मनसा पूजा के अवसर पर छोटा गम्हरिया में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़।

मनसा पूजा के अवसर पर छोटा गम्हरिया में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़।

सरायकेला/छोटा गम्हरिया

छोटा गम्हरिया में आयोजित मनसा पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वर्ष 1963 से आयोजित हो रही इस पारंपरिक पूजा में क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होकर माता मनसा की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालु उत्साह के साथ पूजा कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

मनसा पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि यह पूजा कई वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस आयोजन के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाती है।

पूजा आयोजन में संस्थापक स्वर्गीय राधानाथ मोदक, स्वर्गीय राखोहरि मोदक एवं स्वर्गीय आदोरी बाला मोदक के योगदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया। वहीं मंदिर समिति के सदस्यों में शंकर मोदक, दिवाकर मोदक, मनोरंजन मोदक एवं अभिषेक मोदक की महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हैं।

धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

अवैध पार्किंग के विरुद्ध परिवहन विभाग ने चलाया औचक निरीक्षण अभियान, नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों पर की गई कार्रवाई।

अवैध पार्किंग के विरुद्ध परिवहन विभाग ने चलाया औचक निरीक्षण अभियान, नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों पर की गई कार्रवाई।

सरायकेला/खरसावां

सरायकेला-खरसावाँ जिले में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने एवं सड़क पर अवैध पार्किंग के कारण होने वाली यातायात बाधा को रोकने के उद्देश्य से उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ के निर्देशानुसार तथा जिला परिवहन पदाधिकारी श्री शंकराचार्य सामद के नेतृत्व में दिनांक 18 अगस्त, 2026 को मोटरयान निरीक्षक द्वारा अवैध पार्किंग के विरुद्ध अभियान चलाया गया।

अभियान के दौरान सरायकेला-राजनगर बाईपास मार्ग, कोलाबीरा स्थित RKFL के समीप एवं सरायकेला क्षेत्र के अन्य स्थानों पर नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने तथा अवैध रूप से पार्किंग करने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

अभियान के क्रम में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूल किया गया। साथ ही, विशेष रूप से भारी वाहन चालकों को सड़क पर अवैध रूप से वाहन पार्क नहीं करने तथा यातायात नियमों का पालन करने की कड़ी हिदायत दी गई।

जिला प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अवैध पार्किंग के कारण यातायात बाधित होने एवं सड़क दुर्घटनाओं की संभावना को देखते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान आगे भी नियमित रूप से चलाए जाएंगे।

संभावित भारी वर्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट, सभी अंचल अधिकारियों को सतर्कता एवं व्यापक जन-जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश

संभावित भारी वर्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट, सभी अंचल अधिकारियों को सतर्कता एवं व्यापक जन-जागरूकता सुनिश्चित करने का निर्देश

सरायकेला/खरसावां

सरायकेला-खरसावाँ जिले में संभावित भारी वर्षा/अत्यधिक वर्षापात के मद्देनजर उपायुक्त, सरायकेला-खरसावाँ नितिश कुमार सिंह द्वारा सभी अंचल अधिकारियों को अपने-अपने अंचल क्षेत्र में सतर्क एवं सक्रिय रहते हुए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।

भारी वर्षा के कारण नदियों, डैम, तालाबों एवं अन्य जलाशयों में जलस्तर बढ़ने, जल-जमाव, तेज जल प्रवाह, बाढ़ तथा अन्य दुर्घटनाओं की संभावना को देखते हुए सभी अंचल अधिकारियों को अपने क्षेत्र के संवेदनशील स्थलों को चिन्हित कर नियमित निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसे स्थलों पर आवश्यकतानुसार चेतावनी एवं सावधानी संबंधी बोर्ड लगाने तथा स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से आमजनों को सतर्क एवं जागरूक करने को कहा गया है।

भारी वर्षा के दौरान जलस्तर में वृद्धि, तटबंधों, पुल-पुलिया, जल-जमाव एवं आवागमन की स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आवश्यकता के अनुसार अंचल स्तर पर कंट्रोल रूम/आपदा नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था करते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों की ड्यूटी निर्धारित करने को भी कहा गया है।

अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों, चौकीदारों एवं अन्य स्थानीय कर्मियों के माध्यम से प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर लोगों को संभावित जोखिमों के प्रति जागरूक किया जाए। विशेष रूप से नदियों, डैम, तालाबों एवं तेज बहाव वाले स्थानों पर नहीं जाने तथा जल-जमाव वाले क्षेत्रों में पानी के भीतर जाने अथवा जलभराव वाले रास्तों से आवागमन करने से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए।

जिला प्रशासन की ओर से आमजनों से अपील है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। जल-जमाव अथवा तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से बचें और बच्चों को भी ऐसे स्थानों से दूर रखें। अपने परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों को भी सतर्क एवं जागरूक करें। प्रशासन द्वारा जारी चेतावनी एवं दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दें।

जिला प्रशासन द्वारा संभावित आपदा की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां एवं निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी आकस्मिक स्थिति अथवा दुर्घटना की सूचना प्राप्त होने पर संबंधित विभागों एवं बचाव दल के साथ समन्वय स्थापित करते हुए त्वरित राहत एवं बचाव कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी अप्रिय घटना की सूचना तत्काल वरीय पदाधिकारियों को देते हुए की गई कार्रवाई से अवगत कराएं तथा निर्देशों का अनुपालन प्राथमिकता एवं तत्परता के साथ सुनिश्चित करें, ताकि संभावित भारी वर्षा के दौरान जान-माल की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।

भारत के चुनावी मॉडल का अमेरिका में बजा डंका!-ट्रंप ने कहा सेफ़गार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट (सेव एक्ट) के लिए भारत से सीखें अमेरिका -वोटर आईडी बना चुनावी बहस का नया केंद्र -समग्र व्यापक विश्लेषण।

भारत के चुनावी मॉडल का अमेरिका में बजा डंका!-ट्रंप ने कहा सेफ़गार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट (सेव एक्ट) के लिए भारत से सीखें अमेरिका -वोटर आईडी बना चुनावी बहस का नया केंद्र -समग्र व्यापक विश्लेषण।

अमेरिका में अब चलेगा इंडिया इलेक्शन मॉडल? -ट्रंप ने वोटर आईडी के बहाने भारत की चुनाव व्यवस्था को सराहा!

भारत भी इस अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा को आत्ममुग्धता के बजाय अपनी चुनावी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने के अवसर में बदलेगा?  -डेमोक्रेसी फर्स्ट ,वोटर फर्स्ट और ट्रस्ट फर्स्ट

वैश्विक स्तरपर दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनावी व्यवस्था को लेकर देश के भीतर भले ही चुनाव-दर-चुनाव राजनीतिक बहस,आरोप-प्रत्यारोप और चुनाव आयोग कीकार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हों,लेकिन 18 अगस्त 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय चुनाव प्रणाली और विशेष रूप से मतदाता पहचान व्यवस्था की सार्वजनिक प्रशंसा ने एक बिल्कुल अलग अंतरराष्ट्रीय तस्वीर सामने रख दी है।उन्होंने 2024 के भारतीय लोकसभा चुनाव में लगभग 64.6 करोड़ मतदाताओं की भागीदारी का उदाहरण देते हुए सेव अमेरिका एक्ट को पारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए अमेरिका में चुनाव सुधारों के लिए सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट यानी सेव एक्ट को आगे बढ़ाने की अपील की। ट्रंप ने भारत के विशाल चुनावी पैमाने का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब भारत इतनी बड़ी आबादी और करोड़ों मतदाताओं के साथ पहचान-आधारित चुनाव करा सकता है, तो अमेरिका में मतदाता पहचान को लेकर अधिक सख्त और एकसमान व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि भारत की चुनावी विशालता  अमेरिका के लिए मिसाल बन गई है,भारत का चुनाव मॉडल इसलिए असाधारण है क्योंकि यहां चुनाव केवल राजनीतिक सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विशाल भौगोलिक, भाषाई,सामाजिक और जनसंख्या विविधता के बीच संवैधानिक लोकतंत्र को संचालित करने का सबसे बड़ा प्रशासनिक अभ्यास है। इलेक्शन कमिशन ऑफ़ इंडिया लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के संचालन की संवैधानिक जिम्मेदारी निभाता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सात चरणों में मतदान कराया गया था।
साथियों, निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदान के लिए ईपीआईसी यानी वोटर आईडी के अलावा पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस,पैन कार्ड,आधार सहित कई निर्धारित फोटो पहचान दस्तावेज स्वीकार किए जाते हैं। यानी भारत में मूल सिद्धांत यह है कि मतदाता की पहचान मतदान केंद्र पर सत्यापित होनी चाहिए, हालांकि यह समझना जरूरी है कि केवल वोटर आईडी ही एकमात्र स्वीकार्य दस्तावेज नहीं है।यही वह बिंदु है जिसने अमेरिकी राजनीतिक बहस को भारत की ओर देखने के लिए प्रेरित किया है। ट्रंप ने 18 अगस्त की सुबह अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका वैध फोटो पहचान के बिना चुनाव कैसे कराता है। ट्रंप ने भारत के पिछले आम चुनाव का उल्लेख करते हुए लगभग 64.6 करोड़ मतदाताओं का आंकड़ा सामने रखा और कहा कि एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने डाक के जरिए मतदान किया तथा प्रत्येक मतदाता के पास वैध फोटो पहचान दस्तावेज था। इसी तुलना को आधार बनाकर उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से सेव एक्ट पारित करने की मांग की।

साथियों बात अगर हम  भारत और अमेरिका की चुनावी व्यवस्था में सबसे बड़ा अंतर क्या है? इसको समझने की करें तो, भारत और अमेरिका दोनों विश्व के महत्वपूर्ण लोकतंत्र हैं, लेकिन उनकी चुनावी संरचना एक जैसी नहीं हैभारत में चुनावों के संचालन के लिए एक केंद्रीयसंवैधानिक संस्था,निर्वाचन आयोग,की प्रमुख भूमिका है, जबकि अमेरिका में चुनावों का प्रशासन काफी हद तक राज्यों और स्थानीय चुनावी संस्थाओं के हाथ में है। यही कारण है कि अमेरिका में मतदाता पंजीकरण, पहचान संबंधी नियम,अर्ली वोटिंग एब्सेंटी वोटिंग और मेल – इन वोटिंग जैसी व्यवस्थाओं में राज्य-दर-राज्य अंतर दिखाई देता है।इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि अमेरिका में कोई एक समान राष्ट्रीय मतदान प्रक्रिया नहीं है, जबकि भारत में चुनाव संचालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अधिक केंद्रीकृत संवैधानिक ढांचा मौजूद है।

भारत में मतदाता पंजीकरण के बाद मतदान केंद्र पर मतदाता की पहचान की जांच होती है। दूसरी ओर, अमेरिका में संघीय चुनावों के लिए पहचान और नागरिकता संबंधी नियमों का ढांचा अलग-अलग राज्यों में अलग हो सकता है। यही अंतर ट्रंप के सेव एक्ट अभियान का मूल राजनीतिक मुद्दा बन गया है। व्हाइट हाउस स्वयं दावा करता है कि भारत और ब्राजील जैसे देश मतदाता पहचान को अधिक मजबूत पहचान- प्रणालियों से जोड़ते हैं, जबकि अमेरिका में नागरिकता के संबंध में व्यापक रूप से सेल्फ- अटेस्टेशन कीव्यवस्था पर निर्भरता रही है। हालांकि इस तुलना को सावधानी से समझना जरूरी है,भारत में भी आधार को अनिवार्य मतदाता पहचान के रूप में इस्तेमाल करने का अर्थ नहीं है; निर्वाचन आयोग मतदान के लिए कई वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज स्वीकार करता है।

साथियों बात अगर हम क्या है सेव अमेरिका एक्ट ?इसको समझने की करें तो,यहां एक महत्वपूर्णतथ्यात्मक स्पष्टता आवश्यक है। इसका आधिकारिक नाम सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट , संक्षेप में सेव एक्ट है। यह कोई स्वास्थ्य संबंधी सेव कानून नहीं, बल्कि अमेरिकी चुनावों में मतदाता पात्रता और नागरिकता सत्यापन से जुड़ा प्रस्तावित संघीय कानून है। इसका मूल उद्देश्य संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य करना है। आधिकारिक विधायी रिकॉर्ड के अनुसार एच.आर.22 को 3 जनवरी 2025 को प्रतिनिधि सभा में पेश किया गया और 10 अप्रैल 2025 को सदन ने इसे 220-208 मतों से पारित कर दिया। इसके बाद यह सीनेट को भेजा गया। इसलिए इसे यह कहना सही नहीं होगा कि सेव एक्ट पहले ही पूर्ण संघीय कानून बन चुका है।प्रस्तावित कानून में अमेरिकी नागरिकता साबित करने के लिए विभिन्न दस्तावेजों की व्यवस्था की गई है, जिनमें वैध अमेरिकी पासपोर्ट, कुछ प्रकार के रियल आईडी -अनुरूप पहचान दस्तावेज, सैन्य पहचान एवं संबंधित रिकॉर्ड तथा सरकार द्वारा जारी कुछ अन्य दस्तावेज शामिल हैं। कानून का मूल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संघीय चुनावों में केवल पात्र अमेरिकी नागरिक ही पंजीकृत हों।

साथियों बात अगर हम  मेल-इन वोटिंग पर भी सख्ती का प्रस्ताव को समझने की करें तो,सेव एक्ट की बहस केवल फोटो पहचान तक सीमित नहीं है। व्हाइट हाउस के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था में सामान्य मेल-इन बल्लोंट्स को सीमित करने और बीमारी, विकलांगता, सैन्य सेवा अथवा यात्रा जैसे विशेष मामलों में उन्हें अनुमति देने का प्रस्ताव है। साथ ही राज्यों को मतदाता सूचियों से गैर- नागरिकों के नाम हटाने के लिए व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।यहीं से अमेरिका की चुनावी बहस अधिक संवेदनशील हो जाती है। समर्थकों का तर्क है कि मतदान प्रक्रिया में नागरिकता और पहचान की मजबूत पुष्टि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को बढ़ाएगी। विरोधियों की चिंता है कि अत्यधिक दस्तावेजी बाध्यताएं उन वैध मतदाताओं के लिए मतदान कठिन कर सकती हैं जिनके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए अमेरिकी बहस का वास्तविक प्रश्न केवल यह नहीं है कि वोटर आईडी होना चाहिए या नहीं? बल्कि यह है कि पहचान और नागरिकता सत्यापन की व्यवस्था ऐसी कैसे हो जो चुनावी सुरक्षा भी बढ़ाए और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार में अनावश्यक बाधा भी न डाले।
साथियों बात अगर हम  ट्रंप का अमेरिक़ी फर्स्ट अब इंडिया इलेक्शन मॉडल से जुड़ता दिखाई दे रहा है,ट्रंप लंबे समय से अमेरिक़ी फर्स्ट की राजनीति केसमर्थक रहे हैं। लेकिन इस बार उनके चुनावी सुधार अभियान में भारत का उदाहरण सामने आना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जिस भारत की चुनावी प्रणाली को लेकर भारतीय राजनीति में लगातार बहस होती रहती है, उसी व्यवस्था को अमेरिकी राष्ट्रपति अपने देश में चुनावी सुधारों के पक्ष में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। यहअतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि  दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतंत्र बना अमेरिकी चुनावी बहस का संदर्भ 18 अगस्त 2026 की ट्रंप टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने भारत-अमेरिका संबंधों की चर्चा को व्यापार,रक्षा,तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से आगे बढ़ाकर लोकतांत्रिक चुनावी व्यवस्थाओं तक पहुंचा दिया है। ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित सवाल का हवाला देकर अपने सेव एक्टअभियान को मजबूत करने की कोशिश की है और भारत के विशाल चुनावी अनुभव को अमेरिकी मतदाता पहचान बहस के केंद्र में ला दिया है।लोकतंत्र की खूबसूरती ही यही है कि दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र से कुछ सीखने की बात करे।आज सवाल केवल यह नहीं है कि अमेरिका भारत से क्या सीखेगा;बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत भी इस अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा को आत्ममुग्धता के बजाय अपनी चुनावी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और आधुनिक बनाने के अवसर में बदलेगा? यही वह बिंदु है जहां अमेरिक़ी फर्स्ट की बहस में भारत का चुनावी मॉडल एक नई कड़ी जोड़ता दिखाई देता है डेमोक्रेसी फर्स्ट ,वोटर फर्स्ट और ट्रस्ट फर्स्ट। भारतीय लोकतंत्र के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय क्षण है।यहां एक दिलचस्प विरोधाभास भी दिखाई देता है।भारत में प्रत्येक बड़े चुनाव के बादईवीएम  मतदाता सूची, चुनाव आयोग की निष्पक्षता मतदान प्रतिशत और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद उठते हैं। विपक्ष कई बार चुनाव आयोग से सवाल करता है और सत्ता पक्ष चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का बचाव करता है। लेकिन उसी समय अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा भारत की मतदाता पहचान व्यवस्था को अमेरिकी चुनाव सुधार के संदर्भ में उद्धृत किया जाना यह संकेत देता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का मूल्यांकन केवल घरेलू राजनीतिक चश्मे से सटीकता से  नहीं किया जाना चाहिए।

साथियों बात अगर हम  क्या अमेरिका को भारत से सीखना चाहिए? इसको समझने की करें तो इस प्रश्न का उत्तर न तो पूरी तरह हां है और न ही पूरी तरह नहीं। भारत और अमेरिका की संवैधानिक संरचना, संघीय व्यवस्था,चुनावी इतिहास, मतदान पद्धति और प्रशासनिक ढांचे अलग हैं। इसलिए भारत की पूरी चुनाव प्रणाली को ज्यों का त्यों अमेरिका में लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। लेकिन कुछ सिद्धांत अवश्य साझा किए जा सकते हैं,जैसे मतदाता की पहचान की विश्वसनीय पुष्टि, मतदाता सूची का नियमित शुद्धिकरण, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदान की ऑडिटेबिलिटी, मजबूत चैन ऑफ़ कस्टडी और मतदाता पात्रता की स्पष्ट पुष्टि।भारत का अनुभव यह दिखाता है कि विशाल पैमाने पर चुनाव कराना केवल
कानून बनाने से संभव नहीं होता; इसके लिए चुनावी प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी प्रणाली, प्रशिक्षित कर्मचारियों, मतदाता सूची प्रबंधन और चरणबद्ध मतदान की विशाल मशीनरी चाहिए। यही भारत की वास्तविक चुनावी क्षमता है।

साथियों, दूसरी ओर अमेरिका की चिंता भी समझना जरूरी हैँ, अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि लोकतंत्र में सबसे पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि चुनाव का फैसला उन्हीं नागरिकों द्वारा किया जाए जिन्हें कानूनन मतदान का अधिकार प्राप्त है। व्हाइट हाउस ने इसी उद्देश्य से नागरिकता सत्यापन, मतदाता पहचान और मेल – बैलट सुरक्षा को प्रमुख चुनाव सुधार मुद्दा बनाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मार्च 2026 में एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से संघीय चुनावों में नागरिकता सत्यापन और मेल /एब्सेंटी बैलट प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम भी उठाया था।लेकिन अमेरिकी व्यवस्था में राज्यों की संवैधानिक भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए संघीय स्तर पर एक समान कठोर नियम लागू करना राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से जटिल विषय है। सेव एक्ट के समर्थक इसे चुनावी सुरक्षा की जरूरत बताते हैं, जबकि आलोचक इसे मताधिकार पर संभावित अतिरिक्त बोझ के रूप में देखते हैं। यही कारण है कि यह कानून अमेरिका में सिर्फ चुनाव सुधार का विषय नहीं बल्कि मताधिकार, संघवाद और नागरिक स्वतंत्रता की बहस भी बन गया है।

साथियों बात अगर हम  भारत के लिए भी यह आत्ममंथन का अवसर है इसको समझने की करें तो,ट्रंप की टिप्पणी को केवल भारत की प्रशंसा मानकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा।यह भारत के लिए भी आत्ममंथन का अवसर है। यदि विश्व का सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश भारत की चुनावी पहचान प्रणाली से कोई तत्व सीखने योग्य मानता है,तो भारत को भी अपनी चुनावी व्यवस्था को लगातार अधिक पारदर्शी तकनीकी रूप से सुरक्षित और राजनीतिक रूप से विश्वसनीय बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत केवल इस बात में नहीं होती किचुनाव समय पर हो जाए; असली ताकत तब होती है जब मतदाता को विश्वास हो कि उसका नाम सही है, उसकी पहचान सुरक्षित है, उसका वोट सही तरीके से दर्ज हुआ है और परिणाम निष्पक्ष प्रक्रिया से निकला है। भारत ने दुनिया को सबसे बड़े पैमाने पर चुनाव कराने की क्षमता दिखाई है। अब अगली चुनौती इस क्षमता के साथ विश्वास की गहराई बढ़ाने की है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

ईचागढ़ के लेपाटांड़ में मुआवजा भुगतान को लेकर लगा शिविर में पहुंचे विधायक सबिता महतो।

ईचागढ़ के लेपाटांड़ में मुआवजा भुगतान को लेकर लगा शिविर में पहुंचे विधायक सबिता महतो।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के लेपाटांड़ पंचायत भवन में सोमवार को  लाबा नहर से पातकुम  तक सड़क चौड़ीकरण, मजबूतीकरण एवं पुनर्निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा भुगतान को लेकर विधायक सविता महतो के पहल पर शिविर लगाया गया।

शिविर में विधायक सबिता महतो शामिल हुईं। लेपाटांड़, पाटपुर एवं किस्टोपुर मौजा के भू-स्वामियों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए 13, 14 एवं 17 अगस्त को शिविर आयोजित किया गया था। ग्रामीणों के मांग पर जो बढ़ कर 18, 19 तक बढ़ाया गया।विधायक ने अधिकारियों को प्रभावित रैयतों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने तथा प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। ग्रामीणों की मांग पर विधायक ने मुआवजा भुगतान शिविर की अवधि दो दिन और बढ़ाने का निर्देश दिया, ताकि सभी प्रभावित रैयत आवश्यक दस्तावेज जमा कर प्रक्रिया पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण क्षेत्रवासियों की लंबे समय से मांग रही है और इसके लिए सभी रैयतों का सहयोग जरूरी है।

उन्होंने लेपाटांड़ के मुंडारी खूंटकट्टी क्षेत्र में आने का उल्लेख करते हुए खूंटकट्टीदारों एवं मानकी के सहयोग से समस्याओं के समाधान की अपील की। अनुमंडल पदाधिकारी नितिन शिवम गुप्ता ने भू-स्वामियों से जल्द आवश्यक दस्तावेज जमा करने की अपील की, ताकि मुआवजा भुगतान में अनावश्यक विलंब न हो। मौके पर अंचलाधिकारी दीपक प्रकाश, झामुमो केंद्रीय सदस्य काबलू महतो, मुंडारी खूंटकट्टीदार सह ग्राम प्रधान मधूमती सिंह मानकी, भू-अर्जन विभाग के अरूप कुमार मोदक एवं पशुपति बागची, युवा प्रखंड अध्यक्ष स्वपन आदित्यदेव समेत सड़क निर्माण से जुड़े कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

नगर निकाय क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति, कचरा उठाव, साफ-सफाई एवं अन्य विकास योजनाओं की उपायुक्त ने की समीक्षा।

नगर निकाय क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति, कचरा उठाव, साफ-सफाई एवं अन्य विकास योजनाओं की उपायुक्त ने की समीक्षा।

सरायकेला-खरसावां

उपायुक्त  नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में नगर निगम आदित्यपुर, नगर परिषद कपाली एवं नगर पंचायत सरायकेला क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं नागरिक सुविधाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा बैठक आहूत की गई। बैठक में पूर्व की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए पेयजलापूर्ति, कचरा उठाव एवं डंपिंग, साफ-सफाई, नाली, सड़क निर्माण, अवैध पार्किंग सहित अन्य विकास एवं निर्माण कार्यों की अद्यतन प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में पेयजलापूर्ति से संबंधित समस्याओं एवं संचालित योजनाओं की समीक्षा करते हुए संबंधित एजेंसियों को लंबित कार्यों को यथाशीघ्र पूर्ण करने तथा योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने क्षेत्र के सभी घरों को नल-जल योजना से जोड़ते हुए नियमित एवं सुगम पेयजलापूर्ति सुनिश्चित करने तथा पेयजल से संबंधित प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पेयजलापूर्ति से संबंधित कार्यों में किसी भी प्रकार की समस्या अथवा बाधा होने पर संबंधित विभाग एवं कार्यदायी एजेंसी आपसी समन्वय से उसका शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें।

नगर निकाय क्षेत्रों में कचरा उठाव, डंपिंग एवं साफ-सफाई व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने नियमित रूप से कचरे का उठाव एवं निर्धारित स्थल पर डंपिंग सुनिश्चित करने तथा साफ-सफाई के लिए स्पष्ट कार्ययोजना निर्धारित कर उसके अनुरूप नियमित रूप से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ एवं व्यवस्थित वातावरण बनाए रखना संबंधित निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए साफ-सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी एवं समीक्षा सुनिश्चित की जाए।

आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में कचरा उठाव से संबंधित प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित एजेंसी को निर्देश दिया कि नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए सभी 32 कचरा उठाव वाहनों को नियमित रूप से क्षेत्र में भ्रमणशील रखा जाए। मरम्मत अथवा मेंटेनेंस के कारण खड़े वाहनों को यथाशीघ्र दुरुस्त कर सेवा में लगाया जाए। नगर आयुक्त को सभी वाहनों की GPS ट्रैकिंग के माध्यम से नियमित समीक्षा करने तथा यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी वाहन निर्धारित रूट एवं कार्ययोजना के अनुरूप संचालित हों। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

आदित्यपुर क्षेत्र में GAIL GAS एवं JUDCO के पाइप एवं गैस पाइपलाइन से संबंधित प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित एजेंसियों के पदाधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए वर्तमान समस्याओं का त्वरित निराकरण करने तथा अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए आवश्यक समन्वय एवं पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त ने शहरी क्षेत्रों में अवैध पार्किंग की स्थिति की समीक्षा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को अवैध पार्किंग के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने आवश्यकतानुसार औचक निरीक्षण अभियान चलाने तथा चिन्हित स्थलों पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा, ताकि यातायात व्यवस्था सुगम एवं व्यवस्थित बनी रहे।

समीक्षा के क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की अद्यतन प्रगति की भी जानकारी ली गई। उपायुक्त ने योजना के तहत सभी पात्र लाभुकों को नियमानुसार योजना का लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने ऐसे लाभुकों की सूची जिला मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा, जिनके आवास स्वीकृत होने के बावजूद ऋण अथवा आवास निर्माण से संबंधित प्रक्रिया लंबित है, ताकि लंबित मामलों के कारणों की समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

उपायुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कार्यदायी एजेंसियों को विभागीय योजनाओं एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप जनहितकारी निर्णय लेते हुए कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्राप्त शिकायतों एवं सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यकता के अनुसार स्थल निरीक्षण किया जाए तथा समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने नगर निकाय क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति, विद्युत आपूर्ति, कचरा उठाव एवं डंपिंग, साफ-सफाई, नाली एवं जल निकासी, सड़क, पार्किंग सहित अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं की नियमित समीक्षा एवं निगरानी करने का निर्देश दिया। साथ ही, संबंधित पदाधिकारियों को औचक निरीक्षण अभियान संचालित करते हुए जमीनी स्थिति का आकलन करने और निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

उपायुक्त ने कहा कि नगर निकाय क्षेत्रों में नागरिकों को बेहतर एवं सुगम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। सभी संबंधित विभाग एवं कार्यदायी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए लंबित योजनाओं में तेजी लाएं तथा जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन एवं नागरिक सुविधाओं से संबंधित कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।

बैठक में नगर आयुक्त, नगर निगम आदित्यपुर एजाज़ अनवर, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद कपाली, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर पंचायत सरायकेला, कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, सरायकेला-आदित्यपुर, सहायक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, सरायकेला-आदित्यपुर, नगर प्रबंधक, नगर निकाय कार्यालयों के अभियंता एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सरायकेला-खरसावाँ में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 7100 किलो जावा महुआ जब्त।

सरायकेला-खरसावाँ में अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 7100 किलो जावा महुआ जब्त।

सरायकेला/राजनगर

सोनू कुमार सिंह

सरायकेला-खरसावाँ। जिले में अवैध शराब कारोबार के विरुद्ध प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। उपायुक्त के निर्देश पर उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज के नेतृत्व में उत्पाद विभाग की टीम ने शनिवार 16 अगस्त को राजनगर थाना क्षेत्र में बड़ी छापेमारी की।

गुप्त सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने राजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जनबानी एवं हनुमतबेड़ा में सघन छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान टीम ने अवैध रूप से संचालित हो रहे शराब के अड्डों पर कार्रवाई करते हुए 04 अवैध चुलाई भट्टियों को मौके पर ही ध्वस्त कर दिया।

छापेमारी के दौरान मौके से 7,100 किलोग्राम जावा महुआ और 140 लीटर अवैध महुआ चुलाई शराब बरामद की गई है। बरामद सभी अवैध उत्पाद को विधिसम्मत तरीके से जब्त कर लिया गया है।

विभाग द्वारा संबंधित अवैध चुलाई अड्डा संचालकों के विरुद्ध झारखंड उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत अभियोग दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

इस संबंध में उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज ने बताया कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री के विरुद्ध यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा और इस तरह की अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी अवैध शराब के निर्माण, बिक्री या परिवहन की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन या उत्पाद विभाग को दें, ताकि ऐसे अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

80 साल का भारत,2047 की आर्थिक उड़ान: सप्त धारा से वैश्विक महाशक्ति तक-तेल रुपया, शेयर बाजार औरनिवेश की नई परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

80 साल का भारत,2047 की आर्थिक उड़ान: सप्त धारा से वैश्विक महाशक्ति तक-तेल रुपया, शेयर बाजार औरनिवेश की नई परीक्षा -समग्र व्यापक विश्लेषण।

लाल किले से दुनियाँ के बाजारों तक: मोदी-मुर्मु के आर्थिक संदेश ने दिखाई 2047 के भारत की वैश्विक तस्वीर

सप्त धारा बनाम कच्चे तेल का झटका: विकास की रफ्तार,कमजोर रुपया,व्यापार घाटा और भारत की आर्थिक अग्निपरीक्षा -क्या 2047 का भारत बदलेगा वैश्विक अर्थव्यवस्था का संतुलन?

वैश्विक स्तरपर किसी राष्ट्र के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर दिए गए संबोधन केवल औपचारिक भाषण नहीं होते। विशेषकर भारत जैसे लोकतांत्रिक,विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से उभरते वैश्विक आर्थिक केंद्र के मामले में शीर्ष संवैधानिक पदों से निकला प्रत्येक बड़ा आर्थिक संकेत घरेलू उद्योग,शेयर बाजार,विदेशी निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माताओं के लिए दिशा-सूचक बन जाता है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि,लाल किले से निकली घोषणा अब बाजार, उद्योग और निवेशकों के लिए अवसर का संकेत है;लेकिन उस अवसर को वास्तविक संपत्ति में बदलने की निर्णायक कुंजी अब नीति के क्रियान्वयन, उत्पादक निवेश और आर्थिक अनुशासन के हाथ में है।15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से विकसित भारत @2047, शक्ति की सप्त धारा, आत्मनिर्भरता,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,सेमीकंडक्टर,परमाणु ऊर्जा,रक्षा विनिर्माण और युवाओं को केंद्र में रखा।पीएम ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण देने,सात-आठ सेमीकंडक्टर संयंत्रों को अगले एक-दो वर्षों में परिचालन में लाने और 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाने जैसे बड़े लक्ष्य रखे।स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी भारत की आर्थिक मजबूती, डिजिटल अर्थव्यवस्था, युवा शक्ति, समावेशी विकास, किसानों श्रमिकों,वैज्ञानिकों और उद्यमियों की भूमिका को रेखांकित किया। राष्ट्रपति के संदेश में भारत की आर्थिक लचीलापन और दुनियाँ के वास्तविक समय के डिजिटल लेनदेन में भारत की बड़ी हिस्सेदारी को विशेष महत्व मिला। इन दोनों संबोधनों को साथ रखकर देखें तो भारत का आर्थिक संदेश बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देता है,अगले दो दशकों में भारत को केवल बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उत्पादन, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल व्यवस्था और वैश्विक आपूर्ति शृंखला की सटीकता से निर्णायक शक्ति बनाना है।

साथियों, शक्ति की सप्त धारा, भारत के अगले आर्थिक चक्र का खाका इसको समझने की करें तो पीएम की शक्ति की सप्त धारा में विनिर्माण,कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित-नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर को विकास के सात प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया। यह महज सात क्षेत्रों की सूची नहीं है,बल्कि यदि इसे नीतिगत और वित्तीय संसाधनों से जोड़ा जाता है तो यह भारत के अगले औद्योगिक चक्र की आधारभूमि बन सकती है।विनिर्माण भारत को रोजगार और निर्यात देगा, कृषि- प्रसंस्करण ग्रामीण आय तथा खाद्य निर्यात बढ़ा सकता है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नवाचार उत्पादकता को बदल सकते हैं,गति शक्ति लॉजिस्टिक लागत घटा सकती है, रक्षा विनिर्माण आयात निर्भरता कम करते हुए निर्यात का नया बाजार खोल सकता है और हरित-नीली अर्थव्यवस्था ऊर्जा तथा समुद्री संसाधनों को विकास के नए केंद्र में ला सकती है। इसलिए इसका प्रभाव केवल सकल घरेलू उत्पाद पर नहीं,बल्कि रोजगार चालू खाते, विनिर्माण, पूंजी निवेश और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है।

साथियों बात अगर हम  एक करोड़ एआई-कुशल युवा: जनसंख्या से उत्पादक पूंजी की ओर इसको समझने की करें तो एक करोड़ युवाओं को अगले एक वर्ष में कृत्रिम बुद्धिमत्ता कौशल देने की घोषणा भारत की सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालीन आर्थिक घोषणाओं में से एक है। इसका वास्तविक महत्व इस बात में होगा कि प्रशिक्षण कितनी गुणवत्ता का है और कितने प्रशिक्षित युवाओं को वास्तविक रोजगार, उद्यमिता और उद्योग से जोड़ा जाता है।यदि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल सूचना- प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक सीमित न रखकर कृषि, स्वास्थ्य, विनिर्माण, बैंकिंग, शिक्षा, रक्षा और सरकारी सेवाओं में लागू करता है,तो उत्पादकता में बड़ा परिवर्तन संभव है। यही वह क्षेत्र है जहां भारत की विशाल युवा आबादी आर्थिक बोझ के बजाय वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बन सकती है।मुफ्त ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग की घोषणा भी इसी व्यापक सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से जुड़ती है। इसका उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के शिक्षा एवं कोचिंग खर्च को कम करना है।  यदि इससे प्रतिभा और अवसर के बीच की दूरी घटती है, तो इसका दीर्घकालीन प्रभाव सटिका से मानव पूंजी पर पड़ेगा।
साथियों बात कर हम  सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा: आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वतंत्रता तक को समझने की करें तो, भारत की अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी संरचनात्मक चुनौतियों में ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी आयात निर्भरता शामिल है। ऐसे में सेमीकंडक्टर उत्पादन और 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य केवल औद्योगिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा की रणनीति है। प्रधानमंत्री ने सात-आठ नए सेमीकंडक्टर संयंत्रों को अगले एक-दो वर्षों में परिचालन में लाने की बात कही है। यदि भारत चिप निर्माण, महत्वपूर्ण खनिज, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण का विश्वसनीय केंद्र बनता है, तो चीन प्लस वन रणनीति भारत के पक्ष में और मजबूत हो सकती है। वहीं परमाणु ऊर्जा का विस्तार आयातित जीवाश्म ईंधन पर दीर्घकालीन निर्भरता कम करने में सहायक हो सकता है। इसका अर्थ है कि ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सुरक्षा को आर्थिक विकास की मुख्यधारा में सटीकता से शामिल किया जा रहा है।

साथियों लेकिन दूसरी तरफ कच्चे तेल का दबाव,भारत की सबसे बड़ी बाहरी आर्थिक कमजोरी को समझने की करें तो,यहीं भारत की आर्थिक कहानी का दूसरा पक्ष सामने आता है। जुलाई 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर हो गया, जो छह महीने का उच्च स्तर था। आयात 76.22 अरब डॉलर रहा, जबकि वस्तु निर्यात 44.24 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। पश्चिम एशिया के तनाव, महंगे कच्चे तेल और ऊंची माल ढुलाई लागत ने आयात बिल पर दबाव डाला। हालांकि सेवाओं में 16.95 अरब डॉलर का अधिशेष एक महत्वपूर्ण सहारा बना हुआ है।इससे स्पष्ट है कि भारत की विकास कहानी मजबूत होते हुए भी ऊर्जा कीमतों से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। भारत अपनी तेल आवश्यकता का 90 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। जुलाई में रूस की हिस्सेदारी भारत के कच्चे तेल आयात में रिकॉर्ड 50.83 प्रतिशत, अर्थात लगभग 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन, रहीयह स्थिति भारत को सस्ता और अपेक्षाकृत सुरक्षित ऊर्जा स्रोत देती है, लेकिन इसके साथ भू- राजनीतिक और प्रतिबंध संबंधी जोखिम भी जुड़े हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो इसका प्रभाव महंगाई, चालू खाते, रुपये, परिवहन लागत, पेट्रोल-डीजल कीमतों और कंपनियों के लाभ मार्जिन तक पहुंच सकता है।

साथियों,तेल और कमजोर रुपया,विकास की राह की अग्निपरीक्षा इसको समझने की करें तो,यदि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 90 रुपये प्रति लीटर के आसपास प्रभाव डालने वाली स्थिति तक पहुंचती है, तो उसका प्रभाव केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन महंगा होगा, लॉजिस्टिक लागत बढ़ेगी और कृषि से लेकर विनिर्माण तक लगभग प्रत्येक क्षेत्र पर लागत का दबाव आ सकता है।ऊंचे तेल आयात बिल से डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है। कमजोर रुपया निर्यातकों के लिए कुछ हद तक लाभकारी हो सकता है, लेकिन तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ाकर आयातित महंगाई को जन्म दे सकता है। इसलिए भारत के लिए तेल कीमत और रुपया दोनों एक साथ आर्थिक परीक्षा बन सकते हैं।

साथियों,भारतीय शेयर बाजार: घोषणा से अवसर लेकिन मूल्यांकन में सावधानी,को समझने की करें तो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की घोषणाओं से शेयर बाजार में सबसे अधिक रुचि उन्हीं क्षेत्रों में पैदा होगी जिन्हें दीर्घकालीन सरकारी प्राथमिकता मिल रही है,रक्षा, पूंजीगत वस्तुएं, बुनियादी ढांचा, विद्युत, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सेवाएं, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स।लेकिन निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है,नीति घोषणा और कंपनी के वास्तविक मुनाफे के बीच कई वर्ष का अंतर हो सकता है।किसी क्षेत्र को सरकारी प्राथमिकता मिलने का अर्थ यह नहीं कि उस क्षेत्र की हर कंपनी का शेयर स्वतः बढ़ेगा। शेयर कीमत में पहले से भविष्य की उम्मीदें शामिल हो सकती हैं। इसलिए आदेश -पुस्तिका,लाभ,ऋण,नकदी प्रवाह, मूल्यांकन और वास्तविक परियोजना क्रियान्वयन को सटीकता से देखना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

साथियों, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार और वैश्विक निवेशक: भारत अब वैकल्पिक बाजार नहीं इसको समझने की करें तो, भारत की यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय पूंजी के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि वैश्विक कंपनियां चीन से उत्पादन का कुछ हिस्सा स्थानांतरित करना चाहती हैं, तो भारत का बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल,डिजिटल आधारभूत ढांचा और लोकतांत्रिक व्यवस्था उसे आकर्षक विकल्प बनाते हैंसेमीकंडक्टर रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हरित ऊर्जा में विदेशी कंपनियों कीभागीदारी बढ़ती है तो उसका लाभ केवल भारत को नहीं, बल्कि वैश्विक कंपनियों को भी मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारतीय कंपनियों के साथ-साथ उन वैश्विक कंपनियों को भी देख सकते हैं जिनकी भारत में आपूर्ति शृंखला, संयुक्त उद्यम या पूंजी निवेश की रणनीति है।लेकिन विदेशी निवेशक भारत की वृद्धि दर के साथ राजकोषीय अनुशासन, रुपये की स्थिरता, कर व्यवस्था, व्यापार नीति, अमेरिकी शुल्क, भू- राजनीतिक जोखिम और तेल कीमतों को भी सटीकता से बराबर देखेंगे।

साथियों बातें कर हम  सरकार की विनिवेश नीति औरबाजार में पूंजी की नई कहानी को समझने की करें तो आंकड़े के अनुसार 2026 में दस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री के जरिए 62,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की बात सामने आई है। इस आंकड़े को अंतिम रूप से प्रकाशित सरकारी आंकड़ों से मिलान करना आवश्यक है;इसलिए इसे यहां उपलब्ध रिपोर्टेड आंकड़े के रूप में देखना उचित होगा। अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री का व्यापक आर्थिक महत्व यह है कि इससे सरकार को राजस्व मिलता है और बाजार में सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी का व्यापक स्वामित्व बढ़ सकता है।यदि विनिवेश से प्राप्त राशि को केवल राजस्व व्यय में लगाने के बजाय बुनियादी ढांचे, पूंजीगत व्यय और उत्पादक परिसंपत्तियों में लगाया जाता है, तो इसका गुणक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर अधिक हो सकता है। दूसरी ओर, लगातार सरकारी हिस्सेदारी बिक्री से संबंधित कंपनियों के शेयरों में अल्पकालीन आपूर्ति दबाव भी आ सकता है। इसलिए बाजार इसे अवसर और जोखिम, दोनों रूपों में देखेगा।

साथियों, रक्षा अर्थव्यवस्था: खर्च से निर्यात तक को समझने की करें तो, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की घोषणा का आर्थिक महत्व भी बहुत बड़ा है। भारत यदि ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, विमान, इंजन और उन्नत रक्षा तकनीक का घरेलू उत्पादन बढ़ाता है, तो रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा देश के भीतर उद्योग, अनुसंधान और रोजगार पैदा कर सकता है।यहीं से ‘मेक इन इंडिया’ की अवधारणा ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ में बदल सकती है। इससे भारतीय रक्षा कंपनियों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए नए निर्यात बाजार खुल सकते हैं।निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल, घोषणा नहीं, क्रियान्वयन है,भारत की आर्थिक कहानी के सामने आज सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं है कि लक्ष्य कितने बड़े हैं, बल्कि यह है कि इन लक्ष्यों को कितनी तेजी और दक्षता से जमीन पर उतारा जाएगा। सेमीकंडक्टर संयंत्र, परमाणु परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा सभी में बड़ी पूंजी, कुशल मानव संसाधन, नियामकीय स्थिरता और समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता होगी।यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत को लेकर उत्साहित होने के साथ-साथ सावधान भी रहेंगे। यदि भारत व्यापार सुगमता, भूमि,श्रम,कर,लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा संबंधी बाधाओं को कम करता है,तो घोषित लक्ष्य निवेश में परिवर्तित हो सकते हैं। यदि क्रियान्वयन धीमा रहा तो घोषणाओं और वास्तविक आर्थिक परिणामों के बीच अंतर बढ़ सकता है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

80वें स्वतंत्रता दिवस पर समाजसेवी आशीष पति ने फहराया तिरंगा, शहीदों को किया नमन।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर समाजसेवी आशीष पति ने फहराया तिरंगा, शहीदों को किया नमन।

सरायकेला/आदित्यपुर

( सोनू कुमार सिंह )

देश भर में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और देशभक्ति के साथ मनाया गया। इसी क्रम में समाजसेवी आशीष पति ने अपने कार्यालय / आवास परिसर में ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी।

ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान जन-गण-मन का सामूहिक गान किया गया और वीर शहीद स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा और बच्चे मौजूद रहे।

अपने संबोधन में समाजसेवी आशीष पति ने कहा कि आजादी हमें लाखों वीर सपूतों के बलिदान से मिली है। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और झारखंड के धरती आबा बिरसा मुंडा जैसे महापुरुषों के त्याग को हम कभी नहीं भूल सकते।

उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा, “तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं, हमारे स्वाभिमान और एकता का प्रतीक है। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम नशा मुक्त, शिक्षित और स्वच्छ समाज के निर्माण में अपना योगदान देंगे। देश की असली तरक्की तब होगी जब आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचेगा।”

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने महापुरुषों के इतिहास को पढ़ें, सोशल मीडिया पर समय बर्बाद करने के बजाय राष्ट्र निर्माण में भागीदारी निभाएं।

कार्यक्रम के अंत में सभी को मिठाइयां बांटी गईं और “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

सरकारी गैर सरकारी संगठनों में बड़े ही से 80 वें स्वतंत्रता दिवस  झंडोतोलन कर मनाया गया।

सरकारी गैर सरकारी संगठनों में बड़े ही से 80 वें स्वतंत्रता दिवस  झंडोतोलन कर मनाया गया।

सरायकेला/चांडिल

सरायकेला खरसावां जिला के विभिन्न सरकारी गौर सरकारी संगठनों में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडोत्तोलन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर में मुख्य अतिथि का संबोधन इस समारोह में उपस्थित मंचासीन अतिथिगण, जनप्रतिनिधिगण, प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी तथा कर्मीगण, छात्र-छात्राएं, शहीद परिवार के सदस्यगण, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े सभी पत्रकार बंधु उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक दिन उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रनायकों और अमर शहीदों को नमन करने का दिन है, जिनके अतुलनीय त्याग और बलिदान के कारण आज हम स्वतंत्र भारत की हवा में सांस ले रहे हैं। हमारी यह सरायकेला-खरसावाँ की पावन धरा क्रांति और संस्कृति की अद्‌भुत स्थली रही है। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू कान्हू, चांद-भैरव और अमर शहीद पोटो हो जैसे वीरों के पदचिन्हों पर चलते हुए इस क्षेत्र ने आजादी की लड़ाई में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। खरसावाँ का इतिहास हमें सिखाता है कि अपनी माटी, अधिकार और स्वाभिमान के लिए कैसे अडिग रहा जाता है।

सरायकेला की विश्वप्रसिद्ध छऊ नृत्य शैली हमारी सांस्कृतिक आत्मा है। जिला प्रशासन इस कला और इसके कलाकारों के संरक्षण एवं वैश्विक मंचों पर प्रोत्साहन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। सरायकेला के पारंपरिक प्रसिद्ध मुखौटा शिल्पकार गुरू सुशांत महापात्र को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के कर कमलों से संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

जिला प्रशासन वर्ष 2026 में सरायकेला-खरसावाँ को समृद्धि और सशक्तिकरण की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार की दूरगामी योजनाओं यथा सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, बिरसा हरित ग्राम योजना को जिले के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। जिले के मॉडल एवं उत्कृष्ट विद्यालयों के माध्यम से दूरदराज के ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है, साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर पंचायतों तक मजबूत किया गया है।

स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर, मैं जिले में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की इस वर्ष की उपलब्धियों को विभागवार आपके समक्ष रखना चाहता हूं। 15अगस्त को विधायक पालिका,और 26 जनवरी को कार्यपालिका झंडोतोलन और झंडा फहराया जाता है।

सरायकेला-खरसावां के कृषि विभाग में गड़बड़ी के आरोप, किसानों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ।

सरायकेला-खरसावां के कृषि विभाग में गड़बड़ी के आरोप, किसानों को नहीं मिल रहा योजना का लाभ।

सरायकेला-खरसावां

( भरत सिंह )

साथियों योजना का लाभ जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुंचने की खबर इन दोनों गुप्त सूत्रों द्वारा प्राप्त हो रही है जिसे लेकर सरायकेला खरसावां जिले के कृषि विभाग सवालों के घेरे में बना हुआ है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार किसानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुंच रहा है और बिचौलियों के माध्यम से काम करवाया जा रहा है। कई प्रखंडों के किसानों ने शिकायत की है कि किसान सम्मान निधि, बीज वितरण, खाद सब्सिडी और कृषि यंत्रों पर अनुदान जैसी योजनाओं में पारदर्शिता नहीं है। आरोप है कि बिना पैसे दिए न तो फॉर्म आगे बढ़ता है और न ही समय पर बीज-खाद मिल पाता है।

सूत्रों ने यह भी बताया है कि “ऑनलाइन आवेदन के बाद भी महीनों तक वेरिफिकेशन नहीं होता। जब दलाल के जरिए 500-1000 रुपये दिए जाते हैं तभी फाइल आगे बढ़ती है।
साथ ही कुछ कृषि पदाधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से योजनाओं में फर्जी किसानों के नाम पर राशि निकाली जा रही है। इससे वास्तविक किसान वंचित रह जा रहे हैं।

किसानों की मांग है कि विभाग में शिकायत पेटी, हेल्पलाइन नंबर और नियमित जांच की व्यवस्था की जाए। साथ ही सभी योजनाओं की सूची पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि “अगर कोई लिखित शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। विभाग भ्रष्टाचार के खिलाफ है।”

फिलहाल किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे जिला मुख्यालय में प्रदर्शन करेंगे।

शेष अगले अंक में…

जल जीवन मिशन के तहत कुचाई प्रखंड के सामुडीह ग्राम में मनाया गया जल अर्पण दिवस।

जल जीवन मिशन के तहत कुचाई प्रखंड के सामुडीह ग्राम में मनाया गया जल अर्पण दिवस।

सरायकेला/कुचाई

जल जीवन मिशन के तहत दिनांक 13 अगस्त 2026 को कुचाई प्रखंड अंतर्गत सामुडीह ग्राम में जल अर्पण दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जलसहिया, ग्रामीणों एवं संबंधित पदाधिकारियों की सहभागिता रही।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सुरक्षित पेयजल के उपयोग एवं जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए शपथ ली। साथ ही जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को जल के महत्व, जल की बर्बादी रोकने तथा जलापूर्ति योजनाओं के बेहतर रख-रखाव एवं संचालन के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों से जल स्रोतों एवं जलापूर्ति योजनाओं के संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने तथा जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की गई।

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