राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के तहत द्वितीय दिवस पर चालक परामर्श कार्यक्रम आयोजित
सरायकेला-खरसावां
सुरक्षित यातायात हेतु जागरूकता एवं शपथ ग्रहण
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह–2026 के अवसर पर द्वितीय दिवस के अंतर्गत आज श्री सीमेंट, खरसावाँ परिसर में जिला परिवहन विभाग, सरायकेला–खरसावाँ द्वारा सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “सतर्क चालक, सुरक्षित जीवन” रहा।
कार्यक्रम के दौरान लगभग 100 से अधिक वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारियाँ प्रदान की गईं। परामर्श सत्र में चलती वाहन से चढ़ने–उतरने, ओवरलोडिंग, रात्रि के समय दृश्यता की कमी तथा गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में वाहन परिचालन के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं से उत्पन्न जोखिमों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। साथ ही सुरक्षित वाहन संचालन, यातायात नियमों के पालन एवं दुर्घटनाओं से बचाव के उपायों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जिला परिवहन पदाधिकारी गिरिजा शंकर महतो, मोटरयान निरीक्षक दिलीप कुमार, मोटरयान निरीक्षक रवि प्रसाद एवं सड़क सुरक्षा टीम की उपस्थिति में सभी वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा से संबंधित शपथ भी दिलाई गई, ताकि वे यातायात नियमों का पालन करते हुए स्वयं एवं अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
जिला प्रशासन द्वारा यह अपील की गई कि सभी वाहन चालक यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके।
सड़क दुर्घटना प्रकरण में मृतक के आश्रित को मोटरयान अधिनियम के अंतर्गत क्षतिपूर्ति भुगतान — द्वितीय किस्त प्रदान
सरायकेला-खरसावां
मोटरयान अधिनियम (MV Act) के अंतर्गत सड़क दुर्घटना से संबंधित एक प्रकरण में मृतक के आश्रित को नियमानुसार क्षतिपूर्ति राशि के भुगतान की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप मृतक के आश्रित को कुल ₹9,41,517/- (नौ लाख इकतालीस हजार पाँच सौ सत्रह रुपये मात्र) की क्षतिपूर्ति स्वीकृत की गई है।
उक्त के क्रम में द्वितीय किस्त के रूप में ₹3,00,000/- (तीन लाख रुपये मात्र) का भुगतान किया गया। इससे पूर्व प्रथम किस्त के रूप में भी ₹3,00,000/- (तीन लाख रुपये मात्र) का भुगतान मृतक के आश्रित को किया जा चुका है। शेष बची हुई क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान निर्धारित नियमों एवं समय-सीमा के अनुरूप आगामी किस्त में किया जाएगा।
अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार की उपस्थिति में कार्यपालक दंडाधिकारी–सह–प्रभारी पदाधिकारी, नीलाम पत्र शाखा कमलेश कुमार दास द्वारा मृतक के आश्रित को चेक प्रदान किया गया।
जिला प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि सड़क दुर्घटना से संबंधित मामलों में मृतक के आश्रितों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने हेतु पारदर्शी, विधिसम्मत एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है, ताकि प्रभावित परिवार को त्वरित राहत मिल सके।इसी क्रम में जिले के सभी वाहन चालकों से अपील की जाती है कि वे अपने वाहनों में वाहन पंजीयन प्रमाण पत्र (RC), वैध ड्राइविंग लाइसेंस, बीमा प्रमाण पत्र (Insurance) तथा प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) सहित सभी आवश्यक दस्तावेज सदैव साथ रखें। इन दस्तावेजों की उपलब्धता न केवल कानूनी दायित्व है, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में बीमा दावा, क्षतिपूर्ति भुगतान एवं विधिक प्रक्रिया को सरल एवं सुचारू बनाने में अत्यंत उपयोगी होती है। जिला प्रशासन द्वारा वाहन चालकों से यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने, सुरक्षित एवं जिम्मेदार वाहन संचालन सुनिश्चित करने तथा सड़क सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की अपील की जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके एवं जन–धन की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
उपायुक्त की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार आयोजित
सरायकेला-खरसावां
समाहरणालय भवन स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त, सरायकेला–खरसावाँ की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया। जनता दरबार में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों द्वारा प्रस्तुत जनसमस्याओं से संबंधित आवेदनों की उपायुक्त द्वारा क्रमवार सुनवाई की गई।
जनता दरबार में प्रस्तुत प्रमुख प्रकरणों में मुड़कुम ग्राम पंचायत अंतर्गत निर्माणाधीन जलमीनार योजना में अनियमितता, कार्य की धीमी प्रगति एवं छूटे हुए ग्रामों को योजना से जोड़ने, जलसहिया का विगत दो वर्षों से लंबित बकाया मानदेय भुगतान, तथा गम्हरिया अंचल अंतर्गत इटागढ़ मौजा में आदित्यपुर RIT से पैदल मोड़ तक हो रहे सड़क निर्माण कार्य में सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टिगत सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने, सड़क किनारे स्थित सरकारी भूमि का उपयोग करने एवं ग्रामीणों की भूमि के अधिग्रहण से परहेज करने से संबंधित मामले शामिल रहे। इसके अतिरिक्त नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत सरायकेला वार्ड संख्या–06 (खड़दासाई) में स्थित जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र भवन के स्थान पर नए आंगनबाड़ी केंद्र भवन के निर्माण तथा नवीन भवन के निर्माण पूर्ण होने तक आंगनबाड़ी केंद्र का तत्काल प्रभाव से किसी अन्य उपयुक्त भवन में संचालन सुनिश्चित कराने से संबंधित आवेदन भी जनता दरबार में प्रस्तुत किया गया।
उपायुक्त द्वारा संबंधित विभागीय, अंचल एवं नगर निकाय स्तर के पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जनता दरबार में प्राप्त सभी प्रकरणों की नियमों के अनुरूप त्वरित जांच कर समयबद्ध, पारदर्शी एवं निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में स्थल निरीक्षण आवश्यक है, वहाँ शीघ्र निरीक्षण कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उपायुक्त ने यह भी निर्देश दिया कि बाल विकास, पेयजल, सड़क सुरक्षा एवं जनसुविधा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी तथा संबंधित पदाधिकारी प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
राष्ट्रपति के आगमन को लेकर यातायात व्यवस्था प्रभावित/प्रतिबंधित रहेगी तथा कुछ प्रमुख मार्गों पर आवागमन अस्थायी रूप से बाधित रह सकता है।
सरायकेला-खरसावां
सभी कारखाना/औद्योगिक प्रतिष्ठान, सरायकेला–खरसावाँ जिला को सूचित किया जाता है कि आगामी दिनांक 29.12.2025 को माननीय राष्ट्रपति महोदया का कार्यक्रम सरायकेला–खरसावाँ जिला अंतर्गत NIT Jamshedpur (आदित्यपुर) मे निर्धारित है। उक्त कार्यक्रम के मद्देनज़र दिनांक 29 दिसंबर 2025 को प्रातः 09:00 बजे से अपराह्न 04:00 बजे तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था प्रभावित/प्रतिबंधित रहेगी तथा कुछ प्रमुख मार्गों पर आवागमन अस्थायी रूप से बाधित रह सकता है।
इस सम्बन्ध में श्रम अधीक्षक, सरायकेला–खरसावाँ अविनाश कुमार ठाकुर द्वारा जिले के सभी कारखाना/औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधकों को निर्देशित/अनुरोधित किया गया है कि जिन प्रतिष्ठानों में कार्य-पाली (Shift) प्रणाली के अंतर्गत कार्य संचालित किया जाता है, वे दिनांक 29.12.2025 को प्रथम पाली का समापन अपराह्न 02:00 बजे के स्थान पर अपराह्न 04:00 बजे निर्धारित करें तथा द्वितीय पाली का संचालन अपराह्न 04:00 बजे के पश्चात प्रारंभ करें।
श्रम अधीक्षक द्वारा यह भी कहा गया है कि उक्त व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों/कामगारों को आवागमन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े तथा कानून-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था के संधारण में सहयोग प्राप्त हो सके।
माननीय राष्ट्रपति महोदया के प्रस्तावित आगमन की तैयारियों को लेकर विधि-व्यवस्था, सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की व्यापक समीक्षा।
सरायकेला-खरसावां
माननीय राष्ट्रपति महोदया के प्रस्तावित आगमन की तैयारी के निमित्त विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर उपायुक्त, सरायकेला–खरसावाँ नीतिश कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक, सरायकेला–खरसावाँ मुकेश लुणायत द्वारा संयुक्त रूप से एनआईटी परिसर, कार्यक्रम स्थल, आगमन–प्रस्थान मार्ग (रूट लाइन) सहित विभिन्न संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में सुरक्षा, प्रोटोकॉल, यातायात, पार्किंग, सेफ रूम, नियंत्रण कक्ष सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई।
तैयारियों के क्रम में जियाडा (JIADA) स्थित सभागार में संबंधित विभागों के पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त द्वारा सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि माननीय राष्ट्रपति महोदया के आगमन से पूर्व सभी तैयारियाँ दिनांक 27 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर ली जाएँ।
बैठक में रूट लाइन से संबंधित समस्त तैयारियों की विस्तार से समीक्षा करते हुए उपायुक्त द्वारा निर्देश दिया गया कि आगमन–प्रस्थान मार्ग पर स्थित सभी विद्युत खंभों, झूलते हुए तारों एवं अन्य विद्युत संरचनाओं को यथाशीघ्र दुरुस्त किया जाए। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से संबंधित विभागों द्वारा स्थलीय जांच के उपरांत सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप आवश्यक प्रमाण-पत्र दिनांक 27 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए। यातायात परिचालन को सुगम, सुरक्षित एवं निर्बाध बनाए रखने हेतु आवश्यकता अनुसार रूट डायवर्जन की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा थाना प्रभारी एवं नगर निगम के पदाधिकारियों को रूट लाइन में पड़ी किसी भी प्रकार की निर्माण सामग्री, मलबा अथवा क्षतिग्रस्त वाहनों को पूर्णतः हटाने का निर्देश दिया गया, ताकि आगमन मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल अथवा तैयारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण तत्परता, जिम्मेदारी एवं उच्च स्तर की संवेदनशीलता के साथ सुनिश्चित करेंगे।
समीक्षा बैठक में अपर उपायुक्त जयवर्धन कुमार, अपर नगर आयुक्त, आदित्यपुर रवि प्रकाश, उप नगर आयुक्त पारुल सिंह, अनुमंडल पदाधिकारी, सरायकेला–चांडिल, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सरायकेला–चांडिल, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी, जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे।
आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम अंतर्गत केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी द्वारा विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण, दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश।
सरायकेला-खरसावां
आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम (ABP) के अंतर्गत नीति आयोग द्वारा सरायकेला–खरसावां जिले के लिए नामित केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी विकाश सिंह, निदेशक, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा आज सरायकेला एवं गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र का भ्रमण करते हुए विभिन्न पंचायतों एवं संस्थानों का निरीक्षण किया गया।
भ्रमण के क्रम में सरायकेला प्रखंड परिसर स्थित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई, पथनमारा पंचायत अंतर्गत धोबाडीह ग्राम स्थित आंगनवाड़ी केंद्र, इटाकुदर पंचायत अंतर्गत बुंडू ग्राम स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सरायकेला प्रखंड अंतर्गत तीतीरबिला पंचायत स्थित राजकीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र तथा गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बिरबांश पंचायत भवन एवं उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बिरबांश का स्थलीय निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई में पशुओं के उपचार एवं टीकाकरण की व्यवस्था, आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की शिक्षा एवं पोषण स्थिति, आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं गुणवत्ता, राजकीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र में पशुपालन सेवाओं की कार्यशीलता तथा पंचायत भवन एवं शैक्षणिक संस्थान में आधारभूत संरचना, स्वच्छता, उपस्थिति एवं शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन की स्थिति का अवलोकन किया गया।
निरीक्षण के क्रम में केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पशुपालन, स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा से संबंधित सेवाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाए। आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता, नियमित उपस्थिति एवं सेवा गुणवत्ता बनाए रखने, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से उपचार एवं टीकाकरण सेवाओं का सुदृढ़ीकरण करने तथा शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आकांक्षी जिला कार्यक्रम अंतर्गत गतिविधियों की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कार्रवाई करने पर विशेष बल दिया गया।
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त सुश्री रीना हांसदा, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार, रोहित कुमार उद्योग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बेथल होम बेनाशोल में क्रिसमस कोरल का हुआ भव्य आयोजन, गीत-संगीत से गूंजा परिसर
पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
क्रिसमस के पावन अवसर पर बेथल होम, बेनाशोल में क्रिसमस कोरल कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर ईसा मसीह के जन्म की खुशी में बच्चों एवं युवाओं द्वारा मधुर क्रिसमस कोरल (समूह गीत) प्रस्तुत किए गए, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रभु यीशु के जन्म से जुड़े संदेशों को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कोरल गायन में शांति, प्रेम, भाईचारा और मानवता का संदेश दिया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। बच्चों की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिन्होंने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ क्रिसमस गीत गाए। इस मौके पर बेथल होम के पदाधिकारियों ने कहा कि क्रिसमस कोरल का उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी मेल-मिलाप को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में स्थानीय लोग, अभिभावक एवं ईसाई समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में सभी ने एक-दूसरे को क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं और शांति व खुशहाली की कामना की।
धोबनी पंचायत में पेसा दिवस पर विशेष ग्राम सभा, ग्रामीणों को पेसा एक्ट की जानकारी, जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण
पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
बुधवार को मुसाबनी प्रखंड अंतर्गत धोबनी पंचायत भवन में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस ग्राम सभा में ग्रामीणों को पेसा एक्ट (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम) से संबंधित ग्राम सभा की भूमिका, अधिकार एवं महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ग्राम सभा में ठंड को देखते हुए पंचायत के जरूरतमंद लोगों के बीच मुखिया एवं पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा कंबल का वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर पंचायत के मुखिया रामचंद्र मुर्मू, वार्ड सदस्य कमला देवी, काजल बास्के, पोद्दावती सरदार, ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
अरावली पर्वतमाला विवाद- खनन संरक्षण और सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों का समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण
अरावली पर्वतमाला भारतीय उपमहाद्वीप की पर्यावरणीय रीढ़, जलवायु संतुलन का आधार और रेगिस्तान को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है
अरावली पर्वतमाला विवाद को खनन बनाम पर्यावरण की सरल बहस में सीमित करना गलत होगा, इस मुद्दे पर केवल सोशल मीडिया के नारों पर नहीं बल्कि तथ्यों विज्ञान और कानून के आधार पर संवाद हो- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया/महाराष्ट्र
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वैश्विक स्तरपर अरावली पर्वतमाला केवल भारत की एक भौगोलिक संरचना नहीं है,बल्कि यह भारतीय उपमहाद्वीप की पर्यावरणीय रीढ़,जलवायुसंतुलन का आधार और रेगिस्तान को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है। लगभग 200 करोड़ वर्ष पुरानी यह पर्वतमाला मानव सभ्यता से भी कहीं अधिक प्राचीन है। किंतु विडंबना यह है कि आधुनिक विकास,खनन,शहरीकरण और नीतिगत अस्पष्टताओं के चलते आज यही पर्वतमाला अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। हाल ही में खनन से जुड़े नए नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लेकर सोशल मीडिया पर # सेव अरावाल्ली जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये नियम अरावली को बचाने के बजाय उसे कमजोर करेंगे।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि इस पृष्ठभूमि में यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे विवाद का तथ्यात्मक, कानूनी वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से सोशल प्रिंटर इलेक्ट्रिक मीडिया पर चल रहे विचारों के आदान- प्रदान व डिबेट क़ा समग्र विश्लेषण किया जाए, जो मीडिया में आ रही जानकारी के आधार पर है।
साथियों बात कर हम अरावली पर्वतमाला, भौगोलिक विस्तार और ऐतिहासिक महत्व को समझने की करें तो अरावली पर्वतमाला भारत के पश्चिमी भाग में गुजरात, राजस्थान,हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 1,47,000 वर्ग किलोमीटर है।यह पर्वतमाला गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर दिल्ली तक जाती है। अरावली की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर (1722 मीटर) माउंट आबू में स्थित है। यह पर्वतमाला थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है और उत्तर भारत के भूजल स्तर, मानसून पैटर्न और जैव विविधता को संतुलित रखने में निर्णायक भूमिका निभाती है।इतिहास की दृष्टि से अरावली ने हड़प्पा सभ्यता, राजपूत राज्यों और मुगल काल में भी जल स्रोतों,खनिजों और प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य किया।अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिक मानकों के अनुसार इतनी प्राचीन पर्वतमालाएं पृथ्वी पर बहुत कम बची हैं, इसलिए अरावली का संरक्षण केवल भारत नहीं बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है।खनिज संपदा और खनन का आकर्षणअरावली पर्वतमाला खनिज संसाधनों से भरपूर है।यहां तांबा, जिंक, लेड, ग्रेनाइट, मार्बल और कॉपर जैसे मूल्यवान खनिज पाए जाते हैं। औद्योगिक विकास और निर्माण क्षेत्र की बढ़ती मांग ने अरावली को खनन उद्योग के लिए अत्यंत आकर्षक बना दिया।विशेषकर राजस्थान और हरियाणा में दशकों तक अनियंत्रित और अवैध खनन हुआ, जिससे पहाड़ों का क्षरण, जंगलों का विनाश और जल स्रोतों का सूखना शुरू हो गया।यही वह बिंदु है जहां विकास और संरक्षण के बीच टकराव पैदा होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही बहस अमेज़न, एंडीज़ और अफ्रीकी रिफ्ट वैली में देखी गई है।
साथियों बात अगर हम चार राज्यों, चार अलग- अलग नियम,भ्रम और पारदर्शिता का संकट इसको समझने की करें तो, अरावली पर्वतमाला चार राज्यों में फैली होने के कारण हर राज्य के अपने-अपने खनन और पर्यावरणीय नियम थे। कहीं पहाड़ियों की परिभाषा अलग थी, कहीं ऊंचाई की सीमा नहीं थी, तो कहीं वन क्षेत्र की पहचान अस्पष्ट थी।इस असमानता के कारण न केवलप्रशासनिक भ्रम पैदा हुआ बल्कि खनन माफिया ने भी इसी अस्पष्टता का लाभ उठाया।अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण शासन (इंविरोंमेन्टल गवर्नेंस) के सिद्धांतों के अनुसार, साझा प्राकृतिक संसाधनों के लिए एकरूप नियमों की आवश्यकता होती है। इसी सिद्धांत के तहत अरावली के लिए भी एक समान नीति की मांग लंबे समय से उठ रही थी।
साथियों बात अगर हम सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप- न्यायपालिका की निर्णायक भूमिका इसको समझने की करें तो, पर्यावरण संरक्षण के मामलों में भारतीय सुप्रीम कोर्ट की भूमिका वैश्विक स्तर पर सराही जाती है। गंगा, यमुना, ताज ट्रेपेज़ियम और वनों के संरक्षण में कोर्ट के हस्तक्षेप मिसाल रहे हैं। अरावली के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीरता को समझते हुए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया।इस समिति में पर्यावरण मंत्रालय, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया,चारों राज्यों के वन विभाग के अधिकारी और स्वयं सुप्रीम कोर्ट के प्रतिनिधि शामिल थे। यह संरचना अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण आयोगों के अनुरूप थी, जहां नीति, विज्ञान और न्याय का सटीक समन्वय होता है। समिति की सिफारिशें और नवंबर 2025 की मंजूरी-समिति ने विस्तृत सर्वेक्षण,उपग्रह चित्रों, भूवैज्ञानिक डेटा और पर्यावरणीय प्रभावआकलन के आधार पर अपनी सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट को सौंपीं।नवंबर 2025 में कोर्ट ने इन सिफारिशों को मंजूरी दी।यही वे सिफारिशें हैं जो आज विवाद का केंद्र बनी हुई हैं।पहली सिफारिश,100 मीटर ऊंचाई की परिभाषा-नई व्यवस्था के अनुसार, सिर्फ 100 मीटर या उससे ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला का हिस्सा माना जाएगा।ऐसे क्षेत्रों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।आलोचकों का कहना है किइससे 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को खनन के लिए खोल दिया जाएगा।किंतु समिति का तर्क है कि वैज्ञानिक रूप से पर्वतमाला की पहचान ऊंचाई, निरंतरता और भूगर्भीय संरचना से होती है।अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिक मानकों में भी पर्वत और पहाड़ी के बीच यही अंतर किया जाता है।दूसरी सिफारिश,500 मीटर निरंतरता का सिद्धांत-दूसरा महत्वपूर्ण नियम यह है कि यदि 100 मीटर से ऊंची दो पहाड़ियों के बीच की दूरी 500 मीटर से कम है, तो उस पूरे क्षेत्र को अरावली पर्वत श्रृंखला माना जाएगा और वहां खनन नहीं होगा।यहनियम पर्वतमाला की भौगोलिक निरंतरता को बचाने के लिए है, ताकि खनन के कारण पहाड़ टुकड़ों में न टूट जाएं।यह सिद्धांत यूरोपियन अल्प्स और अमेरिकी अपलाचियन पर्वतमालाओं में भी अपनाया जाता है।सरकार का पक्ष- 90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन नियमों के लागू होने से अरावली का करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित हो जाएगा। खनन केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र,यानी लगभग 278 वर्ग किलोमीटर में ही संभव होगा। सरकार का दावा है कि इससे अवैध खनन रुकेगा, नियमों में स्पष्टता आएगी और पर्यावरणीय निगरानी बेहतर होगी।
साथियों बातें कर हम सोशल मीडिया बनाम तथ्य- # सेव अरावल्ली विवाद इसको समझने की करें तो, सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों में भावनात्मक अपील अधिक और तथ्य कम दिखाई देते हैं। कई पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि अरावली को कानूनी रूप से खत्म किया जा रहा है,जबकि वास्तविकता यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश संरक्षण को कानूनी मजबूती प्रदान करते हैं।यह प्रवृत्ति वैश्विक स्तर पर भी देखी जाती है, जहां जटिल पर्यावरणीय नीतियों को सरल नारों में प्रस्तुत कर भ्रम फैलाया जाता है। साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय तुलना,भारत की नीति कहां खड़ी है इसको समझने की करें तो,यदि हम ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और चिली जैसे देशों से तुलना करें, तो वहां खनन की अनुमति केवल सीमित नियंत्रित और वैज्ञानिक रूप से परिभाषित क्षेत्रों में दी जाती है। भारत में अरावली के लिए बनाए गए नए नियम इसी वैश्विकमानक के अनुरूप हैं।वास्तविक चुनौती,नियम नहीं,उनका क्रियान्वयन अरावली संकट की जड़ केवल नियमों में नहीं,बल्कि उनके ईमानदार क्रियान्वयन में है।यदिस्थानीय प्रशासन, पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया और निगरानी तंत्र मजबूत नहीं हुए, तो सबसे अच्छे नियम भी निष्प्रभावी हो सकते हैं।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि संरक्षण बनाम भ्रम,अरावली पर्वतमाला विवाद को केवल खनन बनाम पर्यावरण की सरल बहस में सीमित करना गलत होगा। सुप्रीम कोर्ट के नए नियम, यदि सही संदर्भ में देखें, तो वे अरावली को बचाने का एक ठोस कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। आवश्यकता है कि इस मुद्दे पर तथ्य, विज्ञान और कानून के आधार पर संवाद हो, न कि केवल सोशल मीडिया के नारों पर।अरावली का संरक्षण केवल आज की पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली सदियों के लिए भारत की जल, जलवायु और जीवन सुरक्षा का प्रश्न है।
झारखंड शिक्षा परियोजना कि ओर से एसपीटीएम कार्यक्रम में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के ए एन प्लस टू उच्च विद्यालय पिलीद एवं स्वामी श्रद्धानंद प्लस टू उच्च विद्यालय टीकर , कुकड़ू प्रखंड के प्लस टू उच्च विद्यालय तिरूलडीह में झारखंड शिक्षा परियोजना सरायकेला-खरसावां के तत्वावधान में शिक्षक -अभिभावक विशेष बैठक का आयोजन किया गया।
प्लस टू उच्च विद्यालय तिरूलडीह में उप विकास आयुक्त रिना हांसदा, श्रद्धानंद प्लस टू उच्च विद्यालय टीकर में डीटीओ गिरजा शंकर महतो, एएन प्लस टू उच्च विद्यालय पिलीद में मुखिया लक्ष्मी देवी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यालयों में शिक्षक -अभिभावक मीट में बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति, शिक्षक -अभिभावक के बीच अच्छा तालमेल , बेहतर प्रदर्शन आदि को लेकर चर्चा किया गया। शत प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने वाले बच्चों, प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने वाले, पढ़ाई में अधिक रूचि रखने वाले बच्चों व अभिभावकों को प्रशस्ती पत्र व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
वहीं एएन प्लस टू उच्च विद्यालय पिलीद में बच्चों ने स्वागत गीत व नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अभिभावकों के बीच मैजिक चेयर , बच्चों द्वारा कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। डीटीओ गिरजा शंकर महतो ने अपने संबोधन में कहा कि अभिभावक और शिक्षक का बेहतर तालमेल से बेहतर शिक्षण माहौल तैयार हो सकता है। उन्होंने अभिभावकों को समय पर और शत प्रतिशत बच्चों का उपस्थिति सुनिश्चित कराने में विद्यालय का सहयोग करने का अपील किया । मौके पर प्राचार्य मिताली, मिलन रक्षित, वरिष्ठ पत्रकार अरुण माझी,पंचानन पातर, दिलीप दास, अरूण महतो, सुबोध गोराई, हाराधन महतो दिप्ती कुमारी, गुरू चरण सरदार, राकेश भरद्वाज, स्वेता खलको आदि सैकड़ों अभिभावक उपस्थित थे।
झारखंड सरकार के सचिव एवं जोनल आईजी ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण करते हुए तैयारियों की समीक्षा की।
सरायकेला/आदित्यपुर
भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 29 दिसंबर को जमशेदपुर एवं आदित्यपुर आगमन प्रस्तावित है। माननीय राष्ट्रपति के कार्यक्रम के मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव- वाणिज्य कर विभाग, झारखंड सरकार अमिताभ कौशल तथा जोनल आईजी मनोज कौशिक द्वारा परिसदन जमशेदपुर में माननीय राष्ट्रपति के कार्यक्रम की तैयारियों हेतु समीक्षा बैठक की गई। उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम कर्ण सत्यार्थी, उपायुक्त सरायकेला खरसांवा नितिश कुमार सिंह, एसएसपी पूर्वी सिंहभूम पीयूष पांडेय, एसपी सरायकेला खरसावां मुकेश लुणायत समेत अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी बैठक में उपस्थित रहे ।
बैठक में परिभ्रमण मार्ग का मैपिंग करने, यातायात प्रबंधन, रास्ते से निर्माण सामग्री को हटाने, आवश्यकतानुरूप बेरिकेटिंग, पर्याप्त संख्या में दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी तथा पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति और ब्रिफिंग, रिहर्सल, पूरे क्षेत्र को नो फ्लाई जोन घोषित करने, प्रोटोकॉल का अनुपालन के संबंध में समीक्षा पर व्यवधानरहित कार्यक्रम संपन्न कराने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए ।
बैठक उपरांत सचिव एवं जोनल आईजी द्वारा करनडीह स्थित कार्यक्रम स्थल एवं एनआईटी जमशेदपुर के अलावे एयरपोर्ट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पदाधिकारियों द्वारा सुरक्षा एवं विधि व्यवस्था संधारण की समीक्षा की गई तथा अचूक रूप से सभी तैयारियों को ससमय पूर्ण करने का निदेश दिया गया । इस दौरान ग्रामीण एसपी श्री ऋषभ गर्ग, सिटी एसपी कुमार शिवाशीष, डीडीसी नागेन्द्र पासवान, एडीसी भगीरथ प्रसाद, नगर आयुक्त आदित्यपुर एवं उप नगर आयुक्त जेएनएसी, डीटीओ, ट्रैफिक डीएसपी तथा सरायकेला खरसावां जिला के भी संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे ।
रविवार को पिकनिक स्पॉट पर्यटकों से रहा गुलजार-बुरुडीह डैम में पिकनिक मानते लोगों ने खूब की मस्ती।
पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
नए साल के आगमन से पहले ही लोगों ने अपने दोस्तों परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए बुरुडीह डैम एवं नरवा डैम के हसीन वादियों में पहुंचने लगे हैं। रविवार को लोग अपने दोस्त सगे-संबंधियों के साथ पिकनिक मनाने के लिये क्षेत्र के अलग-अलग लोकेशन पर पहुंच कर जमकर मस्ती की। पर्यटन स्थल बुरुडीह डैम,नरवा डैम में रविवार को सबसे अधिक भीड़ रही। गालूडीह बैराज सहित अन्य पिकनिक स्पॉट में बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाते देखे गये।
रविवार को बुरुडीह डैम में मुसाबनी के दर्जनों लोग सामूहिक पारिवारिक पिकनिक मनाने पहुंचे थे। पिकनिक के बहाने लोगों ने खूब मस्ती की बुरुडीह डैम की हसीन वादियों में वोटिंग एवं फोटोग्राफी का लोगों ने खूब आनंद उठाया।पिकनिक स्पॉट पर लोगों ने नाचने गाने के साथ लजीज व्यंजन बनाकर एक-दूसरे के साथ भोजन का आनंद वन भोज के रुप मे लिया।
पिकनिक में पहुंचे महिलाएं युवक युवती व बच्चों ने सेल्फी लेते देखे गए। नरवा व बुरुडीह पिकनिक स्पॉट पर डांस व सैर-सपाटे का चारो ओर नजारा दिख रहा था।रविवार को स्कूली बच्चों को भी पिकनिक का आनंद उठाते देखा गया। मुसाबनी फैमिली पिकनिक में साहित्य सांस्कृति संघ,जगन्नाथ महिला समिति, भोलेनाथ इण्डेन के संचालक संगीता मंडल, कमलकान्त मंडल, प्रतिभा साव सहित दर्जनों गन्यमान्य लोग शामिल हुए।