सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावाँ जिले में शुक्रवार को होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की खबरों सामने आ रही थी जिस पर जिला प्रशासन अलर्ट हो गई है। स्थानीय समाचारों में बाहरी अभ्यर्थियों द्वारा गलत आवासीय प्रमाण पत्र के आधार पर मेधा सूची में जगह बनाने की खबरों पर जिला दंडाधिकारी का उपयुक्त ने संज्ञान ले लिया है।

प्रभारी पदाधिकारी (सामान्य शाखा) ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि वर्तमान में प्रकाशित सूची केवल शारीरिक दक्षता और हिंदी लेखन परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की गई है। नामांकन की प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई है। मेधा सूची में शामिल होना अंतिम चयन की गारंटी नहीं है।
प्रशासन के अनुसार, 29 अप्रैल 2026 से 06 मई 2026 तक अभ्यर्थियों की चिकित्सकीय जाँच और मूल प्रमाण पत्रों का मिलान किया जाएगा। यदि इस दौरान किसी का आवासीय प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो अभ्यर्थी की दावेदारी तुरंत रद्द कर दी जाएगी। साथ ही, गंभीर जालसाजी के मामलों में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन संख्या 1/2025 के प्रावधानों के तहत, अंतिम चयन से पहले सभी सफल अभ्यर्थियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। इसमें निवास स्थान, पूर्ववृत्त और चरित्र की गहराई से जांच की जाएगी। प्रशासन ने अभ्यर्थियों को अफवाहों से बचने और पूरी प्रक्रिया की शुचिता व पारदर्शिता पर भरोसा रखने की अपील की है।
यह है मामला:-
शुक्रवार को होमगार्ड बहाली प्रक्रिया को फर्जीवाड़ा बताते हुए झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन ने नियुक्ति में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव राजीव कुमार तिवारी ने प्रेस वार्ता कर दस्तावेजों के साथ दावा किया कि बहाली प्रक्रिया में फर्जी आवासीय प्रमाणपत्रों के आधार पर बाहरी अभ्यर्थियों का चयन किया गया है जिससे स्थानीय युवाओं के अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है। सबसे चौंकाने वाला मामला आदित्यपुर क्षेत्र के एक पते से सामने आया है जहां एक ही पते पर करीब 73 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया जिनमें से 24 का चयन भी हो गया। इसी तरह अन्य पतों पर भी असामान्य रूप से अधिक संख्या में आवेदन और चयन दर्ज किए गए हैं, एक पते पर 11 में से 8 और दूसरे पते पर 4 में से 4 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। एसोसिएशन का कहना है कि यह स्थिति पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है। प्रेस वार्ता में तिवारी ने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें सत्यापन के बिना स्वीकार कर लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कई अभ्यर्थियों के पते अधूरे या संदिग्ध हैं इसके बावजूद उनका चयन होना प्रशासनिक लापरवाही या सुनियोजित गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। इस संबंध में एसोसिएशन ने उपायुक्त को लिखित आवेदन सौंपते हुए विस्तृत जांच की मांग की है। आवेदन में सभी चयनित अभ्यर्थियों के आवासीय प्रमाणपत्रों का डोर-टू-डोर सत्यापन कराने, संदिग्ध मामलों को निरस्त करने और दोषी अधिकारियों व अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष प्रकाश पूर्ति ने भी कहा कि यदि समय रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर संगठन आंदोलन का रास्ता भी अपनाएगा। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
जिस पर संज्ञान लेते हुए जिले के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे मामलों को स्पष्ट किया है। फिलहाल सब की निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी।















