सरायकेला-खरसावां में नई एसपी का योगदान, महिला एवं बाल सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावां: जिले की नई पुलिस अधीक्षक(SP)निधि द्विवेदी ने पदभार ग्रहण करते ही अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा कि जिले में महिला एवं बच्चों से जुड़े मामलों पर पुलिस की विशेष नजर रहेगी और ऐसे मामलों के त्वरित एवं संवेदनशील निष्पादन को सुनिश्चित किया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी ने बताया कि अपराध नियंत्रण के लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले को अपराधमुक्त बनाने की दिशा में पुलिस पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्यकरेगी।पदभार ग्रहण करने के अवसर पर जिला पुलिस द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।
इस दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी समीर कुमार सवैया, चांडिल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अरविंद बिंद्रा, डीएसपी सहित सभी थाना प्रभारी मौजूद रहे। नवपदस्थापित एसपी ने सभी पुलिस पदाधिकारियों को टीम भावना के साथ कार्य करने और आम जनता के प्रति संवेदनशील रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत है, जिसे हर हाल में बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
जोड़ा बैल शिविर कार्यक्रम का हुआ आयोजन, किसानों के खीले चेहरा।
सरायकेला/ईचागढ़
सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय परिसर के पशुपालन कार्यालय प्रांगण में शनिवार को जोड़ा बैल शिविर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिविर में मुख्य रूप से प्रखंड प्रमुख गुरूपद मार्डी,जिप सदस्य ज्योतिलाल मांझी, बीडीओ एकता वर्मा एवं प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो उपस्थित थे। शिविर में किसानों के बीच 90 प्रतिशत अनुदान राशि पर जोड़ा बैल का वितरण किया गया।
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 8 किसानों के बीच 8 जोड़ा बैल का वितरण किया गया। वहीं वीडियो एकता वर्मा ने लाभूक किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का जानकारी दिया एवं योजनाओं का समुचित लाभ उठाने का अपील किया। पशु पालन पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो ने बताया कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदानित राशि पर किसानों को एक एक जोड़ा बैल दिया गया।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को खेती करने में प्रोत्साहित करना है, ताकि गरीब किसान सरकारी अनुदान पर जोड़ा बैल लेकर मन लगाकर खेती कर सके और किसान आत्मनिर्भर हो। उन्होंने कहा कि बैलों का रखरखाव,समय पर स्वास्थ्य जांच, वैक्सीन आदि के संबंध में भी किसानों को जानकारी दिया गया।वहीं किसानों को जोड़ा बैल मिलने से लाभूक किसानों का चेहरा खुशी से खिल उठा।
राष्ट्रीय उच्च पथ 33 कान्दरबेड़ा पर भीषण हादसा, ट्रेलर के चपेट में आने से दो बाइक सवार युवक गंभीर।
सरायकेला/चांडिल
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कान्दरबेड़ा के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर शनिवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से जा टकराई, जिससे बाइक सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि एक महिला को हल्की चोटें आई हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाइक पर सवार तीनों लोग नीमडीह प्रखंड के चालियामा बांधड़ीह गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। घायलों में श्रीकांत सिंह, नागेंद्र सिंह एवं प्रतिमा सिंह शामिल हैं। बताया जा रहा है कि तीनों जमशेदपुर की ओर जा रहे थे।
इसी दौरान कान्दरबेड़ा के पास सड़क किनारे खड़े एक ट्रेलर में उनकी बाइक पीछे से जा भिड़ी।हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। मौके पर मौजूद आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव हरेलाल महतो के भाई रुद्र प्रताप महतो ने निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था कर सभी घायलों को तत्काल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल, जमशेदपुर पहुंचाया।डॉक्टरों के अनुसार, दोनों युवकों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि महिला को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।घटना स्थल पर समाजसेवी शेखर गांगुली एवं झामुमो के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष हरिदास महतो भी मौजूद थे।यह हादसा एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर लापरवाही से खड़े भारी वाहनों और तेज रफ्तार के कारण बढ़ते सड़क हादसों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
बरसात में ‘कैद’ होते ग्रामीण, 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी।
सरायकेला/ईचागढ़
सरायकेला खरसावां जिला अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के मैसाढ़ा पंचायत के कालीचामदा के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर बीडीओ एकता वर्मा को ज्ञापन सौंपा । ग्रामीणों का कहना है कि चांडिल बांध विस्थापन का दंश झेलने के बावजूद आज तक गांव में पक्की सड़क नहीं बन पाई है। करीब 70 परिवारों वाले इस गांव की आबादी लगभग 400 है, लेकिन आवागमन के लिए समुचित सड़क नहीं होने से लोगों का जीवन कठिन बना हुआ है। बरसात के दिनों में कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है, जिससे ग्रामीणों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
सड़क के अभाव में स्वास्थ्य और शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खटिया के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। वहीं, कीचड़ भरे रास्तों के कारण बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
इस मुद्दे पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने बताया कि बीडीओ द्वारा 7 दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो वे डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे एवं प्रखंड कार्यालय में धरना प्रदर्शन और अनशन भी किया जाएगा। मौके पर सैकड़ों ग्रामीण महिला पुरुष उपस्थित थे।
देश के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बंगाल चुनाव के दौरान कुड़मि बहुल क्षेत्रों में कुड़मालि भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का संकेत माना जा सकता है। बृहद छोटानागपुर क्षेत्र के अंतर्गत पश्चिम बंगाल में निवास करने वाला कुड़मि समाज अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति और परंपराओं के साथ लंबे समय से पहचान और अधिकार की मांग करता रहा है। भारत की विविधता में भाषाई पहचान का विशेष महत्व है। जब किसी भाषा को आठवीं अनुसूची में स्थान मिलता है, तो उसे न केवल संवैधानिक संरक्षण मिलता है, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और सांस्कृतिक विकास के नए द्वार भी खुलते हैं। ऐसे में कुड़मालि भाषा को यह दर्जा दिलाने की पहल कुड़मि समाज के आत्मसम्मान को मजबूत कर सकती है।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी द्वारा जनजातीय और क्षेत्रीय समुदायों के प्रति विश्वास निर्माण की रणनीति पहले भी दिखाई दे चुकी है। इसका प्रमुख उदाहरण श्रीमती द्रौपदी मुर्मू हैं, जो संथाल समाज से आती हैं और आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। यह घटना न केवल एक समुदाय के लिए, बल्कि पूरे देश के प्रति सामाजिक समावेशन और अवसर की समानता का प्रतीक बनी।
इसी तरह यदि कुड़मि समाज को भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उचित प्रतिनिधित्व मिलता है, चाहे वह मंत्री पद हो या अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, तो इससे समाज में विश्वास और भागीदारी की भावना और प्रबल होगी। इससे न केवल कुड़मि समाज का उत्थान होगा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ें भी और मजबूत होंगी। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि ऐसे वादे केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें ठोस नीतियों और कार्यान्वयन के माध्यम से साकार किया जाए। भाषा को मान्यता देने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
आखिर कुड़मि समाज के साथ विश्वास का यह संबंध केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। जहां हर समुदाय को अपनी पहचान, सम्मान और विकास का समान अवसर मिले।
आज आवश्यकता है कि हम सभी कुड़मि भाई-बहन अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग पूरी समझदारी के साथ करें। हमें यह देखना है कि कौन हमारी भाषा, हमारी संस्कृति और हमारे समाज के उत्थान के लिए ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प ले रहा है। हमें अवसर देना है परखने का, समझने का, और अपने भविष्य को मजबूत करने का। लेकिन समाज के सभी सदस्यों एवं वर्गों को, यह भी याद रखना होगा, हमारा आंदोलन हमारी पहचान है। यह संघर्ष हमारी आत्मा है । यह न कभी रुका है, न कभी रुकेगा। चाहे कोई भी सरकार आए या जाए, कुड़मि समाज अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहेगा, संगठित रहेगा और आगे बढ़ता रहेगा। आज का निर्णय केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि आगे आने वाले वर्षों की दिशा तय करेगा। एकजुट होकर, जागरूक होकर, और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहकर हमें आगे बढ़ना है।
प्रस्तुति :गुणधाम मुतरुआर (भूगोल-शिक्षक) अनुग्रह नारायण +2 उच्च विद्यालय पिलीद, ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां, झाड़खंड – 832403
2013 बैच की आईपीएस निधि द्विवेदी संभालेंगी सरायकेला-खरसावां पुलिस की कमान।
सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावां: जिले के पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ है। 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी निधि द्विवेदी को सरायकेला-खरसावां की नई पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में नियुक्त किया गया है। वे अब जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगी। निधि द्विवेदी के पदभार ग्रहण करने से जिले में पुलिसिंग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासनिक दक्षता और सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाने वाली द्विवेदी से अपराध नियंत्रण, विधि-व्यवस्था सुदृढ़ करने और आम जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की अपेक्षा की जा रही है।
बताया जा रहा है कि नई एसपी जिले में अपराध पर अंकुश लगाने, अवैध गतिविधियों पर सख्ती बरतने और पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह एवं पारदर्शी बनाने को प्राथमिकता देंगी। साथ ही महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने नई एसपी के आगमन का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में जिले में शांति और सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
तिरूलडीह थाना क्षेत्र में अवैध खनन और बालू परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। तिरुलडीह थाना क्षेत्र में शुक्रवार को चलाए गए विशेष छापामारी अभियान के दौरान पुलिस ने अवैध बालू से लदे दो ट्रैक्टरों को जब्त किया है। इस कार्रवाई से इलाके में अवैध खनन करने वालों के बीच हड़कंप मच गया है।
ग्राम काड़कीडीह में छापेमारी कर दो अवैध बालू लदे ट्रैक्टर जब्त किया।थाना प्रभारी कौशल कुमार ने बताया कि तिरुलडीह थाना क्षेत्र के ग्राम काड़कीडीह में अवैध रूप से बालू का उत्खनन और परिवहन करने का सुचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने विशेष अभियान चलाया और मौके से दो ट्रैक्टरों को पकड़ लिया गया। जब्त किए गए दोनों ट्रैक्टरों में करीब 200 सीएफटी अवैध बालू लदा हुआ था। पुलिस ने तत्काल दोनों वाहनों को अपने कब्जे में लेकर थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया। अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई किया जा रहा है।
अवैध बालू उठाव के विरुद्ध इचागढ़ में प्रशासन की कार्रवाई, अवैध गिट्टी लदा ट्रैक्टर को किया गया जब्त।
अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी के संयुक्त निरीक्षण के दौरान ईचागढ़-तिरुलडीह पुलिया के नीचे अवैध रूप से बनाए गए रास्ते को जेसीबी से किया गया अवरुद्घ।
सरायकेला/खरसावां
इचागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत स्वर्णरेखा नदी स्थित बालू घाट पर अवैध बालू उठाव की सूचना पर अंचल अधिकारी, इचागढ़ श्री दीपक कुमार एवं थाना प्रभारी द्वारा पुलिस बल के साथ संयुक्त निरीक्षण एवं कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान ईचागढ़-तिरुलडीह पुलिया के नीचे अवैध रूप से बनाए गए रास्ते को जेसीबी की सहायता से खुदाई कर अवरुद्ध किया गया, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
इसके साथ ही अवैध रूप से संचित बालू के डंप पर छापामारी की गई तथा एक अवैध गिट्टी लदा ट्रैक्टर को जब्त कर थाना में सुरक्षित रखा गया है। मामले में अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुलकांत झा ने पंडित बिनोदानंद झा की 126वीं जयंती पर श्रद्धासुमन श्रद्धांजलि अर्पित किए।
सरायकेला/गम्हरिया
गम्हरिया कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुलकांत झा ने अपने सहयोगियो के साथ झारखंड के माटी पुत्र एवं शिक्षाविद्य और संविधान सभा के सदस्य बिहार के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय पंडित बिनोदानंद झा की 126वीं जयंती पर श्रद्धासुमन श्रद्धांजलि अर्पित किए। श्री झा ने कहा वे एक दूरदर्शी नेता और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने कार्यों और विचारों से बिहार के विकास को नई दिशा दी।
उनका सादगीपूर्ण जीवन, उच्च आदर्श और समाज के प्रति अटूट समर्पण आज भी हमें प्रेरित करता है कि हम जनहित और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ें। श्री फुलकांत झा ने सरकार से मांग की है मिथिला-मैथिल,मिथिली के वरदपुत्र झारखंड के गौरव के प्रति सच्ची श्रद्धांजली के रूप में देवघर एम्स (AIMs)का नाम बिनोदा बाबू के नाम पर रखा जाए। जो हेमंत बाबू के सरकार के लिए गौरव का पल होगा। बिनोदा बाबू अमर रहे।
ईचागढ़ में ‘स्कूल रुआर’ कार्यक्रम का आयोजन, शिक्षा की मुख्यधारा से बच्चों को जोड़ने पर जोर।
सरायकेला/ईचागढ़
(मालखान महतो)
ईचागढ़प्रखंड कार्यालय सभागार में शुक्रवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी एकता वर्मा की अध्यक्षता में ‘स्कूल रुआर’ (बैक टू स्कूल) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, ईचागढ़ की वार्डेन सुनीता महतो, शिक्षिका मल्लिका महतो एवं मौसमी महतो के नेतृत्व में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुआ। छात्राओं ने गीतों के माध्यम से बच्चों की अनिवार्य शिक्षा पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि शत-प्रतिशत नामांकन, 5 से 18 वर्ष की आयु के सभी बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करना। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को चिन्हित कर उन्हें वापस शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना। नामांकित बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना। बच्चों को सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं (पुस्तकों, पोशाक आदि) के प्रति जागरूक करना।
अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर उन्हें विद्यालय प्रबंधन से जोड़ना। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘स्कूल रुआर’ मात्र एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक अभियान है, ताकि ईचागढ़ प्रखंड का कोई भी बच्चा शिक्षा की रोशनी से वंचित न रहे।
इस अवसर पर अंचल अधिकारी दीपक प्रसाद, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी सुखदेव कुमार , शिक्षा विभाग के बीपीएम चंदन कुमार सिंह, जेएलएसपीएस बीपीएम मनोहर टोप्पो, महिला पर्यवेक्षिका कृष्णा देवी, संकुल साधन सेवी प्रकाश प्रमाणिक, शक्ति पद महतो, पद्म लोचन महतो, भूतेश महतो, बीआरसी कर्मचारी और प्रखंड की सभी आंगनबाड़ी सेविकाएं मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 7 युनिट सुकर का किया वितरण।
सरायकेला/ईचागढ़
सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय परिसर में गुरुवार को मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत पशुपालन विभाग द्वारा 7 लाभुको के बीच 7 युनिट सुकर का वितरण किया गया। वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी एकता वर्मा,जिला परिषद सदस्य जोतिलाल मांझी एवं पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो के द्वारा वितरण किया गया।
वहीं पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो ने बताया कि 7 लाभुको के बीच 35 सुकर का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में मुर्गा चूजा, बत्तख,बकरा, बकरी एवं गौ पालकों के बीच गाय का वितरण किया गया है। विभाग का उद्देश्य है कि किसानों को अनुदानित दर पर पशु धन उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।
15 वर्षों से महिला जलती आग पर चलकर कर रही शिव तपस्या, पति ने पीठ में हुक घोंपकर दिखाया आस्था का अद्भुत रूप।
सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत लाबा गांव में बुधवार को आस्था, भक्ति और तपस्या का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। चड़क पूजा के अवसर पर यहां एक महिला ने जलती व लहलहाती आग पर चलकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन किया, वहीं उनके पति ने अपनी पीठ में लोहे का हुक घोंपकर 40 फीट ऊंचाई पर चरखी से झूलते हुए भक्ति का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया।
करीब 50 वर्षीय बुटन ग्वालीन पिछले 15 वर्षों से लगातार इस कठिन तपस्या को करती आ रही हैं। हर वर्ष चड़क पूजा के दौरान वे लहलहाती आग में नंगे पैर चलती हैं, जिसे स्थानीय लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने का माध्यम मानते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बुटन ग्वालीन की यह साधना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनकी गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
वहीं उनके पति सोमा गोप ने भी इस अवसर पर अपनी पीठ में लोहे का हुक घोंपकर लकड़ी से बने बल्ले पर लटकते हुए करीब 40 फीट ऊपर तक झूलकर भगवान शिव की आराधना की। यह दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। पूरे क्षेत्र में “हर-हर महादेव” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।
ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की कठोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और परिवार तथा गांव पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
हालांकि इस प्रकार की धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से सवाल भी उठते हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं। बुटन ग्वालीन ने बताया कि लहलहाती आग पर भगवान शिव जी की असीम कृपा से चलती हूं, जिसमें न कपड़े और न ही कहीं आग से जलता है और लोहे का हुक पीठ के चमड़े पर घोंपा जाता है और रस्सी के सहारे चकरी में लटकाकर घूमते हैं,जिसमें न ही खुन निकलता है ओर न ही घाव पर मरहम पट्टी लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परम्परा सिर्फ भोले बाबा के कृपा से ही संभव है।