झारखंड में बढ़ती गर्मी के बीच स्कूलों के समय में बदलाव, 21 अप्रैल से लागू होगा नया आदेश।
झारखंड/रांची
राज्य में लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी विद्यालयों के संचालन समय में बदलाव का महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। यह आदेश 21 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और अगले आदेश तक लागू रहेगा।
जारी निर्देश के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी, गैर-सरकारी सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) एवं निजी विद्यालयों में कक्षा K.G. से लेकर कक्षा 8 तक की पढ़ाई सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक संचालित की जाएगी। वहीं कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक चलेंगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को शेष समय, यानी सुबह 7:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक विद्यालय में रहकर गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करना होगा।
सरकार का यह निर्णय छात्रों को भीषण गर्मी से राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। आदेश को विभागीय सचिव की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
भीषण सड़क दुर्घटना में 19 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई, एक गंभीर रूप से घायल।
सरायकेला/कुचाई
रविवार को खरसावां-कुचाई मार्ग में तेज भीषण सड़क दुर्घटना देखने को मिली जिस्म की एक 19 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल है। इस हादसे ने दो परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया है। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सड़क पर बिखरा खून और क्षतिग्रस्त बाइक दुर्घटना की भयावहता को बयां कर रही थी।
खरसावां-कुचाई मुख्य मार्ग के देहरूडीह गांव के समीप हुई है। मृतक की पहचान सरायकेला थाना क्षेत्र के बुडियाडीह गांव निवासी आकाश जामुदा (19 वर्ष) के रूप में हुई है। वहीं, घायल युवक की पहचान विष्णु सोय (18) के रूप में की गई है। ग्रामीणों और परिवार के लोगो ने बताया कि दोनों युवक आपस में गहरे मित्र थे और अक्सर साथ रहते थे। रविवार को भी दोनों बाइक पर सवार होकर कुचाई गए थे। कुचाई से शाम 7 बजे घर लौटने के दौरान खरसावां-कुचाई मुख्य मार्ग के देहरूडीह गांव के मडवाडी तलाब के समीप एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार अज्ञात ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। जिससे घटनास्थल पर ही आकाश जामुदा की मौत हो गई।
जबकि विष्णु सोय सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से आनन-फानन में आकाश जामुदा उठाकर सदर अस्पताल सरायकेला एंबुलेंस से भेज दिया गया। जबकि विष्णु सोय को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खरसावां लाया गया। घायल की स्थिति नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर की देखरेख में उसका सघन उपचार जारी है। बेहतर इलाज के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया गया। घटना ट्रैक्टर की टक्कर से हुई या बाइक स्वर स्वयं दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। फिलहाल पुलिस मामले के जांच में जुटी है।
नारायण आईटीआई में भगवान परशुराम जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई।
सरायकेला/चांडिल
नारायण आईटीआई लुपुंगडीह चांडिल में भगवान परशुराम जी की जयंती बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के सभी शिक्षक, प्रशिक्षु एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और भगवान परशुराम जी के आदर्शों को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के संस्थापक डॉ. जटाशंकर पांडे जी ने अपने संबोधन में भगवान परशुराम जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कि वे भगवान विष्णु के छठे अवतार थे, जिन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष कर धर्म की स्थापना की। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के यहाँ हुआ था। वे बचपन से ही तेजस्वी, पराक्रमी और विद्वान थे। डॉ. पांडे ने बताया कि भगवान परशुराम जी ने समाज में सत्य, न्याय और धर्म के पालन का संदेश दिया। वे महान योद्धा होने के साथ-साथ एक आदर्श गुरु भी थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक अत्याचारियों का विनाश कर समाज को एक नई दिशा दी। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि हमें सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने भगवान परशुराम जी के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मौजूद रहे प्राचार्य जयदीप पांडे, शांति राम महतो, नंदलाल दंडपात, शुभम साहू, देवाशीष मंडल,संजीत महतो,पवन महतो,हरीश चंद्र दास,गौरव महतो , कृष्णा पद महतो, शिशुमती दास आदि उपस्थित रहे।
अंबेडकर जयंती पर भाजपा की विचार संगोष्ठी, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण पर दिया गया जोर।
सरायकेला
भारत रत्न एवं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर चल रहे कार्यक्रमों के तहत रविवार को जिला भाजपा कार्यालय, सरायकेला में विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष हरे कृष्णा प्रधान ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री सह प्रदेश उपाध्यक्ष बढ़कुवर गगराई उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने वंचित वर्ग और महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर न केवल एक महान विधिवेत्ता और शिक्षाविद थे, बल्कि दूरदर्शी राजनेता भी थे, जिनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
वहीं आदित्यपुर के महापौर संजय सरदार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। संगोष्ठी के बाद जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में जिले के सभी 23 मंडल कमेटियों के पदाधिकारियों को मंचासीन अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष ने कहा कि जिला संगठन जनता की समस्याओं को लेकर मुखर रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन भी करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनावों में पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक अनन्तराम टुडू, पूर्व जिलाध्यक्ष रामनाथ महतो, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुनील श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ नेता मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री राकेश मिश्रा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. भूषण टुडू ने किया। इस मौके पर सतीश शर्मा, अमितेश अमर, ललन शुक्ला, रितिका मुखी, सूर्या देवी, पप्पू वर्मा, शंभु मंडल, बद्री दारोगा, सावित्री बानरा, बलदेव मंडल, बीजू दत्ता, आकाश रंजन सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सरायकेला-खरसावां में नई एसपी का योगदान, महिला एवं बाल सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावां: जिले की नई पुलिस अधीक्षक(SP)निधि द्विवेदी ने पदभार ग्रहण करते ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा कि जिले में महिला एवं बच्चों से जुड़े मामलों पर पुलिस की विशेष नजर रहेगी और ऐसे मामलों के त्वरित एवं संवेदनशील निष्पादन को सुनिश्चित किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने बताया कि अपराध नियंत्रण के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले को अपराधमुक्त बनाने की दिशा में पुलिस पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्यकरेगी।पदभार ग्रहण करने के अवसर पर जिला पुलिस द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।
इस दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी समीर कुमार सवैया, चांडिल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अरविंद बिंद्रा, डीएसपी सहित सभी थाना प्रभारी मौजूद रहे। नवपदस्थापित एसपी ने सभी पुलिस पदाधिकारियों को टीम भावना के साथ कार्य करने और आम जनता के प्रति संवेदनशील रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है, जिसे हर हाल में बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
जोड़ा बैल शिविर कार्यक्रम का हुआ आयोजन, किसानों के खीले चेहरा।
सरायकेला/ईचागढ़
सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय परिसर के पशुपालन कार्यालय प्रांगण में शनिवार को जोड़ा बैल शिविर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिविर में मुख्य रूप से प्रखंड प्रमुख गुरूपद मार्डी,जिप सदस्य ज्योतिलाल मांझी, बीडीओ एकता वर्मा एवं प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो उपस्थित थे। शिविर में किसानों के बीच 90 प्रतिशत अनुदान राशि पर जोड़ा बैल का वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 8 किसानों के बीच 8 जोड़ा बैल का वितरण किया गया। वहीं वीडियो एकता वर्मा ने लाभूक किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का जानकारी दिया एवं योजनाओं का समुचित लाभ उठाने का अपील किया। पशु पालन पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो ने बताया कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदानित राशि पर किसानों को एक एक जोड़ा बैल दिया गया।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को खेती करने में प्रोत्साहित करना है, ताकि गरीब किसान सरकारी अनुदान पर जोड़ा बैल लेकर मन लगाकर खेती कर सके और किसान आत्मनिर्भर हो। उन्होंने कहा कि बैलों का रखरखाव,समय पर स्वास्थ्य जांच, वैक्सीन आदि के संबंध में भी किसानों को जानकारी दिया गया।वहीं किसानों को जोड़ा बैल मिलने से लाभूक किसानों का चेहरा खुशी से खिल उठा।
राष्ट्रीय उच्च पथ 33 कान्दरबेड़ा पर भीषण हादसा, ट्रेलर के चपेट में आने से दो बाइक सवार युवक गंभीर।
सरायकेला/चांडिल
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कान्दरबेड़ा के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर शनिवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से जा टकराई, जिससे बाइक सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि एक महिला को हल्की चोटें आई हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाइक पर सवार तीनों लोग नीमडीह प्रखंड के चालियामा बांधड़ीह गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। घायलों में श्रीकांत सिंह, नागेंद्र सिंह एवं प्रतिमा सिंह शामिल हैं। बताया जा रहा है कि तीनों जमशेदपुर की ओर जा रहे थे।
इसी दौरान कान्दरबेड़ा के पास सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर में उनकी बाइक पीछे से जा भिड़ी।हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। मौके पर मौजूद आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो के भाई रुद्र प्रताप महतो ने निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था कर सभी घायलों को तत्काल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल, जमशेदपुर पहुंचाया।डॉक्टरों के अनुसार, दोनों युवकों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि महिला को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।घटना स्थल पर समाजसेवी शेखर गांगुली एवं झामुमो के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष हरिदास महतो भी मौजूद थे।यह हादसा एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर लापरवाही से खड़े भारी वाहनों और तेज रफ्तार के कारण बढ़ते सड़क हादसों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
बरसात में ‘कैद’ होते ग्रामीण, 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी।
सरायकेला/ईचागढ़
सरायकेला खरसावां जिला अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के मैसाढ़ा पंचायत के कालीचामदा के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर बीडीओ एकता वर्मा को ज्ञापन सौंपा । ग्रामीणों का कहना है कि चांडिल बांध विस्थापन का दंश झेलने के बावजूद आज तक गांव में पक्की सड़क नहीं बन पाई है। करीब 70 परिवारों वाले इस गांव की आबादी लगभग 400 है, लेकिन आवागमन के लिए समुचित सड़क नहीं होने से लोगों का जीवन कठिन बना हुआ है। बरसात के दिनों में कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है, जिससे ग्रामीणों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
सड़क के अभाव में स्वास्थ्य और शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खटिया के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। वहीं, कीचड़ भरे रास्तों के कारण बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
इस मुद्दे पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने बताया कि बीडीओ द्वारा 7 दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो वे डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे एवं प्रखंड कार्यालय में धरना प्रदर्शन और अनशन भी किया जाएगा। मौके पर सैकड़ों ग्रामीण महिला पुरुष उपस्थित थे।
देश के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बंगाल चुनाव के दौरान कुड़मि बहुल क्षेत्रों में कुड़मालि भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का संकेत माना जा सकता है। बृहद छोटानागपुर क्षेत्र के अंतर्गत पश्चिम बंगाल में निवास करने वाला कुड़मि समाज अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति और परंपराओं के साथ लंबे समय से पहचान और अधिकार की मांग करता रहा है। भारत की विविधता में भाषाई पहचान का विशेष महत्व है। जब किसी भाषा को आठवीं अनुसूची में स्थान मिलता है, तो उसे न केवल संवैधानिक संरक्षण मिलता है, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और सांस्कृतिक विकास के नए द्वार भी खुलते हैं। ऐसे में कुड़मालि भाषा को यह दर्जा दिलाने की पहल कुड़मि समाज के आत्मसम्मान को मजबूत कर सकती है।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी द्वारा जनजातीय और क्षेत्रीय समुदायों के प्रति विश्वास निर्माण की रणनीति पहले भी दिखाई दे चुकी है। इसका प्रमुख उदाहरण श्रीमती द्रौपदी मुर्मू हैं, जो संथाल समाज से आती हैं और आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। यह घटना न केवल एक समुदाय के लिए, बल्कि पूरे देश के प्रति सामाजिक समावेशन और अवसर की समानता का प्रतीक बनी।
इसी तरह यदि कुड़मि समाज को भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उचित प्रतिनिधित्व मिलता है, चाहे वह मंत्री पद हो या अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, तो इससे समाज में विश्वास और भागीदारी की भावना और प्रबल होगी। इससे न केवल कुड़मि समाज का उत्थान होगा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ें भी और मजबूत होंगी। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि ऐसे वादे केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें ठोस नीतियों और कार्यान्वयन के माध्यम से साकार किया जाए। भाषा को मान्यता देने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
आखिर कुड़मि समाज के साथ विश्वास का यह संबंध केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। जहां हर समुदाय को अपनी पहचान, सम्मान और विकास का समान अवसर मिले।
आज आवश्यकता है कि हम सभी कुड़मि भाई-बहन अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग पूरी समझदारी के साथ करें। हमें यह देखना है कि कौन हमारी भाषा, हमारी संस्कृति और हमारे समाज के उत्थान के लिए ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प ले रहा है। हमें अवसर देना है परखने का, समझने का, और अपने भविष्य को मजबूत करने का। लेकिन समाज के सभी सदस्यों एवं वर्गों को, यह भी याद रखना होगा, हमारा आंदोलन हमारी पहचान है। यह संघर्ष हमारी आत्मा है । यह न कभी रुका है, न कभी रुकेगा। चाहे कोई भी सरकार आए या जाए, कुड़मि समाज अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहेगा, संगठित रहेगा और आगे बढ़ता रहेगा। आज का निर्णय केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि आगे आने वाले वर्षों की दिशा तय करेगा। एकजुट होकर, जागरूक होकर, और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर हमें आगे बढ़ना है।
प्रस्तुति :गुणधाम मुतरुआर (भूगोल-शिक्षक) अनुग्रह नारायण +2 उच्च विद्यालय पिलीद, ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां, झाड़खंड – 832403
2013 बैच की आईपीएस निधि द्विवेदी संभालेंगी सरायकेला-खरसावां पुलिस की कमान।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावां: जिले के पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ है। 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी निधि द्विवेदी को सरायकेला-खरसावां की नई पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में नियुक्त किया गया है। वे अब जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगी। निधि द्विवेदी के पदभार ग्रहण करने से जिले में पुलिसिंग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासनिक दक्षता और सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाने वाली द्विवेदी से अपराध नियंत्रण, विधि-व्यवस्था सुदृढ़ करने और आम जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की अपेक्षा की जा रही है।
बताया जा रहा है कि नई एसपी जिले में अपराध पर अंकुश लगाने, अवैध गतिविधियों पर सख्ती बरतने और पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह एवं पारदर्शी बनाने को प्राथमिकता देंगी। साथ ही महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने नई एसपी के आगमन का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में जिले में शांति और सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
तिरूलडीह थाना क्षेत्र में अवैध खनन और बालू परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। तिरुलडीह थाना क्षेत्र में शुक्रवार को चलाए गए विशेष छापामारी अभियान के दौरान पुलिस ने अवैध बालू से लदे दो ट्रैक्टरों को जब्त किया है। इस कार्रवाई से इलाके में अवैध खनन करने वालों के बीच हड़कंप मच गया है।
ग्राम काड़कीडीह में छापेमारी कर दो अवैध बालू लदे ट्रैक्टर जब्त किया।थाना प्रभारी कौशल कुमार ने बताया कि तिरुलडीह थाना क्षेत्र के ग्राम काड़कीडीह में अवैध रूप से बालू का उत्खनन और परिवहन करने का सुचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने विशेष अभियान चलाया और मौके से दो ट्रैक्टरों को पकड़ लिया गया। जब्त किए गए दोनों ट्रैक्टरों में करीब 200 सीएफटी अवैध बालू लदा हुआ था। पुलिस ने तत्काल दोनों वाहनों को अपने कब्जे में लेकर थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया। अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई किया जा रहा है।
संसद का रण:महिला आरक्षण- सरकार का मास्टरस्ट्रोक रूल 66 की सियासी शतरंज।
महाराष्ट्र/गोंदिया
विपक्ष को धर्मसंकट में डालने की रणनीति-विपक्ष की दुविधा:आगे कुआं,पीछे खाई-भारतीय संसद पर टिकी वैश्विक निगाहें
विपक्ष क़ा शाब्दिक हमला: चैरिटी बिगन्स एट होम- सत्ताधारी पार्टी संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दें- प्रधानमंत्री पद भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं क़ो दें- सदन में तीखी बहस और हंगामा
रूल 66 का निलंबन,संयुक्त मतदान, अधिसूचना का समय ये सभी कदम एक जटिल राजनीतिक शतरंज के हिस्से, जहां हर चाल का दूरगामी प्रभाव- कानून निर्माण केवल नीति नहीं,रणनीति,संख्या बल और समय प्रबंधन का मिश्रण बन चुका है-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर भारत की संसद में चल रहा 16 से 18 अप्रैल 2026भारतीय संसद का विशेष सत्र केवल एक सामान्य विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक राजनीति के गहरे रणनीतिक, संवैधानिक और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बन गया।वर्तमान घटनाक्रम केवल एक घरेलू राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं,संवैधानिक व्याख्याओं और राजनीतिक रणनीति का ऐसा संगम बन गया है, जिसपर पूरी दुनियाँ की निगाहें टिकी हुई हैं।विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार द्वारा तीन महत्वपूर्ण विधेयकों महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम), परिसीमन (डेलिमिटेशन) और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन को एक साथ पेश करना और फिर 16 अप्रैल 2026 को देर रात्रि रूल 66 को निलंबित करने का कदम भारतीय संसदीय इतिहास में एक असाधारण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।इसपर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया, संसदीय नियमों का प्रयोग और रूल 66 का निलंबन इन सभी ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।यह घटनाक्रम केवल कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं है,बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच रणनीतिक टकराव,राजनीतिक गणित, और संवैधानिक व्याख्याओं का एक जटिल खेल बन चुका है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि सरकार ने जिन तीन विधेयकों को एक साथ पेश किया है, वे अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण हैं। पहला, नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून), जो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है।दूसरा, परिसीमन विधेयक, जो लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा है। तीसरा, केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित संशोधन विधेयक, जो प्रशासनिक और प्रतिनिधित्व संरचना को प्रभावित करता है।इन तीनों विधेयकों का एक साथ प्रस्तुत होना संयोग नहीं,बल्कि एक सुविचारित रणनीति प्रतीत होता है। सरकार का दावा है कि यह व्यापक सुधार का हिस्सा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक पैकेजिंग कह रहा है।
साथियों बात अगर हम रूल 66 क्या है और क्यों बना विवाद का केंद्र? इसको समझने की करेंतो लोकसभा की कार्यप्रणाली में रूल 66 एक तकनीकी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह नियम उन परिस्थितियों में लागू होता है, जब एक विधेयक दूसरे विधेयक पर निर्भर होता है। यदि आश्रित विधेयक पारित नहीं होता, तो मूल विधेयक भी निष्प्रभावी हो सकता है।सरकार ने इसी नियम को निलंबित करने का प्रस्ताव लाकर पूरे खेल की दिशा बदल दी सामान्यतःप्रत्येक विधेयक पर अलग- अलग चर्चा और मतदान होता है, जिससे सांसद अपनी स्वतंत्र राय दे सकते हैं। लेकिन ‘रूल 66’ के निलंबन के बाद यह बाध्यता समाप्त हो जाती है।इसका सीधा अर्थ यह है कि अब तीनों विधेयकों को एक साथ, एक ही प्रस्ताव के रूप में पारित कराया जा सकता।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
साथियों बात अगर हम सरकार का मास्टरस्ट्रोक: संयुक्त मतदान की रणनीति को समझने की करें तो सरकार ने जिस रणनीति का उपयोग किया है,उसेराजनीतिक विश्लेषक मास्टरस्ट्रोक कह रहे हैं।तीनों विधेयकों को एक ही प्रस्ताव में जोड़कर सरकार ने विपक्ष के लिए विकल्पों को सीमित कर दिया है।अब विपक्ष के सामने केवल दो ही रास्ते हैं,या तो तीनों विधेयकों के पक्ष में वोटकरें या तीनों के खिलाफ।यह रणनीति विपक्ष को एक धर्मसंकट में डालती है।यदि विपक्ष परिसीमन का विरोध करता है,तो उसे महिला आरक्षण के खिलाफ भी वोट देना पड़ेगा। और यदि वह महिला आरक्षण का समर्थन करता है, तो परिसीमन भी सटीक रूप से ही स्वतःपारित हो जाएगा।
साथियों बात अगर हम विपक्ष की दुविधा: आगे कुआं, पीछे खाई इसको समझने की करें तो,विपक्ष,विशेष रूप से इंडिया गठबंधन,इस स्थिति में फंस गया है जहां हर विकल्प राजनीतिक नुकसान की ओर ले जाता है।विपक्ष का रुख स्पष्ट है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं,खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के संदर्भ में।विपक्ष का तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिणभारत के राज्यों को नुकसान होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।ऐसे में सीटों का पुनर्वितरण उन्हें कम प्रतिनिधित्व की ओर ले जा सकता है। अब रूल 66 कैंसिल करने से विपक्ष को तीनों विधायकों को एक साथ मतदान करना पड़ेगा अगर वह यस में बदनाम करते हैं तो परिसीमन बिल भी पास होगा ना में मतदान करते हैं तो महिला आरक्षण का अपने आप ही विरोध होगा। साथियों बात अगर हम संख्या बल का गणित: सरकार के सामने चुनौती इसको समझने की करें तो, संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है यानी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन। लोकसभा में कुल 540 सीटें हैं, जिनमें से 3 खाली हैं। ऐसे में 360 वोटों की जरूरत होती है।एनडीए के पास लगभग 293 सांसद हैं, जो आवश्यक संख्या से काफी कम है। इस स्थिति में सरकार को या तो विपक्ष के कुछ सांसदों का समर्थन चाहिए या फिर अनुपस्थित रहने वाले सांसदों की संख्या बढ़ानी होगी, ताकि आवश्यक बहुमत का आंकड़ा कम हो सके।
साथियों बात अगर हम अधिसूचना विवाद: कानून लागू या बचाने की कोशिश? इसको समझने की करें तो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विवादास्पद पहलू है 16 अप्रैल 2026 को जारी की गई अधिसूचना, जिसके तहत 2023 में पारित संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम को लागू करने की तारीख तय की गई।यह अधिसूचना ऐसे समय पर जारी की गई,जब संसद में उसी कानून में संशोधन पर बहस चल रही थी। विपक्ष ने इसे आधी रात का फैसला और हताशापूर्ण प्रयास करार दिया है।कांग्रेस नेता ने इस कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कोई कानून संशोधन के अधीन है, तो उसे बिना नए विधायी समर्थन के लागू करना संवैधानिक रूप से संदिग्ध है।उन्होंने ‘रूल 66’ का हवाला देते हुए कहा कि यदि आश्रित विधेयक पारित नहीं होता, तो मूल कानून भी निष्प्रभावी हो सकता है। ऐसे में नियम को निलंबित कर अधिसूचना जारी करना कानून को “बचाने” का प्रयास प्रतीत होता है। साथियों बात अगर हम टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का 17 अप्रैल 2026 को संसद में अपने विचारों के दौरान शाब्दिक हमला:चैरिटी बिगन्स एट होम इसको समझने की करें तो तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण की बात करने से पहले भाजपा को अपने संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना चाहिए।उन्होंने 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए यह भी कहा कि मंत्रिमंडल और यहां तक कि प्रधानमंत्री पद भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं को दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने सदन में तीखी बहस और हंगामा पैदा कर दिया। साथियों बात अगर हम परिसीमन विवाद: उत्तर बनाम दक्षिण का नया विमर्श इसको समझने की करें तो परिसीमन का मुद्दा भारत में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण स्थगित किया गया था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहन मिल सके।अब जब परिसीमन की बात फिर उठी है, तो दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि उनकी सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को लाभ मिल सकता है। यह विवाद क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नए सवाल खड़े करता है।
साथियों बात अगर हम लोकतंत्र बनाम रणनीति: क्या यह उचित है? इसको समझने की करें तो,इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या संसदीय नियमों का इस तरह उपयोग (या दुरुपयोग) लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है?सरकार का तर्क है कि वह सुधारों को तेज़ी से लागू करना चाहती है और तकनीकी बाधाओं को हटाना आवश्यक है। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह संसदीय प्रक्रिया को कमजोर करने और बहस को सीमित करने का सटीक रूप से प्रयास है। साथियों बात अगर हम इस पूरे प्रकरण को वैश्विक परिप्रेक्ष्य: भारत की लोकतांत्रिक छवि पर असर इसको समझने की करें तो,भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। ऐसे में संसद में होने वाली हर बड़ी घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनती है। यदि यह घटनाक्रम पारदर्शिता, बहस और सहमति के बिना आगे बढ़ता है, तो यह भारत की लोकतांत्रिक छवि को प्रभावित कर सकता है। वहीं,यदि सरकार सफलतापूर्वक इन सुधारों को लागू कर देती है, तो यह निर्णायक नेतृत्व का उदाहरण भी बन सकता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि सियासी शतरंज का निर्णायक मोड़,संसद में चल रहा यह संघर्ष केवल तीन विधेयकों का नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली,संवैधानिकमर्यादाओं और राजनीतिक रणनीति का परीक्षण है। रूल 66 का निलंबन, संयुक्त मतदान, अधिसूचना का समय ये सभी कदम एक जटिल राजनीतिक शतरंज के हिस्से हैं,जहां हर चाल का दूरगामी प्रभाव है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह रणनीति सरकार के लिए जीत का रास्ता बनती है या विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ उठाता है। लेकिन इतना तय है कि यह घटनाक्रम भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425