जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय प्रशिक्षण प्रारंभ।
सरायकेला-खरसावां
04 से 07 अगस्त तक समाहरणालय सभागार में चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
जनगणना कार्य निदेशालय, झारखंड, रांची के निर्देशानुसार जनगणना 2027 के प्रथम चरण अंतर्गत जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (District Census Handbook-DCHB) से संबंधित कार्यों के सफल क्रियान्वयन हेतु सरायकेला-खरसावाँ जिला में चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार को अपर उपायुक्त सह जिला जनगणना पदाधिकारी श्री जयवर्धन कुमार की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में प्रारंभ हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम 04 अगस्त से 07 अगस्त, 2026 तक चरणबद्ध रूप से आयोजित किया जाएगा।
जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, त्रुटिरहित एवं समयबद्ध ढंग से संपादित करने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रशिक्षण में चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (DCHB), निर्धारित प्रपत्रों के संधारण, कार्यप्रणाली, क्षेत्रीय दायित्वों एवं अन्य प्रक्रियात्मक एवं तकनीकी बिंदुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है।
प्रशिक्षण के प्रथम दिवस सरायकेला, कुचाई एवं शहरी क्षेत्र से संबंधित चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस दौरान सरायकेला प्रखंड के 174 ग्रामों के लिए 35 क्षेत्र कर्मियों, कुचाई प्रखंड के 100 ग्रामों के लिए 20 क्षेत्र कर्मियों तथा शहरी क्षेत्र के 03 वार्डों के लिए 03 क्षेत्र कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रकार प्रथम दिवस कुल 58 क्षेत्र कर्मियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में संबंधित सभी चार्ज पदाधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित रही।
प्रशिक्षण के दौरान जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (DCHB) के संधारण, प्रपत्रों के सही संधारण, अभिलेखों के रख-रखाव, क्षेत्रीय कार्यों के निष्पादन तथा जनगणना से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण श्री राम भास्कर द्विवेदी, ADCO एवं श्री अर्जुन राम, SIG-II द्वारा दिया गया।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 05 अगस्त को ईचागढ़, चांडिल एवं कुकड़ू, 06 अगस्त को खरसावाँ एवं गम्हरिया तथा 07 अगस्त को राजनगर एवं नीमडीह प्रखंड के चार्ज पदाधिकारियों एवं क्षेत्र कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
अपर उपायुक्त सह जिला जनगणना पदाधिकारी जयवर्धन कुमार ने सभी चार्ज पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने अधीनस्थ क्षेत्र कर्मियों की प्रशिक्षण कार्यक्रम में शत-प्रतिशत एवं समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि जनगणना 2027 के प्रथम चरण से संबंधित समस्त कार्य भारत सरकार एवं जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण, त्रुटिरहित एवं निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपादित किए जा सकें।
गैस सिलेंडर चोरी मामले का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार; 64 सिलेंडर, पिकअप व बाइक बरामद।
सरायकेल/तिरुलडीह
तिरुलडीह थाना क्षेत्र में गैस सिलेंडर चोरी के मामले का पुलिस ने सफल खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले का खुलासा मंगलवार को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कार्यालय, चांडिल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीएसपी शिव प्रकाश कुमार ने किया।
डीएसपी ने बताया कि 27 जुलाई 2026 को तिरुलडीह थाना कांड संख्या 11/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(1), 334(1) एवं 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता संध्या देवी (सारथी इंडेन ग्रामीण वितरक) ने सपाड़ा स्थित गैस गोदाम से 56 गैस सिलेंडर चोरी होने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीपीओ शिव प्रकाश कुमार के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया। तकनीकी एवं मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों-सदाब आलम उर्फ बटर, बाबू गोराई तथा मनीष कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर चोरी के 64 गैस सिलेंडर बरामद किए गए। साथ ही घटना में प्रयुक्त एक पिकअप वाहन (JH05DW-4807) और एक पल्सर मोटरसाइकिल (JH05BN-7028) भी जब्त की गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
गम्हरिया लाल बिल्डिंग परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर माल्यार्पण कर क्षामुमो नेता के.पी सोरेन ने दी श्रद्धांजलि।
सरायकेला/गम्हरिया
सोनू कुमार सिंह
गम्हरिया स्थित लाल बिल्डिंग परिसर में झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की स्मृति में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ नेता फूलकांत झा के नेतृत्व में किया गया। श्रद्धांजलि सभा में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित क्षामुमो के वरिष्ठ नेता के.पी सोरेन उपस्थित हो कर दिशोम गुरु के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
अपने संबोधन में के.पी सोरेन ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी का पूरा जीवन आदिवासी, शोषित, वंचित समाज के उत्थान और झारखंड के हक-अधिकार के लिए संघर्ष में समर्पित रहा। उनका त्याग, संघर्ष और सेवा भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
इस श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से इंद्रकांत झा, गोविंद पाठक, देवव्रत कुमार दास, अरुण कुमार दास, अपन चंद्रा, महावीर गोराई, सुफल गोराई, राधेश्याम महतो, पंकज अग्रवाल, दीपक झा, शंकर शर्मा, कृपा जी, रूपेश, लाल महतो सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
इसके साथ ही लाल बिल्डिंग बाजार के सभी दुकान संचालकों, व्यवसायियों और सब्जी विक्रेताओं ने भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर कार्यक्रम में शामिल होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरा माहौल भावुक और श्रद्धामय बना रहा।
दोनों मासूम मोहम्मद असद और अंश गुप्ता सकुशल घर लौटे, परिजन बच्चों को लेकर पहुंचे आदित्यपुर थाना, थाना प्रभारी और वार्ड पार्षद का किया आभार।
सरायकेला/आदित्यपुर सोनू कुमार सिंह
आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 23, कल्पनापुरी से लापता हुए दो मासूम बच्चे मोहम्मद असद और अंश गुप्ता के सकुशल मिलने से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।
परिजन दोनों बच्चों को सकुशल लेकर आदित्यपुर थाना पहुंचे, जहाँ उन्होंने थाना प्रभारी श्री अंजनी कुमार को शॉल ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ देकर तहे दिल से धन्यवाद दिया।
आपको बता दें कि शनिवार, 01/08/2026 की सुबह करीब 5:30 बजे दोनों बच्चे परिजनों से वॉलीबॉल खेलने जाने की बात कहकर घर से निकले थे, जिसके बाद से वे वापस नहीं लौटे थे। बच्चों के अचानक लापता होने से परिजनों में कोहराम मच गया था और पूरे वार्ड में चिंता का माहौल था।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि ने दिखाई मिशाल
इस कठिन घड़ी में आदित्यपुर थाना प्रभारी श्री अंजनी कुमार ने अत्यंत संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की और हर संभव स्तर पर खोज अभियान चलाया।
वहीं इस पूरे मामले में वार्ड संख्या 23 के लोकप्रिय पार्षद श्री अवधेश सिंह की भूमिका सराहनीय रही। बच्चों की गुमशुदगी की खबर मिलते ही पार्षद जी ने स्वयं मोर्चा संभाला, लगातार प्रशासन के संपर्क में रहे और परिजनों को ढांढस बंधाते हुए खोज अभियान को तेज करने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया।
परिजनों ने कहा – हमें ऐसे ही जनसेवक की तलाश थी
बच्चों के सकुशल वापस आते ही परिजनों ने राहत की सांस ली और अपने बच्चों को सीने से लगा लिया। भावुक परिजनों ने कहा कि – “जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ पार्षद अवधेश सिंह जी ने हमारे बच्चों के मामले में सक्रियता दिखाई, वह केवल एक सच्चा जनसेवक ही कर सकता है। हमें ऐसे ही जनसेवक की तलाश थी, जो हमें पार्षद के रूप में अवधेश सिंह जी के रूप में मिले हैं। साथ ही हम आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार जी का भी दिल से आभार व्यक्त करते हैं।”
दोनों बच्चों के मिलने से न सिर्फ उनके परिवार में बल्कि पूरे कल्पनापुरी और वार्ड 23 में जश्न जैसा माहौल है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस प्रशासन और पार्षद की इस संयुक्त तत्परता की जमकर सराहना की है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज एक साथ खड़े होते हैं, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।
विभिन्न मामलों में आदित्यपुर पुलिस ने तीन आरोपियों को भेजो न्यायाधीश हिरासत में।
सरायकेला/आदित्यपुर
पुलिस अधीक्षक सरायकेला-खरसावां के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में बड़ी सफलता हाथ लगी है।
एसपी के निर्देश पर 1 और 2 अगस्त की रात को पूरे जिले में समकालीन अभियान के तहत सघन रात्रि गश्ती की गई। इसी क्रम में आदित्यपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न मामलों में फरार चल रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आदित्यपुर थाना में दर्ज मोबाइल लूट कांड के प्राथमिकी अभियुक्त रवि मुंडा (30 वर्ष), निवासी शांति नगर, झंडा चौक, आदित्यपुर को गिरफ्तार किया गया है।
वहीं दूसरी कार्रवाई में वन विभाग से जुड़े एक मामले में एनबीडब्ल्यू वारंटी गोपाल सरकार (42 वर्ष), निवासी शांति नगर, गम्हरिया, झंडा चौक को पकड़ा गया।
तीसरे मामले में घर में चोरी के आरोप में वांछित लालबाबू कुम्हार, निवासी सालडीह बस्ती, एलआईसी कॉलोनी के समीप को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
आदित्यपुर नगर निगम में बिना सड़क बने भुगतान का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग।
सरायकेला/आदित्यपुर
आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड संख्या-20 में सड़क निर्माण कार्य में गंभीर वित्तीय अनियमितता का आरोप सामने आया है। आरोप है कि सड़क का निर्माण कराए बिना ही संवेदक को लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता बैध संजय कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव के नाम संबोधित शिकायत पत्र सरायकेला-खरसावां के जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त को सौंपा है और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
क्या है पूरा मामला? शिकायत पत्र के अनुसार, वार्ड-20 में तीन हिस्सों में पीसीसी सड़क निर्माण की योजना स्वीकृत की गई थी – 1. इमली चौक स्थित सर्विस रोड से शिव मंदिर तक – लगभग 300 फीट 2. शिव मंदिर से बजरंग मंदिर तक – लगभग 250 फीट 3. स्पार्क ऑटोमोबाइल दुकान से सर्विस रोड तक – लगभग 250 फीट इस कुल लगभग 800 फीट सड़क निर्माण के लिए 12,24,843 रुपये की योजना स्वीकृत हुई थी और इसके लिए मेसर्स आर.एस. इंटरप्राइजेज के साथ एकरारनामा भी किया गया था।
आरोप है कि निर्धारित स्थल पर पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य हुआ ही नहीं, फिर भी संवेदक को भुगतान कर दिया गया।
कांग्रेस नेता संजय कुमार का आरोप है कि इस कथित अनियमितता को छिपाने के लिए बाद में उसी स्थल पर योजना का नाम बदलकर फेवर ब्लॉक (पेवर ब्लॉक) सड़क का निर्माण करा दिया गया। उनका कहना है कि एक ही कार्यस्थल पर एक ही अवधि में दो अलग-अलग सड़क योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं है, जिससे वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका गहरी हो जाती है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने इस संबंध में कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने उपायुक्त से मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और सरकारी राशि के दुरुपयोग की जांच की मांग की है।
वहीं, इस पूरे मामले पर आदित्यपुर नगर निगम प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो पाएगी।
स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 के सफल एवं गरिमामय आयोजन को लेकर उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक ने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा।
सरायकेला-खरसावां
15 अगस्त को जिले में रहेगा ड्राई डे, राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अनुपालन एवं मानक आकार के राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री सुनिश्चित कराने के दिए गए निर्देश।
सरायकेला-खरसावाँ जिले में स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 के सफल, गरिमामय एवं सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर आज समाहरणालय सभागार में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री नितिश कुमार सिंह (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वगियारी (भा.पु.से.), अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला अभिनव प्रकाश (भा.प्र.से.), परियोजना निदेशक, आईटीडीए उषा मुंडू, अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार, नगर आयुक्त (आदित्यपुर) श्री एजाज अनवर, अनुमंडल पदाधिकारी चांडिल नितिन शिवम गुप्ता, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी-सह-प्रभारी पदाधिकारी (सामान्य शाखा) अविनाश कुमार, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला एवं चांडिल सहित विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के सभी पहलुओं की विभागवार समीक्षा की गई। मुख्य समारोह स्थल भगवान बिरसा मुंडा स्टेडियम, समाहरणालय परिसर एवं अन्य निर्धारित स्थलों की साफ-सफाई, रंग-रोगन, स्टेडियम का समतलीकरण एवं स्टोन डस्ट बिछाने, महापुरुषों की प्रतिमाओं की साफ-सफाई एवं रंग-रोगन, मंच एवं पंडाल की व्यवस्था, साउंड सिस्टम, प्रकाश व्यवस्था, कैमरा एवं वीडियोग्राफी, प्रभात फेरी, परेड पूर्वाभ्यास, राष्ट्रीय गान, माल्यार्पण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, चिकित्सा व्यवस्था, स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, निमंत्रण पत्र वितरण एवं अन्य आवश्यक तैयारियों की विस्तारपूर्वक समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी विभाग निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से अपनी-अपनी तैयारियां पूर्ण करें, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह पूरे जिले में हर्षोल्लास, अनुशासन एवं गरिमा के साथ संपन्न हो सके। उन्होंने सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अनुरूप ध्वजारोहण सुनिश्चित करने, नगर निकायों को विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर 13 अगस्त तक साफ-सफाई एवं सौंदर्यीकरण से संबंधित सभी कार्य पूर्ण करने तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम की तैयारियां समयबद्ध रूप से पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नगर भवन, सरायकेला में स्थानीय कलाकारों एवं विद्यार्थियों की सहभागिता से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। साथ ही विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जा सके।
उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 15 अगस्त को पूरे जिले में ड्राई डे का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए उत्पाद अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही स्वतंत्रता दिवस के दिन सभी शराब की दुकानें, कसाईखाने तथा मांस एवं मछली की दुकानें पूर्णतः बंद रहेंगी। संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी संयुक्त रूप से इसका अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखने पर विशेष बल देते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि बाजारों में केवल ध्वज संहिता के अनुरूप निर्धारित मानक आकार के राष्ट्रीय ध्वजों की ही बिक्री सुनिश्चित कराई जाए। इस संबंध में सभी अनुमंडल पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारियों को नियमित जांच अभियान चलाने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, ताकि राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो।
पुलिस अधीक्षक श्री मनोज सर्वगियारी (भा.पु.से.) ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के सफल, शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित आयोजन के दृष्टिगत सभी सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था संबंधी तैयारियां समयपूर्व पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने समारोह स्थल एवं अन्य ध्वजारोहण स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति, प्रभावी यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने हेतु समुचित सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को दिया। उन्होंने सभी पुलिस पदाधिकारियों एवं प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न कराने का निर्देश दिया।
बैठक में स्वतंत्रता दिवस समारोह के सफल आयोजन के लिए सुरक्षा व्यवस्था, विधि-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं, जनसहभागिता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की भी विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
स्वतंत्रता दिवस समारोह-2026 : ध्वजारोहण का निर्धारित कार्यक्रम
– प्रातः 08:15 बजे – गोपनीय कार्यालय, उपायुक्त आवास – प्रातः 08:40 बजे – गोपनीय कार्यालय, पुलिस अधीक्षक – प्रातः 09:10 बजे – मुख्य समारोह स्थल, भगवान बिरसा मुंडा स्टेडियम, सरायकेला – प्रातः 10:15 बजे – समाहरणालय परिसर – प्रातः 10:30 बजे – पुलिस अधीक्षक कार्यालय – प्रातः 10:55 बजे – पुलिस लाइन, दुगनी
फर्जी खबरों और डीपफेक का बढ़ता खतरा: अब सत्य की रक्षा केवल कानून से नहीं, तकनीक, जिम्मेदार पत्रकारिता और जागरूक नागरिकता के संयुक्त प्रयास से होगी -डिजिटल लोकतंत्र को बचाने के लिए नया कानूनी ढांचा क्यों जरूरी? -समग्र व्यापक विश्लेषण
जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता सच का चेहरा पहन ले,तब पत्रकारिता नागरिक अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा कैसे हो?
फर्जी समाचार,भ्रामक सूचनाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित तस्वीरें,नकली आवाजें और डीपफेक वीडियो सत्य,विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने नई परीक्षा खड़ी कर रहे हैं -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर आज का युग सूचना,संचार और डिजिटल तकनीक का युग है। मोबाइल फोन,इंटरनेट और सोशल मीडिया ने समाज में सूचना के प्रवाह को अभूतपूर्व गति प्रदान की है।कभी समाचारों के प्रसार का दायित्व मुख्यतः समाचारपत्रों, रेडियो,टेलीविजन और प्रशिक्षित पत्रकारों के हाथों में होता था, लेकिन आज प्रत्येक मोबाइलधारी व्यक्ति सूचना का उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि उसका निर्माता,प्रसारक और प्रभावकर्ता भी बन गया है।यह परिवर्तन लोकतंत्र के लिए अनेक अवसर लेकर आया है।आम नागरिक को अपनी बात सार्वजनिक मंच तक पहुंचाने का अधिकार मिला,शासन की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी,जनसमस्याएं तेजी से सामने आने लगीं और सामाजिक भागीदारी का विस्तार हुआ। किंतु मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते यह कहना चाहूंगा कि तकनीक की यही शक्ति अब एक गंभीर चुनौती भी बन रही है।फर्जी समाचार,भ्रामक सूचनाएं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित तस्वीरें,नकली आवाजें और डीपफेक वीडियो सत्य, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने नई परीक्षा खड़ी कर रहे हैं।भारत ने वर्ष 2026 में सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में संशोधन कर सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन अर्थात कृत्रिम या एल्गोरिद्मिक रूप से निर्मित अथवा परिवर्तित सामग्री के संबंध में नियामक ढांचे को मजबूत किया है। इन संशोधनों में एआई-निर्मित सामग्री की पहचान, स्पष्ट लेबलिंग और डिजिटल मध्यस्थों की जवाबदेही परविशेष ध्यान दिया गया है। सरकार ने मार्च 2026 में भी प्लेटफॉर्मों को भ्रामक, अपमान जनक और हानिकारक कृत्रिम सामग्री के संबंध में परामर्श जारी किया। यह महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि डिजिटल सामग्री का प्रभाव उसकी गति से जुड़ा होता है। यदि कोई झूठा वीडियो कुछ घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाए, तो बाद में उसे हटाने के बाद भी उसका सामाजिक और मानसिक प्रभाव बना रह सकता है। विश्व स्तर पर यूरोपीय संघ का एआई एक्ट पारदर्शिता आधारित नियमन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। 2 अगस्त 2026 से एआई एक्ट के अनुच्छेद 50 के अंतर्गत कुछ जनरेटिव एआई प्रणालियों और डीपफेक सामग्री के लिए पारदर्शिता संबंधी दायित्व लागू हुए हैं।
साथियों बात अगर हम इस तकनीकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसी के युग में पत्रकारिता को समझने की करें तो इसका मूल संबंध जनसरोकारों से है।पत्रकारिता केवल घटनाओं का वर्णन नहीं,बल्कि समाज की चेतना, जनहित की रक्षा और लोकतांत्रिक जवाबदेही का माध्यम है।कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका लोकतांत्रिक शासन के तीन प्रमुख आयाम हैं,जबकि पत्रकारिता इन संस्थाओं की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाकर पारदर्शिता,सत्य और जवाबदेही को मजबूत करती है। यही कारण है कि स्वतंत्र और जिम्मेदार पत्रकारिता को राष्ट्र का चौथा स्तंभ कहा जाता हैपत्रकारिता निरंकुशता पर प्रश्न उठाती है, सत्ता के दुरुपयोग को उजागर करती है, वंचितों और पीड़ितों की आवाज बनती है तथा मानवीय मूल्यों की पक्षधरता करती है। हिंदी पत्रकारिता के लगभग दो शताब्दियों के इतिहास ने भी यह सिद्ध किया है कि पत्रकारिता केवल सूचना का व्यवसाय नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण शक्ति है।
साथियों, लेकिन आज पत्रकारिता के सामने चुनौती केवल समाचारों की गति नहीं,बल्कि सत्य की पहचान है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने ऐसी तकनीक विकसित कर दी है,जो किसी व्यक्ति के चेहरे,आवाज,हावभाव और बोलने की शैली की अत्यंत वास्तविक प्रतीत होने वाली प्रतिकृति तैयार कर सकती है।किसी नेता, न्यायाधीश पत्रकार, अभिनेता,अधिकारी या सामान्य नागरिक को ऐसा बोलते या करते हुए दिखाया जा सकता है, जो उसने कभी कहा या किया ही नहीं। जब कृत्रिम सामग्री वास्तविकता जैसी दिखाई देने लगे, तब सामान्य नागरिक के लिए सत्य और असत्य में अंतर करना कठिन हो जाता है। यही डीपफेक की सबसे गंभीर चुनौती है, यह केवल झूठी सूचना नहीं बनाता, बल्कि झूठ को विश्वसनीय दृश्य और श्रव्य रूप देकर उसे सटीकता से सत्य जैसा प्रतीत कराता है। साथियों, फर्जी खबर और डीपफेक में तकनीकी अंतर हो सकता है, लेकिन दोनों का अंतिम प्रभाव सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करना है। फर्जी खबर सामान्यतः ऐसी गलत, भ्रामक या मनगढ़ंत सूचना होती है, जिसे जानबूझकर या बिना पर्याप्त सत्यापन के प्रसारित किया जाता है। इसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ, आर्थिक लाभ, सामाजिक तनाव, वैचारिक प्रचार या अधिक क्लिक और दर्शक प्राप्त करना हो सकता है। इसके विपरीत डीपफेक कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से तैयार या परिवर्तित तस्वीर, आवाज अथवा वीडियो है, जिसमें किसी व्यक्ति को ऐसी गतिविधि करते या ऐसा वक्तव्य देते हुए दिखाया जाता है जो वास्तविक नहीं होता। लिखित सूचना पर नागरिक संदेह कर सकता है, लेकिन जब वही सूचना किसी परिचित चेहरे और वास्तविक लगने वाली आवाज के साथ प्रस्तुत हो, तो उसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव कहीं अधिक हो सकता है।यूनेस्को ने डीपफेक को ज्ञान और सत्य को समझने के संकट से जोड़ा है। समस्या केवल नकली सामग्री की पहचान करने की नहीं है, बल्कि ऐसी डिजिटल दुनिया में प्रमाण, स्रोत और विश्वसनीयता की रक्षा करने की भी है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता वास्तविकता जैसी सामग्री तैयार कर सकती है।
साथियों, डीपफेक का सबसे बड़ा खतरा यह नहीं कि लोग केवल नकली वीडियो को सच मान लें। इससे भी गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब लोग वास्तविक वीडियो और वास्तविक प्रमाणों को भी डीपफेक बताकर अस्वीकार करने लगें। यदि किसी व्यक्ति का वास्तविक वीडियो सामने आए, तो वह यह दावा कर सकता है कि उसे एआई द्वारा बनाया या परिवर्तित किया गया है। इस स्थिति को लायर्स डिविडेंड कहा जाताहै,अर्थात तकनीक का ऐसा लाभ, जो झूठ बोलने वाले व्यक्ति को वास्तविक प्रमाणों से बचने का अवसर दे सकता है। परिणामस्वरूप समाज में कुछ भी पूरी तरह सच नहीं है जैसी मानसिकता विकसित हो सकती है। लोकतंत्र केवल मतदान की प्रक्रिया से संचालित नहीं होता; वह साझा तथ्यों, विश्वसनीय सूचना और नागरिक विश्वास पर भी आधारित होता है। यदि सत्य की पहचान ही विवादित हो जाए, तो लोकतांत्रिक संवाद और जनमत दोनों कमजोर पड़ सकते हैं।
साथियों, चुनावों और राजनीतिक व्यवस्था पर डीपफेक का प्रभाव विशेष रूप से गंभीर हो सकता है। किसी चुनाव से कुछ घंटे पहले यदि किसी राजनीतिक नेता का नकली वीडियो प्रसारित किया जाए, जिसमें वह किसी समुदाय के विरुद्ध बयान देता दिखाई दे या किसी संवेदनशील विषय पर विवादित टिप्पणी करता हुआ दिखाया जाए, तो उसका प्रभाव मतदाताओं की सोच पर पड़ सकता है।बाद में तथ्य-जांच या आधिकारिक स्पष्टीकरण आने पर भी गलत सूचना का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं होता।एआई आधारित माइक्रो-टार्गेटिंग के माध्यम से अलग-अलग नागरिकों को उनकी रुचियों, भावनाओं और डिजिटल व्यवहार के अनुसार अलग राजनीतिक संदेश भेजे जा सकते हैं। इससे सार्वजनिक बहस के स्थान पर व्यक्तिगत मनोवैज्ञानिक प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया एल्गोरिद्म और स्वचालित डिजिटल प्रचार भ्रामक सूचना के प्रसार को असाधारण गति दे सकते हैं।
साथियों, भारत जैसे विशाल और बहुभाषी डिजिटल लोकतंत्र में यह चुनौती और व्यापक है। करोड़ों नागरिक मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से समाचार प्राप्त करते हैं। डिजिटल विस्तार ने लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत किया है,लेकिन इसी के साथ फर्जी खबरों और डीपफेक के प्रसार का क्षेत्र भी बढ़ा है। एआई आधारित नकली सामग्री का उपयोग राजनीतिक भ्रम, वित्तीय धोखाधड़ी, नकली विज्ञापन, पहचान की चोरी, मानहानि, सामाजिक तनाव और व्यक्तिगत उत्पीड़न के लिए किया जा सकता है। किसी बैंक अधिकारी, सरकारी अधिकारी, रिश्तेदार या प्रसिद्ध व्यक्ति की आवाज की नकल करके धन या निजी जानकारी मांगी जा सकती है। किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर उसकी प्रतिष्ठा और सामाजिक जीवन को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
साथियों, फिर भी केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। डिजिटल अपराधों की कोई निश्चित भौगोलिक सीमा नहीं होती। सामग्री किसी देश में बनाई जा सकती है, किसी दूसरे देश के सर्वर परअपलोड हो सकती है और तीसरे देश के नागरिकों को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था के साथ तकनीकी पहचान प्रणाली, त्वरित जांच,डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सीमा-पार प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही भी आवश्यक है। कानून में यह स्पष्ट अंतर होना चाहिए कि कौन-सी एआई सामग्री वैध और रचनात्मक उपयोग के अंतर्गत आती है और कौन-सी सामग्री जानबूझकर धोखा, आर्थिक नुकसान, हिंसा, चुनावी हस्तक्षेप या प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाने के लिए बनाई गई है। एआई स्वयं समस्या नहीं है; उसका अनैतिक और हानिकारक उपयोग समस्या है। साथियों, पत्रकारिता जगत को भी इस तकनीकी युग में आत्ममंथन करना होगा। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस दिलीप पथपालिया द्वारा पत्रकारिता के नाम पर मोबाइल और माइक के अनियंत्रित उपयोग तथा लोगों को डराने-धमकाने से संबंधित टिप्पणी का व्यापक अर्थ है। प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है, लेकिन पत्रकारिता की आड़ में भय पैदा करना, बिना सत्यापन आरोप लगाना, निजी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना स्वतंत्र पत्रकारिता नहीं कहा जा सकता। मोबाइल कैमरे ने नागरिक पत्रकारिता को शक्ति दी है, किंतु इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। प्रत्येक व्यक्ति जो कैमरा और माइक लेकर सार्वजनिक सामग्री बना रहा है, वह स्वतः पत्रकारिता के नैतिक मानदंडों का पालन नहीं कर रहा होता। पत्रकारिता की पहचान केवल उपकरण से नहीं, बल्कि सत्यापन, निष्पक्षता, जनहित, उत्तरदायित्व और नैतिक आचरण से होती है। साथियों, एआई युग में पत्रकारिता का महत्व कम नहीं, बल्कि अधिक बढ़ गया है। जब सोशल मीडिया पर सूचना की बाढ़ हो, तब विश्वसनीय पत्रकारिता सत्यापन, संदर्भ और प्रमाण उपलब्ध कराती है। समाचार संस्थानों को तस्वीरों और वीडियो के स्रोत, समय, स्थान और तकनीकी प्रामाणिकता की जांच करनी चाहिए। एआई आधारित तथ्य-जांच उपकरणों का उपयोग आवश्यक है, लेकिन अंतिम संपादकीय निर्णय प्रशिक्षित मानव पत्रकारों और जिम्मेदार संपादकों के हाथ में होना चाहिए। समाचार संस्थानों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि किस सामग्री में एआई का उपयोग किया गया है। पत्रकारिता का भविष्य केवल सबसे पहले समाचार देने में नहीं, बल्कि सबसे विश्वसनीय समाचार देने में है। फर्जी खबरों के विरुद्ध कानून बनाते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा भी अनिवार्य है। फर्जी सूचना की परिभाषा अत्यधिक व्यापक या अस्पष्ट होने पर उसका दुरुपयोग वैध पत्रकारिता, राजनीतिक आलोचना, व्यंग्य और असहमति को दबाने के लिए हो सकता है। इसलिए कानून में स्पष्ट अंतर होना चाहिए,जानबूझकर धोखा देने और सामान्य गलती में, संगठित डिजिटल हेरफेर और वैध आलोचना में, तथा हानिकारक डीपफेक और रचनात्मक एआई उपयोग में। सरकार की आलोचना को केवल असुविधाजनक होने के कारण फर्जी खबर नहीं कहा जा सकता। इसी प्रकार किसी समाचार में अनजाने में हुई त्रुटि और जानबूझकर फैलाया गया झूठ समान नहीं हैं। नियमन का उद्देश्य सत्य पर नियंत्रण करना नहीं, बल्कि संगठित धोखे और हानिकारक डिजिटल हेरफेर को सटीकता से रोकना होना चाहिए।
साथियो, डिजिटल लोकतंत्र की सबसे मजबूत सुरक्षा जागरूक नागरिक है। किसी भी सनसनीखेज वीडियो, तस्वीर या संदेश को साझा करने से पहले नागरिक को उसके स्रोत, तिथि, संदर्भ और विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। क्या किसी प्रतिष्ठित समाचार संस्थान ने इसकी पुष्टि की है? क्या वीडियो का मूल स्रोत उपलब्ध है? क्या आवाज, चेहरे या हावभाव में अस्वाभाविकता दिखाई देती है? क्या संदेश भय या क्रोध उत्पन्न करके तुरंत साझा करने का दबाव बना रहा है? पहले सत्यापन, फिर प्रसारण डिजिटल नागरिकता का मूल सिद्धांत होना चाहिए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में मीडिया साक्षरता, तथ्य- जांच और एआई जागरूकता को शिक्षा का अनिवार्य भाग बनाया जाना चाहिए।
क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318।
आदित्यपुर में गूंजा दुर्गा पूजा की तैयारियों का शंखनाद, त्रिधारा मंदिर के रूप में बनेगा इस साल का भव्य पंडाल।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
प्रवीण सिंह सेवा संस्थान ने किया भूमि पूजन।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रवीण सिंह सेवा संस्थान द्वारा भव्य दुर्गा पूजा पंडाल का निर्माण किया जाएगा। जिसको लेकर आज वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन किया गया।
इस अवसर पर कलश स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भूमि पूजन के साथ ही पंडाल निर्माण की औपचारिक शुरुआत हो गई है।
इस शुभ अवसर पर शशि शेखर, भगवान सिंह, जवाहर लाल सिंह, उमेश सिंह, संजय सिंह, इन्द्रजीत पांडेय, धनंजय कुमार, सुनील गुप्ता, अनुराग सिंह और जगदीश नारायण चौबे समेत संस्थान के कई सदस्य एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे.
संस्थान के संरक्षक अरविंद सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि कि इस वर्ष मां दुर्गा के पूजा पंडाल का निर्माण त्रिधारा मंदिर के स्वरूप में कराया जाएगा। त्रिधारा मंदिर की अनूठी वास्तुकला और आध्यात्मिक स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। इसका मॉडल भी आज पूजा स्थल पर रखा गया था।
आपको बता दें कि प्रवीण सिंह सेवा संस्थान के संरक्षक सह इचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद सिंह हैं। उनके द्वारा निर्मित यह पूजा पंडाल हर साल चर्चा का विषय बना रहता है। इस पंडाल को देखने के लिए सिर्फ सरायकेला-खरसावां ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड सहित बंगाल और ओडिशा से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। पंडाल के अंदर प्रवेश करने के लिए घंटों लंबी कतार लगी रहती है।
हर साल की तरह इस साल भी पंडाल में भव्यता, रोशनी और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। संस्थान के सदस्यों ने कहा कि मां दुर्गा के आगमन की तैयारी पूरे जोश और श्रद्धा के साथ शुरू कर दी गई है।
इस वर्ष श्रद्धालुओं के विशेष आकर्षण के लिए ‘पुरानी काल्पनिक हवेली’ की थीम पर आधारित पंडाल तैयार किया जा रहा है. यह जानकारी संस्थान के संरक्षक सह पूर्व विधायक अरविंद सिंह ने दी। उन्होंने जानकारी देते हुए आगे कहा कि पूजा पंडाल के बाहरी और आंतरिक स्वरूप हल्के काले रंग में नजर आएगा। पंडाल की भीतरी और बाहरी दीवारों पर मां काली समेत विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक कलाकृतियां व मूर्तियां उकेरी जाएंगी। साथ ही कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ इस मंच से सामाजिक जागरूकता का संदेश भी प्रसारित किया जाएगा।
वहीं इस पूजा पंडाल के निर्माण का जिम्मा मां पार्वती डेकोरेटर्स के संचालक अशोक कुमार डे को दिया गया है जो कि मेदिनीपुर के रहने वाले हैं।
अशोक कुमार डे ने बताया कि लगभग 60 से 70 फीट ऊंचे इस भव्य पंडाल के निर्माण में 25 से 30 लाख रुपये की अनुमानित लागत आएगी. फिलहाल 40 कारीगर दिन-रात काम में लगे हुए हैं और महालया तक निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न कर लिया जाएगा.
मित्रता दिवस पर मानवता की मिसाल: आदित्यपुर में 1078 यूनिट रक्तदान, ‘यारों के यार’ स्व. प्रवीण सिंह को श्रद्धांजलि।
सरायकेला/आदित्यपुर
( सोनू कुमार सिंह की रिपोर्ट )
मित्रता दिवस के पावन अवसर पर दोस्ती को सेवा में बदलने की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली। स्वर्गीय प्रवीण सिंह स्मृति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित छठे वार्षिक मेगा रक्तदान शिविर में रिकॉर्ड 1078 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि 1078 अनजान जिंदगियों के लिए जीवनदान है।
भगवती इन्क्लेव के सामुदायिक भवन में आयोजित इस शिविर में सुबह से ही युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों का जनसैलाब उमड़ा। रक्तदाताओं का एक ही भाव था – “मेरा रक्त किसी भाई, किसी मित्र, किसी देशवासी के काम आए।”
रक्तदान – सबसे बड़ा मित्रता बंधन
कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा नेत्री मीरा मुंडा, संस्थान के मुख्य संरक्षक व पूर्व विधायक अरविंद सिंह, मानगो नगर निगम मेयर सुधा गुप्ता, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और झामुमो नेता गणेश महाली ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इसके बाद सभी अतिथियों ने समाजसेवी स्व. प्रवीण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
शिविर को संबोधित करते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा, “रक्तदान महादान है। इससे बड़ा कोई दान नहीं, क्योंकि यह किसी को नया जीवन देता है। यह वो मित्रता है जहाँ देने वाले को पता भी नहीं होता कि उसका रक्त किसके शरीर में जाकर उसकी जान बचाएगा।”
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि स्व. प्रवीण सिंह ने समाज के प्रति अपने दायित्वों का हमेशा निर्वहन किया और उनके पुत्र अंकुर सिंह ने उस सेवा परंपरा को बखूबी आगे बढ़ाया है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि परस्पर प्रेम, भाईचारा और सहयोग ही स्व. प्रवीण सिंह का मुख्य लक्ष्य था, जिसे आज पूरा शहर जी रहा है।
जमशेदपुर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार ने कहा कि स्व. प्रवीण सिंह की सेवा भावना आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा है और अंकुर सिंह के नेतृत्व में यह संस्थान हर साल मानवता का नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के जुझारू नेता गणेश महाली ने कहा कि रक्तदान दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज सेवा का सबसे पवित्र कार्य है और स्व. प्रवीण सिंह ने हमेशा सभी दलों को जोड़कर समाज के लिए काम किया।
आदित्यपुर वार्ड नंबर 23 के लोकप्रिय पार्षद अवधेश सिंह ने कहा कि उनके वार्ड में इस तरह का विशाल आयोजन गर्व की बात है और यहाँ के युवाओं ने बढ़-चढ़कर रक्तदान कर यह साबित कर दिया है कि आदित्यपुर सेवा और एकता में सबसे आगे है।
राजनीति से ऊपर, मानवता के लिए एक मंच
इस शिविर की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि यह दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मानवता का मंच बन गया।
शिविर में जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी, खरसावां विधायक दशरथ गगराई, झारखंड क्षत्रिय संघ के केंद्रीय अध्यक्ष शंभू नाथ सिंह, पूर्व पार्षद बॉबी सिंह उर्फ अमित सिंह, टाटा वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी, वरिष्ठ समाजसेवी ए.के. श्रीवास्तव सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे और रक्तदाताओं का हौसला बढ़ाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष व आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर अंकुर सिंह ने की, जबकि स्वागत भाषण अरविंद सिंह ने दिया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मेरे भ्राता सिर्फ समाजसेवी नहीं, ‘यारों के यार’ थे। आज पूरा शहर उनकी विचारधारा को जीवित रखे हुए है।”
कोविड के बाद बढ़ी जागरूकता, डॉक्टरों का सम्मान
संस्थान ने बताया कि कोविड महामारी के बाद लोगों में रक्तदान के प्रति अभूतपूर्व जागरूकता आई है। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए गम्हरिया CHC प्रभारी डॉ. प्रमिला कुमारी, TMH के सर्जन डॉ. प्रणय मिश्रा, ESI के डॉ. अभिषेक मुंडू, सिद्धेश नर्सिंग होम के डॉ. अंगज सिद्धेश, डॉ. साहिर पाल, डॉ. नकुल चौधरी सहित कई डॉक्टरों और नर्सों को सम्मानित किया गया और नर्सों को स्वास्थ्य किट वितरित की गई।
यह मेगा शिविर सिर्फ रक्तदान नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब देश का युवा एकजुट होता है तो मानवता की सबसे बड़ी सेवा हो जाती है।
वर्षों पुराने सड़क विवाद पर प्रशासन का बड़ा एक्शन: बीडीओ सह सीओ प्रवीण कुमार सिंह ने मौके पर कराया समाधान, हटेगा 5 साल पुराना अवैध कब्जा।
सलगा/बरडीहा
कार्यालय में मिली अतिक्रमण की शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने अहले सुबह सलगा पंचायत का रुख किया।
प्रतिदिन की तरह सुबह के पैदल भ्रमण के क्रम में ही वे ग्रामीणों की समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निस्तारण करने के उद्देश्य से लगभग 4 किलोमीटर पैदल चलकर सलगा पंचायत के विभिन्न टोलों में पहुंचे। उनके इस पैदल दौरे में रास्ते भर ग्रामीणों से संवाद भी होता रहा और समस्याओं का त्वरित समाधान भी निकाला गया।
दौरे के क्रम में सलगा के बैगा टोली पहुंचते-पहुंचते ग्रामीणों और बच्चों का लगभग 150 लोगों का कारवां उनके साथ जुड़ गया। बैगा टोली में पिछले 5 वर्षों से चले आ रहे सड़क विवाद और महेंद्र यादव द्वारा पूरे रास्ते पर किए गए अवैध कब्जे की समस्या पर सीओ ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अंचल अमीन अमलेश यादव की मौजूदगी में स्थल का मुआयना किया और अतिक्रमणकारी महेंद्र यादव से सीधी बातचीत कर सख्त लहजे में निर्देश दिया। प्रशासनिक सख्ती के बाद महेंद्र यादव ने तुरंत अपने अवैध कब्जे को हटाने पर सहमति जताई। सीओ ने मौके पर ही अमीन को संपूर्ण मार्ग की मापी कर अतिक्रमण को चिह्नित करने और रास्ते को पूर्णतः कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए।
भ्रमण के दौरान सलगा चौक पर बंद पड़े सामुदायिक शौचालय की स्थिति देख सीओ ने तत्काल चौक के सामने स्थित स्थानीय दुकानदार को चाबी सौंपने का आदेश दिया। शौचालय के रखरखाव व साफ-सफाई के लिए उपयोगकर्ताओं से 5 से 10 रुपये का न्यूनतम शुल्क लेकर इसे आम जनता के लिए अविलंब चालू करने का निर्देश दिया गया।
निरीक्षण के दौरान बीडीओ सह सीओ जिस मार्ग से होकर गुजरे, वह पूर्व से ही काफी जर्जर और बदहाल स्थिति में था। रास्ते की खराब हालत को देखते हुए उन्होंने मौके पर ही मौजूद सलगा मुखिया उमेश प्रजापति को निर्देश दिया कि इस सड़क को ‘वीबीजी राम जी योजना’ के तहत स्वीकृत कराकर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराएं, ताकि सड़क अच्छा और चलने लायक हो सके।
इस दौरान सलगा मुखिया उमेश प्रजापति, अंचल अमीन अमलेश यादव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
सीओ के इस संवेदनशील और त्वरित प्रयास से ग्रामीणों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है। सालों से अवरुद्ध सड़क के मुक्त होने और जल्द ही अच्छी सड़क बनने की उम्मीद से ग्रामीणों का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
मामले पर बयान देते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह ने कहा, “रोजाना सुबह पैदल भ्रमण के दौरान ग्रामीणों की शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट समाधान का प्रयास किया जाता है।
जनसमस्याओं का समाधान और आवागमन को सुलभ बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 5 सालों से बंद पड़े सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ सड़क के सुदृढ़ीकरण पर भी त्वरित कार्रवाई की जा रही है।”
सरायकेला-खरसावां में बेलगाम शराबखोरी: सरकारी दुकान के बाहर ही छलकते जाम, प्रशासन मौन, जनता परेशान।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला खरसावां , आदित्यपुर, गम्हरिया कांड्रा थाना क्षेत्र/ मुख्य सड़क पर स्थित सरकारी शराब दुकान से शराब खरीदकर लोग सर्विस रोड पर ही बैठकर पीने लगे हैं। दिनभर शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात्रि में शराब पीकर लोग गाली-गलौज और झगड़ा करते हैं। शाम होते ही सर्विस रोड पर चलना मुश्किल हो जाता है। महिलाओं का अकेले निकलना भी असुरक्षित हो गया है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और आबकारी विभाग से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आम जनमानस ने जिला प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि शराब दुकान के 500 मीटर के दायरे में शराब पीने पर सख्त रोक लगे, सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए और नियमित गश्ती की जाए।