उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न, विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की हुई समीक्षा।

उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न, विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की हुई समीक्षा।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला-खरसावाँ समाहरणालय सभागार में आज उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता जनहित से जुड़े मामलों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करते हुए पात्र लाभुकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचाना है। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए आमजनों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाना पड़े तथा कार्यालय स्तर पर ही उनकी समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित हो।

समीक्षा के क्रम में प्रखंड एवं अंचल स्तर पर नियमित समन्वय बैठक आयोजित करने, योजनाओं की सतत निगरानी रखने तथा सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। लाभुकों को योजनाओं का लाभ बिना किसी मध्यस्थता के सीधे उपलब्ध कराने तथा राजस्व एवं अन्य जनहित से जुड़े कार्यों में अनावश्यक विलंब समाप्त करने को कहा गया।

सभी संबंधित पदाधिकारियों को सप्ताह में कम-से-कम एक से दो दिन कार्यालय अवधि में अपने-अपने कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर क्षेत्र से आने वाले आमजनों की समस्याओं को सुनने तथा प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि विभिन्न कार्यों के लिए प्रखंड, अंचल एवं अन्य कार्यालयों में आने वाले फरियादियों की समस्याओं पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को एक ही कार्य के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े।

आपूर्ति विभाग की समीक्षा के क्रम में गोदाम निर्माण एवं मरम्मती कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। राशन के उठाव से संबंधित लंबित कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण करते हुए ससमय राशन वितरण सुनिश्चित करने को कहा गया। विभिन्न माध्यमों से राशन वितरण में अनियमितता संबंधी प्राप्त शिकायतों की नियमानुसार जांच कर दोषी पाए जाने वाले डीलरों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा स्टॉक का नियमित मिलान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि लाभुकों को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध हो सके।

शिक्षा विभाग की समीक्षा के क्रम में छूटे हुए सभी विद्यार्थियों का जन्म प्रमाण पत्र निर्गत कराने तथा बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। साथ ही नामांकन, विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करने को कहा गया।

उद्योग एवं श्रम विभाग की समीक्षा के क्रम में विभिन्न योजनाओं के तहत लोन आवेदन तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा अधिकाधिक पात्र लाभुकों को योजनाओं से जोड़कर स्वरोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का निर्देश दिया गया। श्रमिकों के पंजीकरण में तेजी लाने तथा विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया।

कृषि एवं संबद्ध विभागों की समीक्षा के दौरान तालाब जीर्णोद्धार, योग्य किसानों के बीच कृषि सहायक उपकरण एवं बीज आदि का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। मत्स्य पालन के इच्छुक किसानों को संबंधित योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा तालाबों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया। योजनाओं से संबंधित डेटा की संबंधित पोर्टल पर समयबद्ध ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करने तथा किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने का निर्देश दिया गया।

खेल एवं पर्यटन विभाग की समीक्षा के क्रम में जिला खेल पदाधिकारी को सतनाला डैम को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने हेतु आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया। पर्यटकों की सुविधा एवं क्षेत्र के पर्यटन विकास को ध्यान में रखते हुए सीटिंग बेंच, बोटिंग आदि आवश्यक सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य करने को कहा गया।

सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण विभाग को केंद्र सरकार की पेंशन योजनाओं के अंतर्गत पेंशन प्राप्त करने वाले लाभुकों का डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेशन शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने तथा लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करने का निर्देश दिया गया।

बैठक के दौरान मिशन वात्सल्य योजना की समीक्षा करते हुए एकल एवं अनाथ बच्चों को चिन्हित कर उन्हें स्पॉन्सरशिप योजना से जोड़ने का निर्देश दिया गया। स्वयं सहायता समूह की दीदियों को अधिकाधिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर स्वावलंबी बनाने तथा ‘लखपति दीदी’ की संख्या में वृद्धि के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने को कहा गया।

मनरेगा एवं आवास योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा रोजगार सृजन में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।

नगर विकास विभाग को नगर निकाय क्षेत्रों में स्वच्छता, पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति से संबंधित व्यवस्थाओं को सुदृढ़ रखने तथा निर्माण एवं विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि सरकारी योजनाओं की जानकारी स्थानीय भाषा में सरल एवं प्रभावी तरीके से आमजनों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर बैनर, फ्लेक्स एवं होर्डिंग के साथ-साथ सोशल मीडिया, गीत-संगीत, नुक्कड़ नाटक, पेंटिंग एवं वॉल पेंटिंग जैसे जनसंचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ केवल जागरूक एवं सक्रिय लाभुकों तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

बैठक के अंत में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण निष्पादन एवं निर्धारित समय-सीमा में लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश दिया गया। साथ ही योजनाओं की नियमित समीक्षा एवं क्षेत्र स्तर पर सतत निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।

बैठक के अंत में भारत सरकार, गृह मंत्रालय के जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड द्वारा भारत की जनगणना-2027 के प्रथम चरण के मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य में सराहनीय योगदान के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायकेला एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी, चांडिल को प्रदान किए गए प्रशस्ति-पत्र उपायुक्त द्वारा प्रदान कर सम्मानित किया गया।

बैठक में उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा, अपर उपायुक्त जयबर्धन कुमार, नगर आयुक्त आदित्यपुर एजाज अनवर, अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला अभिनव प्रकाश, अनुमंडल पदाधिकारी चांडिल नितिन शिवम गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी सहित जिला स्तरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी, सभी विभागों के कार्यपालक अभियन्ता, उपस्थित थे।

मिलावटखोर माफिया बनाम शासन प्रशासन : जहरीली शराब से होती मौतें क्या कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा हैं? -जहरीली शराब का खूनी नेटवर्क आखिर कब टूटेगा?।

मिलावटखोर माफिया बनाम शासन प्रशासन : जहरीली शराब से होती मौतें क्या कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा हैं? -जहरीली शराब का खूनी नेटवर्क आखिर कब टूटेगा?।

शराबबंदी के बावजूद मौत का कारोबार! गुजरात से तमिलनाडु सहित अनेक राज्यों तक जहरीली शराब की त्रासदी और शासन- व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा सवाल

जहरीली शराब का काला साम्राज्य: एक तरफ शराबबंदी, दूसरी तरफ जहरीली शराब का कारोबार! क्या भारत का सिस्टम मिलावटखोर माफिया के आगे बेबस है? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर हाल के दिनों में गुजरात के भावनगर जिले से सामने आई जहरीली शराब की त्रासदी ने एक बार फिर पूरे देश के सामने वह असहज प्रश्न खड़ा कर दिया है,जिसका उत्तर भारत वर्षों से तलाश रहा है जब शराबबंदी लागू है,जब कानून कठोर हैं,जब पुलिस, प्रशासन,आबकारी विभाग और खुफिया तंत्र मौजूद हैं, तब आखिर जहरीली और अवैध शराब आम लोगों तक पहुंचती कैसे है?20 अगस्त 2026 को उपलब्धनवीनतम रिपोर्टों के अनुसार भावनगर त्रासदी में मृतकों की संख्या सात से बढ़कर आठ हो गई है और करीब 39 लोग उपचाराधीन बताए गए हैं। जांच में कथित रूप से मेथनॉल से तैयार जहरीली शराब,लोकप्रिय ब्रांड की नकली बोतलों और अंतरराज्यीय आपूर्ति नेटवर्क के संकेत मिले हैं; पुलिस ने 21 आरोपियों को नामजद कर 13 गिरफ्तारियां किए जाने की भी जानकारी दी है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बताना चाहूंगा कि भावनगर की घटना इसलिए और गंभीर है क्योंकि गुजरात भारत के उन राज्यों में है जहां दशकों से शराबबंदी लागू है।शराब की बिक्री,खरीद और सेवन पर प्रतिबंध का मूल उद्देश्य सामाजिक स्वास्थ्य, परिवारों की सुरक्षा और नशे से होने वाले अपराधों को नियंत्रित करना रहा है,लेकिन जमीन पर यदि प्रतिबंधित शराब भूमिगत बाजार में उपलब्ध हो जाए तो समस्या केवल शराब सेवन की नहीं रह जाती; वह अवैध अर्थव्यवस्था,संगठित अपराध, भ्रष्टाचार, नकली ब्रांड, रासायनिक विषाक्तता और प्रशासनिक विफलता का संयुक्त संकट बन जाती है।भावनगर में सामने आया कथित नकली आईएमएफएल नेटवर्क इसी खतरनाक तंत्र की ओर संकेत करता है। रिपोर्टों के अनुसार शराब कथित रूप से मध्य प्रदेश से कच्चे माल के साथ जुड़ी थी, जबकि निर्माण भावनगर क्षेत्र में किए जाने की बात जांच में सामने आई है।डिस्क्लेमर यह पूरी जानकारी मीडिया से ली गई है।

साथियों,लेकिन भावनगर की कहानी कोई अकेली कहानी नहीं है। यह भारत में जहरीली शराब की उन अनगिनत त्रासदियों की नई कड़ी है जिनमें गरीब और निम्न आय वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते रहे हैं।वर्ष 2024 में तमिलनाडु के कल्लाकुरिची में मेथनॉल- मिश्रित अवैध शराब ने ऐसा कहर बरपाया कि देश स्तब्ध रह गया। शुरुआती दिनों में मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी और अंततः सरकारी तथा मीडिया रिपोर्टों में 65 मौतों और 200 से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई।इस त्रासदी में उल्टी,पेटदर्द,दस्त और गंभीर विषाक्तता के लक्षणों के बाद लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया।जांच में मेथनॉल की मौजूदगी सामने आई, जबकि अवैध शराब के नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की गई और प्रशासनिक स्तर पर भी अधिकारियों के विरुद्ध कदम उठाए गए।कल्लाकुरिची से ठीक एक वर्ष पहले, मई 2023 में तमिलनाडु के विलुप्पुरम और चेंगलपट्टू जिलों में अवैध शराब पीने से 22 लोगों की मौत हुई थी। एक ही राज्य में लगातार दो वर्षों में ऐसी घटनाओं का सामने आना इस बात का प्रमाण है कि समस्या किसी एक गांव, एक शराब विक्रेता या एक स्थानीय गिरोह तक सीमित नहीं है। यह उस आपूर्ति शृंखला का हिस्सा है जिसमें अवैध उत्पादन, रसायनों का दुरुपयोग, वितरण स्थानीय संरक्षण और मांग,सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

साथियों, गुजरात स्वयं इस संकट से बार-बार जूझता रहा है।जुलाई 2022 में बोटाद और आसपास के क्षेत्रों में जहरीली शराब की त्रासदी में सरकारी आंकड़ों के अनुसार मृतकों की संख्या 42 तक पहुंची थी।उस मामले में औद्योगिक मेथनॉल के इस्तेमाल की बातसामने आई थी और शुरुआती जांच में यह भी बताया गया था कि रासायनिक पदार्थ को शराब के रूप में इस्तेमाल किया गया।  यह तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है,क्योंकि मेथनॉल कोई सामान्य शराब नहीं है; यह औद्योगिक रसायन है और मानव शरीर में जाने पर गंभीर विषाक्तता, दृष्टि-हानि, अंगों की विफलता और मृत्यु तक का कारण बन सकता है। इसलिए जहरीली शराब की त्रासदी को केवल ‘नकली शराब’ कहकर समाप्त कर देना समस्या की वास्तविक गंभीरता को कम करके देखना होगा।गुजरात के इतिहास में इससे भी बड़ी त्रासदी जुलाई 2009 में सामने आई थी,जब अहमदाबाद में जहरीली शराब के सेवन से 136 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंचे थे। उस घटना के बाद अवैध शराब नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई और कानून को और कठोर बनाने की चर्चा हुई।  लेकिन डेढ़ दशक से अधिक समय बाद भी 2022 और अब 2026 की घटनाएं यह पूछने के लिए मजबूर करती हैं कि क्या केवल कठोर कानून बनाना पर्याप्त है, अथवा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी प्रशासनिक प्रणाली को पुनर्गठित करने की आवश्यकता है?

साथियों, यह प्रश्न केवल गुजरात तक सीमित नहीं है। बिहार में वर्ष 2022 की छपरा-केंद्रित जहरीली शराब त्रासदी में मृतकों की संख्या बाद में 80 से अधिक पहुंच गई; एक रिपोर्ट के अनुसार 17 दिसंबर तक आंकड़ा 81 तक पहुंच चुका था।  बिहार में 2016 से शराबबंदी लागू होने के बावजूद इस तरह की घटनाओं का सामने आना भी उसी विरोधाभास को रेखांकित करता है,कानून की किताब में प्रतिबंध और जमीन पर अवैध आपूर्ति, दोनों साथ-साथ चल सकते हैं यदि प्रवर्तन व्यवस्था में गंभीर छेद हों।पंजाब में वर्ष 2020 की जहरीली शराब त्रासदी भी स्वतंत्र भारत की सबसे भयावह घटनाओं में गिनी जाती है। अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर क्षेत्रों में अवैध शराब के सेवन से मृतकों की संख्या बाद की रिपोर्टों में 120 के आसपास पहुंची।रेउटर्स की शुरुआती रिपोर्ट में 86 मौतों की पुष्टि की गई थी, जबकि बाद की रिपोर्टिंग में आंकड़ा और बढ़ा।  इतना ही नहीं, पंजाब में बाद के वर्षों में भी ऐसी घटनाएं सामने आती रहीं; 2025 में अमृतसर के मजीठा क्षेत्र में कथित जहरीली शराब से दो दर्जन से अधिक मौतों ने फिर वही सवाल उठाया कि पिछली त्रासदियों से आखिर कितना सबक लिया गया।

साथियों, इन घटनाओं को एक साथ देखने पर भारत के सामने एक भयावह पैटर्न उभरता है।एक राज्य में शराबबंदी है,दूसरे में शराब उपलब्ध है लेकिन गरीबों के लिए महंगी है;कहीं अवैध शराब सस्ती होने के कारण बिकती है, कहीं प्रतिबंध के कारण भूमिगत बाजार बनता है और कहीं संगठित अपराधी लोकप्रिय ब्रांड की बोतलों में जहरीला तरल भरकर उपभोक्ता को भ्रमित करते हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि वास्तविक पीड़ित प्रायः वही लोग बनते हैं जिनके पास महंगी चिकित्सा सुविधा, कानूनी सहायता और सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होती। जहरीली शराब केवल शरीर को नहीं मारती; वह पूरे परिवार की आर्थिक रीढ़ तोड़ देती है। परिवार का कमाने वाला सदस्य मरता है तो पीछे बच्चों की शिक्षा, बुजुर्गों की देखभाल, कर्ज, भोजन और भविष्य सभी प्रश्न बनकर खड़े हो जाते हैं।

साथियों, इस संकट की जड़ में केवल उपभोक्ता को दोष देना आसान है, लेकिन पर्याप्त नहीं।निश्चित रूप सेअवैध शराब का सेवन गंभीर जोखिम है और लोगों को ऐसी शराब से दूर रहना चाहिए,परंतु शासन का दायित्व केवल नागरिकों को चेतावनी देना नहीं है।शासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि जहरीला उत्पाद बाजार तक पहुंच ही न सके। इसके लिए पुलिस और आबकारी विभाग की पारंपरिक छापेमारी व्यवस्था से आगे बढ़कर सप्लाई-चेन इंटेलिजेंस विकसित करनी होगी। मेथनॉल और अन्य औद्योगिक रसायनों की खरीद-बिक्री, परिवहन और अंतिम उपयोग की डिजिटल निगरानी, संदिग्ध थोक खरीद की पहचान,नकली बोतलों और लेबलों केउत्पादन पर कार्रवाई तथा अंतरराज्यीय सूचना साझाकरण को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।भावनगर की घटना इस दृष्टि से विशेष चेतावनी है कि यदि जहरीली शराब कथित रूप से एक राज्य से दूसरे राज्य तक कच्चे माल के माध्यम से पहुंच सकती है और फिर स्थानीय स्तर पर तैयार होकर नकली ब्रांड के रूप में बाजार में जा सकती है, तो केवल जिला पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। यह अंतरराज्यीय संगठित अपराध की तरह जांच मांगती है।पुलिस,आबकारी, राजस्व, रसायन एवं उद्योग विभाग, स्वास्थ्य विभाग और साइबर/वित्तीय जांच एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करने की व्यवस्था आवश्यक है। जिस प्रकार मादक पदार्थों के नेटवर्क की जांच में वित्तीय लेनदेन, मोबाइल संचार और सप्लाई चैन का विश्लेषण किया जाता है, उसी प्रकार अवैध शराब के बड़े नेटवर्क पर भी सटीकता से किया जाना चाहिए।
साथियों, एक और महत्वपूर्ण प्रश्न प्रशासनिक जवाबदेही का है। हर त्रासदी के बाद कुछ गिरफ्तारियां,कुछ निलंबन और कुछ छापेमारी होती है;लेकिन कुछ महीनों बाद व्यवस्था फिर सामान्य हो जाती है। यही चक्र सबसे बड़ा खतरा है। आवश्यकता इस बात की है कि किसी क्षेत्र में अवैध शराब पकड़े जाने पर केवल विक्रेता नहीं, बल्कि उस क्षेत्र में लंबे समय तक चल रही अवैध भट्ठियों और वितरण नेटवर्क की प्रशासनिक जवाबदेही भी तय हो। यदि किसी इलाके में वर्षों से अवैध शराब बिक रही है, तो यह पूछना स्वाभाविक है कि स्थानीय खुफिया तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कार्रवाई हुई तो नेटवर्क इतनी सटिका से दोबारा कैसे खड़ा हो गया?

साथियों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को इस समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के प्रश्न के रूप में नहीं बल्कि पब्लिक हेल्थ और फूड-सेफ्टी जैसी बहु-क्षेत्रीय चुनौती के रूप में देखना होगा।जहरीली शराब का संकट अचानक सामने आने वाली सामूहिक विषाक्तता है, इसलिए प्रत्येक जिले में त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल होना चाहिए।अस्पतालों में मेथनॉल विषाक्तता की पहचान तत्काल उपचार,विष-विज्ञान प्रयोगशालाओं की क्षमता और चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण को मजबूत करना होगा। घटना के शुरुआती घंटों में जितनी तेजी से संदिग्ध शराब के नमूने सुरक्षित किए जाएं और मरीजों की पहचान हो,उतनी ही अधिक जानें बचाई जा सकती हैं।इसके साथ ही उपभोक्ता जागरूकता को भीआधुनिक बनाया जाना चाहिए। केवल यह कहना कि अवैध शराब न पीएं पर्याप्त नहीं है। ग्रामीण और शहरी गरीब समुदायों तक स्थानीय भाषाओं में यह जानकारी पहुंचनी चाहिए कि मेथनॉल विषाक्तता के लक्षण क्या हैं,कब तत्काल अस्पताल जाना है, संदिग्ध शराब को छूने या पीने के बाद क्या करना है और किस प्रकार के उत्पादों से विशेष सावधानी बरतनी है। स्वास्थ्य व्यवस्था को भी यह समझना होगा कि जहरीली शराब की घटना में हर घंटा निर्णायक हो सकता है।

साथियों, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भावनगर, कल्लाकुरिची,बोटाद,बिहार और पंजाब की घटनाओं को अलग- अलग राज्य की राजनीतिक घटनाओं के रूप में देखने की भूल नहीं की जानी चाहिए। इनके बीच एक साझा राष्ट्रीय चुनौती दिखाई देती है,अवैध शराब का बाजार मांग,गरीबी, बेरोजगारी कीमत, प्रतिबंध, संगठित अपराध, कमजोर निगरानी और भ्रष्टाचार के मिश्रण से पैदा होता है।इसलिए समाधान भी बहुआयामी होना चाहिए। शराबबंदी हो या नियंत्रित बिक्री दोनों मॉडलों में राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी नागरिकों की जान की सुरक्षा है। नीति का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि वह अवैध और जहरीले बाजार को कितना कमजोर करती है, न कि केवल इस आधार पर कि कानून कितना कठोर है।आज भावनगर में आठ मौतों और दर्जनों लोगों के अस्पताल पहुंचने की खबर केवल गुजरात के लिए चेतावनी नहीं है; यह पूरे भारत के लिए एक राष्ट्रीय अलार्म है। कल्लाकुरिची में 65 मौतें होने के बाद भी यदि कुछ समय बाद किसी दूसरे राज्य में वही कहानी दोहराई जाती है, तो समस्या केवल अपराधियों की नहीं रह जाती, यह संस्थागत सीख की कमी का संकेत बन जाती है। भारत को अब हर जहरीली शराब त्रासदी के बाद ‘कितने गिरफ्तार हुए’ पूछने से आगे बढ़कर यह पूछना होगा कि कितने नेटवर्क खत्म हुए, कितनी अवैध भट्टियां स्थायी रूप से बंद हुईं, मेथनॉल की अवैध आपूर्ति कितनी रोकी गई, कितने अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई और अगली त्रासदी रोकने के लिए क्या स्थायी व्यवस्था बनाई गई?

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग तेज।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग तेज।

रांची

आयकर कर्मचारी महासंघ (ITEF), रांची इकाई द्वारा आज लंच आवर के दौरान पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme – OPS) की बहाली की मांग को लेकर सेंट्रल रेवेन्यू बिल्डिंग, रांची में एक प्रभावशाली प्रदर्शन/सभा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में लगभग 150 आयकर कर्मचारी एकजुट होकर शामिल हुए और सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन के लिए OPS की बहाली की मांग को मजबूती से उठाया।

इस अवसर पर ITEF रांची इकाई के सचिव श्री आभाष नाथ ने कहा, “सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के लिए OPS के अलावा कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। कर्मचारी अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और उत्पादक वर्षों को सरकार की सेवा में समर्पित करता है। सेवानिवृत्ति के बाद उसे आर्थिक अनिश्चितता नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और निश्चितता मिलनी चाहिए।”

ITEF रांची इकाई के अध्यक्ष मनोज कुमार शुक्ला ने कहा, “OPS के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। पुरानी पेंशन केवल पेंशन का विषय नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। हम लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना संघर्ष लगातार जारी रखेंगे।”

रूपक प्रसाद ने कहा, “सभी भारत के कर्मचारियों को एकजुट होकर OPS के लिए लड़ाई जारी रखनी है। कर्मचारियों की एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। देशभर के कर्मचारियों को एकजुट होकर सुरक्षित और सम्मानजनक सेवानिवृत्ति के अधिकार के लिए आवाज बुलंद करनी होगी।”

ITEF रांची इकाई ने स्पष्ट किया कि OPS की मांग किसी कर्मचारी के विरुद्ध नहीं है। यह उस कर्मचारी की सेवानिवृत्ति सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मांग है जिसने अपने जीवन के कई दशक सरकारी सेवा को समर्पित किए हैं।
लगभग 150 कर्मचारियों की भागीदारी ने यह संदेश स्पष्ट किया कि OPS की मांग को लेकर कर्मचारियों में व्यापक एकता और प्रतिबद्धता है। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि सेवानिवृत्ति सेवा का अंत हो सकती है, लेकिन आर्थिक चिंता की शुरुआत नहीं होनी चाहिए।

“एकजुट रहेंगे — संघर्ष जारी रखेंगे।”
OPS — सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए

आभास नाथ, सेक्रेटरी, आईटीएफ रांची यूनिट, झारखंड

आयकर कर्मचारी संघ
रांची इकाई, झारखंड

विधायक के निर्देश पर सिल्ली- रांगामाटी सड़क की मरम्मत शुर।

विधायक के निर्देश पर सिल्ली- रांगामाटी सड़क की मरम्मत शुर।

सरायकेला/ईचागढ़

लगातार हो रही बारिश के कारण सिल्ली–रांगामाटी मुख्य सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इससे राहगीरों एवं वाहन चालकों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।स्थानीय विधायक सबिता महतो को सड़क की जर्जर स्थिति की सूचना मिलते ही उन्होंने त्वरित संज्ञान लिया। विधायक के निर्देश पर ईचागढ़ झामुमो प्रखंड सचिव अमित सिन्हा को सड़क पर बने गड्ढों को तत्काल भरने एवं आवश्यक मरम्मत कार्य कराने का निर्देश दिया गया।

निर्देश के बाद सड़क के गड्ढों की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया।स्थानीय लोगों ने त्वरित कार्रवाई के लिए विधायक श्रीमती सबिता महतो के प्रति आभार जताया। ग्रामीणों ने कहा कि बारिश के दौरान सड़क पर गड्ढों के कारण आवागमन में काफी परेशानी हो रही थी। मरम्मत होने से लोगों को राहत मिलेगी।

उपायुक्त की अध्यक्षता में कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित समीक्षा बैठक संपन्न।

उपायुक्त की अध्यक्षता में कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित समीक्षा बैठक संपन्न।

सरायकेला/खरसावां

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों, प्रशिक्षण केंद्रों, श्रमिक पंजीकरण, प्लेसमेंट, रोजगार एवं स्वरोजगार से संबंधित कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान विगत समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की क्रमवार समीक्षा करते हुए लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। उपायुक्त ने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उनकी योग्यता एवं उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुरूप रोजगार अथवा स्वरोजगार से जोड़ना है।

उन्होंने निर्देश दिया कि जिले के विभिन्न औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के संस्थानों से प्राप्त रिक्त पदों की मांग के अनुरूप ट्रेड-वार प्रशिक्षण की कार्ययोजना तैयार की जाए। औद्योगिक संस्थानों द्वारा लाइव पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई रिक्तियों का नियमित रूप से अनुश्रवण करते हुए संबंधित ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त स्थानीय युवाओं के प्लेसमेंट हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही सभी औद्योगिक संस्थानों को अपनी रिक्तियों की जानकारी पोर्टल पर नियमित रूप से अद्यतन करने के लिए आवश्यक समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में जिले में संचालित सभी 13 प्रशिक्षण केंद्रों एवं प्रखंड स्तर पर संचालित 9 प्रशिक्षण केंद्रों के नियमित संचालन की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण की गुणवत्ता एवं नियमितता सुनिश्चित करने तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ाव के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर कार्य करने का निर्देश दिया। प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके अभ्यर्थियों का ट्रैकिंग एवं प्लेसमेंट सुनिश्चित करने तथा पात्र अभ्यर्थियों को संबंधित सरकारी कल्याणकारी एवं स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया गया।

काशी साहू कॉलेज, सरायकेला में स्किल पार्क के संचालन हेतु तैयार प्रस्ताव एवं अब तक की प्रगति की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने बॉयज एवं गर्ल्स हॉस्टल, आईटी लैब, कक्षा-कक्ष, सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक तैयारियों को विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नियमानुसार यथाशीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त ने राजनगर एवं खरसावां प्रखंड में सिलाई मशीन प्रशिक्षण का कार्य यथाशीघ्र प्रारंभ करने तथा प्रशिक्षण के उपरांत अभ्यर्थियों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने हेतु संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

PNB RSETI की समीक्षा के क्रम में प्रशिक्षण प्राप्त ऐसे अभ्यर्थियों, जो अब तक रोजगार अथवा स्वरोजगार से नहीं जुड़ पाए हैं, को चिह्नित कर उनसे संपर्क स्थापित करने, काउंसलिंग एवं आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। प्रशिक्षण प्राप्त इच्छुक अभ्यर्थियों का बैंक लिंकेज सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि वे वित्तीय सहायता एवं संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त कर स्वरोजगार प्रारंभ कर सकें।

बैठक में श्रमिक पंजीकरण की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने विभागीय योजनाओं के अंतर्गत विशेष कैंप आयोजित कर पात्र श्रमिकों से आवेदन प्राप्त करने एवं छूटे हुए श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने विभागों में संचालित रोजगार, स्वरोजगार एवं कल्याणकारी योजनाओं का स्थानीय भाषा में व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा पात्र लाभुकों को योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी कार्रवाई करने को कहा।

नियोजन कार्यालय की समीक्षा के क्रम में उपायुक्त ने जिला नियोजन पदाधिकारी को जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर जिले के विभिन्न विद्यालयों में कक्षा 10वीं, 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए विशेषज्ञों के माध्यम से करियर एवं रोजगार संबंधी काउंसलिंग आयोजित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नियमित रोजगार मेलों का आयोजन करने तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए प्रभावी पहल करने को कहा।

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि रोजगार मेला आयोजित किए जाने से पूर्व संबंधित क्षेत्र में स्थानीय भाषा के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक योग्य एवं इच्छुक अभ्यर्थी रोजगार मेले में शामिल होकर उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें। रोजगार मेलों में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण, योग्यता एवं उपलब्ध रिक्तियों के अनुरूप रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

उपायुक्त ने कहा कि कौशलयुक्त मानव संसाधन जिले के समग्र एवं सतत विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं प्रशिक्षण संस्थानों को आपसी समन्वय एवं उत्तरदायित्व के साथ कार्य करते हुए प्रशिक्षण, प्लेसमेंट एवं स्वरोजगार की पूरी प्रक्रिया को परिणामोन्मुखी बनाने तथा अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी पहल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

बैठक में श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर, जिला नियोजन पदाधिकारी, डीपीएम-जेएसएलपीएस, संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मनसा पूजा के अवसर पर छोटा गम्हरिया में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़।

मनसा पूजा के अवसर पर छोटा गम्हरिया में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़।

सरायकेला/छोटा गम्हरिया

छोटा गम्हरिया में आयोजित मनसा पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वर्ष 1963 से आयोजित हो रही इस पारंपरिक पूजा में क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर माता मनसा की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालु उत्साह के साथ पूजा कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

मनसा पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि यह पूजा कई वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस आयोजन के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाती है।

पूजा आयोजन में संस्थापक स्वर्गीय राधानाथ मोदक, स्वर्गीय राखोहरि मोदक एवं स्वर्गीय आदोरी बाला मोदक के योगदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। वहीं मंदिर समिति के सदस्यों में शंकर मोदक, दिवाकर मोदक, मनोरंजन मोदक एवं अभिषेक मोदक की महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हैं।

धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

अवैध पार्किंग के विरुद्ध परिवहन विभाग ने चलाया औचक निरीक्षण अभियान, नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों पर की गई कार्रवाई।

अवैध पार्किंग के विरुद्ध परिवहन विभाग ने चलाया औचक निरीक्षण अभियान, नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों पर की गई कार्रवाई।

सरायकेला/खरसावां

सरायकेला-खरसावाँ जिले में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने एवं सड़क पर अवैध पार्किंग के कारण होने वाली यातायात बाधा को रोकने के उद्देश्य से उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ के निर्देशानुसार तथा जिला परिवहन पदाधिकारी श्री शंकराचार्य सामद के नेतृत्व में दिनांक 18 अगस्त, 2026 को मोटरयान निरीक्षक द्वारा अवैध पार्किंग के विरुद्ध अभियान चलाया गया।

अभियान के दौरान सरायकेला-राजनगर बाईपास मार्ग, कोलाबीरा स्थित RKFL के समीप एवं सरायकेला क्षेत्र के अन्य स्थानों पर नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने तथा अवैध रूप से पार्किंग करने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

अभियान के क्रम में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूल किया गया। साथ ही, विशेष रूप से भारी वाहन चालकों को सड़क पर अवैध रूप से वाहन पार्क नहीं करने तथा यातायात नियमों का पालन करने की कड़ी हिदायत दी गई।

जिला प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अवैध पार्किंग के कारण यातायात बाधित होने एवं सड़क दुर्घटनाओं की संभावना को देखते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी नियमित रूप से चलाए जाएंगे।

संभावित भारी वर्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट, सभी अंचल अधिकारियों को सतर्कता एवं व्यापक जन-जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश

संभावित भारी वर्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट, सभी अंचल अधिकारियों को सतर्कता एवं व्यापक जन-जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश

सरायकेला/खरसावां

सरायकेला-खरसावाँ जिले में संभावित भारी वर्षा/अत्यधिक वर्षापात के मद्देनजर उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ नितिश कुमार सिंह द्वारा सभी अंचल अधिकारियों को अपने-अपने अंचल क्षेत्र में सतर्क एवं सक्रिय रहते हुए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।

भारी वर्षा के कारण नदियों, डैम, तालाबों एवं अन्य जलाशयों में जलस्तर बढ़ने, जल-जमाव, तेज जल प्रवाह, बाढ़ तथा अन्य दुर्घटनाओं की संभावना को देखते हुए सभी अंचल अधिकारियों को अपने क्षेत्र के संवेदनशील स्थलों को चिन्हित कर नियमित निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसे स्थलों पर आवश्यकतानुसार चेतावनी एवं सावधानी संबंधी बोर्ड लगाने तथा स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से आमजनों को सतर्क एवं जागरूक करने को कहा गया है।

भारी वर्षा के दौरान जलस्तर में वृद्धि, तटबंधों, पुल-पुलिया, जल-जमाव एवं आवागमन की स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आवश्यकता के अनुसार अंचल स्तर पर कंट्रोल रूम/आपदा नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था करते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों की ड्यूटी निर्धारित करने को भी कहा गया है।

अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों, चौकीदारों एवं अन्य स्थानीय कर्मियों के माध्यम से प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर लोगों को संभावित जोखिमों के प्रति जागरूक किया जाए। विशेष रूप से नदियों, डैम, तालाबों एवं तेज बहाव वाले स्थानों पर नहीं जाने तथा जल-जमाव वाले क्षेत्रों में पानी के भीतर जाने अथवा जलभराव वाले रास्तों से आवागमन करने से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।

जिला प्रशासन की ओर से आमजनों से अपील है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। जल-जमाव अथवा तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से बचें और बच्चों को भी ऐसे स्थानों से दूर रखें। अपने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी सतर्क एवं जागरूक करें। प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी एवं दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दें।

जिला प्रशासन द्वारा संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां एवं निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी आकस्मिक स्थिति अथवा दुर्घटना की सूचना प्राप्त होने पर संबंधित विभागों एवं बचाव दल के साथ समन्वय स्थापित करते हुए त्वरित राहत एवं बचाव कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी अप्रिय घटना की सूचना तत्काल वरीय पदाधिकारियों को देते हुए की गई कार्रवाई से अवगत कराएं तथा निर्देशों का अनुपालन प्राथमिकता एवं तत्परता के साथ सुनिश्चित करें, ताकि संभावित भारी वर्षा के दौरान जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।

भारत के चुनावी मॉडल का अमेरिका में बजा डंका!-ट्रंप ने कहा सेफ़गार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट (सेव एक्ट) के लिए भारत से सीखें अमेरिका -वोटर आईडी बना चुनावी बहस का नया केंद्र -समग्र व्यापक विश्लेषण।

भारत के चुनावी मॉडल का अमेरिका में बजा डंका!-ट्रंप ने कहा सेफ़गार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट (सेव एक्ट) के लिए भारत से सीखें अमेरिका -वोटर आईडी बना चुनावी बहस का नया केंद्र -समग्र व्यापक विश्लेषण।

अमेरिका में अब चलेगा इंडिया इलेक्शन मॉडल? -ट्रंप ने वोटर आईडी के बहाने भारत की चुनाव व्यवस्था को सराहा!

भारत भी इस अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा को आत्ममुग्धता के बजाय अपनी चुनावी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने के अवसर में बदलेगा?  -डेमोक्रेसी फर्स्ट ,वोटर फर्स्ट और ट्रस्ट फर्स्ट

वैश्विक स्तरपर दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनावी व्यवस्था को लेकर देश के भीतर भले ही चुनाव-दर-चुनाव राजनीतिक बहस,आरोप-प्रत्यारोप और चुनाव आयोग कीकार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हों,लेकिन 18 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनाव प्रणाली और विशेष रूप से मतदाता पहचान व्यवस्था की सार्वजनिक प्रशंसा ने एक बिल्कुल अलग अंतरराष्ट्रीय तस्वीर सामने रख दी है।उन्होंने 2024 के भारतीय लोकसभा चुनाव में लगभग 64.6 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी का उदाहरण देते हुए सेव अमेरिका एक्ट को पारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए अमेरिका में चुनाव सुधारों के लिए सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट यानी सेव एक्ट को आगे बढ़ाने की अपील की। ट्रंप ने भारत के विशाल चुनावी पैमाने का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब भारत इतनी बड़ी आबादी और करोड़ों मतदाताओं के साथ पहचान-आधारित चुनाव करा सकता है, तो अमेरिका में मतदाता पहचान को लेकर अधिक सख्त और एकसमान व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि भारत की चुनावी विशालता  अमेरिका के लिए मिसाल बन गई है,भारत का चुनाव मॉडल इसलिए असाधारण है क्योंकि यहां चुनाव केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विशाल भौगोलिक, भाषाई,सामाजिक और जनसंख्या विविधता के बीच संवैधानिक लोकतंत्र को संचालित करने का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास है। इलेक्शन कमिशन ऑफ़ इंडिया लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सात चरणों में मतदान कराया गया था।
साथियों, निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदान के लिए ईपीआईसी यानी वोटर आईडी के अलावा पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस,पैन कार्ड,आधार सहित कई निर्धारित फोटो पहचान दस्तावेज स्वीकार किए जाते हैं। यानी भारत में मूल सिद्धांत यह है कि मतदाता की पहचान मतदान केंद्र पर सत्यापित होनी चाहिए, हालांकि यह समझना जरूरी है कि केवल वोटर आईडी ही एकमात्र स्वीकार्य दस्तावेज नहीं है।यही वह बिंदु है जिसने अमेरिकी राजनीतिक बहस को भारत की ओर देखने के लिए प्रेरित किया है। ट्रंप ने 18 अगस्त की सुबह अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका वैध फोटो पहचान के बिना चुनाव कैसे कराता है। ट्रंप ने भारत के पिछले आम चुनाव का उल्लेख करते हुए लगभग 64.6 करोड़ मतदाताओं का आंकड़ा सामने रखा और कहा कि एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक के जरिए मतदान किया तथा प्रत्येक मतदाता के पास वैध फोटो पहचान दस्तावेज था। इसी तुलना को आधार बनाकर उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से सेव एक्ट पारित करने की मांग की।

साथियों बात अगर हम  भारत और अमेरिका की चुनावी व्यवस्था में सबसे बड़ा अंतर क्या है? इसको समझने की करें तो, भारत और अमेरिका दोनों विश्व के महत्वपूर्ण लोकतंत्र हैं, लेकिन उनकी चुनावी संरचना एक जैसी नहीं हैभारत में चुनावों के संचालन के लिए एक केंद्रीयसंवैधानिक संस्था,निर्वाचन आयोग,की प्रमुख भूमिका है, जबकि अमेरिका में चुनावों का प्रशासन काफी हद तक राज्यों और स्थानीय चुनावी संस्थाओं के हाथ में है। यही कारण है कि अमेरिका में मतदाता पंजीकरण, पहचान संबंधी नियम,अर्ली वोटिंग एब्सेंटी वोटिंग और मेल – इन वोटिंग जैसी व्यवस्थाओं में राज्य-दर-राज्य अंतर दिखाई देता है।इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि अमेरिका में कोई एक समान राष्ट्रीय मतदान प्रक्रिया नहीं है, जबकि भारत में चुनाव संचालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अधिक केंद्रीकृत संवैधानिक ढांचा मौजूद है।

भारत में मतदाता पंजीकरण के बाद मतदान केंद्र पर मतदाता की पहचान की जांच होती है। दूसरी ओर, अमेरिका में संघीय चुनावों के लिए पहचान और नागरिकता संबंधी नियमों का ढांचा अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकता है। यही अंतर ट्रंप के सेव एक्ट अभियान का मूल राजनीतिक मुद्दा बन गया है। व्हाइट हाउस स्वयं दावा करता है कि भारत और ब्राजील जैसे देश मतदाता पहचान को अधिक मजबूत पहचान- प्रणालियों से जोड़ते हैं, जबकि अमेरिका में नागरिकता के संबंध में व्यापक रूप से सेल्फ- अटेस्टेशन कीव्यवस्था पर निर्भरता रही है। हालांकि इस तुलना को सावधानी से समझना जरूरी है,भारत में भी आधार को अनिवार्य मतदाता पहचान के रूप में इस्तेमाल करने का अर्थ नहीं है; निर्वाचन आयोग मतदान के लिए कई वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज स्वीकार करता है।

साथियों बात अगर हम क्या है सेव अमेरिका एक्ट ?इसको समझने की करें तो,यहां एक महत्वपूर्णतथ्यात्मक स्पष्टता आवश्यक है। इसका आधिकारिक नाम सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट , संक्षेप में सेव एक्ट है। यह कोई स्वास्थ्य संबंधी सेव कानून नहीं, बल्कि अमेरिकी चुनावों में मतदाता पात्रता और नागरिकता सत्यापन से जुड़ा प्रस्तावित संघीय कानून है। इसका मूल उद्देश्य संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य करना है। आधिकारिक विधायी रिकॉर्ड के अनुसार एच.आर.22 को 3 जनवरी 2025 को प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया और 10 अप्रैल 2025 को सदन ने इसे 220-208 मतों से पारित कर दिया। इसके बाद यह सीनेट को भेजा गया। इसलिए इसे यह कहना सही नहीं होगा कि सेव एक्ट पहले ही पूर्ण संघीय कानून बन चुका है।प्रस्तावित कानून में अमेरिकी नागरिकता साबित करने के लिए विभिन्न दस्तावेजों की व्यवस्था की गई है, जिनमें वैध अमेरिकी पासपोर्ट, कुछ प्रकार के रियल आईडी -अनुरूप पहचान दस्तावेज, सैन्य पहचान एवं संबंधित रिकॉर्ड तथा सरकार द्वारा जारी कुछ अन्य दस्तावेज शामिल हैं। कानून का मूल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संघीय चुनावों में केवल पात्र अमेरिकी नागरिक ही पंजीकृत हों।

साथियों बात अगर हम  मेल-इन वोटिंग पर भी सख्ती का प्रस्ताव को समझने की करें तो,सेव एक्ट की बहस केवल फोटो पहचान तक सीमित नहीं है। व्हाइट हाउस के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में सामान्य मेल-इन बल्लोंट्स को सीमित करने और बीमारी, विकलांगता, सैन्य सेवा अथवा यात्रा जैसे विशेष मामलों में उन्हें अनुमति देने का प्रस्ताव है। साथ ही राज्यों को मतदाता सूचियों से गैर- नागरिकों के नाम हटाने के लिए व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।यहीं से अमेरिका की चुनावी बहस अधिक संवेदनशील हो जाती है। समर्थकों का तर्क है कि मतदान प्रक्रिया में नागरिकता और पहचान की मजबूत पुष्टि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को बढ़ाएगी। विरोधियों की चिंता है कि अत्यधिक दस्तावेजी बाध्यताएं उन वैध मतदाताओं के लिए मतदान कठिन कर सकती हैं जिनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए अमेरिकी बहस का वास्तविक प्रश्न केवल यह नहीं है कि वोटर आईडी होना चाहिए या नहीं? बल्कि यह है कि पहचान और नागरिकता सत्यापन की व्यवस्था ऐसी कैसे हो जो चुनावी सुरक्षा भी बढ़ाए और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार में अनावश्यक बाधा भी न डाले।
साथियों बात अगर हम  ट्रंप का अमेरिक़ी फर्स्ट अब इंडिया इलेक्शन मॉडल से जुड़ता दिखाई दे रहा है,ट्रंप लंबे समय से अमेरिक़ी फर्स्ट की राजनीति केसमर्थक रहे हैं। लेकिन इस बार उनके चुनावी सुधार अभियान में भारत का उदाहरण सामने आना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जिस भारत की चुनावी प्रणाली को लेकर भारतीय राजनीति में लगातार बहस होती रहती है, उसी व्यवस्था को अमेरिकी राष्ट्रपति अपने देश में चुनावी सुधारों के पक्ष में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। यहअतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि  दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना अमेरिकी चुनावी बहस का संदर्भ 18 अगस्त 2026 की ट्रंप टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने भारत-अमेरिका संबंधों की चर्चा को व्यापार,रक्षा,तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़ाकर लोकतांत्रिक चुनावी व्यवस्थाओं तक पहुंचा दिया है। ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित सवाल का हवाला देकर अपने सेव एक्टअभियान को मजबूत करने की कोशिश की है और भारत के विशाल चुनावी अनुभव को अमेरिकी मतदाता पहचान बहस के केंद्र में ला दिया है।लोकतंत्र की खूबसूरती ही यही है कि दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से कुछ सीखने की बात करे।आज सवाल केवल यह नहीं है कि अमेरिका भारत से क्या सीखेगा;बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत भी इस अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा को आत्ममुग्धता के बजाय अपनी चुनावी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने के अवसर में बदलेगा? यही वह बिंदु है जहां अमेरिक़ी फर्स्ट की बहस में भारत का चुनावी मॉडल एक नई कड़ी जोड़ता दिखाई देता है डेमोक्रेसी फर्स्ट ,वोटर फर्स्ट और ट्रस्ट फर्स्ट। भारतीय लोकतंत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय क्षण है।यहां एक दिलचस्प विरोधाभास भी दिखाई देता है।भारत में प्रत्येक बड़े चुनाव के बादईवीएम  मतदाता सूची, चुनाव आयोग की निष्पक्षता मतदान प्रतिशत और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद उठते हैं। विपक्ष कई बार चुनाव आयोग से सवाल करता है और सत्ता पक्ष चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का बचाव करता है। लेकिन उसी समय अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा भारत की मतदाता पहचान व्यवस्था को अमेरिकी चुनाव सुधार के संदर्भ में उद्धृत किया जाना यह संकेत देता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का मूल्यांकन केवल घरेलू राजनीतिक चश्मे से सटीकता से  नहीं किया जाना चाहिए।

साथियों बात अगर हम  क्या अमेरिका को भारत से सीखना चाहिए? इसको समझने की करें तो इस प्रश्न का उत्तर न तो पूरी तरह हां है और न ही पूरी तरह नहीं। भारत और अमेरिका की संवैधानिक संरचना, संघीय व्यवस्था,चुनावी इतिहास, मतदान पद्धति और प्रशासनिक ढांचे अलग हैं। इसलिए भारत की पूरी चुनाव प्रणाली को ज्यों का त्यों अमेरिका में लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। लेकिन कुछ सिद्धांत अवश्य साझा किए जा सकते हैं,जैसे मतदाता की पहचान की विश्वसनीय पुष्टि, मतदाता सूची का नियमित शुद्धिकरण, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदान की ऑडिटेबिलिटी, मजबूत चैन ऑफ़ कस्टडी और मतदाता पात्रता की स्पष्ट पुष्टि।भारत का अनुभव यह दिखाता है कि विशाल पैमाने पर चुनाव कराना केवल
कानून बनाने से संभव नहीं होता; इसके लिए चुनावी प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी प्रणाली, प्रशिक्षित कर्मचारियों, मतदाता सूची प्रबंधन और चरणबद्ध मतदान की विशाल मशीनरी चाहिए। यही भारत की वास्तविक चुनावी क्षमता है।

साथियों, दूसरी ओर अमेरिका की चिंता भी समझना जरूरी हैँ, अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि लोकतंत्र में सबसे पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि चुनाव का फैसला उन्हीं नागरिकों द्वारा किया जाए जिन्हें कानूनन मतदान का अधिकार प्राप्त है। व्हाइट हाउस ने इसी उद्देश्य से नागरिकता सत्यापन, मतदाता पहचान और मेल – बैलट सुरक्षा को प्रमुख चुनाव सुधार मुद्दा बनाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मार्च 2026 में एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से संघीय चुनावों में नागरिकता सत्यापन और मेल /एब्सेंटी बैलट प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम भी उठाया था।लेकिन अमेरिकी व्यवस्था में राज्यों की संवैधानिक भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए संघीय स्तर पर एक समान कठोर नियम लागू करना राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से जटिल विषय है। सेव एक्ट के समर्थक इसे चुनावी सुरक्षा की जरूरत बताते हैं, जबकि आलोचक इसे मताधिकार पर संभावित अतिरिक्त बोझ के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि यह कानून अमेरिका में सिर्फ चुनाव सुधार का विषय नहीं बल्कि मताधिकार, संघवाद और नागरिक स्वतंत्रता की बहस भी बन गया है।

साथियों बात अगर हम  भारत के लिए भी यह आत्ममंथन का अवसर है इसको समझने की करें तो,ट्रंप की टिप्पणी को केवल भारत की प्रशंसा मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा।यह भारत के लिए भी आत्ममंथन का अवसर है। यदि विश्व का सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश भारत की चुनावी पहचान प्रणाली से कोई तत्व सीखने योग्य मानता है,तो भारत को भी अपनी चुनावी व्यवस्था को लगातार अधिक पारदर्शी तकनीकी रूप से सुरक्षित और राजनीतिक रूप से विश्वसनीय बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत केवल इस बात में नहीं होती किचुनाव समय पर हो जाए; असली ताकत तब होती है जब मतदाता को विश्वास हो कि उसका नाम सही है, उसकी पहचान सुरक्षित है, उसका वोट सही तरीके से दर्ज हुआ है और परिणाम निष्पक्ष प्रक्रिया से निकला है। भारत ने दुनिया को सबसे बड़े पैमाने पर चुनाव कराने की क्षमता दिखाई है। अब अगली चुनौती इस क्षमता के साथ विश्वास की गहराई बढ़ाने की है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

ईचागढ़ के लेपाटांड़ में मुआवजा भुगतान को लेकर लगा शिविर में पहुंचे विधायक सबिता महतो।

ईचागढ़ के लेपाटांड़ में मुआवजा भुगतान को लेकर लगा शिविर में पहुंचे विधायक सबिता महतो।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के लेपाटांड़ पंचायत भवन में सोमवार को  लाबा नहर से पातकुम  तक सड़क चौड़ीकरण, मजबूतीकरण एवं पुनर्निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान को लेकर विधायक सविता महतो के पहल पर शिविर लगाया गया।

शिविर में विधायक सबिता महतो शामिल हुईं। लेपाटांड़, पाटपुर एवं किस्टोपुर मौजा के भू-स्वामियों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए 13, 14 एवं 17 अगस्त को शिविर आयोजित किया गया था। ग्रामीणों के मांग पर जो बढ़ कर 18, 19 तक बढ़ाया गया।विधायक ने अधिकारियों को प्रभावित रैयतों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने तथा प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। ग्रामीणों की मांग पर विधायक ने मुआवजा भुगतान शिविर की अवधि दो दिन और बढ़ाने का निर्देश दिया, ताकि सभी प्रभावित रैयत आवश्यक दस्तावेज जमा कर प्रक्रिया पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण क्षेत्रवासियों की लंबे समय से मांग रही है और इसके लिए सभी रैयतों का सहयोग जरूरी है।

उन्होंने लेपाटांड़ के मुंडारी खूंटकट्टी क्षेत्र में आने का उल्लेख करते हुए खूंटकट्टीदारों एवं मानकी के सहयोग से समस्याओं के समाधान की अपील की। अनुमंडल पदाधिकारी नितिन शिवम गुप्ता ने भू-स्वामियों से जल्द आवश्यक दस्तावेज जमा करने की अपील की, ताकि मुआवजा भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो। मौके पर अंचलाधिकारी दीपक प्रकाश, झामुमो केंद्रीय सदस्य काबलू महतो, मुंडारी खूंटकट्टीदार सह ग्राम प्रधान मधूमती सिंह मानकी, भू-अर्जन विभाग के अरूप कुमार मोदक एवं पशुपति बागची, युवा प्रखंड अध्यक्ष स्वपन आदित्यदेव समेत सड़क निर्माण से जुड़े कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

नगर निकाय क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति, कचरा उठाव, साफ-सफाई एवं अन्य विकास योजनाओं की उपायुक्त ने की समीक्षा।

नगर निकाय क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति, कचरा उठाव, साफ-सफाई एवं अन्य विकास योजनाओं की उपायुक्त ने की समीक्षा।

सरायकेला-खरसावां

उपायुक्त  नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में नगर निगम आदित्यपुर, नगर परिषद कपाली एवं नगर पंचायत सरायकेला क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं नागरिक सुविधाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा बैठक आहूत की गई। बैठक में पूर्व की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए पेयजलापूर्ति, कचरा उठाव एवं डंपिंग, साफ-सफाई, नाली, सड़क निर्माण, अवैध पार्किंग सहित अन्य विकास एवं निर्माण कार्यों की अद्यतन प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में पेयजलापूर्ति से संबंधित समस्याओं एवं संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित एजेंसियों को लंबित कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण करने तथा योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने क्षेत्र के सभी घरों को नल-जल योजना से जोड़ते हुए नियमित एवं सुगम पेयजलापूर्ति सुनिश्चित करने तथा पेयजल से संबंधित प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पेयजलापूर्ति से संबंधित कार्यों में किसी भी प्रकार की समस्या अथवा बाधा होने पर संबंधित विभाग एवं कार्यदायी एजेंसी आपसी समन्वय से उसका शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।

नगर निकाय क्षेत्रों में कचरा उठाव, डंपिंग एवं साफ-सफाई व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने नियमित रूप से कचरे का उठाव एवं निर्धारित स्थल पर डंपिंग सुनिश्चित करने तथा साफ-सफाई के लिए स्पष्ट कार्ययोजना निर्धारित कर उसके अनुरूप नियमित रूप से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण बनाए रखना संबंधित निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए साफ-सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी एवं समीक्षा सुनिश्चित की जाए।

आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में कचरा उठाव से संबंधित प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित एजेंसी को निर्देश दिया कि नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी 32 कचरा उठाव वाहनों को नियमित रूप से क्षेत्र में भ्रमणशील रखा जाए। मरम्मत अथवा मेंटेनेंस के कारण खड़े वाहनों को यथाशीघ्र दुरुस्त कर सेवा में लगाया जाए। नगर आयुक्त को सभी वाहनों की GPS ट्रैकिंग के माध्यम से नियमित समीक्षा करने तथा यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी वाहन निर्धारित रूट एवं कार्ययोजना के अनुरूप संचालित हों। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

आदित्यपुर क्षेत्र में GAIL GAS एवं JUDCO के पाइप एवं गैस पाइपलाइन से संबंधित प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित एजेंसियों के पदाधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए वर्तमान समस्याओं का त्वरित निराकरण करने तथा अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए आवश्यक समन्वय एवं पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त ने शहरी क्षेत्रों में अवैध पार्किंग की स्थिति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को अवैध पार्किंग के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने आवश्यकतानुसार औचक निरीक्षण अभियान चलाने तथा चिन्हित स्थलों पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा, ताकि यातायात व्यवस्था सुगम एवं व्यवस्थित बनी रहे।

समीक्षा के क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की अद्यतन प्रगति की भी जानकारी ली गई। उपायुक्त ने योजना के तहत सभी पात्र लाभुकों को नियमानुसार योजना का लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने ऐसे लाभुकों की सूची जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा, जिनके आवास स्वीकृत होने के बावजूद ऋण अथवा आवास निर्माण से संबंधित प्रक्रिया लंबित है, ताकि लंबित मामलों के कारणों की समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कार्यदायी एजेंसियों को विभागीय योजनाओं एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप जनहितकारी निर्णय लेते हुए कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यकता के अनुसार स्थल निरीक्षण किया जाए तथा समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने नगर निकाय क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति, विद्युत आपूर्ति, कचरा उठाव एवं डंपिंग, साफ-सफाई, नाली एवं जल निकासी, सड़क, पार्किंग सहित अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं की नियमित समीक्षा एवं निगरानी करने का निर्देश दिया। साथ ही, संबंधित पदाधिकारियों को औचक निरीक्षण अभियान संचालित करते हुए जमीनी स्थिति का आकलन करने और निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

उपायुक्त ने कहा कि नगर निकाय क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर एवं सुगम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। सभी संबंधित विभाग एवं कार्यदायी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए लंबित योजनाओं में तेजी लाएं तथा जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन एवं नागरिक सुविधाओं से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।

बैठक में नगर आयुक्त, नगर निगम आदित्यपुर एजाज़ अनवर, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद कपाली, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत सरायकेला, कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, सरायकेला-आदित्यपुर, सहायक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, सरायकेला-आदित्यपुर, नगर प्रबंधक, नगर निकाय कार्यालयों के अभियंता एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सरायकेला-खरसावाँ में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 7100 किलो जावा महुआ जब्त।

सरायकेला-खरसावाँ में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 7100 किलो जावा महुआ जब्त।

सरायकेला/राजनगर

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला-खरसावाँ। जिले में अवैध शराब कारोबार के विरुद्ध प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। उपायुक्त के निर्देश पर उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज के नेतृत्व में उत्पाद विभाग की टीम ने शनिवार 16 अगस्त को राजनगर थाना क्षेत्र में बड़ी छापेमारी की।

गुप्त सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने राजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जनबानी एवं हनुमतबेड़ा में सघन छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने अवैध रूप से संचालित हो रहे शराब के अड्डों पर कार्रवाई करते हुए 04 अवैध चुलाई भट्टियों को मौके पर ही ध्वस्त कर दिया।

छापेमारी के दौरान मौके से 7,100 किलोग्राम जावा महुआ और 140 लीटर अवैध महुआ चुलाई शराब बरामद की गई है। बरामद सभी अवैध उत्पाद को विधिसम्मत तरीके से जब्त कर लिया गया है।

विभाग द्वारा संबंधित अवैध चुलाई अड्डा संचालकों के विरुद्ध झारखंड उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत अभियोग दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

इस संबंध में उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज ने बताया कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री के विरुद्ध यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा और इस तरह की अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध शराब के निर्माण, बिक्री या परिवहन की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन या उत्पाद विभाग को दें, ताकि ऐसे अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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