आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम अंतर्गत केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी द्वारा विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण, दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश।
सरायकेला-खरसावां
आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम (ABP) के अंतर्गत नीति आयोग द्वारा सरायकेला–खरसावां जिले के लिए नामित केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी विकाश सिंह, निदेशक, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा आज सरायकेला एवं गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र का भ्रमण करते हुए विभिन्न पंचायतों एवं संस्थानों का निरीक्षण किया गया।
भ्रमण के क्रम में सरायकेला प्रखंड परिसर स्थित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई, पथनमारा पंचायत अंतर्गत धोबाडीह ग्राम स्थित आंगनवाड़ी केंद्र, इटाकुदर पंचायत अंतर्गत बुंडू ग्राम स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर, सरायकेला प्रखंड अंतर्गत तीतीरबिला पंचायत स्थित राजकीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र तथा गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत बिरबांश पंचायत भवन एवं उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बिरबांश का स्थलीय निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई में पशुओं के उपचार एवं टीकाकरण की व्यवस्था, आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की शिक्षा एवं पोषण स्थिति, आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं गुणवत्ता, राजकीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र में पशुपालन सेवाओं की कार्यशीलता तथा पंचायत भवन एवं शैक्षणिक संस्थान में आधारभूत संरचना, स्वच्छता, उपस्थिति एवं शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन की स्थिति का अवलोकन किया गया।
निरीक्षण के क्रम में केंद्रीय प्रभारी पदाधिकारी द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि पशुपालन, स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा से संबंधित सेवाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से सुनिश्चित किया जाए। आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता, नियमित उपस्थिति एवं सेवा गुणवत्ता बनाए रखने, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से उपचार एवं टीकाकरण सेवाओं का सुदृढ़ीकरण करने तथा शैक्षणिक संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही आकांक्षी जिला कार्यक्रम अंतर्गत गतिविधियों की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कार्रवाई करने पर विशेष बल दिया गया।
निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त सुश्री रीना हांसदा, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार, रोहित कुमार उद्योग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बेथल होम बेनाशोल में क्रिसमस कोरल का हुआ भव्य आयोजन, गीत-संगीत से गूंजा परिसर
पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
क्रिसमस के पावन अवसर पर बेथल होम, बेनाशोल में क्रिसमस कोरल कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर ईसा मसीह के जन्म की खुशी में बच्चों एवं युवाओं द्वारा मधुर क्रिसमस कोरल (समूह गीत) प्रस्तुत किए गए, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण से सराबोर हो गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रभु यीशु के जन्म से जुड़े संदेशों को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कोरल गायन में शांति, प्रेम, भाईचारा और मानवता का संदेश दिया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने खूब सराहा। बच्चों की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिन्होंने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ क्रिसमस गीत गाए। इस मौके पर बेथल होम के पदाधिकारियों ने कहा कि क्रिसमस कोरल का उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी मेल-मिलाप को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में स्थानीय लोग, अभिभावक एवं ईसाई समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अंत में सभी ने एक-दूसरे को क्रिसमस की शुभकामनाएं दीं और शांति व खुशहाली की कामना की।
धोबनी पंचायत में पेसा दिवस पर विशेष ग्राम सभा, ग्रामीणों को पेसा एक्ट की जानकारी, जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण
पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
बुधवार को मुसाबनी प्रखंड अंतर्गत धोबनी पंचायत भवन में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस ग्राम सभा में ग्रामीणों को पेसा एक्ट (पंचायत विस्तार अनुसूचित क्षेत्र अधिनियम) से संबंधित ग्राम सभा की भूमिका, अधिकार एवं महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ग्राम सभा में ठंड को देखते हुए पंचायत के जरूरतमंद लोगों के बीच मुखिया एवं पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा कंबल का वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर पंचायत के मुखिया रामचंद्र मुर्मू, वार्ड सदस्य कमला देवी, काजल बास्के, पोद्दावती सरदार, ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
अरावली पर्वतमाला विवाद- खनन संरक्षण और सुप्रीम कोर्ट के नए नियमों का समग्र अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण
अरावली पर्वतमाला भारतीय उपमहाद्वीप की पर्यावरणीय रीढ़, जलवायु संतुलन का आधार और रेगिस्तान को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है
अरावली पर्वतमाला विवाद को खनन बनाम पर्यावरण की सरल बहस में सीमित करना गलत होगा, इस मुद्दे पर केवल सोशल मीडिया के नारों पर नहीं बल्कि तथ्यों विज्ञान और कानून के आधार पर संवाद हो- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
गोंदिया/महाराष्ट्र
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वैश्विक स्तरपर अरावली पर्वतमाला केवल भारत की एक भौगोलिक संरचना नहीं है,बल्कि यह भारतीय उपमहाद्वीप की पर्यावरणीय रीढ़,जलवायुसंतुलन का आधार और रेगिस्तान को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है। लगभग 200 करोड़ वर्ष पुरानी यह पर्वतमाला मानव सभ्यता से भी कहीं अधिक प्राचीन है। किंतु विडंबना यह है कि आधुनिक विकास,खनन,शहरीकरण और नीतिगत अस्पष्टताओं के चलते आज यही पर्वतमाला अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। हाल ही में खनन से जुड़े नए नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लेकर सोशल मीडिया पर # सेव अरावाल्ली जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए जा रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि ये नियम अरावली को बचाने के बजाय उसे कमजोर करेंगे।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि इस पृष्ठभूमि में यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे विवाद का तथ्यात्मक, कानूनी वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से सोशल प्रिंटर इलेक्ट्रिक मीडिया पर चल रहे विचारों के आदान- प्रदान व डिबेट क़ा समग्र विश्लेषण किया जाए, जो मीडिया में आ रही जानकारी के आधार पर है।
साथियों बात कर हम अरावली पर्वतमाला, भौगोलिक विस्तार और ऐतिहासिक महत्व को समझने की करें तो अरावली पर्वतमाला भारत के पश्चिमी भाग में गुजरात, राजस्थान,हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 1,47,000 वर्ग किलोमीटर है।यह पर्वतमाला गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर दिल्ली तक जाती है। अरावली की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर (1722 मीटर) माउंट आबू में स्थित है। यह पर्वतमाला थार रेगिस्तान को पूर्व की ओर फैलने से रोकती है और उत्तर भारत के भूजल स्तर, मानसून पैटर्न और जैव विविधता को संतुलित रखने में निर्णायक भूमिका निभाती है।इतिहास की दृष्टि से अरावली ने हड़प्पा सभ्यता, राजपूत राज्यों और मुगल काल में भी जल स्रोतों,खनिजों और प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य किया।अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिक मानकों के अनुसार इतनी प्राचीन पर्वतमालाएं पृथ्वी पर बहुत कम बची हैं, इसलिए अरावली का संरक्षण केवल भारत नहीं बल्कि वैश्विक पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है।खनिज संपदा और खनन का आकर्षणअरावली पर्वतमाला खनिज संसाधनों से भरपूर है।यहां तांबा, जिंक, लेड, ग्रेनाइट, मार्बल और कॉपर जैसे मूल्यवान खनिज पाए जाते हैं। औद्योगिक विकास और निर्माण क्षेत्र की बढ़ती मांग ने अरावली को खनन उद्योग के लिए अत्यंत आकर्षक बना दिया।विशेषकर राजस्थान और हरियाणा में दशकों तक अनियंत्रित और अवैध खनन हुआ, जिससे पहाड़ों का क्षरण, जंगलों का विनाश और जल स्रोतों का सूखना शुरू हो गया।यही वह बिंदु है जहां विकास और संरक्षण के बीच टकराव पैदा होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही बहस अमेज़न, एंडीज़ और अफ्रीकी रिफ्ट वैली में देखी गई है।
साथियों बात अगर हम चार राज्यों, चार अलग- अलग नियम,भ्रम और पारदर्शिता का संकट इसको समझने की करें तो, अरावली पर्वतमाला चार राज्यों में फैली होने के कारण हर राज्य के अपने-अपने खनन और पर्यावरणीय नियम थे। कहीं पहाड़ियों की परिभाषा अलग थी, कहीं ऊंचाई की सीमा नहीं थी, तो कहीं वन क्षेत्र की पहचान अस्पष्ट थी।इस असमानता के कारण न केवलप्रशासनिक भ्रम पैदा हुआ बल्कि खनन माफिया ने भी इसी अस्पष्टता का लाभ उठाया।अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण शासन (इंविरोंमेन्टल गवर्नेंस) के सिद्धांतों के अनुसार, साझा प्राकृतिक संसाधनों के लिए एकरूप नियमों की आवश्यकता होती है। इसी सिद्धांत के तहत अरावली के लिए भी एक समान नीति की मांग लंबे समय से उठ रही थी।
साथियों बात अगर हम सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप- न्यायपालिका की निर्णायक भूमिका इसको समझने की करें तो, पर्यावरण संरक्षण के मामलों में भारतीय सुप्रीम कोर्ट की भूमिका वैश्विक स्तर पर सराही जाती है। गंगा, यमुना, ताज ट्रेपेज़ियम और वनों के संरक्षण में कोर्ट के हस्तक्षेप मिसाल रहे हैं। अरावली के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीरता को समझते हुए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया।इस समिति में पर्यावरण मंत्रालय, फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया,चारों राज्यों के वन विभाग के अधिकारी और स्वयं सुप्रीम कोर्ट के प्रतिनिधि शामिल थे। यह संरचना अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण आयोगों के अनुरूप थी, जहां नीति, विज्ञान और न्याय का सटीक समन्वय होता है। समिति की सिफारिशें और नवंबर 2025 की मंजूरी-समिति ने विस्तृत सर्वेक्षण,उपग्रह चित्रों, भूवैज्ञानिक डेटा और पर्यावरणीय प्रभावआकलन के आधार पर अपनी सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट को सौंपीं।नवंबर 2025 में कोर्ट ने इन सिफारिशों को मंजूरी दी।यही वे सिफारिशें हैं जो आज विवाद का केंद्र बनी हुई हैं।पहली सिफारिश,100 मीटर ऊंचाई की परिभाषा-नई व्यवस्था के अनुसार, सिर्फ 100 मीटर या उससे ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली पर्वतमाला का हिस्सा माना जाएगा।ऐसे क्षेत्रों में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।आलोचकों का कहना है किइससे 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को खनन के लिए खोल दिया जाएगा।किंतु समिति का तर्क है कि वैज्ञानिक रूप से पर्वतमाला की पहचान ऊंचाई, निरंतरता और भूगर्भीय संरचना से होती है।अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिक मानकों में भी पर्वत और पहाड़ी के बीच यही अंतर किया जाता है।दूसरी सिफारिश,500 मीटर निरंतरता का सिद्धांत-दूसरा महत्वपूर्ण नियम यह है कि यदि 100 मीटर से ऊंची दो पहाड़ियों के बीच की दूरी 500 मीटर से कम है, तो उस पूरे क्षेत्र को अरावली पर्वत श्रृंखला माना जाएगा और वहां खनन नहीं होगा।यहनियम पर्वतमाला की भौगोलिक निरंतरता को बचाने के लिए है, ताकि खनन के कारण पहाड़ टुकड़ों में न टूट जाएं।यह सिद्धांत यूरोपियन अल्प्स और अमेरिकी अपलाचियन पर्वतमालाओं में भी अपनाया जाता है।सरकार का पक्ष- 90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन नियमों के लागू होने से अरावली का करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षित हो जाएगा। खनन केवल 0.19 प्रतिशत क्षेत्र,यानी लगभग 278 वर्ग किलोमीटर में ही संभव होगा। सरकार का दावा है कि इससे अवैध खनन रुकेगा, नियमों में स्पष्टता आएगी और पर्यावरणीय निगरानी बेहतर होगी।
साथियों बातें कर हम सोशल मीडिया बनाम तथ्य- # सेव अरावल्ली विवाद इसको समझने की करें तो, सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों में भावनात्मक अपील अधिक और तथ्य कम दिखाई देते हैं। कई पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि अरावली को कानूनी रूप से खत्म किया जा रहा है,जबकि वास्तविकता यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश संरक्षण को कानूनी मजबूती प्रदान करते हैं।यह प्रवृत्ति वैश्विक स्तर पर भी देखी जाती है, जहां जटिल पर्यावरणीय नीतियों को सरल नारों में प्रस्तुत कर भ्रम फैलाया जाता है। साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय तुलना,भारत की नीति कहां खड़ी है इसको समझने की करें तो,यदि हम ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और चिली जैसे देशों से तुलना करें, तो वहां खनन की अनुमति केवल सीमित नियंत्रित और वैज्ञानिक रूप से परिभाषित क्षेत्रों में दी जाती है। भारत में अरावली के लिए बनाए गए नए नियम इसी वैश्विकमानक के अनुरूप हैं।वास्तविक चुनौती,नियम नहीं,उनका क्रियान्वयन अरावली संकट की जड़ केवल नियमों में नहीं,बल्कि उनके ईमानदार क्रियान्वयन में है।यदिस्थानीय प्रशासन, पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया और निगरानी तंत्र मजबूत नहीं हुए, तो सबसे अच्छे नियम भी निष्प्रभावी हो सकते हैं।
संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि संरक्षण बनाम भ्रम,अरावली पर्वतमाला विवाद को केवल खनन बनाम पर्यावरण की सरल बहस में सीमित करना गलत होगा। सुप्रीम कोर्ट के नए नियम, यदि सही संदर्भ में देखें, तो वे अरावली को बचाने का एक ठोस कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। आवश्यकता है कि इस मुद्दे पर तथ्य, विज्ञान और कानून के आधार पर संवाद हो, न कि केवल सोशल मीडिया के नारों पर।अरावली का संरक्षण केवल आज की पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली सदियों के लिए भारत की जल, जलवायु और जीवन सुरक्षा का प्रश्न है।
झारखंड शिक्षा परियोजना कि ओर से एसपीटीएम कार्यक्रम में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के ए एन प्लस टू उच्च विद्यालय पिलीद एवं स्वामी श्रद्धानंद प्लस टू उच्च विद्यालय टीकर , कुकड़ू प्रखंड के प्लस टू उच्च विद्यालय तिरूलडीह में झारखंड शिक्षा परियोजना सरायकेला-खरसावां के तत्वावधान में शिक्षक -अभिभावक विशेष बैठक का आयोजन किया गया।
प्लस टू उच्च विद्यालय तिरूलडीह में उप विकास आयुक्त रिना हांसदा, श्रद्धानंद प्लस टू उच्च विद्यालय टीकर में डीटीओ गिरजा शंकर महतो, एएन प्लस टू उच्च विद्यालय पिलीद में मुखिया लक्ष्मी देवी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यालयों में शिक्षक -अभिभावक मीट में बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति, शिक्षक -अभिभावक के बीच अच्छा तालमेल , बेहतर प्रदर्शन आदि को लेकर चर्चा किया गया। शत प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करने वाले बच्चों, प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने वाले, पढ़ाई में अधिक रूचि रखने वाले बच्चों व अभिभावकों को प्रशस्ती पत्र व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
वहीं एएन प्लस टू उच्च विद्यालय पिलीद में बच्चों ने स्वागत गीत व नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अभिभावकों के बीच मैजिक चेयर , बच्चों द्वारा कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। डीटीओ गिरजा शंकर महतो ने अपने संबोधन में कहा कि अभिभावक और शिक्षक का बेहतर तालमेल से बेहतर शिक्षण माहौल तैयार हो सकता है। उन्होंने अभिभावकों को समय पर और शत प्रतिशत बच्चों का उपस्थिति सुनिश्चित कराने में विद्यालय का सहयोग करने का अपील किया । मौके पर प्राचार्य मिताली, मिलन रक्षित, वरिष्ठ पत्रकार अरुण माझी,पंचानन पातर, दिलीप दास, अरूण महतो, सुबोध गोराई, हाराधन महतो दिप्ती कुमारी, गुरू चरण सरदार, राकेश भरद्वाज, स्वेता खलको आदि सैकड़ों अभिभावक उपस्थित थे।
झारखंड सरकार के सचिव एवं जोनल आईजी ने कार्यक्रम स्थलों का निरीक्षण करते हुए तैयारियों की समीक्षा की।
सरायकेला/आदित्यपुर
भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 29 दिसंबर को जमशेदपुर एवं आदित्यपुर आगमन प्रस्तावित है। माननीय राष्ट्रपति के कार्यक्रम के मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव- वाणिज्य कर विभाग, झारखंड सरकार अमिताभ कौशल तथा जोनल आईजी मनोज कौशिक द्वारा परिसदन जमशेदपुर में माननीय राष्ट्रपति के कार्यक्रम की तैयारियों हेतु समीक्षा बैठक की गई। उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम कर्ण सत्यार्थी, उपायुक्त सरायकेला खरसांवा नितिश कुमार सिंह, एसएसपी पूर्वी सिंहभूम पीयूष पांडेय, एसपी सरायकेला खरसावां मुकेश लुणायत समेत अन्य प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी बैठक में उपस्थित रहे ।
बैठक में परिभ्रमण मार्ग का मैपिंग करने, यातायात प्रबंधन, रास्ते से निर्माण सामग्री को हटाने, आवश्यकतानुरूप बेरिकेटिंग, पर्याप्त संख्या में दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी तथा पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति और ब्रिफिंग, रिहर्सल, पूरे क्षेत्र को नो फ्लाई जोन घोषित करने, प्रोटोकॉल का अनुपालन के संबंध में समीक्षा पर व्यवधानरहित कार्यक्रम संपन्न कराने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए ।
बैठक उपरांत सचिव एवं जोनल आईजी द्वारा करनडीह स्थित कार्यक्रम स्थल एवं एनआईटी जमशेदपुर के अलावे एयरपोर्ट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पदाधिकारियों द्वारा सुरक्षा एवं विधि व्यवस्था संधारण की समीक्षा की गई तथा अचूक रूप से सभी तैयारियों को ससमय पूर्ण करने का निदेश दिया गया । इस दौरान ग्रामीण एसपी श्री ऋषभ गर्ग, सिटी एसपी कुमार शिवाशीष, डीडीसी नागेन्द्र पासवान, एडीसी भगीरथ प्रसाद, नगर आयुक्त आदित्यपुर एवं उप नगर आयुक्त जेएनएसी, डीटीओ, ट्रैफिक डीएसपी तथा सरायकेला खरसावां जिला के भी संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे ।
रविवार को पिकनिक स्पॉट पर्यटकों से रहा गुलजार-बुरुडीह डैम में पिकनिक मानते लोगों ने खूब की मस्ती।
पूर्वी सिंहभूम/मुसाबनी
नए साल के आगमन से पहले ही लोगों ने अपने दोस्तों परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए बुरुडीह डैम एवं नरवा डैम के हसीन वादियों में पहुंचने लगे हैं। रविवार को लोग अपने दोस्त सगे-संबंधियों के साथ पिकनिक मनाने के लिये क्षेत्र के अलग-अलग लोकेशन पर पहुंच कर जमकर मस्ती की। पर्यटन स्थल बुरुडीह डैम,नरवा डैम में रविवार को सबसे अधिक भीड़ रही। गालूडीह बैराज सहित अन्य पिकनिक स्पॉट में बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाते देखे गये।
रविवार को बुरुडीह डैम में मुसाबनी के दर्जनों लोग सामूहिक पारिवारिक पिकनिक मनाने पहुंचे थे। पिकनिक के बहाने लोगों ने खूब मस्ती की बुरुडीह डैम की हसीन वादियों में वोटिंग एवं फोटोग्राफी का लोगों ने खूब आनंद उठाया।पिकनिक स्पॉट पर लोगों ने नाचने गाने के साथ लजीज व्यंजन बनाकर एक-दूसरे के साथ भोजन का आनंद वन भोज के रुप मे लिया।
पिकनिक में पहुंचे महिलाएं युवक युवती व बच्चों ने सेल्फी लेते देखे गए। नरवा व बुरुडीह पिकनिक स्पॉट पर डांस व सैर-सपाटे का चारो ओर नजारा दिख रहा था।रविवार को स्कूली बच्चों को भी पिकनिक का आनंद उठाते देखा गया। मुसाबनी फैमिली पिकनिक में साहित्य सांस्कृति संघ,जगन्नाथ महिला समिति, भोलेनाथ इण्डेन के संचालक संगीता मंडल, कमलकान्त मंडल, प्रतिभा साव सहित दर्जनों गन्यमान्य लोग शामिल हुए।
उपायुक्त की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया।
सरायकेला-खरसावां
प्राप्त आवेदनों के त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश…
समाहरणालय भवन स्थित कार्यालय कक्ष में उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में साप्ताहिक जनता दरबार का आयोजन किया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों, अंचलों एवं नगर क्षेत्रों से आए नागरिकों द्वारा प्रस्तुत जन-अभ्यावेदनों को सुनते हुए उपायुक्त ने प्रत्येक मामले की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। आवेदकों ने अपने–अपने क्षेत्रों में उत्पन्न विविध जनसमस्याओं, आधारभूत सुविधाओं की कमी तथा कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहने की स्थिति से उपायुक्त को अवगत कराया।
जनता दरबार में प्रस्तुत प्रमुख प्रकरणों में जनगढना मे अनियमिता बरतने पर आपत्ति करने के सबंध मे,नीमडीह प्रखंड से आये गुलाम मुस्तफ़ा ने अपने ही जमींन पर बने विद्यालय मे रोजगार के सम्बन मे, खरसावां प्रखंड मे अंचल द्वारा प्रशासन के सहयोग से सीमांकन करने के सम्बन्ध मे मामले भी सामने आए। इसके अतिरिक्त ग्राम प्रधानों के सम्मान राशि का नियमित एवं समयबद्ध भुगतान, सरायकेला नगर क्षेत्र के हाट बाजार में शुक्रवार को लगने वाले भीषण जाम की समस्या, तथा हाउसिंग बोर्ड, आदित्यपुर की ली गई भूमि पर अवैध कब्जे से संबंधित शिकायतें भी दर्ज की गईं। साथ ही भूमि संबंधित विभिन्न मामलों समेत विभिन्न विभाग से सम्बन्धित आवेदन भी प्राप्त हुए।
उपायुक्त ने विभागीय एवं अंचल स्तरीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता दरबार में प्राप्त सभी आवेदनों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रकरणों में स्थलीय सत्यापन आवश्यक है, वहाँ संबंधित अधिकारी त्वरित निरीक्षण कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन उपलब्ध कराएँ, ताकि जनसमस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि जनसुविधा एवं जनकल्याण से संबंधित योजनाओं के लंबित मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए तथा पात्र लाभुकों को समय पर लाभ उपलब्ध कराना प्रत्येक अधिकारी की जवाबदेह जिम्मेदारी है।
रामकृष्णा फाउंडेशन के CSR बैनर तले रामकृष्णा फोर्जिंग्स लिमिटेड, प्लांट–7, दुगनी में विशाल रक्तदान शिविर आयोजित।
सरायकेला/खरसावां
रामकृष्णा फाउंडेशन के CSR बैनर तले तथा एमजीएम अस्पताल के सहयोग से रामकृष्णा फोर्जिंग्स लिमिटेड के प्लांट–7, दुगनी परिसर में एक विशाल रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में कंपनी के कर्मचारियों एवं सहयोगियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कुल 544 यूनिट रक्तदान कर मानवता की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
रक्तदान शिविर का उद्घाटन सिविल सर्जन, चाईबासा डॉ. सरयू प्रसाद सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर एमजीएम अस्पताल एवं सदर अस्पताल के उपाधीक्षक श्री नकुल कुमार चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। सिविल सर्जन ने रक्तदान शिविर की व्यवस्थाओं को देखा एवं रक्तदाताओं से बातचीत भी की। उन्होंने रामकृष्णा फोर्जिंग लिमिटेड द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर को अभूतपूर्व बताया एवं रक्तदाताओं के लिए किये गए व्यवस्थाओं की मुक्त कंठ से प्रसंशा की।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रामकृष्णा फोर्जिंग्स लिमिटेड के कॉरपोरेट लीगल हेड दिनेश पारिख, कॉरपोरेट सेफ्टी हेड नवीण सिन्हा, रामकृष्णा कास्टिंग लिमिटेड के कॉरपोरेट सेफ्टी हेड संजय कुमार तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि मोहन सिन्हा उपस्थित रहे।
शिविर के सफल संचालन में मानव संसाधन प्रमुख रवि राजहंस, सेफ्टी इंचार्ज बासुकी नाथ झा, सेफ्टी ऑफिसर प्रभात कुमार, देवेंद्र विश्वकर्मा, कुणाल श्रीवास्तव, रिषिराज सिंहदेव, जयदेव झांगेल, निहारिका, सरिका, बिदेश गांगुली, दित्य प्रकाश एवं ललन सिंह का विशेष योगदान रहा।
अतिथियों ने रक्तदाताओं की सराहना करते हुए कहा कि रामकृष्णा फाउंडेशन द्वारा CSR गतिविधियों के अंतर्गत तथा एमजीएम अस्पताल के सहयोग से आयोजित इस प्रकार के रक्तदान शिविर समाज के प्रति कंपनी की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। कार्यक्रम का समापन सभी रक्तदाताओं, चिकित्सकीय टीम एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया।
(मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के सोड़ो पंचायत अंतर्गत बिस्टाटांड़ गांव में रविबार सुबह को जंगली हाथी द्वारा फसल को रौंद कर नष्ट कर दिया। बिस्टाटांड़ गांव निवासी किसान लक्ष्मण महतो और अधीर महतो के आलू की फसल को चट कर दिया।
ग्रामीण सह समाजसेवी निमाई चंद्र महतो ने बताया कि पिछले कोई दिनों से क्षेत्र में जंगली हाथी द्वारा उत्पात मचाया जा रहा है, जिससे किसान को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने वन विभाग से जंगली हाथी को इस क्षेत्र से भगाने और किसानों को जल्द मुआवाजा राशि भुगतान करने की मांग किया है।
22 वां एक दिवसीय डेढ़ लाख टंकियां फुटबॉल प्रतियोगिता में प्रेम होटल एन एच 33 ने किया खिताब पर कब्जा।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो) सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के टीकर हाईस्कूल मैदान में 22 वां एक दिवसीय डेढ़ लाख टंकिया फुटबॉल प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला नेताजी स्पोर्टिंग रेमता खुंटी एवं प्रेम होटल एन एच 33 के बीच खेला गया। प्रतियोगिता में प्रेम होटल एन एच 33 ने नेताजी स्पोर्टिंग रेमता खुंटी को पछाड़ कर खिताब पर कब्जा जमाया।
प्रथम विजेता टीम को डेढ़ लाख रुपए एवं ट्राफी , द्वितीय उप विजेता टीम को एक लाख 21 हजार रुपए एवं ट्राफी, तीसरे व चौथे स्थान पर रहे लालटु स्पोटिंग एवं डाक्टर स्पोर्टिंग चोगा को 25-25 हजार रुपए एवं ट्राफी देकर पुरस्कृत किया गया। खेल का उद्घाटन राजा प्रशांत कुमार आदित्यदेव राष्ट्रीय गीत एवं झंडा फहराकर किया गया। आयोजन समिति आर एफसी क्लब टीकर के द्वारा खेल मैदान, दर्शक दीर्घा एवं मंच को दुल्हन जैसा सजाया गया था।
प्रतियोगिता में विधायक सविता महतो, आजसू के केन्द्रीय महासचिव हरेलाल महतो, भाजपा नेता पाप्पु वर्मा आदि ने जनसमूह को संबोधित किया। मौके पर विधायक के भाई संजय महतो, प्रमुख गुरू पद मार्डी, खेल अध्यक्ष ललित मोहन घोष, सचिव दिवाकर कैवर्त, कोषाध्यक्ष गुरू दयाल शर्मा, अभिराम उरांव,बनमाली रजक, मुकेश गुप्ता, सुभाष महतो, अनिल सिन्हा, बासुदेव चटर्जी, श्यामापद, कार्तिक, परशुराम,खगेन्द्र प्रामाणिक,निमाई गोप, शक्ति महतो नरेंद्र गोप,मानिक घोष, राधानाथ, ताहिर अंसारी,फकीर प्रामाणिक, मधु गोप,भजोहरी महतो, मनोरंजन ठाकुर,फटीक गोराई, नकुल घोष, निर्मल गोराई आदि सदस्य उपस्थित थे।
दलदल में फंसे बीमार हाथी का इलाज के दौरान हुई मौत।
हाथीयों की मौत की संख्या में लगातार बढ़ोतरी से वन विभाग के पास बड़ी चुनौती।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो)
सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल वन क्षेत्र के नीमडीह प्रखंड के चातरमा गांव के कीचड़ नुमा खेत में गीरने से इलाज के दौरान करीब एक महीने से बीमारी से ग्रस्त एक हाथी की मौत हो गई। रविवार को पशु चिकित्सा पदाधिकारी का टीम द्वारा पोस्टमार्टम कर हाथी को बगल में ही दफनाया गया। हाथी की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने फुल अगरवत्ती से मृत हाथी का पूजा पाठ भी किया गया।मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को हाथी एक दलदल खेत में फंस गया और चाहकर भी दलदल से निकल नहीं पाया।
वन विभाग को सुचना मिलते ही रेंजर शशि प्रकाश रंजन,वन पाल राधारमण ठाकुर,राणा प्रताप, पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ के के चौधरी पहुंचे और हाथी चिकित्सकों का टीम द्वारा हाथी का इलाज प्रारंभ किया। वन पाल राधारमण ठाकुर से बात करने से बताया गया कि स्थानीय चिकित्सक एवं गुजरात के स्पेशल चिकित्सकों की टीम द्वारा हाथी का इलाज किया गया।
उन्होंने बताया कि 45 बोतल स्लाइन चढ़ाया गया। काफी प्रयास के बाद भी हाथी को बचाने में चिकित्सकों का दल नाकाम रहे।देर रात को हाथी की मौत हो गई। हांलांकि रात भर वन विभाग के पदाधिकारी घटनास्थल पर डटे रहे।बताया जा रहा है कि एक माह से बीमार चल रहे हाथी को ठीक करने के लिए 10 लाख रुपए वन विभाग द्वारा खर्च किया गया ।
दो वर्ष में 6 हाथीयों की विभिन्न घटनाओं से हुई है मौत।
दो वर्षों में ईचागढ, कुकड़ू एवं नीमडीह प्रखंड क्षेत्र में विभिन्न घटनाओं से 6 हाथियों की मौत हो गई है। वहीं बीते कई वर्षों के अंदर दर्जन भर हाथियों की मौत हो गई है। आए दिन हाथियों की विभिन्न कारणों से हो रही मौत वन विभाग की लापरवाही या तो हाथी मानव संघर्ष का नतीजा है,जो मृत्यु दर को रोकना वन विभाग के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा।