ईचागढ़ गांव में हादसा पीड़ित परिवार से मिलीं विधायक सविता महतो किया आर्थिक सहयोग

ईचागढ़ गांव में हादसा पीड़ित परिवार से मिलीं विधायक सविता महतो किया आर्थिक सहयोग

सरायकेला/ईचागढ़

सोनू कुमार सिंह

ईचागढ़ प्रखंड के ईचागढ़-डुमटांड़ मुख्य मार्ग स्थित घुनियापाड़ा में बालू लदे अनियंत्रित टीपर के घर में घुस जाने की घटना के बाद शुक्रवार को ईचागढ़ की विधायक सविता महतो पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं। उन्होंने मंगल राजवार के घर जाकर हादसे की जानकारी ली तथा दुर्घटना में घायल बच्चों और परिजनों का हालचाल जाना।

विधायक ने दुर्घटना में क्षतिग्रस्त कच्चे मकान का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार को तत्काल राहत के रूप में तिरपाल उपलब्ध कराया। साथ ही उन्होंने आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया।

इस दौरान उन्होंने परिवार को हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं।

इस दौरान विधायक ने संबंधित प्रखंड कर्मियों को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवार को आपदा राहत योजना के तहत शीघ्र सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें जल्द से जल्द राहत मिल सके।विधायक के आगमन पर स्थानीय ग्रामीणों ने भी घटना की जानकारी देते हुए प्रशासन से दुर्घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की।

इस अवसर पर झामुमो केंद्रीय सदस्य काबलू महतो, प्रखंड अध्यक्ष निताई उरांव, सपन आदित्यदेव, पशुपति बागची, समेत प्रखंड कर्मी एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।

पांच चोरी की बाइक के साथ तीन गिरफ्तार

पांच चोरी की बाइक के साथ तीन गिरफ्तार

सरायकेला

सरायकेला थाना पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से चोरी की एक पंजीकृत हीरो स्प्लेंडर बाइक समेत कुल पांच मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं। पुलिस के अनुसार गिरोह जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी बाइक चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था।

पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित एसआईटी ने तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए अंसारी उर्फ तेजा, करण बास्के और कृष्णा नाथ उर्फ दुखु को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने बाइक चोरी की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उनकी निशानदेही पर चोरी की बाइक बरामद की गई। पुलिस अन्य चोरी की घटनाओं में भी उनकी संलिप्तता की जांच कर रही है।

यह मामला सरायकेला थाना कांड संख्या-61/2026 से जुड़ा है। 27 जुलाई को लाल चांद सरदार की लिखित शिकायत पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

शिकायत में 17 जुलाई की रात घर के सामने से उनकी हीरो स्प्लेंडर (रजिस्ट्रेशन संख्या JH22F-8686) चोरी होने की बात कही गई थी।

गिरफ्तार आरोपी-अंसारी उर्फ तेजा (26 वर्ष), कमलपुर, सीनी ओपी करण बास्के (22 वर्ष), पदमपुर, कांड्रा थाना
कृष्णा नाथ उर्फ दुखु (22 वर्ष), लखीपुर, राजनगर थाना
पुलिस ने आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जानकारी दी है। अंसारी उर्फ तेजा के खिलाफ पूर्व में कई चोरी और अन्य मामलों में केस दर्ज हैं, जबकि करण बास्के पर भी विभिन्न थानों में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी कर रही है।

ग्लोरिया इंजीनियरिंग हादसे के घायलों से मिले झामुमो नेता गणेश महाली, TMH पहुंचकर जाना हाल-समाचार, परिजनों को दिया भरोसा।

ग्लोरिया इंजीनियरिंग हादसे के घायलों से मिले झामुमो नेता गणेश महाली, TMH पहुंचकर जाना हाल-समाचार, परिजनों को दिया भरोसा।

सरायकेला/आदित्यपुर

आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित ग्लोरिया इंजीनियरिंग में हुए हादसे में घायल मजदूरों से मिलने झामुमो नेता गणेश महाली TMH अस्पताल पहुंचे।

TMH के वार्ड में भर्ती घायल मजदूरों से उन्होंने एक-एक कर मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और चिकित्सकों से उनके इलाज की पूरी जानकारी ली। इस दौरान घायलों के परिजनों से मिलकर उन्होंने ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

मौके पर मौजूद लोगों से बात करते हुए गणेश महाली ने कहा कि –
“झामुमो हमेशा मजदूरों के साथ खड़ी है। मजदूर ही हमारे राज्य की रीढ़ हैं, उनके साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज मिले और कंपनी प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटे, यह हम सुनिश्चित करेंगे।”
उन्होंने कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि सभी घायल मजदूरों के इलाज का पूरा खर्च कंपनी वहन करे और नियमानुसार उचित मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रशासन से हादसे की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।

गणेश महाली के इस मानवीय कदम की अस्पताल में मौजूद परिजनों और आम लोगों ने काफी सराहना की। लोग कह रहे थे कि चुनाव के समय नहीं, बल्कि दुख की घड़ी में जो नेता साथ खड़ा हो, वही सच्चा जननेता होता है।

फोटो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे वह खुद बेड के पास जाकर घायल मजदूरों की स्थिति देख रहे हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।

झामुमो कार्यकर्ताओं ने कहा – गणेश महाली सिर्फ एक नेता नहीं, गरीब-मजदूरों की आवाज हैं और हमेशा उनकी लड़ाई लड़ते रहेंगे।

नीमडीह थाना क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन के विरुद्ध अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी ने चलाया संयुक्त छापेमारी अभियान , 500 सीएफटी अवैध गिट्टी लदा हाईवा जप्त।

नीमडीह थाना क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन के विरुद्ध अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी ने चलाया संयुक्त छापेमारी अभियान , 500 सीएफटी अवैध गिट्टी लदा हाईवा जप्त।

सरायकेला/नीमडीह

उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ के निर्देशानुसार जिले में अवैध खनन एवं खनिज परिवहन के विरुद्ध निरंतर चलाए जा रहे अभियान के तहत बुधवार को नीमडीह थाना क्षेत्र में अंचलाधिकारी, नीमडीह श्री अभय कुमार द्विवेदी एवं थाना प्रभारी श्री दिलसन बिरुआ के नेतृत्व में संयुक्त छापेमारी अभियान संचालित किया गया।

छापेमारी के दौरान लगभग 500 सीएफटी अवैध पत्थर (गिट्टी) लदा एक हाइवा जब्त किया गया। प्रारंभिक जांच में वाहन पर खनिज परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर नीमडीह थाना को अग्रेतर विधिक कार्रवाई एवं प्राथमिकी दर्ज करने हेतु सुपुर्द कर दिया गया।

उपायुक्त, सरायकेला खरसावां श्री नितिश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनन, भंडारण एवं खनिज परिवहन के विरुद्ध अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा तथा ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध खनिज नियमावली एवं अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उपायुक्त द्वारा आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि अवैध खनिज परिवहन अथवा खनन की सूचना संबंधित प्रशासनिक अथवा पुलिस पदाधिकारियों को उपलब्ध कराकर अभियान में सहयोग करें।

दुखद निधन: पत्रकार गणेश प्रसाद के छोटे भाई की पत्नी का स्वर्गवास।

दुखद निधन: पत्रकार गणेश प्रसाद के छोटे भाई की पत्नी का स्वर्गवास।

जमशेदपुर/मुसाबनी

अत्यंत दुख के साथ सूचित किया जाता है कि वरिष्ठ पत्रकार गणेश प्रसाद जी के छोटे भाई की धर्मपत्नी का स्वर्गवास हो गया है।

उनके निधन से परिवार सहित पूरे पत्रकार जगत में शोक की लहर है। वह एक सरल, सौम्य और मिलनसार स्वभाव की महिला थीं।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

ओवरलोड हाईवा-टिप ट्रेलर से NH-33, 32 पर मौत का सफर, आरटीओ-डीटीओ की कार्यशैली पर सवाल।

ओवरलोड हाईवा-टिप ट्रेलर से NH-33, 32 पर मौत का सफर, आरटीओ-डीटीओ की कार्यशैली पर सवाल।

सरायकेला

18 टन की जगह 48 टन, 40 टन की जगह 80 टन लादकर दौड़ रही गाड़ियां, हर महीने “पगड़ी” का आरोप

झारखंड में सड़कों की बदहाली और सड़क दुर्घटनाओं के लिए ओवरलोडेड वाहन जिम्मेदार माने जा रहे हैं। खासकर NH-33 और NH-32 पर क्षमता से 3 गुना तक माल लादकर दौड़ रहे हाईवा और टिप ट्रेलर आम लोगों के लिए काल बनते जा रहे हैं।

नियम ताक पर, सड़क पर खतरा
परिवहन नियमों के अनुसार NH-33 और NH-32 पर किसी भी मालवाहक वाहन की अधिकतम क्षमता 18 टन निर्धारित है। लेकिन हकीकत में हाईवा में 15 टन की जगह 48 टन तक और टिप ट्रेलर में 40 टन की जगह 80 टन तक आयरन ओर लादकर सरपट दौड़ाया जा रहा है।

ओवरलोड के कारण न सिर्फ सड़कें कुछ ही महीनों में गड्ढों में तब्दील हो रही हैं, बल्कि वाहनों का नियंत्रण भी मुश्किल हो गया है। तेज रफ्तार और ब्रेक फेल होने से रोजाना छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। राहगीरों और आम नागरिकों की जान जोखिम में है।

आरटीओ-डीटीओ और ट्रैफिक पुलिस की भूमिका सवालों में* 
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्षमता से अधिक लोड लेकर वाहन सड़क पर कैसे उतर रहे हैं? सूत्रों के अनुसार ओवरलोडिंग के बदले हर महीने हाईवा से 8 हजार रुपये और टिप ट्रेलर से 15 हजार रुपये तक “पगड़ी” वसूली जाती है। इसी कारण कानून व्यवस्था लागू करने वाला सिस्टम ही ओवरलोडिंग को बढ़ावा दे रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति होती है। अंडर-लोड के बजाय ओवर-लोड वाहनों को खुलेआम अनुमति मिल रही है।

सड़कें टूटीं, दुर्घटनाएं बढ़ीं
ओवरलोड वाहनों के दबाव से NH-33 और NH-32 समेत जिला की कई सड़कें उखड़ गई हैं। जगह-जगह गड्ढे, उड़ती धूल और टूटे डामर से वाहन चालकों को दुर्घटना का डर हर पल सताता है। दोपहिया चालक और पैदल यात्री सबसे अधिक प्रभावित हैं।

आम जनता की मांग
लोगों का कहना है कि जब तक ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, सड़क दुर्घटनाएं और सड़कों की बदहाली नहीं रुकेगी। आम नागरिकों और राहगीरों ने जिला प्रशासन, आरटीओ, डीटीओ और ट्रैफिक पुलिस से मांग की है कि:

1. सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर वजन कांटा लगाकर सघन जांच हो।
2. ओवरलोड वाहनों पर भारी जुर्माना और वाहन जब्ती की कार्रवाई हो।
3. “पगड़ी” व्यवस्था पर अंकुश लगाकर दोषी अधिकारियों-कर्मियों पर कार्रवाई हो।

फिलहाल ओवरलोड के कारण सड़कें ही नहीं, लोगों का भरोसा भी टूट रहा है। अब देखना है कि प्रशासन इस “मौत के कारोबार” पर कब लगाम लगाता है।

आर्थिक संकट से जूझ रहे राशन डीलर, लंबित कमीशन के भुगतान में हो रही आनाकानी : फूलकांत झा।

आर्थिक संकट से जूझ रहे राशन डीलर, लंबित कमीशन के भुगतान में हो रही आनाकानी : फूलकांत झा।

सरायकेला/गम्हरिया

झारखंड पीडीएस (PDS) संघ के प्रदेश सचिव, कोल्हान संयोजक एवं सरायकेला-खरसावां जिला अध्यक्ष फूलकांत झा ने जनवितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े राशन डीलरों की गंभीर समस्याओं की ओर राज्य सरकार एवं खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया है।

फूलकांत झा ने कहा कि राज्य के अनेक राशन डीलरों का कमीशन पिछले लगभग एक वर्ष से लंबित पड़ा हुआ है, जिसके कारण वे गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा का खर्च तथा जनवितरण दुकान का संचालन करना उनके लिए दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एक ओर विभाग द्वारा ई-केवाईसी शत-प्रतिशत पूरा कराने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर डीलरों के लंबित कमीशन के भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट समय-सीमा या आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। इसके बावजूद राशन डीलर कोल्हू के बैल की तरह लगातार मेहनत करते हुए समय पर लाभुकों तक राशन पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं और पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

फूलकांत झा ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों का ध्यान केवल निरीक्षण, शिकायतों की समीक्षा एवं कार्रवाई तक सीमित होकर रह गया है, जबकि डीलरों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित पहल दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि झारखंड सरकार जनवितरण प्रणाली को पारदर्शी, सुदृढ़ और प्रभावी बनाना चाहती है, तो उसे राशन डीलरों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होना होगा तथा लंबित कमीशन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना होगा।

उन्होंने अंत में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जनवितरण प्रणाली के डीलरों की स्थिति “पानी में मीन प्यासी” जैसी हो गई है। जो डीलर दिन-रात कोल्हू के बैल की तरह मेहनत कर आम लोगों तक खाद्यान्न पहुंचा रहे हैं, वही आज अपने मेहनताने और अधिकार के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर योग साधकों का सम्मान।

गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर योग साधकों का सम्मान।

सरायकेला/आदित्यपुर

दिनांक 28 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या के अवसर पर पतंजलि योग समिति एवं पतंजलि महिला योग समिति के संयुक्त तत्वावधान में सरायकेला-खरसावाँ जिले के आदित्यपुर स्थित विवेक विहार कॉलोनी कम्युनिटी हॉल में सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर पर योग के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं निःस्वार्थ सेवा देने वाले अनेक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया तथा इंजीनियर विपेंद्र कुमार राय, देवेश चौहान सहित महिला एवं पुरुष सहयोग शिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से पतंजलि महिला योग समिति की राज्य प्रभारी सुधा झा, जिला प्रभारी बीना बर्नवाल, सरायकेला जिला की कोषाध्यक्ष माधुरी सिंह, भारत स्वाभिमान के पूर्व जिला प्रभारी नंदकिशोर झा, रीता झा एवं निशी बर्नवाल सहित अनेक योग साधकों एवं कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सरायकेला-खरसावाँ जिले में पतंजलि योग समिति एवं पतंजलि महिला योग समिति के माध्यम से लगभग 100 से अधिक नियमित निःशुल्क योग कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं।

भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, प्रोफेशनल और ग्रेजुएट तैयार होने व रोजगार उपलब्धि में भारी गैप- रोजगार, शिक्षा और प्रशासन क़ी बड़ी नई चुनौती -समग्र व्यापक विश्लेषण।

भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, प्रोफेशनल और ग्रेजुएट तैयार होने व रोजगार उपलब्धि में भारी गैप- रोजगार, शिक्षा और प्रशासन क़ी बड़ी नई चुनौती -समग्र व्यापक विश्लेषण।

भारत@2047 के लक्ष्य के लिए युवाओं के लिए शासन से आगे बढ़कर युवाओं के साथ शासन की अवधारणा अपनानी होगी

परीक्षा-पेपर लीक आंदोलन से कौशल-अंतर, उद्योग- अनुकूल शिक्षा और युवा, गतिशील शासन व्यवस्था तक -क्या भारत में प्रशासन की नई पीढ़ी का आरंभ हो रहा है? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर वर्ष 2026 में भारत एक ऐसे ऐतिहासिक परिवर्तनकाल से गुजर रहा है,जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था,साइबर सुरक्षा,हरित प्रौद्योगिकी और डेटा- आधारित शासन ने शिक्षा,रोजगार, उद्योग तथा प्रशासन की पारंपरिक संरचनाओं को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।आज देश और विश्व में बड़ी संख्या में इंजीनियर, वकील, डॉक्टर,प्रबंधन विशेषज्ञ, तकनीकी पेशेवर तथा विभिन्न विषयों के स्नातक तैयार हो रहे हैं,लेकिन मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि डिग्री प्राप्त करने और रोजगार के लिए वास्तव में सक्षम बनने के बीच एक गंभीर अंतर दिखाई देता है। अनेक युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप व्यावहारिक कौशल,तकनीकी दक्षता, समस्या- समाधान क्षमता,संवाद- कौशल टीमवर्क, डिजिटल समझ तथा बदलती तकनीक के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन करने की क्षमता में पीछे रह जाते हैं। दूसरी ओर उद्योग जगत को प्रशिक्षित और कार्य के लिए तैयार युवा नहीं मिलते। यही स्थिति शिक्षा और रोजगार के बीच नहीं, बल्कि डिग्री और दक्षता, ज्ञान और प्रयोग, युवा आकांक्षा और संस्थागत क्षमता तथा सरकारी नीति और जमीनी परिणाम के बीच मौजूद व्यापक अंतर को दर्शाती है। इसी पृष्ठभूमि में 28 जुलाई 2026 को भारतीय पीएम द्वारा केंद्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता विशेष महत्व रखती है। बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों और विभागों की भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया गया। प्रधानमंत्री ने सरकारी व्यवस्था में विभागीय स्तर पर मौजूद क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर बाधाओं को कम करने, बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा शासन को अधिक युवा, गतिशील नवाचारी और भविष्य के अनुरूप बनाने पर बल दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार को बदलती चुनौतियों और नए अवसरों के अनुसार निरंतर स्वयं को विकसित करना चाहिए।यह संदेश केवल प्रशासनिक सुधार का सामान्य विचार नहीं है, बल्कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और युवा अपेक्षाओं के बीच शासन की नई भूमिका का संकेत है।

साथियों, 28 जुलाई 2026 की उच्चस्तरीय बैठक,उद्योग और शिक्षा के बीच कौशल- अंतर इंटर्नशिप की आवश्यकता एआई युग की नई रोजगार चुनौतियां, परीक्षा- पेपर लीक के विरुद्ध युवा आंदोलन, डिजिटल लोकतंत्र का विस्तार और प्रशासन को युवा, गतिशील तथा अनुकूलनशील बनाने की आवश्यकता ये सभी अलग- अलग विषय नहीं हैं। ये भारत के भविष्य के एक ही बड़े प्रश्न के विभिन्न आयाम हैं क्या देश की शिक्षा, अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था युवा पीढ़ी की बदलती आकांक्षाओं के अनुरूप स्वयं को समय पर बदल पाएगी? भारत के युवाओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे केवल रोजगार नहीं, बल्कि निष्पक्ष अवसर चाहते हैं; केवल डिग्री नहीं, बल्कि उपयोगी कौशल चाहते हैं; केवल डिजिटल सुविधा नहीं, बल्कि डिजिटल अधिकार और पारदर्शिता चाहते हैं; केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध परिणाम चाहते हैं। सरकार के सामने चुनौती केवल अधिक योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि योजनाओं को परिणामों से जोड़ने की है। यदि शिक्षा उद्योग से जुड़े, इंटर्नशिप वास्तविक अनुभव दे, कौशल भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप हों, परीक्षा प्रणाली विश्वसनीय बने, प्रशासन संवादशील हो और युवाओं को नीति-निर्माण में भागीदारी मिले, तो भारत की युवा शक्ति विश्व की सबसे बड़ी विकास-शक्ति बन सकती है।
साथियों,आज विश्व की अर्थव्यवस्था केवल श्रम- आधारित नहीं,बल्कि ज्ञान,डेटा,नवाचार और कौशल- आधारित अर्थव्यवस्था बन रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कई कार्यों को तेज, स्वचालित और अधिक सटीक बना रही है।इंजीनियरिंग में डिजाइन, कोडिंग,परीक्षण और उत्पादन की प्रक्रियाएं बदल रही हैं; कानून के क्षेत्र में कानूनी शोध, दस्तावेजों का विश्लेषण और न्यायिक डेटा का उपयोग तकनीक से प्रभावित हो रहा है; चिकित्सा में निदान- सहायता डिजिटल स्वास्थ्य और व्यक्तिगत उपचार के नए मॉडल विकसित हो रहे हैं; बैंकिंग में एल्गोरिदम,फिनटेक और साइबर सुरक्षा का महत्व बढ़ रहा है। इसलिए भविष्य में केवल किसी विषय की डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। युवा को अपने मूल विषय के साथ डिजिटल साक्षरता, एआई की समझ, डेटा विश्लेषण, नैतिक निर्णय क्षमता, रचनात्मकता और मानव-केंद्रित समस्या- समाधान की दक्षता भी सटीकता से विकसित करनी होगी।

साथियों, भारत में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार होने के बावजूद रोजगार की उपलब्धता और कौशल की मांग के बीच अंतर पर लगातार चर्चा होती रही है। एक अध्ययन में भारत में प्रतिवर्ष लगभग नौ लाख इंजीनियर तैयार होने और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार- वृद्धि की तुलना में स्नातकों की संख्या अधिक होने का प्रश्न उठाया गया है। अध्ययन ने यह भी संकेत दिया कि केवल पारंपरिक नौकरी- आधारित मॉडल पर्याप्त नहीं हो सकता और तकनीकी शिक्षा को उद्यमिता स्थानीय नवाचार तथा नए प्रकार के सूक्ष्म उद्यमों से जोड़ने की आवश्यकता है।हालांकि ऐसे आंकड़ों को विभिन्न संस्थानों और क्षेत्रों की अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार समझना चाहिए, लेकिन मूल चुनौती स्पष्ट है उच्च शिक्षा की संख्या बढ़ना अपने आप में रोजगार- योग्यता की गारंटी नहीं है।यही कारण है कि पीएम द्वारा उद्योग जगत के सहयोग से नए और कौशल- आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता पर दिया गया जोर अत्यंत प्रासंगिक है। शिक्षा संस्थानों में पाठ्यक्रम कई बार उद्योग की बदलती आवश्यकताओं की तुलना में धीमी गति से बदलते हैं। जब तक विश्वविद्यालय किसी नई तकनीक को पाठ्यक्रम में शामिल करते हैं, तब तक उद्योग अगले स्तर की तकनीक अपनाना शुरू कर देता है। इसलिए पाठ्यक्रम निर्माण केवल विश्वविद्यालयों या नियामक संस्थाओं का विषय नहीं रह सकता। उद्योग, शिक्षा संस्थान, शोध संगठन, स्टार्टअप, स्थानीय प्रशासन और युवाओं को मिलकर भविष्य के कौशल की रूपरेखा तैयार करनी होगी। 2025 की सरकारी समीक्षा के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रमों में एआई, इंडस्ट्री 4.0, हरित रोजगार और डिजिटल सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष पाठ्यक्रम तथा नई भूमिका- आधारित प्रशिक्षण संरचनाएं विकसित की गई हैं। अब आवश्यकता इन पहलों को व्यापक, गुणवत्तापूर्ण और परिणाम-आधारित बनाने की है।
साथियों, कौशल विकास का अर्थ केवल कुछ सप्ताह या महीनों का प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। वास्तविक कौशल वह है जिसे युवा कार्यस्थल पर प्रयोग कर सके, समस्या का समाधान कर सके और बदलती परिस्थितियों में विकसित कर सके। उदाहरण के लिए, एक इंजीनियर को केवल तकनीकी सिद्धांत नहीं, बल्कि वास्तविक परियोजना,टीम में कार्य, उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण और ग्राहक की आवश्यकता को समझना चाहिए। एक विधि स्नातक को केवल कानून की धाराएं नहीं, बल्कि डिजिटल कानूनी शोध, दस्तावेज निर्माण, मध्यस्थता, साइबर कानून, डेटा संरक्षण तथा न्याय तक पहुंच की व्यावहारिक समझ भी होनी चाहिए। इसी प्रकार प्रबंधन स्नातक को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि डेटा, बाजार, उद्यमिता और संगठनात्मक निर्णय की क्षमता विकसित करनी होगी। इसलिए शिक्षा को परीक्षा में उत्तर देने से आगे बढ़ाकर वास्तविक जीवन की समस्या हल करने की दिशा में ले जाना आवश्यक है। इंटर्नशिप इस अंतर को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को वास्तविक व्यावसायिक वातावरण का अनुभव प्रदान करना और शिक्षा तथा उद्योग की आवश्यकताओं के बीच सेतु बनाना है। योजना के अंतर्गत युवाओं को 12 महीने तक कार्यस्थल अनुभव उपलब्ध कराने की संरचना बनाई गई है। लेकिन इंटर्नशिप की सफलता केवल अवसरों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। यह देखना होगा कि कितने युवा वास्तव में प्रशिक्षण पूरा करते हैं, उन्हें कितना व्यावहारिक ज्ञान मिलता है, कितनों को रोजगार या उद्यमिता का अवसर मिलता है और क्या इंटर्नशिप के बाद उनकी आय तथा रोजगार-क्षमता में सुधार होता है। इंटर्नशिप को केवल औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि प्रशिक्षक, वास्तविक परियोजना, कौशल मूल्यांकन और करियर मार्गदर्शन से जोड़ना होगा।

साथियों, हाल के छात्र आंदोलनों और उनसे उत्पन्न राजनीतिक तथा प्रशासनिक प्रभावों को कुछ विशेषज्ञ युवा शक्ति की बढ़ती लोकतांत्रिक भूमिका के रूप में देख रहे हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा -सुधार की मांगों तथा संसद और सार्वजनिक विमर्श पर आंदोलन के प्रभाव को यह संकेत माना जा सकता है कि युवा अब केवल नीतियों के निष्क्रिय लाभार्थी नहीं रहना चाहते। वे पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध समाधान की मांग कर रहे हैं। हालांकि किसी भी आंदोलन के राजनीतिक परिणाम का अंतिम मूल्यांकन तथ्यों, संस्थागत निर्णयों और दीर्घकालिक सुधारों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। किसी एक घटना को सीधे किसी सरकार की राजनीतिक सुरक्षा या राजनीतिक असुरक्षा का निश्चित प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। फिर भी यह कहा जा सकता है कि सरकारों के लिए युवाओं की शिकायतों को समय पर सुनना, संवाद स्थापित करना और सुधारों के परिणाम दिखाना लोकतांत्रिक स्थिरता तथा जनविश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।

साथियों, युवा आंदोलन का सबसे बड़ा संदेश संभवतः यह है कि शासन को प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि पूर्वानुमान -आधारित होना चाहिए। यदि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी कमजोरी है, तो समस्या उत्पन्न होने के बाद जांच करने के बजाय पहले से सुरक्षा परीक्षण, स्वतंत्र ऑडिट, एन्क्रिप्शन, नियंत्रित पहुंच, साइबर निगरानी और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। यदि रोजगार के लिए कौशल की कमी है, तो युवाओं के स्नातक बनने के बाद प्रशिक्षण देने के बजाय विद्यालय और महाविद्यालय स्तर से ही उद्योग-अनुकूल कौशल विकसित किए जाने चाहिए। यदि युवाओं में किसी नीति को लेकर भ्रम है, तो विवाद बढ़ने के बाद स्पष्टीकरण देने के बजाय नीति निर्माण के समय से ही सार्वजनिक संवाद होना चाहिए। यही आधुनिक, संवेदनशील और दूरदर्शी प्रशासन की पहचान है।आज की समस्याएं एक मंत्रालय या एक विभाग तक सीमित नहीं रहतीं। उदाहरण के लिए, युवा रोजगार का प्रश्न शिक्षा कौशल उद्योग वित्त प्रौद्योगिकी सामाजिक सुरक्षा और राज्य सरकारों से जुड़ा है। इसलिए संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण आवश्यक है।

साथियों, भारत के सामने सबसे बड़ी संभावना उसकी युवा आबादी है, लेकिन जनसांख्यिकीय लाभांश तभी वास्तविक लाभ बनेगा जब शिक्षा गुणवत्तापूर्ण हो, कौशल बाजार की आवश्यकता से जुड़े हों, रोजगार के अवसर बढ़ें और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिले। हर युवा को सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है; इसलिए रोजगार की अवधारणा को व्यापक बनाना होगा। स्टार्टअप, सूक्ष्म उद्यम, स्थानीय डिजिटल सेवाएं, हरित उद्योग, कृषि- प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और सामाजिक उद्यमिता भविष्य के अवसर बन सकते हैं। युवाओं को नौकरी खोजने वाले के साथ-साथ रोजगार सृजक बनने के लिए भी तैयार करना होगा।भारत @ 2047 के लक्ष्य के लिए युवाओं के लिए शासन से आगे बढ़कर युवाओं के साथ शासन की अवधारणा अपनानी होगी। युवा नीति-निर्माण में केवल प्रतीकात्मक रूप से नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से शामिल हों। विश्वविद्यालयों, स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों, नीति मंचों और डिजिटल परामर्श प्रणालियों में युवाओं के सुझाव लिए जाएं। उनकी राय पर क्या निर्णय हुआ, इसका सार्वजनिक उत्तर भी दिया जाए। इससे युवाओं को केवल विरोध करने का नहीं, बल्कि समाधान निर्माण का अवसर मिलेगा।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका सटीक विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एआई युग में भारत की सफलता इस बात से निर्धारित नहीं होगी कि देश कितने इंजीनियर, वकील, प्रोफेशनल या स्नातक तैयार करता है, बल्कि इस बात से होगी कि उनमें से कितने युवा नवाचार कर सकते हैं, समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, नई तकनीक के साथ स्वयं को बदल सकते हैं, रोजगार और उद्यमिता के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं तथा लोकतांत्रिक शासन में रचनात्मक भागीदारी कर सकते हैं। यदि सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान और युवा मिलकर इस कौशल- अंतर को समाप्त करने की दिशा में कार्य करें, तो भारत में केवल डिजिटल इंडिया नहीं, बल्कि कौशल-संपन्न, रोजगार -सक्षम, नवाचारी और जवाबदेह भारत की नई पीढ़ी का निर्माण संभव होगा। यही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला और युवा शक्ति की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक उपलब्धि हो सकती है।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

ब्रेकिंग न्यूज: MVI कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा, बिना पैसे के नहीं होता एक भी काम।

ब्रेकिंग न्यूज: MVI कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा, बिना पैसे के नहीं होता एक भी काम।

पश्चिम सिंहभूम/चाईबासा

परिवहन विभाग का वो कार्यालय जहां आम जनता को ईमानदारी से सेवा मिलनी चाहिए, वहीं आज भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। MVI कार्यालय में हालात ये हैं कि बिना पैसे दिए आपकी फाइल को कोई हाथ तक नहीं लगाता।

जनता की जेब पर खुलेआम डाका

सूत्रों और पीड़ित लोगों से मिली जानकारी के अनुसार MVI ऑफिस में हर काम का रेट फिक्स है –
• लाइसेंस बनवाना हो तो 1500 से 3000 रुपये अलग से • फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए 2000 रुपये • गाड़ी का परमिट और कागजों में मामूली सुधार के लिए भी 500 से 1000 रुपये की वसूली  अगर आप ईमानदारी से लाइन में लगकर अपना काम कराना चाहते हैं, तो आपको महीनों तक दौड़ाया जाएगा। कभी सर्वर डाउन का बहाना, कभी साहब नहीं हैं, तो कभी कागज अधूरा है।

दलालों का राज, अफसर मौन

साथ ही सूत्र यह भी बताते हैं कि MVI कार्यालय के बाहर दलालों की फौज खड़ी रहती है। बिना दलाल के आप अंदर घुस भी नहीं सकते। आम आदमी का आरोप है कि ये दलाल सीधे अंदर के बाबुओं और अधिकारियों से मिले हुए हैं। जनता से लूटा गया पैसा नीचे से ऊपर तक बंटता है, इसलिए कोई सुनने वाला नहीं है।

एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मैं 15 दिन से चक्कर लगा रहा हूं। काउंटर पर बैठा बाबू सीधे मुंह बात नहीं करता। बगल वाले ने इशारा किया कि 2000 रुपये दो तो 10 मिनट में काम हो जाएगा। ये कैसी व्यवस्था है?”

सवाल ये उठता है कि जब सरकार डिजिटल इंडिया और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है, तो MVI जैसे सरकारी दफ्तरों में ये खुली लूट कैसे चल रही है? क्या जिला परिवहन पदाधिकारी और सरकार के आला अधिकारी इस भ्रष्टाचार से अनजान हैं? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?

“रोपनी का समय, किसान खेत में पसीना बहा रहे, सरायकेला-कृषि विभाग कार्यालय में फाइलें सो रही”

“रोपनी का समय, किसान खेत में पसीना बहा रहे, सरायकेला-कृषि विभाग कार्यालय में फाइलें सो रही”

सरायकेला

“मौसम साथ दे रहा, सरकार नहीं: सरायकेला-खरसावां में किसानों को बीज, दवा और सलाह से महरूम रखा गया“

“‘सेटिंग-गेटिंग’ से चल रही खेती? धान रोपनी में भी जागरूकता अभियान से वंचित रहे सरायकेला-खरसावां के किसान”

झारखंड में मानसून की अच्छी बारिश के बाद धान रोपनी का काम जोरों पर है। जिले के किसान सुबह से शाम तक अपने-अपने खेतों में धान रोप रहे हैं। मौसम भी किसानों का साथ दे रहा है। लेकिन इस महत्वपूर्ण समय में कृषि विभाग और प्रशासन का ध्यान किसानों की ओर नहीं है।

स्थानीय किसानों का आरोप है कि रोपनी से पहले बीज उपचार, उर्वरक का संतुलित उपयोग, कीट नियंत्रण और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग द्वारा कोई विशेष जागरूकता अभियान या किसान चौपाल नहीं लगाई गई। नतीजा ये है कि किसान पुराने तरीके से ही खेती करने को मजबूर हैं।

“सेटिंग-गेटिंग” का आरोप
कई प्रगतिशील किसानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ चंद “खास” लोगों तक ही पहुंच रहा है। बीज, दवा और अनुदान का वितरण पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा। आम और छोटे किसान विभाग के चक्कर काटकर थक जा रहे हैं लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल रही।

क्या कहते हैं किसान
गम्हरिया के किसान रामदेव महतो कहते हैं “हम 20 साल से धान लगा रहे हैं। हर साल रोपनी के समय कृषि पदाधिकारी गांव आते थे, नई तकनीक बताते थे। इस बार कोई नहीं आया। दवा की दुकानदार जो बताएगा वही करना पड़ रहा है।”

सरकारी दावों पर सवाल
एक तरफ राज्य सरकार  “किसान समृद्धि” की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सरायकेला-खरसावां जैसे कृषि प्रधान जिले में रोपनी के पीक सीजन में भी विभागीय उदासीनता देखने को मिल रही है।

मांग
किसान संगठनों ने उपायुक्त और जिला कृषि पदाधिकारी से मांग की है कि अविलंब प्रखंड स्तर पर किसान जागरूकता शिविर लगाए जाएं। PM किसान, बीज अनुदान और फसल बीमा की जानकारी घर-घर तक पहुंचाई जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से खेती हो सके और झारखंड की खेती बुलंदी पर पहुंचे।

यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो उपज पर असर पड़ना तय है।

आदित्यपुर में ब्राउन शुगर कारोबार पर पुलिस का बड़ा प्रहार,7.59 लाख नकद और 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद, आजाद अंसारी गिरफ्तार।

आदित्यपुर में ब्राउन शुगर कारोबार पर पुलिस का बड़ा प्रहार,7.59 लाख नकद और 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद, आजाद अंसारी गिरफ्तार।

सरायकेला/आदित्यपुर

एसपी के निर्देश अनुसार आदित्यपुर थाना पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए ब्राउन शुगर तस्करों के नेटवर्क का खुलासा किया। पुलिस ने राम मड़ैया बस्ती, मुस्लिम बस्ती समेत विभिन्न क्षेत्रों में सघन छापेमारी अभियान चलाकर 7 लाख 59 हजार 650 रुपये नकद तथा 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद की है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य आरोपी फरार हो गए।

पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस ने ब्राउन शुगर के पुराने आरोपी एवं फरार चल रहे जावेद अंसारी उर्फ लड्डू के घर पर छापेमारी की। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया। इसी बीच पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि घर की छत पर कुछ लोग नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त रुपयों का हिसाब-किताब कर रहे हैं।

वहीं सूचना के आधार पर जब पुलिस छत पर पहुंची तो वहां जाने वाला दरवाजा बाहर से बंद मिला। दरवाजा तोड़कर पुलिस जैसे ही ऊपर पहुंची, वहां मौजूद लोग छज्जे और पाइप के सहारे भागने लगे। भागते समय आरोपियों ने रुपये से भरे कई झोले सड़क पर फेंक दिए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। मौके से आजाद अंसारी को गिरफ्तार किया गया, जिसकी तलाशी में 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद हुई। जब्त नकदी की गिनती करने पर कुल 7,59,650 रुपये मिले।

एसपी मनोज स्वर्गियारी ने बताया कि जांच में कपाली के मिन्नत नगर, जुगसलाई के आजाद नगर तथा आदित्यपुर मुस्लिम बस्ती को इस नेटवर्क का प्रमुख ठिकाना पाया गया है। मामले में इमरान, जावेद अंसारी उर्फ लड्डू, राशिद खातून, विपुल कर्मकार, रोहित कर्मकार उर्फ सिपुल तथा प्रकाश पटेल की संलिप्तता सामने आई है। सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

एसपी ने कहा कि आदित्यपुर क्षेत्र में ड्रग्स कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा। उन्होंने इस कार्रवाई में आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार एवं उनकी टीम की सराहना की। थाना प्रभारी अंजनी कुमार ने कहा कि ब्राउन शुगर के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस की मुहिम लगातार जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि पुलिस जवानों को उपलब्ध कराई गई मोटरसाइकिलों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे पुलिस टीम घटनास्थल तक तेजी से पहुंचकर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई कर पा रही है।

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