उपायुक्त की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया।
सरायकेला-खरसावां
प्राप्त आवेदनों के त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश…
समाहरणालय भवन स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों, अंचलों एवं नगर क्षेत्रों से आए नागरिकों द्वारा प्रस्तुत जन-अभ्यावेदनों को सुनते हुए उपायुक्त ने प्रत्येक मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। आवेदकों ने अपने–अपने क्षेत्रों में उत्पन्न विविध जनसमस्याओं, आधारभूत सुविधाओं की कमी तथा कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहने की स्थिति से उपायुक्त को अवगत कराया।
जनता दरबार में प्रस्तुत प्रमुख प्रकरणों में जनगढना मे अनियमिता बरतने पर आपत्ति करने के सबंध मे,नीमडीह प्रखंड से आये गुलाम मुस्तफ़ा ने अपने ही जमींन पर बने विद्यालय मे रोजगार के सम्बन मे, खरसावां प्रखंड मे अंचल द्वारा प्रशासन के सहयोग से सीमांकन करने के सम्बन्ध मे मामले भी सामने आए। इसके अतिरिक्त ग्राम प्रधानों के सम्मान राशि का नियमित एवं समयबद्ध भुगतान, सरायकेला नगर क्षेत्र के हाट बाजार में शुक्रवार को लगने वाले भीषण जाम की समस्या, तथा हाउसिंग बोर्ड, आदित्यपुर की ली गई भूमि पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायतें भी दर्ज की गईं। साथ ही भूमि संबंधित विभिन्न मामलों समेत विभिन्न विभाग से सम्बन्धित आवेदन भी प्राप्त हुए।
उपायुक्त ने विभागीय एवं अंचल स्तरीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता दरबार में प्राप्त सभी आवेदनों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में स्थलीय सत्यापन आवश्यक है, वहाँ संबंधित अधिकारी त्वरित निरीक्षण कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन उपलब्ध कराएँ, ताकि जनसमस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि जनसुविधा एवं जनकल्याण से संबंधित योजनाओं के लंबित मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए तथा पात्र लाभुकों को समय पर लाभ उपलब्ध कराना प्रत्येक अधिकारी की जवाबदेह जिम्मेदारी है।
रामकृष्णा फाउंडेशन के CSR बैनर तले रामकृष्णा फोर्जिंग्स लिमिटेड, प्लांट–7, दुगनी में विशाल रक्तदान शिविर आयोजित।
सरायकेला/खरसावां
रामकृष्णा फाउंडेशन के CSR बैनर तले तथा एमजीएम अस्पताल के सहयोग से रामकृष्णा फोर्जिंग्स लिमिटेड के प्लांट–7, दुगनी परिसर में एक विशाल रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में कंपनी के कर्मचारियों एवं सहयोगियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कुल 544 यूनिट रक्तदान कर मानवता की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रक्तदान शिविर का उद्घाटन सिविल सर्जन, चाईबासा डॉ. सरयू प्रसाद सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर एमजीएम अस्पताल एवं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक श्री नकुल कुमार चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। सिविल सर्जन ने रक्तदान शिविर की व्यवस्थाओं को देखा एवं रक्तदाताओं से बातचीत भी की। उन्होंने रामकृष्णा फोर्जिंग लिमिटेड द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर को अभूतपूर्व बताया एवं रक्तदाताओं के लिए किये गए व्यवस्थाओं की मुक्त कंठ से प्रसंशा की।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रामकृष्णा फोर्जिंग्स लिमिटेड के कॉरपोरेट लीगल हेड दिनेश पारिख, कॉरपोरेट सेफ्टी हेड नवीण सिन्हा, रामकृष्णा कास्टिंग लिमिटेड के कॉरपोरेट सेफ्टी हेड संजय कुमार तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि मोहन सिन्हा उपस्थित रहे।
शिविर के सफल संचालन में मानव संसाधन प्रमुख रवि राजहंस, सेफ्टी इंचार्ज बासुकी नाथ झा, सेफ्टी ऑफिसर प्रभात कुमार, देवेंद्र विश्वकर्मा, कुणाल श्रीवास्तव, रिषिराज सिंहदेव, जयदेव झांगेल, निहारिका, सरिका, बिदेश गांगुली, दित्य प्रकाश एवं ललन सिंह का विशेष योगदान रहा।
अतिथियों ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि रामकृष्णा फाउंडेशन द्वारा CSR गतिविधियों के अंतर्गत तथा एमजीएम अस्पताल के सहयोग से आयोजित इस प्रकार के रक्तदान शिविर समाज के प्रति कंपनी की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। कार्यक्रम का समापन सभी रक्तदाताओं, चिकित्सकीय टीम एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया।
(मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के सोड़ो पंचायत अंतर्गत बिस्टाटांड़ गांव में रविबार सुबह को जंगली हाथी द्वारा फसल को रौंद कर नष्ट कर दिया। बिस्टाटांड़ गांव निवासी किसान लक्ष्मण महतो और अधीर महतो के आलू की फसल को चट कर दिया।
ग्रामीण सह समाजसेवी निमाई चंद्र महतो ने बताया कि पिछले कोई दिनों से क्षेत्र में जंगली हाथी द्वारा उत्पात मचाया जा रहा है, जिससे किसान को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने वन विभाग से जंगली हाथी को इस क्षेत्र से भगाने और किसानों को जल्द मुआवाजा राशि भुगतान करने की मांग किया है।
22 वां एक दिवसीय डेढ़ लाख टंकियां फुटबॉल प्रतियोगिता में प्रेम होटल एन एच 33 ने किया खिताब पर कब्जा।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के टीकर हाईस्कूल मैदान में 22 वां एक दिवसीय डेढ़ लाख टंकिया फुटबॉल प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला नेताजी स्पोर्टिंग रेमता खुंटी एवं प्रेम होटल एन एच 33 के बीच खेला गया। प्रतियोगिता में प्रेम होटल एन एच 33 ने नेताजी स्पोर्टिंग रेमता खुंटी को पछाड़ कर खिताब पर कब्जा जमाया।
प्रथम विजेता टीम को डेढ़ लाख रुपए एवं ट्राफी , द्वितीय उप विजेता टीम को एक लाख 21 हजार रुपए एवं ट्राफी, तीसरे व चौथे स्थान पर रहे लालटु स्पोटिंग एवं डाक्टर स्पोर्टिंग चोगा को 25-25 हजार रुपए एवं ट्राफी देकर पुरस्कृत किया गया। खेल का उद्घाटन राजा प्रशांत कुमार आदित्यदेव राष्ट्रीय गीत एवं झंडा फहराकर किया गया। आयोजन समिति आर एफसी क्लब टीकर के द्वारा खेल मैदान, दर्शक दीर्घा एवं मंच को दुल्हन जैसा सजाया गया था।
प्रतियोगिता में विधायक सविता महतो, आजसू के केन्द्रीय महासचिव हरेलाल महतो, भाजपा नेता पाप्पु वर्मा आदि ने जनसमूह को संबोधित किया। मौके पर विधायक के भाई संजय महतो, प्रमुख गुरू पद मार्डी, खेल अध्यक्ष ललित मोहन घोष, सचिव दिवाकर कैवर्त, कोषाध्यक्ष गुरू दयाल शर्मा, अभिराम उरांव,बनमाली रजक, मुकेश गुप्ता, सुभाष महतो, अनिल सिन्हा, बासुदेव चटर्जी, श्यामापद, कार्तिक, परशुराम,खगेन्द्र प्रामाणिक,निमाई गोप, शक्ति महतो नरेंद्र गोप,मानिक घोष, राधानाथ, ताहिर अंसारी,फकीर प्रामाणिक, मधु गोप,भजोहरी महतो, मनोरंजन ठाकुर,फटीक गोराई, नकुल घोष, निर्मल गोराई आदि सदस्य उपस्थित थे।
दलदल में फंसे बीमार हाथी का इलाज के दौरान हुई मौत।
हाथीयों की मौत की संख्या में लगातार बढ़ोतरी से वन विभाग के पास बड़ी चुनौती।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो)
सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल वन क्षेत्र के नीमडीह प्रखंड के चातरमा गांव के कीचड़ नुमा खेत में गीरने से इलाज के दौरान करीब एक महीने से बीमारी से ग्रस्त एक हाथी की मौत हो गई। रविवार को पशु चिकित्सा पदाधिकारी का टीम द्वारा पोस्टमार्टम कर हाथी को बगल में ही दफनाया गया। हाथी की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने फुल अगरवत्ती से मृत हाथी का पूजा पाठ भी किया गया।मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को हाथी एक दलदल खेत में फंस गया और चाहकर भी दलदल से निकल नहीं पाया।
वन विभाग को सुचना मिलते ही रेंजर शशि प्रकाश रंजन,वन पाल राधारमण ठाकुर,राणा प्रताप, पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ के के चौधरी पहुंचे और हाथी चिकित्सकों का टीम द्वारा हाथी का इलाज प्रारंभ किया। वन पाल राधारमण ठाकुर से बात करने से बताया गया कि स्थानीय चिकित्सक एवं गुजरात के स्पेशल चिकित्सकों की टीम द्वारा हाथी का इलाज किया गया।
उन्होंने बताया कि 45 बोतल स्लाइन चढ़ाया गया। काफी प्रयास के बाद भी हाथी को बचाने में चिकित्सकों का दल नाकाम रहे।देर रात को हाथी की मौत हो गई। हांलांकि रात भर वन विभाग के पदाधिकारी घटनास्थल पर डटे रहे।बताया जा रहा है कि एक माह से बीमार चल रहे हाथी को ठीक करने के लिए 10 लाख रुपए वन विभाग द्वारा खर्च किया गया ।
दो वर्ष में 6 हाथीयों की विभिन्न घटनाओं से हुई है मौत।
दो वर्षों में ईचागढ, कुकड़ू एवं नीमडीह प्रखंड क्षेत्र में विभिन्न घटनाओं से 6 हाथियों की मौत हो गई है। वहीं बीते कई वर्षों के अंदर दर्जन भर हाथियों की मौत हो गई है। आए दिन हाथियों की विभिन्न कारणों से हो रही मौत वन विभाग की लापरवाही या तो हाथी मानव संघर्ष का नतीजा है,जो मृत्यु दर को रोकना वन विभाग के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा।
(मालखान महतो) शुक्रवार को भोमिक स्वास्थ्य कवरेज दिवस पर झालसा के तत्वधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकार सरायकेला खरसावां के सचिव तौसीफ मेराज के निर्देशानुसार ईचागढ़ प्रखंड के कस्तूरबा बालिका गांधी उच्च विद्यालय टिकर (ईचागढ़) में लीगल लिटरेसी क्लब के माध्यम से विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें उपस्थित सभी छात्र एवं छात्राओं को पीएलवी कार्तिक गोप ने संविधान से मिलने वाले अधिकार के बारे में, घरेलू हिंसा, डायन कुप्रथा एवं सरकार के विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई और कार्यक्रम का समापन किया गया इस कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षिका मसोमी महतो एवं विद्यालय के सभी बच्चे उपस्थित थे।
संयुक्त सचिव महावीर प्रसाद ने आकांक्षी प्रखंड मुसाबनी का किया दौरा।
पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
भारत सरकार के संयुक्त सचिव एवं आकांक्षी जिला पूर्वी सिंहभूम के केन्द्रीय प्रभारी महावीर प्रसाद अपने तीन दिवसीय पूर्वी सिंहभूम जिला प्रवास के दूसरे दिन आकांक्षी प्रखंड मुसाबनी में परियोजनाओं और संस्थानों का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की समीक्षा करते हुए कई आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर एसडीओ घाटशिला सुनील चंद्र, जिला कल्याण पदाधिकारी शंकराचार्य समद, बीडीओ सह सीओ मुसाबनी पवन कुमार व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
संयुक्त सचिव ने मुसाबनी प्रखंड के माटिगोड़ा पंचायत में आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निरीक्षण किया । मौके पर गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच, बच्चों का टीकाकरण, फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी ली और आवश्यक मार्गदर्शन दिया ।
वहीं मेड़िया पंचायत के नामोपाड़ा गांव स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र का निरीक्षण कर बच्चों के अन्नप्राशन, महिलाओं की गोद भराई रस्म में शामिल हुए तथा उचित पोषाहार अपनाने हेतु जागरूक किया। उन्होंने पोषण के 7 मुख्य इंडिकेटर्स, कुपोषित बच्चों की पहचान, उपचार, वजन जांच, फॉलो-अप एवं संपूर्ण देखभाल की व्यवस्था की विस्तृत जानकारी ली। पश्चिमी बादिया पंचायत स्थित शिवलाल प्रोजेक्ट हाई स्कूल में संयुक्त सचिव ने खेल एवं पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। स्कूल की प्रयोगशाला का निरीक्षण किया।
शिक्षकों से संवाद कर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा सुधार हेतु संभावित नवाचारों पर सुझाव सुने। साथ ही ड्रॉप आउट दर एवं उच्च कक्षा में ट्रांजिशन की स्थिति की जानकारी ली। संयुक्त सचिव ने बेहतर प्रशासनिक कार्यान्वयन, सेवा प्रदायगी में तेजी, समुदाय आधारित सहभागिता एवं बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया।
समाहरणालय परिसर से धान अधिप्राप्ति जागरूकता रथ को उपायुक्त ने किया रवाना।
सरायकेला-खरसावां
किसानों को पारदर्शी एवं सुचारु क्रय व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर।
समाहरणालय परिसर से उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह द्वारा जिले में धान अधिप्राप्ति संबंधी जागरूकता अभियान के तहत जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ जिले में संचालित कुल 27 धान अधिप्राप्ति केंद्रों की विस्तृत जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाएगा तथा किसानों को अधिप्राप्ति से संबंधित सभी आवश्यक प्रक्रियाओं से अवगत कराएगा।
इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा— “किसानों को पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध धान क्रय व्यवस्था उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी अधिप्राप्ति केंद्रों पर आवश्यक संसाधन एवं सुविधाएँ सुनिश्चित की गई हैं, ताकि खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हो सके।”
धान अधिप्राप्ति केंद्र सूची 👆🏼
उपायुक्त ने आगे कहा कि जागरूकता रथ के माध्यम से धान अधिप्राप्ति कार्यक्रम से जुड़ी सही एवं अद्यतन जानकारी गाँव-गाँव तक पहुँचेगी, जिससे किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न नहीं होगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अधिप्राप्ति केंद्रों का नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करें तथा किसानों के समय पर भुगतान की सुनिश्चितता बनाए रखें।
जिले में धान अधिप्राप्ति कार्य 15 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हो रहा है। जागरूकता रथ के माध्यम से किसानों को पंजीकरण प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, धान गुणवत्ता मानक, एवं निर्धारित दरों से संबंधित सूचनाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।साथ ही किसानों को समय पर पंजीकरण कराने हेतु प्रेरित किया जाएगा, ताकि वे अधिप्राप्ति प्रक्रिया में समयबद्ध रूप से भाग ले सकें और कोई भी पात्र किसान लाभ से वंचित न रहने पाए।
जागरूकता रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों में भ्रमण कर धान अधिप्राप्ति से संबंधित सूचनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करेगा तथा ऑडियो संदेश एवं प्रचार सामग्री के माध्यम से किसानों में जागरूकता बढ़ाएगा।
कार्यक्रम में जिला आपूर्ति पदाधिकारी पुष्कर सिंह मुंडा, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी सुरेन्द्र उरांव, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार, जिला सहकारिता पदाधिकारी, तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां का वार्षिक वन भोज सह मिलन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न।
सरायकेला/आदित्यपुर
प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां का पारिवारिक मिलन समारोह सह वार्षिक वन भोज आदित्यपुर के जयप्रकाश उद्यान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए इचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद सिंह।
आपको बताते चलें की प्रेस क्लबऑफ सरायकेला खरसावां नित्य निरंतर सामाजिक घटनाओं को उजागर करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती चली आ रही है एवं समय-समय पर तरह-तरह के कार्यक्रम का आयोजन भी प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां की ओर से आयोजित किया जाता है।
वहीं बुधवार को प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां का वार्षिक वनभोज एवं मिलन समारोह बड़े ही धूमधाम के साथ संपन्न किया गया।
उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के साथ-साथ सरायकेला खरसावां के श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार ठाकुर एवं सरायकेला खरसावां जिले के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पदाधिकारी अविनाश कुमार एवं नंदन उपाध्याय उपस्थित रहे इनके साथ-साथ सरायकेला खरसावां जिले के तहसील अस्तर के एवं प्रखंड स्तर के तमाम पत्रकार उक्त कार्यक्रम में उपस्थित होकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सह प्रेस क्लब ऑफ सरायकेला खरसावां के संरक्षक अरविंद सिंह का क्लब के अध्यक्ष भरत सिंह ने पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया एवं क्लब के माध्यम से पत्रकारों को समाज में और अग्रसर होकर कार्य करने के लिए अरविंद सिंह ने शुभकामनाएं दी।
वहीं कार्यक्रम में अरविंद सिंह ने कहा कि पत्रकार समाज का एक आईना है पत्रकार भारत देश का चौथा स्तंभ ही नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण अंग भी है जिसके बिना यह समाज अधूरा है पत्रकार ही है जो ठंड हो गर्मी हो या बरसात हो अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटकर हर एक मुश्किल घड़ी में समाज में घट रही घटनाओं को उजागर करते हैं एवं हम सभी तक पहुंचाते हैं जिसमें पत्रकारों को काफी तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है लेकिन फिर भी पत्रकार अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निभाते हैं।
आगे उन्होंने कहा कि कई ऐसी जानकारियां हैं कई ऐसी सूचनाएं हैं जो हमें पत्रकारों के माध्यम से ही प्राप्त होती है उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं की भी जानकारी हमें पत्रकारों के माध्यम से ही प्राप्त होती है और तभी हम उन योजनाओं का लाभ ले पाते हैं और अगर किसी को योजनाओं का लाभ न मिल रहा हो तो उसकी खबर भी हमें पत्रकारों से ही प्राप्त होती है एवं पत्रकार ही दवे कुचले लोगों की समस्याओं को ऊंचे स्तर के अधिकारी एवं सरकार तक पहुंचने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इंडिया से भारत नाम परिवर्तन प्राइवेट मेंबर बिल 2025 – संवैधानिक प्रावधानों,ऐतिहासिक आधारों और सांस्कृतिक पहचान का समग्र विश्लेषण
भारत नाम प्रस्ताव देश की आत्मा, ऐतिहासिक पहचान और समकालीन राष्ट्रीयता के बीच एक संवाद स्थापित करता है।
भारत नाम वेदों,पुराणों, महाभारत और कूटनीतिक साहित्य में हजारों वर्षों से मौजूद है,जो केवल एक नाम नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया/महाराष्ट्र
वैश्विक स्तरपर यह गूंज उठना शुरू हुई है क़ि भारत का नाम क्या होना चाहिए,इंडिया या भारत यह प्रश्न भारतीय राजनीतिक इतिहास में भी समय-समय पर चर्चा का विषय रहा है। दिसंबर 2025 के शीतकालीन सत्र में जयपुर से एक सांसद द्वारा एक महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में यह प्रस्ताव फिर से संसद के केंद्र में आ गया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत कहा है। इस प्रस्ताव ने न केवल संसद बल्कि विशेषज्ञों,इतिहासकारों, संवैधानिक विद्वानों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी एक नई बहस को जन्म दिया है। प्रस्ताव में कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भाषाई तर्क प्रस्तुत किए गए,जिनके आधार पर भारत को राष्ट्र का एकमात्र आधिकारिक नाम घोषित करने की मांग उठाई गई है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि प्रस्ताव देश की आत्मा ऐतिहासिक पहचान और समकालीन राष्ट्रीयता के बीच एक संवाद स्थापित करता है।इस प्रस्ताव के अनुसार, यह तथ्य सर्वविदित है कि भारतीय उपमहाद्वीप को सदियों से विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग- अलग नामों से जाना जाता रहा है,सिंधु घाटी सभ्यता के कारण इंडस, फ़ारसी भाषाई प्रभाव के कारण हिंदोस से हिंदुस्तान, और वैदिक परंपरा के मूल में भारत नाम।भारत शब्द का उल्लेख वेदों पुराणों उपनिषदों से लेकर महाभारत और कूटनीतिक साहित्य तक प्राचीन काल से मिलता है।प्रस्ताव का पहला मुख्य तर्क यही है कि भारत वह प्राचीन, सभ्यतागत और सांस्कृतिक नाम है, जिससे यह भूमि सहस्राब्दियों से पहचानी जाती रही है। संसद में दिए गए वक्तव्य में कहा गया कि जिस देश को हम सदियों से मदर इंडिया या मदर लैंड कहते रहे हैं, उसका वास्तविक, ऐतिहासिक और साहित्यिक नाम भारत ही है।दिसंबर 2025 में जयपुर से एक सांसद द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में एक महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह प्रस्ताव रखा गया कि राष्ट्र का नाम इंडिया से बदलकर भारत कर दिया जाए। यह प्रस्ताव केवल भाषाई या शब्दावली परिवर्तन नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, औपनिवेशिक इतिहास, संवैधानिक प्राथमिकताओं और सांस्कृतिक आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है।बिल में कई संरचनात्मक तर्क,ऐतिहासिक साक्ष्य अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और संविधान आधारित प्रावधान शामिल किए गए, जो भारत को राष्ट्र का एकमात्र आधिकारिक नाम घोषित करने की मांग करते हैं।मैं इस लेख के माध्यम से इस बिल के मुख्य प्रावधानों, ऐतिहासिक दावों, तर्कों और उनके प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। साथियों बात अगर हम भारत नाम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ें इसको समझने की करें तो,बिल के प्रारंभिक भाग में यह उल्लेख किया गया है कि जिस देश को हम सदियों से भारतवर्ष कहते आए हैं, उसका मूल नाम भारत ही है। बिल के अनुसार, यह नाम वेदों, पुराणों, महाभारत और कूटनीतिक साहित्य में हजारों वर्षों से मौजूद है। ब्रिटिश शासनकाल से पूर्व अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, विद्वानों और इतिहासकारों ने इस भूमि को भारत के रूप में ही संबोधित किया।बिल का तर्क है कि भारत शब्द केवल एक नाम नहीं बल्कि सभ्यता की आत्मा, सांस्कृतिक मूल्यों आध्यात्मिक दर्शन और राष्ट्रीय पहचान का प्रतिनिधि है।बिल में यह स्पष्ट किया गया है कि इंडिया शब्द का औपचारिक उपयोग कॉलोनियल पीरियड में बढ़ा और ब्रिटिश प्रशासन ने इसे सरकारी दस्तावेज़ों में मानक रूप में स्थापित कर दिया।हालाँकि भारतीय समाज ने हमेशा साहित्य, संस्कृति, धर्म और दार्शनिक परंपरा में भारत शब्द का ही उपयोग किया। बिल में कहा गया है कि आज़ादी के 78 वर्ष बाद भी औपनिवेशिक शब्दावली का उपयोग करना एक राष्ट्रीय विसंगति है, जिसे सुधारने का यही उचित समय है।
साथियों बात अगर हम संविधान का अनुच्छेद 1 और बिल का मुख्य संवैधानिक आधार इसको समझने की करें तो बिल का सबसे महत्वपूर्ण आधार भारतीय संविधान का अनुच्छेद 1 है जिसमें लिखा है:“इंडिया, दैट इज भारत, शैल बी ए यूनियन ऑफ़ स्टेट्स”बिल में कहा गया: संविधान ने भारत को मूल नाम और इंडिया को अनुवाद या वैकल्पिक नाम के रूप में रखा।हिंदी संस्करण और कई भारतीय भाषाओं के स्वीकृत संस्करणों में राष्ट्र का नाम भारत ही है।संविधान की व्याख्या के अनुसार, जब कोई एक नाम मूल है, तो राष्ट्रीय सम्मान, दस्तावेज़ों, सरकारी संचार और अंतरराष्ट्रीय पहचान में वही नाम प्राथमिक होना चाहिए। बिल में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि आवश्यकता होने पर संविधान के अंग्रेज़ी अनुवाद में संशोधन किया जाए ताकि इंडिया शब्द को हटाकर केवल भारत नाम ही सभी दस्तावेज़ों में प्रयोग किया जाए।
साथियों बात अगर हम बिल में शामिल प्रस्तावित प्रावधानों को समझने की करें तो,बिल में निम्नलिखित मुख्य प्रावधानों का उल्लेख किया गया है: (अ) राष्ट्र का एकमात्र आधिकारिक नाम भारत घोषित किया जाए।यह प्रावधान कहता है किसरकारी दस्तावेज़, पासपोर्ट, मुद्रा, कोर्ट रिकॉर्ड, राजपत्र, मंत्रालयों के नाम, विदेश मंत्रालय के दस्तावेज़ अंतरराष्ट्रीय समझौते सबमें केवल“भारत” लिखा जाए। “रिपब्लिक ऑफ़ इंडिया” को बदलकर “रिपब्लिक ऑफ़ भारत” या “भारत गणराज्य” कियाजाए (ब) सभी संवैधानिक और गैर-संवैधानिक दस्तावेज़ों में इंडिया शब्द का उपयोगचरणबद्ध तरीके से बंद हो। बिल में 3 वर्षों की संक्रमण अवधि का प्रस्ताव रखा गया है।इस अवधि में सरकारी एजेंसियाँ अपने दस्तावेज़ वेबसाइट,साइनेज और एम्बलम अपडेट करेंगी। (क़) स्कूल, विश्वविद्यालय और अन्य अकादमिक पाठ्यक्रमों में भारत नाम को मानक रूप में लागू किया जाए।इतिहास, राजनीति, भूगोल और नागरिक शास्त्र की पुस्तकों में भारत का ही उपयोग हो।सीबीएसई, एनसीईआरटी तथा यूजीसी को निर्देश जारी करने का प्रस्ताव। (ड)अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भारत का आधिकारिक नाम भारतके रूप में दर्ज कराया जाए।यूएन आईएमफ, वर्ल्ड बैंक,डब्लूटीओ यूनेस्को आदि में नाम अपडेशन का प्रस्ताव। (ई) संविधान के अंग्रेज़ी अनुवाद में संशोधन करके इंडिया शब्द को हटाया जाए।सभी आधिकारिकअनुवादों में प्राथमिकता भारत को दी जाए। (फ़) नागरिकों और वैश्विक मंचों पर भी राष्ट्र का एकीकृत नाम उपयोग में लाया जाए।बिल कहता है कि “एक स्वतंत्र राष्ट्र को एक ही पहचान और एक ही नाम होना चाहिए।”इन प्रावधानों का उद्देश्य राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को एकीकृतकरना और औपनिवेशिक अवशेषों से छुटकारा पाना है।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
साथियों बात अगर हम शहरों के नाम बदले जा सकते हैं, तो राष्ट्र का क्यों नहीं? इसको समझने की करें तो,बिल में यह बेहद मजबूत तर्क दिया गया कि भारत ने पिछले वर्षों में शहरों और राज्यों के नाम उनके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप में बदले, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, प्रयागराज, गुरुग्राम इत्यादि।तो सवाल यह है कि यदि शहरों और स्थानों के नाम उनके सांस्कृतिक मूल के अनुरूप बदले जा सकते हैं, तो देश के नाम को उसके मूल स्वरूप भारत में क्यों नहींलौटाया जाए? इस तर्क के अनुसार, यदि स्थानों के औपनिवेशिक नाम बदले जा सकते हैं, तो देश के नाम पर भी समान सिद्धांत लागू होना चाहिए।संस्कृति, सभ्यता और भारत की पहचान बिल का चौथा तर्क सांस्कृतिक और सभ्यतागत आयाम पर केंद्रित है। प्रस्ताव में कहा गया,भारत शब्द में हजारों वर्षों के धार्मिक, सामाजिक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मूल्यों की परंपरा निहित है।महाभारत,विष्णु पुराण और अन्य ग्रंथों मेंभारतवर्ष का उल्लेख मिलता है।सभ्यता और संस्कृति का वास्तविक प्रतीक भारत है,न कि इंडिया इस परिप्रेक्ष्य में बिल स्पष्ट करता है कि भारत मात्र एक नाम नहीं बल्कि एक निरंतर सभ्यता की पहचान है,जो समयराजनीति और राजवंशों से परे है।अंग्रेज़ी अनुवाद में विसंगति और सुधार का प्रस्ताव,बिल में कहा गया है कि अंग्रेज़ीट्रांसलेशन की वजह से इंडिया शब्द प्रशासनिक रूप से प्रमुख हो गया।बिल काप्रस्ताव अंग्रेज़ी अनुवाद समिति बनाई जाए।यह समिति संविधान एवं अन्यकानूनी दस्तावेज़ों के अंग्रेज़ी संस्करण को भारत नाम के अनुरूप परिवर्तित करेगी।
साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय संदर्भ,विश्व साहित्य में भारत का उल्लेख इसको समझने की करें तो बिल के अनुसार:जर्मनी ने 1800 के दशक में भारत को भारत कहा था।कई अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, ह्वेनसांग मेगास्थनीज़, फाह्यान, अल-बिरूनी,ने भारत को एक एकीकृत सांस्कृतिक इकाई भारतवर्ष कहा है।विश्व साहित्य तथा विदेशी शोधों में भी यह शब्द अक्सर मिलता है।इस तर्क के अनुसार,भारत कीअंतरराष्ट्रीय पहचान ऐतिहासिक रूप से भारत शब्द के साथ अधिक संगत बैठती है। स्वतंत्र राष्ट्र के लिए एक नाम की आवश्यकता है बिल के अंतिम तर्क में कहा गया:एक स्वतंत्र राष्ट्र को अपनी पहचान के लिए एक ही नाम रखना चाहिए।इंडिया और भारत दोनों नामों का समानांतर उपयोग भ्रम पैदा करता है।संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मंचों पर एक ही नाम से जाना जाना अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करता है।इस दृष्टिकोण से बिल यह मांग करता है कि स्वतंत्र भारत को, संवैधानिक मान्यता प्राप्त नाम भारत के आधार पर अपनी पहचान तय करनी चाहिए। साथियों बात अगर हम इंडिया का नाम भारत होने के संभावित फायदे और नुकसान इसको समझने की करें तो इसके मुख्य फायदे यह माने जाते हैं कि भारत नाम राष्ट्र की प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक विरासत और स्वदेशी पहचान को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान सुदृढ़ हो सकती है, जैसे नेपाल या ईरान ने अपने पारंपरिक नामों को अपनाकर किया।इसके अतिरिक्त भारत नाम संवैधानिक रूप से पहले से मान्य है, जिससे घरेलू स्तर पर आत्मगौरव और सांस्कृतिक एकरूपता की भावना मजबूत हो सकती है।हालाँकि, इसके नुकसान भी व्यावहारिक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक व्यापार, कूटनीति, पासपोर्ट, अंतरराष्ट्रीय संधियों, निवेश दस्तावेजों और ब्रांडिंग में इंडिया नाम लंबे समय से स्थापित है। इसे बदलने से बड़े पैमाने पर प्रशासनिक व्यय, दस्तावेजों के पुनर्लेखन की लागत और अस्थायी भ्रम उत्पन्न हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार साझेदारों के लिए भी संक्रमण काल चुनौतीपूर्ण होगा। इसके अलावा,इंडिया ब्रांडवैश्विक अर्थव्यवस्था में एक स्थिरपहचान रखता है; अचानक परिवर्तन विदेशी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।
अतः अगर हम उपरोक्त पुरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि,भारत नाम परिवर्तन बिल केवल शब्द परिवर्तन का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि यह उस गहरे प्रश्न से संबंधित है कि आख़िर भारत अपनी राष्ट्रीय पहचान को कैसे प्रस्तुत करना चाहता है?प्रस्ताव में ऐतिहासिकता, सांस्कृतिक निरंतरता, संविधान, अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और औपनिवेशिक विरासत सभी तत्व शामिल हैं।यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो भारत की पहचान विश्व मंच पर एक प्राचीन सभ्यता आधारित राष्ट्र के रूप में और अधिक सशक्त होगी।यदि यह प्रस्ताव आगे बहस के लिए भेजा जाता है, तो यह आने वाले वर्षों में राजनीतिक, संवैधानिक और सांस्कृतिक विमर्श का केंद्र रहेगा।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 92841414252
शून्य काल में विधायक संजीव सरदार ने उठाई टाटा स्टील के सीएसआर से स्थायी नागरिक सुविधा की मांग।
पोटका क्षेत्र के 20 पंचायतों के लगभग एक लाख लोगों को मिलेगा लाभ, पंचायत प्रतिनिधियों के आग्रह पर सदन में गूंजा मुद्दा।
पूर्वी सिंहभूम-जमशेदपुर
पंचायत प्रतिनिधियों के आग्रह पर पोटका विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार ने विधानसभा सत्र के दौरान शून्य काल में अपने क्षेत्र की ज्वलंत समस्या को जोरदार ढंग से उठाते हुए टाटा स्टील के सीएसआर मद से स्थायी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग सरकार के समक्ष रखी।
उन्होंने बताया कि पोटका क्षेत्र अंतर्गत बागबेड़ा, कीताडीह, घाघीडीह, करनडीह, पुड़ीहासा, केरूवाडूंगरी, वयांगिल सहित 20 पंचायतों के लगभग एक लाख लोग टाटा स्टील कंपनी के 3 से 5 किलोमीटर के परिधि क्षेत्र में निवास करते हैं, लेकिन इसके बावजूद इन्हें अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
विधायक ने सदन में कहा कि इन पंचायतों में टाटा ग्रुप में कार्यरत स्थायी, अस्थायी एवं ठेका मजदूर बड़ी संख्या में निवास करते हैं, परंतु कंपनी की ओर से यहां पेयजल, सफाई और बिजली जैसी नागरिक सुविधाएं स्थायी रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे आम ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने मांग की कि झारखंड सरकार द्वारा टाटा स्टील के लीज नवीकरण से पूर्व संबंधित क्षेत्रों में सीएसआर के तहत स्थायी नागरिक सुविधा बहाल की जाए, ताकि वर्षों से समस्याओं से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सके।
पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा था मांग पत्र
विदित हो कि बीते शनिवार को बागबेड़ा जिला परिषद सदस्य किशोर यादव के नेतृत्व में मुखिया मायावती टुडू, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता एवं वार्ड सदस्य राजू ठाकुर ने संयुक्त रूप से विधायक संजीव सरदार से मुलाकात कर इस विषय में मांग पत्र सौंपा था। मांग पत्र में मुख्य रूप से बागबेड़ा, कीताडीह और घाघीडीह क्षेत्र के 15 पंचायतों में सीएसआर मद से स्थायी नागरिक सुविधा बहाल करने की मांग की गई थी।
प्रतिनिधिमंडल ने विधायक से आग्रह किया था कि इस मुद्दे को विधानसभा पटल पर उठाया जाए, ताकि सरकार एवं कंपनी का ध्यान क्षेत्र की गंभीर समस्याओं की ओर आकृष्ट हो सके। इसी आग्रह के आलोक में विधायक संजीव सरदार ने सदन में मामला रखकर क्षेत्रवासियों की आवाज बुलंद की।
पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने जताया आभार
विधानसभा में मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाने पर जिला पार्षद किशोर यादव, मुखिया मायावती टुडू, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता एवं वार्ड सदस्य राजू ठाकुर ने विधायक संजीव सरदार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधायक द्वारा इस पहल से पोटका क्षेत्र के लाखो लोगों को स्थायी नागरिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी है, जो वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जागरूकता अभियान का आयोजन।
सरायकेला/ईचागढ़
( मालखान महतो) जिला विधिक सेवा प्राधिकार सरायकेला खरसावां के सचिव तौसीफ मेराज के निर्देशानुसार ईचागढ़ प्रखण्ड अंतर्गत पंचायत गौरांगकोचा के कालिंदी बस्ती में एचआईंवी और एड्स के रोकथाम एवं नियंत्रण पर जागरूकता कार्यक्रम किया गया। पीएलवी गंगा सागर पाल ने बताया कि एचआईवी एक्ट 2017 के अंतर्गत एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार से भेद -भाव नहीं करना चाहिए।
इस बीमारी के प्रति विशेष रूप से छात्र जीवन में जागरूक होना बहुत जरूरी है ताकि देश के युवाओं को बचाया जा सके। इसके भिन्न – भिन्न परिणाम के बारे मे सचेत किया गया साथ ही एचआईवी एड्स को लेकर सामाजिक विसंगतियों के दुष्परिणाम के विषय मे विस्तृत जानकारी दिए। उन्होंने ने युवा पीढ़ी से इस कलंकित बीमारी को खत्म करने के लिए आगे आने की अपील किया। मौके में पीएलवी गंगा सागर पाल,दिगम्बर महतो, इशिता उरांव, तुष्ट रानी मंडल, निर्मल घोष, आदि ग्रामीण मौजूद थे।