल के अनुसार, यह नाम वेदों, पुराणों, महाभारत और कूटनीतिक साहित्य में हजारों वर्षों से मौजूद है। ब्रिटिश शासनकाल से पूर्व अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, विद्वानों और इतिहासकारों ने इस भूमि को भारत के रूप में ही संबोधित किया।बिल का तर्क है कि भारत शब्द केवल एक नाम नहीं बल्कि सभ्यता की आत्मा, सांस्कृतिक मूल्यों आध्यात्मिक दर्शन और राष्ट्रीय पहचान का प्रतिनिधि है।बिल में यह स्पष्ट किया गया है कि इंडिया शब्द का औपचारिक उपयोग कॉलोनियल पीरियड में बढ़ा और ब्रिटिश प्रशासन ने इसे सरकारी दस्तावेज़ों में मानक रूप में स्थापित कर दिया।हालाँकि भारतीय समाज ने हमेशा साहित्य, संस्कृति, धर्म और दार्शनिक परंपरा में भारत शब्द का ही उपयोग किया। बिल में कहा गया है कि आज़ादी के 78 वर्ष बाद भी औपनिवेशिक शब्दावली का उपयोग करना एक राष्ट्रीय विसंगति है, जिसे सुधारने का यही उचित समय है।

साथियों बात अगर हम संविधान का अनुच्छेद 1 और बिल का मुख्य संवैधानिक आधार इसको समझने की करें तो बिल का सबसे महत्वपूर्ण आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 है जिसमें लिखा है:“इंडिया, दैट इज भारत, शैल बी ए यूनियन ऑफ़ स्टेट्स”बिल में कहा गया:
संविधान ने भारत को मूल नाम और इंडिया को अनुवाद या वैकल्पिक नाम के रूप में रखा।हिंदी संस्करण और कई भारतीय भाषाओं के स्वीकृत संस्करणों में राष्ट्र का नाम भारत ही है।संविधान की व्याख्या के अनुसार, जब कोई एक नाम मूल है, तो राष्ट्रीय सम्मान, दस्तावेज़ों, सरकारी संचार और अंतरराष्ट्रीय पहचान में वही नाम प्राथमिक होना चाहिए। बिल में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि आवश्यकता होने पर संविधान के अंग्रेज़ी अनुवाद में संशोधन किया जाए ताकि इंडिया शब्द को हटाकर केवल भारत नाम ही सभी दस्तावेज़ों में प्रयोग किया जाए।

साथियों बात अगर हम बिल में शामिल प्रस्तावित प्रावधानों को समझने की करें तो,बिल में निम्नलिखित मुख्य प्रावधानों का उल्लेख किया गया है: (अ) राष्ट्र का एकमात्र आधिकारिक नाम भारत घोषित किया जाए।यह प्रावधान कहता है किसरकारी दस्तावेज़, पासपोर्ट, मुद्रा, कोर्ट रिकॉर्ड, राजपत्र, मंत्रालयों के नाम, विदेश मंत्रालय के दस्तावेज़ अंतरराष्ट्रीय समझौते सबमें केवल“भारत” लिखा जाए। “रिपब्लिक ऑफ़ इंडिया” को बदलकर “रिपब्लिक ऑफ़ भारत” या “भारत गणराज्य” कियाजाए (ब) सभी संवैधानिक और गैर-संवैधानिक दस्तावेज़ों में इंडिया शब्द का उपयोगचरणबद्ध तरीके से बंद हो। बिल में 3 वर्षों की संक्रमण अवधि का प्रस्ताव रखा गया है।इस अवधि में सरकारी एजेंसियाँ अपने दस्तावेज़ वेबसाइट,साइनेज और एम्बलम अपडेट करेंगी। (क़) स्कूल, विश्वविद्यालय और अन्य अकादमिक पाठ्यक्रमों में भारत नाम को मानक रूप में लागू किया जाए।इतिहास, राजनीति, भूगोल और नागरिक शास्त्र की पुस्तकों में भारत का ही उपयोग हो।सीबीएसई, एनसीईआरटी तथा यूजीसी को निर्देश जारी करने का प्रस्ताव। (ड)अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भारत का आधिकारिक नाम भारतके रूप में दर्ज कराया जाए।यूएन आईएमफ, वर्ल्ड बैंक,डब्लूटीओ यूनेस्को आदि में नाम अपडेशन का प्रस्ताव। (ई) संविधान के अंग्रेज़ी अनुवाद में संशोधन करके इंडिया शब्द को हटाया जाए।सभी आधिकारिकअनुवादों में प्राथमिकता भारत को दी जाए। (फ़) नागरिकों और वैश्विक मंचों पर भी राष्ट्र का एकीकृत नाम उपयोग में लाया जाए।बिल कहता है कि “एक स्वतंत्र राष्ट्र को एक ही पहचान और एक ही नाम होना चाहिए।”इन प्रावधानों का उद्देश्य राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को एकीकृतकरना और औपनिवेशिक अवशेषों से छुटकारा पाना है।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

साथियों बात अगर हम शहरों के नाम बदले जा सकते हैं, तो राष्ट्र का क्यों नहीं? इसको समझने की करें तो,बिल में यह बेहद मजबूत तर्क दिया गया कि भारत ने पिछले वर्षों में शहरों और राज्यों के नाम उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप में बदले, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, प्रयागराज, गुरुग्राम इत्यादि।तो सवाल यह है कि यदि शहरों और स्थानों के नाम उनके सांस्कृतिक मूल के अनुरूप बदले जा सकते हैं, तो देश के नाम को उसके मूल स्वरूप भारत में क्यों नहींलौटाया जाए? इस तर्क के अनुसार, यदि स्थानों के औपनिवेशिक नाम बदले जा सकते हैं, तो देश के नाम पर भी समान सिद्धांत लागू होना चाहिए।संस्कृति, सभ्यता और भारत की पहचान बिल का चौथा तर्क सांस्कृतिक और सभ्यतागत आयाम पर केंद्रित है। प्रस्ताव में कहा गया,भारत शब्द में हजारों वर्षों के धार्मिक, सामाजिक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मूल्यों की परंपरा निहित है।महाभारत,विष्णु पुराण और अन्य ग्रंथों मेंभारतवर्ष का उल्लेख मिलता है।सभ्यता और संस्कृति का वास्तविक प्रतीक भारत है,न कि इंडिया इस परिप्रेक्ष्य में बिल स्पष्ट करता है कि भारत मात्र एक नाम नहीं बल्कि एक निरंतर सभ्यता की पहचान है,जो समयराजनीति और राजवंशों से परे है।अंग्रेज़ी अनुवाद में विसंगति और सुधार का प्रस्ताव,बिल में कहा गया है कि अंग्रेज़ीट्रांसलेशन की वजह से इंडिया शब्द प्रशासनिक रूप से प्रमुख हो गया।बिल काप्रस्ताव अंग्रेज़ी अनुवाद समिति बनाई जाए।यह समिति संविधान एवं अन्यकानूनी दस्तावेज़ों के अंग्रेज़ी संस्करण को भारत नाम के अनुरूप परिवर्तित करेगी।

साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय संदर्भ,विश्व साहित्य में भारत का उल्लेख इसको समझने की करें तो बिल के अनुसार:जर्मनी ने 1800 के दशक में भारत को भारत कहा था।कई अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, ह्वेनसांग मेगास्थनीज़, फाह्यान, अल-बिरूनी,ने भारत को एक एकीकृत सांस्कृतिक इकाई भारतवर्ष कहा है।विश्व साहित्य तथा विदेशी शोधों में भी यह शब्द अक्सर मिलता है।इस तर्क के अनुसार,भारत कीअंतरराष्ट्रीय पहचान ऐतिहासिक रूप से भारत शब्द के साथ अधिक संगत बैठती है। स्वतंत्र राष्ट्र के लिए एक नाम की आवश्यकता है बिल के अंतिम तर्क में कहा गया:एक स्वतंत्र राष्ट्र को अपनी पहचान के लिए एक ही नाम रखना चाहिए।इंडिया और भारत दोनों नामों का समानांतर उपयोग भ्रम पैदा करता है।संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर एक ही नाम से जाना जाना अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करता है।इस दृष्टिकोण से बिल यह मांग करता है कि स्वतंत्र भारत को, संवैधानिक मान्यता प्राप्त नाम भारत के आधार पर अपनी पहचान तय करनी चाहिए।
साथियों बात अगर हम इंडिया का नाम भारत होने के संभावित फायदे और नुकसान इसको समझने की करें तो इसके मुख्य फायदे यह माने जाते हैं कि भारत नाम राष्ट्र की प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक विरासत और स्वदेशी पहचान को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान सुदृढ़ हो सकती है, जैसे नेपाल या ईरान ने अपने पारंपरिक नामों को अपनाकर किया।इसके अतिरिक्त भारत नाम संवैधानिक रूप से पहले से मान्य है, जिससे घरेलू स्तर पर आत्मगौरव और सांस्कृतिक एकरूपता की भावना मजबूत हो सकती है।हालाँकि, इसके नुकसान भी व्यावहारिक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक व्यापार, कूटनीति, पासपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय संधियों, निवेश दस्तावेजों और ब्रांडिंग में इंडिया नाम लंबे समय से स्थापित है। इसे बदलने से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक व्यय, दस्तावेजों के पुनर्लेखन की लागत और अस्थायी भ्रम उत्पन्न हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार साझेदारों के लिए भी संक्रमण काल चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा,इंडिया ब्रांडवैश्विक अर्थव्यवस्था में एक स्थिरपहचान रखता है; अचानक परिवर्तन विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पुरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि,भारत नाम परिवर्तन बिल केवल शब्द परिवर्तन का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि यह उस गहरे प्रश्न से संबंधित है कि आख़िर भारत अपनी राष्ट्रीय पहचान को कैसे प्रस्तुत करना चाहता है?प्रस्ताव में ऐतिहासिकता, सांस्कृतिक निरंतरता, संविधान, अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और औपनिवेशिक विरासत सभी तत्व शामिल हैं।यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो भारत की पहचान विश्व मंच पर एक प्राचीन सभ्यता आधारित राष्ट्र के रूप में और अधिक सशक्त होगी।यदि यह प्रस्ताव आगे बहस के लिए भेजा जाता है, तो यह आने वाले वर्षों में राजनीतिक, संवैधानिक और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र रहेगा।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 92841414252

शून्य काल में विधायक संजीव सरदार ने उठाई टाटा स्टील के सीएसआर से स्थायी नागरिक सुविधा की मांग।

शून्य काल में विधायक संजीव सरदार ने उठाई टाटा स्टील के सीएसआर से स्थायी नागरिक सुविधा की मांग।

पोटका क्षेत्र के 20 पंचायतों के लगभग एक लाख लोगों को मिलेगा लाभ, पंचायत प्रतिनिधियों के आग्रह पर सदन में गूंजा मुद्दा।

पूर्वी सिंहभूम-जमशेदपुर

पंचायत प्रतिनिधियों के आग्रह पर पोटका विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार ने विधानसभा सत्र के दौरान शून्य काल में अपने क्षेत्र की ज्वलंत समस्या को जोरदार ढंग से उठाते हुए टाटा स्टील के सीएसआर मद से स्थायी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग सरकार के समक्ष रखी।

उन्होंने बताया कि पोटका क्षेत्र अंतर्गत बागबेड़ा, कीताडीह, घाघीडीह, करनडीह, पुड़ीहासा, केरूवाडूंगरी, वयांगिल सहित 20 पंचायतों के लगभग एक लाख लोग टाटा स्टील कंपनी के 3 से 5 किलोमीटर के परिधि क्षेत्र में निवास करते हैं, लेकिन इसके बावजूद इन्हें अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।

विधायक ने सदन में कहा कि इन पंचायतों में टाटा ग्रुप में कार्यरत स्थायी, अस्थायी एवं ठेका मजदूर बड़ी संख्या में निवास करते हैं, परंतु कंपनी की ओर से यहां पेयजल, सफाई और बिजली जैसी नागरिक सुविधाएं स्थायी रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे आम ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि झारखंड सरकार द्वारा टाटा स्टील के लीज नवीकरण से पूर्व संबंधित क्षेत्रों में सीएसआर के तहत स्थायी नागरिक सुविधा बहाल की जाए, ताकि वर्षों से समस्याओं से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सके।

पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा था मांग पत्र

विदित हो कि बीते शनिवार को बागबेड़ा जिला परिषद सदस्य किशोर यादव के नेतृत्व में मुखिया मायावती टुडू, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता एवं वार्ड सदस्य राजू ठाकुर ने संयुक्त रूप से विधायक संजीव सरदार से मुलाकात कर इस विषय में मांग पत्र सौंपा था। मांग पत्र में मुख्य रूप से बागबेड़ा, कीताडीह और घाघीडीह क्षेत्र के 15 पंचायतों में सीएसआर मद से स्थायी नागरिक सुविधा बहाल करने की मांग की गई थी।

प्रतिनिधिमंडल ने विधायक से आग्रह किया था कि इस मुद्दे को विधानसभा पटल पर उठाया जाए, ताकि सरकार एवं कंपनी का ध्यान क्षेत्र की गंभीर समस्याओं की ओर आकृष्ट हो सके। इसी आग्रह के आलोक में विधायक संजीव सरदार ने सदन में मामला रखकर क्षेत्रवासियों की आवाज बुलंद की।

पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने जताया आभार

विधानसभा में मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाने पर जिला पार्षद किशोर यादव, मुखिया मायावती टुडू, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता एवं वार्ड सदस्य राजू ठाकुर ने विधायक संजीव सरदार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधायक द्वारा इस पहल से पोटका क्षेत्र के लाखो लोगों को स्थायी नागरिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी है, जो वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जागरूकता अभियान का आयोजन।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जागरूकता अभियान का आयोजन।

सरायकेला/ईचागढ़

( मालखान महतो)
जिला विधिक सेवा प्राधिकार सरायकेला खरसावां के सचिव तौसीफ मेराज के निर्देशानुसार ईचागढ़ प्रखण्ड अंतर्गत पंचायत गौरांगकोचा के कालिंदी बस्ती में एचआईंवी और एड्स के रोकथाम एवं नियंत्रण पर जागरूकता कार्यक्रम किया गया। पीएलवी गंगा सागर पाल ने बताया कि एचआईवी एक्ट 2017 के अंतर्गत एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार से भेद -भाव नहीं करना चाहिए।

इस बीमारी के प्रति विशेष रूप से छात्र जीवन में जागरूक होना बहुत जरूरी है ताकि देश के युवाओं को बचाया जा सके। इसके भिन्न – भिन्न परिणाम के बारे मे सचेत किया गया साथ ही एचआईवी एड्स को लेकर सामाजिक विसंगतियों के दुष्परिणाम के विषय मे विस्तृत जानकारी दिए। उन्होंने ने युवा पीढ़ी से इस कलंकित बीमारी को खत्म करने के लिए आगे आने की अपील किया। मौके में पीएलवी गंगा सागर पाल,दिगम्बर महतो, इशिता उरांव, तुष्ट रानी मंडल, निर्मल घोष, आदि ग्रामीण मौजूद थे।

वन दोहन का लगाया आरोप, ग्राम सभाओं की अनदेखी पर नाराज़गी

वन दोहन का लगाया आरोप, ग्राम सभाओं की अनदेखी पर नाराज़गी

दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच कोल्हान का विरोध तेज

सरायकेला-खरसावां

दलमा अभ्यारण्य परिसर में प्रस्तावित ग्लास ब्रिज,रोपवे तथा अन्य पर्यटन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच ने इन परियोजनाओं का तीखा विरोध जताते हुए कहा है कि पर्यटन विकास के नाम पर वन दोहन किया जा रहा है और ग्राम सभा की सहमति के बिना कार्य शुरू का आदेश देना कानून का उलंघन है।

मंच के सचिव दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि दलमा अभ्यारण्य को विश्व स्तरीय और “टूरिस्ट-फ्रेंडली” बनाने की पहल में वन विभाग स्थानीय समुदायों को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देने की आड़ में जंगलों की कटाई, पर्यावरणीय संरचनाओं को नुकसान और वनाधिकार कानून की अवहेलना कर रहा है।

ग्राम सभा को दरकिनार कर काम शुरू होने का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग ने न तो किसी ग्राम सभा से लिखित सहमति ली और न ही परियोजना से जुड़े प्रभावों पर बातचीत की। ग्रामीणों के अनुसार, अभ्यारण्य क्षेत्र आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर, जीविका और परंपरागत अधिकारों से जुड़ा है। ऐसे में बिना सहमति किसी भी तरह का निर्माण कार्य उनके अधिकारों का हनन है।

पर्यटन परियोजनाओं पर उठ रहे सवाल

प्रस्तावित ग्लास ब्रिज और रोपवे परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों ने भी चिंता जताई है। श्री पहाड़ीया कहा कि कि हज़ारों पर्यटकों की आवाजाही से वन्यजीव संरक्षण प्रभावित होगा और हाथियों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र में व्यवधान उत्पन्न होगा।

मंच के सचिव दलमा टाइगर सुकलाल पहाडिया ने बताया कि भारी मशीनरी के उपयोग से पहाड़ी इलाके की संरचना प्रभावित भी होगी ।

पेड़ों की कटाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है,और निर्माण क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियाँ घटने लगी हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार लिखित आपत्ति देने के बावजूद विभाग कोई जवाब नहीं दे रहा है।मंच ने चेतावनी दी है कि यदि परियोजनाओं को तुरंत रोका नहीं गया और ग्राम सभाओं के साथ औपचारिक वार्ता नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बढ़ती ठंड से राहत हेतु उपायुक्त के निर्देशानुसार नगर निकाय एवं प्रखंड क्षेत्रों के मुख्य चौक–चौराहों पर रात्रिकालीन अलाव व्यवस्था सुनिश्चित।

बढ़ती ठंड से राहत हेतु उपायुक्त के निर्देशानुसार नगर निकाय एवं प्रखंड क्षेत्रों के मुख्य चौक–चौराहों पर रात्रिकालीन अलाव व्यवस्था सुनिश्चित।

सरायकेला-खरसावां

खबर का दिखा असर, झारखंड क्राईम रिपोर्टर अखबार द्वारा कड़ाके की ठंड के मुद्दे को लेकर प्रकाशित खबर पर जिला प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए नगर निकाय एवं प्रखंड क्षेत्र के चौक चौराहे पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

आपको बताते चलें कि सरायकेला खरसावां जिले में बढ़ती ठंड और बेवस जिंदगी को देखते हुए झारखंड क्राईम रिपोर्टर अखबार द्वारा पुलिस व प्रशासन एवं स्थानीय नेता व समाज सेवी साथ ही नगर निगम के द्वारा अलाव की व्यवस्था नहीं किए जाने की खबर को प्रमुखता से जनहित में प्रकाशित किया था।

खबर प्रकाशित होने पर एवं खबर को संज्ञान में लेते हुए जिला प्रशासन द्वारा त्वरित रात कालीन के वक्त लगभग प्रत्येक चौक चौराहे पर अलाव की व्यवस्था की गई जिससे कि गरीब आम जनमानस को जिला प्रशासन द्वारा काफी राहत एवं सहूलियत प्रदान की गई। जिससे कि गरीब आम जनमानस के चेहरे खिल उठे एवं इस बढ़ती कड़ाके की ठंड में उन्हें काफी राहत का एहसास हुआ और आम जनमानस ने तहे दिल से जिला प्रशासन का धन्यवाद किया एवं झारखंड क्राईम रिपोर्टर अखबार को भी आम जनमानस ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए तहे दिल से धन्यवाद दिया एवं आगे भी इसी तरह के मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित करने के लिए प्रेरित किया।

आपको बताते चले कि सरायकेला-खरसावां जिले में बढ़ती ठंड के मद्देनज़र आम नागरिकों की सुरक्षा एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार नगर निकाय क्षेत्रों के मुख्य चौक–चौराहों, सभी प्रखंड मुख्यालयों के प्रमुख स्थलों, तथा भीड़–भाड़ वाले क्षेत्रों में रात्रिकालीन अलाव व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, जिससे ठंड से प्रभावित नागरिकों को प्रभावी राहत मिल सके।

उपायुक्त द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अलाव व्यवस्था का नियमित निरीक्षण करें, आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त अलाव की व्यवस्था उपलब्ध कराएँ तथा सुनिश्चित करें कि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। मौसम में गिरावट को ध्यान में रखते हुए अलाव स्थलों की संख्या एवं संचालन अवधि को भी परिस्थितियों के अनुसार बढ़ाया जा रहा है।

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि अत्यधिक ठंड के दौरान आवश्यक सावधानियाँ अपनाएँ और आवश्यकता होने पर उपलब्ध अलाव स्थलों का उपयोग कर स्वयं को सुरक्षित रखें।

ईचागढ़ प्रखंड में विधिक जागरूकता सह सशक्तिकरण शिविर का हुआ आयोजन।

ईचागढ़ प्रखंड में विधिक जागरूकता सह सशक्तिकरण शिविर का हुआ आयोजन।

सरायकेला/ईचागढ़

( मालखान महतो)
प्रखंड कार्यालय सभागार में रविवार को विधिक जागरूकता सह सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया। विधिक जागरूकता सह सशक्तिकरण शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में चांडिल अनुमंडल न्यायालय के न्यायाधीश डॉ.रवि प्रकाश तिवारी उपस्थित थे। वहीं शिविर में मुख्यमंत्री राज्य वृद्धवस्थापेंशन योजना के 14 लाभुकों को स्वीकृति प्रमाण पत्र, जेएचएलपीएस के तहत सीसीएल राशि 64 लाख रु के डेमो चैक, फूलो झानो आशीर्वाद योजना के तहत दो लाभुकों को 50 हजार का डेमो चैक तथा 13 लाभुकों के बीच कंबल का वितरण किया गया। वही कार्यक्रम में दो गर्भवती माताओं का गोदभराई व एक बच्चों का अन्नप्राशन भी किया गया।

वहीं न्यायाधीश डॉ रवि प्रकाश तिवारी ने लोगों को विधिक जागरूकता सह सशक्तिकरण के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोगों को अपने मौलिक अधिकार के संबंध में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि लाभूको को सरकार कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए शिविर में परिसम्पतियों व योजनाओं का स्विकृति पत्र प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि छोटे छोटे मामलों का निष्पादन के लिए प्रखंड व पंचायतों में पारा लिगल वोलेंटियर कार्यरत हैं,जहां मुफ्त में विधिक सहायता भी प्रदान किया जाता है।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से भी मामलों पर आपसी सुलह कराया जाता है,ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कोर्ट कचहरी के चक्कर से निजात मिलती है। मौके पर अंचलाधिकारी दीपक कुमार,पीएलवी कार्तिक गोप, गंगासागर पाल, सुबोध चन्द्र महतो, निर्मल घोष, तुष्ट रानी मंडल,निपेन प्रधान,इशिता उरांव,पूर्णी गोप,न्यायलय कर्मी छगनलाल पटनायक, महिला पर्यवेक्षिका कृष्णा देवी आदि उपस्थित थे।

गौरांगकोचा ब्लॉक मोड़ के समीप अवैध बालू परिवहन करते दो ट्रैक्टर जब्त।

गौरांगकोचा ब्लॉक मोड़ के समीप अवैध बालू परिवहन करते दो ट्रैक्टर जब्त।

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)
थाना क्षेत्र के गौरांगकोचा ब्लॉक मोड़ पर प्रशासन द्वारा लगाए गए चेक नाका पर रविवार को अवैध बालू परिवहन करते दो ट्रैक्टर पकड़े गए। दोनों ट्रैक्टर बिना वैध चालान एवं कागजात के बालू ढोते पाए गए। जांच के दौरान चालक उचित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद वाहनों को जब्त कर ईचागढ़ थाना परिसर भेज दिया गया। ईचागढ़ के गौरांगकोचा ब्लॉक मोड़, झारुआ मोड़ और टीकर थाना मोड़ के समीप तीन पालियों में 24 घंटे पुलिस व प्रशासन की संयुक्त टीम बालू के अवैध परिचालन पर निगरानी रख रहे हैं।

बताया जा रहा है कि जांच के दौरान बालू लदा दो ट्रैक्टर भागने में सफल रहे। पुलिस की टीम दो ट्रैक्टर को ही पकड़ सकी। अवैध खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन द्वारा निगरानी बढ़ाई गई है। इसी कड़ी में ईचागढ़ थाना क्षेत्र में तीन और तिरुलडीह थाना क्षेत्र में एक स्थान पर चेकनाका लगाया गया है। चेकनाका में पुलिस और प्रशासन की टीम संयुक्त रूप से अवैध कारोबार पर निगरानी रख रही है। वहीं सभी स्थानों पर सीसीटीवी भी लगाया गया है। चेकनाका लगाए जाने के बाद बालू का अवैध परिवहन करने वालों में हडकंप मचा हुआ है।

शिवलाल उच्च विद्यालय मुसाबनी में पूर्ववर्ती छात्रों का रियूनियन

शिवलाल उच्च विद्यालय मुसाबनी में पूर्ववर्ती छात्रों का रियूनियन

पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी

शिवलाल उच्च विद्यालय मुसाबनी में पूर्ववर्ती छात्रों का रियूनियन व मिलन समारोह दूसरे दिन रविवार को भी पूरे उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व छात्र एक बार फिर अपनी पुरानी यादों में लौट गए और अपने सहपाठियों के साथ मिलकर जमकर मस्ती की।

रियूनियन के दौरान छात्रों ने अपने स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और कक्षा के रोचक किस्सों का जिक्र कर कार्यक्रम में मनोरंजन का नया रंग भर दिया। कई पूर्व छात्र अपने विद्यालय में हो रहे सकारात्मक बदलाव देखकर भावुक भी नजर आए।कार्यक्रम में छात्रों ने अपने गुरुजनों को सम्मानित कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

शिवलाल उच्च विद्यालय से सेवानिवृत पूर्व प्रधानाध्यापक सत्यनारायण ओझा, विज्ञान शिक्षक त्रिलोचन पाल, नकुल तिवारी, धर्मदास वर्तमान प्रधानाध्यापक विकास शर्मा आदि को शॉल, स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। शिक्षकों ने भी अपने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। रियूनियन के सफल आयोजन के लिए समिति के सदस्यों और स्वैच्छिक सहयोगियों की भूमिका सराहनीय रही।कार्यक्रम हर्षोल्लास और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से जयंत बोष, विजय सिन्हा, कमलकांत मंडल, विनोद कुमार लाल,गणेश मुर्मू,सेवानिवृत्ति जीएम एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया शंकर मार्डी,कमल गुप्ता, हंसराज मिश्रा, सीताराम शर्मा ,दिलेर टोप्पो, लक्ष्मण चंद्र बाग, अनूप सरकार ,सुलता सरकार, मधुमिता सरकार , सुब्रो बागची, सुमित्रा अधिकारी, मनोरमा दास, विनती पटनायक, ममता पटनायक, दीपचंद अग्रवाल, अशोक गुप्ता सहित काफी संख्या में पूर्ववर्ती छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

शिवलाल उच्च विद्यालय मुसाबनी में पूर्ववर्ती छात्रों का रियूनियन।

शिवलाल उच्च विद्यालय मुसाबनी में पूर्ववर्ती छात्रों का रियूनियन

पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी

शिवलाल उच्च विद्यालय मुसाबनी में पूर्ववर्ती छात्रों का रियूनियन व मिलन समारोह दूसरे दिन रविवार को भी पूरे उत्साह के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व छात्र एक बार फिर अपनी पुरानी यादों में लौट गए और अपने सहपाठियों के साथ मिलकर जमकर मस्ती की। रियूनियन के दौरान छात्रों ने अपने स्कूल के दिनों की यादें साझा कीं, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और कक्षा के रोचक किस्सों का जिक्र कर कार्यक्रम में मनोरंजन का नया रंग भर दिया। कई पूर्व छात्र अपने विद्यालय में हो रहे सकारात्मक बदलाव देखकर भावुक भी नजर आए।कार्यक्रम में छात्रों ने अपने गुरुजनों को सम्मानित कर उनके प्रति आभार व्यक्त किया।शिवलाल उच्च विद्यालय से सेवानिवृत पूर्व प्रधानाध्यापक सत्यनारायण ओझा, विज्ञान शिक्षक त्रिलोचन पाल, नकुल तिवारी, धर्मदास वर्तमान प्रधानाध्यापक विकास शर्मा आदि को शॉल, स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। शिक्षकों ने भी अपने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों की सराहना की और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। रियूनियन के सफल आयोजन के लिए समिति के सदस्यों और स्वैच्छिक सहयोगियों की भूमिका सराहनीय रही। कार्यक्रम हर्षोल्लास और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से जयंत बोष, विजय सिन्हा, कमलकांत मंडल, विनोद कुमार लाल,गणेश मुर्मू,सेवानिवृत्ति जीएम एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया शंकर मार्डी,कमल गुप्ता, हंसराज मिश्रा, सीताराम शर्मा ,दिलेर टोप्पो, लक्ष्मण चंद्र बाग, अनूप सरकार ,सुलता सरकार, मधुमिता सरकार , सुब्रो बागची, सुमित्रा अधिकारी, मनोरमा दास, विनती पटनायक, ममता पटनायक, दीपचंद अग्रवाल, अशोक गुप्ता सहित काफी संख्या में पूर्ववर्ती छात्र छात्राएं उपस्थित थे।

जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड आग से बचने के लिए अलाव की व्यवस्था नहीं, गरीबों का जीवन यापन कष्टदाई।

जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड आग से बचने के लिए अलाव की व्यवस्था नहीं, गरीबों का जीवन यापन कष्टदाई।

सरायकेला/खरसावां

वर्तमान समय में लगभग भारत के सभी हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है जिससे कि लोग ठंड से बचने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं तरह-तरह के महंगे कपड़े पहन रहे हैं सर पर टोपी पैर में मोजा बदन पर महंगे मोटे जैकेट और हाथ में भी हाथ मोजा जैसे वस्त्रो का उपयोग कर रहे हैं।

लेकिन इसी प्रकरण का एक दूसरा रूप भी हमारे भारत में देखने को मिलता है जिसे लोग गरीब कहते हैं और इन गरीबों के पास में सभी लोगों की तरह ठंड से बचने के लिए महंगे कपड़े सर पर टोपी पैर में मोजा बदन पर महंगे मोटे जैकेट और हाथ में हाथ मोजा जैसा वस्त्र नहीं होता है जिस वजह से ठंड के मौसम में इन गरीबों का जीवन यापन करना काफी परेशानीमय एवं कष्टदाई हो जाता है।

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प्रिय पाठकों आप सभी ने यह तो अवश्य ही देखा होगा की भारत के लगभग सभी जगहों पर ठंड के मौसम में ख़ास कर रात के वक्त चौक चौराहे पर ठंड से बचने के लिए अलाव की व्यवस्था की जाती है और यह अलाव की व्यवस्था खासकर उन लोगों के लिए की जाती है जो लोग ठंड से बचने के लिए उक्त साधनों का उपयोग करने में असमर्थ है ( यहां पर कहना यह है कि गरीब लोगों द्वारा महंगे गर्म कपड़े रूम हिटर जैसी चीजें न खरीद पाना ) जिससे कि गरीब गुरवा लोगों को दैनिक जीवन यापन करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

साथियों इन दिनों पूरे भारत के साथ-साथ भारत का ही एक राज्य है झारखंड जहां की वर्तमान समय में कड़ाके की ठंड पड़ रही है सुबह उठो और अपना दरवाजा खोलकर बाहर देखो तो मानो ऐसा प्रतीत होता है कि आसमान की बदले जमीन पर आ कर जमीन को और भी मनमोहन बना रही है।

लेकिन साथियों इस वक्त मुद्दा यह है कि इस कड़ाके की ठंड में खास कर झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के गरीबों के लिए  किसी तरह की कोई भी व्यवस्था ना के बराबर की जा रही है या फिर यूं कहें कि नहीं की जा रही है। इस वक्त दिसंबर का महीना चल रहा है और दिसंबर में असहाय ठंड पड़ती है जिससे कि बचाना हर किसी के लिए अनिवार्य हो जाता है ऐसे में सरायकेला खरसावां जिले में ना प्रशासन द्वारा और ना ही स्थानीय पुलिस द्वारा इतना ही नहीं किसी समाज सेवी या स्थानीय नेता के द्वारा भी गरीबों के लिए ठंड से बचने के लिए अलाव जैसी व्यवस्था नहीं की जा रही है। जिससे कि गरीब आम जनमानस काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं।

इतना ही नहीं नगर निगम की ओर से भी ठंड से बचने के लिए किसी तरह की कोई व्यवस्था मुहैया नहीं कराई जा रही है। सरायकेला खरसावां जिले वासियों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष प्रशासन पुलिस नेता समाजसेवी अथवा नगर निगम की ओर से ठंड से बचने के लिए रात के वक्त प्रत्येक चौक चौराहे पर अलाव की व्यवस्था की जाती थी लेकिन इस वर्ष मानो अलाव की व्यवस्था में भी अकाल पड़ चुका है।

जिले वासियों ने यह सवाल भी किया है कि क्या प्रशासन स्थानीय पुलिस स्थानीय नेता स्थानीय समाजसेवी और नगर निगम के अधिकारियों को ठंड नहीं लगती या फिर उन्हें ठंड का एहसास नहीं होता या फिर उन्हें गरीबों के परेशानियों का एहसास नहीं होता है या फिर उन्हें गरीबों को ठंड में इस तरह तड़पता देख कर खुशी मिलती है।

अब इस मुद्दे पर देखना यह दिलचस्प होगा कि आखिर कब तक जिले में रह रहे हैं गरीब जिले वासियों के लिए ठंड से बचने की व्यवस्था कराई जाती है या फिर इस वर्ष यह शीत लहरी का मौसम यूं ही गुजर जाएगा या फिर गरीबों की सुविधा के लिए कोई अपना हाथ आगे बढ़ाएगी।

सरायकेला-खरसावां जिला में अवैध शराब की बिक्री और हफ्ता लेने का कारोबार जोरों पर।

सरायकेला-खरसावां जिला में अवैध शराब की बिक्री और हफ्ता लेने का कारोबार जोरों पर।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला-खरसावां जिला में अवैध शराब की बिक्री और हफ्ता लेने का कारोबार जोरों पर चल रहा है।
सरायकेला खरसावां जिला के उत्पाद विभाग के दरोगा से लेकर सुपरिटेंडेंट तक हफ्ता की वसूली जा रही है। वहीं सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय थाना भी इस मूवी में अपनी भूमिका बखूबी निभा रही है । स्थानीय थाना को भी हफ्ता बंध गया है।

सूत्रों ने बताया है कि उत्पाद विभाग, सुपरीटेंडेंट, दरोगा और स्थानीय थाना की मिली भगत से चल रहा है खुलेआम दो नंबर शराब की बिक्री सीधे लफ्जों में कहा जाए तो शराब बेचने वाले मालामाल पीने वाले बेहाल हफ्ता लेने वाले जबरदस्त मालामाल। इन सरकारी अधिकारियों को झारखंड सरकार के नियमों का उल्लंघन करते हुए सरेआम देखा जा सकता है सरायकेला खरसावां जिले में आखिर कौन सफेद पोस् के इसारे पर चल रहा है यह जहर बेचने का अवैध कारोबार।

आखिर कानून की कौन उड़ा रहा धज्जियां यह पूछने वाला कोई नहीं है।

वहीं इन अवैध वसूली करने वालों कानून के रखवालो से गरीब गुरुवा का यह ग्रीन झारखंड कराह रहा है।
क्या यही है सपनों का झारखंड है जहां गरीब गुरवे के घर परिवार के लोग आंसू में डूबे पड़े हैं और सफेद और कानून के रखवालो का जेब भर रहे हैं।

सूत्रों ने यह भी बताया है कि थाना को 8000 हफ्ता उत्पाद विभाग के दरोगा को 10000 हफ्ता देने की जानकारी अवैध शराब विक्रेता ने खुलकर बताया है। वहीं छोटे सरकारी अवधि के लोग भी 5000 और ₹500 तक महीना हफ्ता ले रहे हैं।

जनहित में अगर यही आलम रहा तो ग्रीन झारखंड सपनों का झारखंड धीरे-धीरे जहरीली शराब के नशे में डूब कर अपने को विलन करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। क्या सरकारी अधिकारियों को सरकार के तरफ से मेहनताना नहीं मिल पाता है कि वह नाजायज कारोबारी को पनपने देना और उनसे हफ्ता लेने का अवैध कारोबार खुलेआम कर रहे हैं।

आर आई टी थानाप्रभारी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरायकेला खरसावां जिले के आर आई टी थाना क्षेत्र में खुलेआम महुआ शराब की बिक्री की जा रही है लेकिन स्थानीय थाना खामोश है या फिर यूं कहें के स्थानीय थाना सब कुछ देखते हुए भी नजरअंदाज कर रही है।

आर आई टी थाना क्षेत्र में बिक रहा महुआ शराब

अब देखना यह दिलचस्प होगा कि आखिर यह अवैध कारोबार पर या फिर अवैध वसूली पर कब तक लगाम लग पाती है या फिर यह सिलसिला यूं ही चलता रहता है

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