प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष भरत सिंह ने की आदित्यपुर थाना प्रभारी का स्वागत अभिनंदन।
सरायकेला/आदित्यपुर
प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष भरत सिंह ने आदित्यपुर के नए थाना प्रभारी अंजनी कुमार का स्वागत अभिनंदन किया।
आपको बताते चलें कि सरायकेला खरसावां जिले के पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी द्वारा जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने एवं अपराधों पर नियंत्रण के लिए नए थाना प्रभारी के रूप में अंजनी कुमार सिंह की नियुक्ति की है।
वहीं सरायकेला के पुलिस अधीक्षक के निर्देश जारी करते ही 15 जून यानी कि सोमवार को अंजनी कुमार सिंह ने आदित्यपुर थाने में पदभार ग्रहण कर लिया।
वहीं नए थाना प्रभारी के पदभार ग्रहण करने के पश्चात प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के अध्यक्ष भरत सिंह के नेतृत्व में क्लब के कई पत्रकारों ने आदित्यपुर थाना पहुंचकर क्लब के अध्यक्ष भरत सिंह के साथ-साथ पत्रकारों ने भी आदित्यपुर के नए थाना प्रभारी का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
वहीं क्लब के अध्यक्ष ने नए थाना प्रभारी का स्वागत अभिनंदन करने के पश्चात क्षेत्र में नशे के गिरफ्त में आ रहे हैं युवाओं एवं नई पीढ़ियां को नशे की गिरफ्तार से बाहर लाना एवं नशे के खिलाफ जागरूक करना इन सभी मुद्दों पर गहनता से चर्चा की।
वहीं थाना प्रभारी अंजनी कुमार सिंह ने क्लब के अध्यक्ष भरत सिंह को एवं क्लब के तमाम पत्रकारों के माध्यम से क्षेत्र वासियों को यह आश्वासन देते हुए कहा कि नशे को जड़ से उखाड़ना फेंकना उनकी पहली प्राथमिकताहोगी।
आपको बताते चलें कि आदित्यपुर क्षेत्र में नए थाना प्रभारी के सामने केवल नशा ही एक चुनौती नहीं और भी कई गंभीर चुनौतियां हैं जिनका सामना नए थाना प्रभारी को करना होगा और उन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए क्षेत्र को अपराध मुक्त बनाना होगा।
मजदूर मसीहा स्वर्गीय सूर्य देव सिंह की 35वीं पुण्यतिथि मनाई गई।
झारखंड/धनबाद
जनता की ताकत जनता का समर्थन ही हमारी शक्ति है:- संजीव सिंह, धनबाद, महापौर
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मजदूर मसीहा स्वर्गीय सूर्य देव सिंह की 35वीं पुण्यतिथि मनाई गई।
यह कार्यक्रम झरिया के कतरास मोड़ स्थित कार्यालय में सिंह मेंशन परिवार द्वारा आयोजित की गई। आपको बताते चलें कि उक्त कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि, मजदूर भाई-बहन और स्थानीय जनता की उपस्थिति रही।
वहीं उक्त कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम से पूर्व ही धनबाद के महापौर संजीव सिंह ने कहा कि मजदूर मसीहा स्वर्गीय सूर्य देव सिंह लगातार चार से पांच बार झरिया के विधायक रहें एवं वे अपने कार्यकाल में मजदूरों के लिए एवं मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी। और उनके बताए हुए मार्ग पर आज हम चल रहे हैं एवं मजदूरों को एवं जिले वासियों को उनका हक दिलाने का कार्य कर रहे हैं।
वहीं इस श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम के अवसर पर झारखंड क्राईम रिपोर्टर हिंदी दैनिक का अखबार के संपादक और विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय सह-प्रभारी संपूर्ण भारत भरत सिंह ने भी भी कार्यक्रम में शिरकत की एवं मजदूर मसीह सूर्य देव सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सरायकेला खरसावां जिला महिला कांग्रेस की ओर से एक प्रशिक्षण और संगठन को मजबूत करने के लिए सभा का आयोजन किया गया।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला खरसावां जिला महिला कांग्रेस की ओर से एक प्रशिक्षण और संगठन को मजबूत करने के लिए सभा का आयोजन किया गया।
आदिवासी कल्याण समिति कुपटांगा में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड महिला प्रदेश अध्यक्ष रमा खालको और सुंदरी तिर्की उपस्थित हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन महिला जिला अध्यक्ष संगीता प्रधान ने कियाकार्यक्रम में झारखंड में चल रहे SIR और बेरोजगारी के मुद्दे पर अपने बातों को रखा गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला के पूर्व महिला अध्यक्ष बेबी सिंह कुरानकोल्हान इंटक के प्रभारी राणा सिंह झारखंड प्रदेश के सचिव सह जिला परिषद लक्ष्मी सरदार आदित्यपुर कांग्रेस के प्रभारी तसलीमा खातून कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिवाकर झा वरिष्ठ महिला नेत्री मिसर बांसारिया जिला महासचिव झरना मानना पूर्व जिला महासचिव सविता साव पूर्व जिला अध्यक्ष देबू चटर्जी जिला उपाध्यक्ष खिरोद सरदार प्रखंड गम्हरिया के अध्यक्ष अनिल ठाकुर गम्हरिया महिला कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष उर्मिला देवी सरायकेला प्रखंड महिला अध्यक्ष सुनीता रजक जिला महासचिव राजू रजक चंद्रकांत झा जिला महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष अनीता महतो और सैकड़ो महिला कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कांग्रेस अनुसूचित जाति के पूर्व जिला अध्यक्ष समाज सेवी स्वर्गीय बुद्धेश्वर मुखी उर्फ शान बाबू मुखी की दसवीं पुण्यतिथि मनाई गई।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला खरसावां जिला कांग्रेस अनुसूचित जाति के पूर्व जिला अध्यक्ष समाज सेवी स्वर्गीय बुद्धेश्वर मुखी उर्फ शान बाबू मुखी की दसवीं पुण्यतिथि जिला उपाध्यक्ष खिरोद सरदार के नेतृत्व में आदिवासी कल्याण समिति कुपटांगा आदित्यपुर टू में उनके चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला परिषद झारखंड प्रदेश सचिव लक्ष्मी सिंह सरदार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिवाकर झा, पूर्व जिला अध्यक्ष देबू चटर्जी जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष संगीता प्रधान पूर्व जिला अच्छे सदस्य राजमंगल ठाकुर पूर्व पार्षद पांडि मुखी मिसर बांसारिया, झरना मानना सविता साव सुनीता रजक आदि उपस्थित थे
भारत में अनेकों गाँव शहर बन गए,पर सरकारी रिकॉर्ड में गाँव ही हैँ, ऐसा क्यों?
ग्रामीण-शहरी वर्गीकरण की पुरानी व्यवस्था, मानकों पर पुनर्विचार कर संशोधन की तात्कालिक ज़रूरत -समग्र व्यापक विश्लेषण
गावों में बहुमंजिला इमारतें, औद्योगिक प्रतिष्ठान, निजी अस्पताल,शैक्षणिक संस्थान, बाजार, बैंकिंग सुविधाएँ,इंटरनेट कनेक्टिविटी, पक्की सड़कें और लाखों की आबादी मौजूद,इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में ग्राम के रूप में दर्ज?
संविधान के 73वें और 74वें संशोधन, अनुच्छेद 243-क्यू राज्य नगर पालिका अधिनियमों तथा जनगणना मानकों क़े ग्रामीण -शहरी प्रशासन क़े इन पारंपरिक मानकों को तात्कालिक संशोधन की जरूरत -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनी
गोंदिया/महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर भारत आज दुनियाँ के सबसे तेजी से शहरीकरण करने वाले देशों में शामिल है। देश के हजारों गाँव ऐसे हैं जो वास्तविकता में छोटे-बड़े शहरों का स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं, वहाँ बहुमंजिला इमारतें, औद्योगिक प्रतिष्ठान, निजी अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, बाजार, बैंकिंग सुविधाएँ, इंटरनेट कनेक्टिविटी, पक्की सड़कें और लाखों की आबादी मौजूद है। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में वे आज भी ग्राम के रूप में दर्ज हैं। इसके विपरीत कुछ क्षेत्रों में एक ही भौगोलिक क्षेत्र का एक भाग नगर परिषद अथवा नगर निगम में शामिल है जबकि दूसरा भाग ग्राम पंचायत के अधीन है। ऐसी स्थिति में एक ही क्षेत्र के नागरिकों को विकास योजनाओं बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के मामले में अलग-अलग व्यवहार का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति विकास नियोजन की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है और अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि गाँव और शहर निर्धारित करने के मानकों की व्यापक समीक्षा की जाए। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता के तौर पर गंभीरता से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा क़ि मैंने कई शहरों में कई ऐसे स्थान देखें जहां पर रोड, नदी, नाले के इस तरफ शहर व उस तरफ गांव, जिससे वहां बिजली बिल, मकान टैक्स से लेकर जीवन शैली के हर स्टेज पर भेदभाव हो जाता है, वास्तव में किसी क्षेत्र को गाँव अथवा शहर घोषित करना केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है,बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव होते हैं। किसी क्षेत्र का दर्जा यह तय करता है कि वहाँ विकास योजनाएँ किस प्रकार लागू होंगी, किस प्रकार का स्थानीय प्रशासन कार्य करेगा, नागरिकों को कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध होंगीकिस प्रकार के कर लगाए जाएंगे,भूमि उपयोग की नीति क्या होगी तथा आधारभूत संरचना का विकास किस दिशा में होगा। यदि कोई क्षेत्र ग्राम पंचायत के अंतर्गत है तो उस पर ग्रामीण विकास कार्यक्रमों का प्रभाव अधिक रहता है, जबकि नगर परिषद, नगरपालिका अथवा नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने पर शहरी विकास योजनाएँ, सीवरेज व्यवस्था,नगर परिवहन, स्मार्ट अवसंरचना औरनियोजित विकास जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होने लगती हैं। इसलिए यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और सरकारी वर्गीकरण में अंतर हो तो उसका सीधा प्रभाव नागरिकों के जीवन स्तर और विकास के अवसरों पर पड़ता है।
साथियों, भारत में गाँव की कोई एक समान राष्ट्रीय कानूनी परिभाषा नहीं है। सामान्यतः गाँवों की पहचान राज्यों के राजस्व अभिलेखों और पंचायत कानूनों के आधार पर की जाती है। संविधान के भाग-IX तथा पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत ग्राम पंचायतों का गठन किया जाता है और राज्य सरकारें अपने-अपने पंचायत अधिनियमों के अनुसार गाँवों का प्रशासन संचालित करती हैं।किसी क्षेत्र को सामान्यतः तब ग्रामीण क्षेत्र माना जाता है जब वह राजस्व अभिलेखों में गाँव के रूप में दर्ज हो, ग्राम पंचायत के प्रशासनिक क्षेत्र में आता हो तथा नगर निकाय की सीमा से बाहर स्थित हो। परंतु पिछले कुछ दशकों में अनेक ऐसे गाँव विकसित हुए हैं जहाँ कृषि गतिविधियों की जगह उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र ने ले ली है, फिर भी उनका प्रशासनिक दर्जा नहीं बदला है।
साथियों, भारत में शहरों का वर्गीकरण मुख्यतःदोश्रेणियों में किया जाता है,वैधानिक शहर (स्टेटुटरी टाउन) और जनगणना शहर (सेंसस टाउन)। वैधानिक शहर वे होते हैं जिन्हें राज्य सरकार किसी कानून के अंतर्गत नगर निगम, नगर परिषद, नगरपालिका अथवा नगर पंचायत के रूप में अधिसूचित करती है। इनकी स्थापना राज्य के नगर पालिका अधिनियमों केee अंतर्गत होती है और इनके गठन का अंतिम अधिकार राज्य सरकार के पास होता है। नगर निगम,नगर परिषद, नगरपालिका तथा नगर पंचायत इसी श्रेणी में आते हैं। किसी क्षेत्र की जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों, राजस्व क्षमता और नगरीय स्वरूप को देखते हुए राज्य सरकारें ऐसे निकायों की स्थापना करती हैं।दूसरी ओर जनगणना शहर की अवधारणा भारत की जनगणना द्वारा विकसित की गई है। जनगणना के अनुसार यदि कोई क्षेत्र तीन निर्धारित मानकों को पूरा करता है तो उसे जनगणना शहर माना जाता है। पहला, उस क्षेत्र की आबादी कम से कम 5000 होनी चाहिए। दूसरा, वहाँ जनसंख्या घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर होना चाहिए।तीसरा पुरुष मुख्य कार्यबल का कम से कम 75 प्रतिशत भाग कृषि के बजाय गैर-कृषि गतिविधियों में संलग्न होना चाहिए। इन मानकों को 1961 कीजनगणना के दौरान प्रमुख रूप से अपनाया गया था और आज भी काफी हद तक इन्हीं का उपयोग किया जाता है।
साथियों,यहीं से समस्या प्रारंभ होती है।1961 का भारत और 2026 का भारत पूरी तरह भिन्न हैं।छह दशक पहले देश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि आधारित थी, औद्योगिकीकरण सीमित था,शहर अपेक्षाकृत छोटे थे और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या का अनुपात बहुत अधिक था।आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। महानगरों का विस्तार कई किलोमीटर दूर तक हो चुका है। अनेक गाँव महानगरों के उपनगर बन चुके हैं। लाखों लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हुए प्रतिदिन शहरों में जाकर रोजगार करते हैं। सेवा क्षेत्र,सूचना प्रौद्योगिकी डिजिटल अर्थव्यवस्था और आधुनिक परिवहन ने ग्रामीण एवं शहरीe जीवन के बीच की पारंपरिक दूरी को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। ऐसे में केवल जनसंख्या, घनत्व और गैर-कृषि रोजगार के आधार पर किसी क्षेत्र की वास्तविक प्रकृति का निर्धारण करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
साथियों, भारत के संविधान में ग्रामीण और शहरीस्थानीय निकायों के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था की गई है। वर्ष 1992 में लागू 73वें संविधान संशोधन ने पंचायत राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। इसके माध्यम से ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद जैसी संस्थाओं को सशक्त बनाया गया। इसी प्रकार 74वें संविधान संशोधन द्वारा शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई, जिसके अंतर्गत नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम जैसी संस्थाओं को संवैधानिक आधार मिला। संविधान का अनुच्छेद 243-क्यू नगर पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के गठन से संबंधित है। इस अनुच्छेद के अनुसार राज्य सरकारें स्थानीय परिस्थितियों, जनसंख्या, आर्थिक गतिविधियों, राजस्व क्षमता और नगरीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किसी क्षेत्र को शहरी निकाय के रूप में अधिसूचित कर सकती हैं। यद्यपि संविधान ने व्यापक ढाँचा उपलब्ध कराया है, फिर भी शहर घोषित करने का अंतिम अधिकार राज्यों के पास है। प्रत्येक राज्य के नगर पालिका अधिनियम में नगर पंचायत, नगरपालिका अथवा नगर निगम के गठन के लिए अलग-अलग मानदंड निर्धारित हो सकते हैं।सामान्यतः जनसंख्या जनसंख्या घनत्व, स्थानीय राजस्व, औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियाँ, नगरीय अवसंरचना तथा प्रशासनिक आवश्यकता जैसे तत्वों को ध्यान में रखा जाता है। इसी कारण विभिन्न राज्यों में समान जनसंख्या वाले क्षेत्रों का दर्जा सटीक रूप से अलग- अलग हो सकता है। साथियों, जब किसी क्षेत्र का प्रशासनिक वर्गीकरण उसकी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता तो अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। सबसे पहली समस्या विकास निधि के आवंटन की होती है। शहर जैसी आबादी और आवश्यकताओं वाले क्षेत्रों को भी शहरी विकास योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। परिणामस्वरूप वहाँ सड़क, जल निकासी, सीवरेज, सार्वजनिक परिवहन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाओं का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता। दूसरी ओर ग्राम पंचायतों की वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता इतनी नहीं होती कि वे तेजी से बढ़ते नगरीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। इसके अतिरिक्त अनियोजित निर्माण, अवैध कॉलोनियों का विकास और भूमि उपयोग संबंधी अव्यवस्था भी बढ़ जाती है।ऐसे क्षेत्रों में प्रशासनिक भ्रम भी देखने को मिलता है। कई बार एक ही सड़क के दोनों ओर अलग-अलग प्रशासनिक व्यवस्थाएँ लागू होती हैं। एक ओर नगर परिषद की सीमा होती है तो दूसरी ओर ग्राम पंचायत का क्षेत्र। परिणाम स्वरूप नागरिकों को कर व्यवस्था, भवन निर्माण अनुमति, जलापूर्ति, संपत्ति पंजीकरण और अन्य सेवाओं में असमानता का सामना करना पड़ता है। निवेशकों के लिए भी ऐसी स्थिति अनिश्चितता पैदा करती है, क्योंकि भूमि उपयोग और विकास नियम स्पष्ट नहीं होते।
साथियों, इस संदर्भ में यह प्रश्न भी उठता है कि क्या यह स्थिति विकासात्मक भेदभाव का उदाहरण है। कानूनी दृष्टि से इसे प्रत्यक्ष भेदभाव नहीं कहा जा सकता क्योंकि सरकारें वर्तमान कानूनों और अधिसूचनाओं के आधार पर कार्य करती हैं। फिर भी नीति निर्माण की दृष्टि से यह अवश्य कहा जा सकता है कि यदि कोई क्षेत्र वास्तविक रूप से शहरी बन चुका है और फिर भी उसे शहरी विकास योजनाओं तथा अवसंरचना निवेश से वंचित रखा जाता है तो वहाँ के नागरिक विकास के समान अवसरों से वंचित रह जाते हैं। इसलिए यह स्थिति विकासात्मक असमानता का रूप सटीकता से अवश्य धारण कर लेती है। साथियों, विशेषज्ञों का मानना है कि अब गाँव और शहर के निर्धारण के लिए नए और आधुनिक मानकों की आवश्यकता है। केवल जनसंख्या और रोजगार आधारित मानक आज की जटिल सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाते। भविष्य में निर्मित क्षेत्र (बिल्ट- अप एरिया), भूमि उपयोग का स्वरूप, आर्थिक एकीकरण, प्रतिदिन शहरों में आने-जाने वाले लोगों की संख्या, परिवहन संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी, जल एवं सीवरेज सुविधाओं की उपलब्धता तथा पर्यावरणीय वहन क्षमता जैसे मानकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे किसी क्षेत्र की वास्तविक प्रकृति का अधिक वैज्ञानिक आकलन संभव होगा।डिजिटल युग में उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और भू-स्थानिक सूचना प्रणाली के उपयोग से यह कार्य और अधिक सरल हो सकता है। उपग्रह आधारित विश्लेषण से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किसी क्षेत्र में निर्माण गतिविधि कितनी बढ़ चुकी है, कृषि भूमि का कितना हिस्सा शहरी उपयोग में परिवर्तित हो चुका है तथा वहाँ की जनसंख्या का घनत्व और आर्थिक गतिविधियाँ किस स्तर तक पहुँच चुकी हैं। यदि प्रत्येक पाँच वर्ष में ऐसे वैज्ञानिक सर्वेक्षण किए जाएँ तो ग्रामीण और शहरी वर्गीकरण को अधिक यथार्थवादी बनाया जा सकता है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह सुधार अत्यंत आवश्यक है। आज भारत के अनेक तथाकथित गाँव आर्थिक दृष्टि से शहर बन चुके हैं,जबकि कई छोटे शहर अब महानगरीय क्षेत्रों का हिस्सा बन गए हैं। ऐसी स्थिति में 1961 के मानकों पर आधारित वर्गीकरण व्यवस्था भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं दिखाई देती। विकास संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, नियोजित शहरीकरण, बेहतर स्थानीय प्रशासन और संतुलित क्षेत्रीय विकास तभी संभव होगा जब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की परिभाषाओं को आधुनिक वास्तविकताओं के अनुरूप पुनर्परिभाषित किया जाए। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह कहा जा सकता है कि भारत में गाँव और शहर के निर्धारण की वर्तमान प्रणाली ने दशकों तक प्रशासनिक स्थिरता प्रदान की है, किंतु बदलते समय में इसकी व्यापक समीक्षा अपरिहार्य हो गई है। संविधान के 73 वें और 74 वें संशोधन, अनुच्छेद 243-क्यू , राज्य नगर पालिका अधिनियमों तथा जनगणना मानकों ने अब तक ग्रामीण- शहरी प्रशासन की आधारशिला रखी है, लेकिन आज आवश्यकता इस बात की है कि इन पारंपरिक मानकों के साथ आधुनिक तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक संकेतकों को भी जोड़ा जाए। तभी भारत के वास्तविक शहरीकरण को सही पहचान मिल सकेगी और विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक समान रूप से पहुँच सकेगा।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध जिला प्रशासन की व्यापक पहल : जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
सरायकेला-खरसावां
निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग एवं अवैध व्यापार के विरुद्ध संचालित राज्यव्यापी जागरूकता अभियान के तहत जिला प्रशासन, सरायकेला-खरसावां द्वारा सोमवार को समाहरणालय परिसर में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी नितिश कुमार सिंह, उप विकास आयुक्त रीना हांसदा एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर की उपस्थिति में जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर नशामुक्ति संबंधी हस्ताक्षर अभियान में सहभागिता करते हुए उपस्थित अधिकारियों, कर्मियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं एवं सहियाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने की शपथ दिलाई गई।
जिले में संचालित इस जागरूकता अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विभागों के समन्वय से लगातार जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है। इसके माध्यम से समाज में नशामुक्ति के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने एवं लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मादक पदार्थों का बढ़ता दुरुपयोग समाज एवं विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल प्रशासन के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता फैलाने तथा युवाओं को सकारात्मक एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
उपायुक्त ने कहा कि युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति एवं ऊर्जा होते हैं। युवाओं की सकारात्मक भागीदारी से ही नशामुक्त समाज के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने सभी से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार, मित्रों एवं समुदाय को भी नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा ने अपने संबोधन में कहा कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार एवं समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता ही नशे के विरुद्ध सबसे प्रभावी माध्यम है। आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहियाएं एवं सामुदायिक स्तर पर कार्यरत अन्य कर्मी अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए उन्हें नशामुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने नशा मुक्त झारखंड अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने तथा जिले को नशामुक्त बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर ने बताया कि राज्यव्यापी अभियान के अंतर्गत संचालित जागरूकता रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं शैक्षणिक संस्थानों का भ्रमण कर लोगों को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों तथा नशामुक्त जीवन के महत्व के संबंध में जागरूक करेगा। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत विभिन्न जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से आमजन, विशेषकर युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही समाज में नशामुक्ति के प्रति सकारात्मक वातावरण के निर्माण एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर डीपीएम, जेएसएलपीएस, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहियाएं तथा अन्य संबंधित उपस्थित थे।
तिरुलडीह में नवनिर्मित पेट्रोल पंप का हुआ विधिवत उद्घाटन।
सरायकेला/तिरुलडीह
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार तिरुलडीह में नवनिर्मित पेट्रोल पंप का विधिवत उद्घाटन कार्यक्रम आज 15 जून 2026 (सोमवार) को शहीद चौक के समीप सुसंपन्न हुआ।
पेट्रोल पंप शुरू होने से तिरुलडीह सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को पेट्रोल-डीजल के लिए दूर-दराज इलाकों का रुख करना नहीं पड़ेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी तथा स्थानीय व्यापार, परिवहन और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।
तिरुलडीह और आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए खुशी और गर्व का क्षण है। क्षेत्रवासियों को लंबे समय से जिस सुविधा का इंतजार था, वह अब साकार होने जा रही है।
तिरुलडीह के विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मेसर्स हीरा साव जी के सौजन्य से
मौके पर स्थानीय लोकप्रिय विधायक महोदया सबिता महतो जी, महोदया की आप्त सचिव सह केंद्रीय सदस्य राजीव (काबलू) महतो, जी प्रमुख प्रतिमा वाला सिंह पातर जी, उप प्रमुख मो. एकराम अंसारी जी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी कुकड़ु राजश्री ललिता बाखला जी, थाना प्रभारी श्री कौशल कुमार जी, (मामाजी) संजय महतो जी, इंद्रजीत महतो जी, स्थानीय पत्रकार साथी, मेसर्स के सपरिवार उपस्थित रहे।
न्यू श्री साइन मोटर को MOST TRUSTED BRAND OF EASTERN INDIA AWARD से सम्मानित किया गया।
बिहार/पटना
रविवार 14 जून को पटना के ताज होटल में पूर्वी भारत के सबसे भरोसेमंद ब्रांड 2025- 2026 का हुआ आयोजन जिसमें की न्यू श्री साईं मोटर्स को भरोसेमंद ब्रांड के रूप में चिन्हित किया गया।
साथ ही न्यू श्री साइन मोटर्स के प्रबंध निदेशक हरचरण सिंह ( राजा ) को MOST TRUSTED BRAND OF EASTERN INDIA AWARD से सम्मानित किया गया।
आपको बताते चलें की यह पुरस्कार बॉलीवुड फिल्म की मशहूर अदाकारा मलाइका अरोड़ा के हाथों हर चरण सिंह उर्फ राजा को दिया गया। इसके बाद से ही न्यू श्री साइन मोटर्स कि नाम बच्चे बच्चे की जुबान तक पहुंच चुका है।
वहीं मलाइका अरोड़ा के हाथों पुरस्कृत होने के बाद हर चरण सिंह उर्फ (राजा) ने कहा कि आज बेहद ही खुशी का दिन है क्योंकि एक वक्त पुरानी दो गाड़ियां की खरीद बिक्री से यह ब्रांड की स्थापना की गई थी और आज यह ब्रांड इस उपलब्धि तक पहुंच चुका है कि मलाइका अरोड़ा जैसे मशहूर अदाकारा के हाथों इस ब्रांड को पुरस्कृत किया गया है और आगे भी इसी तरह से कड़ी मेहनत से उपलब्धियां की नई ऊंचाइयों को हासिल करना है जिससे कि आगे और भी पुरस्कारों से यह ब्रांड को पुरस्कृत किया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि हर किसी का सपना होता है कि वह चार पहिया वाहन का आनंद ले और उनके इसी सपने को साकार करने के लिए हमने यह ब्रांड की स्थापना की थी और सैकड़ो लोगों के सपनों को हमने सरकार किया है और आगे भी लोगों के सपनों को साकार करने की इच्छा लेकर और भी कड़ी मेहनत से यह ब्रांड जनहित में कार्य करेगी।
“18वीं झारखंड राज्य सब-जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप” में मुख्य अतिथि के रूप में खरसावां के विधायक दशरथ गागराई हुए शामिल।
सरायकेला/आदित्यपुर
सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एम टाइप दुर्गा पूजा मैदान में झारखंड बॉक्सिंग एसोसिएशन और प्रवीण सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित त्रि-दिवसीय “18वीं झारखंड राज्य सब-जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप” प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।
उक्त कार्यक्रम के दूसरे दिन खिलाड़ियों का हौसला अफजाई के लिए मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए खरसावां के विधायक दशरथ गागराई। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों का हौसला अफजाई करते हुए कहा कि खिलाड़ी जिला से लेकर स्टेट और स्टेट से लेकर देश तक खेलने के बाद पूरे दुनिया में बेहतर प्रदर्शन कर झारखंड और देश का नाम रोशन करें ।
वहीं इस कार्यक्रम के अवसर पर सेवानिवृत शिक्षिका राष्ट्रपति अवार्डी संध्या प्रधान, ईचागढ के पूर्व विधायक अरविंद कुमार सिंह उर्फ़ मलखान सिंह, आदित्यपुर नगर निगम के पूर्व उप महापौर अमित सिंह उर्फ बॉबी सिंह, किशन सोंथालिया सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे।
सब्जी खेत में निकला विशाल अजगर, दहशत में ग्रामीण।रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ने की मांग।
सरायकेला/चांडिल
सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कुकरू गांव में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक सब्जी खेत में विशालकाय अजगर सांप देखने को मिला। अजगर के निकलने की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। अजगर के आकार और वजन को देखकर लोग हैरान रह गए।
ग्रामीणों के अनुसार खेत की सुरक्षा और जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए खेत के चारों ओर प्लास्टिक का जाल लगाया गया था। इसी जाल में अजगर फंस गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल सका। खेत में काम करने पहुंचे लोगों की नजर जैसे ही सांप पर पड़ी, उन्होंने शोर मचाकर आसपास के लोगों को इसकी सूचना दी।
अजगर के खेत में पाए जाने से ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बन गया है। खासकर महिलाएं और बच्चे खेत की ओर जाने से कतरा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सांप जाल से निकल जाता है तो आसपास के इलाके में खतरा बढ़ सकता है। बतख, मुर्गी, भेंड़, बकरी यहां तक कि अजगर विशालकाय होने के कारण छोटे बच्चों तक को भी निगल सकता है।
हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार अजगर आमतौर पर जहरीला नहीं होता है, लेकिन उसका विशाल आकार किसी भी व्यक्ति या पशु के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचकर अजगर को देखने लगे। कई लोगों ने मोबाइल फोन से वीडियो और तस्वीरें भी बनाई। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में पहली बार इतना बड़ा अजगर देखा गया है, जिससे लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ डर भी बना हुआ है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुकरू क्षेत्र जंगलों और पहाड़ी इलाकों से जुड़ा हुआ है, जिस कारण समय-समय पर जंगली जीव,आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं।
वहीं घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सांप को रेस्क्यू करने मौके पर पहुंची और सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया जिसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
आजसू पार्टी के ईचागढ़ प्रखंड अध्यक्ष को पितृशोक,क्षेत्र में शोक की लहर।
सरायकेला/ईचागढ़
ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के तुता पंचायत के चोगा गांव निवासी एवं आजसू पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष गोपेश कुमार महतो के पिताजी प्रदीप कुमार महतो, उम्र- 60 वर्ष का आकस्मिक निधन शनिवार को हो गया। निधन की सूचना मिलते ही आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरेलाल महतो व अन्य ग्रामीण चोगा स्थित उनके घर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित किया। चिमटिया पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि अनाथ चंद्र महतो ने बताया कि प्रदीप कुमार महतो एक मिलनसार व्यक्ति थे साथ ही खेल में काफी रुचि रखते थे।
उन्होंने बताया कि वो प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय गौरांगकोचा में अनुबंध शिक्षक के रुप में काफी समय तक सेवा दे चुके हैं। उनके पिता उमाकांत महतो, सेवानृवित शिक्षक सह ईचागढ़ प्रखंड के सांसद प्रतिनिधि, तुता पंचायत के पंचायत समिति सदस्य के रुप में सेवा दे चुके हैं। वर्तमान समय में उनके बड़े पुत्र गोपेश कुमार महतो ईचागढ़ प्रखंड अध्यक्ष आजसू पार्टी का नेतृत्त्व कर रहे है। प्रदीप कुमार महतो अपना भरा पुरा परिवार को छोड़कर परलोक में चल बसे। प्रदीप कुमार महतो का अंतिम संस्कार सीता नाला नदी में शनिवार को पारम्परिक रिति-रिवाज से किया गया।
चांडिल में आदिवासी महिला से पुलिस की बदसलूकी का आरोप।
एसआई यमुना रामपर महिला के साथ मारपीट व कपड़े फाड़ने का आरोप।
सरायकेला/चांडिल
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र में एक आदिवासी महिला के साथ कथित पुलिसिया दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। चांडिल थाना में पदस्थापित एसआई यमुना राम पर आरोप है कि उन्होंने एक आदिवासी महिला के साथ मारपीट की, उसके कपड़े फाड़ दिए तथा गाली-गलौज की। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को एसआई यमुना राम एक नाबालिग युवक बलराम सिंह मुंडा की तलाश में रुचाप बस्ती स्थित उसके घर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि बलराम घर पर नहीं मिलने के बाद पुलिसकर्मी उसकी मामी से उलझ गए। वायरल वीडियो में महिला के साथ कथित रूप से गाली-गलौज और धक्का-मुक्की होती दिखाई दे रही है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि महिला को डंडे से पीटा गया तथा उसके साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया।
परिजनों के अनुसार, बलराम मुंडा (जन्म तिथि 07 जनवरी 2010) नाबालिग है। बताया जाता है कि 10 जून की रात वह स्नान कर घर लौट रहा था। इसी दौरान उसने रास्ते में गणेश सिंह सरदार और रोहित आदित्यदेव को आपस में विवाद करते देखा। आरोप है कि वहां पहुंचते ही रोहित आदित्यदेव ने उसे गणेश का सहयोगी समझकर धक्का-मुक्की की। बाद में रोहित की शिकायत पर पुलिस बलराम को पकड़ने उसके घर पहुंची थी।
पीड़ित परिवार का कहना है कि बलराम के माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं और परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। घटना के बाद घायल महिला का चांडिल अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराया गया।मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने एसआई यमुना राम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने कहा है कि वे न्याय की मांग को लेकर जिले के पुलिस अधीक्षक से भी मुलाकात करेंगे।