सरायकेला/कांड्रा
भरत सिंह की रिपोर्ट
लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, चुनाव से पहले हर एक प्रत्याशी ने आदिवासी का मुद्दा उठाया और आदिवासी के हित में कार्य करने की बात कही और आदिवासी के मुद्दे पर वोट वटोरने का काम किया और कहीं ना कहीं झारखंड में प्रत्याशियों ने जीत हासिल करने के लिए आदिवासियों को बड़ा मुद्दा बनाया। लेकिन सरकार द्वारा जनहित में निर्गत की गई पीएमईजीपी ऋण योजना का लाभ एक आदिवासी महिला को नहीं मिल पा रही है और आदिवासी महिला बैंक के चक्कर लगाते हुए काफी परेशान दिखाई दे रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैंक मैनेजर द्वारा एक आदिवासी लाभुक को पीएमईजीपी ऋण देने के नाम पर दिग्भ्रमित कर हरासमेंट किया जा रहा है जो कि कहीं ना कहीं अपराध का ही एक अंग है। और यह किसी भी सूरत में उचित नहीं है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैंक मैनेजर के खिलाफ कई बातें सामने आ रही है। आपको बताते चले कि बैंक ऑफ़ इंडिया कांड्रा ब्रांच में एक आदिवासी महिला द्वारा सभी उपर्युक्त दस्तावेज उपलब्ध कराने के बावजूद बैंक मैनेजर द्वारा अपने निजी स्वार्थ के लिए PMEGP लोन को कैंसिल कर दिया जाता हैं।
वहीं आदिवासी महिला ने पत्रकार को बताया कि बैंक मैनेजर की गाइडलाइंस पर हम पीएमईजीपी लोन ले कर व्यापार कर परिवार का भरण पोषण कर बैंक का ऋण चुकाना चाहते थे और अपने पैर पर खड़ा हो स्वालंबी बनना चाहते थे। बैंक ऑफ़ इंडिया कांड्रा ब्रांच के मैनेजर साहब के गाइडलाइंस पर मैंने प्रोजेक्ट रिपोर्ट बैलेंस शीट एवं इनकम टैक्स रिटर्न भी भरा साथी ही मुझे अन्य कई कागजातों की तैयारी करने में काफी पैसे खर्च हो गए,अंत में बैंक के काफी चक्कर लगाने के पश्चात बैंक मैनेजर द्वारा दो टूक शब्दों में कह दिया जाता है कि बैंक में स्टाफ की कमी होने के कारण हम लोन देने में असमर्थ हैं।
वहीं इस बात की जानकारी जिले के एलडीएम को भी थी ।
सुत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सरायकेला खरसावां के एलडीएम ने भी बैंक मैनेजर से कहा कि अगर प्रपोजल सही है और सभी गाइडलाइंस के अनुकूल है तो लोन देने में कोई खराबी नहीं है। ब्रांच मैनेजर ने एलडीएम की बात को नकारते हुए जनहित में अपनी गैर जिम्मेदाराना हरकतों से असंवैधानिक रूप से लोन को कैंसिल करते हुए आदिवासी महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए अपनी मनमानी कर ब्रांच मैनेजर ने कहा आपका लोन आपको नहीं मिल सकता है।
अब बात जनहित में आती है कि क्या बैंक में स्टाफ की कमी से बैंक का कारोबार नहीं चल पाएगा ? क्या यही नियम सभी बैंकों के लिए लागू है ? क्या आरबीआई का गाइडलाइंस यही है ? क्या सेबी का गाइडलाइंस यही है?
अगर नहीं तो बैंक ऑफ इंडिया कांड्रा ब्रांच मैनेजर की मनमानी जनहित में कहा तक उचित है ? क्या पीएमईजीपी ऋण का लाभ उन्हीं को प्राप्त होगा जिनको मैनेजर चाहते हों ? क्या पीएचपी ऋण का लाभ उन्हीं को प्राप्त होगा जिससे बैंक मैनेजर खुश हो या फिर बैंक मैनेजर के हितैषी हो ?
विशेष अगले अंक में ……














