अमेरिक़ी जलवायु अनुसंधान संस्था क्लाइमेट सेंटर रिपोर्ट 2026 -क्या जलवायु परिवर्तन हमारी नींद चुरा रहा है? -बढ़ती गर्म रातें,घटती गहरी नींद और मानव स्वास्थ्य पर मंडराता वैश्विक संकट -अब जलवायु परिवर्तन का नया पैमाना होगी हमारी नींद? -समग्र व्यापक विश्लेषण।

अमेरिक़ी जलवायु अनुसंधान संस्था क्लाइमेट सेंटर रिपोर्ट 2026 -क्या जलवायु परिवर्तन हमारी नींद चुरा रहा है? -बढ़ती गर्म रातें,घटती गहरी नींद और मानव स्वास्थ्य पर मंडराता वैश्विक संकट -अब जलवायु परिवर्तन का नया पैमाना होगी हमारी नींद? -समग्र व्यापक विश्लेषण।

जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध उठाया गया प्रत्येक कदम अब हमारी आने वाली पीढ़ियों की स्वस्थ,गहरी और सुकूनभरी नींद की रक्षा का नया पैमाना भी संकल्प होगा।

वैश्विक और स्थानीय स्तरपर नींद का संकट भी जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती हो सकता है? -स्लीप हेल्थ को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा तात्कालिक बनाने की ज़रूरत -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन पर अधिकांश चर्चा बाढ़,सूखा,समुद्र-स्तर वृद्धि और भीषण हीटवेव तक सीमित रही है।किंतु अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसे प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया है,जो प्रत्यक्ष रूप से हर व्यक्ति के जीवन,स्वास्थ्य, उत्पादकता और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। वह है नींद का नुकसान (स्लीप लॉस)। अमेरिका की जलवायु अनुसंधान संस्था क्लाइमेट सेंटर द्वारा 2020 से 2025 के बीच विश्व के 1,300 से अधिक शहरों (लगभग 1,338 शहरों) पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि बढ़ते रात्रिकालीन तापमान के कारण एक औसत व्यक्ति वैश्विक स्तरपर प्रति वर्ष लगभग 56 घंटे की नींद खो रहा है। भारत के कई बड़े शहरों में यह नुकसान 65 से 93 घंटे प्रति वर्ष तक पहुँच गया है।अध्ययन में यह भी बताया गया कि इस तापमान- जनित नींद हानि का कम से कम लगभग 10 प्रतिशत भाग सीधे मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते यह कहना चाहूंगा कि यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना आवश्यक है क़ि यह मूल दावा काफी हद तक सही है,लेकिन इसमें एक छोटा-सा स्पष्टीकरण आवश्यक है। अध्ययन यह नहीं कहता कि पूरे भारत का प्रत्येक नागरिक 65-93 घंटे की नींद खो रहा है,बल्कि यह आँकड़ा भारत के कई बड़े शहरों के लिए है। उदाहरण के तौर पर चेन्नई में लगभग 93 घंटे, मुंबई में लगभग 84 घंटे और कोलकाता में लगभग 80 घंटे वार्षिक नींद हानि का अनुमान लगाया गया। वैश्विक औसत लगभग 56 घंटे प्रतिवर्ष बताया गया।

साथियों, भारत जैसे उष्ण कटिबंधीय देश में समस्या इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि यहाँ गर्मी अब केवल दिन तक सीमित नहीं रहती। पहले सूर्यास्त के बाद तापमान में पर्याप्त गिरावट आ जाती थी, जिससे शरीर को ठंडा होने और गहरी नींद (डीप स्लीप) में जाने का अवसर मिलता था। अब महानगरों में कंक्रीट, डामर, वाहनों की गर्मी और हरित क्षेत्र में कमी के कारण अर्बन हीट आइलैंड इफ़ेक्ट विकसित हो गया है।परिणाम स्वरूप रात का तापमान भी ऊँचा बना रहता है और शरीर अपनी प्राकृतिक ताप- नियंत्रण प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता।यही कारण है कि भारत के अनेक शहरों में लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि रात में भी बेचैनी बनी रहती है और नींद सटीकता से  बार-बार टूटती है।
साथियों,चिकित्सकीय दृष्टि से देखा जाए तो गहरी नींद मानव शरीर की प्राकृतिक मरम्मत प्रक्रिया है। इसी अवस्था में मस्तिष्क दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करता है,स्मरण शक्ति मजबूत होती है,प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय होता है,हार्मोन संतुलित होते हैं तथा हृदय एवं रक्त वाहिनियों को विश्राम मिलता है। यदि लगातार गहरी नींद कम हो जाए तो सबसे पहले मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन निर्णय क्षमता में कमी और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई दिखाई देती है। इसके बाद धीरे-धीरे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, स्ट्रोक, अवसाद, चिंता तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

साथियों, वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि शरीर को सोने के लिए अपने आंतरिक तापमान को थोड़ा कम करना पड़ता है। यदि रात का वातावरण अधिक गर्म हो, तो यह प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है। व्यक्ति को नींद आने में अधिक समय लगता है,रात में कई बार जागना पड़ता है और सबसे महत्वपूर्ण,गहरी नींद का समय घट जाता है। यही कारण है कि सुबह उठने के बाद भी व्यक्ति स्वयं को थका हुआ महसूस करता है।इसका प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। नींद की कमी सीधे अर्थव्यवस्था पर भी असर डालती है। पर्याप्त नींद न मिलने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता घटती है, औद्योगिक दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता प्रभावित होती है और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। जब किसी देश की बड़ी आबादी लगातार कम गुणवत्ता वाली नींद लेने लगे तो उसका प्रभाव राष्ट्रीय उत्पादकता और आर्थिक विकास पर भी दिखाई देता है।

साथियों, भारत में यह चुनौती इसलिए भी अधिक जटिल है क्योंकि यहाँ तेज़ी से शहरीकरण हो रहा है। कंक्रीट के जंगल, कम होते पेड़, एयर कंडीशनरों से निकलने वाली गर्म हवा, घनी आबादी और सीमित खुले स्थान शहरों को दिन और रात दोनों समय अधिक गर्म बनाए रखते हैं। गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवार, जिनके पास पर्याप्त शीतलन व्यवस्था नहीं होती, इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।हाल के वर्षों में भारत के अनेक क्षेत्रों में यह भी देखा गया है कि गर्म रातों के दौरान अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी मामलों में वृद्धि होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रात के समय शरीर को पर्याप्त ठंडक और आराम न मिले तो दिनभर की गर्मी से उत्पन्न तनाव समाप्त नहीं हो पाता, जिससे स्वास्थ्य जोखिम सटीकता से कई गुना बढ़ जाते हैं।

साथियों, मानसिक स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव भी अत्यंत गंभीर है। लगातार नींद की कमी व्यक्ति में अवसाद, चिंता तनाव,भावनात्मक अस्थिरता तथा निर्णय क्षमता में गिरावट ला सकती है। कई अध्ययनों ने संकेत दिया है कि जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक गर्मी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ा सकती है जिसमें विशेषकर उन समुदायों में जो पहले से सामाजिक या आर्थिक दबावों का सामना कर रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए केवल एयर कंडीशनर ही समाधान नहीं हैं। वैज्ञानिक शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने,छतों पर परावर्तक (कूलरूफ़) तकनीक अपनाने,वर्षा जल संरक्षण, बेहतर वेंटिलेशन वाले भवन, शहरी वृक्षारोपण, ऊर्जा- कुशल निर्माण सामग्री और हीट एक्शन प्लान को अधिक प्रभावी बनाने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही नागरिकों को भी रात में कमरे का तापमान कम रखने, पर्याप्त पानी पीने, सोने से पहले भारी भोजन और कैफीन से बचने तथा नियमित नींद का समय बनाए रखने जैसी आदतें सटीकता से  अपनानी चाहिए।
साथियों, जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न नींद का संकट सभी आयु वर्गों को समान रूप से प्रभावित नहीं करता। बच्चे, किशोर,गर्भवती महिलाएँ, बुजुर्ग और पहले से हृदय मधुमेह या श्वसन संबंधी रोगों से पीड़ित लोग सबसे अधिक जोखिम में हैं। बच्चों में गहरी नींद मस्तिष्क के विकास, सीखने की क्षमता, स्मरण शक्ति तथा शारीरिक वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। यदि लगातार गर्म रातों के कारण उनकी नींद बाधित होती है तो पढ़ाई, व्यवहार, एकाग्रता और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। युवाओं में नींद की कमी अवसाद, चिंता,डिजिटल लत, कार्यक्षमता में गिरावट और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ाती है।वहींबुजुर्गों में पहले से ही नींद हल्की होती है,इसलिए अत्यधिक गर्म रातें उनके लिए उच्च रक्तचाप, हृदयाघात और स्ट्रोक का खतरा और अधिक बढ़ा देती हैं। इस प्रकार जलवायु परिवर्तन का यह प्रभाव केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि पीढ़ियों के भविष्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य से सटीकता से जुड़ा हुआ विषय बन गया है।

साथियों,भारत के महानगरों तथा तेजी से विकसित हो रहे मध्यम शहरों में कंक्रीट,डामर की सड़कों,ऊँची इमारतों वाहनों तथा एयर कंडीशनरों से निकलने वाली गर्म हवा के कारण ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। शहर दिनभर सूर्य की ऊष्मा को अपने भीतर संचित कर लेते हैं और रात के समय धीरे-धीरे उसे छोड़ते रहते हैं। परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरों का रात्रिकालीन तापमान कई डिग्री अधिक बना रहता है। यही कारण है कि लोगों को देर रात तक बेचैनी महसूस होती है, बार-बार नींद खुलती है और सुबह उठने पर भी थकान बनी रहती है। यदि शहरी नियोजन में हरित क्षेत्र, जलाशय, खुली भूमि, वृक्षारोपण तथा ‘कूल रूफ’ जैसी तकनीकों को प्राथमिकता नहीं दी गई तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। हमें ध्यान देना होगा जलवायु परिवर्तन और अर्थव्यवस्था का अदृश्य संबंध नींद की कमी केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। पर्याप्त नींद न मिलने से कर्मचारियों की उत्पादकता घटती है, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है, औद्योगिक दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ती है तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। विश्व स्तर पर यदि करोड़ों लोग हर वर्ष दर्जनों घंटे कीगुणवत्तापूर्ण नींद खो रहे हैं तो उसका प्रभाव सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), श्रम उत्पादकता, स्वास्थ्य बजट और सामाजिक कल्याण पर भी दिखाई देगा। इसलिए विशेषज्ञ अब जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि आर्थिक विकास, मानव पूंजी और राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता का भी मुद्दा मान रहे हैं।
भारत के लिए समय की माँग सटीकता से राष्ट्रीय स्लीप हेल्थ मिशन हैँ।

साथियों, भारत ने हीट एक्शन प्लान, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम और जलवायु परिवर्तन से संबंधित अनेक योजनाएँ शुरू की हैं, किंतु अब आवश्यकता इस बात की है कि ‘स्लीप हेल्थ’ को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाया जाए। राष्ट्रीय स्तर पर नींद संबंधी
जागरूकता अभियान, स्कूलों और कॉलेजों में स्वस्थ नींद की शिक्षा, अस्पतालों में स्लीप क्लीनिकों का विस्तार, शहरों में रात्रिकालीन तापमान की निगरानी तथा वैज्ञानिक शहरी नियोजन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि आज इस दिशा में समन्वित प्रयास किए जाते हैं तो भविष्य में करोड़ों लोगों को मानसिक और शारीरिक बीमारियों से बचाया जा सकता है। जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध हरित विकास की नीति वास्तव में स्वस्थ और सुकूनभरी नींद की भी नीति है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करे इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि अब जलवायु परिवर्तन का नया पैमाना होगी हमारी नींद अब यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का विषय नहीं रहा। यह मानव स्वास्थ्य,मानसिक संतुलन, उत्पादकता शिक्षा, अर्थव्यवस्था और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा वैश्विक मुद्दा बन चुका है। यदि बढ़ती गर्म रातों को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक और स्थानीय स्तर पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में नींद का संकट भी जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हो सकता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध उठाया गया प्रत्येक कदम केवल पृथ्वी को बचाने का प्रयास नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की स्वस्थ, गहरी और सुकूनभरी नींद की रक्षा का भी संकल्प होगा।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार ने केंद्रीय नगर विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से की मुलाकात।

आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार ने केंद्रीय नगर विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से की मुलाकात।

सीतारामपुर डैम को ईको-टूरिज्म हब बनाने का रखा प्रस्ताव।

महत्वपूर्ण बैठक में संजय सरदार झारखंड से शामिल होने वाले एकमात्र मेयर रहे।

सरायकेला/आदित्यपुर

रविवार को हुए ऑल इंडिया मेयर काउंसिल की राष्ट्रीय बैठक में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए आदित्यपुर नगर निगम के मेयर संजय सरदार ने केंद्रीय नगर विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात की।

वहीं इस शिष्टमंडलीय मुलाकात के दौरान मेयर ने केंद्रीय मंत्री को एक विस्तृत और ऐतिहासिक मांग पत्र सौंपा, जिसमें झारखंड के लिए केंद्र द्वारा प्रस्तावित 15वें वित्त आयोग की ₹2,500 करोड़ की विकास राशि को राज्य को पुनः वापस किए जाने के मुद्दे पर चर्चा हुई।

मेयर ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए स्पष्ट किया कि 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड के नगरीय निकायों को आवंटित होने वाली करीब ₹2,500 करोड़ की राशि तकनीकी कारणों से वापस हो गई है। उन्होंने जोर दिया कि इस राशि के अभाव में राज्य के विभिन्न नगर निकायों के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याणकारी योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। झारखंड के शहरी विकास को गति देने के लिए इस फंड की उपलब्धता बेहद जरूरी है। इस पर केंद्रीय मंत्री खट्टर ने पूरे विषय को गंभीरता से सुना और नियमानुसार उचित कार्रवाई करते हुए सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया।

साथ ही मेयर ने आदित्यपुर को राष्ट्रीय स्तर पर इंडस्ट्रियल स्मार्ट अर्बन ग्रोथ मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिए विशेष वित्तीय सहायता पैकेज की मांग की। उन्होंने आगामी 40 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए कॉम्प्रिहेंसिव मास्टर प्लान तैयार करने, इंटरनेशनल कंसलटेंट की नियुक्ति, 4,000 की क्षमता वाले कन्वेंशन सेंटर के निर्माण और सीतारामपुर डैम को विश्वस्तरीय ईको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति देने का भी आग्रह किया।

वहीं मयर कि इस पहल को आदित्यपुर के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

जगरनाथ गोप हत्याकांड का 24 घंटे में खुलासा।

जगरनाथ गोप हत्याकांड का 24 घंटे में खुलासा।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले की पुलिस को बड़ी सफलता मिली है जहां पर पुलिस ने 24 घंटे के अंदर हत्या के मामले का खुलासा कर दिया है।

ज्ञात हो कि आदित्यपुर थाना अंतर्गत बोलायडीह स्थित शीतला मंदिर के सामने शनिवार दोपहर लगभग एक बजे एक भयानक वारदात ने पूरे मोहल्ले को हिला कर रख दिया। गोप पाड़ा के रहने वाले जगन्नाथ गोप उर्फ काड़ा (27) को चार-पांच अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर मौत के घाट उतार दिया। बीच सड़क पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया और लोगों में दहशत का माहौल बन गया।

वहीं इस मामले पर रविवार ( 19.07.2026 ) को सरायकेला के पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले का आधिकारिक तौर पर पर्दाफाश किया।

पुलिस के अनुसार, यह पूरी वारदात 18 जुलाई 2026 को घटित हुई थी, जिसके बाद बलरामपुर निवासी सोनू गोप ने आदित्यपुर थाने में अपने भाई जगरनाथ गोप की हत्या के संबंध में प्राथमिकी (कांड संख्या 196/2026) दर्ज कराई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी के निर्देश गम्हरिया) से घटना में शामिल चार मुख्य आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार अभियुक्तों में शिवम प्रमाणिक (पिता-रविन्द्र प्रमाणिक), संजय नायक (पिता-रामदास नायक), प्रेम नायक और गणेश नायक (दोनों के पिता-माखन नायक) शामिल हैं।

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त दो लोहे की रॉड भी बरामद कर ली है। गिरफ्तार सभी अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, वहीं पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

जाता है कि मृतक की पत्नी की डेढ़ वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। उसके पीछे आठ वर्षीय पुत्र और दो वर्षीय पुत्री हैं जिनके सिर से अब पिता का भी साया उठ गया है। घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे।

अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे।

🌹 क्रान्तिवीर मंगल पांडे // जयंती 🌹

जन्म : 19 जुलाई 1827
मृत्यु : 08 अप्रैल 1857
                  
देश को अंग्रेजों की परतंत्रता से मुक्त करवाने के लिये 1857 में ज्वाला को धधकाने वाले क्रांतिवीर थे मंगल पांडे. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे का जन्म 30 जनवरी, 1831 को ग्राम नगवा (बलिया, उत्तर प्रदेश) में हुआ था. कुछ लोग इनका जन्म ग्राम सहरपुर (जिला साकेत, उत्तर प्रदेश) तथा जन्मतिथि 19 जुलाई, 1827 भी मानते हैं.

युवावस्था में ही वे सेना में भर्ती हो गये थे. उन दिनों सैनिक छावनियों में गुलामी के विरुद्ध आग सुलग रही थी. अंग्रेज जानते थे कि हिन्दू गाय को पवित्र मानते हैं, जबकि मुसलमान सूअर से घृणा करते हैं. फिर भी वे सैनिकों को जो कारतूस देते थे, उनमें गाय और सूअर की चर्बी मिली होती थी. इन्हें सैनिक अपने मुंह से खोलते थे. ऐसा बहुत समय से चल रहा था, पर सैनिकों को इनका सच मालूम नहीं था.
                   
मंगल पांडे उस समय बैरकपुर में 34वीं हिन्दुस्तानी बटालियन में तैनात थे. वहां पानी पिलाने वाले एक हिन्दू ने इसकी जानकारी सैनिकों को दी. इससे सैनिकों में आक्रोश फैल गया. मंगल पांडे से रहा नहीं गया. 29 मार्च,1857 को उन्होंने विद्रोह कर दिया.
                 
एक भारतीय हवलदार मेजर ने जाकर सार्जेण्ट मेजर ह्यूसन को यह सब बताया. इस पर मेजर घोड़े पर बैठकर छावनी की ओर चल दिया. वहां मंगल पांडे सैनिकों से कह रहे थे कि अंग्रेज हमारे धर्म को भ्रष्ट कर रहे हैं. हमें उसकी नौकरी छोड़ देनी चाहिए. मैंने प्रतिज्ञा की है कि जो भी अंग्रेज मेरे सामने आएगा, मैं उसे मार दूंगा.
                 
सार्जेण्ट मेजर ह्यूसन ने सैनिकों को मंगल पांडे को पकड़ने को कहा, पर तब तक मंगल पांडे की गोली ने उसका सीना छलनी कर दिया. उस की लाश घोड़े से नीचे आ गिरी. गोली की आवाज सुनकर एक अंग्रेज लेफ्टिनेंट वहां आ पहुंचा.
                 
मंगल पांडे ने उस पर भी गोली चलाई, पर वह बचकर घोड़े से कूद गया. इस पर मंगल पांडे उस पर झपट पड़े और तलवार से उसका काम तमाम कर दिया. लेफ्टिनेंट की सहायता के लिए एक अन्य सार्जेण्ट मेजर आया, पर वह भी मंगल पांडे के हाथों मारा गया.
               
तब तक चारों ओर शोर मच गया. 34वीं पल्टन के कर्नल हीलट ने भारतीय सैनिकों को मंगल पांडे को पकड़ने का आदेश दिया, पर वे इसके लिए तैयार नहीं हुए. इस पर अंग्रेज सैनिकों को बुलाया गया. मंगल पांडे चारों ओर से घिर गये.
                  
वे समझ गये कि अब बचना असम्भव है. अतः उन्होंने अपनी बन्दूक से स्वयं को ही गोली मार ली, पर उससे वे मरे नहीं, अपितु घायल होकर गिर पड़े. इस पर अंग्रेज सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया. जिसके बाद मंगल पांडे पर सैनिक न्यायालय में मुकदमा चलाया गया.
                  
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अंग्रेजों को अपने देश का भाग्य विधाता नहीं मानता. देश को आजाद कराना यदि अपराध है, तो मैं हर दण्ड भुगतने को तैयार हूं.’’
               
न्यायाधीश ने उन्हें फांसी की सजा दी और इसके लिए 18 अप्रैल का दिन निर्धारित किया, पर अंग्रेजों ने देश भर में विद्रोह फैलने के डर से घायल अवस्था में ही 8 अप्रैल,1857 को उन्हें फांसी दे दी.
                  
बैरकपुर छावनी में कोई उन्हें फांसी देने को तैयार नहीं हुआ. अतः कोलकाता से चार जल्लाद जबरन बुलाने पड़े. मंगल पांडे ने क्रांति की जो मशाल जलाई, उसने आगे चलकर 1857 के व्यापक स्वाधीनता संग्राम का रूप लिया.
                  
ऐसे महान क्रांतिकारी देश भक्त मंगल पाण्डे को उनके जन्मदिवस पर कोटि-कोटि प्रणाम. 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

स्वर्गीय राजीव गांधी जी को विनम्र श्रद्धांजलि।

स्वर्गीय राजीव गांधी जी को विनम्र श्रद्धांजलि।

राजीव गांधी जी भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने भविष्य के भारत की कल्पना केवल शब्दों में नहीं, बल्कि नीतियों और निर्णयों के माध्यम से करने का प्रयास किया। उन्होंने ऐसे समय में देश की बागडोर संभाली, जब भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। उनका विश्वास था कि यदि भारत को 21वीं सदी में एक मजबूत, आत्मनिर्भर और आधुनिक राष्ट्र बनाना है, तो विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और युवाओं की शक्ति को केंद्र में रखना होगा।

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर, दूरसंचार और डिजिटल सोच को बढ़ावा देने का श्रेय बड़े पैमाने पर राजीव गांधी जी की दूरदर्शिता को दिया जाता है। आज जिस डिजिटल भारत की हम बात करते हैं, उसकी बुनियाद रखने वाले प्रमुख नेताओं में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने पंचायतों को अधिक अधिकार देने, युवाओं को राजनीतिक भागीदारी का अवसर देने और प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए।

राजीव गांधी जी का मानना था कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा पीढ़ी है। इसलिए उन्होंने शिक्षा, विज्ञान और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। उनकी सोच थी कि देश का विकास तभी संभव है जब गाँव और शहर दोनों समान गति से आगे बढ़ें और तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

यद्यपि उनके राजनीतिक जीवन में अनेक चुनौतियाँ और विवाद भी रहे, लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने भारत को आधुनिक युग की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। इतिहास किसी भी नेता का मूल्यांकन उसके योगदान और उसकी कमियों—दोनों के आधार पर करता है, और राजीव गांधी जी भी इसका अपवाद नहीं हैं। फिर भी आधुनिक भारत की नींव मजबूत करने में उनके योगदान को व्यापक रूप से याद किया जाता है।

आज उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए यही कहना उचित होगा कि राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान, दूरदर्शी सोच और भारत को नई तकनीकी दिशा देने के प्रयासों को हमेशा स्मरण किया जाएगा।

“नेता केवल अपने समय के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सोचते हैं। राजीव गांधी जी की कई पहलें आज भी भारत के विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।”

भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🌹🇮🇳

पीड़ित ठेका मजदूर चंदन पासवान को न्याय दिलाने हेतु इंटक प्रतिनिधिमंडल ने डेप्युटी लेबर कमिश्नर से की मुलाकात।

पीड़ित ठेका मजदूर चंदन पासवान को न्याय दिलाने हेतु इंटक प्रतिनिधिमंडल ने डेप्युटी लेबर कमिश्नर से की मुलाकात।

सरायकेला/गम्हरिया

गम्हरिया प्रखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सह सरायकेला-खरसावां इंटक जिला अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने अपने प्रतिनिधिमंडल एवं पीड़ित ठेका मजदूर चंदन पासवान के साथ जमशेदपुर स्थित सीतारामडेरा स्थित डेप्युटी लेबर कमिश्नर (DLC) कार्यालय में पदस्थापित अरविंद कुमार से मुलाकात कर पीड़ित मजदूर की गंभीर समस्याओं से अवगत कराया।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि टाटा स्टील के ठेकेदार जोश ब्रदर्स के अधीन कार्यरत मजदूर चंदन पासवान 1 जनवरी 2026 को कार्य के दौरान कंपनी परिसर में दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उनके दाहिने पैर पर रोल बार गिर जाने से पैर का पंजा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।

आरोप लगाया गया कि दुर्घटना के बाद पिछले छह महीनों में ठेकेदार द्वारा न तो उनका समुचित इलाज कराया गया और न ही कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के अंतर्गत मिलने वाली इंजरी वेज (Injury Wage) सहित अन्य वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इसके अलावा पिछले चार महीनों का वेतन भी भुगतान नहीं किया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार ने चिकित्सकों पर दबाव बनाकर घायल मजदूर को जबरन मेडिकल फिट घोषित करवा दिया। जबकि उनकी शारीरिक स्थिति अभी भी कार्य करने योग्य नहीं है। इतना ही नहीं, दवा एवं चिकित्सा का खर्च भी नहीं उठाया जा रहा है और लगातार फोन कर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है।

वेतन एवं इलाज नहीं मिलने के कारण पीड़ित मजदूर और उनका परिवार गंभीर आर्थिक, मानसिक तथा भुखमरी जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है।
मुलाकात के दौरान चंदन पासवान ने स्वयं डेप्युटी लेबर कमिश्नर अरविंद कुमार के समक्ष अपनी पूरी आपबीती सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री अरविंद कुमार ने निष्पक्ष जांच कराते हुए कंपनी एवं ठेकेदार से पीड़ित मजदूर को उचित मुआवजा, बकाया वेतन तथा न्याय दिलाने के लिए हरसंभव कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ने बीएलओ पर्यवेक्षक, बीएलओ और वोलियन्टर के साथ किया बैठक।

सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ने बीएलओ पर्यवेक्षक, बीएलओ और वोलियन्टर के साथ किया बैठक।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़  प्रखंड कार्यालय सभागार में शनिवार को सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ने बीएलओ पर्यवेक्षक, बीएलओ और वोलियन्टर के साथ किया बैठक कर एसआईआर का समीक्षा किया। बैठक को सम्बोधित करते हुए सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी दीपक प्रसाद ने निर्देश दिया वितरण किए गए गणना प्रपत्र को डिजिटाई करने का आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि प्रखंड क्षेत्र के कोई भी मतदाता एस आई आर से न छूटे, साथ ही शत प्रतिशत डिजिटाई करने का कोशिश करे। उन्होंने सभी बी एल ओ को निर्देश दिया कि आगामी 22 जुलाई को प्रत्येक बूथ में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के एजेंट के साथ बैठक कर ए एस डी डी सूची तैयार कर साझा करे। अंचल अधिकारी ने सभी मतदाताओं को समय पर एस आई आर फॉर्म भर कर बी एल ओ के पास जमा करने का अपील किया।

ईचागढ़ में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुई माँ विपदतारिणी पूजा।

ईचागढ़ में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुई माँ विपदतारिणी पूजा।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखण्ड अंतर्गत लेपाटॉंड़,ईचागढ़, पामिया आदि गांव में शनिवार को माँ विपदतारिणी की पूजा पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं ने भाग लेकर माँ विपदतारिणी की आराधना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और सभी प्रकार की विपत्तियों से रक्षा की कामना की। लेपाटांड़ में पूजा-अर्चना का संचालन पंडित पशुपति बागची द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कराया गया।

श्रद्धालुओं ने फल, फूल, नारियल, धूप-दीप एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे पूजा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और माता के जयकारों से क्षेत्र गुंजायमान रहा।
पूजा के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने इस धार्मिक आयोजन को सामाजिक एकता, आस्था और पारंपरिक संस्कृति का प्रतीक बताया।

बिस्टाटांड़ में जंगली हाथी ने मचाया उत्पात, किसानों के फसल को किया नष्ट।

बिस्टाटांड़ में जंगली हाथी ने मचाया उत्पात, किसानों के फसल को किया नष्ट।

सरायकेला/ईचागढ़

ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के सोड़ो पंचायत अंतर्गत बिस्टाटांड़ गांव में शुक्रवार रात को जंगली हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। बिस्टाटांड़ गांव निवासी किसान वीर सिंह महतो के खेत में लगे लौकी की फसल को रौंदकर नष्ट कर दिया और चासा राम महतो के खेत में लगे नेनुआ झींगा की फसल को खा कर चट कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार रात करीब 11:00 बजे आसपास एक जंगली हाथी द्वारा किसानों के फसल को खाकर चट कर दिया।

ग्रामीणों ने बताया कि विगत कुछ दिनों से झूंठ से बिछड़े दो जंगली हाथी पुलिस जंगल के आसपास डेरा जमाए हुए हैं, शाम ढलते ही जंगली हाथी गांव की और कुच करते हैं। गांव के अगल-बगल में लगे फसलों को नष्ट कर देते हैं, ग्रामीण रात जगा करने को मजबूर है। वनरक्षी सह प्रभारी वनपाल कैलाश चंद्र महतो  ने बताया कि दो जंगली हाथी तालापीढ़ी के समीप जंगल में हैं, उसी से एक बिछड़ कर गांव पहुंचा था और किसानों के फसल को नष्ट किया।

उन्होंने किसानों से छतिपूर्ति मुआवजा हेतु आवेदन समर्पित करने का अपील किया। ग्रामीण ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान समय में खेती का कार्य जोर शोर से चल रही है, जंगली इलाका होने के कारण शाम 4:00 बजे के बाद धान की खेती का कार्य बंद करना पड़ रहा है, क्योंकि शाम ढलते ही जंगली हाथी जंगल से गांव की ओर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग किया है कि जल्द से जल्द इस क्षेत्र से जंगली हाथियों को भगाया जाए और किसानों के फसलों का क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि भुगतान किया जाए।

विक्रम-1 से भारत-ब्रिटेन एफ़टीए तक -क्या जुलाई 2026 विश्व अर्थव्यवस्था और भारतीय शेयर बाजार का टर्निंग पॉइंट है? -भारत दुनियाँ की नई सेफ ग्रोथ डेस्टिनेशन बन रहा है?

विक्रम-1 से भारत-ब्रिटेन एफ़टीए तक -क्या जुलाई 2026 विश्व अर्थव्यवस्था और भारतीय शेयर बाजार का टर्निंग पॉइंट है? -भारत दुनियाँ की नई सेफ ग्रोथ डेस्टिनेशन बन रहा है?

युद्ध, व्यापार और तकनीक का त्रिकोण: क्या भारतीय शेयर बाजार वैश्विक उथल- पुथल में बनेगा निवेशकों की पहली पसंद?

वैश्विक संकट बनाम भारत की आर्थिक उड़ान- युद्ध की आंच, व्यापार की ताकत और अंतरिक्ष की छलांग -क्या भारतीय शेयर बाजार व अर्थव्यवस्था दुनियाँ की नई सेफ ग्रोथ डेस्टिनेशन बन रहा है? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में विश्व और भारत में अनेक ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने निवेशकों,उद्योग जगत, नीति- निर्माताओं तथा वैश्विक वित्तीय संस्थानों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। रविवार दिनांक 18 जुलाई 2026 को भारत में निजी क्षेत्र के पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 के प्रक्षेपण की दिशा में ऐतिहासिक प्रगति जिसने पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया,भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते  का 15 जुलाई से लागू होना,20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 प्रारंभ होने वाला संसद का मानसून सत्र,पश्चिम एशिया में ईरान- अमेरिका संघर्ष का विस्तार तथा होरमुज़ क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव,साथ ही ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भ्रष्टाचार धारणा रिपोर्ट जैसे घटनाक्रम केवल समाचार नहीं हैं, बल्कि वैश्विक पूंजी प्रवाह,ऊर्जा कीमतों,मुद्रा बाजार, निवेश विश्वास और आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं। जिस पर पूरे विश्व की निगाहें हैं इसलिए मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र पूरे भारत व अंतरराष्ट्रीय स्तरपर इस आर्टिकल के माध्यम से इन डेवलपमेंट्स कों शेयर कर बताना चाहूंगा कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था व शेयर मार्केट पर क्या असर पड़ेगा। भारत के लिए सबसे सकारात्मक घटनाओं में निजी अंतरिक्ष क्षेत्र का तेजी से उभरना है। स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी की नई शुरुआत का प्रतीक है। सरकार के अनुसार भारत का अंतरिक्ष उद्योग 2030 तक लगभग 40-45 अरब डॉलर और 2040 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है। इससे एयरोस्पेस, रक्षा,इलेक्ट्रॉनिक्स,सैटेलाइट सेवाओं,कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उच्च तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों में दीर्घकालिक निवेश आकर्षित होने की संभावना है। विदेशी निवेशकों के लिए भी यह संकेत है कि भारत केवल सेवा आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी निर्माण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

साथियों, 15 जुलाई 2026 से भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते का लागू होना भारतीय निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।वस्त्र,ऑटो कंपोनेंट फार्मास्यूटिकल्स इंजीनियरिंग, कृषि-प्रसंस्करण, रत्न एवं आभूषण तथा आईटी सेवाओं को बेहतर बाजार मिलने की संभावना है। यदि निर्यात बढ़ता है तो भारतीय कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि हो सकती है,जिसका सकारात्मक प्रभाव शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।साथ ही विदेशी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ने से रोजगार, उत्पादन और कर संग्रह में भी वृद्धि संभव है।
साथियों, 20 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित संसद का मानसून सत्र निवेशकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि इस दौरान कर सुधार,एमएसएमई,निवेश, बैंकिंग तथा अन्य आर्थिक विधेयकों पर चर्चा और निर्णय संभावित हैं। यदि सुधारवादी नीतियां आगे बढ़ती हैं तो बाजार इसे सकारात्मक संकेत के रूप में देख सकता है। वहीं यदि राजनीतिक गतिरोध बढ़ता है और महत्वपूर्ण विधेयक लंबित रह जाते हैं तो निवेशकों में अस्थायी अनिश्चितता भी उत्पन्न हो सकती है।दूसरी ओर, पश्चिम एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव तथा खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष की घटनाएं तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। यदि होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल संभव है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा भाग आयात करता है,इसलिए तेल महंगा होने पर महंगाई, चालू खाते का घाटा और वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा प्रभाव भारतीय शेयर बाजार के विभिन्न क्षेत्रों पर अलग- अलग पड़ सकता है। तेल विपणन कंपनियों, विमानन, परिवहन, रसायन और पेंट उद्योग पर लागत का दबाव बढ़ सकता है, जबकि तेल एवं गैस खोज, ऊर्जा तथा रक्षा क्षेत्र की कुछ कंपनियों को लाभ मिल सकता है। इसलिए बाजार में क्षेत्रवार प्रदर्शन में बड़ा अंतर दिखाई दे सकता है।अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार सामान्यतः युद्ध और भू- राजनीतिक तनाव के समय जोखिम से बचने की रणनीति अपनाते हैं। ऐसे समय निवेशक शेयरों से धन निकालकर सोना,अमेरिकी डॉलर, सरकारी बॉन्ड और अन्य सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं। यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा चलता है तो वैश्विक पूंजी बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है और उभरते देशों में विदेशी निवेश का प्रवाह धीमा पड़ सकता है।

साथियों, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की भ्रष्टाचार धारणा रिपोर्ट भी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है। यदि किसी देश की रैंकिंग कमजोर होती है तो विदेशी निवेशक शासन व्यवस्था, नियामकीय पारदर्शिता और कारोबारी वातावरण को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं। हालांकि किसी एक रिपोर्ट के आधार पर निवेश निर्णय नहीं लिए जाते, फिर भी दीर्घकाल में पारदर्शिता, न्यायिक दक्षता और नीति-स्थिरता विदेशी निवेश आकर्षित करने के सटीकता से प्रमुख आधार बने रहते हैं।

साथियों, 17 जुलाई 2026 तक भारतीय शेयर बाजार का समग्र रुझान यह संकेत देता है कि निवेशक एक ओर भारत की विकास क्षमता, एफटीए,अंतरिक्ष क्षेत्र और बुनियादी ढांचा सुधारों को सकारात्मक रूप में देख रहे हैं,वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक महंगाई के जोखिमों को लेकर सतर्क भी हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक माना जाता है।शेयर बाजार पर प्रभाव का आकलन संभावनाओं परआधारित होता है, क्योंकि वास्तविक बाजार अनेक घरेलू एवं वैश्विक कारकों से प्रभावित होता है।विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति भी इसी संतुलन पर निर्भर करेगी।यदि वैश्विक जोखिम बढ़ते हैं तो वे कुछ समय के लिए पूंजी सुरक्षित बाजारों में स्थानांतरित कर सकते हैं,लेकिन भारत की मजबूत विकास दर, जनसांख्यिकीय लाभ, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण विस्तार दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करते रह सकते हैं।भारतीय रुपया भी इन घटनाओं से प्रभावित हो सकता है। तेल महंगा होने और विदेशी निवेश में कमी आने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि निर्यात वृद्धि,एफटीए के लाभ तथा निरंतर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश रुपये को समर्थन दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
साथियों, नीट पेपर लीक प्रकरण में केंद्रीय शिक्षामंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी राजनीतिक विवाद तथा लगभग 21 दिनों के आंदोलन के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रविवार दिनांक 18 जुलाई 2026 धरना स्थल से पुलिस द्वारा हटाकर अस्पताल में भर्ती कराए जाने जैसी घटनाएं स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस और सामाजिक असंतोष को बढ़ाती हैं। यदि ऐसे घटनाक्रम लंबे समय तक जारी रहें, तो उनका अप्रत्यक्ष प्रभाव निवेशकों की धारणा (इन्वेस्टर सेंटीमेंट) और आर्थिक विश्वास (इकोनॉमिक कॉन्फिडेंस) पर पड़ सकता है। हालांकि भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन मुख्यतः कॉर्पोरेट आय,महंगाई,ब्याज दरों,विदेशी निवेश,वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और सरकारीनीतियों जैसे व्यापक आर्थिक कारकों से निर्धारित होता है, फिर भी बड़े राजनीतिक आंदोलनों या अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। यदि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण और सीमित दायरे में रहते हैं, तो उनका व्यापक आर्थिक प्रभाव सामान्यतः सीमित रहता है। लेकिन यदि वे देशव्यापी अवरोध, प्रशासनिक व्यवधान या नीति- निर्माण में देरी का कारण बनें, तो निवेशकों में सतर्कता बढ़ सकती है तथा कुछ समय के लिए पूंजी बाजार, पर्यटन, उपभोग और व्यापारिक गतिविधियों पर दबाव दिखाई दे सकता है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों का समाधान लोकतांत्रिक संवाद, पारदर्शी जांच और संस्थागत विश्वास को मजबूत करने के माध्यम से किया जाना भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सटीकता से  अधिक अनुकूल माना जाता है।

साथियों, वैश्विक स्तरपर अमेरिका,यूरोप,जापान और चीन के बाजार भी इन घटनाओं से प्रभावित होंगे। ऊर्जा आयातक देशों के लिए तेल कीमतों में वृद्धि आर्थिक चुनौती बनेगी, जबकि ऊर्जा निर्यातक देशों को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। इससे वैश्विक पूंजी का पुनर्संतुलन देखने को मिल सकता है।यदि समग्र दृष्टि से देखा जाए तो भारत के सामने इस समय दो समानांतर चित्र दिखाई देते हैं। पहला, उच्च प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष, मुक्त व्यापार,डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुधारवादी नीतियों के माध्यम से तेज आर्थिक विकास का अवसर। दूसरा, वैश्विक युद्ध, ऊर्जा संकट, महंगाई और भू- राजनीतिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां। आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन अवसरों का लाभ उठाते हुए बाहरी जोखिमों का कितनी कुशलता से सामना करती है।

अतःअगर उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि,जुलाई 2026 का यह सप्ताह भारत और विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा सकता है।यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव नियंत्रित रहता है और भारत सुधारों, निर्यात विस्तार, तकनीकी नवाचार तथा नीति-स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ता है, तो भारतीय शेयर बाजार दीर्घकाल में वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है। वहीं यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है, ऊर्जा आपूर्ति बाधित होती है और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता गहराती है, तो अल्पकाल में विश्वभर के शेयर बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। भारत के लिए सबसे बड़ी रणनीति यही होगी कि वह अपने मजबूत घरेलू आर्थिक आधार, तकनीकी प्रगति और संतुलित विदेश नीति के माध्यम से इन वैश्विक चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करे।

संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी में बी.एड. सत्र 2023–2025 के विद्यार्थियों का भव्य दीक्षांत समारोह संपन्न।

एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी में बी.एड. सत्र 2023–2025 के विद्यार्थियों का भव्य दीक्षांत समारोह संपन्न।

सरायकेला/चांडिल

एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी में बी.एड. सत्र 2023–2025 के विद्यार्थियों का भव्य दीक्षांत समारोह एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी में बी.एड. सत्र 2023–2025 के विद्यार्थियों के सम्मान में भव्य दीक्षांत (Graduation Day) समारोह का आयोजन अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं गणमान्य अतिथियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। यह आयोजन विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की नई शुरुआत का प्रतीक बना।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र की माननीय विधायक श्रीमती सबिता महतो थीं। विशिष्ट अतिथियों के रूप में एमबीएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के मेंटर श्री राम केवल सिंह, एमबीएनएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन श्री विवेक कुमार सिंह तथा एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन की निदेशक श्रीमती अनुपा सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न देकर स्वागत किया गया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती सबिता महतो ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने सभी स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें समर्पण, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ समाज के विकास में योगदान देने का संदेश दिया।

श्री राम केवल सिंह ने विद्यार्थियों को जीवनभर सीखते रहने, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा दी। संस्थान के चेयरमैन श्री विवेक कुमार सिंह ने कहा कि ग्रेजुएशन डे केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों और नए सपनों की शुरुआत है। निदेशक श्रीमती अनुपा सिंह ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि एक आदर्श शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और चरित्र से समाज को नई दिशा देता है।

इस अवसर पर बी.एड. सत्र 2023–2025 के सभी सफल छात्र-छात्राओं को ग्रेजुएशन डे प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रमाण-पत्र प्राप्त करते समय विद्यार्थियों के चेहरे पर गर्व, आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। Academic Excellence Award से प्रीति कुमारी को सम्मानित किया गया। Best Personality Award से नरेंद्र प्रसाद सिंह को सम्मानित किया गया। Student Favourite Award से गिरिधारी तंतुबाई को सम्मानित किया गया। Cultural Star Award से प्रभा, थेरेसा, लिपिका एवं प्रीति कुम्भकार को सम्मानित किया गया। NSS Excellence Award शाक्या कुमारी को प्रदान किया गया। Chatter Box Award नेहा मोहंती को मिला। Best Disciplined Student Award संयुक्त रूप से बरनाली अधिकारी एवं फिरोज आलम अंसारी को प्रदान किया गया। Best Leadership Award से पूनम करवा को सम्मानित किया गया तथा Pride of the Batch Award प्रीति कुमारी कुम्भकार को प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। गीत, नृत्य एवं प्रेरणादायक प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी आकर्षक बना दिया। उपस्थित अभिभावकों एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों के उत्साह और प्रतिभा की सराहना की।

समारोह के अंत में विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों एवं संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन ने उन्हें केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, नैतिक मूल्य एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का भी पाठ पढ़ाया है। सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए संकल्प लिया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत सभी अतिथियों, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सामूहिक छायाचित्र खिंचवाए। राष्ट्रगान के साथ समारोह का सफल समापन हुआ।

यह दीक्षांत समारोह एमबीएनएस इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, आसनबनी के लिए एक गौरवपूर्ण अवसर रहा, जिसने एक बार फिर गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।

दिनदहाड़े निहत्थे पर वार कर एक ही पल में उतारा मौत के घाट।

दिनदहाड़े निहत्थे पर वार कर एक ही पल में उतारा मौत के घाट।

निहत्थे पर वार कर एक ही पल में उतारा मौत के घाट।

चार-पांच लोग अचानक सामने आए और बिना किसी वार्ता के किया हमला।

हमला इतना तेज कि संभलने तक का मौका नहीं मिला।

सरायकेला/आदित्यपुर

सरायकेला खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना अंतर्गत बोलायडीह स्थित शीतला मंदिर के सामने शनिवार दोपहर लगभग एक बजे एक भयानक वारदात ने पूरे मोहल्ले को हिला कर रख दिया। गोप पाड़ा के रहने वाले जगन्नाथ गोप उर्फ काड़ा (27) को चार-पांच अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर मौत के घाट उतार दिया। इससे आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गया। इसी चीख-पुकार के बीच आरोपी घटनास्थल से भाग निकले। बीच सड़क पर दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया और लोगों में दहशत का माहौल बन गया।

कथित तौर पर हमला अचानक और निहत्थे पल में हुआ। चार-पांच लोग अचानक सामने आए और बिना किसी वार्ता के हमला कर दिया। हमला इतना तेज कि काड़ा को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

सूचना पाते ही आदित्यपुर व गम्हरिया थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दी। साथ ही घटना स्थल को सील कर दिया गया। पुलिस सीसीटीवी की फुटेज खंगाली जा रही है और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। एसपी के निर्देश पर एसडीपीओ भी घटनास्थल पर रवाना हुए हैं और फरार आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी गई है।

पुलिस ने अभी तक हत्या के कारण का खुलासा नहीं किया है। पुलिस जाँच में हर सम्भव पहलू—रंजिश, आपराधिक संगठनों की एंट्री या कोई अन्य विवाद की जांच शुरू कर दी है। वहीं ग्रामीणों में रोष और डर दोनों दिखाई दे रहे हैं; कई लोग सुरक्षा की मांग कर रहे हैं और आरोपियों को कड़ी सजा की माँग बार-बार कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए  पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

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