सरायकेला पहुंचे डीजीपी व डीआईजी, विधि-व्यवस्था की स्थिति का लिया जायजा।

सरायकेला पहुंचे डीजीपी व डीआईजी, विधि-व्यवस्था की स्थिति का लिया जायजा।

सरायकेला-खरसावां

राज्य में विधि-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा एवं कोल्हान क्षेत्र के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा शुक्रवार को सरायकेला पहुंचे। उनके आगमन पर परिसदन में पुलिस अधिकारियों द्वारा उनका स्वागत किया गया तथा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

दौरे के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने नगर क्षेत्र की विधि-व्यवस्था एवं सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों के साथ आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा करते हुए कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। साथ ही नगर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही तैयारियों और पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की।

इस मौके पर पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनुभव भारद्वाज एवं डीएसपी मुख्यालय सहित अन्य पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे को जिले में सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

खड़काई पुलिया से लेकर गम्हरिया बाजार तक फल विक्रेताओं ने किया सड़क जाम आवागमन बाधित।

खड़काई पुलिया से लेकर गम्हरिया बाजार तक फल विक्रेताओं ने किया सड़क जाम आवागमन बाधित।

सरायकेला/आदित्यपुर

आदित्यपुर गम्हरिया मुख्य सड़क पर आए दिन लाखों की संख्या में गाड़ियां अथवा लोग सड़क से गुजरते हैं लेकिन यह फल विक्रेता सड़क जाम कर दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं जिसकी रोकथाम करने वाला कोई नहीं जिसकी शुध लेने वाला कोई नहीं ट्रैफिक पुलिस कर्मी की मौजूदगी में यह फल विक्रेता सड़क को अतिक्रमण करने में सफल हो रहे हैं।

आपको बताते चलें कि आदित्यपुर खड़काई पुलिया से लेकर गम्हरिया बाजार तक की सड़कों पर जगह-जगह पर फल विक्रेताओं द्वारा फल के ठेले खड़े कर सड़क को बाधित कर रहे हैं।

सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार आदित्यपुर ट्रैफिक सिग्नल और गम्हरिया ट्रैफिक सिग्नल के समीप मुख्य सड़क के किनारे फल विक्रेता फल का ठेला लगाकर फल बेचते आए दिन नजर आते हैं जिसकी वजह से सड़क जाम एवं कई बार तो दुर्घटना की स्थिति भी बन जाती है दुर्भाग्य की बात यह है कि आदित्यपुर  थाना ट्रैफिक सिग्नल से महज़ कुछ ही दूरी पर स्थित है और साथ ही साथ ट्रैफिक सिग्नल के समीप हर वक्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती रहती है लेकिन फिर भी फल विक्रेता सड़क को जाम करने में सफल हो रहे हैं और ट्रैफिक पुलिस मुख् दर्शक बनी रहती है और यह मामला अपने आप में ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान छोड़ रही है।

आदित्यपुर ट्रैफिक थाना प्रभारी, राजू कुमार

साथियों आपको बताते चलें कि सड़क दुर्घटना का कारण केवल यह फल विक्रेता नहीं आदित्यपुर सरायकेला खरसावां मुख्य सड़क पर नित्य दिन सैकड़ो तीन पहिया ऑटो दौड़ती रहती है जो कि कहीं भी कभी भी ब्रेक लगा देती है कहीं भी कभी भी टर्न हो जाती है जो कि आए दिन सड़क दुर्घटना का कारण बन रही है।

ज्ञात हो कि आदित्यपुर ट्रैफिक सिग्नल के समीप स्थित महामाया होटल के पास कुछ दिन पहले एक महिला सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई जिसमें कि उक्त महिला की मौत हो गई लेकिन फिर भी इस महामाया होटल के समीप फल विक्रेता सड़क किनारे फल का ठेला लगाकर सड़क जाम कर रहे हैं और यह तीन पहिया वाहन भी लगातार ट्रैफिक सिग्नल के समीप अपनी गाड़ी खड़ी कर पैसेंजर को बिठाते हैं अथवा गाड़ियों से उतारते हैं जिसको लेकर कई बार जाम अथवा दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। वहीं इस मामले पर सूत्रों का कहना है कि जल्द से जल्द इन फल विक्रेताओं अथवा रैस ड्राइविंग करने वाले तीन पहिया वाहनों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब यह फल विक्रेता अथवा तीन पहिया वाहन किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते है।

मनोज स्वर्गियारी, पुलिस अधीक्षक ,सरायकेला-खरसावां

वहीं इस मामले पर जनहित में सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय निवासियों ने जिला के पुलिस अधीक्षक से  सड़क पर हो रहे दुर्घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए ध्यान आकर्षित करने की बात कही।

जेएसएससी के नाम पर ठगी, दस लाख रुपये एंठने पहुंचे फर्जी अधिकारी को ग्रामीणों ने पकड़ कर किया पुलिस के हवाले।

जेएसएससी के नाम पर ठगी, दस लाख रुपये एंठने पहुंचे फर्जी अधिकारी को ग्रामीणों ने पकड़ कर किया पुलिस के हवाले।

सरायकेला/चौका

साथियों सरायकेला खरसावां जिले से एक ऐसी ही घटना निकलकर सामने आ रही है जिसमें की ग्रामीणों की बहादुरी के चर्चे सरेआम हो रहे हैं। जिसमें की ग्रामीणों ने 10 लाख की ठगी करने आए एक बहरूपिए को पकड़ कर चौक पुलिस के हवाले किया है।

सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार गुरुचरण साव नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर बहरूपिया को यह क

जी हां साथियों सरायकेला खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र के बड़ामटांड़ में जेएसएससी पीजीटी सहायक आचार्य अभ्यार्थी से नौकरी पक्की करने के नाम पर ठगी करने आये एक व्यक्ति को लोगो ने पकड़कर चौका थाना पुलिस को सौंप दिया। घटना गुरुवार सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है।

सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बीते बुधवार को अभ्यार्थी के पास जेएसएससी कार्यालय के नाम पर फोन आया था। जिसमें बताया गया कि आपकी नौकरी पक्की है। इसके लिए 10 लाख रुपए लगेगा नहीं तो यह नौकरी किसी दुसरे अभ्यार्थी को दे देंगे। उक्त व्यक्ति की बातें सुनकर अभ्यर्थियों ने उसे बहरूपिया समझने में देर नहीं की और तत्परता दिखाते हुए अपनी सूझबूझ से उक्त व्यक्ति को पैसे देकर नौकरी पाने के बहाने चावलीबासा बड़ामटांड़ बुलाया जहां पर कथित तौर पर अभ्यार्थियों अथवा ग्रामीणों ने उक्त व्यक्ति को पकड़कर चौका पुलिस को सौंप दिया।

सूत्रों ने यह भी जानकारी दी है कि चौका पुलिस उक्त व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है पुलिस को उक्त व्यक्ति के बैग से कई जेएसएससी का दस्तावेज एवं कई अभ्यार्थायों के दस्तावेज मिले है। कथित तौर पर उक्त व्यक्ति जेएसएससी ठगी गिरोह का सदस्य बताया जा रहा है। वहीं इस मामले पर समाचार लिखे जाने तक चौक थाना की पुलिस द्वारा कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

वहीं इस मामले पर चौक थाना प्रभारी से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन किसी कारणवश संपर्क नहीं हो पाई।

झारखंड सरकार की इंटर्नशिप योजना के तहत विमेंस यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने बागबेड़ा के नवाचारों का किया अध्ययन।

झारखंड सरकार की इंटर्नशिप योजना के तहत विमेंस यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने बागबेड़ा के नवाचारों का किया अध्ययन।

पूर्वी सिंहभूम/बिस्टुपुर

( सोनू कुमार सिंह )

झारखंड सरकार की झारखंड ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप स्कीम के तहत जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी की छात्राओं के एक दल ने बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत क्षेत्र में संचालित विभिन्न नवाचार एवं विकास कार्यों का अध्ययन किया। छात्राओं ने कुंवर सिंह मैदान रोड नंबर-3 स्थित कम्युनिटी सेंटर के समीप पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता की अनुशंसा एवं फंड से लगभग 7.30 लाख रुपये की लागत से स्थापित झारखंड के पहले पायलट आरओ प्लांट का निरीक्षण किया।

छात्राओं को बताया गया कि इस प्लांट के माध्यम से स्थानीय लोगों को आई-कार्ड आधारित व्यवस्था से मात्र पांच रुपये शुल्क पर 20 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बिजली बिल, ऑपरेटर की मजदूरी एवं रखरखाव का खर्च वहन किया जाता है। यह आरओ प्लांट अपने आप में एक अनूठा एवं प्रेरणादायक मॉडल है।

इसके अलावा छात्राओं ने गांधीनगर बस्ती में बागवानी कार्यों तथा जगदीशपुर रोड के समीप कुम्हार समुदाय द्वारा निर्मित मिट्टी के उत्पादों सहित अन्य स्थानीय नवाचारों एवं आजीविका गतिविधियों का भी निरीक्षण किया।

छात्रा राजश्री दास ने बताया कि उनकी चार सदस्यीय टीम ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर ऊर्जा, डिजिटल जल प्रबंधन एवं अन्य नवाचारों से संबंधित जानकारी संकलित कर रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिसे झारखंड सरकार के पोर्टल पर जमा किया जाएगा।

इस अवसर पर पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता एवं वार्ड सदस्य उमेश पाण्डे ने छात्राओं को पंचायत क्षेत्र में संचालित विकास एवं जनहित कार्यों की जानकारी दी। निरीक्षण कार्यक्रम में राजश्री दास, सुचित्रा मलिक, अंजली कुमारी, प्रीति पाल, समाजसेवी मिथिलेश सिंह, शुभम एवं स्थानीय लोग उपस्थित थे।

इंटक के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय शिबू प्रधान की 49वीं जयंती मनाई गई।

इंटक के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय शिबू प्रधान की 49वीं जयंती मनाई गई।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर-2 क्षेत्र स्थित  19नंबर रोड के कुलुपटांगा कांग्रेस कार्यालय में जिला उपाध्यक्ष खिरोद सरदार के नेतृत्व में सरायकेला खरसावां जिला इंटक के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय शिबू प्रधान जी की 49 वी जयंती मनाई गई।

कार्यक्रम में सर्वप्रथम उनके चित्र पर  पुष्प अर्पित और माला पहनकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई कांग्रेस नेता राज मंगल ठाकुर ने अपने वक्तव्य पर शिबू प्रधान के जीवनी पर प्रकाश डालें और उनके जैसे कांग्रेसी कार्यकर्ता बनने का विचार रखें इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से गम्हरिया प्रखंड कांग्रेस अध्यक्ष अनिल ठाकुर जिला महासचिव राजू रजक पूर्व पार्षद पांडिमुखी पूर्व नगर सचिव अर्जुन प्रधान डॉ जे के गांगुली विमल कुमार शैलेश सिंह उपेंद्र सिंह अमित रावत कृष्णा तिवारी संतोष ठाकुर अमित सिंह अमित रावत अमित शर्मा लोग उपस्थित थे।

गड्ढे में तब्दील हुआ मिरुडीह का सड़क, नगर निगम की लापरवाही जनजीवन अस्त-व्यस्त। भाजपा के वरिष्ठ नेता वास्को बेसरा ने जनहित में जताई चिंता।

गड्ढे में तब्दील हुआ मिरुडीह का सड़क, नगर निगम की लापरवाही जनजीवन अस्त-व्यस्त। भाजपा के वरिष्ठ नेता वास्को बेसरा ने जनहित में जताई चिंता।

सरायकेला/आर.आई.टी

सरायकेला खरसावां जिले के आर.आई.टी थाना क्षेत्र अंतर्गत  मिरुडीह निवासियों को बरसात के दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात होने के बाद सड़क में गड्ढे होने के कारण सिदो कान्हु चौक से लेकर फाटक तक का रास्ता बद से बद्तर हो चुका है। हैरानी की बात तो यह है कि सड़क को देखकर यह प्रतित नहीं होता कि सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढे में सड़क।

सिदो कान्हु चौक से लेकर फाटक तक सड़क कम और गड्ढे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं जिससे कि मिरुडीह निवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है खासकर स्कूली बच्चों, मरीजों, दैनिक जीवन में काम पर आने जाने वालों को मजदूरों को एवं व्यापारियों को खराब सड़क के कारण ज्यादा परेशानियां हो रही हैं। वहीं नगर निगम के अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं।

वहीं सिदो कान्हु चौक के समीप नगर निगम द्वारा गड्ढा कोड़ दिए जाने से स्थिति और भी गंभीर बन चुकी है जिससे कि बारिश होने के बाद पूरी सड़क कीचड़ में तब्दील हो जा रही है। और यह किचड़नूमा सड़क किसी बड़ी दुर्घटना को निमंत्रण दे रही है।

वहीं जन-जन के प्रिय पूर्व मेयर प्रत्याशी सह भाजपा के वरिष्ठ नेता वास्को बेसरा ने इस मामले पर जनहित में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम पूरी तरह से अपने कार्य में असफल है उन्होंने कहा कि गंदगी केवल मिरुडीह तक सीमित नहीं लगभग लगभग आदित्यपुर के तमाम क्षेत्र के चौक चौराहे पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। मानो आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र कूड़ा डंपिंग यार्ड बना हुआ हो।

वास्को बेसरा ने आगे कहा कि आदित्यपुर सरायकेला मुख्य सड़क किनारे फल बेचने वालों ने सड़क को अतिक्रमण कर रखा है जिसके कारण आए दिन सड़क जाम की स्थिति बनी रहती है जिसके कारण कई बार लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं उन्होंने आदित्यपुर में हुई सड़क दुर्घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले ही आदित्यपुर के महामाया होटल के समीप एक बुजुर्ग महिला सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी जिसमें की बुजुर्ग महिला की मौत हो गई।

वहीं इस अतिक्रमण का जिम्मेदार कहीं ना कहीं वास्को बेसरा ने आदित्यपुर नगर निगम को ठहराया है वहीं देखा जाए तो आदित्यपुर बाजार गम्हरिया बाजार में प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैलियां का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं। नगर निगम की निगरानी टीम लगातार क्षेत्र में गस्ती कर रही है लेकिन इन सभी मुद्दों पर निगरानी टीम भी मूकदर्शक बनी हुई है।

हिमांशु सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल ने कोर्ट में किया सरेंडर।

हिमांशु सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल ने कोर्ट में किया सरेंडर।

सरायकेला/आदित्यपुर

पुलिस के हाथ नहीं आया हिमांशु सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में किया सरेंडर।

हिमांशु सिंह हत्याकांड में बुधवार को मुख्य आरोपी और दो लाख रुपये के इनामी अपराधी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने जमशेदपुर की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।

हत्याकांड के बाद से फरार चल रहे विश्वनाथ मंडल की तलाश में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए झारखंड के अलावा अन्य राज्यों में भी कई जगहों पर छापेमारी की गई। पुलिस के बढ़ते दबाव और कानूनी शिकंजे के बीच आखिरकार आरोपी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

आपको बताते चलें कि इस बहुचर्चित मामले में अब तक पुलिस नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से चापड़, कुल्हाड़ी, भुजाली और चाकू जैसे कई धारदार हथियार बरामद किए गए हैं।

वहीं इस मामले में डबल डाउन बार के संचालक नीरज सिंह को राजस्थान के खाटूश्यामजी क्षेत्र से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाया गया था, जहां उनसे पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है और आगे भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा के सरेंडर करने से हिमांशु के समर्थकों में एक अलग ही खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।

एफ़एसएस एआई क़ा चला बड़ा डंडा एक्शन पार्ट-2-भ्रामक फ़ूड लेबलिंग पर कसता शिकंजा: क्या फ्रेश,प्योर,नेचुरल हेल्दी और ज़ीरो शुगर के दावों का युग अब समाप्त होने जा रहा है? -समग्र व्यापक विश्लेषण

एफ़एसएस एआई क़ा चला बड़ा डंडा एक्शन पार्ट-2-भ्रामक फ़ूड लेबलिंग पर कसता शिकंजा: क्या फ्रेश,प्योर,नेचुरल हेल्दी और ज़ीरो शुगर के दावों का युग अब समाप्त होने जा रहा है? -समग्र व्यापक विश्लेषण

6 जुलाई की कार्रवाई के ठीक दो दिन बाद, 8 जुलाई 2026 को एफ़एसएसएआई क़ा बड़ा एक्शन पार्ट-2

स्वस्थ भारत क़े निर्माण हेतु कठोर कानूनों क़े साथ सरकार की सतर्कता,नियामक संस्थाओं की निष्पक्षता, उद्योग जगत की ईमानदारी और सबसे बढ़कर जागरूक उपभोक्ता की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी।

गोंदिया/महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर आज का उपभोक्ता केवलभोजन नहीं खरीदता,बल्कि स्वास्थ्य विश्वास और जीवनशैली भी खरीदता है।यही कारण है कि खाद्य उद्योग ने अपने उत्पादों पर फ्रेश,हेल्दी,प्योर,नेचुरल,100 प्रतिशत आर्गेनिक,ज़ीरो शुगर,नों एडेड शुगर, इम्युनिटी बूस्टर और होलसमथिंग जैसे आकर्षक शब्दों का व्यापक उपयोग शुरू कर दिया है। एफ़एसएस एआई ने भ्रामक विज्ञापनों और गलत लेबलिंग के खिलाफ अपने देशव्यापी अभियान का विस्तार कर दिया है। 6 जुलाई की कार्रवाई के ठीक दो दिन बाद,यानी 8 जुलाई 2026 को एफ़एसएस एआई ने बड़ा एक्शन पार्ट-2 लिया है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर आधिकारिक घोषणा करते हुए देश के तीन अन्य बड़े ब्रांडों को कारण बताओ (शो-कॉज ) नोटिस जारी किया है।इन शब्दों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव इतना गहरा होता है कि अधिकांश ग्राहक पैकेट के सामने लिखे दावों को ही अंतिम सत्य मान लेते हैं और पीछे दिए गए वास्तविक तथ्यों को पढ़ने की आवश्यकता भी नहीं समझते।परिणाम स्वरूप,उपभोक्ता कई बार ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं जो वास्तव में उतने स्वास्थ्य वर्धक नहीं होते जितना उनका प्रचार किया जाता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी,गोंदिया,महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते आम जनता को यह जानकारी देना चाहूंगा कि अब भारत में इस प्रवृत्ति पर निर्णायक कार्रवाई की शुरुआत दिखाई दे रही है।भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफ़एसएस एआई ) ने कई कंपनियों को उनके भ्रामक दावों के संबंध में नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। यह केवल कुछ कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे खाद्य उद्योग के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किए गए स्वास्थ्य संबंधी दावों को सटीकता से स्वीकार नहीं किया जाएगा।

साथियों, भारत में खाद्य सुरक्षा का पूरा कानूनी ढांचाखाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 पर आधारित है, जिसने पहले से लागू अनेक अलग- अलग खाद्यकानूनों को एकीकृत कर आधुनिक और वैज्ञानिक व्यवस्था प्रदान की। इस अधिनियम की धारा 24 विशेष रूप से भ्रामक विज्ञापनों और गलत दावों पर रोक लगाती है। कोई भी निर्माता, विक्रेता या कंपनी ऐसा विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकती जो उत्पाद की गुणवत्ता,प्रकृति,संरचना या स्वास्थ्य संबंधी लाभों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करे अथवा उपभोक्ता को भ्रमित करे। यही कारण है कि यदि कोई कंपनी 100 प्रतिशत प्राकृतिक या पूर्णतः शुद्ध लिखती है तो उसे यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करना होगा कि उसका दावा वस्तुतः सही है।इसी उद्देश्य से एफएसएसएआई (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 लागू किए गए। इन विनियमों ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक स्वास्थ्य दावा, पोषण दावा अथवा गुणवत्ता संबंधी दावा वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। विशेष रूप से अनुसूची-5 में नेचुरल, फ्रेश,प्योर,ओरिजिनल तथा ट्रेडिशनल जैसे शब्दों के उपयोग के लिए अत्यंत कठोर मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इन मानकों के अनुसार अधिकांश प्रसंस्कृत (प्रोसेसड) खाद्य पदार्थ वास्तव में नेचुरल अथवा फ्रेश कहलाने की पात्रता ही नहीं रखते। अर्थात केवल विपणन (मार्केटिंग) के उद्देश्य से इन शब्दों का उपयोग करना कानून का उल्लंघन माना जा सकता है।

साथियों,आज सबसे अधिक भ्रम ज़ीरो शुगर और नों एडेड शुगर जैसे शब्दों को लेकर है। सामान्य उपभोक्ता दोनों को समान समझता है,जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से दोनों का अर्थ अलग-अलग है। नों एडेड शुगर का अर्थ केवल इतना है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त चीनी नहीं मिलाई गई। इसका अर्थ यह नहीं कि उत्पाद में प्राकृतिक शर्करा या अन्य प्रकार की शर्करा मौजूद नहीं है। कई कंपनियां सुक्रोज,माल्टोडेक्सट्रिन, हाई- फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप,डेक्सट्रोज, इनवर्ट शुगर,कॉन्सन्ट्रेटेड फ्रूट जूस अथवा अन्य कार्बोहाइड्रेट स्रोतों का उपयोग करती हैं, जो शरीर में जाकर अंततः ग्लूकोज में परिवर्तित होते हैं। इसलिए केवल पैकेट के सामने लिखे आकर्षक दावे पर विश्वास करना उपभोक्ता के लिए सटीकता से जोखिमपूर्ण हो सकता है।
साथियों भारतीय कानून केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है।उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अंतर्गत गठित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को भी भ्रामक विज्ञापनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है। यह संस्था स्वतः संज्ञान लेकर कंपनियों पर भारी आर्थिक दंड लगा सकती है, विज्ञापन वापस लेने का आदेश दे सकती है तथा आवश्यक होने पर ऐसे प्रचार में शामिल प्रसिद्ध व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगा सकती है। इस प्रकार एफएसएसएआई और सीसीपीए मिलकर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और आर्थिक हितों की दोहरी सुरक्षा प्रदान करते हैं।भारत की संघीय व्यवस्था में कानून केंद्र बनाता है,किंतु उसका वास्तविक क्रियान्वयन राज्यों द्वारा किया जाता है। प्रत्येक राज्य में खाद्य सुरक्षा आयुक्त नियुक्त होते हैं, जिनके अधीन नामित अधिकारी और खाद्य सुरक्षा अधिकारी कार्य करते हैं।यहीअधिकारी खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हैं,नमूने लेते हैं,प्रयोगशाला परीक्षण कराते हैं, उल्लंघन पाए जाने पर उत्पाद जब्त करते हैं तथा न्यायालयों में अभियोजन चलाते हैं। यदि किसी कंपनी का उत्तर असंतोषजनक पाया जाता है तो उसका लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है। इस प्रकार केंद्रीय नियमों का वास्तविक प्रभाव राज्य स्तर के प्रभावी प्रवर्तन पर निर्भर करता है।

साथियों, वर्तमान कार्रवाई केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय खाद्य उद्योग के लिए एक व्यापक चेतावनी है कि भविष्य में बिना वैज्ञानिक आधार के किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।यदि किसी उत्पाद कोइम्युनिटी बूस्टर, हार्ट हेल्दी,डायबिटिक फ्रेंडली अथवा पूर्णतः प्राकृतिक कहा जाता है, तो निर्माता को उसके समर्थन में वैज्ञानिक अनुसंधान, परीक्षण तथा प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। केवल विपणन की भाषा अब पर्याप्त नहीं होगी।उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि वे सही उत्पाद की पहचान कैसे करें। किसी भी पैकेज्ड खाद्य पदार्थ को खरीदते समय केवल सामने लिखे दावों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले पीछे दी गई इंग्रेडिट्स लिस्ट को पढ़ना चाहिए। कानून के अनुसार सामग्री घटते क्रम में लिखी जाती है। यदि किसी तथाकथित हेल्दी बिस्कुट में सबसे पहले मैदा और दूसरे स्थान पर चीनी लिखी है, तो इसका अर्थ स्पष्ट है कि वही उसकी प्रमुख सामग्री है।इसी प्रकार पोषण संबंधी तालिका में प्रति 100 ग्राम चीनी, सोडियम, संतृप्त वसा और ऊर्जा की मात्रा देखनी चाहिए। कंपनियां कई बार बहुत छोटे सर्विग साइज का उपयोग करके वास्तविक मात्रा कम दिखाई देती हैं।इसलिए प्रति 100 ग्राम का कॉलम ही सही तुलना का सटीक आधार होता है।
साथियों, प्रत्येक उपभोक्ता को उत्पाद पर अंकित 14 अंकों का एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर अवश्य देखना चाहिए। यही नंबर बताता है कि उत्पाद अधिकृत इकाई द्वारा निर्मित है। आवश्यकता पड़ने पर इस लाइसेंस नंबर का सत्यापन भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त निर्माण तिथि समाप्ति तिथि,शाकाहारी अथवा मांसाहारी चिह्न एलर्जी संबंधी चेतावनी तथा भंडारण संबंधी निर्देशों को भी गंभीरता से पढ़ना चाहिए।

साथियों, भारत ने भी अपने नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया है। हालांकि अभी भी एक महत्वपूर्ण सुधार शेष है,फ्रंट- ऑफ-पैक लेबलिंग अनेक विशेषज्ञ वर्षों से सुझाव दे रहे हैं कि जिन खाद्य पदार्थों में अत्यधिक चीनी, नमक या संतृप्त वसा हो, उनके पैकेट के सामने ही स्पष्ट चेतावनी अंकित की जाए। इससे उपभोक्ता बिना पूरा पैकेट पढ़े भी जोखिम का प्रारंभिक आकलन कर सकेगा। विश्व के अनेक देशों में ऐसी प्रणाली सफल सिद्ध हुई है और भारत में भी इसे शीघ्र लागू करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।वर्तमान समय में खाद्य उद्योग केवल स्वाद नहीं बेच रहा, बल्कि स्वास्थ्य की छवि भी बेच रहा है। उपभोक्ता का मनोविज्ञान इस प्रकार प्रभावित किया जाता है कि वह चमकीले रंग, आकर्षक पैकेजिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावों के आधार पर निर्णय लेने लगता है। यही कारण है कि आधुनिक उपभोक्ता के लिए वैज्ञानिक जागरूकता उतनी ही आवश्यक है जितनी कानूनी सुरक्षा।यदि उपभोक्ता स्वयं सामग्री सूची,पोषण तालिका और लाइसेंस विवरण पढ़ने की आदत विकसित कर ले, तो भ्रामक विपणन का प्रभाव स्वतःकम हो जाएगा।एफएस एसएआई द्वारा हाल में जारी नोटिस भारतीय खाद्य विनियमन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत हैं। इससे स्पष्ट संदेश गया है कि केवल विपणन की भाषा के सहारे उपभोक्ताओं को प्रभावित करने की संस्कृति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। यह कदम ईमानदार कंपनियों के लिए भी लाभकारी है, क्योंकि इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा और गुणवत्ता आधारित बाजार सटीकता से विकसित होगा।

साथियों, विश्व स्तरपर भी भ्रामक खाद्य लेबलिंग एक गंभीर चिंता का विषय है। संयुक्त राष्ट्र के कोडेक्स एलिमेंटेरिय ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए तथा उपभोक्ता को भ्रमित नहीं करना चाहिए। यही वैश्विक मानक अधिकांश देशों की नीतियों का आधार है।यूरोपीय संघ ने इस क्षेत्र में विश्व का सबसे कठोर ढांचा विकसित किया है। वहां केवल वही स्वास्थ्य अथवा पोषण संबंधी दावे स्वीकार किए जाते हैं जिन्हें यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण द्वारा वैज्ञानिक रूपसेअनुमोदित किया गया हो। नेचुरल, हेल्दी अथवा प्योर जैसे सामान्य दावों का मनमाना उपयोग लगभग असंभव है। यदि दावा स्वीकृत सूची में नहीं है तो उसे पैकेट पर लिखना ही प्रतिबंधित है। इस कारण यूरोपीय उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत अधिक पारदर्शी जानकारी उपलब्ध होती है।संयुक्त राज्य अमेरिका में एफडीए और एफ़टीसी मिलकर इस व्यवस्था का संचालन करते हैं। एफडीए खाद्य लेबलों की वैज्ञानिक सत्यता की जांच करता है, जबकि एफ़टीसी भ्रामक विज्ञापनों पर आर्थिक दंड लगाता है। अनेक स्वास्थ्य संबंधी दावों के साथ यह स्पष्ट करना भी आवश्यक होता है कि संबंधित दावा सरकारी वैज्ञानिक प्रमाणन के अंतर्गत स्वीकृत नहीं है। इससे उपभोक्ता को भ्रमित होने की संभावना कम होती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि स्वस्थ भारत का निर्माण केवल कठोर कानूनों से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार की सतर्कता नियामक संस्थाओं की निष्पक्षता उद्योग जगत की ईमानदारी और सबसे बढ़कर जागरूक उपभोक्ता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जब उपभोक्ता पैकेट के सामने लिखे आकर्षक शब्दों के बजाय पीछे छिपे वैज्ञानिक तथ्यों को पढ़ना शुरू करेगा,तभी फ्रेश,प्योर, नेचुरल हेल्दी और ज़ीरो शुगर जैसे शब्द वास्तविक अर्थों में विश्वसनीय बन सकेंगे। यही उपभोक्ता अधिकारों की वास्तविक विजय होगी और यही आधुनिक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य भी है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत माननीय पूर्व मुख्यमंत्री-सह-सरायकेला विधायक एवं माननीय खरसावाँ विधायक ने परिवार के पात्र सदस्यों के साथ एन्यूमरेशन प्रपत्र भरकर संबंधित बीएलओ को सौंपा।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत माननीय पूर्व मुख्यमंत्री-सह-सरायकेला विधायक एवं माननीय खरसावाँ विधायक ने परिवार के पात्र सदस्यों के साथ एन्यूमरेशन प्रपत्र भरकर संबंधित बीएलओ को सौंपा।

सरायकेल/खरसावां

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के अंतर्गत आज माननीय पूर्व मुख्यमंत्री सह विधायक, सरायकेला विधानसभा क्षेत्र, चंपई सोरेन तथा माननीय विधायक, खरसावाँ विधानसभा क्षेत्र, दशरथ गागराई ने अपने परिवार के पात्र सदस्यों के साथ एन्यूमरेशन प्रपत्र (Enumeration Form) भरकर संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को सौंपा। उक्त अवसर पर संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (AERO), बीएलओ सुपरवाइजर तथा संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उपस्थित थे।

इस अवसर पर माननीय दोनों जनप्रतिनिधिगण ने जिले के सभी पात्र मतदाताओं से अपील की कि वे निर्धारित समय-सीमा 29 जुलाई, 2026 के भीतर अपना तथा अपने परिवार के सभी पात्र सदस्यों का एन्यूमरेशन प्रपत्र भरकर संबंधित बीएलओ के पास जमा करें तथा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का अद्यतन एवं शुद्धीकरण लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। प्रत्येक पात्र मतदाता का इस अभियान में सहभागी होना आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे समय पर अपना एन्यूमरेशन प्रपत्र भरें तथा अपने परिवार, पड़ोस एवं आसपास के अन्य पात्र मतदाताओं को भी प्रपत्र भरने के लिए प्रेरित करें, ताकि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

“बच्चे मन लगाकर पढ़ें, अनुशासन अपनाएँ और जीवन में आगे बढ़ें, यही झारखंड सरकार की सोच है”:- मनोज कुमार चौधरी

“बच्चे मन लगाकर पढ़ें, अनुशासन अपनाएँ और जीवन में आगे बढ़ें, यही झारखंड सरकार की सोच है”:- मनोज कुमार चौधरी

सरायकेला

राजकीय प्लस टू मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला में झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी निःशुल्क साइकिल वितरण योजना “उन्नति का पहिया” के अंतर्गत छात्र-छात्राओं के बीच साइकिलों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने विद्यार्थियों को साइकिल प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं तथा उन्हें शिक्षा के प्रति समर्पित होकर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन में मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है। पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन, संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन में सफलता प्राप्त करने का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे नियमित रूप से विद्यालय आएँ, अनुशासन का पालन करें और पूरी लगन एवं ईमानदारी से अध्ययन करें, तो निश्चित रूप से अपने परिवार, समाज, जिले और राज्य का नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने कहा कि “बच्चे मन लगाकर पढ़ें, यही झारखंड सरकार की सोच है। साइकिल मिलने से विशेष रूप से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा होगी। समय की बचत होगी, नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित होगी तथा विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या में कमी आएगी। यह योजना शिक्षा को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।”

मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार ऐतिहासिक पहल कर रही है। राज्य में मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना, बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यालयों की आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण, आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का विस्तार तथा छात्र-छात्राओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन इस बात का प्रमाण है कि सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा में किया गया निवेश राज्य के भविष्य में किया गया निवेश है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जहाँ आर्थिक या भौगोलिक कठिनाइयों के कारण कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। निःशुल्क साइकिल वितरण जैसी योजनाएँ विद्यार्थियों को विद्यालय से जोड़ने, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मनोज कुमार चौधरी ने विद्यार्थियों से साइकिल का सुरक्षित एवं जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने का आग्रह करते हुए कहा कि वे समय का सदुपयोग करें, अपने शिक्षकों का सम्मान करें, अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं और अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर मेहनत करें।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक वासुदेव राम ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए झारखंड सरकार द्वारा संचालित छात्रहितकारी योजनाओं की सराहना की तथा विद्यार्थियों से इन सुविधाओं का लाभ उठाकर बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन करने का आह्वान किया।

विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि बीईईओ कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार विभिन्न मध्य विद्यालयों से आए पात्र विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर साइकिलों का आवंटन किया गया, ताकि सभी पात्र छात्र-छात्राओं को योजना का लाभ मिल सके।

कार्यक्रम में प्रधानाध्यापक वासुदेव राम, शिक्षक-शिक्षिकाएँ, शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ तथा विद्यार्थियों ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई इस सुविधा के लिए प्रसन्नता व्यक्त की।

पुनः दुबिल धरना स्थल पहुंचे सांसद और विधायक, वार्ता में नहीं बनी सहमति।

पुनः दुबिल धरना स्थल पहुंचे सांसद और विधायक, वार्ता में नहीं बनी सहमति।

ग्रामीणों के समर्थन में हर संभव प्रयास करेंगे: जोबा माझी।

हर परिस्थिति में ग्रामीणों के साथ है: जगत माझी।

पश्चिम सिंहभूम/मनोहरपुर

मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत स्टील ऑथिरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड(सेल) की चिरिया स्थित दुबिल माइंस में स्थानीय लोगों को रोजगार देने समेत अन्य मांगों को लेकर जारी धरना 12वें दिन भी जारी रहा। इस बीच ग्रामीणों से मिलने दुबिल माइंस गेट सांसद जोबा माझी और विधायक जगत माझी पहुंचे। साथ में बीडीओ शक्ति कुंज, सीओ प्रदीप कुमार और ठेकेदार भी मौजूद रहे। सांसद-विधायक समेत अन्य लोगों के धरना स्थल पहुंचने पर ग्रामीणों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। सांसद और विधायक ने ग्रामीणों से करीब एक घंटे तक वार्ता की और उनकी मांगों का समर्थन किया। हालांकि बिना लिखित आश्वासन के ग्रामीण आंदोलन खत्म करने को राजी नहीं हुए। ग्रामीणों का कहना है कि धरना स्थल पर सेल प्रबंधक आकर लिखित आश्वासन दें तभी आगे का निर्णय लिया जाएगा।

सांसद जोबा माझी ने ग्रामीणों से कहा वह केवल प्रबंधक और ग्रामीणों के बीच मध्यस्थता कर रही हैं। किसी भी तरह का आश्वासन सेल प्रबंधक ही दे सकता हैं। कहा कि उनकी कोशिश है कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हो, इसके अलावा हर संभव प्रयास कर रहे है। कहा कि मामले का समाधान अगर स्थानीय स्तर पर नहीं हुआ तो वह आगामी मानसून सत्र में संसद में उठाएगी। वहीं विधायक जगत माझी ने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा सेल प्रबंधन के समक्ष उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को रखा है ताकि ज्यादा से ज्यादा उनकी मांगें पूरी हो सके। इधर सेल प्रबंधन ने ग्रामीणों को चिरिया गेस्ट हाउस वार्ता के लिए आमंत्रित किया, लेकिन ग्रामीण धरना स्थल पर ही वार्ता को अड़े रहे जिस कारण मंगलवार की वार्ता बेनतीजा रही।

प्रखंड कार्यालय परिसर, नीमडीह में लर्नर लाइसेंस शिविर आयोजित, 81 अभ्यर्थी हुए सफल।

प्रखंड कार्यालय परिसर, नीमडीह में लर्नर लाइसेंस शिविर आयोजित, 81 अभ्यर्थी हुए सफल।

सरायकेला/नीमडीह

उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार जिला परिवहन कार्यालय द्वारा मंगलवार को नीमडीह प्रखंड कार्यालय परिसर में लर्नर लाइसेंस (Learner Licence) हेतु शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन जिला परिवहन पदाधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में मोटरयान निरीक्षक (MVI) सहित जिला परिवहन कार्यालय के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की उपस्थिति में किया गया।

शिविर में पूर्व से ऑनलाइन स्लॉट बुक करा चुके आवेदकों की लर्नर लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, ऑनलाइन आवेदन की जांच तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप लर्नर लाइसेंस परीक्षा का संचालन किया गया।

शिविर के लिए कुल 130 अभ्यर्थियों ने स्लॉट बुक कराया था। इनमें 81 अभ्यर्थी परीक्षा में सफल हुए, 18 अभ्यर्थी असफल रहे, जबकि 31 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।

उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन परिवहन विभाग की सेवाओं को आम नागरिकों तक सुगमता एवं पारदर्शिता के साथ प्रखंड स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से जिले के सभी प्रखंडों में चरणबद्ध तरीके से लर्नर लाइसेंस शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि आवेदकों को अपने प्रखंड स्तर पर ही समयबद्ध एवं सुविधाजनक सेवाओं का लाभ प्राप्त हो सके।

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