मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के तहत प्रारूप मतदाता सूची का हुआ प्रकाशन।
सरायकेला-खरसावां
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार एवं मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड के दिशा-निर्देशों के आलोक में राज्यभर में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिकाधिक शुद्ध, अद्यतन एवं त्रुटिरहित बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हो तथा अपात्र एवं त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों का निराकरण किया जा सके।
विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के निर्धारित कार्यक्रमानुसार 05 अगस्त 2026 को जिले के तीनों विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों—50-ईचागढ़, 51-सरायकेला (अ.ज.जा.) एवं 57-खरसावाँ (अ.ज.जा.)—की प्रारूप मतदाता सूची का विधिवत प्रकाशन कर दिया गया है। जिले के तीनों निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (ERO) द्वारा प्रारूप-5 के माध्यम से प्रकाशन की सूचना जारी करते हुए संबंधित सभी मतदान केन्द्रों एवं अधिसूचित स्थलों पर प्रारूप मतदाता सूची चस्पा करा दी गई है, जिससे मतदाता अपने नाम एवं विवरण का सत्यापन कर सकें।
05 अगस्त 2026 से 04 सितंबर 2026 तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन एवं अन्य आवश्यक सुधार हेतु दावा एवं आपत्ति प्राप्त किए जाएंगे। प्राप्त दावा एवं आपत्तियों का निष्पादन 03 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा तथा 07 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
जिले की प्रारूप मतदाता सूची के अनुसार कुल 7,67,613 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें 3,84,834 पुरुष, 3,81,919 महिला एवं 10 थर्ड जेंडर (TG) मतदाता शामिल हैं।
विधानसभावार मतदाताओं की संख्या इस प्रकार है
50-ईचागढ़ : 2,56,155
51-सरायकेला (अ.ज.जा.) : 3,02,716
57-खरसावाँ (अ.ज.जा.) : 2,08,742
इसके अतिरिक्त, 01 अप्रैल 2026, 01 जुलाई 2026 अथवा 01 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले पात्र नागरिक भी प्रपत्र-6 के माध्यम से मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह ने सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे अपने संबंधित मतदान केन्द्र पर प्रदर्शित प्रारूप मतदाता सूची का अवलोकन करें तथा किसी प्रकार की त्रुटि होने पर निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित बीएलओ, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (AERO) अथवा निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) के समक्ष दावा एवं आपत्ति प्रस्तुत करें।
संयुक्त राष्ट्र का एसडीज़ी 10 लक्ष्य अगस्त 2026 और भारत में आरक्षण नीति का समकालीन विमर्श -वैश्विक आह्वान और भारतीय यथार्थ का अंतर्संबंध -समग्र व्यापक विश्लेषण।
संयुक्त राष्ट्र ने अगस्त 2026 के लिए सतत विकास लक्ष्य 10 के तहत असमानताओं में कमी,को महीने का लक्ष्य (गोल ऑफ़ द मंथ) घोषित किया
जब तक हम आरक्षित वर्ग के भीतर छुपे हुए सबसे गरीब और हाशिए के व्यक्ति को सीधे तौर पर लक्षित करके लाभ नहीं पहुंचाएंगे, तब तक वैश्विक मंच पर असमानता कम करने का भारत का दावा अधूरा रहेगा -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर हर देश आज आर्थिक प्रगति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल क्रांति और वैज्ञानिक उपलब्धियों के नए दौर में प्रवेश कर चुका है,लेकिन विकास की इस चमक के पीछे असमानता की कई नई परतें उभर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अगस्त 2026 के लिए सतत विकास लक्ष्य (एसडीज़ी)10 के तहत रिड्यूस्ड इनेक्वालिटीज को महीने का लक्ष्य (गोल ऑफ़ द मंथ) घोषित करनेकी आधिकारिक जानकारी 3 अगस्त 2026 को अपनी आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र सतत विकास वेबसाइट (यू एन गोल ऑफ़ द मंथ) पर अपडेट की है संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-10, रिड्यूस्ड इनेक्वालिटीज अर्थात असमानताओं में कमी, का उद्देश्य केवल आय का अंतर घटाना नहीं, बल्कि सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक समावेशन को मजबूत करना तथा सभी लोगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि असमानता दीर्घकालीन सामाजिक एवं आर्थिक विकास को कमजोर कर सकती है,गरीबी उन्मूलन की गति को प्रभावित कर सकती है और लोगों में अवसरों तथा संस्थाओं के प्रति विश्वास को कम कर सकती है। यह घोषणा एक ऐसे मोड़ पर हुई है जब संपूर्ण विश्व आर्थिक विषमता, सामाजिक ध्रुवीकरण और संसाधनों के असमान वितरण जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। संयुक्त राष्ट्र का यह विज़न स्पष्ट रूप से मांग करता है कि दुनियाँ का प्रत्येक राष्ट्र अपनी आंतरिक नीतियों की समीक्षा करे,ताकि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े अंतिम व्यक्ति (वंचित वर्ग) को विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जासके। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि संयुक्त राष्ट्र आमतौर पर प्रत्येक नए महीने के पहले या शुरुआती दिनों (जैसे 1 से 3 तारीख के बीच) में उस महीने के विशेष वैश्विक अभियान या गोल ऑफ़ द मंथ की विस्तृत रिपोर्ट और घोषणा जारी करता है, इस बार अगस्त 2026 के इस विशेष अभियान को 3 अगस्त 2026 को पूर्ण विवरण (आंकड़ों और वैश्विक प्राथमिकताओं) के साथ सार्वजनिक किया गया है,जब हम इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतिमान को भारतीय धरातल पर क्रियान्वित होते देखते हैं, तो हमारा ध्यान सीधे तौर पर भारत की सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक नीति आरक्षण प्रणाली (रिजर्वेशन सिस्टम) की ओर जाता है। वर्तमान में,वैश्विक समानता के इस आह्वान के समानांतर, भारत के डिजिटल और सामाजिक पटल पर आरक्षण हटाओ आंदोलन जैसी मुहिम अत्यधिक तीव्रता से उभर रही हैं। यह अंतर्विरोध इस बात का जीवंत प्रमाण है कि देश में सामाजिक न्याय के पारंपरिक औजारों और आधुनिक आर्थिक वास्तविकताओं के बीच एक गहरी वैचारिक खाई उत्पन्न हो चुकी है।
साथियों, आरक्षण की संवैधानिक अवधारणा को समझे बिना इस प्रश्न का संतुलित उत्तर संभव नहीं है। भारत में आरक्षण का उद्देश्य किसी वर्ग को विशेषाधिकार देना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक बहिष्कार,भेदभाव और अवसरों की असमानता से प्रभावित समुदायों को शिक्षा, सरकारी रोजगार और प्रतिनिधित्व में आगे बढ़ने का अवसर देना था।भारतीय संविधान की समानता संबंधी व्यवस्था केवल औपचारिक समानता तक सीमित नहीं है; वह वास्तविक और सार्थक समानता की दिशा में भी विशेष प्रावधानों की अनुमति देती है।अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष उपायों का उद्देश्य उन बाधाओं को कम करना था, जिनके कारण अनेक समुदाय लंबे समय तक शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक प्रतिष्ठा से दूर रहे।
साथियों, सत्तर वर्षों की यात्रा और आरक्षण की वर्तमान प्रासंगिकता भारतीय स्वतंत्रता के सात दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद, यह प्रश्न पूरी तरह से अपरिहार्य हो चुका है कि क्या आज भी आरक्षण की वास्तविक रूप में आवश्यकता है? इस विमर्श को समझने के लिए भारतीय समाज की ऐतिहासिक संरचना औरसमकालीन प्रगति दोनों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना अनिवार्य है। आरक्षण नीति को भारतीय संविधान में एक निश्चित अवधि के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व के रूप में और सामाजिक- शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए एक ‘सकारात्मक कार्रवाई के तौर पर शामिल किया गया था। इस व्यवस्था ने निश्चित रूप से पिछले 70 वर्षों में देश के एक बहुत बड़े शोषित, वंचित और हाशिए पर पड़े समाज को प्रशासनिक, शैक्षणिक और राजनैतिक व्यवस्था में अपनी आवाज उठाने की शक्ति प्रदान की है। इस नीति के बिना भारतीय लोकतंत्र शायद इतना समावेशी नहीं हो पाता। परंतु, समस्या तब उत्पन्न होती है जब सत्तर वर्षों के बाद भी समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा आज भी उसी आदिम पिछड़ेपन, निरक्षरता और घोर सामाजिक अभाव में जीने के लिए विवश है। यह जमीनी हकीकत इस बात की ओर इशारा करती है कि आरक्षण नीति अपने मूल उद्देश्यों को पूर्ण रूप से प्राप्त करने में कहीं न कहीं आंशिक रूप से ही सफल रही है। यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी और आधुनिक विचारक इस नीति की निरंतरता औरइसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
साथियों, प्रशासनिक अभिजात्य वर्ग और पीढ़ी-दर- पीढ़ी लाभ का संकट इस संपूर्ण विमर्श के केंद्र में सबसे ज्वलंत और तीखा प्रश्न यह है कि क्या जो लोग आरक्षण के बल पर समाज के शीर्ष पायदान पर पहुंच चुके हैं,जैसे कि आईएएस आईपीएस, केंद्रीय सेवाओं के उच्च अधिकारी, बड़े राजनेता और आर्थिक रूप से अत्यधिक संपन्न हो चुके उद्योगपति,क्या उनकी अगली पीढ़ियों को भी इस सुरक्षा कवच की आवश्यकता है? सोशल मीडिया और वर्तमान बौद्धिक विमर्शों में इस बात को लेकर तीव्र आक्रोश है कि आरक्षण का लाभ एक ही परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित हो रहा है। जब अनुसूचित जाति या जनजाति का कोई व्यक्ति सिविल सेवा के सर्वोच्च पद पर पहुंच जाता है, तो उसकी आने वाली संतति को देश के सबसे महंगे कॉन्वेंट स्कूलों, महानगरों के उच्च बुनियादी ढांचों और समस्त आर्थिक सुख-सुविधाओं का स्वतः लाभ मिल जाता है। ऐसे में,उस संपन्न बच्चे की तुलना उसी की श्रेणी के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले किसी खेतिहर मजदूर,हाथ से मैला उठाने वाले या किसी सुदूर आदिवासी अंचल के बच्चे से करना पूर्णतः अतार्किक और अन्यायपूर्ण प्रतीत होता है। वास्तव में, इस नीतिगत विसंगति के कारण आरक्षित श्रेणियों के भीतर ही एक अभिजात्य वर्ग या क्रीमी लेयर का निर्माण हो गया है, जो अपनी ही जाति के सबसे गरीब, शोषित और अत्यंत पिछड़े लोगों के अधिकारों पर सटिकता से एकाधिकार जमाए बैठा है?
साथियों, सामाजिक,आर्थिक और नैतिक विषमता को बढ़ावा वर्तमान आरक्षण प्रणाली के इस रूप से समाज में एक नए प्रकार की सामाजिक, आर्थिक और नैतिक विषमता को बढ़ावा मिल रहा है, जो कि संयुक्त राष्ट्र के एसडीज़ी 10 के सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है। सामाजिक स्तर पर, यह व्यवस्था जातियों के बीच सद्भाव पैदा करने के बजाय वैमनस्य और विभाजन को गहरा कर रही है। जब योग्यता रखने वाले सामान्य वर्ग के युवाओं को अत्यधिक उच्च अंक प्राप्त करने के बाद भी रोजगार या शिक्षा से वंचित होना पड़ता है, और उनकी तुलना में अत्यधिक संपन्न पृष्ठभूमि वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का चयन बहुत कम अंकों पर हो जाता है, तो समाज में असंतोष और मानसिक कुंठा का जन्म होता है। आर्थिक स्तर पर, यह विषमता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि आरक्षण का आधार आज भी मुख्य रूप से केवल जन्मगत जाति बना हुआ है, न कि व्यक्ति की वर्तमान आर्थिक विपन्नता। नैतिक दृष्टिकोण से भी यह एक गंभीर संकट है। नीतिपरकता यह मांग करती है कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को पहले सहारा दिया जाए। परंतु, वर्तमान व्यवस्था में नैतिक रूप से संपन्न हो चुके परिवारों द्वारा स्वेच्छा से इस लाभ का परित्याग न करना और राज्य द्वारा इस पर कोई कठोर सीमा न लगाना, उस अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के प्रति घोर नैतिक अन्याय है, जो आज भी प्राथमिक शिक्षा और दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है।
साथियों, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिमान और सकारात्मक नीतिगत सुधारों की आवश्यकता अंतर्राष्ट्रीय स्तरपर जब हम सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का अध्ययन करते हैं, तो संयुक्त राष्ट्र का स्पष्ट मत है कि कोई भी सकारात्मक कार्रवाई शाश्वत या अपरिवर्तनीय नहीं हो सकती। उसे समय-समय पर व्यावहारिक डेटा, समकालीन सामाजिक विकास और आर्थिक पैमानों पर कसा जाना चाहिए।भारत के संदर्भ में भी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने हालिया ऐतिहासिक निर्णयों में बार-बार इस बात पर बल दिया है कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर भी क्रीमी लेयर के सिद्धांत को कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, जातियों के उप-वर्गीकरण की प्रक्रिया को अपनाना अत्यंत अनिवार्य हो चुका है। उप- वर्गीकरण का तात्पर्य यह है कि आरक्षित श्रेणियों के भीतर जो जातियां पिछले 70 वर्षों में पूरी तरह अछूती रह गईं और जिन्हें आरक्षण का 1 प्रतिशत लाभ भी नहीं मिल सका,उन्हें प्राथमिकता दी जाए,तथा जो जातियां इसका अधिकतम लाभ उठाकर पूरी तरह सशक्त हो चुकी हैं,उन्हें इस सुरक्षा चक्र से बाहर निकाला जाए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि न्यायसंगत भविष्य की राह संयुक्त राष्ट्र का सतत विकास लक्ष्य (एसडीज़ी)10 हमें यह याद दिलाता है कि किसी भी प्रगतिशील राष्ट्र का मूल मंत्र लीव नों वन बिहाइंड (किसी को भी पीछे न छोड़ना) होना चाहिए। भारत में चल रहा आरक्षण हटाओ अभियान शायद वर्तमान व्यवस्था की अकर्मण्यता, विसंगतियों और अपारदर्शिता के विरुद्ध उपजा एक तीखा सुधारवादी स्वर है। 70 वर्षों के बाद आज देश को आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की नहीं, बल्कि इसे अत्यंत सूक्ष्मता से पुनर्गठित और युक्तिसंगत करने की आवश्यकता है। आरक्षण का लाभ केवल एक पीढ़ी तक सीमित करने,संपन्न हो चुके प्रशासनिक व आर्थिक परिवारों को इस कोटे से बाहर करने और संपूर्ण बल देश की प्राथमिक शिक्षा व कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) पर देने से ही वास्तविक समानता स्थापित होगी। जब तक हम आरक्षित वर्ग के भीतर छुपे हुए सबसे गरीब और हाशिए के व्यक्ति को सीधे तौर पर लक्षित करके लाभ नहीं पहुंचाएंगे,तब तक वैश्विक मंच पर असमानता कम करने का भारत का दावा अधूरा रहेगा। एक न्यायसंगत, समतावादी और नैतिक राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब सामाजिक न्याय का आधार केवल जातिगत राजनीति न होकर वास्तविक मानवीय आवश्यकता और राष्ट्रीय एकता बने।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
बीडीओ-सह-सीओ प्रवीण कुमार सिंह ने सुखनदी गांव से कांवड़ियों के जत्थे को किया रवाना, सुखद एवं मंगलमय यात्रा की कामना की।
बरडीहा
सुखनदी गांव के ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं से मिले स्नेहमयी निमंत्रण पर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सावन मास के पावन अवसर पर बाबा धाम जाने वाले कांवड़ियों के जत्थे को हरी झंडी दिखाकर और बोल बम के जयकारे के साथ रवाना किया।
गांव पहुँचने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने स्थानीय देवी मंडप में उपस्थित श्रद्धालुओं के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख, शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
पूजा-अर्चना संपन्न होने के पश्चात प्रवीण कुमार सिंह ने पवित्र झंडा दिखाकर तथा “हर-हर महादेव” व “बोल बम” के गगनभेदी जयकारों के बीच कांवड़ियों के जत्थे को देवघर यात्रा के लिए विदा किया।
21 श्रद्धालुओं का दल सुल्तानगंज से लाएगा जल: इस कांवड़िया दल में महिलाओं एवं पुरुषों को मिलाकर कुल 21 श्रद्धालु शामिल हैं। यह दल सर्वप्रथम सुल्तानगंज पहुँचेगा, जहाँ से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) जाएँगे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर वापस लौटेंगे।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रवीण कुमार सिंह ने सभी कांवड़ियों की सुरक्षित, सुखद और मंगलमय यात्रा की कामना की।
उन्होंने कहा: “सभी श्रद्धालु पूरी आस्था और भक्ति भाव से अपनी यात्रा पूरी करें। यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा या समस्या होने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन हर संभव सहयोग के लिए सदैव तत्पर है।” इस पावन और भावुक क्षण के दौरान पूरा सुखनदी गांव शिवभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। कांवड़ियों को विदा करने और शुभकामनाएँ देने के लिए मौके पर सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
खबर का दिखा असर: आदित्यपुर में पुलिस का सघन जांच अभियान, गली-मोहल्ले और पार्क से भागते नजर आए अड्डेबाज और असामाजिक तत्व।
सरायकेला/आदित्यपुर
सड़क किनारे शराब पीने वालों को कड़ी चेतावनी, SP के निर्देश पर देर शाम तक चला विशेष अभियान।
असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए आदित्यपुर पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर आदित्यपुर थाना पुलिस ने सोमवार देर शाम एक बड़ा सघन जांच अभियान चलाया।
आपको बताते चले कि झारखंड क्राइम रिपोर्टर हिंदी दैनिक अखबार के पोर्टल द्वारा दो दिन पहले ही सड़क किनारे शराब पीते हुए सामाजिक तत्वों पर न्यूज़ प्रकाशित की गई थी जिसे संज्ञान में लेते हुए पुलिस द्वारा यह सघन जांच अभियान चलाया गया।
पुलिस की टीमों ने थाना क्षेत्र के गली-मोहल्ले, चौक-चौराहों, पार्कों और सभी सार्वजनिक स्थानों पर एक साथ छापेमारी और गश्त की। पुलिस को देखते ही बिना वजह अड्डेबाजी कर रहे युवकों और असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया और कई लोग इधर-उधर भागते नजर आए।
बिना काम घूमने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
अभियान के दौरान पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आदित्यपुर में अब अड्डेबाजी और हुड़दंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई भी व्यक्ति बिना किसी ठोस कारण के गली-मोहल्ले, चौक-चौराहे या पार्कों में बैठकर अड्डेबाजी करता हुआ या माहौल खराब करता हुआ पाया गया, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सड़क किनारे शराब पीने वालों पर पुलिस की पैनी नजर
इस अभियान में विशेष रूप से सड़क किनारे बैठकर शराब पीने वालों को निशाना बनाया गया। पुलिस अधिकारियों ने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि सार्वजनिक स्थल पर या सड़क किनारे शराब पीना कानूनन अपराध है।
आगे से कोई भी व्यक्ति सड़क किनारे शराब पीते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ उत्पाद अधिनियम के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई कर जेल भेजा जाएगा।
पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अपने आसपास ऐसी किसी भी असामाजिक गतिविधि की सूचना तुरंत थाना को दें। पुलिस का यह विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
आदित्यपुर वार्ड 23 में विकास की नई पहल – पार्षद अवधेश सिंह की सराहनीय कोशिश
सरायकेला/आदित्यपुर
सोनू कुमार सिंह
आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 23 के लिए एक बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। वार्ड के लोकप्रिय और कर्मठ पार्षद श्री अवधेश सिंह ने वार्ड की सबसे पुरानी और गंभीर समस्या – जर्जर नाले की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है।
पार्षद अवधेश सिंह ने अपने प्रयास से रांची से विशेष सर्वेयर टीम को बुलवाकर वार्ड नंबर 23 के पूरे नाले का गहन सर्वेक्षण कराया। मौके पर मौजूद रहकर उन्होंने पूरी टीम को नाले की स्थिति दिखाई और अपनी योजना साझा की।
उनका विजन है कि वार्ड में पुराने खुले नाले की जगह ऊपर से स्लैब वाला आधुनिक कैनाल मॉडल का नया नाला बनाया जाए। इससे ना सिर्फ जलजमाव और गंदगी की समस्या खत्म होगी, बल्कि बदबू और मच्छरों से भी वार्ड वासियों को हमेशा के लिए निजात मिलेगी और ऊपर की जमीन का भी उपयोग हो सकेगा।
सर्वेयर टीम ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट का ड्रॉइंग मैप और एस्टीमेट तैयार कर विभाग को सौंपा जाएगा। पार्षद अवधेश सिंह ने इसे जल्द पास कराकर काम धरातल पर शुरू कराने की मांग की है।
उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 2 से 3 महीनों में इस बड़े प्रोजेक्ट का काम धरातल पर दिखने लगेगा। अगर यह योजना पूरी होती है, तो यह वार्ड नंबर 23 के इतिहास का सबसे बड़ा विकास कार्य साबित होगा।
वार्ड वासियों ने की सराहना
पार्षद की इस सक्रियता को देख वार्ड की जनता में खुशी की लहर है। वार्ड वासियों का कहना है कि “अवधेश सिंह जी ही ऐसे पार्षद हैं जो सिर्फ कहते नहीं, करके दिखाते हैं। वर्षों से हम इस नाले की समस्या से जूझ रहे थे, आज पहली बार किसी ने इसके स्थायी समाधान के लिए इतनी गंभीरता से पहल की है।” लोगों ने उनकी कार्यशैली और विकास के प्रति समर्पण की दिल खोलकर सराहना की।
निश्चित तौर पर पार्षद अवधेश सिंह का यह कदम वार्ड 23 को स्वच्छ, सुंदर और विकसित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
66 दिन में ही DTO का तबादला, क्या ली गई चुनाव आयोग से अनुमति?
जमशेदपुर
पूर्वी सिंहभूम के जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) दिलीप कुमार का महज 66 दिनों के अंदर तबादला कर दिया गया है, जिसने प्रशासनिक और सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम SIR-2026 के तहत जिला निर्वाचन शाखा द्वारा DTO दिलीप कुमार को विधानसभा क्षेत्र-47, जमशेदपुर पश्चिम का सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (AERO) नियुक्त किया गया था। आदेश के मुताबिक उन्हें 30 जून से 29 जुलाई तक गणना प्रपत्रों का वितरण-संग्रहण, 30 अगस्त से 4 सितंबर तक दावा-आपत्ति का सत्यापन और 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक SIR से जुड़े सभी चुनावी कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करना था।
इसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के बीच राज्य सरकार द्वारा उनके तबादले का आदेश जारी होना कई सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि जब कोई अधिकारी निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चुनावी ड्यूटी पर प्रतिनियुक्त हो, तो उस अवधि में उसका स्थानांतरण नियमतः चुनाव आयोग की अनुमति के बिना नहीं हो सकता।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार ने तबादले से पहले आयोग से सहमति ली थी, या आयोग के निर्देशों को दरकिनार किया गया है? फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।
गरीब परिवार का जर्जर मकान देख विचलित हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी; दबंगों को चेतावनी देते हुए दिए तत्काल आवास निर्माण के निर्देश, राशन कम बांटने पर डीलर को लगाई सख्त फटकार।
बरडीहा/गढ़वा
प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने आज प्रातः 6:00 बजे से बरडीहा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों का सघन स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण की शुरुआत उन्होंने सर्वप्रथम ब्लॉक कॉलोनी से की, जहाँ उन्होंने आवासों एवं आवागमन के रास्तों का जायजा लिया। कर्मियों द्वारा मार्ग न होने की समस्या बताए जाने पर बीडीओ ने जल्द से जल्द पक्की सड़क निर्माण का भरोसा दिलाया।
नाद-खूंटा हटवाकर आम रास्ता कराया मुक्त
इसके पश्चात कुन्दरहे मोड़ से पहले मुखिया उमेश प्रजापति के नेतृत्व में एकत्रित 50-60 ग्रामीणों के आग्रह पर बीडीओ कुन्दरहे गांव पहुँचे। गांव के मुख्य रास्ते पर मवेशियों को बांधकर एवं नाद-खूंटा लगाकर किए गए अतिक्रमण को बीडीओ ने मौके पर ही हटवाया और आम रास्ते को सुचारू रूप से बहाल कराया।
हृदय विदारक दृश्य: जर्जर मकान और दबंगों की साजिश उजागर
निरीक्षण के दौरान बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह की नजर एक अत्यंत जर्जर मकान पर पड़ी, जो बरसात में कभी भी धराशायी हो सकता था। पूछने पर कुछ असमाजिक तत्वों ने भ्रमित करने का प्रयास किया कि घर खाली है। परंतु सच्चाई सामने आते ही बीडीओ परिवार की अनुमति से घर के आंगन में दाखिल हुए।
पूछताछ में गृहस्वामी राजेंद्र सिंह के परिजनों ने बताया कि उन्हें आवास स्वीकृत हुआ है, लेकिन कुछ दबंगों द्वारा धोखे से जमीन की फर्जी रजिस्ट्री का दावा कर निर्माण कार्य रोका जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बीडीओ ने कड़ा रुख अपनाया। “मानवता के खिलाफ है काम रोकना, हर हाल में बनेगा गरीब का घर”
मौके से ही बीडीओ ने आवास कोऑर्डिनेटर रवि रंजन को अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराने का कड़ा निर्देश दिया। बीडीओ प्रवीण कुमार सिंह ने कड़े शब्दों में कहा:
“ज़मीन विवाद का बहाना बनाकर किसी गरीब को बेघर नहीं रखा जा सकता। यह मानवता के खिलाफ है। अगर यह जर्जर घर गिर गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। कोई भी ताकत इस गरीब का घर बनने से नहीं रोक सकती। ज़मीन विवाद का निष्पादन मैं स्वयं (अंचल अधिकारी के रूप में) करूँगा, लेकिन निर्माण कार्य तुरंत शुरू होना चाहिए।”
बीडीओ के इस कड़े व मानवीय रुख से प्रभावित होकर ग्रामीणों में भी एकजुटता दिखी। मौके पर ही ग्रामीणों ने स्वतः आगे आकर मदद की घोषणा की—किसी ने एक ट्रैक्टर छरी, किसी ने बालू तो किसी ने सीमेंट देने का संकल्प लिया।
स्कूल, आंगनबाड़ी और खेल मैदान का निरीक्षण
आगे बढ़ते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी ने गांव के बच्चों के खेल मैदान एवं स्थानीय विद्यालय का जायजा लिया, जहाँ साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। आंगनबाड़ी केंद्र के निरीक्षण के दौरान बीडीओ ने उपस्थित बच्चों से आत्मीय संवाद कर उनकी पढ़ाई-लिखाई की जानकारी ली।
राशन में कटौती पर डीलर को कड़ी हिदायत
निरीक्षण के अंतिम चरण में बीडीओ ‘अनीता स्वयं सहायता समूह’ द्वारा संचालित जन वितरण प्रणाली (डीलर) की दुकान पर पहुँचे। वहाँ लाभुकों से राशन में कटौती (कम तोलने) की शिकायत मिलने पर बीडीओ ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने डीलर को सख्त निर्देश दिए कि: गोदाम से पूरा राशन तौल कर प्राप्त करें। लाभुकों को निर्धारित मात्रा में पूरा राशन वितरित करें। भविष्य में राशन कटौती की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
आज होगी सभी मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन।
बरडीहा/गढ़वा
मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026: प्रारूप प्रकाशन, नोटिस तामिला एवं BLO के दायित्वों को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखण्ड के पत्रांक 1605 (दिनांक 31.07.2026) के आलोक में आज दिनांक 04 अगस्त 2026 को प्रखंड सभागार, बरडीहा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने की, जिसमें क्षेत्र के सभी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) , सुपरवाईजर एवं निर्वाचन कर्मी उपस्थित रहे। प्रमुख बिंदु एवं आवश्यक दिशा-निर्देश: आज होगा मतदाता सूची एवं ASDDF सूची का प्रारूप प्रकाशन: प्रखंड विकास पदाधिकारी ने जानकारी दी कि कल सभी मतदान केंद्रों (बूथों) पर मतदाता सूची के प्रारूप (Draft Publication) का प्रकाशन किया जाएगा। इसके साथ ही ASDDF (Absent, Shifted, Dead, Duplicate, False) सूची का भी प्रकाशन होगा।
प्रारूप प्रकाशन के साथ ही नए मतदाताओं को जोड़ने एवं संशोधन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू होगी।
दावा एवं आपत्ति (Claim & Objection): प्रारूप प्रकाशन के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों—जैसे नया नाम जोड़ने (प्रपत्र 6), नाम हटाने/आपत्ति (प्रपत्र 7) और प्रविष्टियों में सुधार या स्थान परिवर्तन (प्रपत्र 8)—का ससमय एवं पारदर्शी निष्पादन किया जाएगा।
बीएलओ (BLO) द्वारा ही कराया जाएगा नोटिस तामिला: दावा एवं आपत्तियों की सुनवाई के दौरान जो भी नोटिस जनरेट किए जाएँगे, उनका स्थलीय तामिला कराने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित BLO की ही होगी।
बीएलओ घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करेंगी। अभियान की महत्वपूर्ण तिथियाँ एवं कार्य योजना: पात्रता/कट-ऑफ तिथि: 01 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूर्ण करने वाले सभी युवा अपना नाम जुड़वाने हेतु पात्र होंगे।
अभियान की अवधि: फॉर्म 6, 7 और 8 स्वीकार करने का कार्य 05 अगस्त से 04 सितंबर 2026 तक चलेगा।
विशेष बूथ कैंप तिथियाँ (शनिवार-रविवार): पहला कैंप: 09 एवं 10 अगस्त 2026 दूसरा कैंप: 22 एवं 23 अगस्त 2026 (इन तिथियों पर सभी बीएलओ अपने-अपने बूथों पर बैठकर आवेदन प्राप्त करेंगी।)
विशेष ग्राम सभा: 15 अगस्त 2026 को मतदाता सूची के संबंध में विशेष ग्राम सभा का आयोजन होगा।
ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन: आम नागरिक अपना आवेदन ऑफलाइन (BLO के माध्यम से) या ऑनलाइन (Voter Helpline App / ECINET) भी कर सकते हैं।
सार्वजनिक अपील:
BDO प्रवीण कुमार सिंह ने बरडीहा के आम नागरिकों से अपील की है कि कल बूथों पर प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम अवश्य जाँच लें किसी भी तरह की शिकायत /समस्या होने पर तुरंत अपनी दर्ज करें l अभियान अवधि (05 अगस्त से 04 सितंबर) के दौरान अपनी पात्रता के अनुसार फॉर्म भरकर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने में सहयोग करें l
सरायकेला में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, प्रतिमा स्थापना के लिए भूमि पूजन किया गया।
सरायकेला
सोनू कुमार सिंह
झारखंड आंदोलन के महानायक, पद्म भूषण एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर सोमवार को सरायकेला में भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान बिरसा मुंडा स्टेडियम परिसर में उनकी भव्य प्रतिमा स्थापना के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ।
यह कार्यक्रम झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष शुभेंदु महतो के नेतृत्व में आयोजित किया गया। विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ भूमि पूजन कर प्रतिमा स्थापना कार्य का शुभारंभ किया गया। इसके बाद आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता एवं समर्थक जुटे।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने दिशोम गुरु के संघर्षमय जीवन को याद किया। नेताओं ने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन आदिवासी, दलित, शोषित वर्ग और झारखंड के जल-जंगल-जमीन की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया। झारखंड राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सामाजिक न्याय के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी प्रेरणास्रोत हैं।
इस अवसर पर ईचागढ़ विधायक सविता महतो, झामुमो के केंद्रीय सदस्य गणेश चौधरी, झामुमो के जुक्षारु नेता गणेश महाली, कृष्णा बास्के, बैद्यनाथ टुडू, राम महतो, सन्नी सिंह सहित पार्टी के बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
नेताओं ने कहा कि सरायकेला में स्थापित होने वाली दिशोम गुरु की प्रतिमा केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके विचारों, संघर्ष और झारखंड के विकास के प्रति उनके अटूट समर्पण की जीवंत प्रेरणा बनेगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के तहत 5 अगस्त को ( आज ) आयोजित #NewVoters सोशल मीडिया अभियान में करें सक्रिय सहभागिता : जिला निर्वाचन पदाधिकारी, सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावां
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के तहत पात्र नागरिकों का नाम समय पर मतदाता सूची में दर्ज कराने तथा नए मतदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 05 अगस्त, 2026 को प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक #NewVoters सोशल मीडिया अभियान संचालित किया जाएगा।
इस अभियान के माध्यम से आम नागरिकों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न विभागों से अपील की गई है कि वे अपने सोशल मीडिया मंचों पर #NewVoters हैशटैग के साथ मतदाता जागरूकता संबंधी संदेश साझा करते हुए अभियान को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप प्रदान करें।
इस संबंध में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ श्री नितिश कुमार सिंह ने जिले के सभी नागरिकों, विशेषकर युवा मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदाता के रूप में पंजीकरण से सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि यदि आपके परिवार, मित्र, पड़ोस अथवा आसपास कोई पात्र नागरिक अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं है, तो उसे समय पर अपना नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित करें तथा सही एवं प्रमाणिक जानकारी साझा करते हुए #NewVoters अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाएं।
उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिकों की सहभागिता से ही शत-प्रतिशत पात्र मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान होगी।
जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी नागरिकों से निर्धारित समय पर अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक लोगों तक मतदाता जागरूकता का संदेश पहुंचाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सशक्त मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।
जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण प्रारंभ।
सरायकेला-खरसावां
04 से 07 अगस्त तक समाहरणालय सभागार में चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
जनगणना कार्य निदेशालय, झारखंड, रांची के निर्देशानुसार जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (District Census Handbook-DCHB) से संबंधित कार्यों के सफल क्रियान्वयन हेतु सरायकेला-खरसावाँ जिला में चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार को अपर उपायुक्त सह जिला जनगणना पदाधिकारी श्री जयवर्धन कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में प्रारंभ हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम 04 अगस्त से 07 अगस्त, 2026 तक चरणबद्ध रूप से आयोजित किया जाएगा।
जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, त्रुटिरहित एवं समयबद्ध ढंग से संपादित करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रशिक्षण में चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (DCHB), निर्धारित प्रपत्रों के संधारण, कार्यप्रणाली, क्षेत्रीय दायित्वों एवं अन्य प्रक्रियात्मक एवं तकनीकी बिंदुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस सरायकेला, कुचाई एवं शहरी क्षेत्र से संबंधित चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस दौरान सरायकेला प्रखंड के 174 ग्रामों के लिए 35 क्षेत्र कर्मियों, कुचाई प्रखंड के 100 ग्रामों के लिए 20 क्षेत्र कर्मियों तथा शहरी क्षेत्र के 03 वार्डों के लिए 03 क्षेत्र कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रकार प्रथम दिवस कुल 58 क्षेत्र कर्मियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संबंधित सभी चार्ज पदाधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित रही।
प्रशिक्षण के दौरान जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (DCHB) के संधारण, प्रपत्रों के सही संधारण, अभिलेखों के रख-रखाव, क्षेत्रीय कार्यों के निष्पादन तथा जनगणना से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण श्री राम भास्कर द्विवेदी, ADCO एवं श्री अर्जुन राम, SIG-II द्वारा दिया गया।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 05 अगस्त को ईचागढ़, चांडिल एवं कुकड़ू, 06 अगस्त को खरसावाँ एवं गम्हरिया तथा 07 अगस्त को राजनगर एवं नीमडीह प्रखंड के चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
अपर उपायुक्त सह जिला जनगणना पदाधिकारी जयवर्धन कुमार ने सभी चार्ज पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने अधीनस्थ क्षेत्र कर्मियों की प्रशिक्षण कार्यक्रम में शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि जनगणना 2027 के प्रथम चरण से संबंधित समस्त कार्य भारत सरकार एवं जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, त्रुटिरहित एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपादित किए जा सकें।
गैस सिलेंडर चोरी मामले का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार; 64 सिलेंडर, पिकअप व बाइक बरामद।
सरायकेल/तिरुलडीह
तिरुलडीह थाना क्षेत्र में गैस सिलेंडर चोरी के मामले का पुलिस ने सफल खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले का खुलासा मंगलवार को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कार्यालय, चांडिल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीएसपी शिव प्रकाश कुमार ने किया।
डीएसपी ने बताया कि 27 जुलाई 2026 को तिरुलडीह थाना कांड संख्या 11/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(1), 334(1) एवं 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता संध्या देवी (सारथी इंडेन ग्रामीण वितरक) ने सपाड़ा स्थित गैस गोदाम से 56 गैस सिलेंडर चोरी होने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीपीओ शिव प्रकाश कुमार के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। तकनीकी एवं मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों-सदाब आलम उर्फ बटर, बाबू गोराई तथा मनीष कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर चोरी के 64 गैस सिलेंडर बरामद किए गए। साथ ही घटना में प्रयुक्त एक पिकअप वाहन (JH05DW-4807) और एक पल्सर मोटरसाइकिल (JH05BN-7028) भी जब्त की गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।