आमदा ओपी को मिली बड़ी सफलता, दो वारंटी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों वारंटी।

आमदा ओपी को मिली बड़ी सफलता, दो वारंटी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए दोनों वारंटी।

सरायकेला/आमदा

पुलिस ने फरार चल रहे वारंटियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है।

पुलिस ने G.O.(Exe) 29/2013 के स्थाई वारंटी करन चाकी पिता चेचे चाकी, साकिन पांडुआ एवं NBW वारंटी मांगता पाड़िया पिता स्व० शंकर पाड़िया, साकिन गीतिलता को गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि दोनों लंबे समय से फरार चल रहे थे और न्यायालय द्वारा इनके खिलाफ स्थाई वारंट और NBW जारी किया गया था। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने छापेमारी कर दोनों को उनके गांव से धर दबोचा।

आपको बताते चलें कि यह कार्य भाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर की गई। पुलिस अधीक्षक के द्वारा प्राप्त निर्देशों एवं सूचना के आधार पर आमदर ओपी प्रभारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों वारंटी को धर दबोचा जिसे आमदा ओपी आप की बड़ी सफलता मानी जा रही है।

वहीं गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि फरार वारंटियों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।

बालू के काले कारोबार के खिलाफ इचागढ़ में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, प्रशासन के खिलाफ बनाया ‘पर्यावरण रक्षा दल।

बालू के काले कारोबार के खिलाफ इचागढ़ में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, प्रशासन के खिलाफ बनाया ‘पर्यावरण रक्षा दल।

सरायकेला/ईचागढ़

इचागढ़ में सैकड़ों ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, आदित्यपुर निवासी विवेक झा उर्फ छोटू झा पर लगाया सिंडिकेट चलाने का आरोप

स्वर्णरेखा नदी से हो रहे कथित अवैध बालू उत्खनन के खिलाफ इचागढ़ थाना क्षेत्र के ग्रामीणों का सब्र टूट गया है। इचागढ़, सोनो और आसपास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है।

ग्रामीणों ने प्रेस वार्ता और बैठक कर आरोप लगाया है कि आदित्यपुर निवासी विवेक झा उर्फ छोटू झा के नेतृत्व में क्षेत्र में बालू का एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे खेल में उन्हें धमकाया भी जा रहा है।

एनजीटी प्रतिबंध के बावजूद रात भर चल रहा है खेल
ग्रामीणों का आरोप है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के प्रतिबंध और बरसात के मौसम में खनन पर रोक के बावजूद सोनो क्षेत्र के नदी घाट से रोजाना शाम 6 बजे के बाद से सुबह तक सैकड़ों हाईवा वाहनों से बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है।

उनके अनुसार, नदी से निकाला गया बालू पहले कथित तौर पर लाइसेंसी स्टॉक यार्ड में ले जाया जाता है और फिर वहां से उसे वैध बताकर आदित्यपुर-जमशेदपुर क्षेत्र में सप्लाई किया जाता है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि यह सब खुलेआम हो रहा है, तो जिला खनन विभाग और जिला प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ रही है।
ग्रामीणों का ऐलान – अब एक ट्रैक्टर बालू भी नहीं उठने देंगे
ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वे अपने गांव की सीमा में किसी भी कीमत पर नदी से बालू का अवैध उठाव नहीं होने देंगे।

उनका आरोप है कि इस संबंध में कई बार इचागढ़ थाना और खनन विभाग को लिखित और मौखिक शिकायत दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर बालू कारोबार से जुड़े कुछ लोगों द्वारा उन्हें धमकाया जाता है और ग्रामीणों के अनुसार, यूट्यूबर अभिषेक भारती पर आरोप है कि वे बालू कारोबारियों के पक्ष में खबरें चलाकर ग्रामीणों पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कथित बालू माफिया द्वारा खुलेआम कहा जा रहा है कि उनका सब कुछ मैनेज है और उन्हें पुलिस-प्रशासन का कोई डर नहीं है।
ओवरलोड हाईवा से सड़कें जर्जर, पुल-पुलिया खतरे में
अवैध परिवहन से ग्रामीणों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोड बालू लदे सैकड़ों हाईवा के चलने से इचागढ़-सोनो की मुख्य सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने कहा, एक तरफ सरकार पर्यावरण बचाने की बात करती है, दूसरी तरफ स्वर्णरेखा नदी की धारा, उसके प्राकृतिक स्वरूप और पुल-पुलिया को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

अब गांव-गांव में बनेगा ‘पर्यावरण रक्षा दल’
प्रशासन की चुप्पी से नाराज ग्रामीणों ने अब खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया है। उन्होंने ऐलान किया है कि यदि 48 घंटे के भीतर प्रशासन ने कथित अवैध खनन पर रोक लगाकर जांच शुरू नहीं की, तो प्रत्येक गांव में ‘पर्यावरण रक्षा दल’ का गठन किया जाएगा।

यह दल रात में नदी घाटों पर पहरा देगा और अवैध खनन की सूचना प्रशासन को देगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे, जिसमें चक्का जाम से लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन तक शामिल होगा।

मीडिया को भी बनाया जा रहा है निशाना?
ग्रामीणों ने बताया कि इस अवैध कारोबार को लेकर पहले भी कई मीडिया संस्थानों में खबरें प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, ग्रामीणों का आरोप है कि खबर लिखने वाले कुछ पत्रकारों को कानूनी नोटिस भेजकर डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।

अब ग्रामीणों का सीधा सवाल है – आखिर यह पूरा अवैध खेल किसके संरक्षण में चल रहा है? यदि रातभर हाईवा चलते हैं, तो चेकनाका, थाना और खनन विभाग को भनक क्यों नहीं लगती?

ग्रामीणों ने उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां और जिला खनन पदाधिकारी से नदी घाटों की तत्काल जांच, सीसीटीवी निगरानी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

सूत्र यह बताते हैं कि जब भी कोई पत्रकार अवैध बालू खनन के खिलाफ समाचार प्रकाशित करता है तो यूट्यूबर अभिषेक भारती उक्त पत्रकार के खिलाफ ही मनघड़ंत कहानी बनाकर समाचार के तौर पर लोगों के बीच प्रस्तुत कर समाज को दीगभ्रमित करने का प्रयास करता है।

जनता यह जानना चाहती है कि कंही यूट्यूबर अभिषेक भारती और जिला खनन विभाग की साठ घाट से यह अवैध बालू का खनन तो नही हो रहा ?

शेष अगले अंक में

अस्वीकरण

झारखंड क्राइम रिपोर्टर की धारना किसी पत्रकार या यूट्यूबर की छवि को धूमिल करना नहीं है, झारखंड क्राइम रिपोर्टर, पोर्टल पर छपी समाचार साक्षो एवं न्यूज़ पोर्टलों से ली गई जानकारी के आधार पर प्रकाशित की गई है।

सरायकेला-खरसावां: जमीन विवाद में पोते ने की दादी की हत्या, आरोपी गिरफ्तार।

सरायकेला-खरसावां: जमीन विवाद में पोते ने की दादी की हत्या, आरोपी गिरफ्तार।

सरायकेला/नीमडीह

नीमडीह (सरायकेला-खरसावां) : जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र में जमीन-जायदाद और रुपये के विवाद में रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। पोते द्वारा अपनी ही दादी पर किए गए जानलेवा हमले में वृद्ध महिला की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी पोते को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

मामला नीमडीह थाना कांड संख्या-27/2026, दिनांक 10.08.2026, धारा 103(1) BNS 2023 से संबंधित है।

पुलिस के अनुसार, घटना 09 अगस्त 2026 की है। नीमडीह थाना अंतर्गत चांडिल स्टेशन बस्ती स्थित शिवपुरी कॉलोनी में जमीन-जायदाद और पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में 24 वर्षीय विकी गोस्वामी ने अपनी दादी सुप्रीति मजुमदार (67 वर्ष) पर जानलेवा हमला कर दिया।

हमले में गंभीर रूप से घायल हुईं सुप्रीति मजुमदार को इलाज के लिए टीएमएच, जमशेदपुर ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

घटना की सूचना पर नीमडीह थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी अभियुक्त विकी गोस्वामी, उम्र 24 वर्ष को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को आज न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है।

बरडीहा में बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हेतु जागरूकता रथ रवाना, 31 अगस्त अंतिम तिथि।

बरडीहा में बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हेतु जागरूकता रथ रवाना, 31 अगस्त अंतिम तिथि।

बरडीहा

बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (खरीफ) को लेकर जागरूकता रथ रवाना, BDO प्रवीण कुमार सिंह ने किसानों से की जल्द से जल्द बीमा कराने की अपील।

प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने बरडीहा प्रखंड कार्यालय परिसर से ‘बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक किसान और फरियादी मौजूद रहे।

जागरूकता रथ को रवाना करते हुए BDO प्रवीण कुमार सिंह ने उपस्थित किसानों एवं आम जनता को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि यह योजना खरीफ फसल (मुख्य रूप से धान और मकई) के लिए चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा या विपरीत मौसम के कारण फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों को सुरक्षा प्रदान करना है।

योजना की प्रमुख बातें एवं आवश्यक विवरण
नामांकन शुल्क: मात्र ₹1 (नामांकन शुल्क के रूप में केवल एक रुपया देय है)।
आवेदन की अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026 (BDO ने अपील की है कि किसान अंतिम तिथि का इंतजार न करें और यथाशीघ्र आवेदन करें)।

आवेदन केंद्र: किसी भी निकटतम सीएससी (CSC) सेंटर या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा में जाकर बीमा कराया जा सकता है।

आवश्यक दस्तावेज:
आधार कार्ड
बैंक पासबुक की छायाप्रति
भूमि संबंधी दस्तावेज
वंशावली
चालू मोबाइल नंबर

सहायता एवं संपर्क सूत्र

किसी भी प्रकार की समस्या, जानकारी या शिकायत के लिए किसान निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
टोल-फ्री नंबर: 14447
व्हाट्सएप (WhatsApp) नंबर: 7065514447

अपील:
प्रखंड प्रशासन ने सभी किसान भाइयों से अनुरोध किया है कि वे इस जनकल्याणकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

अंतिम समय की हड़बड़ी से बचने के लिए आज ही अपने नजदीकी सीएससी सेंटर या स्टेट बैंक की शाखा में जाकर अपना बीमा पंजीकरण अवश्य कराएं।

भारत में गुम होता बचपन और सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती: हर लापता व्यक्ति की तत्काल एफ़आईआर से लेकर मानव तस्करी के नेटवर्क तक- अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 -क्या अब मिसिंग को राष्ट्रीय आपातस्थिति मानने का समय आ गया है?

भारत में गुम होता बचपन और सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती: हर लापता व्यक्ति की तत्काल एफ़आईआर से लेकर मानव तस्करी के नेटवर्क तक- अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 -क्या अब मिसिंग को राष्ट्रीय आपातस्थिति मानने का समय आ गया है?

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रहार-हर लापता व्यक्ति की तुरंत एफ़आईआर, गोल्डन आवर्स में चूक पर अब मुख्य सचिव- डीज़ीपी जवाबदेह!

कोई बच्चा किसी संगठित नेटवर्क नें गुम किया तो उसे दूसरे शहर, राज्य या देश के बाहर ले जाने का खतरा हो सकता है,इसलिए मिसिंग केसेस को ट्रैफिकिंग के संभावित कोण से देखना ज़रूरी -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत में किसी व्यक्ति, विशेषकर किसी बच्चे का अचानक घर, स्कूल,सड़क, रेलवे स्टेशन या सार्वजनिक स्थान से गायब हो जाना केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है। यह कानून- व्यवस्था, मानवाधिकार, बाल- सुरक्षा,मानव तस्करी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर राष्ट्रीय प्रश्न है।मंगलवार 11 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इसी विषय पर सुनवाई करते हुए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया कि लापता व्यक्ति की सूचना मिलते ही उसकी उम्र या जेंडर की परवाह किए बिना तत्काल एफ़आईआर दर्ज करनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उसके पिछले आदेश में इस्तेमाल किया गया शब्द “पर्सन”केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति, बच्चा हो या वयस्क, महिला हो या पुरुष, सभपर पर लागू होता है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि भारत को अब ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें किसी थाने से यह आवाज न आए कि पहले 24 घंटे इंतजार कीजिए, किसी परिवार को एफ़आईआर के लिए भटकना न पड़े,कोई राज्य यह न कह सके कि मामला दूसरे राज्य का है और कोई ट्रैफिकिंग नेटवर्क प्रशासनिक सीमाओं का फायदा न उठा सके।क्योंकि किसी बच्चे का गुम होना केवल एक परिवार का बच्चा गुम होना नहीं है,यह भारत के भविष्य का एक हिस्सा गुम होना है।और सुप्रीम कोर्ट का आज का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है, लापता व्यक्ति का हर मिनट महत्वपूर्ण है; एफ़आईआर में देरी केवल प्रशासनिक देरी नहीं, किसी जिंदगी को बचाने का खोया हुआ अवसर हो सकती है।उधर अदालत ने चेतावनी दी कि यदि कोई राज्य या केंद्रशासित प्रदेश इस निर्देश का पालन नहीं करता है तो संबंधित मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अवमानना की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह बताना पड़ सकता है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए।

साथियों मंगलवार 11 मार्च 2026 को यह टिप्पणी दो जस्टिस बेंच  की पीठ ने , मानव तस्करी की रोकथाम और लापता व्यक्तियों को खोजने के उपायों से संबंधित कार्यवाही में पिछले आदेशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए की।सुप्रीम कोर्ट के सामने यह बात आई कि कुछ राज्य उसके 22 मई 2026 के आदेश की ऐसी व्याख्या कर रहे थे मानो तत्काल एफ़आईआर का निर्देश केवल बच्चों के मामलों में लागू होता हो।अदालत ने इस व्याख्या को पूरी तरह खारिज करते हुए नाराजगी व्यक्त की और कहा कि उसके आदेश की भाषा साफ और स्पष्ट थी। अदालत के अनुसार “पर्सन” का अर्थ हर व्यक्ति है, चाहे उसकी उम्र या जेंडर कुछ भी हो। यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लापता होने के बाद शुरुआती समय केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के सुरक्षित मिलने के लिए निर्णायक हो सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में गोल्डन अवर्स की अवधारणा को रखा है।किसी व्यक्ति के लापता होने के बाद शुरुआती कुछ घंटे ऐसे होते हैं जिनमें उसके सुरक्षित मिलने की संभावना सबसे अधिक होती है। यदि पुलिस एफ़आईआर दर्ज करनेमें समय लगाती है, परिवार को इधर-उधर भेजती है या यह मानकर चलती है कि व्यक्ति स्वयं कहीं चला गया होगा,तो इस दौरान सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन,डिजिटल गतिविधियों रेलवे और बस परिवहन संबंधी सुराग तथा संभावितआरोपियों की पहचान जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्य कमजोर हो सकते हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का संदेश मूलतः यह है कि पहले तत्काल खोज और जांच शुरू करो, बाद में परिस्थितियों के आधार पर अपराध की प्रकृति निर्धारित करो।

साथियों, इस मामले का एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह भी है कि अदालत ने एफ़आईआर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस ) की संबंधित धाराओं तथा अपहरण, तस्करी और अन्य लागू अपराधों से जुड़े कानूनी प्रावधानों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यदि जांच एजेंसी के पास ठोस कारण हो कि मामला मानव तस्करी से जुड़ा है तो उसे केवल सामान्य मिसिंग- पर्सन इन्वेस्टीगेशन के रूप में लंबित नहीं रखा जा सकता। ऐसी स्थिति में मामले को मानव तस्करी, अपहरण और संबंधित अपराधों से निपटने वाली विशेष इकाई को चार महीने की अवधि पूरी होने का इंतजार किए बिना सौंपने का निर्देश दिया गया है।यह निर्देश जांच की गति को लेकर न्यायपालिका की गंभीरता को दर्शाता है।सुप्रीम कोर्ट ने एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटस को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया है। केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि संबंधित एंटी – ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटस निर्धारित अवधि में पूरी तरह कार्यशील हों। इसके साथ ही केंद्र सरकार को देशभर में संबंधित पोर्टलों को आपस में जोड़ने का निर्देश दिया गया है,ताकि एक राज्य में दर्ज मिसिंग-पर्सन या ट्रैफिकिंग संबंधी जानकारी दूसरे राज्य की पुलिस और संबंधित एजेंसियों तक भी तेजी से पहुंच सके। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मानव तस्करी और अपहरण का अपराध किसी जिले या राज्य की सीमा तक सीमित नहीं रहता। अपराधी बच्चे या व्यक्ति को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जा सकते हैं और प्रशासनिक सीमाओं का सटीकता से फायदा उठा सकते हैं।
साथियों इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है। मामले का शीर्षक ज़ी .गणेश वर्सेज. स्टेट ऑफ़ तमिल नाड़ु एंड अदर्स  है। इसलिए 11 अगस्त का आदेश केवल तत्काल निर्देश नहीं बल्कि आगे चलने वाली एक व्यापक न्यायिक निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा है। अदालत अब यह देखना चाहती है कि उसके आदेशों को कागज पर स्वीकार करने के बजाय राज्यों ने वास्तव में पुलिस व्यवस्था,एंटी -ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटस एफआईआऱ प्रणाली, डिजिटल पोर्टलों और अंतरराज्यीय समन्वय में क्या बदलाव किए हैं।

साथियों भारत में बच्चों के लापता होने के आंकड़े इस चिंता को और गंभीर बना देते हैं। उपलब्ध एनसीआरबी -आधारित आंकड़ों केअनुसार 2024 में 98,375 बच्चे लापता दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या लगभग 91,296 थी। अर्थात एक वर्ष में लगभग 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2024 के आंकड़ों में लगभग 75,603 लड़कियां और 22,768 लड़के शामिल थे।  औसतन देखें तो यह संख्या लगभग 270 बच्चों प्रतिदिन के बराबर बैठती है। लेकिन यहां एक जरूरी सावधानी है “मिसिंग” का अर्थ यह नहीं कि सभी बच्चे स्थायी रूप से गायब हो गए। अनेक बच्चे बाद में खोज लिए जाते हैं। वास्तविक चिंता उन बच्चों की है जो लंबे समय तक अनतट्रास्ड रहते हैं और जिनके मामलों में परिवार वर्षों तक जवाब की प्रतीक्षा करता रहता है।लापता बच्चों में लड़कियों की बड़ी संख्या विशेष चिंता का विषय है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर मिसिंग गर्ल मानव तस्करी की शिकार है,लेकिन बाल विवाह,यौन शोषण, ट्रैफिकिंग घरेलू हिंसा,प्रेम- संबंध पारिवारिक तनाव, ऑनलाइन संपर्क और अन्य परिस्थितियों के कारण बालिकाओं कीवुलनेराबिलिटी कई मामलों में बढ़ सकती है। इसलिए बच्चा घर से चला गया होगा जैसे सामान्य अनुमान के आधार पर जांच को कमजोर करना गंभीर भूल हो सकती है। प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर वैज्ञानिक और संवेदनशील जांच जरूरी है।

साथियों, यह समस्या केवल मिसिंग चिल्ड्रन तक सीमित नहीं है। 11 अगस्त के सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण का सबसे बड़ा महत्व यही है कि अब “मिसिंग पर्सन”की अवधारणा को व्यापक बनाया गया है। बच्चा हो या वयस्क, महिला हो या पुरुष, पुलिस की पहली जिम्मेदारी सूचना मिलने पर तत्काल एफआई  आर और खोज अभियान शुरू करना है। यह निर्देश परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बन सकता है क्योंकि कई बार लापता वयस्कों के मामलों में भी शुरुआती शिकायत को गंभीरता से न लेने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस मुद्दे का दूसरा और शायद सबसे भयावह पहलू मानव तस्करी है। प्रत्येक मिसिंग चाइल्ड ट्रैफिकिंग विक्टिम नहीं होता,लेकिन ट्रैफिकिंग के मामलों में मिसिंग -पर्सन कंप्लेंट अक्सर शुरुआती वार्निंग सिग्नल हो सकती है। यदि कोई बच्चा किसी संगठित नेटवर्क के हाथ में चला गया तो उसे दूसरे शहर, राज्य या यहां तक कि देश के बाहर ले जाने का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट अब मिसिंग केसेस को ट्रैफिकिंग के संभावित कोण से भी देखने पर जोर दे रहा है। अदालत ने विभिन्न राज्यों से आंकड़े एकत्र कर किसी संभावित नेशनवाइड पैटर्न या संगठित नेटवर्क की पहचान करने की आवश्यकता पर भी ध्यान दिया है।यदि देश में एक प्रभावी -टाइम मिसिंग-पर्सन प्लेटफार्म हो जिसमें पुलिस एफ़आईआर फोटो,सीसीटीवी अलर्टस, रेलवे और बस परिवहन नेटवर्क,चाइल्ड वेलफेयर कमिटीस ,एंटी -ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटस और अन्य संबंधित एजेंसियां सुरक्षित तरीके से जुड़ी हों तो किसी व्यक्ति के एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने की स्थिति में भी उसकी खोज तेज हो सकती है।

साथियो, यहां सामाजिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। गुडिया स्वयंम सेवी संस्थान की याचिका से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही ने वर्षों से लापता बच्चों और मानव तस्करी के मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय के सामने रखा है। बचपन बचाओ आंदोलन जैसे बाल- अधिकार संगठनों ने भी बाल तस्करी, बाल मजदूरी और बच्चों के शोषण के खिलाफ लंबे समय से अभियान चलाए हैं। इन संगठनों की मूल चिंता यही रही है कि मिसिंग चाइल्ड को केवल पुलिस रिकॉर्ड की एक एंट्री नहीं, बल्कि तत्काल चाइल्ड – प्रोटेक्शन इमरजेंसी माना जाना चाहिए।

साथियों, विपक्षी दलों और नागरिक समाज की व्यापक चिंता भी इसी दिशा में है कि इतने बड़े देश में लापता व्यक्तियों और बच्चों के मामलों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच डेटा तथा जांच का सेमलेस कोऑर्डिनेशन कैसे सुनिश्चित किया जाए। हालांकि 11 अगस्त 2026 के सुप्रीम कोर्ट आदेश पर किसी एक विपक्षी दल की सर्वमान्य आधिकारिक प्रतिक्रिया को प्रमाणित किए बिना उद्धृत करना उचित नहीं होगा, लेकिन राजनीतिक विमर्श में पुलिस की जवाबदेही, ट्रैफिकिंग नेटवर्क्स , राज्यों के बीच कोऑर्डिनेशन और सरकारों द्वारा मिसिंग केसेस की मॉनिटरिंग जैसे प्रश्न लगातार उठते रहे हैं। वास्तव में इस मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठाने की आवश्यकता है, क्योंकि गुम हुआ बच्चा किसी राजनीतिक दल का नहीं,पूरे समाज की सटीकता से जिम्मेदारी है।

साथियों, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे के मिल जाने पर भी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होनी चाहिए। यदि बच्चा शोषण,ट्रैफिकिंग या यौन अपराध का शिकार रहा है तो उसे केवल उसके परिवार के पास वापस भेजना पर्याप्त नहीं। उसे मेडिकल केयर,साइकोलॉजिकल सपोर्ट , लीगल असिस्टेंस, सुरक्षित पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की जरूरत हो सकती है। साथ ही उस अपराधी नेटवर्क की जांच भी आवश्यक है जिसने बच्चे को निशाना बनाया।11अगस्त 2026 का सुप्रीम कोर्ट का संदेश इसलिए भारत की मिसिंग – पर्सन पॉलिसी में एक संभावित टर्निंग पॉइंट है। अदालत ने मूलतः प्रशासन को यह बता दिया है कि लापता व्यक्ति की शिकायत कोई सामान्य कागजी प्रक्रिया नहीं है। यह संभावित अपराध की शुरुआत हो सकती है और शुरुआती गोल्डन होउर्स को खोना किसी व्यक्ति की जिंदगी और सुरक्षा के लिए भारी पड़ सकता है। यदि राज्यों के मुख्य सचिव और डीज़ीपी तक व्यक्तिगत जवाबदेही के दायरे में आते हैं, तो इससे पुलिस प्रशासन पर आदेशों को गंभीरता से लागू करने का दबाव निश्चित रूप से बढ़ेगा।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि भारत में कितने बच्चे गुम होते हैं?असली सवाल यह होना चाहिए कि गुम होने के बाद उन्हें खोजने के लिए भारत की व्यवस्था कितनी तेज, संवेदनशील तकनीकी रूप से सक्षम और जवाबदेह है? 2024 में लगभग 98 हजार बच्चों के मिसिंग होने का आंकड़ा हमें चेतावनी देता है कि यह समस्या छोटी या स्थानीय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की 11 अगस्त की सख्ती इस चेतावनी को न्यायिक दिशा देती है, हर लापता व्यक्ति महत्वपूर्ण है,हर घंटामहत्वपूर्ण है और हर परिवार कोतत्काल राज्य की मदद मिलने का अधिकार है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

सरायकेला में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता – रिमांड पर लिए नक्सलियों की निशानदेही पर हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद।

सरायकेला में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता – रिमांड पर लिए नक्सलियों की निशानदेही पर हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद।

सरायकेला

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला-खरसावां जिले में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस रिमांड पर लिए गए भाकपा माओवादी के तीन बड़े कैडरों द्वारा बताए गए ठिकानों पर छापेमारी कर कुचाई और चाण्डिल के जंगली इलाके से भारी मात्रा में हथियार, कारतूस और विस्फोटक बरामद किए गए हैं।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार नक्सलियों की पहचान सब जोनल कमेटी मेंबर रवि सिंह सरदार उर्फ सागर सिंह सरदार (28), रीजनल कमेटी मेंबर मदन महतो उर्फ चरण महतो (54) और सब जोनल कमांडर मीना पहाड़िया उर्फ नेपू पहाड़िया (26) के रूप में हुई है। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद झारखंड पुलिस, खूँटी की 209 कोबरा बटालियन और राँची की 26वीं वाहिनी एसएसबी ने मिलकर ज्वाइंट सर्च ऑपरेशन चलाया था।

इस अभियान के तहत कुचाई थाना क्षेत्र के सिकरम्बा जंगल और चाण्डिल थाना क्षेत्र के आसनबनी स्थित दलमा जंगल के ऊपर बने गुप्त ठिकानों से हथियारों को बरामद किया गया।

*बरामदगी का विवरण*

हथियार: 2 .303 राइफल, एक 5.56 MM इन्सास राइफल, एक 7.62 MM SLR राइफल और 2 देसी पिस्टल।

गोला-बारूद: 7.62 MM के 171 जिंदा कारतूस, 5.56 MM के 126 जिंदा कारतूस, 9 MM के 12 कारतूस, साथ ही 10 मैगजीन और 8 चार्जर।

विस्फोटक: 1 IED और 2 डेटोनेटर मिले, जिन्हें BDS टीम ने प्रोटोकॉल के तहत मौके पर ही नष्ट कर दिया।

यह संयुक्त कार्रवाई एसपी मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर की गई। ऑपरेशन में एसडीपीओ सरायकेला अनुभव भारद्वाज, एसडीपीओ चाण्डिल शिव प्रकाश कुमार, एसएसबी के उप समादेष्टा शक्ति सिंह, कोबरा के सहायक समादेष्टा विपुल राज के अलावा काण्ड्रा, चाण्डिल, नीमडीह, सरायकेला, खरसावाँ, कुचाई, चौका और गम्हरिया थाना की पुलिस टीम मौजूद रही।

पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

गम्हरिया पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपियों को किया गिरफ्तार।

गम्हरिया पुलिस ने ब्राउन शुगर के साथ दो आरोपियों को किया गिरफ्तार।

सरायकेला/गम्हरिया

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला-खरसावां जिला के गम्हरिया थाना पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए दो युवकों को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से कुल 12 ग्राम ब्राउन शुगर, एक बिना नंबर की काली रंग की मोटरसाइकिल तथा अन्य सामान बरामद किया है।

पुलिस के अनुसार, 9 अगस्त 2026 की शाम करीब 5:30 बजे केरला पब्लिक स्कूल के विपरीत दिशा में अरका जैन यूनिवर्सिटी जाने वाली सड़क पर सालडीह गांव के आगे जंगलनुमा क्षेत्र में पुलिस टीम गश्त कर रही थी। इसी दौरान बिजली के खंभे और कुछ सागवान के पेड़ों के पास एक काले रंग की बिना नंबर प्लेट वाली मोटरसाइकिल पर दो व्यक्ति सवार दिखाई दिए।


पुलिस ने संदेह के आधार पर दोनों को रुकने का इशारा किया। इसके बाद पुलिस टीम ने दोनों व्यक्तियों को पकड़ लिया। मोटरसाइकिल से संबंधित कागजात मांगने पर वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

तलाशी के दौरान पहले आरोपी करीब 20 वर्षीय कलीम खान, पिता मोहम्मद जलाउद्दीन, निवासी जीवनपुर, थाना सरायकेला, के पैंट की बाईं जेब से एक सफेद पारदर्शी प्लास्टिक पाउच में 9 ग्राम ब्राउन शुगर जैसा पदार्थ बरामद हुआ।
वहीं, दूसरे आरोपी 25 वर्षीय प्रदीप महतो, पिता स्वर्गीय पुरनाडीह महतो, निवासी कोलाबीरा बस्ती, थाना सरायकेला, के पैंट की बाईं जेब से सफेद पारदर्शी प्लास्टिक पाउच में 3 ग्राम ब्राउन शुगर जैसा पदार्थ बरामद किया गया।
पुलिस ने बरामद मादक पदार्थ और मोटरसाइकिल को विधिवत जब्त कर सीलबंद किया। दोनों आरोपियों के खिलाफ गम्हरिया थाना कांड संख्या 60/26 के तहत NDPS Act की संबंधित धाराओं एवं BNS की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

बरामद सामान

9 ग्राम ब्राउन शुगर
3 ग्राम ब्राउन शुगर
बिना नंबर प्लेट की काली रंग की मोटरसाइकिल,
मोटरसाइकिल का इंजन नंबर: MBLHA10A6EHD66411
पुलिस के अनुसार, मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। कार्रवाई में पुअनि अजय पासवान, आ०-1019 जगदीश हेंसा और चा०-614 अश्विनी उपाध्याय शामिल रहे।

मतदाता सूची में छूटे हुए पात्र विद्यार्थियों एवं 01 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं का नाम जोड़ने हेतु आवश्यक निर्देश।

मतदाता सूची में छूटे हुए पात्र विद्यार्थियों एवं 01 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं का नाम जोड़ने हेतु आवश्यक निर्देश।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी की अध्यक्षता में विद्यालय, महाविद्यालय एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित।

सरायकेला-खरसावां

उपायुक्त-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी, सरायकेला-खरसावाँ श्री नीतिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं प्रशिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्यों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई तथा शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत ऐसे छात्र-छात्राओं, जिनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी है लेकिन किसी कारणवश उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, एवं 01 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले पात्र छात्र-छात्राओं का नाम मतदाता सूची में जोड़ने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विद्यालय, महाविद्यालय एवं प्रशिक्षण संस्थानों में ऐसे सभी पात्र छात्र-छात्राओं की सूची तैयार करें, जिनकी आयु 18 वर्ष पूर्ण हो चुकी है तथा जिनका नाम अब तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। साथ ही, 01 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं को भी चिह्नित करते हुए उन्हें मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करें। उन्होंने सभी पात्र विद्यार्थियों को Form-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने हेतु प्रेरित एवं जागरूक करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना प्रत्येक पात्र युवा के लोकतांत्रिक अधिकार एवं जिम्मेदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे सभी पात्र विद्यार्थियों, जिनका नाम अब तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें नाम जोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए निर्वाचन प्रक्रिया में उनकी सहभागिता के महत्व से अवगत कराया जाए।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया कि विद्यालय, महाविद्यालय एवं प्रशिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों की सूची तैयार कर जिला निर्वाचन कार्यालय को उपलब्ध कराएं। साथ ही, मतदाता सूची में छूटे हुए सभी पात्र विद्यार्थियों का नाम जोड़ने की दिशा में सकारात्मक एवं समन्वित प्रयास सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के संबंध में जानकारी देना तथा उन्हें मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए प्रेरित करना शैक्षणिक संस्थानों की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

बैठक के दौरान जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी पारुल सिंह ने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों में हेल्प डेस्क मैनेजर द्वारा नियमित रूप से भ्रमण कर मतदाता सूची में छूटे हुए पात्र विद्यार्थियों को चिह्नित करते हुए उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने हेतु सहयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को SIR प्रक्रिया, ऑनलाइन Form-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया तथा ECINET ऐप के संबंध में भी आवश्यक जानकारी दी जा रही है। उन्होंने सभी प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों से हेल्प डेस्क मैनेजर को आवश्यक सहयोग प्रदान करने तथा मतदाता सूची में छूटे हुए सभी पात्र विद्यार्थियों का नाम जोड़ने के लिए उन्हें प्रेरित एवं जागरूक करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में छूटे हुए विद्यार्थियों के नाम जोड़ने में प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी शैक्षणिक संस्थान इस दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए विद्यार्थियों को आवश्यक जानकारी एवं सहयोग प्रदान करें। साथ ही, विद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में नियमित रूप से ELC (Electoral Literacy Club) गतिविधियों का आयोजन करने का निर्देश दिया गया, ताकि छात्र-छात्राओं को निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता के अधिकार एवं दायित्व तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी सहभागिता के संबंध में जागरूक किया जा सके।

बैठक में जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा संचालित मतदाता जागरूकता एवं पंजीकरण संबंधी गतिविधियों में शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा पात्र छात्र-छात्राओं को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग प्रदान करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक मे जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री कैलाश मिश्रा, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी एवं अन्य सम्बन्धित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च पर हंगामा, पुलिस ने किया लाठीचार्ज।

रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च पर हंगामा, पुलिस ने किया लाठीचार्ज।

रांची

JPSC और JSSC परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा मार्च निकाला। विधानसभा का घेराव करने जा रहे छात्रों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। बताया जा रहा है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए पहले वाटर कैनन का प्रयोग किया और बाद में लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अभ्यर्थी जब विधानसभा की तरफ बढ़ रहे थे तो पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को हटाने लगे। इसी को लेकर जवानों और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने पहले पानी की बौछारों से भीड़ को रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं रुके तो बल प्रयोग करना पड़ा।

इस कार्रवाई में कुछ छात्रों को चोटें आने की खबर है, हालांकि घायलों की सही संख्या को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

विधानसभा मार्च को देखते हुए पहले से ही पूरे इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था और विधानसभा जाने वाले कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी। हंगामे के बाद पुलिस ने भीड़ को अलग-अलग जगहों पर रोक कर स्थिति को नियंत्रण में करने की कोशिश की।

अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि JPSC और JSSC की भर्तियों में हुई कथित धांधली पर सरकार ठोस कदम उठाए। प्रदर्शनकारी खास तौर पर 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा समेत कई परीक्षाओं को निरस्त करने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि राज्य स्तरीय या विभागीय जांच से उन्हें संतोष नहीं है।

वहीं सरकार का कहना है कि बातचीत के बाद छात्रों की ज्यादातर मांगें मान ली गई हैं और कुछ परीक्षाओं को रद्द करने जैसे फैसले भी लिए गए हैं। लेकिन आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि CBI जांच जैसी उनकी सबसे बड़ी मांग पर अब तक कोई साफ आश्वासन नहीं मिला है, इसलिए आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि इस विवाद के बीच JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को CID ने परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। इससे पहले उनसे इस मामले में पूछताछ भी हुई थी। इसके अलावा JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफा देने की भी खबर है। इन सब घटनाक्रमों के बाद छात्रों का आंदोलन और तेज हो गया है।

फिलहाल विधानसभा के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।

चक्रधरपुर के मधुसूदन विद्यालय में संस्थापक स्व. श्याम सुंदर महतो की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित।

चक्रधरपुर के मधुसूदन विद्यालय में संस्थापक स्व. श्याम सुंदर महतो की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित।

चाईबासा/चक्रधरपुर

आसनतलिया स्थित मधुसूदन विद्यालय में विद्यालय के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय श्याम सुंदर महतो की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्व. महतो के तैलचित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। विद्यालय की बड़ी मैम द्रौपदी महतो ने उनके चित्र पर फूल अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद परिवार के सदस्य लक्ष्मण महतो, लखी देवी, प्रभात कुमार महतो, रंगलाता महतो, कमलेश महतो, यशोदा महतो, बी.के. हिंदवार, आरती कोड़वार, नृपेंद्र महतो, संगीता महतो, कौशल हिंदवार, ईला महतो, जीवेश कुमार हिंदवार, निशा महतो और विधि, रिधि, मयंक, वैभव व वाणी ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में मधुसूदन मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद राम, सचिव लक्ष्मण महतो, सह-सचिव गणेश्वर महतो, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश महतो और सरस्वती देवी मेमोरियल एजुकेशनल ट्रस्ट के चेयरमैन बलराज कुमार हिंदवार, सचिव डॉ. सच्चिदानंद राम, कोषाध्यक्ष यशोदा महतो के अलावा शंकर लाल महतो, धारित्री महतो और शिवचरण महतो ने भी उन्हें नमन किया।

विद्यालय परिवार की ओर से चेयरमैन बी.के. हिंदवार, प्राचार्य के. नागराजू, प्रशांत कुमार तिवारी, उप-प्राचार्य वसंत कुमार महतो, उप-प्राचार्या आरती कोड़वार, परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार चक्रवर्ती, जगदीश जामुदा सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सोसाइटी के सचिव लक्ष्मण महतो ने कहा कि स्व. श्याम सुंदर महतो के बताए मार्ग पर चलते हुए मधुसूदन संस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

वहीं उप-प्राचार्य वसंत कुमार महतो ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व. एस.एस. महतो द्वारा स्थापित इस शैक्षणिक संस्था को आगे बढ़ाना हम सभी शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है।

उनके पूर्व छात्र जेनाराम पूर्ति ने स्व. महतो को अपने जीवन का पथ-प्रदर्शक बताते हुए कहा कि उनके विचार और आदर्श सदैव प्रेरणा देते रहेंगे। इस दौरान पूरे विद्यालय परिसर का माहौल भावुक रहा।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नगर भवन, सरायकेला में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर नगर भवन, सरायकेला में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित।

सरायकेला-खरसावां

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आज नगर भवन, सरायकेला में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र की माननीय सांसद श्रीमती जोबा मांझी की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, भाषा, लोक-परंपराओं एवं गौरवशाली विरासत के संरक्षण-संवर्धन के साथ जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण तथा जनजातीय समुदाय के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम से पूर्व उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा सिदो-कान्हू पार्क, बिरसा चौक एवं समाहरणालय परिसर स्थित महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया। इस दौरान वीर शहीदों के संघर्ष, त्याग एवं बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई।

जिला स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत महापुरुषों के तैलचित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम का स्वागत संबोधन परियोजना निदेशक, आईटीडीए श्रीमती उषा मुंडू द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों द्वारा आदिवासी एवं स्थानीय संस्कृति पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत बनाया गया। सरायकेला छऊ नृत्य, नटुआ नृत्य, मानभूम छऊ नृत्य, मुंडारी नृत्य एवं महिला पाइका नृत्य की प्रस्तुतियों के माध्यम से जिले की समृद्ध लोक एवं आदिवासी सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकधुनों एवं नृत्य की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से स्थानीय कला, भाषा, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। स्थानीय कलाकारों द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों की सराहना भी की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं एवं प्रकृति के साथ उसका गहरा जुड़ाव झारखंड की विशिष्ट पहचान है। जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण तथा प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की परंपरा समाज को सतत एवं समावेशी विकास का महत्वपूर्ण संदेश देती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं कौशल विकास के अवसरों का विस्तार करते हुए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचाना आवश्यक है। इसके लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ जनभागीदारी एवं जागरूकता भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को शिक्षा एवं कौशल विकास के अवसरों से जोड़ना तथा बालिकाओं की शिक्षा एवं महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। आधुनिक शिक्षा एवं विकास के साथ अपनी भाषा, परंपरा, कला एवं सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। विकास की प्रक्रिया में स्थानीय संसाधनों एवं सामुदायिक क्षमता का प्रभावी उपयोग करते हुए समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय सांसद श्रीमती जोबा मांझी ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का जल, जंगल और जमीन के साथ सदियों पुराना गहरा संबंध रहा है। प्रकृति उनके लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति एवं आस्था का आधार है। जनजातीय समाज ने अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं एवं प्रकृति के प्रति आस्था को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। इस समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा एवं विकास के अवसरों से नई पीढ़ी को जोड़ना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपनी भाषा, संस्कृति एवं सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपरा एवं प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए परिवार, समाज एवं संस्थाओं को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने जल, जीवन, जंगल एवं जमीन के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए सभी से इसके संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

उन्होंने वीर शहीदों एवं महापुरुषों के संघर्ष, त्याग एवं बलिदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उनके संघर्ष एवं बलिदान से समाज को अपनी पहचान, सम्मान एवं मूल्यों के संरक्षण की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जनजातीय समुदाय के विकास एवं उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रता के अनुसार उनका अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गीत, नाटक एवं पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी से एकजुट होकर संस्कृति, भाषा, विरासत, जल, जीवन, जंगल एवं जमीन के संरक्षण के लिए सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान पांच पंचायतों के लिए कुल 1,891.12 एकड़ सामुदायिक वन पट्टा वितरित किया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत नव नियुक्त 57 स्वास्थ्य कर्मियों के बीच नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। कृषि विभाग की ओर से पांच किसानों के बीच अरहर बीज का वितरण किया गया। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल के माध्यम से जनकल्याणकारी योजनाओं, विभागीय सेवाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी आमजनों को दी गई।

कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक कला एवं स्थानीय उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया। इससे स्थानीय कलाकारों, कारीगरों एवं उत्पादकों को अपनी कला, हुनर एवं उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला तथा स्थानीय विरासत एवं परंपराओं को प्रोत्साहन मिला।

कार्यक्रम में परियोजना निदेशक, आईटीडीए उषा मुंडू, अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी, सरायकेला अभिनव प्रकाश, सिविल सर्जन सरयू प्रसाद राय, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक, सब-रजिस्ट्रार सरायकेला, जिला गब्य विकास पदाधिकारी, डीपीएम, जेएसएलपीएस सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त स्थानीय सांसद एवं विधायक के प्रतिनिधिगण तथा अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में आमजनों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता सुनिश्चित की।

टाटानगर–सहरसा रेल सेवा को लेकर सांसद जोबा मांझी को सौंपा ज्ञापन, शीघ्र पहल का मिला आश्वासन।

टाटानगर–सहरसा रेल सेवा को लेकर सांसद जोबा मांझी को सौंपा ज्ञापन, शीघ्र पहल का मिला आश्वासन।

सरायकेला/आदित्यपुर

टाटानगर–सहरसा रेल सेवा समिति की ओर से सिंहभूम की सांसद श्रीमती जोबा मांझी को टाटानगर से सहरसा–मधेपुरा–पूर्णिया होते हुए कटिहार तक दैनिक एक्सप्रेस ट्रेन सेवा प्रारंभ करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। *यह ज्ञापन सिंहभूम की सांसद श्रीमती जोबा मांझी के सांसद प्रतिनिधि सह सरायकेला-खरसावां जिले के शिक्षाविद् प्रोफेसर कालीपद सोरेन (के.पी. सोरेन) के माध्यम से सांसद महोदया तक पहुंचाया गया।

ज्ञापन में ट्रेन संख्या 28181/28182 के आंशिक मार्ग परिवर्तन के माध्यम से टाटानगर–सहरसा–मधेपुरा–पूर्णिया –कटिहार के बीच सीधा रेल संपर्क उपलब्ध कराने तथा टाटानगर से सहरसा–मधेपुरा–पूर्णिया होते हुए कटिहार तक दैनिक एक्सप्रेस रेल सेवा प्रारंभ करने की मांग प्रमुखता से रखी गई।
समिति के सदस्यों ने बताया कि कोसी एवं सीमांचल क्षेत्र के लाखों लोगों का टाटानगर एवं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से प्रत्यक्ष जुड़ाव है। वर्तमान में सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है। नई रेल सेवा शुरू होने से झारखंड, बिहार के कोसी-सीमांचल क्षेत्र तथा औद्योगिक क्षेत्रों के बीच आवागमन को काफी सुविधा मिलेगी।

इस अवसर पर सांसद जोबा मांझी ने समिति के प्रतिनिधियों को आश्वासन देते हुए कहा कि वे इस महत्वपूर्ण मांग को लेकर शीघ्र ही रेल मंत्रालय एवं रेल मंत्री से बातचीत करेंगी और रेल परिचालन शुरू कराने की दिशा में विशेष आग्रह करेंगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता की सुविधा से जुड़े इस विषय को उचित स्तर पर उठाया जाएगा।

बोल बम कीर्तन समारोह के लिए सांसद को आमंत्रण

इसी क्रम में मिथिला संकीर्तन मंडली, आदित्यपुर की ओर से आगामी बोल बम कीर्तन समारोह के उद्घाटन हेतु सिंहभूम की सांसद श्रीमती जोबा मांझी को मुख्य अतिथि के रूप में सादर आमंत्रित किया गया। मंडली की ओर से उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण पत्र सौंपा गया। मंडली द्वारा आयोजित होने वाला यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम 19 सितंबर 2026 को शाम 6:30 बजे आदित्यपुर स्थित वीर कुंवर सिंह मैदान, पथ संख्या 7-8, आदित्यपुर-2 में आयोजित किया जाएगा।

इस दौरान मुख्य रूप से निरंजन मिश्रा, अजय कुमार झा, अजय ठाकुर, ओम प्रकाश ठाकुर, आदित्य नारायण मिश्रा एवं इंद्रकांत झा सहित अन्य लोग उपस्थित थे। उपस्थित सदस्यों ने सांसद महोदया से कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर समारोह का उद्घाटन करने का आग्रह किया।

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