टाटा स्टील कर्मचारियों को बोनस: मेहनत की कमाई को भविष्य की मजबूती बनाएं।

टाटा स्टील कर्मचारियों को बोनस: मेहनत की कमाई को भविष्य की मजबूती बनाएं।

जमशेदपुर

टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए इस वर्ष बोनस को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। कंपनी प्रबंधन और यूनियन के बीच बोनस समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष कर्मचारियों को कुल लगभग 330 करोड़ रुपये का बोनस मिलेगा।

पिछले वर्ष कर्मचारियों को लगभग 303.13 करोड़ रुपये का बोनस मिला था। इसमें जमशेदपुर के 11,466 कर्मचारियों के बीच 152.44 करोड़ रुपये वितरित किए गए थे। इस वर्ष पुराने फार्मूले के आधार पर बोनस देने पर सहमति बनी है और अंतिम समझौता प्रबंधन एवं यूनियन के बीच सर्वसम्मति से हुआ है।

विगत दो दिन पहले ही टाटा वर्कर्स यूनियन एवं टाटा स्टील प्रबंधन के बीच बोनस के संबंध में अंतिम निर्णय लिया गया है, जो सभी के लिए सर्वमान्य है। समझौते के अनुसार लगभग 330 करोड़ रुपये की बोनस राशि एक सप्ताह के भीतर कर्मचारियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

इस सफल एवं सौहार्दपूर्ण वार्ता के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन और टाटा स्टील प्रबंधन को विशेष रूप से बधाई। साथ ही, टाटा स्टील के प्रबुद्ध निदेशक मंडल एवं नेतृत्व को भी इस सकारात्मक निर्णय के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

अनुमान के अनुसार, इस वर्ष कर्मचारियों को अधिकतम लगभग 4.25 लाख रुपये तथा न्यूनतम करीब 52 हजार रुपये तक बोनस मिल सकता है। हालांकि प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राशि उसके वेतन, सेवा अवधि तथा निर्धारित फार्मूले के आधार पर तय होगी।

बोनस कर्मचारियों की वर्षभर की मेहनत और कंपनी की प्रगति में उनके योगदान का सम्मान है। इसलिए मेरा सभी टाटा स्टील कर्मचारियों से विशेष आग्रह है कि बोनस की पूरी राशि को अचानक खरीदारी, दिखावे या गैर-जरूरी खर्चों में समाप्त न करें।

बोनस प्राप्त होने पर सबसे पहले अपने परिवार की आवश्यकताओं और आर्थिक जिम्मेदारियों का आकलन करें। यदि कोई कर्ज या जरूरी भुगतान लंबित है, तो उसे प्राथमिकता दें। इसके बाद बोनस की एक अच्छी राशि को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने अथवा उचित निवेश करने पर विचार करें।

बच्चों की शिक्षा, उनके भविष्य, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं, घर की जरूरतों तथा आकस्मिक परिस्थितियों के लिए आपातकालीन निधि तैयार करना एक समझदारी भरा कदम होगा। अपनी उम्र, आय, आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार सावधि जमा, सार्वजनिक भविष्य निधि, व्यवस्थित निवेश योजना, म्यूचुअल फंड अथवा अन्य उपयुक्त निवेश विकल्पों पर किसी योग्य वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह लेकर विचार किया जा सकता है।

बोनस का कुछ हिस्सा परिवार के साथ खुशी मनाने में खर्च करना स्वाभाविक और उचित है। आखिर यह वर्षभर की मेहनत का फल है। लेकिन पूरी राशि को तुरंत खर्च कर देना आर्थिक दृष्टि से समझदारी नहीं होगी। बोनस की वास्तविक सफलता तभी है, जब इससे आज की खुशी के साथ-साथ आने वाले कल की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो।

टाटा स्टील के कर्मचारियों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण से कंपनी की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब इस मेहनत से प्राप्त बोनस को सही तरीके से बचत, निवेश और भविष्य की सुरक्षा में लगाकर अपने परिवार को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।

“बोनस आज मिला है, लेकिन इसका लाभ आने वाले कई वर्षों तक मिले यही सही आर्थिक सोच है।”

ए. के. श्रीवास्तव
अध्यक्ष, जमशेदपुर सिटीजन फोरम
उद्यमी एवं परामर्शी

आदित्यपुर-2 में जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन, पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा- कृष्ण के आदर्शों से ही बनेगा सशक्त समाज।

आदित्यपुर-2 में जन्माष्टमी महोत्सव का आयोजन, पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा- कृष्ण के आदर्शों से ही बनेगा सशक्त समाज।

आदित्यपुर में जन्माष्टमी पर निकली भव्य शोभायात्रा, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन हुए शामिल

सरायकेला/आदित्यपुर

श्री श्री राधा कृष्ण मंदिर निर्माण समिति, श्रीकृष्णनगर, आदित्यपुर-2 द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में मनाया गया।

इस मौके पर आयोजित विशाल शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ‘जय श्री कृष्ण’ और ‘राधे-राधे’ के नारों से पूरा इलाका भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधायक चंपाई सोरेन ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण का पूरा जीवन हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और न्याय स्थापित करने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि जब भी समाज में अन्याय बढ़ा है, श्रीकृष्ण ने अपनी बुद्धिमत्ता और रणनीति से उसका अंत किया है। आज के समय में भी समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए हमें उनके बताए मार्ग पर चलना होगा। आदिवासी, दलित समेत सभी वर्गों को साथ लेकर ही एक समान और मजबूत समाज बनाया जा सकता है।

आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर अंकुर सिंह ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करने का काम करते हैं। जब लोग एक साथ मिलकर पूजा-पाठ करते हैं तो आपसी प्रेम और भाईचारा और भी मजबूत होता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से सभी के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।

वहीं आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह ने सभी जनप्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों के सहयोग की सराहना की और क्षेत्र में शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कार्यक्रम का संचालन किया और आए हुए सभी मेहमानों का स्वागत किया।

जन्मोत्सव के दौरान भोजपुरी गायक राजेश रसिक ने अपने भजनों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा स्थानीय कलाकारों ने भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक नृत्य-संगीत की प्रस्तुति दी, जिसमें महिलाओं और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री के आप्त सचिव चंचल गोस्वामी, सिमल सोरेन, पार्षद उत्तरा प्रधान, रिंकी कुमारी, संगीता सामड, शिक्षाविद सत्यप्रकाश सुधांशु, अजीत कुमार, मंदिर समिति के अध्यक्ष एस.एन. यादव, वीरेंद्र यादव, विजय यादव, परमेश्वर प्रधान, सुभाष करुआ, उमेश यादव, आर.के. सिंह सहित आयोजन समिति के के.एल. यादव, नगीना प्रसाद पंडित, जितेंद्र पांडेय, संतोष कुमार सिंह, रामाधार सिंह और अन्य सदस्य मौजूद रहे।

पावन पर्व ‘श्री कृष्ण जन्माष्टमी’ के अवसर पर प्रखंड वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं

पावन पर्व ‘श्री कृष्ण जन्माष्टमी’ के अवसर पर प्रखंड वासियों को हार्दिक शुभकामनाएं

बरडीहा:
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन  अवसर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने अपने शुभकामना संदेश में कहा, “भगवान श्री कृष्ण का जीवन हमें सत्य, निष्काम कर्म, धर्म, प्रेम और सौहार्द के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी का यह पावन पर्व हम सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्री कृष्ण की शिक्षाएं हमें समाज में आपसी भाईचारा और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण बनाए रखने का मार्ग दिखाती हैं। हम सभी का यह दायित्व है कि हम इस पवित्र पर्व को पूरे हर्षोल्लास, गरिमापूर्ण वातावरण में मनाएं।

3,800 बच्चों की मुक्ति ने खोला बड़ा सवाल: बचपन बिक रहा है,कानून देख रहा है? :ढाबों से कारखानों तक मासूम हाथों का शोषण; कानून मौजूद, कार्रवाई भी संभव, तो फिर बालश्रम खत्म क्यों नहीं?

3,800 बच्चों की मुक्ति ने खोला बड़ा सवाल: बचपन बिक रहा है,कानून देख रहा है? :ढाबों से कारखानों तक मासूम हाथों का शोषण; कानून मौजूद, कार्रवाई भी संभव, तो फिर बालश्रम खत्म क्यों नहीं?

बच्चे मजदूर नहीं,भारत का भविष्य हैं :नक्सल मुक्त, नशामुक्त भारत की तरह  बालश्रम मुक्त भारत का संकल्प की डेट लाइन क्यों नहीं?

ढाई महीनों में 3,800 बच्चे मुक्त, 575 एफआईआर: अभियान सालभर चले तो बदल सकती है भारत की तस्वीर -क्या अब बनेगा बालश्रम मुक्त भारत का राष्ट्रीय मिशन? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत जब विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और 2047 तक एक समृद्ध एवं न्यायपूर्ण समाज बनाने का संकल्प ले रहा है,तब उसके सामने एक ऐसा प्रश्न भी खड़ा है जिसे केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं टाला जा सकता,क्या देश का बचपन वास्तव में सुरक्षित है?भारत की सड़कों,चौराहों और चमचमाते महानगरों के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिपा है, जो देश के आर्थिक महाशक्ति बनने के दावों को सीधे तौर पर चुनौती देता है।सड़क किनारे चाय की दुकान पर गिलास धोता बच्चा, ढाबे पर ग्राहकों को खाना परोसता छोटू, ट्रैफिक सिग्नल पर सामान बेचता मासूम,निर्माण स्थल पर ईंट ढोता बच्चा या किसी कारखाने में मशीनों के बीच काम करता नाबालिग केवल गरीबी की तस्वीर नहीं है; वह उस व्यवस्था के सामने खड़ा एक गंभीर सवाल है, जिसमें कानून होने के बावजूद उसका प्रभावी क्रियान्वयन हर जगह दिखाई नहीं देता। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि 3,800 बच्चों की मुक्ति ने खोला बड़ा सवाल:बचपन बिक रहा है,कानून देख रहा है? :ढाबों से कारखानों तक मासूम हाथों का शोषण ;कानून मौजूद, कार्रवाई भी संभव,तो फिर बालश्रम खत्म क्यों नहीं?बच्चे मजदूर नहीं,भारत का भविष्य हैं:नक्सल मुक्त,नशामुक्त भारत की तरह  बालश्रम मुक्त भारत का संकल्प की डेट लाइन क्यों नहीं?बता दूँ क़ि शासकीय मीडिया में आई खबरों के अनुसार, इस सवाल को और गंभीर बना दिया है,दिनांक 4 सितंबर 2026 क़ो रिपोर्ट आई क़ि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के हालिया अभियान ने।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत वैधानिक संस्था एनसीपीसीआर ने 12 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक विशेष अखिल भारतीय बचाव और पुनर्वास अभियान चलाया। राज्य सरकारों, केंद्रशासित प्रदेशों, जिलाधिकारियों श्रम विभागों, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय से चलाए गए इस अभियान में 3,800 से अधिक बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया गया और 575 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं।  यह आंकड़ा केवल सफलता की कहानी नहीं है; यह उस समस्या की गहराई का भी संकेत है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में कानून की मौजूदगी के बावजूद बनी हुई है।
साथियों, सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यहीं से जन्म लेता है,यदि लगभग ढाई महीने के लक्षित और सक्रिय अभियान में 3,800 से अधिक बच्चे मुक्त कराए जा सकते हैं, तो क्या ऐसी कार्रवाई पूरे वर्ष नियमित रूप से नहीं हो सकती? यदि प्रत्येक जिले में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करके लगातार औचक निरीक्षण, गोपनीय सूचना तंत्र और बहु- विभागीय कार्रवाई की जाए, तो निश्चित रूप से बालश्रम के विरुद्ध कार्रवाई का दायरा बहुत बड़ा हो सकता है। एनसीपीसीआर के अभियान में भी जिलाधिकारियों,श्रम विभाग और पुलिस के साथ समन्वय तथा नियमित निगरानी को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी।इसलिए यह अभियान एक अस्थायी कार्रवाई भर न रहकर स्थायी जिला-स्तरीय प्रवर्तन मॉडल का आधार बन सकता है।बालश्रम की समस्या केवल ढाबों, चाय की दुकानों या छोटे कारखानों तक सीमित नहीं है। ईंट-भट्टों,निर्माण स्थलों,कृषि क्षेत्र,घरेलू काम,कचरा बीनने, कार्यशालाओं बाजारों, होटल- ढाबों,कारखानों और कुछ खतरनाक औद्योगिक गतिविधियों में भी बच्चों के शोषण का जोखिम मौजूद रहता है।विशेष रूप से प्रवासी परिवारों के बच्चों के मामले में समस्या और जटिल हो जाती है, क्योंकि उनका विद्यालय से जुड़ाव टूट सकता है और परिवार की आर्थिक मजबूरी उन्हें काम की ओर धकेल सकती है। बालश्रम इसलिए केवल श्रम कानून का विषय नहीं है; यह गरीबी, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, प्रवासन, मानव तस्करी और प्रशासनिक जवाबदेही इन सभी को सटीकता से जोड़ने वाला प्रश्न है।

साथियों, यहीं रोजगार बाजार का एक चिंताजनक पहलू सामने आता है।बालश्रम सस्ता असंगठित और अधिकार -विहीन श्रम उपलब्ध कराता है।बच्चों को सामान्यतः संगठित श्रमिकों की तरह अपने अधिकारों, मजदूरी, कार्य -समय या श्रम-सुरक्षा की जानकारी नहीं होती और वे ट्रेड यूनियन जैसी सामूहिक संरचनाओं से भी जुड़े नहीं होते। इस कारण कुछ नियोक्ताओं के लिए उनका शोषण आर्थिक रूप से आकर्षक दिखाई दे सकता है। लेकिन किसी बच्चे की मजबूरी को सस्ता श्रम मान लेना केवल आर्थिक अन्याय नहीं, बल्कि उसके शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा और भविष्य पर हमला है।इस समस्या का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू प्रवर्तन की विश्वसनीयता है। किसी क्षेत्र में यदि कानून का उल्लंघन लंबे समय तक चलता रहे, तो स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठता है कि निरीक्षण व्यवस्था कितनी प्रभावी है। हालांकि किसी विशेष अधिकारी या विभाग पर मिलीभगत अथवा भ्रष्टाचार का आरोप प्रमाण के बिना नहीं लगाया जाना चाहिए, लेकिन यदि शिकायतों के बावजूद बालश्रम लगातार दिखाई देता है, तो संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। नियमित निरीक्षण,शिकायतों की स्वतंत्र जांच, कार्रवाई की डिजिटल निगरानी और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आकस्मिक निरीक्षण इस विश्वास को मजबूत कर सकते हैं कि कानून केवल कागज पर नहीं, जमीन पर भी सटीकता से लागू होता है।

साथियों, इस संदर्भ में जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।प्रत्येक जिले में बालश्रम और बाल तस्करी के संभावित हॉटस्पॉट का मानचित्र तैयार किया जाए। पुलिस, श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति और विश्वसनीय नागरिक-संगठनों के बीच एक समन्वित तंत्र बनाया जाए। कार्रवाई से पहले सूचना लीक न हो, इसके लिए जोखिम-आधारित और गोपनीय निरीक्षण व्यवस्था विकसित की जा सकती है। प्रत्येक बचाव के बाद केवल एफआईआर दर्ज करके मामला समाप्त न हो; बच्चे की पहचान, परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुनर्वास और दोबारा बालश्रम में लौटने के जोखिम की भी सटीकता से निगरानी हो।
साथियों, भारत के पास इस दिशा में महत्वपूर्ण कानूनी आधार पहले से मौजूद है। बाल और किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को रोजगार या काम में लगाने पर व्यापक प्रतिबंध है, जबकि 14 से 18 वर्ष के किशोरों को निर्धारित खतरनाक व्यवसायों और प्रक्रियाओं में नियोजित करना प्रतिबंधित है। कानून में सीमित पारिवारिक सहायता से जुड़ा अपवाद है, लेकिन वह भी निर्धारित शर्तों के अधीन है और बच्चे की शिक्षा तथा गैर-खतरनाक गतिविधियों की सीमाओं से बंधा है। दंड के मामले में भी कानून कमजोर नहीं है। बच्चे को अवैध रूप से नियोजित करने पर नियोक्ता को छह महीने से दो वर्ष तक की जेल या 20,000 से 50,000 रूपए तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। किशोर को प्रतिबंधित खतरनाक काम में लगाने पर भी समान दंडात्मक प्रावधान लागू होते हैं। दोबारा अपराध करने पर कानून अधिक कठोर सजा का प्रावधान करता है।  इसलिए वास्तविक चुनौती कानून की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि पकड़े जाने की निश्चितता,निष्पक्ष जांच अभियोजन और न्यायिक परिणाम की सटीकता से प्रभावशीलता है।

साथियों संवैधानिक और शैक्षिक ढांचा भी स्पष्ट दिशा देता है। संविधान का अनुच्छेद 24 बच्चों को कुछ खतरनाक रोजगारों से सुरक्षा प्रदान करता है और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था करता है। इसका मूल दर्शन सीधा है,बच्चे के हाथ में औजार नहीं, किताब होनी चाहिए। इसलिए बालश्रम के खिलाफ कार्रवाई तभी स्थायी होगी, जब बचाए गए बच्चे को केवल कार्यस्थल से हटाकर उसके भविष्य से जोड़ा जाए।यही कारण है कि पुनर्वास को बचाव जितना ही महत्वपूर्ण मानना होगा। बचाए गए बच्चे को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना, परिवार की स्थिति का आकलन करना, शिक्षा से जोड़ना, आवश्यकतानुसार आवास, भोजन, स्वास्थ्य और मनोसामाजिक सहायता देना तथा आर्थिक पुनर्वास की निगरानी करना आवश्यक है। यदि बच्चे को आज दुकान से निकालकर कल उसी गरीबी में छोड़ दिया गया, तो वह किसी दूसरे नियोक्ता के पास फिर काम करने लग सकता है। अतः ‘रेस्क्यू’ को अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि पुनर्वास की पहली सीढ़ी माना जाना चाहिए।

साथियों, डिजिटल व्यवस्था भी इस लड़ाई को अधिक पारदर्शी बना सकती है।श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार पेंसिल (प्लेटफार्म फॉर इफेक्टिव इनफ़ोर्समेंट फॉर नों चाइल्ड लेबर )पोर्टल पर बालश्रम संबंधी शिकायत दर्ज की जा सकती है और शिकायत संबंधित जिला नोडल अधिकारी तक कार्रवाई के लिए भेजी जाती है। मंत्रालय ने यह भी बताया है कि बालश्रम संबंधी शिकायत व्यवस्था को व्यापक बाल-सुरक्षा तंत्र के साथ जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।  अर्थात नागरिकों की शिकायत, प्रशासनिक कार्रवाई और पुनर्वास की जानकारी को एक डिजिटल निगरानी प्रणाली में जोड़ना भविष्य की प्रभावी व्यवस्था बन सकता है।

साथियों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बालश्रम को केवल स्थानीय सामाजिक समस्या नहीं माना जाता। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओं) ने 12 जून 2026 के विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर शिक्षा,सामाजिक सुरक्षा, गरिमापूर्ण वयस्क रोजगार, मजबूत कानून और प्रभावी प्रवर्तन को बालश्रम समाप्त करने के प्रमुख उपायों के रूप में रेखांकित किया।इसका अर्थ स्पष्ट है बालश्रम समाप्त करने के लिए केवल बच्चों को काम से हटाना पर्याप्त नहीं; वयस्कों को सम्मानजनक रोजगार, परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी होगी।अब भारत के सामने एक बड़ा अवसर है। जिस तरह देश ने नशामुक्ति, मानव तस्करी, उग्रवाद और अन्य सामाजिक चुनौतियों के विरुद्ध लक्षित अभियानों और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा में प्रयास किए हैं, उसी तरह बालश्रम मुक्त भारत को भी एक स्पष्ट राष्ट्रीय लक्ष्य बनाया जा सकता है। प्रत्येक जिले के लिए वार्षिक लक्ष्य, हॉटस्पॉट की सूची, नियमित औचक निरीक्षण, बचाव के बाद पुनर्वास की समयसीमा, एफआईआर और अभियोजन की स्थिति तथा अधिकारियों की जवाबदेही का सार्वजनिक डैशबोर्ड सटीकता से बनाया जा सकता है।

साथियों सबसे बड़ी आवश्यकता सामाजिक मानसिकता बदलने की है। जब हम किसी बच्चे को ढाबे पर देखकर उसे छोटू कहकर बुलाते हैं,तब हमें यह याद रखना होगा कि वह किसी का नौकर नहीं, देश का भविष्य है। ग्राहक यदि बालश्रम को स्वीकार करना बंद कर दें, नियोक्ता कानून का भय महसूस करें,अधिकारी कार्रवाई को अपनी जिम्मेदारी समझें और समाज शिकायत करने को अपना नागरिक कर्तव्य माने, तो तस्वीर बदल सकती है।एनसीपीसीआर के 2026 अभियान के 3,800 से अधिक मुक्त बच्चों और 575 से अधिक एफआईआर को इसलिए केवल एक सरकारी उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह एक प्रयोगशाला-सरीखा प्रमाण है कि जब केंद्र, राज्य, जिला प्रशासन, पुलिस और श्रम तंत्र एक दिशा में सक्रिय होते हैं, तो परिणाम सामने आते हैं।  अब आवश्यकता इस मॉडल को अभियान से निकालकर निरंतर प्रशासनिक व्यवस्था बनाने की है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भारत यदिवास्तव में विकसित, संवेदनशील और न्यायपूर्ण राष्ट्र बनना चाहता है, तो विकास की अंतिम कसौटी केवल ऊंची इमारतें, बड़ी अर्थव्यवस्था या आधुनिक तकनीक नहीं हो सकती। असली कसौटी यह होगी कि देश की सड़कों, दुकानों, कारखानों और घरों में कितने बच्चों के हाथों से मजदूरी छूटी और कितने हाथों में किताबें आईं। इसलिए अब प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि बालश्रम कब खत्म होगा? बल्कि राष्ट्रीय संकल्प यह होना चाहिए, बालश्रम खत्म करने के लिए हम आज से क्या करेंगे?’और शायद इसी सवाल का सबसे प्रभावशाली उत्तर हो सकता है अभियान कुछ महीनों का नहीं, संकल्प पूरे वर्ष का; कार्रवाई कुछ जिलों की नहीं, पूरे भारत की; और लक्ष्य केवल बालश्रम कम करना नहीं, बल्कि भारत को वास्तविक अर्थों में बालश्रम मुक्त भारत बनाना।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

सरायकेला-खरसावां: आदित्यपुर, RIT और गम्हरिया थाना क्षेत्र में खुलेआम प्रतिबंधित नशे का कारोबार, युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में।

सरायकेला-खरसावां: आदित्यपुर, RIT और गम्हरिया थाना क्षेत्र में खुलेआम प्रतिबंधित नशे का कारोबार, युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में।

सरायकेला/आदित्यपुर

गांजा शराब ड्रग्स मुख्य रूप से शामिल है।

औद्योगिक क्षेत्र के नाम से मशहूर सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर, RIT और गम्हरिया थाना अंतर्गत प्रतिबंधित नशा का कारोबार इन दिनों बिना रोक-टोक के फल-फूल रहा है। स्थानीय लोगों की मानें तो शाम ढलते ही कई चौक-चौराहों, सुनसान गलियों और झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में नशे की पुड़िया और नशीले पदार्थों की बिक्री आम हो गई है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस अवैध कारोबार की चपेट में सबसे ज्यादा 15 से 25 साल के युवा आ रहे हैं। स्कूल-कॉलेज के छात्र भी इसके जाल में फंसते जा रहे हैं। अभिभावकों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भारी चिंता है।

सूत्रों के अनुसार यह कारोबार संगठित तरीके से चल रहा है। छोटे-छोटे पैडलर के माध्यम से इसकी सप्लाई की जाती है। कई बार स्थानीय लोगों द्वारा थाने में शिकायत भी की गई, परन्तु कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं।

जनहित में मांग:
क्षेत्र के बुद्धिजीवी और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन और वरीय पुलिस अधीक्षक, सरायकेला-खरसावां से मांग की है कि –
1. आदित्यपुर, RIT, गम्हरिया क्षेत्र में विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाए।
2. नशा के विरुद्ध जागरूकता अभियान स्कूल-कॉलेजों में चलाया जाए।
3. गुप्त सूचना तंत्र को मजबूत कर बड़े सप्लायरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, _”हम अपने बच्चों को बाहर भेजने से डरते हैं। अगर समय रहते रोक नहीं लगी तो यह औद्योगिक क्षेत्र अपराध का अड्डा बन जाएगा।

नोट: यह समाचार जनहित और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है।

आदित्यपुर में गैस एजेंसी संचालक दंपती पर हमला, सिलेंडर लूट का आरोप; वार्ड-2 में दहशत।

आदित्यपुर में गैस एजेंसी संचालक दंपती पर हमला, सिलेंडर लूट का आरोप; वार्ड-2 में दहशत।

सरायकेला/आदित्यपुर

आदित्यपुर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 2, धीराजगंजा से दबंगई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक नव-निर्मित गैस एजेंसी संचालक दंपती के साथ मारपीट और जबरन गैस सिलेंडर ले जाने का आरोप लगा है। इस संबंध में पीड़िता श्रीमती जोबा हेम्ब्रम ने आदित्यपुर थाना में लिखित शिकायत देकर न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है।

पीड़िता जोबा हेम्ब्रम और उनके पति विकास चंद्र गुप्ता द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, घटना 02 सितंबर 2026 की रात करीब 11:30 बजे की है। आरोप है कि कार्तिक सरदार, बबलू सरदार, गौतम गोराई, बबलू कालिंदी, मनोज सरदार और महेश महतो नामक छह लोग अचानक उनके घर पहुंचे और बिना कुछ कहे घर में रखा गैस सिलेंडर उठाकर ले जाने लगे।

जब पति विकास चंद्र गुप्ता ने इसका विरोध किया तो सभी आरोपियों ने मिलकर उन पर लात-घूंसों और लोहे की रॉड से जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वे जमीन पर गिर पड़े। पीड़िता का आरोप है कि जब वह अपने पति को बचाने के लिए बीच-बचाव करने गई तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की।

शिकायत में पीड़िता ने बताया कि मारपीट के दौरान आरोपी कार्तिक सरदार और बबलू सरदार बार-बार धमकी देते हुए कह रहे थे कि “बिना मेयर की परमिशन लिए गैस एजेंसी क्यों ली?”

जोबा हेम्ब्रम ने बताया कि उनके पति ने 4 लाख 90 हजार रुपये देकर गैस एजेंसी का काम शुरू किया था और 02 सितंबर काम का पहला ही दिन था, उसी रात यह घटना घट गई।

पीड़िता ने अपनी शिकायत के साथ एजेंसी से संबंधित सभी दस्तावेज संलग्न किए हैं और आदित्यपुर थाना प्रभारी से आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

वहीं, शिकायत मिलने के बाद आदित्यपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जिले की पुलिसिंग को मिली रफ्तार, बेड़े में शामिल हुईं 19 नई बोलेरो।

जिले की पुलिसिंग को मिली रफ्तार, बेड़े में शामिल हुईं 19 नई बोलेरो।

अब 38 बोलेरो और 26 बाइक से होगी पेट्रोलिंग, एसपी ने खुद स्टेयरिंग संभालकर किया गश्त का निरीक्षण

सरायकेला

(मालखान महतो)
     
सरायकेला-खरसावां जिले में अपराध नियंत्रण, त्वरित पुलिस रिस्पॉन्स और पेट्रोलिंग व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए जिला पुलिस के बेड़े में गुरुवार को 19 नई बोलेरो शामिल की गईं। नए वाहनों के शामिल होने के बाद जिले में पुलिस के पास कुल 38 बोलेरो और 26 बाइक उपलब्ध हो गई हैं। इन वाहनों को विभिन्न थाना क्षेत्रों में पेट्रोलिंग, रात्रि गश्ती, हाईवे निगरानी और विधि-व्यवस्था से जुड़े कार्यों में लगाया जाएगा।

सरायकेला पुलिस केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर नए पेट्रोलिंग वाहनों को रवाना किया। इस दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, मुख्यालय डीएसपी, पुलिस मेंस एसोसिएशन एवं पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारी समेत पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे।

एसपी ने खुद संभाली स्टेयरिंग, क्षेत्र में निकले पेट्रोलिंग पर
नए वाहनों को रवाना करने के बाद एसपी मनोज स्वर्गियारी ने खुद एक पेट्रोलिंग वाहन की स्टेयरिंग संभाली और क्षेत्र में गश्त के लिए निकले। उनके साथ एसडीपीओ एवं मुख्यालय डीएसपी भी रहे। एसपी ने वाहन चलाते हुए कोलेबिरा तक पेट्रोलिंग की और रास्ते में पुलिस की गश्ती व्यवस्था का जायजा लिया।

एसपी ने कहा कि नए वाहनों के मिलने से जिला पुलिस की गतिशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ेगी। किसी आपराधिक घटना या विधि-व्यवस्था से संबंधित सूचना मिलने पर पुलिस टीम कम समय में घटनास्थल तक पहुंच सकेगी। नियमित और प्रभावी पेट्रोलिंग से संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के साथ अपराधियों पर भी दबाव बनाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि जिले में बेहतर पुलिसिंग के लिए संसाधनों को मजबूत किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए आम लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना जिला पुलिस की प्राथमिकता है।

दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ेगी पुलिस की पहुंच
सरायकेला-खरसावां का भौगोलिक क्षेत्र विस्तृत है। जिले में शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं दूरदराज के इलाके भी हैं। ऐसे क्षेत्रों में पुलिस की नियमित मौजूदगी और त्वरित रिस्पॉन्स सुनिश्चित करने में नए वाहन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नई बोलेरो का उपयोग रात्रि गश्ती, हाईवे पेट्रोलिंग, अपराधियों की धर-पकड़, आपातकालीन घटनाओं में त्वरित कार्रवाई और विधि-व्यवस्था बनाए रखने में किया जाएगा। इससे पुलिस की क्षेत्र में दृश्यता बढ़ने और रिस्पॉन्स टाइम कम होने की उम्मीद है।
पुलिस को मिले 40 फर्स्ट एड मेडिकल किट

कार्यक्रम से पहले ब्रह्मानंद नारायणा अस्पताल, तमोलिया की ओर से जिला पुलिस को 40 फर्स्ट एड मेडिकल किट उपलब्ध कराए गए। इन किटों को पुलिस वाहनों और जरूरत वाले स्थानों पर रखा जाएगा। सड़क दुर्घटना अथवा अन्य आपात स्थिति में पुलिस के घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने की स्थिति में घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से पहले प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

एसपी ने कहा कि पेट्रोलिंग के दौरान पुलिसकर्मी अक्सर दुर्घटना और अन्य आपात परिस्थितियों में सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं। ऐसे में वाहनों में प्राथमिक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रहने से जरूरतमंदों को तत्काल सहायता देने में काफी सुविधा होगी।
नई बोलेरो और मेडिकल किट के साथ जिला पुलिस की संसाधन क्षमता बढ़ी है। अब इन संसाधनों के जरिए जिले में पुलिस की सक्रियता बढ़ाने, त्वरित रिस्पॉन्स सुनिश्चित करने और अपराध नियंत्रण को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

सरायकेला में मासिक क्राइम मीटिंग, पेंडिंग केस निपटाने और पेट्रोलिंग तेज करने पर जोर।

सरायकेला में मासिक क्राइम मीटिंग, पेंडिंग केस निपटाने और पेट्रोलिंग तेज करने पर जोर।

सरायकेला

सरायकेला सर्कल इंस्पेक्टर कार्यालय में गुरुवार को मासिक अपराध गोष्ठी का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता सर्कल इंस्पेक्टर राजेश टुडू ने की।

इस बैठक में सरायकेला सर्कल के अंतर्गत आने वाले सभी थानों के प्रभारी मौजूद रहे। इनमें सरायकेला, खरसावां, राजनगर, कुचाई और महिला थाना के थानेदार शामिल थे।

मीटिंग में पिछले महीने दर्ज हुए मामलों, उनकी जांच की प्रगति और लंबित कांडों के जल्द निपटारे को लेकर विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक के बाद सर्कल इंस्पेक्टर राजेश टुडू ने बताया कि पूरे अंचल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर अंकुश लगाने के लिए सभी थाना प्रभारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरायकेला शहरी इलाका है, इसलिए यहां सबसे ज्यादा सड़क हादसे और बाइक चोरी के मामले सामने आते हैं। लेकिन पुलिस की लगातार कार्रवाई से बड़े और संगठित अपराधों पर पूरी तरह से नियंत्रण है। बीते कुछ महीनों में बाइक चोर गिरोह का खुलासा करने में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है।

इसके अलावा आमदा ओपी, राजनगर और सरायकेला इलाके में घरों में हुई जेवर चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए पुलिस ने चोरी के जेवरात की बड़ी खेप बरामद की है। टुडू ने कहा कि चोरी की वारदातों और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी थानों को रात्रि गश्ती और पेट्रोलिंग बढ़ाने का आदेश दिया गया है।

श्री राम पब्लिक स्कूल और प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग का 27वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न, प्रतिभाशाली छात्रों को किया गया सम्मानित।

श्री राम पब्लिक स्कूल और प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग का 27वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से संपन्न, प्रतिभाशाली छात्रों को किया गया सम्मानित।

सरायकेला/आदित्यपुर

भाटिया बस्ती स्थित श्री राम पब्लिक स्कूल एवं प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग का 27वां वार्षिक उत्सव सह प्राइज नाइट समारोह आदित्यपुर के ऑटो क्लस्टर सभागार में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आदित्यपुर के उप महापौर अंकुर सिंह, विशिष्ट अतिथि पार्षद मंजू देवी तथा गंगोत्री नर्सिंग होम के निदेशक और विहिप जिलाध्यक्ष डॉ. जे.एन. दास ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान उप महापौर अंकुर सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए जीवन में आगे बढ़ने और सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

संस्थान के निदेशक पंकज प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि यह समारोह संघर्ष, सेवा और सफलता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि संस्था 1999 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है। वर्ष 2012 में एनआईटी के पूर्व प्राचार्य स्व. डॉ. श्री राम प्रसाद की स्मृति में श्री राम पब्लिक स्कूल की स्थापना की गई, वहीं 2021 में शुरू हुआ प्रभावती स्कूल ऑफ नर्सिंग महिला सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है।

समारोह के दौरान शैक्षणिक सत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। प्री-प्राइमरी वर्ग में प्रदीप, आरव महतो और कृतिका, प्राइमरी वर्ग में अनु घोष, रिजवाना आरा और दिव्यांशु तथा हाई स्कूल वर्ग में साहिल, लक्ष्मी, पवन और अंबिका सहित अन्य छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। नर्सिंग संकाय में सानिया गोप, पिंकी पत्रा, रेशमी कुमारी और जाबा रानी महतो को पुरस्कार प्रदान किया गया।

इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उनके मनमोहक नृत्य और गीतों ने सामाजिक संदेश देते हुए सभी का मन मोह लिया।

अंत में प्राचार्या सुषमा कुमारी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सचिव रिंकी प्रसाद, नर्सिंग प्राचार्या श्रेया झा, मो. समशेर समेत सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे।

झामुमो का 7 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियाँ तेज़।

झामुमो का 7 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियाँ तेज़।

सरायकेला/आदित्यपुर

खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा 7 सितंबर को प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियाँ तेज़ हो गई हैं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर विधेयक के प्रावधानों व संभावित प्रभावों से जनता को अवगत कराया और आंदोलन को व्यापक जनाधार देने के लिये रणनीतियाँ बनाईं।

झामुमो के वरिष्ठ नेता और शिक्षाविद केपी सोरेन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक झारखंड सरकार को कमजोर करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। सोरेन ने कहा कि केंद्र पर राज्य का लगभग ₹1,36,000 करोड़ बकाया है और उस राशि का भुगतान टालने के लिए केंद्र विभिन्न तरीकों का सहारा ले रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण जल्दबाज़ी में यह कानून लाया जा रहा है।

सोरेन ने कड़ा रूख अपनाते हुए कहा कि झामुमो किसी भी स्थिति में इस विधेयक को कानून नहीं बनने देगा और इसके खिलाफ “अंतिम और निर्णायक” लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनजागरण अभियान को और तेज़ करें, लोगों तक विधेयक की जानकारी पहुँचाएँ और अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ें।

पार्टी ने बताया कि इस आंदोलन की पहली झलक 7 सितंबर को दिखाई देगी और उसके बाद प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर आगे बढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरायकेला-खरसावां जिला में ऐतिहासिक आंदोलन होगा। बैठकों में जनसंपर्क अभियान, संगठनात्मक रणनीति और स्थानीय स्तर पर लोगों को शामिल करने के तरीकों पर चर्चा जारी है। स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बैठकें और खोज-खबर अभियान सक्रिय हैं ताकि आम जनता को विधेयक के संभावित लाभ-हानि की स्पष्ट जानकारी मिल सके। पुलिस और प्रशासन द्वारा सुरक्षा व जन-व्यवस्था के दृष्टिकोण से क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर अभी वृहद स्तर पर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं हुई है।

झामुमो के प्रस्तावित आंदोलन को लेकर क्षेत्रीय राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रिया और सरकारी रुख पर अगले कुछ दिनों में निगाहें टिकी रहेंगी। जनता के साथ होने वाली बैठकों और 7 सितंबर के आयोजन के बाद ही आंदोलन की दिशा स्पष्ट रूप से सामने आएगी।

चौका घाटी में लोहे लदी गाड़ी दो गाड़ी की टक्कर से , कच्चा लोहा सड़क पर बिखरा; सूचना के बाद भी नहीं पहुंची पुलिस।

चौका घाटी में लोहे लदी गाड़ी दो गाड़ी की टक्कर से , कच्चा लोहा सड़क पर बिखरा; सूचना के बाद भी नहीं पहुंची पुलिस।

सरायकेला/चौका

सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना अंतर्गत चौका घाटी में एक आयरन लदी भारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे वाहन में लदा कच्चा लोहा सड़क पर बिखर गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद गाड़ी चालक द्वारा थाने को कोई सूचना नहीं दी गई। सुबह जब राहगीर वहां से गुजर रहे थे तो देखा गया कि सड़क पर गिरा हुआ कच्चा लोहा दूसरे वाहन  में लोड किया जा रहा था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तत्काल जिला के मोटरयान निरीक्षक (MVI) और चौका थाना प्रभारी को फोन पर सूचना दी, लेकिन समाचार लिखे जाने तक मौके पर कोई पुलिस पदाधिकारी नहीं पहुंचा था, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आए दिन इस घाटी में ओवरलोड आयरन गाड़ियां बेरोकटोक चलती हैं और हादसे के बाद माल को इस तरह उठा ले जाना कहीं न कहीं मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

वहीं इस संबंध में चौका थाना प्रभारी से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसी कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है, पेट्रोलिंग गाड़ी भेजता हूं लेकिन वहां तो पेट्रोलिंग गाड़ी पहुंचने की कोई सूचना नहीं मिली है ।

ग्रामीणों ने जिला परिवहन पदाधिकारी और एसपी सरायकेला से पूरे मामले की जांच कर  उक्त गाड़ियों के कागजात जांचने की मांग की है।

विद्यालयों में धूमधाम से मनाया गया राष्ट्रीय खेल दिवस।

विद्यालयों में धूमधाम से मनाया गया राष्ट्रीय खेल दिवस।

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)
प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में शनिवार को मेजर ध्यानचंद के जन्म जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया गया। शहीद अजित धनंजय महतो विद्यानिकेतन चोगा में सर्वप्रथम मेजर ध्यानचंद के तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। उनके जीवनी पर प्रकाश डाला गया।

उसके बाद विद्यालय में छात्र- छात्राओं के बीच विभिन्न प्रकार के खेल कूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। खेलों में 100 मी दौड़,200 मी दौड़, 400 मी दौड़, रस्साकसी,म्यूजिकल चेयर,कबड्डी,फुटबॉल आदि खेल का आयोजन किया गया। खेल में  प्रथम,द्वितीय तथा तृतीय स्थान वालों छात्र- छात्राओं को पुरष्कृत किया गया। मौके पर विद्यालय के  प्रधानाध्यापक क्षेत्रपति महतो, शिक्षक त्रिलोचन यादव,सुजीत कुमार दत्त,कैलाश चंद्र महतो, गोपेश कुमार महतो,चन्दन कुमार महतो आदि उपस्थित थे।

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