शहीद अजित धनंजय के शहादत दिवस पर फुटबॉल खेल का आयोजन

शहीद अजित धनंजय के शहादत दिवस पर फुटबॉल खेल का आयोजन

सरायकेला/ईचागढ़

( मालखान महतो )

प्रखंड क्षेत्र के शहीद स्कूल चोगा के मैदान पर मानभूम एफसी चोगा के द्वारा शहीद अजित धनंजय महतो के शहादत दिवस पर एक दिवसीय फुटबॉल खेल प्रतियोगिता का आयोजन मंगलवार को किया गया। फुटबॉल खेल में कुल आठ टीमों ने भाग लिया।

फाइनल खेल डिजिटल सेवा और अरवी ठाकुर ब्रदर लोधमा के बीच खेला गया। जिसमें डिजिटल सेवा विजेता बना । फाइनल में विजेता टीम को 41000 रु नगद एवं ट्राफी तथा उपविजेता टीम को 31000 रु नगद एंव ट्राफी देकर सम्मानित किया गया।मौके पर मुखिया नयन सिंह मुंडा,ग्राम प्रधान मनोरंजन महतो, रमानाथ महतो,व्यासदेव महतो,प्रशांत महतो,हिरन्मय महतो,त्रिलोचन यादव,क्षेत्रपति महतो,नरेश साव, जगन्नाथ महतो, गोपेश कुमार महतो, प्रभात कुमार महतो,निशिकांत महतो सहित कमिटी के सदस्य उपस्थित थे।

तिरूलडीह गोलीकांड के शहीदों को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता व समाजसेवियों ने दिया श्रद्धांजलि

तिरूलडीह गोलीकांड के शहीदों को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता व समाजसेवियों ने दिया श्रद्धांजलि

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)

सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ु प्रखंड क्षेत्र के तिरूलडीह शहीद स्थल, तिरूलडीह शहीद चौक, कुकड़ू,सीरूम एवं ईचागढ़ के चोगा आदारडीह स्थित शहीद स्मारक पर मंगलवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित कर शहीदों को याद किया।

विधायक सविता महतो ने तिरूलडीह शहीद स्थल व शहीद चौक में शहीद अजीत, धनंजय महतो के मुर्ती पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया। वहीं शहीद धनंजय महतो के पुत्र उपेन महतो, पत्नी बारी देवी, आजसू पार्टी के केन्द्रीय महासचिव हरेलाल‌ महतो, समाजसेवी खगेन‌ महतो, पूर्व जिप उपाध्यक्ष, अशोक साव‌, जेएलकेएम नेता देवेन्द्र नाथ महतो, महासचिव गोपेश महतो, सुनील महतो सहित कई राजनीतिक दल के नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित किया। झामुमो प्रखंड कमेटी की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।

मालूम हो कि 21 अक्टूबर 1982 को क्रांतिकारी छात्र युवा मोर्चा के वैनर तले अलग झारखंड सहित सुखा क्षेत्र घोषित करने आदि मांगों को लेकर तत्कालीन ईचागढ़ प्रखंड कार्यालय तिरूलडीह में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा गोली चलाई गई थी, जिसमें अजित महतो एवं धनंजय महतो शहीद हो गए।तब से प्रति वर्ष 21 अक्टूबर को शहादत दिवस मनाने के लिए नेता मंत्री आते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जेएमएम, आजसू एवं बीजेपी झारखंड में सरकार में रहे , लेकिन आज तक शहीद परिवार के लिए कोई पहल नहीं किया गया। सिर्फ चुनाव के समय शहीद परिवार को लेकर चुनावी मुद्दा बनाकर वोट‌ बटोरने का काम ही हुआ। आज भी शहीद‌ धनंजय महतो के परिवार मजदूरी कर जिवन यापन करने को मजबुर है।

RENU DEVI DRINKING WATER पानी प्लांट का उद्घाटन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

RENU DEVI DRINKING WATER पानी प्लांट का उद्घाटन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बास्को नगर में दूसरा पानी प्लांट ( RENU DEVI DRINKING WATER ) का मंगलवार यानी कि दीपावली के दिन विधिवत रूप से उद्घाटन किया गया। सर्वप्रथम नए पानी प्लांट का पंडित द्वारा विधिवत रूप से पूजा अर्चना की गई। उसके बाद यूनियन बैंक आदित्यपुर ब्रांच के मैनेजर शीव वर्मा एवं समाज सेवी आशीष पति द्वारा फिता काट कर उद्घाटन किया गया। तत्काल नए पानी प्लांट में प्रतिदिन 2000 लीटर पानी की सुविधा उपलब्ध की जा रही है।

आपको बताते चलें कि एक समय था जब लोग पानी के लिए तालाब नदियां एवं कुएं के ऊपर निर्भर रहा करते थे आज के दौर में हर कोई स्वच्छ पानी पीने के लिए जागरूक हो चुका है एवं हर कोई चाहता है कि साफ सुथरा पानी का उपयोग किया जाए जिससे कि कई तरह की बीमारियों से बचा जा सके।

वहीं मंगलवार को उद्घाटन समारोह के मौके पर RENU DEVI DRINKING WATER के संस्थापक रेणु देवी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि क्षेत्र वासियों की सुविधा एवं क्षेत्र वासियों के स्वास्थ्य को मध्यनजर रखते हुए एवं क्षेत्र वासियों की मांग पर यह फिल्टर पानी प्लांट की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि आज हर कोई स्वच्छ पानी पीने की चाह रखता है उन्होंने कहा कि दूषित पानी पीने से कई तरह की बीमारियां उत्पन्न होती है जिससे कि कितने ही गरीब लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। आज के दौर में हर किसी को स्वच्छ पानी पीने का अधिकार है चाहे वह छोटी बस्तियों में रहते हो या बड़े-बड़े महलों में रहते हो और इन्ही सब जरूर को देखते हुए यह पानी प्लांट की स्थापना की गई है और जल्द ही पानी की पैकेजिंग कर पानी की बोतल भी मार्केट में भेजा जाएगा जिसकी तैयारियां जोरों पर की जा रही है।

अनुमंडल पदाधिकारी व कार्यपालक अभियंता को सौंपा ज्ञापन

अनुमंडल पदाधिकारी व कार्यपालक अभियंता को सौंपा ज्ञापन

सरायकेला/ईचागढ़


(मालखान महतो)

विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन द्वारा अनुमंडल कार्यालय व कार्यपालक अभियंता चांडिल को एक ज्ञापन सौंपकर 4 नवम्बर 2025 को पुनर्वास कार्यालय चाण्डिल संख्या–2 एवं कार्यपालक अभियंता कार्यालय चाण्डिल के समक्ष अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गेट जाम व धरना प्रदर्शन करने सुचना दिया। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन ने बताया कि सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक एक दिवसीय गैट-जाम सह धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा यह निर्णय चाण्डिल डैम से प्रभावित कुल 116 गाँवों के विस्थापित प्रतिनिधियों की बैठक में लिया गया। विस्थापितों का कहना है कि पुनर्वास, नियोजन एवं विकास कार्यों को लेकर वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान हेतु यह कदम उठाया जा रहा है।

धरना का उद्देश्य प्रशासन एवं संबंधित विभागों का ध्यान विस्थापित परिवारों की वास्तविक समस्याओं की ओर आकर्षित करना है, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और प्रभावित परिवारों को उनका न्यायोचित अधिकार मिल सके।

विस्थापितों ने अनुमंडल प्रशासन से आग्रह किया है कि 4 नवम्बर के इस धरना कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें तथा शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करें। मौके पर हरे कृष्ण महतो, गुरुचरण टुडू ,सनातन सिंह मुंडा, हाड़ी राम कुमार, विजय पोद्दार, जयप्रकाश सिंह मुंडा, जितेंद्र गोप ,सीमांत महतो ,प्रभात महतो तथा पूर्ण डूबी 43 गांव तथा 16 आशिक डूबी के विस्थापित प्रतिनिधि उपस्थित थे।

फुटबॉल का महाकुंभ को सफल बनाने को लेकर लेकर हुई तैयारी बैठक

फुटबॉल का महाकुंभ को सफल बनाने को लेकर लेकर हुई तैयारी बैठक

ईचागढ़

(मालखान महतो)

सरायकेला-खरसावां जिला के कुकड़ू स्थित चोकेगड़ीया फुटबॉल मैदान में कुकडु अंचल फुटबॉल कमिटी का अंतरिम बैठक संपन्न हुई। बैठक में 3 एवं 4 जनवरी को आयोजित होने वाली दो दिवसीय फुटबॉल महाकुंभ प्रतियोगिता सह मुर्गा लड़ाई के आयोजन को लेकर चर्चा किया गया तथा प्रतियोगिता के संचालन की रूपरेखा तैयार की गई।

जानकारी हो कि कुकड़ू अंचल फुटबॉल कमिटी के तत्वाधान में कई वर्षो से ही दो दिवसीय फुटबॉल प्रतियोगिता एवं मुर्गा लड़ाई का आयोजन होते आ रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष का आयोजन और ज्यादा भव्य हो रहा है। जानकारी देते हुए कुकड़ू अंचल फुटबॉल कमिटी के कोषाध्यक्ष सच्चिदानंद महतो ने कहा कि इस वर्ष का आयोजन ओर भव्य होने जा रहा है ।

उन्होंने कहा कि प्रथम पुरस्कार एक लाख रु,द्वितीय पुरस्कार 75 हजार रु तथा तृतीय एवं चतुर्थ पुरस्कार 40-40 हजार रु रखा गया है, साथ ही साथ मुर्गा लड़ाई में भी वम्पर पुरस्कार रखा गया है। मौके पर कमिटी के अध्यक्ष विष्णु कुमार सह सचिव रंजीत महतो, सदस्य लक्ष्मण महतो,मनोज मछुआ, मेघनाद महतो, नरोत्तम महतो घनश्याम कुमार , कमिटी के कई सदस्य उपस्थित हुए।

पूर्वी सिंहभूम जिले की प्रतिभाशाली बेटी मालोती हेंब्रम को विशेष रूप से आदिवासी समाज ने किया सम्मानित

पूर्वी सिंहभूम जिले की प्रतिभाशाली बेटी मालोती हेंब्रम को विशेष रूप से आदिवासी समाज ने किया सम्मानित

मुसाबनी के आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत मालती हेमब्रम

जमशेदपुर/मुसाबनी

आदिम महली माहाल के तत्वावधान में मुसाबनी स्थित डाक बंगला, जिला परिषद परिसर में एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता सोबरा हेंब्रम तोरोप पारगाना ने की।

बैठक का मुख्य उद्देश्य महली पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था पर हो रहे हमला की समीक्षा करना, AIMAA की कार्यप्रणाली में पाई जा रही अनियमितताओं पर विचार-विमर्श करना और संगठन के भविष्य को लेकर ठोस नीतिगत निर्णय लेने के शुरुआत समाज के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा पारंपरिक ढंग से क़ी गई।

इसके बाद समाज के विभिन्न प्रतिनिधियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। बैठक में प्रमुख रूप से यह चर्चा हुई कि महली पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था माझी- परगना पर बाहरी हस्तक्षेप और भ्रम फैलाने वाले तत्वों द्वारा लगातार प्रहार किया जा रहा है, जिससे समाज की एकता और परंपरा पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इस पर सभी उपस्थित सदस्यों ने एकमत होकर निर्णय लिया समाज की इस प्राचीन और गौरवशाली व्यवस्था के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण हेतु एक ठोस नीति बनाई गई। इसी क्रम में ऑल इंडिया महाली आदिवासी एसोसिएशन द्वारा प्रसारित भ्रामक जानकारियों एवं संगठनात्मक कार्यों में पाई जा रही अनियमितताओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने यह मत प्रकट किया कि ऑल इंडिया महाली आदिवासी की गतिविधियों में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक पद्धति अपनाना आवश्यक है। संगठन के भीतर पाई जा रही अव्यवस्था, पक्षपात और असंगत गतिविधियों को सुधारने के लिए कार्ययोजना पर निर्णय लिया गया। इसके साथ ही, संगठन के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश एवं नीतिगत सुधारों पर भी चर्चा की गई। समाज की एक गौरवशाली उपलब्धि पर भी सभी ने गर्व प्रकट किया। पूर्वी सिंहभूम जिले की प्रतिभाशाली बेटी मालोती हेंब्रम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्होंने हाल ही में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित प्रतिष्ठित जर्मन- इंडिया समिट ( जी 2 सी — 2025 में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश और विशेष रूप से आदिवासी समाज का नाम गौरवान्वित किया। यह सम्मेलन 6 और 7 अक्टूबर 2025 को हुआ था, जिसमें भारत और जर्मनी दोनों देशों के नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों, तकनीकी विशेषज्ञों और सीईओ ने भाग लिया। मालोती हेंब्रम की उपस्थिति भारत के युवा वर्ग, विशेषकर आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रही।

इस बैठक में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से कई समाजसेवी, पदाधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित हुए। इनमें प्रमुख रूप से शेखर चंद्र महली, सोबरा हेंब्रम, बसुदेव मार्डी, मंगल महली, सुनील मार्डी, शंकर सेन महली, गौरांग बेसरा, नंदलाल महली, अक्लू सोरेन, सलखू बेसरा, लक्ष्मीचरण बास्के, सहदेव सोरेन, आलोक बेसरा (पूर्वी मेदिनीपुर), नारायण बास्के (पूर्वी मेदिनीपुर), दासिया महली (मेदिनीपुर), राम बास्के और सुरई बास्के शामिल थे।

बैठक के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि महली समाज की एकता, परंपरा और स्वशासन व्यवस्था की रक्षा के लिए सभी राज्यों के प्रतिनिधि मिलकर एक साझा रणनीति तैयार करेंगे। साथ ही, संगठन के कार्यों को पारदर्शी, निष्पक्ष और समाजहित में संचालित करने हेतु आदिम महली माहाल को एक केंद्रीय समन्वय इकाई के रूप में सशक्त किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य रूप से शेखर चंद्र माहली, सोबरा हेम्ब्रम, बसुदेव मार्डी, मंगल माहली, सुनील मार्डी, शंकर सेन माहली, गौरांग बेसरा, नंदलाल माहली, अकलू सोरेन, सालखू बेसरा, लक्ष्मी चरण बास्के, सहदेव सोरेन, अलोक बेसरा (पश्चिम मिदनापुर), नारायण बास्के (पश्चिम मिदनापुर), दासिया माहली (मिदनापुर), राम बास्के, सुराई बास्के, दुलाल माहली और कार्तिक माहली सहित कई समाज प्रतिनिधि एवं सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने समाज की एकता, संगठन माझी परम्परा और आने वाले कार्यक्रमों को लेकर अपने-अपने विचार रखे तथा समाज के उत्थान के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

श्री श्री सार्वजनिक काली पूजा कमेटी ब्राह्मण टोला आदित्यपुर के काली पूजा पंडाल का हुआ उद्घाटन

श्री श्री सार्वजनिक काली पूजा कमेटी ब्राह्मण टोला आदित्यपुर के काली पूजा पंडाल का हुआ उद्घाटन

सरायकेला/आदित्यपुर

रविवार को श्री श्री सार्वजनिक काली पूजा कमेटी ब्राह्मण टोला आदित्यपुर के पूजा पंडाल का बिल्डर सूरज बदानी ने फीता काटकर उद्घाटन किया।

सूरज बदानी ने कहा कि काली पूजा पंडाल का उद्घाटन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने उद्घाटन को लेकर आमंत्रित करने के लिए कमेटी के अध्यक्ष और सदस्यों को धन्यवाद दिया।सूरज बदानी ने कहा कि मां काली शक्ति की प्रतीक हैं और उनकी पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

कमेटी के अध्यक्ष छोटू राम ने बताया कि 2008 से ही काली पूजा पंडाल का आयोजन किया जा रहा है और इस बार का पूजा पंडाल विशेष रूप से सजाया गया है।

इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष छोटू राम, वाइस प्रेसिडेंट गोलू गुप्ता, सुमित शर्मा, सुदामा सिंह, जिलाध्यक्ष अनिल पासवान और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 19 अक्टूबर 2025 -अंधकार से प्रकाश, अहंकार से विनम्रता और नरक से मुक्ति का आध्यात्मिक पर्व

छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 19 अक्टूबर 2025 -अंधकार से प्रकाश, अहंकार से विनम्रता और नरक से मुक्ति का आध्यात्मिक पर्व

नरक चतुर्दशी क़ो हम अपने भीतर की अंधकारमय प्रवृत्तियों, क्रोध, लोभ, द्वेष, असत्य, आलस्य और नकारात्मक विचारों का वध करने का संकल्प लेते हैं।

आज का नरकासुर,पर्यावरण प्रदूषण, लालच आधारित अर्थव्यवस्था, असमानता, और मानसिक तनाव के रूप में हमारे जीवन को घेर रहा है। अब हमें पहले से भी अधिक प्रासंगिक होना है-एडवोकेट किशन सनमुखदासभावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत की सांस्कृतिक औरधार्मिक परंपराएँ विश्वभर में अपनी गहराई, आध्यात्मिकता और मानवता के संदेश के लिए जानी जाती हैं। दीपावली का पंचदिवसीय महापर्व केवल एक उत्सव नहीं बल्कि मानव जीवन के आत्मिक उत्थान का प्रतीक माना जाता है।इस पंचदिवसीय श्रृंखला का दूसरा दिन“छोटी दिवाली” या “नरक चतुर्दशी”कहलाता है।वर्ष 2025 में यह पावन दिवस 19 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन का महत्व केवल दीप प्रज्ज्वलन तक सीमित नहीं, बल्कि यह मानव जीवन के भीतर बसे अंधकार,नकारात्मकता और अहंकार को मिटाने का प्रतीकात्मक संदेश देता है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि यह पर्व भारत ही नहीं,बल्कि विश्वभर में बसे भारतवंशियों के बीच भी समान श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है। छोटी दिवाली केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि यह मानवता के भीतर छिपे अंधकार,जैसे अहंकार, लोभ, ईर्ष्या, क्रोध और मोह,पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।चूँकि हमें अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से जानना कि आखिर छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहा जाता है, इस दिन किसकी पूजा की जाती है और यह पर्व क्यों मनाया जाता है?

एडवोकेट किशन सनमुखदासभावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र


साथियों बात अगर हम छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी क्यों कहा जाता है,इसको जानने की करें तो अधर्म,अहंकार और अंधकार पर धर्म,नम्रता और प्रकाश की विजय का प्रतीक हैँ,छोटी दिवाली का नाम“नरक चतुर्दशी”इसलिए पड़ा क्योंकि यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध से जुड़ा हुआ है।हिंदूधर्मग्रंथों के अनुसार, नरकासुर नामक असुर ने अत्याचार और अधर्म का साम्राज्य स्थापित कर रखा था। उसने पृथ्वी और स्वर्ग दोनों लोकों को आतंकित कर रखा था। नारी की अस्मिता का अपमान, साधुओं का अपमान और दैवीय शक्तियों को चुनौती देना उसका स्वभाव बन गया था। अंततः भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार में,अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर उसका अंत किया।कहा जाता है कि जब नरकासुर का वध हुआ, तो उसने अंतिम समय में श्रीकृष्ण से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु के दिन जो लोग स्नान और दीपदान करें, उन्हें नरक का भय न रहे। भगवान श्रीकृष्ण ने यह वरदान स्वीकार किया।तभी से यह दिन “नरक चतुर्दशी” के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जिसका अर्थ है, वह चतुर्दशी जो नरक से मुक्ति का मार्ग दिखाए।छोटी दिवाली इसीलिए कही जाती है क्योंकि यह मुख्य दिवाली के एक दिन पहले आती है, और इसमें दीप जलाने की परंपरा आरंभ हो जाती है। परंतु इसके पीछे का भाव कहीं अधिक गहरा है,यह दिन हमें सिखाता है कि असली नरक बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष और असत्य के रूप में है। जब हम इनसे मुक्त होते हैं, तब सच्ची “छोटी दिवाली” हमारे जीवन में आती है-जब हम अपने भीतर के अंधकार को सटीक दूर कर आत्मिक प्रकाश जलाते हैं आधुनिक वैश्विक संदर्भ में यदि देखें तो “नरक चतुर्दशी” एक सार्वभौमिक संदेश देती है कि प्रत्येक व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के भीतर जो अंधकार,अन्याय, हिंसा, लालच और भेदभाव,फैला हुआ है,उसे सत्य, सद्भाव और प्रकाश से मिटाना ही सच्चा उत्सव है। यह दिन हर व्यक्ति को यह याद दिलाता है कि नरकासुर जैसी प्रवृत्तियाँ हर युग में मौजूद रहती हैं,बस उनके रूप बदलते रहते हैं। आज का नरकासुर पर्यावरण प्रदूषण,लालच आधारित अर्थव्यवस्था, असमानता, और मानसिक तनाव के रूप में हमारे जीवन को घेर रहा है। इसलिए छोटी दिवाली का संदेश आधुनिक समय में पहले से भी अधिक प्रासंगिक है।


साथियों बात अगर हम नरक चतुर्दशी के दिन किसकी पूजा की जाती है, इसको समझने की करें तो,नरक चतुर्दशी के दिन तीन प्रमुख देवताओं की पूजा की परंपरा है,यमराज,भगवान श्रीकृष्ण,और देवी लक्ष्मी।(क)यमराज पूजा-इस दिन यमराज की पूजा का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर यमराज को दीपदान करता है, उसे मृत्यु का भय नहीं सताता और उसे यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता। इसे “यम दीपदान” कहा जाता है।घर के बाहरदक्षिण दिशा में एक दीप जलाकर कहा जाता है,”मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालिना श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम ॥” इसका अर्थ है कि इस दीप के माध्यम से मैं यमराज को प्रसन्न कर उनसे दीर्घायु और सुखमय जीवन की प्रार्थना करता हूँ।(ख) श्रीकृष्ण पूजा-भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन अधर्म पर विजय प्राप्त की थी, इसलिए उन्हें विजयी और धर्म के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। भक्त उनके चरणों में पुष्प, फल और दीप अर्पित करते हैं। उनके साथ देवी सत्यभामा की भी पूजा की जाती है, क्योंकि नरकासुर के वध में देवी का योगदान महत्वपूर्ण रहा था। (ग) लक्ष्मी पूजा और रूप चौदस-इस दिन “रूप चौदस” भी कहा जाता है। प्रातःकाल तेल स्नान, उबटन, और शुद्धिकरण के बाद सौंदर्य और स्वास्थ्य की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन स्नान और शुद्ध आचरण करता है, उसके शरीर और मन में दीर्घकालिक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।रूप चौदस के दिन स्त्रियाँ और पुरुष दोनों अपने रूप, स्वास्थ्य और आभा की रक्षा के लिए स्नान, तेल, चंदन और सुगंधित वस्तुओं का उपयोग करते हैं। यह न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है,क्योंकि यह शरीर से विषाक्त तत्वों को निकालने और त्वचा को स्वस्थ रखने का उपाय माना गया है।आधुनिक वैश्विक समाज में जहां “वेलनेस” और “मेंटल हेल्थ” की चर्चा प्रमुख हो गई है, नरक चतुर्दशी की यह परंपरा हमें यह बताती है कि आत्मिक और शारीरिक शुद्धता दोनों का संगम ही सच्चा स्वास्थ्य है।


साथियों बात अगर हम नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है इसको समझने की करें तो,आत्मशुद्धि, पाप मुक्ति और प्रकाश की ओर मानव यात्रा का उत्सव हैँ,नरक चतुर्दशी का मुख्य उद्देश्य केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पापमुक्ति का मार्ग है। यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि जीवन में हर मनुष्य से भूलें होती हैं, और उन भूलों से ऊपर उठने के लिए आत्मचिंतन, स्नान और दीपदान के माध्यम से हम भीतर का “नरक” साफ कर सकते हैं।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान करता है, वह पापों से मुक्त होता है। इस स्नान को “अभ्यंग स्नान” कहा जाता है। यह केवल शारीरिक शुद्धि नहीं,बल्कि मानसिक और भावनात्मक शुद्धि का भी प्रतीक है। कहा जाता है कि तेल से स्नान करने से शरीर से नकारात्मक ऊर्जा निकलती है, और मन में प्रकाश का प्रवेश होता है।नरक चतुर्दशी हमें यह सिखाती है कि हर व्यक्ति के भीतर दो शक्तियाँ होती हैं,एक अंधकारमय (नरकासुर जैसी) और दूसरी प्रकाशमय (कृष्ण जैसी)। इस दिन हम अपने भीतर की अंधकारमय प्रवृत्तियों,जैसे क्रोध, लोभ, द्वेष, असत्य, आलस्य और नकारात्मक विचारों का वध करने का संकल्प लेते हैं। जब व्यक्ति इस अंतर्द्वंद से ऊपर उठता है, तभी वह सच्चा “प्रकाश” प्राप्त करता है।आज जब पूरी दुनिया तनाव, असमानता,युद्ध औरआत्मकेंद्रित जीवनशैली से जूझ रही है, तब नरक चतुर्दशी जैसे पर्व वैश्विक समाज को यह प्रेरणा देते हैं कि आत्मशुद्धि, विनम्रता और प्रकाश की ओर बढ़ना ही मानवता का मार्ग है। यह केवल धार्मिक दिन नहीं बल्कि “स्पिरिचुअल रीसेट डे” कहा जा सकता है,जब हम अपने भीतर के अंधकार को पहचानते हैं और उसे मिटाने का संकल्प लेते हैं।


साथियों बातें अगर हम छोटी दिवाली का सांस्कृतिक, सामाजिक और वैश्विक महत्व की करें तो,भारत में छोटी दिवाली का उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक एकता, पारिवारिक प्रेम और सामूहिक स्वच्छता का भी प्रतीक है। गाँवों और नगरों में लोग इस दिन अपने घरों की अंतिम सफाई करते हैं, मिट्टी के दीये जलाते हैं, और पड़ोसियों के साथ मिठाइयाँ बांटते हैं। यह पर्व समाज में “साझा प्रकाश” का संदेश देता है कि अंधकार केवल अपने घर से नहीं, पूरी बस्ती से मिटाना चाहिए।अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में छोटी दिवाली का संदेश सार्व भौमिक है,यह केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं। आज अमेरिका,ब्रिटेन,कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में बसे भारतीय समुदाय इस दिन न केवल दीप जलाते हैं बल्कि स्थानीय समाज को भी इसमें शामिल करते हैं। संयुक्त राष्ट्र, यूरोपियन संसद और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ दीपावली को “ग्लोबल सेलिब्रेशन ऑफ़ लाइट ” के रूप में मान्यता दे चुकी हैं। ऐसी स्थिति में छोटी दिवाली का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह मुख्य दीपावली से एक दिन पहले मानवता के भीतर के नरक को मिटाने की तैयारी का दिन है।नरक चतुर्दशी का गूढ़ अर्थ केवल पौराणिक कथा तक सीमित नहीं है।“नरक”का अर्थ है,मानसिक पीड़ा,अवसाद,लालच,और वह अंधकार जो मनुष्य के भीतर उसे असत्य के मार्ग पर ले जाता है। “चतुर्दशी” का अर्थ है — पूर्णता के पूर्व की अवस्था, अर्थात् वह क्षण जब प्रकाश पूरी तरह प्रकट होने वाला है। इसलिए नरक चतुर्दशी का दिन आत्मिक परिवर्तन का समय है,जब मनुष्य अपने भीतर झाँककर कहता है:“अब मैं अंधकार से मुक्त होकर प्रकाश की ओर बढ़ूँगा।” यह आत्मसंवाद ही नरक चतुर्दशी का सार है। श्रीकृष्ण का नरकासुर वध केवल बाह्य घटना नहीं, बल्कि एक प्रतीक है,जब मनुष्य अपनी इच्छाओं और नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करता है, तब वह “नरकासुर”का अंत करता है।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि इस प्रकार छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी केवल दीपों का पर्व नहीं,बल्कि आत्मज्ञान, शुद्धि और अहंकार मुक्ति का दिन है। यह हमें सिखाती है कि असली उत्सव बाहर नहीं, भीतर मन में होता है। जब हम अपने भीतर के अंधकार को दूर करते हैं, तो पूरी दुनिया रोशन होती है।इस दिन किया गया दीपदान केवल घर के द्वार को नहीं, बल्कि आत्मा के द्वार को भी प्रकाशित करता है। यमराज की आराधना हमें मृत्यु का भय नहीं, बल्कि जीवन के प्रति सजगता सिखाती है। श्रीकृष्ण की पूजा हमें धर्म की रक्षा और अन्याय के अंत का संदेश देती है, जबकि लक्ष्मी पूजा हमें सिखाती है कि सौंदर्य केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक पवित्रता में निहित है।छोटी दिवाली 2025 इसीलिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि मानवता को यह स्मरण कराने का अवसर है कि जब तक भीतर का अंधकार मिटेगा नहीं, तब तक बाहर के दीप अधूरे रहेंगे। यह पर्व विश्व के हर कोने में रहने वाले व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है,“हम अपने भीतर का नरकासुर समाप्त करें, तभी सच्ची दिवाली आएगी।”

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतर्राष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि सीए(एटीसी) संगीत माध्यमा एडवोकेट किशन सनमुखदास भावानानी गोंदिया महाराष्ट्र

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सुबीर रंजन द्वारा मिठाई दुकानों, रेस्टोरेंट तथा फास्ट फूड स्टालों का सघन निरीक्षण किया गया।

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सुबीर रंजन द्वारा मिठाई दुकानों, रेस्टोरेंट तथा फास्ट फूड स्टालों का सघन निरीक्षण किया गया।

सरायकेला-खरसावाँ

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, सरायकेला के नेतृत्व में दिनांक 18 अक्टूबर 2025 को खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सुबीर रंजन द्वारा सरायकेला जिला मुख्यालय के संजय चौक, वार्ड-4 एवं गैरेज चौक स्थित मिठाई दुकानों, रेस्टोरेंट तथा फास्ट फूड स्टालों का सघन निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान दूध एवं दूध से बने उत्पादों, जैसे — लड्डू, बूंदी, जलेबी, ड्राई फ्रूट्स से बनी मिठाई, तथा चाऊमीन, समोसा और पैकेटबंद खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच की गई। जांच में एक मिठाई दुकान से एक किलो छेना मानक के अनुरूप न पाए जाने पर उसे तत्काल नष्ट किया गया।

सभी दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि किसी भी खाद्य सामग्री को अखबार में पैक कर या रखकर न बेचा जाए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भविष्य में किसी भी दुकान में ऐसे प्रकरण पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान “सरायकेला लड्डू” नामक प्रतिष्ठित मिठाई दुकान से एक नमूना जांच हेतु लिया गया है, जिसे विधि अनुसार परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने के उपरांत नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री सुबीर रंजन ने बताया कि उपायुक्त महोदय के निर्देशानुसार त्योहारों के मद्देनज़र जिले में खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि किसी प्रतिष्ठान में अस्वच्छ, संदिग्ध या मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री की जाती है, तो उसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन अथवा खाद्य सुरक्षा विभाग को दें ताकि समय पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। खाद्य सुरक्षा जांच दल में घनपत महतो एवं कार्तिक महतो भी सम्मिलित थे।

धातकीडीह गाँव में हुई भक्तिभाव से मनसा पूजा

धातकीडीह गाँव में हुई भक्तिभाव से मनसा पूजा

सरायकेला

(पारस कुमार होता)

प्रखण्ड सरायकेला के अन्तर्गत धातकीडीह गाँव में सर्पो की देवी माता मानस की भव्य प्रतिमा स्थापित कर भक्ति भाव से पूजा अर्चना की गई। पूजा की शुरुआत घटवारी से हुई।शुक्रवार शाम को श्रद्धालुओं द्वारा घट में जल भरकर मन्दिर परिसर लाया गया। जहाँ पंडित रामानाथ होता एव रूपक होता ने घट की स्थापना कर विधिवत मंत्रोउच्चरण के साथ सर्पो की देवी माता मानसा की पूजा अर्चना की। वहीं गाँव के श्रद्धांलुओं ने निर्जला उपवास रहकर अपने व परिवार की सुख समृद्धि व वैभव देवी माता से मांगी। पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित एल आई सी ,जमशेदपुर के अधिकारी सोहन लाल मुखी ने बताया कि मनसा की पूजा गांवों में मनाये जाने वाले प्रमुख त्योहारों में एक है। इस पूजा का गाँव में विशेष महत्व है, मां मनसा को लेकर कई मान्यताएं हैं. सांप-बिच्छू व बरसाती कीड़ों के विष से बचने के लिए मां मनसा की पूजा लोक परंपरा है.

महालिमोरूप क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता हेमसागर प्रधान ने बताया कि गांवों में मां मनसा की पूजा पूरे भक्तिभाव से मनाने के पीछे भी मान्यता है कि मां मनसा की पूजा-अर्चना से सांप-बिच्छुओं के खतरों से उन्हें सुरक्षा मिलती है. इसी कारण गांव के लोग मां मनसा की आराधना पूरे भक्तिभाव से करते हैं.


मौक पर सोहनलाल मुखी, अशोक महतो, धीरेंद्र महतो, सुभाष चंद्र महतो, नगेन महतो, कृष्णा महतो, बुधेश्वर् दास, कमलदेव दास, लखिन्द् नायक समेत अन्य उपस्थित थे।

धनतेरस पर बाजारों में रहा रौनक

धनतेरस पर बाजारों में रहा रौनक

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में धनतेरस पर शनिवार को बाजारों में खास रौनक रहा । मीट्टी के दीए, वर्तन,बांस का सुप, टोकरी , झाड़ू एवं पूजा भंडार, बाइक शोरूम , ज्वेलरी दुकानों आदि पर लोगों का दिन भर भीड़ रहा । मिलन चौक एवं सितु बाजार में लोगों का काफी भीड़-भाड़ देखा गया।

धनतेरस का बाजार को देखते हुए ईचागढ़ पुलिस मिलन चौक और सितु बाजार में सड़क पर वाहनों को नियंत्रित करने में दिन भर जुटे रहे। सड़क किनारे बाइक व चार पहिया वाहन रखने के लिए जगह काफी कम पढ़े। खरीदारों को आकर्षित करने के लिए दुकानों को खास सजाया गया था। सुबह से देर शाम तक लोगों का बाजारों में काफी चहल-पहल रहा ।

वहीं ईचागढ़ थाना के एएसआई मनिंदर सिंह ने लोगों को नियंत्रित और संयमित होकर बाजारों में खरीदारी करने का अपील करते देखे गए। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे जहां तहां बाइक और चार पहिया वाहनें खड़ा करने से मिलन चौक में जाम लग गया, जिससे वाहनों को सड़क किनारे से हटाया गया।

दीपावली का त्योहार पर लोग खरीद रहे हैं विभिन्न प्रकार के दिया।

दीपावली का त्योहार पर लोग खरीद रहे हैं विभिन्न प्रकार के दिया।

मुसाबनी संवाददाता।

दीपावली का त्योहार सोमवार को मनाया जाना है। इसको लेकर बाजार में रौनक बढ़ गई है, हर तरफ लोग खरीदारी में लगे हुए हैं, विशेष कर पारंपरिक दिया की खरीदारी हो रही है, इसको लेकर कई प्रकार के दिया बाजार में देखे जा रहे हैं। दुकानदार बताते हैं कि₹20 दर्जन बड़ा दिया छोटा दिया ₹10 का, एक कलश 10 से ₹15 का, धूप दानी ₹20 की बिक रही है।

इसके साथ ही बाजार में कई आकर्षक लक्ष्मी गणेश की मूर्ति भी बेची जा रही है, जो₹50 से लेकर ₹200 तक की बिक रही है। इसकी खरीदारी को लेकर बाजार में भीड़ लगी हुई है। इसके साथ ही शगुन के रूप में लोग झाड़ू बर्तन सोना चांदी की खरीदारी भी कर रहे हैं। दुकानदार बताते हैं कि चाइना लाइट बाजार में खूब बिक रही है, जिसके कारण दिया की बिक्री काफी कम हो गई है। दीया जलाने में इस्तेमाल होने वाला तेल भी काफी महंगा बिक रहा है। जिसके कारण दीया की बिक्री कुछ कम हो गई है।

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