भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, प्रोफेशनल और ग्रेजुएट तैयार होने व रोजगार उपलब्धि में भारी गैप- रोजगार, शिक्षा और प्रशासन क़ी बड़ी नई चुनौती -समग्र व्यापक विश्लेषण।

भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, प्रोफेशनल और ग्रेजुएट तैयार होने व रोजगार उपलब्धि में भारी गैप- रोजगार, शिक्षा और प्रशासन क़ी बड़ी नई चुनौती -समग्र व्यापक विश्लेषण।

भारत@2047 के लक्ष्य के लिए युवाओं के लिए शासन से आगे बढ़कर युवाओं के साथ शासन की अवधारणा अपनानी होगी

परीक्षा-पेपर लीक आंदोलन से कौशल-अंतर, उद्योग- अनुकूल शिक्षा और युवा, गतिशील शासन व्यवस्था तक -क्या भारत में प्रशासन की नई पीढ़ी का आरंभ हो रहा है? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर वर्ष 2026 में भारत एक ऐसे ऐतिहासिक परिवर्तनकाल से गुजर रहा है,जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था,साइबर सुरक्षा,हरित प्रौद्योगिकी और डेटा- आधारित शासन ने शिक्षा,रोजगार, उद्योग तथा प्रशासन की पारंपरिक संरचनाओं को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है।आज देश और विश्व में बड़ी संख्या में इंजीनियर, वकील, डॉक्टर,प्रबंधन विशेषज्ञ, तकनीकी पेशेवर तथा विभिन्न विषयों के स्नातक तैयार हो रहे हैं,लेकिन मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि डिग्री प्राप्त करने और रोजगार के लिए वास्तव में सक्षम बनने के बीच एक गंभीर अंतर दिखाई देता है। अनेक युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप व्यावहारिक कौशल,तकनीकी दक्षता, समस्या- समाधान क्षमता,संवाद- कौशल टीमवर्क, डिजिटल समझ तथा बदलती तकनीक के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन करने की क्षमता में पीछे रह जाते हैं। दूसरी ओर उद्योग जगत को प्रशिक्षित और कार्य के लिए तैयार युवा नहीं मिलते। यही स्थिति शिक्षा और रोजगार के बीच नहीं, बल्कि डिग्री और दक्षता, ज्ञान और प्रयोग, युवा आकांक्षा और संस्थागत क्षमता तथा सरकारी नीति और जमीनी परिणाम के बीच मौजूद व्यापक अंतर को दर्शाती है। इसी पृष्ठभूमि में 28 जुलाई 2026 को भारतीय पीएम द्वारा केंद्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता विशेष महत्व रखती है। बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों और विभागों की भविष्य की कार्ययोजना पर विचार किया गया। प्रधानमंत्री ने सरकारी व्यवस्था में विभागीय स्तर पर मौजूद क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर बाधाओं को कम करने, बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा शासन को अधिक युवा, गतिशील नवाचारी और भविष्य के अनुरूप बनाने पर बल दिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार को बदलती चुनौतियों और नए अवसरों के अनुसार निरंतर स्वयं को विकसित करना चाहिए।यह संदेश केवल प्रशासनिक सुधार का सामान्य विचार नहीं है, बल्कि तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था और युवा अपेक्षाओं के बीच शासन की नई भूमिका का संकेत है।

साथियों, 28 जुलाई 2026 की उच्चस्तरीय बैठक,उद्योग और शिक्षा के बीच कौशल- अंतर इंटर्नशिप की आवश्यकता एआई युग की नई रोजगार चुनौतियां, परीक्षा- पेपर लीक के विरुद्ध युवा आंदोलन, डिजिटल लोकतंत्र का विस्तार और प्रशासन को युवा, गतिशील तथा अनुकूलनशील बनाने की आवश्यकता ये सभी अलग- अलग विषय नहीं हैं। ये भारत के भविष्य के एक ही बड़े प्रश्न के विभिन्न आयाम हैं क्या देश की शिक्षा, अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था युवा पीढ़ी की बदलती आकांक्षाओं के अनुरूप स्वयं को समय पर बदल पाएगी? भारत के युवाओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे केवल रोजगार नहीं, बल्कि निष्पक्ष अवसर चाहते हैं; केवल डिग्री नहीं, बल्कि उपयोगी कौशल चाहते हैं; केवल डिजिटल सुविधा नहीं, बल्कि डिजिटल अधिकार और पारदर्शिता चाहते हैं; केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध परिणाम चाहते हैं। सरकार के सामने चुनौती केवल अधिक योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि योजनाओं को परिणामों से जोड़ने की है। यदि शिक्षा उद्योग से जुड़े, इंटर्नशिप वास्तविक अनुभव दे, कौशल भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप हों, परीक्षा प्रणाली विश्वसनीय बने, प्रशासन संवादशील हो और युवाओं को नीति-निर्माण में भागीदारी मिले, तो भारत की युवा शक्ति विश्व की सबसे बड़ी विकास-शक्ति बन सकती है।
साथियों,आज विश्व की अर्थव्यवस्था केवल श्रम- आधारित नहीं,बल्कि ज्ञान,डेटा,नवाचार और कौशल- आधारित अर्थव्यवस्था बन रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कई कार्यों को तेज, स्वचालित और अधिक सटीक बना रही है।इंजीनियरिंग में डिजाइन, कोडिंग,परीक्षण और उत्पादन की प्रक्रियाएं बदल रही हैं; कानून के क्षेत्र में कानूनी शोध, दस्तावेजों का विश्लेषण और न्यायिक डेटा का उपयोग तकनीक से प्रभावित हो रहा है; चिकित्सा में निदान- सहायता डिजिटल स्वास्थ्य और व्यक्तिगत उपचार के नए मॉडल विकसित हो रहे हैं; बैंकिंग में एल्गोरिदम,फिनटेक और साइबर सुरक्षा का महत्व बढ़ रहा है। इसलिए भविष्य में केवल किसी विषय की डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। युवा को अपने मूल विषय के साथ डिजिटल साक्षरता, एआई की समझ, डेटा विश्लेषण, नैतिक निर्णय क्षमता, रचनात्मकता और मानव-केंद्रित समस्या- समाधान की दक्षता भी सटीकता से विकसित करनी होगी।

साथियों, भारत में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार होने के बावजूद रोजगार की उपलब्धता और कौशल की मांग के बीच अंतर पर लगातार चर्चा होती रही है। एक अध्ययन में भारत में प्रतिवर्ष लगभग नौ लाख इंजीनियर तैयार होने और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार- वृद्धि की तुलना में स्नातकों की संख्या अधिक होने का प्रश्न उठाया गया है। अध्ययन ने यह भी संकेत दिया कि केवल पारंपरिक नौकरी- आधारित मॉडल पर्याप्त नहीं हो सकता और तकनीकी शिक्षा को उद्यमिता स्थानीय नवाचार तथा नए प्रकार के सूक्ष्म उद्यमों से जोड़ने की आवश्यकता है।हालांकि ऐसे आंकड़ों को विभिन्न संस्थानों और क्षेत्रों की अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार समझना चाहिए, लेकिन मूल चुनौती स्पष्ट है उच्च शिक्षा की संख्या बढ़ना अपने आप में रोजगार- योग्यता की गारंटी नहीं है।यही कारण है कि पीएम द्वारा उद्योग जगत के सहयोग से नए और कौशल- आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता पर दिया गया जोर अत्यंत प्रासंगिक है। शिक्षा संस्थानों में पाठ्यक्रम कई बार उद्योग की बदलती आवश्यकताओं की तुलना में धीमी गति से बदलते हैं। जब तक विश्वविद्यालय किसी नई तकनीक को पाठ्यक्रम में शामिल करते हैं, तब तक उद्योग अगले स्तर की तकनीक अपनाना शुरू कर देता है। इसलिए पाठ्यक्रम निर्माण केवल विश्वविद्यालयों या नियामक संस्थाओं का विषय नहीं रह सकता। उद्योग, शिक्षा संस्थान, शोध संगठन, स्टार्टअप, स्थानीय प्रशासन और युवाओं को मिलकर भविष्य के कौशल की रूपरेखा तैयार करनी होगी। 2025 की सरकारी समीक्षा के अनुसार कौशल विकास कार्यक्रमों में एआई, इंडस्ट्री 4.0, हरित रोजगार और डिजिटल सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष पाठ्यक्रम तथा नई भूमिका- आधारित प्रशिक्षण संरचनाएं विकसित की गई हैं। अब आवश्यकता इन पहलों को व्यापक, गुणवत्तापूर्ण और परिणाम-आधारित बनाने की है।
साथियों, कौशल विकास का अर्थ केवल कुछ सप्ताह या महीनों का प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। वास्तविक कौशल वह है जिसे युवा कार्यस्थल पर प्रयोग कर सके, समस्या का समाधान कर सके और बदलती परिस्थितियों में विकसित कर सके। उदाहरण के लिए, एक इंजीनियर को केवल तकनीकी सिद्धांत नहीं, बल्कि वास्तविक परियोजना,टीम में कार्य, उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण और ग्राहक की आवश्यकता को समझना चाहिए। एक विधि स्नातक को केवल कानून की धाराएं नहीं, बल्कि डिजिटल कानूनी शोध, दस्तावेज निर्माण, मध्यस्थता, साइबर कानून, डेटा संरक्षण तथा न्याय तक पहुंच की व्यावहारिक समझ भी होनी चाहिए। इसी प्रकार प्रबंधन स्नातक को केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि डेटा, बाजार, उद्यमिता और संगठनात्मक निर्णय की क्षमता विकसित करनी होगी। इसलिए शिक्षा को परीक्षा में उत्तर देने से आगे बढ़ाकर वास्तविक जीवन की समस्या हल करने की दिशा में ले जाना आवश्यक है। इंटर्नशिप इस अंतर को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को वास्तविक व्यावसायिक वातावरण का अनुभव प्रदान करना और शिक्षा तथा उद्योग की आवश्यकताओं के बीच सेतु बनाना है। योजना के अंतर्गत युवाओं को 12 महीने तक कार्यस्थल अनुभव उपलब्ध कराने की संरचना बनाई गई है। लेकिन इंटर्नशिप की सफलता केवल अवसरों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। यह देखना होगा कि कितने युवा वास्तव में प्रशिक्षण पूरा करते हैं, उन्हें कितना व्यावहारिक ज्ञान मिलता है, कितनों को रोजगार या उद्यमिता का अवसर मिलता है और क्या इंटर्नशिप के बाद उनकी आय तथा रोजगार-क्षमता में सुधार होता है। इंटर्नशिप को केवल औपचारिक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि प्रशिक्षक, वास्तविक परियोजना, कौशल मूल्यांकन और करियर मार्गदर्शन से जोड़ना होगा।

साथियों, हाल के छात्र आंदोलनों और उनसे उत्पन्न राजनीतिक तथा प्रशासनिक प्रभावों को कुछ विशेषज्ञ युवा शक्ति की बढ़ती लोकतांत्रिक भूमिका के रूप में देख रहे हैं। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा -सुधार की मांगों तथा संसद और सार्वजनिक विमर्श पर आंदोलन के प्रभाव को यह संकेत माना जा सकता है कि युवा अब केवल नीतियों के निष्क्रिय लाभार्थी नहीं रहना चाहते। वे पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध समाधान की मांग कर रहे हैं। हालांकि किसी भी आंदोलन के राजनीतिक परिणाम का अंतिम मूल्यांकन तथ्यों, संस्थागत निर्णयों और दीर्घकालिक सुधारों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। किसी एक घटना को सीधे किसी सरकार की राजनीतिक सुरक्षा या राजनीतिक असुरक्षा का निश्चित प्रमाण मानना उचित नहीं होगा। फिर भी यह कहा जा सकता है कि सरकारों के लिए युवाओं की शिकायतों को समय पर सुनना, संवाद स्थापित करना और सुधारों के परिणाम दिखाना लोकतांत्रिक स्थिरता तथा जनविश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।

साथियों, युवा आंदोलन का सबसे बड़ा संदेश संभवतः यह है कि शासन को प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि पूर्वानुमान -आधारित होना चाहिए। यदि परीक्षा प्रणाली में तकनीकी कमजोरी है, तो समस्या उत्पन्न होने के बाद जांच करने के बजाय पहले से सुरक्षा परीक्षण, स्वतंत्र ऑडिट, एन्क्रिप्शन, नियंत्रित पहुंच, साइबर निगरानी और जवाबदेही की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए। यदि रोजगार के लिए कौशल की कमी है, तो युवाओं के स्नातक बनने के बाद प्रशिक्षण देने के बजाय विद्यालय और महाविद्यालय स्तर से ही उद्योग-अनुकूल कौशल विकसित किए जाने चाहिए। यदि युवाओं में किसी नीति को लेकर भ्रम है, तो विवाद बढ़ने के बाद स्पष्टीकरण देने के बजाय नीति निर्माण के समय से ही सार्वजनिक संवाद होना चाहिए। यही आधुनिक, संवेदनशील और दूरदर्शी प्रशासन की पहचान है।आज की समस्याएं एक मंत्रालय या एक विभाग तक सीमित नहीं रहतीं। उदाहरण के लिए, युवा रोजगार का प्रश्न शिक्षा कौशल उद्योग वित्त प्रौद्योगिकी सामाजिक सुरक्षा और राज्य सरकारों से जुड़ा है। इसलिए संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण आवश्यक है।

साथियों, भारत के सामने सबसे बड़ी संभावना उसकी युवा आबादी है, लेकिन जनसांख्यिकीय लाभांश तभी वास्तविक लाभ बनेगा जब शिक्षा गुणवत्तापूर्ण हो, कौशल बाजार की आवश्यकता से जुड़े हों, रोजगार के अवसर बढ़ें और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिले। हर युवा को सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं है; इसलिए रोजगार की अवधारणा को व्यापक बनाना होगा। स्टार्टअप, सूक्ष्म उद्यम, स्थानीय डिजिटल सेवाएं, हरित उद्योग, कृषि- प्रौद्योगिकी स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और सामाजिक उद्यमिता भविष्य के अवसर बन सकते हैं। युवाओं को नौकरी खोजने वाले के साथ-साथ रोजगार सृजक बनने के लिए भी तैयार करना होगा।भारत @ 2047 के लक्ष्य के लिए युवाओं के लिए शासन से आगे बढ़कर युवाओं के साथ शासन की अवधारणा अपनानी होगी। युवा नीति-निर्माण में केवल प्रतीकात्मक रूप से नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से शामिल हों। विश्वविद्यालयों, स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों, नीति मंचों और डिजिटल परामर्श प्रणालियों में युवाओं के सुझाव लिए जाएं। उनकी राय पर क्या निर्णय हुआ, इसका सार्वजनिक उत्तर भी दिया जाए। इससे युवाओं को केवल विरोध करने का नहीं, बल्कि समाधान निर्माण का अवसर मिलेगा।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका सटीक विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एआई युग में भारत की सफलता इस बात से निर्धारित नहीं होगी कि देश कितने इंजीनियर, वकील, प्रोफेशनल या स्नातक तैयार करता है, बल्कि इस बात से होगी कि उनमें से कितने युवा नवाचार कर सकते हैं, समस्याओं का समाधान कर सकते हैं, नई तकनीक के साथ स्वयं को बदल सकते हैं, रोजगार और उद्यमिता के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं तथा लोकतांत्रिक शासन में रचनात्मक भागीदारी कर सकते हैं। यदि सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थान और युवा मिलकर इस कौशल- अंतर को समाप्त करने की दिशा में कार्य करें, तो भारत में केवल डिजिटल इंडिया नहीं, बल्कि कौशल-संपन्न, रोजगार -सक्षम, नवाचारी और जवाबदेह भारत की नई पीढ़ी का निर्माण संभव होगा। यही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला और युवा शक्ति की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक उपलब्धि हो सकती है।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

ब्रेकिंग न्यूज: MVI कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा, बिना पैसे के नहीं होता एक भी काम।

ब्रेकिंग न्यूज: MVI कार्यालय बना भ्रष्टाचार का अड्डा, बिना पैसे के नहीं होता एक भी काम।

पश्चिम सिंहभूम/चाईबासा

परिवहन विभाग का वो कार्यालय जहां आम जनता को ईमानदारी से सेवा मिलनी चाहिए, वहीं आज भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। MVI कार्यालय में हालात ये हैं कि बिना पैसे दिए आपकी फाइल को कोई हाथ तक नहीं लगाता।

जनता की जेब पर खुलेआम डाका

सूत्रों और पीड़ित लोगों से मिली जानकारी के अनुसार MVI ऑफिस में हर काम का रेट फिक्स है –
• लाइसेंस बनवाना हो तो 1500 से 3000 रुपये अलग से • फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए 2000 रुपये • गाड़ी का परमिट और कागजों में मामूली सुधार के लिए भी 500 से 1000 रुपये की वसूली  अगर आप ईमानदारी से लाइन में लगकर अपना काम कराना चाहते हैं, तो आपको महीनों तक दौड़ाया जाएगा। कभी सर्वर डाउन का बहाना, कभी साहब नहीं हैं, तो कभी कागज अधूरा है।

दलालों का राज, अफसर मौन

साथ ही सूत्र यह भी बताते हैं कि MVI कार्यालय के बाहर दलालों की फौज खड़ी रहती है। बिना दलाल के आप अंदर घुस भी नहीं सकते। आम आदमी का आरोप है कि ये दलाल सीधे अंदर के बाबुओं और अधिकारियों से मिले हुए हैं। जनता से लूटा गया पैसा नीचे से ऊपर तक बंटता है, इसलिए कोई सुनने वाला नहीं है।

एक पीड़ित ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “मैं 15 दिन से चक्कर लगा रहा हूं। काउंटर पर बैठा बाबू सीधे मुंह बात नहीं करता। बगल वाले ने इशारा किया कि 2000 रुपये दो तो 10 मिनट में काम हो जाएगा। ये कैसी व्यवस्था है?”

सवाल ये उठता है कि जब सरकार डिजिटल इंडिया और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा करती है, तो MVI जैसे सरकारी दफ्तरों में ये खुली लूट कैसे चल रही है? क्या जिला परिवहन पदाधिकारी और सरकार के आला अधिकारी इस भ्रष्टाचार से अनजान हैं? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?

“रोपनी का समय, किसान खेत में पसीना बहा रहे, सरायकेला-कृषि विभाग कार्यालय में फाइलें सो रही”

“रोपनी का समय, किसान खेत में पसीना बहा रहे, सरायकेला-कृषि विभाग कार्यालय में फाइलें सो रही”

सरायकेला

“मौसम साथ दे रहा, सरकार नहीं: सरायकेला-खरसावां में किसानों को बीज, दवा और सलाह से महरूम रखा गया“

“‘सेटिंग-गेटिंग’ से चल रही खेती? धान रोपनी में भी जागरूकता अभियान से वंचित रहे सरायकेला-खरसावां के किसान”

झारखंड में मानसून की अच्छी बारिश के बाद धान रोपनी का काम जोरों पर है। जिले के किसान सुबह से शाम तक अपने-अपने खेतों में धान रोप रहे हैं। मौसम भी किसानों का साथ दे रहा है। लेकिन इस महत्वपूर्ण समय में कृषि विभाग और प्रशासन का ध्यान किसानों की ओर नहीं है।

स्थानीय किसानों का आरोप है कि रोपनी से पहले बीज उपचार, उर्वरक का संतुलित उपयोग, कीट नियंत्रण और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग द्वारा कोई विशेष जागरूकता अभियान या किसान चौपाल नहीं लगाई गई। नतीजा ये है कि किसान पुराने तरीके से ही खेती करने को मजबूर हैं।

“सेटिंग-गेटिंग” का आरोप
कई प्रगतिशील किसानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ चंद “खास” लोगों तक ही पहुंच रहा है। बीज, दवा और अनुदान का वितरण पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा। आम और छोटे किसान विभाग के चक्कर काटकर थक जा रहे हैं लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल रही।

क्या कहते हैं किसान
गम्हरिया के किसान रामदेव महतो कहते हैं “हम 20 साल से धान लगा रहे हैं। हर साल रोपनी के समय कृषि पदाधिकारी गांव आते थे, नई तकनीक बताते थे। इस बार कोई नहीं आया। दवा की दुकानदार जो बताएगा वही करना पड़ रहा है।”

सरकारी दावों पर सवाल
एक तरफ राज्य सरकार  “किसान समृद्धि” की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सरायकेला-खरसावां जैसे कृषि प्रधान जिले में रोपनी के पीक सीजन में भी विभागीय उदासीनता देखने को मिल रही है।

मांग
किसान संगठनों ने उपायुक्त और जिला कृषि पदाधिकारी से मांग की है कि अविलंब प्रखंड स्तर पर किसान जागरूकता शिविर लगाए जाएं। PM किसान, बीज अनुदान और फसल बीमा की जानकारी घर-घर तक पहुंचाई जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से खेती हो सके और झारखंड की खेती बुलंदी पर पहुंचे।

यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो उपज पर असर पड़ना तय है।

आदित्यपुर में ब्राउन शुगर कारोबार पर पुलिस का बड़ा प्रहार,7.59 लाख नकद और 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद, आजाद अंसारी गिरफ्तार।

आदित्यपुर में ब्राउन शुगर कारोबार पर पुलिस का बड़ा प्रहार,7.59 लाख नकद और 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद, आजाद अंसारी गिरफ्तार।

सरायकेला/आदित्यपुर

एसपी के निर्देश अनुसार आदित्यपुर थाना पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए ब्राउन शुगर तस्करों के नेटवर्क का खुलासा किया। पुलिस ने राम मड़ैया बस्ती, मुस्लिम बस्ती समेत विभिन्न क्षेत्रों में सघन छापेमारी अभियान चलाकर 7 लाख 59 हजार 650 रुपये नकद तथा 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद की है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अन्य आरोपी फरार हो गए।

पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर चलाए गए अभियान के दौरान पुलिस ने ब्राउन शुगर के पुराने आरोपी एवं फरार चल रहे जावेद अंसारी उर्फ लड्डू के घर पर छापेमारी की। पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गया। इसी बीच पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि घर की छत पर कुछ लोग नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त रुपयों का हिसाब-किताब कर रहे हैं।

वहीं सूचना के आधार पर जब पुलिस छत पर पहुंची तो वहां जाने वाला दरवाजा बाहर से बंद मिला। दरवाजा तोड़कर पुलिस जैसे ही ऊपर पहुंची, वहां मौजूद लोग छज्जे और पाइप के सहारे भागने लगे। भागते समय आरोपियों ने रुपये से भरे कई झोले सड़क पर फेंक दिए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। मौके से आजाद अंसारी को गिरफ्तार किया गया, जिसकी तलाशी में 20 पुड़िया ब्राउन शुगर बरामद हुई। जब्त नकदी की गिनती करने पर कुल 7,59,650 रुपये मिले।

एसपी मनोज स्वर्गियारी ने बताया कि जांच में कपाली के मिन्नत नगर, जुगसलाई के आजाद नगर तथा आदित्यपुर मुस्लिम बस्ती को इस नेटवर्क का प्रमुख ठिकाना पाया गया है। मामले में इमरान, जावेद अंसारी उर्फ लड्डू, राशिद खातून, विपुल कर्मकार, रोहित कर्मकार उर्फ सिपुल तथा प्रकाश पटेल की संलिप्तता सामने आई है। सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

एसपी ने कहा कि आदित्यपुर क्षेत्र में ड्रग्स कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा। उन्होंने इस कार्रवाई में आदित्यपुर थाना प्रभारी अंजनी कुमार एवं उनकी टीम की सराहना की। थाना प्रभारी अंजनी कुमार ने कहा कि ब्राउन शुगर के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस की मुहिम लगातार जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि पुलिस जवानों को उपलब्ध कराई गई मोटरसाइकिलों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे पुलिस टीम घटनास्थल तक तेजी से पहुंचकर अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई कर पा रही है।

अवैध खनन एवं खनिज परिवहन के विरुद्ध ईचागढ़ थाना क्षेत्र में देर रात चलाया गया संयुक्त जांच अभियान, तीन वाहन जब्त

अवैध खनन एवं खनिज परिवहन के विरुद्ध ईचागढ़ थाना क्षेत्र में देर रात चलाया गया संयुक्त जांच अभियान, तीन वाहन जब्त

सरायकेला-खरसावां


उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ के निदेशानुसार सोमवार की देर रात जिला खनन पदाधिकारी के नेतृत्व में जिला खनन विभाग द्वारा अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी, ईचागढ़ के साथ ईचागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत पातकुम क्षेत्र में बालू एवं पत्थर खनिज के अवैध परिवहन के विरुद्ध संयुक्त रूप से सघन वाहन जांच एवं छापामारी अभियान चलाया गया।

जांच अभियान के दौरान खनिज लदे सभी वाहनों के परिवहन चालान एवं खनिज की मात्रा का सत्यापन किया गया। निरीक्षण के क्रम में पातकुम चौक के समीप पत्थर खनिज से लदे हाइवा वाहन संख्या JH05CF0396 में परिवहन चालान में अंकित मात्रा से अधिक खनिज का परिवहन करते पाया गया। वहीं, बालू खनिज से लदे दो ट्रैक्टर बिना वैध परिवहन चालान के बालू का परिवहन करते पाए गए।

अनियमितता पाए जाने पर उक्त तीनों वाहनों को जब्त कर सुरक्षार्थ ईचागढ़ थाना में सुपुर्द कर दिया गया है। मामले में जिला खनन विभाग द्वारा खनन अधिनियम एवं प्रचलित विधिक प्रावधानों के तहत नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।
यक्ष प्रश्न – आखिर इतनी शक्ति और इतनी कार्रवाई के बाद भी अवैध खनन एवं अवैध बालू की सप्लाई रुक क्यों नहीं रही है कौन है जिम्मेदार।

अवैध खनन, भंडारण एवं खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले में इस प्रकार की गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध खनन, भंडारण अथवा परिवहन में संलिप्त व्यक्तियों एवं वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

डिजिटल संप्रभुता,लोकतंत्र और सोशल मीडिया जवाबदेही :मेटा विवाद, नीट आंदोलन और उभरती वैश्विक नीति चुनौती -28 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की गंभीर टिप्पणियां -समग्र व्यापक विश्लेषण

डिजिटल संप्रभुता,लोकतंत्र और सोशल मीडिया जवाबदेही :मेटा विवाद, नीट आंदोलन और उभरती वैश्विक नीति चुनौती -28 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की गंभीर टिप्पणियां -समग्र व्यापक विश्लेषण



भारतीय पीएम द्वारा जेन- ज़ेड, को संबोधित एक फेसबुक पोस्ट, वीडियो प्लेटफ़ॉर्म से हट जाने की घटना ने अनेक प्रश्न खड़े किए -मेटा ने तकनीकी त्रुटि बताते सामग्री पुनःबहाल क़ी

फेसबुक (मेटा) से पीएम का पोस्ट हटना व 28 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ और अंतरिम निर्देश, एक आंदोलन तक सीमित नहीं हैं, अत्यंत गंभीर संकेत -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत में वर्ष 2026 का नीट पेपर लीक विवाद केवल एक परीक्षा की विश्वसनीयता का प्रश्न नहीं रहा,बल्कि यह युवाओं के विश्वास, लोकतांत्रिक अधिकारों, न्यायपालिका की भूमिका, सरकार की जवाबदेही तथा वैश्विक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों की शक्ति से जुड़ा बहुआयामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषय बन गया।जंतर-मंतर पर हुआ व्यापक छात्र आंदोलन, उसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, न्यायपालिका की सक्रियता तथा भारतीय प्रधानमंत्री  की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने को लेकर मेटा और भारत सरकार के बीच उत्पन्न विवाद,मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि इक्कीसवीं सदी का लोकतंत्र केवल संसद न्यायालय और चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है।अब सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म भी लोकतांत्रिक विमर्श के निर्णायक मंच बन चुके हैं। जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और युवाओं द्वारा किया गया आंदोलन भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जा सकता है। इस आंदोलन का मूल उद्देश्य केवल नीट परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समान अवसर लोकतांत्रिक शासन की आधारशिला हैं। इस आंदोलन ने भारत के भीतर व्यापक जनसमर्थन प्राप्त किया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तथा वैश्विक शिक्षा जगत का भी ध्यान आकर्षित किया।इससे यह संदेश गया कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुनने की क्षमता रखता है।आंदोलन के बाद उत्पन्न परिस्थितियों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को कई विश्लेषकों ने राजनीतिक जवाबदेही का उदाहरण माना। लोकतांत्रिक शासन में मंत्री केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं होते, बल्कि वे नैतिक उत्तरदायित्व का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।यद्यपि किसी भी इस्तीफे के पीछे अनेक राजनीतिक और प्रशासनिक कारण हो सकते हैं,फिर भी जनता के बीच यह धारणा बनी कि लोकतांत्रिक दबाव और जनआंदोलन शासन को उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दावों,घटनाक्रमों और लोकतांत्रिक विमर्श के आधार पर विश्लेषण प्रस्तुत करता है।जिन मामलों का संबंध न्यायालय, सरकारी जांच अथवा आधिकारिक पुष्टि से है,उन्हें अंतिम तथ्य नहीं बल्कि उपलब्ध सूचनाओं के संदर्भ में सटीकता से देखा जाना चाहिए।

साथियों, 28 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुईसुनवाई ने इस पूरे घटनाक्रम को नया आयाम दिया। विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार न्यायालय ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार,कानून के समक्ष समानता तथा अनावश्यक कठोर कार्रवाई से बचने की आवश्यकता पर गंभीर टिप्पणियाँ कीं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि अदालत ने 18 वर्ष से कम आयु के आंदोलनकारियों तथा ऐसे प्रदर्शनकारियों के संबंध में, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था,तत्काल मानवीय और विधिसम्मत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। न्यायालय की कार्यवाही का व्यापक संदेश यही माना गया कि लोकतंत्र में असहमति को अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और राज्य की शक्ति का प्रयोग संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। अंतिम और बाध्यकारी स्थिति न्यायालय के आधिकारिक आदेश से ही निर्धारित होती है।

साथियों, इस पूरे घटनाक्रम के समानांतर एक दूसरा विवाद सामने आया जिसने राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर डिजिटल शासन और तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही पर वैश्विक बहस छेड़ दी।भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं,विशेषकर जेन- ज़ेड, को संबोधित एक फेसबुक पोस्ट और वीडियो प्लेटफ़ॉर्म से हट जाने की घटना ने अनेक प्रश्न खड़े कर दिए। बाद में मेटा ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए सामग्री पुनःबहाल कर दी,किंतु विवाद यहीं समाप्त नहीं हुआ।भारत सरकार ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और विस्तृत जानकारी मांगी कि इतनी महत्वपूर्ण आधिकारिक सामग्री आखिर किस प्रक्रिया और किस कारण से हटाई गई।यहीं से यह विवाद केवल एक पोस्ट हटने का नहीं रहा, बल्कि डिजिटल संप्रभुता का विषय बन गया। किसी भी संप्रभु राष्ट्र का यह स्वाभाविक अधिकार है कि उसके निर्वाचित नेतृत्व और सरकारी संचार से संबंधित डिजिटल सामग्री के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्पष्ट प्रक्रिया हो। यदि किसी वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म पर करोड़ों नागरिक सूचना प्राप्त करते हैं, तो उस प्लेटफ़ॉर्म की नीतियाँ भी सार्वजनिक विश्वास की कसौटी पर सटीकता से  परखी जाएँगी।

साथियों, मेटा,जो फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे विश्व के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म संचालित करती है,लंबे समय से विभिन्न देशों में सामग्री मॉडरेशन, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और स्थानीय कानूनों के अनुपालन को लेकर चर्चा और विवाद का विषय रही है। भारत में भी समय-समय पर उस पर भड़काऊ सामग्री हटाने में देरी, फर्जी समाचारों के प्रसार और नियामकीय अनुपालन जैसे मुद्दों पर प्रश्न उठते रहे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री की पोस्ट हटने की घटना ने इन पुराने विवादों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया।सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार का दृष्टिकोण यह है कि तकनीकी गलती जैसे सामान्य स्पष्टीकरण से इतने महत्वपूर्ण मामले का समाधान नहीं हो सकता।यदि किसी एल्गोरिद्म, स्वचालित प्रणाली या आंतरिक मॉडरेशन प्रक्रिया के कारण ऐसी घटना हुई, तो उसकी पूरी पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यही कारण है कि संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण और जवाबदेही की अपेक्षा की गई।

साथियों,दूसरी ओर, तकनीकी कंपनियों का पक्ष भी समझना आवश्यक है। मेटा का कहना रहा कि सामग्री गलती से हट गई थी और जैसे ही त्रुटि का पता चला, उसे तुरंत बहाल कर दिया गया। बड़े डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म प्रतिदिन अरबों पोस्ट, वीडियो और संदेशों का प्रबंधन करते हैं। ऐसे में स्वचालित एल्गोरिद्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियाँ कभी-कभी गलत निर्णय भी ले सकती हैं। किंतु प्रश्न केवल त्रुटि का नहीं, बल्कि उसके निवारण की पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संस्थागत प्रक्रिया का है।यहीं से एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता और डिजिटल जवाबदेही जैसे सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यदि कोई एल्गोरिद्म यह तय करता है कि कौन-सी सामग्री दिखाई जाएगी, कौन-सी सीमित होगी और कौन-सी हटाई जाएगी, तो लोकतांत्रिक समाज यह जानना चाहेगा कि वह निर्णय किन मानकों पर आधारित था।आधुनिक लोकतंत्र में तकनीकी निर्णय भी सार्वजनिक उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं हो सकते।

साथियों, इस विवाद ने भारत में स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म विकसित करने की मांग को भी बल दिया। अनेक विशेषज्ञों का मत है कि जिस प्रकार भारत ने डिजिटल भुगतान, आधार, यूपीआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में वैश्विक मॉडल प्रस्तुत किया है,उसी प्रकार भविष्य में सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप सोशल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए जा सकते हैं। हालांकि यह भी उतना ही आवश्यक है कि कोई भी नया प्लेटफ़ॉर्म अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, गोपनीयता और प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों का सम्मान करे।यह विवाद केवल भारत तक सीमित नहीं है। यूरोपीय संघ ने डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट, डिजिटल मार्केट्स एक्ट और एआई एक्ट जैसे व्यापक कानूनों के माध्यम से बड़ी तकनीकी कंपनियों पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया है। अमेरिका में भी सामग्री मॉडरेशन, प्रतिस्पर्धा, डेटा सुरक्षा और प्लेटफ़ॉर्म की शक्ति को लेकर लगातार बहस जारी है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राज़ील तथा अनेक अन्य लोकतांत्रिक देशों ने भी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों की भूमिका पर नए नियामकीय ढाँचे सटीकता से विकसित किए हैं।

साथियों, भारत भी डिजिटल इंडिया, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन व्यवस्था,आईटी नियमों और साइबर सुरक्षा ढाँचों के माध्यम से संतुलित डिजिटल शासन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चुनौती यह है कि तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन भी मिले और नागरिक अधिकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भी सुनिश्चित हो।कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने इस पूरी बहस को और अधिक जटिल बना दिया है। अब केवल पोस्ट हटाने या दिखाने का प्रश्न नहीं है। एआई यह भी निर्धारित करता है कि कौन- सी सामग्री किस उपयोगकर्ता तक पहुँचेगी,कौन-सा वीडियो वायरल होगा और किस समाचार को प्राथमिकता मिलेगी। यदि इन प्रणालियों में पारदर्शिता नहीं होगी, तो लोकतांत्रिक विमर्श पर उनका प्रभाव अत्यधिक व्यापक हो सकता है। डेटा आज केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति बन चुका है।नागरिकों का डिजिटल व्यवहार, सामाजिक संबंध, वित्तीय गतिविधियाँ और सूचना उपभोग इन सबका विशाल डेटा भविष्य की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को प्रभावित करता है। इसलिए डिजिटल संप्रभुता केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि शासन, सुरक्षा और नागरिक अधिकारों का मूल प्रश्न बन चुकी है। भारत जैसे विशाल लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती संतुलन स्थापित करना है।एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल अधिकार है, वहीं दूसरी ओर फर्जी समाचार,डीपफेक, साइबर अपराध औरडिजिटल दुष्प्रचार जैसी चुनौतियाँ भी वास्तविक हैं। यदि नियमन अत्यधिक कठोर होगा तो स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है,और यदि नियमन अत्यधिक शिथिल होगा तो डिजिटल अराजकता बढ़ सकती है। इसलिए पारदर्शी, न्यायसंगत और न्यायिक समीक्षा के अधीन नियामकीय व्यवस्था ही दीर्घकालिक समाधान हो सकती है।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि नीट आंदोलन, सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता, राजनीतिक जवाबदेही और मेटा विवाद, इन सभी घटनाओं ने एक साझा संदेश दिया है कि लोकतंत्र का भविष्य केवल संस्थागत शक्ति पर नहीं, बल्कि नागरिक विश्वास,पारदर्शिता और डिजिटल उत्तरदायित्व पर भी निर्भर करेगा।आज आवश्यकता सरकार और तकनीकी कंपनियों के बीच टकराव की नहीं,बल्कि नियम-आधारित सहयोग,स्पष्ट जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान की है।यदि लोकतंत्र नागरिकों की आवाज़ है,तो डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म उस आवाज़ का आधुनिक माध्यम हैं। यदि संप्रभुता किसी राष्ट्र की आत्मा है, तो डिजिटल संप्रभुता उसकी डिजिटल पहचान, सुरक्षा और भविष्य की दिशा है। इसलिए मेटा से जुड़ा यह विवाद केवल एक पोस्ट या वीडियो हटने का मामला नहीं माना जा सकता;यह उस व्यापक वैश्विक प्रश्न का प्रतीक है कि डिजिटल युग में लोकतंत्र, तकनीक और कॉर्पोरेट शक्ति के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। आने वाले वर्षों में यही प्रश्न अंतरराष्ट्रीय कानून, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

विजय श्री ऑटो में झामुमो का प्रदर्शन, त्रिपक्षीय वार्ता के बाद न्यूनतम मजदूरी पर बनी सहमति।

विजय श्री ऑटो में झामुमो का प्रदर्शन, त्रिपक्षीय वार्ता के बाद न्यूनतम मजदूरी पर बनी सहमति।

सरायकेला/गम्हरिया

पूरा भारत या फिर यूं कहें की पूरी दुनिया बगैर मजदूर के कार्यविहीन हैं। मजदूर चाहे निचले स्तर के हो या ऊंचे स्तर के हो हर कोई इस दुनिया में अलग-अलग रूप में अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग संस्थानों में मजदूरी करता ही है। लेकिन ज्यादातर निचले स्तर के मजदूरों का शोषण होने की खबर आए दिन हमें और आपको मिलते रहती है।

ऐसा ही एक मामला गम्हरिया औद्योगिक क्षेत्र स्थित विजय श्री ऑटोकम लिमिटेड कंपनी में देखने को मिला है जहां पर कई वर्षों से मेहनत कर रहे हैं मजदूरों को उनके न्यूनतम दर न देने का मामला चर्चाओं में बना हुआ है जिस पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने अपनी आवाज बुलंद की और मजदूरों का हक दिलाने के लिए डटे रहे।

सोमवार को मजदूरों ने पूरे दिन प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन किया और शाम करीब 5:00 बजे आयोजित तृतीय वार्ता में प्रबंधन को झुकना पड़ा। भारी दबाव के बाद कंपनी ने मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, ईएसआई, पीएफ और बोनस सहित अन्य बकाया राशि देने के लिए हस्ताक्षरित अनुमति दी। इधर, मजदूरों और नेताओं के माने तो यहां लगभग 400 कामगार काम करते हैं, जिन्हें पिछले कई वर्षों से न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है।

वार्ता में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रखंड अध्यक्ष भोमरा मांझी और वरिष्ठ नेता के अलावा इसरो के अध्यक्ष रूपेश कटिहार, उपाध्यक्ष विकास गर्ग,सचिव गौतम महायत्रा ,राजीव कुमार, लेबर इंस्पेक्टर रूबी कुमारी, झामुमो के नेता गणेश महाली और कंपनी प्रबंधन के उच्च पदाधिकारियों ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मुख्य रूप से झामुमो के नेता गणेश चौधरी, जिला अध्यक्ष डॉ. सुवेंदु महतो, प्रखंड अध्यक्ष भोमरा मांझी, नगर अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान, अमृत महतो , कृष्ण बास्के, बबलू प्रधान, शंकर मुखी, जगदीश महतो सहित सैकङों की संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित थे।

समझौते के अनुसार, कंपनी ने स्किल्ड और अनस्किल्ड वर्करों को श्रेणीवार विभाजित कर श्रम अधिनियम के तहत न्यूनतम मजदूरी का भुगतान करने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही जिन मजदूरों को अब तक न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन दिया जा रहा था, उनके बकाया भुगतान, ईएसआई, पीएफ और बोनस की भी व्यवस्था पर प्रबंधन ने हामी भरी।

हालाँकि वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, पर सरायकेला–खरसावाँ के जिला लेबर कमिश्नर (डीएलसी) अविनाश ठाकुर ने स्पष्ट किया कि जिन मजदूरों को अब तक न्यूनतम मजदूरी से कम मिलती रही, वे अपने बकाया के लिए डीएलसी कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं या आवश्यक होने पर न्यायालयीन डिका में अपना दावा दाखिल कर सकते हैं। डीएलसी ने बताया कि समझौते के बावजूद जिस किसी मजदूर को भुगतान में गड़बड़ी महसूस हो, उसके पास विधिक विकल्प मौजूद हैं। डीएलसी कार्यालय पर दावा दर्ज कराने या श्रम अदालत में अपील कर सकते है।

मजदूरों ने प्रारंभिक रूप से समझौते का स्वागत किया और आंदोलन समाप्त कर दिया, पर स्थानीय नेता और मजदूर समुदाय अभी भी प्रबंधन के वादों पर नजर रखे हुए हैं। वे जल्द ही बकाया भुगतान और नियमित वेतन सुनिश्चित होने तक सतर्क रहने का संकेत दे रहे हैं।

इसरो के अध्यक्ष रूपेश कटिहार ने बताया कि मजदूर की समस्याओं का समाधान करते हुए आज सौहार्दपूर्ण वातावरण में समझौता संपन्न हो गया। उन्होंने बताया कि प्रबंधन की जो कुछ कमी थी, उसे दूर कर दिया गया है। अब मजदूरों का जो हक बनता है उसे प्रबंधन देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन और मजदूर दोनों एक दूसरे का पूरक हैं इसलिए औद्योगिक शांति और क्षेत्र के विकास के लिए आपसी तालमेल बनाकर औद्योगिक विकास के लिए काम करेंगे।

स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपायुक्त ने की समीक्षा।

स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत संचालित योजनाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपायुक्त ने की समीक्षा।

सरायकेला-खरसावां

केंद्रों में आमजनों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता, सभी पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे : उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां

प्रत्येक प्रखंड से उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक स्वास्थ्यकर्मी को 15 अगस्त के जिला स्तरीय समारोह में किया जाएगा सम्मानित : उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां


समाहरणालय स्थित सभागार में उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. नकुल चौधरी, सभी एमओआईसी, डीपीएमयू, बीपीएमयू एवं अन्य संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में उपायुक्त द्वारा विगत बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की गई तथा स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यप्रणाली, आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता एवं आमजनों को गुणवत्तापूर्ण तथा सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

उपायुक् ने कहा कि जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र लाभुक तक स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचे। इसके लिए सभी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।

उपायुक्त ने सभी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को निर्धारित रोस्टर के अनुसार समय पर उपस्थित होकर नियमित रूप से बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नियमित समीक्षा एवं मॉनिटरिंग के माध्यम से कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही सभी स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में आयुष्मान भारत योजना की समीक्षा करते हुए अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बनाकर उन्हें कैशलेस उपचार का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही टेलीमेडिसिन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाते हुए दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।

मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले के सभी संवेदनशील एवं पीवीटीजी बहुल क्षेत्रों में नियमित रूप से मास सर्वे  संचालित कर संभावित एवं चिन्हित मलेरिया मरीजों की समय पर पहचान सुनिश्चित की जाए तथा सभी चिन्हित मरीजों का निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप समुचित उपचार किया जाए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में नियमित कीटनाशक छिड़काव, मच्छरजनित रोगों की सतत निगरानी एवं नियंत्रणात्मक उपायों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को विभिन्न सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) माध्यमों के जरिए आमजनों को मलेरिया के लक्षण, बचाव के उपाय, समय पर जांच एवं उपचार के महत्व, मच्छरदानी के नियमित उपयोग, घर एवं आसपास साफ-सफाई बनाए रखने तथा जलजमाव की रोकथाम के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि जिले में मलेरिया संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एक्सपायरी दवाओं की नियमित जांच, उपलब्ध दवाओं का स्टॉक मिलान, दवाओं का सुरक्षित एवं वैज्ञानिक रख-रखाव तथा एक्सपायरी दवाओं का प्रचलित नियमों के अनुरूप समयबद्ध विनष्टीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित साफ-सफाई बनाए रखने, मरीजों के बैठने हेतु पर्याप्त संख्या में कुर्सी एवं बेंच की व्यवस्था, निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा लाइट, पंखा सहित अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जून माह की कार्य प्रगति की समीक्षा के क्रम में चिकित्सकों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (सीएचओ) द्वारा किए गए कंसल्टेशन की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा में शून्य (0) कंसल्टेशन दर्ज करने वाले दो चिकित्सकों के वेतन भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए गए। वहीं, जून माह में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कम कंसल्टेशन प्रतिशत दर्ज करने वाले चिकित्सकों एवं सीएचओ को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस निर्गत करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान बेहतर कंसल्टेशन एवं स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (सीएचओ) को उपायुक्त द्वारा मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।

बैठक के अंत में उपायुक्त ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा आमजनों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी पूर्ण तत्परता, संवेदनशीलता एवं जवाबदेही के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें तथा मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

उपायुक्त ने बताया कि आगामी 15 अगस्त को आयोजित जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर जिले के प्रत्येक प्रखंड से उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक स्वास्थ्यकर्मी (चिकित्सक/एएनएम/जीएनएम/सहिया में से किसी एक) को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से जनसेवा की भावना के साथ उत्कृष्ट कार्य करते हुए जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।

यह सड़क नहीं ईचागढ़ प्रखंड वासियों की जिंदगी का हाल है जिस सड़क पर चलना है उसी का हाल बेहाल है।

यह सड़क नहीं ईचागढ़ प्रखंड वासियों की जिंदगी का हाल है जिस सड़क पर चलना है उसी का हाल बेहाल है।

सरकार कहती है स्पीड पर कंट्रोल रखो कभी ना होगा कोई ग़म सड़क पर बने गड्ढे खुद ही स्पीड ब्रेकर का काम करती है अब क्या घर से निकलना बंद कर दे हम:-  ग्रामीण

बदहाल सड़क से ग्रामीण परेशान, एक सप्ताह का अल्टीमेटम, सड़क का मरमत्तीकरण नहीं होने से होगा धानरोपण।

सरायकेला/ईचागढ़

साथियों आपने और हम सभी ने अक्सर यह कहते सुना होगा कि जब सामने गड्ढे हो तो गड्ढे को फांद कर जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए वरना हमारे बदन पर भी कीचड़ लग सकती है। इसीलिए लोग सलाह देते हैं के गड्ढे के बगल से हमें गुजर जाना चाहिए। लेकिन जब सड़क पर गड्ढे और कीचड़ के सिवा और कुछ ना हो तो फिर स्थानीय निवासियों को कीचड़ के रास्ते से ही गुजरना मजबूरी हो जाती है।

साथियों पुराने समय में राजतंत्र था और एक राजा के लिए उसकी प्रजा की सुख सुविधाएं सर्वोपरि हुआ करती थी। आज की तारीख में देश की जनता देश के प्रधानमंत्री राज्य के मुख्यमंत्री अथवा स्थानीय विधायक को अपने राजा के तौर पर देखती है और यह सोचती है की उसका राजा उसके हितों के बारे में सोंचेगा उसे हर सुख सुविधा मुहैया कराएगा और यही सोंचकर यही सोंच लेकर जनता घंटों लाइन में लगकर कड़ी धूप में खड़े होकर अपना कीमती वोट देकर अपना एक विधायक का चुनाव करती है। और खुद के द्वारा चुने गए विधायक की जीत पर खुशियां मानती है मिठाइयां बांटते हैं और यह सोचती है कि अब अच्छे दिन आएंगे। लेकिन क्या हो जब उनके सपने कीचड़नुमा खराब सड़क में तब्दील हो जाए तब आप सोंच सकते हैं उस जानता के मन में किस तरह की भावना उत्पन्न हो सकती है।

जी हां साथियों ऊपर लिखे गए हृदय विदारक शब्दों का जीता जागता सबूत ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में देखने को मिलता है जहां पर कीचड़नुमा बदहाल सड़क से क्षेत्र वासियों का जीना मुहाल हो चुका है। खराब सड़क और विधायक द्वारा किए गए वादों को ना निभाए जाने से जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है लोग खराब सड़क पर धान रोपनी करने तक की बात कह रहे हैं।

ताजा मामला ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के सोड़ो पंचायत के अंतर्गत पड़ने वाले हाड़ात गांव का है जहां पर भारी बारिश के कारण खराब सड़क और जल जमाव से ग्रामीणों का पैदल चलना और वाहनों का निकलना मुहाल चुका है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भारी परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है।

सूत्र बताते हैं कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उक्त खराब सड़क की समस्या के निवारण के लिए ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक सविता महतो सहित ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी सह आजसू नेता हरेलाल महतो, जेएलकेएम नेता सह पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई थी। इसके बावजूद भी सड़क मरम्मत नहीं हो पाई। दो पहिया और अन्य वाहनों के साथ-साथ पैदल चलने वालों को भी काफी कठिनाई हो रही है।

सविता महतो, विधायक, ईचागढ़
पूर्व प्रत्याशी सह आजसू नेता, हरेलाल महतो
जेएलकेएम नेता सह पूर्व प्रत्याशी, तरुण महतो

वहीं इस मामले पर स्थानीय ग्रामीण संजय कुमार महतो ने बताया कि हाड़ात टोला पहाड़धार के लोहरा टोला का रास्ता इतना बेहाल हो चुका है कि स्कूली बच्चों से लेकर के बूढ़े बुजुर्गों तक का निकलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक सहित अन्य समाजसेवियों को इस संबंध में अवगत कराया गया है, परंतु अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण लोगों को रोजाना जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं विभाग से जल्द से जल्द समस्या का निवारण करने का अनुरोध किया है। साथ ही ग्रामीणों ने एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है और कहा है कि सड़क का मरमत्तीकरण नहीं होने से सड़क पर ही धान रोपनी का कार्यक्रम किया जाएगा और सड़क को बंद कर दिया जाएगा।

संजय कुमार महतो, ग्रामीण

वहीं इस मामले पर ईचागढ़ प्रखंड के उपप्रमुख दीपक कुमार साव ने कहा कि ग्रामीणों की ओर से सड़क की समस्या की सूचना लगातार मिल रही है पूर्व में भी मैंने निजी स्तर से सड़क को चलने लायक बनाया था। इस वर्ष भी निजी स्तर से सड़क का मरम्त्तीकरण किया जाएगा।

विद्यालय के पास काजू बागान में पहुंचे दो दतैल हाथी, मचा हड़कंप

विद्यालय के पास काजू बागान में पहुंचे दो दतैल हाथी, मचा हड़कंप

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के पिलीद स्थित अनुग्रह नारायण (एएन) प्लस टू उच्च विद्यालय के समीप काजू बागान में शनिवार को दो दतैल हाथियों के पहुंच जाने से विद्यालय परिसर और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। हाथियों की मौजूदगी से छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों में भय का माहौल बन गया। विद्यालय के पास हाथियों के भटककर पहुंचने के कारण बच्चे डर के साये में स्कूल पहुंचे। कई अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए।

हाथियों की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों और राहगीरों की भीड़ उन्हें देखने के लिए जुट गई। दिनभर लोगों का जमावड़ा लगा रहा, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई। हाथियों के डर से रघुनाथपुर–पिलीद सड़क पर कुछ समय के लिए आवागमन भी प्रभावित गया। लोग सावधानी बरतते हुए वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करते देखे गए।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के बिल्कुल समीप हाथियों की मौजूदगी से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने तथा विद्यालय और आसपास के गांवों में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। लोगों ने अपील की है कि वन विभाग लगातार निगरानी रखे, ताकि हाथियों और ग्रामीणों के बीच किसी प्रकार का टकराव न हो और जन-धन की हानि से बचा जा सके। सुचना मिलते ही प्रभारी वनपाल कैलाश महतो भी हाथियों का सुधी लेने पहुंचे और उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि रात को टीम लगाकर हाथियों को जंगल की ओर भगाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने लोगों को हाथियों से छेड़छाड़ नहीं करने एवं सतर्क रहने का अपील किया।

आदित्यपुर नगर निगम की चौथी बोर्ड बैठक संपन्न।

आदित्यपुर नगर निगम की चौथी बोर्ड बैठक संपन्न।

सरायकेला/आदित्यपुर

मेयर संजय सरदार की अध्यक्षता में शनिवार को आदित्यपुर नगर निगम की चौथी बोर्ड बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अहम निर्णय लिए गए।

वहीं बैठक में नगर निगम क्षेत्र में कचरा संग्रहण की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के माध्यम से नई कचरा गाड़ियों की खरीद की जाएगी। साथ ही सफाई व्यवस्था का वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष मूल्यांकन कराने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से जुड़ी एक निजी एजेंसी की सेवाएं लेने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ साथ बैठक में कचरा प्रबंधन को आधुनिक स्वरूप देने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ-साथ उससे बायोगैस और बिजली उत्पादन की संभावनाओं पर काम करने की योजना बनाई गई, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके। यह जानकारी नगर आयुक्त एजाज अनवर ने दी।

इस दौरान सभी वार्ड पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति, सड़क, नाला और पुलिया निर्माण जैसी समस्याएं को बोर्ड के समक्ष रखते हुए अपने वार्डों में बुनियादी सुविधाओं को शीघ्र दुरुस्त करने की मांग की।

वहीं इस बैठक में उपस्थित मेयर संजय सरदार ने कहा कि नगर निगम की पहली प्राथमिकता आम जनता को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि पानी, बिजली और सफाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं में सुधार के लिए निगम ने एक माह का विशेष लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि सभी वार्डों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे। वहीं सड़क, नाला और पुलिया निर्माण कार्यों को उपलब्ध बजट और फंड के आधार पर प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। बैठक में डिप्टी मेयर अंकुर सिंह, नगर आयुक्त एजाज अनवर तथा निगम के सभी 35 वार्डों के पार्षद मौजूद रहे।

सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतरगत गोविंदपुर फुटबॉल टूर्नामेंट में खेल प्रतिभाओं का सम्मान, कृष्णा बास्के और के.पी. सोरेन ने खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह।

सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतरगत गोविंदपुर फुटबॉल टूर्नामेंट में खेल प्रतिभाओं का सम्मान, कृष्णा बास्के और के.पी. सोरेन ने खिलाड़ियों का बढ़ाया उत्साह।

सरायकेला/राजनगर

राजनगर प्रखंड अंतर्गत गोविंदपुर स्थित पाण्डुगीति मैदान में खेरबार खेलोन्ड माडवा, पाण्डुगीति के तत्वावधान में फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में आसपास के कई गांवों की टीमों ने भाग लेकर खेल प्रतिभा और खेल भावना का शानदार प्रदर्शन किया।

समापन समारोह में झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य कृष्णा बास्के एवं वरिष्ठ नेता सह शिक्षाविद के.पी. सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और विजेता व उपविजेता टीमों को संयुक्त रूप से पुरस्कार प्रदान कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर के.पी. सोरेन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतियोगिताएं युवाओं की प्रतिभा को निखारने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आपसी भाईचारे और स्वस्थ समाज निर्माण का आधार है। उन्होंने युवाओं से नशे और सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर खेल एवं शिक्षा को जीवन का लक्ष्य बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लगातार होने चाहिए ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। वहीं कृष्णा बास्के ने कहा कि गांवों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें उचित मंच और प्रोत्साहन देने की है। उन्होंने कहा कि खेल से शारीरिक और मानसिक विकास होता है तथा युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित होती है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा और ऐसे आयोजनों को प्रोत्साहित करने का प्रयास जारी रहेगा। प्रतियोगिता के दौरान बड़ी संख्या में खेल प्रेमियों, ग्रामीणों और युवाओं की उपस्थिति रही। पूरे आयोजन में खिलाड़ियों ने खेल भावना का परिचय देते हुए रोमांचक मुकाबले खेले। अंत में आयोजकों ने मुख्य अतिथियों सहित सभी खिलाड़ियों, अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस तरह की प्रतियोगिताओं के नियमित आयोजन का संकल्प लिया।

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