बरसात में ‘कैद’ होते ग्रामीण, 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी।

बरसात में ‘कैद’ होते ग्रामीण, 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी।

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला खरसावां जिला अंतर्गत ईचागढ़ प्रखंड के मैसाढ़ा पंचायत के कालीचामदा के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर बीडीओ एकता वर्मा को ज्ञापन सौंपा । ग्रामीणों का कहना है कि चांडिल बांध विस्थापन का दंश झेलने के बावजूद आज तक गांव में पक्की सड़क नहीं बन पाई है। करीब 70 परिवारों वाले इस गांव की आबादी लगभग 400 है, लेकिन आवागमन के लिए समुचित सड़क नहीं होने से लोगों का जीवन कठिन बना हुआ है। बरसात के दिनों में कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है, जिससे ग्रामीणों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।

सड़क के अभाव में स्वास्थ्य और शिक्षा पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खटिया के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। वहीं, कीचड़ भरे रास्तों के कारण बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।

इस मुद्दे पर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने बताया कि बीडीओ द्वारा 7 दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।‌ उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो वे डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे एवं प्रखंड कार्यालय में धरना प्रदर्शन और अनशन भी किया जाएगा। मौके पर सैकड़ों ग्रामीण महिला पुरुष उपस्थित थे।

कुड़मि समाज और राजनीतिक विश्वास का नया अध्याय।

कुड़मि समाज और राजनीतिक विश्वास का नया अध्याय।

सरायकेला/ईचागढ़

देश के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बंगाल चुनाव के दौरान कुड़मि बहुल क्षेत्रों में कुड़मालि भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का संकेत माना जा सकता है। बृहद छोटानागपुर क्षेत्र के अंतर्गत पश्चिम बंगाल में निवास करने वाला कुड़मि समाज अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति और परंपराओं के साथ लंबे समय से पहचान और अधिकार की मांग करता रहा है।
भारत की विविधता में भाषाई पहचान का विशेष महत्व है। जब किसी भाषा को आठवीं अनुसूची में स्थान मिलता है, तो उसे न केवल संवैधानिक संरक्षण मिलता है, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और सांस्कृतिक विकास के नए द्वार भी खुलते हैं। ऐसे में कुड़मालि भाषा को यह दर्जा दिलाने की पहल कुड़मि समाज के आत्मसम्मान को मजबूत कर सकती है।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी द्वारा जनजातीय और क्षेत्रीय समुदायों के प्रति विश्वास निर्माण की रणनीति पहले भी दिखाई दे चुकी है। इसका प्रमुख उदाहरण श्रीमती द्रौपदी मुर्मू हैं, जो संथाल समाज से आती हैं और आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। यह घटना न केवल एक समुदाय के लिए, बल्कि पूरे देश के प्रति सामाजिक समावेशन और अवसर की समानता का प्रतीक बनी।

इसी तरह यदि कुड़मि समाज को भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उचित प्रतिनिधित्व मिलता है, चाहे वह मंत्री पद हो या अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां, तो इससे समाज में विश्वास और भागीदारी की भावना और प्रबल होगी। इससे न केवल कुड़मि समाज का उत्थान होगा, बल्कि लोकतंत्र की जड़ें भी और मजबूत होंगी।
हालांकि, यह भी आवश्यक है कि ऐसे वादे केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें ठोस नीतियों और कार्यान्वयन के माध्यम से साकार किया जाए। भाषा को मान्यता देने के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

आखिर कुड़मि समाज के साथ विश्वास का यह संबंध केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक समावेशी और न्यायपूर्ण भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। जहां हर समुदाय को अपनी पहचान, सम्मान और विकास का समान अवसर मिले।

आज आवश्यकता है कि हम सभी कुड़मि भाई-बहन अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग पूरी समझदारी के साथ करें। हमें यह देखना है कि कौन हमारी भाषा, हमारी संस्कृति और हमारे समाज के उत्थान के लिए ईमानदारी से कार्य करने का संकल्प ले रहा है। हमें अवसर देना है परखने का, समझने का, और अपने भविष्य को मजबूत करने का।
लेकिन समाज के सभी सदस्यों एवं वर्गों को, यह भी याद रखना होगा, हमारा आंदोलन हमारी पहचान है। यह संघर्ष हमारी आत्मा है । यह न कभी रुका है, न कभी रुकेगा। चाहे कोई भी सरकार आए या जाए, कुड़मि समाज अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहेगा, संगठित रहेगा और आगे बढ़ता रहेगा। आज का निर्णय केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि आगे आने वाले वर्षों की दिशा तय करेगा। एकजुट होकर, जागरूक होकर, और अपने अधिकारों के प्रति
सजग रहकर हमें आगे बढ़ना है।

प्रस्तुति :गुणधाम मुतरुआर
(भूगोल-शिक्षक)
अनुग्रह नारायण +2 उच्च विद्यालय पिलीद, ईचागढ़, सरायकेला-खरसावां, झाड़खंड – 832403

2013 बैच की आईपीएस निधि द्विवेदी संभालेंगी सरायकेला-खरसावां पुलिस की कमान।

2013 बैच की आईपीएस निधि द्विवेदी संभालेंगी सरायकेला-खरसावां पुलिस की कमान।

सरायकेला-खरसावां

सरायकेला-खरसावां: जिले के पुलिस प्रशासन में बड़ा बदलाव हुआ है। 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी निधि द्विवेदी को सरायकेला-खरसावां की नई पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में नियुक्त किया गया है। वे अब जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगी।
निधि द्विवेदी के पदभार ग्रहण करने से जिले में पुलिसिंग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासनिक दक्षता और सख्त कार्यशैली के लिए जानी जाने वाली द्विवेदी से अपराध नियंत्रण, विधि-व्यवस्था सुदृढ़ करने और आम जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की अपेक्षा की जा रही है।

बताया जा रहा है कि नई एसपी जिले में अपराध पर अंकुश लगाने, अवैध गतिविधियों पर सख्ती बरतने और पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह एवं पारदर्शी बनाने को प्राथमिकता देंगी। साथ ही महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच मजबूत करने पर विशेष फोकस रहेगा।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने नई एसपी के आगमन का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में जिले में शांति और सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

तिरुलडीह में अवैध बालू लदे दो ट्रैक्टर जब्त।

तिरुलडीह में अवैध बालू लदे दो ट्रैक्टर जब्त।

सरायकेला/तिरूलडीह

(मालखान महतो)

तिरूलडीह थाना क्षेत्र में अवैध खनन और बालू परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। तिरुलडीह थाना क्षेत्र में शुक्रवार को चलाए गए विशेष छापामारी अभियान के दौरान पुलिस ने अवैध बालू से लदे दो ट्रैक्टरों को जब्त किया है। इस कार्रवाई से इलाके में अवैध खनन करने वालों के बीच हड़कंप मच गया है।

ग्राम काड़कीडीह में छापेमारी कर दो अवैध बालू लदे ट्रैक्टर जब्त किया। थाना प्रभारी कौशल कुमार ने बताया कि तिरुलडीह थाना क्षेत्र के ग्राम काड़कीडीह में अवैध रूप से बालू का उत्खनन और परिवहन करने का सुचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने विशेष अभियान चलाया और मौके से दो ट्रैक्टरों को पकड़ लिया गया।
जब्त किए गए दोनों ट्रैक्टरों में करीब 200 सीएफटी अवैध बालू लदा हुआ था। पुलिस ने तत्काल दोनों वाहनों को अपने कब्जे में लेकर थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया। अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई किया जा रहा है।

संसद का रण:महिला आरक्षण- सरकार का मास्टरस्ट्रोक रूल 66 की सियासी शतरंज।

संसद का रण:महिला आरक्षण- सरकार का मास्टरस्ट्रोक रूल 66 की सियासी शतरंज।

महाराष्ट्र/गोंदिया

विपक्ष को धर्मसंकट में डालने की रणनीति-विपक्ष की दुविधा:आगे कुआं,पीछे खाई-भारतीय संसद पर टिकी वैश्विक निगाहें

विपक्ष क़ा शाब्दिक हमला: चैरिटी बिगन्स एट होम- सत्ताधारी पार्टी संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दें- प्रधानमंत्री पद भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं क़ो दें- सदन में तीखी बहस और हंगामा

रूल 66 का निलंबन,संयुक्त मतदान, अधिसूचना का समय ये सभी कदम एक जटिल राजनीतिक शतरंज के हिस्से, जहां हर चाल का दूरगामी प्रभाव- कानून निर्माण केवल नीति नहीं,रणनीति,संख्या बल और समय प्रबंधन का मिश्रण बन चुका है-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर भारत की संसद में चल रहा 16 से 18 अप्रैल 2026भारतीय संसद का विशेष सत्र केवल एक सामान्य विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक राजनीति के गहरे रणनीतिक, संवैधानिक और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बन गया।वर्तमान घटनाक्रम केवल एक घरेलू राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं,संवैधानिक व्याख्याओं और राजनीतिक रणनीति का ऐसा संगम बन गया है, जिसपर पूरी दुनियाँ की निगाहें टिकी हुई हैं।विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार द्वारा तीन महत्वपूर्ण विधेयकों महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम), परिसीमन (डेलिमिटेशन) और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े संशोधन को एक साथ पेश करना और फिर 16 अप्रैल 2026 को देर रात्रि रूल 66 को निलंबित करने का कदम भारतीय संसदीय इतिहास में एक असाधारण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।इसपर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया, संसदीय नियमों का प्रयोग और रूल 66 का निलंबन इन सभी ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।यह घटनाक्रम केवल कानून बनाने की प्रक्रिया नहीं है,बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच रणनीतिक टकराव,राजनीतिक गणित, और संवैधानिक व्याख्याओं का एक जटिल खेल बन चुका है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि सरकार ने जिन तीन विधेयकों को एक साथ पेश किया है, वे अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण हैं। पहला, नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून), जो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है।दूसरा, परिसीमन विधेयक, जो लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से जुड़ा है। तीसरा, केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित संशोधन विधेयक, जो प्रशासनिक और प्रतिनिधित्व संरचना को प्रभावित करता है।इन तीनों विधेयकों का एक साथ प्रस्तुत होना संयोग नहीं,बल्कि एक सुविचारित रणनीति प्रतीत होता है। सरकार का दावा है कि यह व्यापक सुधार का हिस्सा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक पैकेजिंग कह रहा है।


साथियों बात अगर हम रूल 66 क्या है और क्यों बना विवाद का केंद्र? इसको समझने की करेंतो लोकसभा की कार्यप्रणाली में रूल 66 एक तकनीकी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है। यह नियम उन परिस्थितियों में लागू होता है, जब एक विधेयक दूसरे विधेयक पर निर्भर होता है। यदि आश्रित विधेयक पारित नहीं होता, तो मूल विधेयक भी निष्प्रभावी हो सकता है।सरकार ने इसी नियम को निलंबित करने का प्रस्ताव लाकर पूरे खेल की दिशा बदल दी सामान्यतःप्रत्येक विधेयक पर अलग- अलग चर्चा और मतदान होता है, जिससे सांसद अपनी स्वतंत्र राय दे सकते हैं। लेकिन ‘रूल 66’ के निलंबन के बाद यह बाध्यता समाप्त हो जाती है।इसका सीधा अर्थ यह है कि अब तीनों विधेयकों को एक साथ, एक ही प्रस्ताव के रूप में पारित कराया जा सकता।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र


साथियों बात अगर हम सरकार का मास्टरस्ट्रोक: संयुक्त मतदान की रणनीति को समझने की करें तो सरकार ने जिस रणनीति का उपयोग किया है,उसेराजनीतिक विश्लेषक मास्टरस्ट्रोक कह रहे हैं।तीनों विधेयकों को एक ही प्रस्ताव में जोड़कर सरकार ने विपक्ष के लिए विकल्पों को सीमित कर दिया है।अब विपक्ष के सामने केवल दो ही रास्ते हैं,या तो तीनों विधेयकों के पक्ष में वोटकरें या तीनों के खिलाफ।यह रणनीति विपक्ष को एक धर्मसंकट में डालती है।यदि विपक्ष परिसीमन का विरोध करता है,तो उसे महिला आरक्षण के खिलाफ भी वोट देना पड़ेगा। और यदि वह महिला आरक्षण का समर्थन करता है, तो परिसीमन भी सटीक रूप से ही स्वतःपारित हो जाएगा।


साथियों बात अगर हम विपक्ष की दुविधा: आगे कुआं, पीछे खाई इसको समझने की करें तो,विपक्ष,विशेष रूप से इंडिया गठबंधन,इस स्थिति में फंस गया है जहां हर विकल्प राजनीतिक नुकसान की ओर ले जाता है।विपक्ष का रुख स्पष्ट है कि वह महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं,खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के संदर्भ में।विपक्ष का तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिणभारत के राज्यों को नुकसान होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।ऐसे में सीटों का पुनर्वितरण उन्हें कम प्रतिनिधित्व की ओर ले जा सकता है। अब रूल 66 कैंसिल करने से विपक्ष को तीनों विधायकों को एक साथ मतदान करना पड़ेगा अगर वह यस में बदनाम करते हैं तो परिसीमन बिल भी पास होगा ना में मतदान करते हैं तो महिला आरक्षण का अपने आप ही विरोध होगा।
साथियों बात अगर हम संख्या बल का गणित: सरकार के सामने चुनौती इसको समझने की करें तो, संविधान संशोधन विधेयकों को पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है यानी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन। लोकसभा में कुल 540 सीटें हैं, जिनमें से 3 खाली हैं। ऐसे में 360 वोटों की जरूरत होती है।एनडीए के पास लगभग 293 सांसद हैं, जो आवश्यक संख्या से काफी कम है। इस स्थिति में सरकार को या तो विपक्ष के कुछ सांसदों का समर्थन चाहिए या फिर अनुपस्थित रहने वाले सांसदों की संख्या बढ़ानी होगी, ताकि आवश्यक बहुमत का आंकड़ा कम हो सके।


साथियों बात अगर हम अधिसूचना विवाद: कानून लागू या बचाने की कोशिश? इसको समझने की करें तो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे विवादास्पद पहलू है 16 अप्रैल 2026 को जारी की गई अधिसूचना, जिसके तहत 2023 में पारित संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम को लागू करने की तारीख तय की गई।यह अधिसूचना ऐसे समय पर जारी की गई,जब संसद में उसी कानून में संशोधन पर बहस चल रही थी। विपक्ष ने इसे आधी रात का फैसला और हताशापूर्ण प्रयास करार दिया है।कांग्रेस नेता ने इस कदम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कोई कानून संशोधन के अधीन है, तो उसे बिना नए विधायी समर्थन के लागू करना संवैधानिक रूप से संदिग्ध है।उन्होंने ‘रूल 66’ का हवाला देते हुए कहा कि यदि आश्रित विधेयक पारित नहीं होता, तो मूल कानून भी निष्प्रभावी हो सकता है। ऐसे में नियम को निलंबित कर अधिसूचना जारी करना कानून को “बचाने” का प्रयास प्रतीत होता है।
साथियों बात अगर हम टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का 17 अप्रैल 2026 को संसद में अपने विचारों के दौरान शाब्दिक हमला:चैरिटी बिगन्स एट होम इसको समझने की करें तो तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण की बात करने से पहले भाजपा को अपने संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना चाहिए।उन्होंने 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए यह भी कहा कि मंत्रिमंडल और यहां तक कि प्रधानमंत्री पद भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं को दिया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने सदन में तीखी बहस और हंगामा पैदा कर दिया।
साथियों बात अगर हम परिसीमन विवाद: उत्तर बनाम दक्षिण का नया विमर्श इसको समझने की करें तो परिसीमन का मुद्दा भारत में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण स्थगित किया गया था, ताकि जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहन मिल सके।अब जब परिसीमन की बात फिर उठी है, तो दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि उनकी सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को लाभ मिल सकता है। यह विवाद क्षेत्रीय असंतुलन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नए सवाल खड़े करता है।


साथियों बात अगर हम लोकतंत्र बनाम रणनीति: क्या यह उचित है? इसको समझने की करें तो,इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या संसदीय नियमों का इस तरह उपयोग (या दुरुपयोग) लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है?सरकार का तर्क है कि वह सुधारों को तेज़ी से लागू करना चाहती है और तकनीकी बाधाओं को हटाना आवश्यक है। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह संसदीय प्रक्रिया को कमजोर करने और बहस को सीमित करने का सटीक रूप से प्रयास है।
साथियों बात अगर हम इस पूरे प्रकरण को वैश्विक परिप्रेक्ष्य: भारत की लोकतांत्रिक छवि पर असर इसको समझने की करें तो,भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। ऐसे में संसद में होने वाली हर बड़ी घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनती है।
यदि यह घटनाक्रम पारदर्शिता, बहस और सहमति के बिना आगे बढ़ता है, तो यह भारत की लोकतांत्रिक छवि को प्रभावित कर सकता है। वहीं,यदि सरकार सफलतापूर्वक इन सुधारों को लागू कर देती है, तो यह निर्णायक नेतृत्व का उदाहरण भी बन सकता है।


अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि सियासी शतरंज का निर्णायक मोड़,संसद में चल रहा यह संघर्ष केवल तीन विधेयकों का नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली,संवैधानिकमर्यादाओं और राजनीतिक रणनीति का परीक्षण है। रूल 66 का निलंबन, संयुक्त मतदान, अधिसूचना का समय ये सभी कदम एक जटिल राजनीतिक शतरंज के हिस्से हैं,जहां हर चाल का दूरगामी प्रभाव है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह रणनीति सरकार के लिए जीत का रास्ता बनती है या विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ उठाता है। लेकिन इतना तय है कि यह घटनाक्रम भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

अवैध बालू उठाव के विरुद्ध इचागढ़ में प्रशासन की कार्रवाई, अवैध गिट्टी लदा ट्रैक्टर को किया गया जब्त।

अवैध बालू उठाव के विरुद्ध इचागढ़ में प्रशासन की कार्रवाई, अवैध गिट्टी लदा ट्रैक्टर को किया गया जब्त।

अंचल अधिकारी एवं थाना प्रभारी के संयुक्त निरीक्षण के दौरान ईचागढ़-तिरुलडीह पुलिया के नीचे अवैध रूप से बनाए गए रास्ते को जेसीबी से किया गया अवरुद्घ।

सरायकेला/खरसावां

इचागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत स्वर्णरेखा नदी स्थित बालू घाट पर अवैध बालू उठाव की सूचना पर अंचल अधिकारी, इचागढ़ श्री दीपक कुमार एवं थाना प्रभारी द्वारा पुलिस बल के साथ संयुक्त निरीक्षण एवं कार्रवाई की गई।

कार्रवाई के दौरान ईचागढ़-तिरुलडीह पुलिया के नीचे अवैध रूप से बनाए गए रास्ते को जेसीबी की सहायता से खुदाई कर अवरुद्ध किया गया, ताकि अवैध खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

इसके साथ ही अवैध रूप से संचित बालू के डंप पर छापामारी की गई तथा एक अवैध गिट्टी लदा ट्रैक्टर को जब्त कर थाना में सुरक्षित रखा गया है। मामले में अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुलकांत झा ने पंडित बिनोदानंद झा की 126वीं जयंती पर श्रद्धासुमन श्रद्धांजलि अर्पित किए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुलकांत झा ने पंडित बिनोदानंद झा की 126वीं जयंती पर श्रद्धासुमन श्रद्धांजलि अर्पित किए।

सरायकेला/गम्हरिया

गम्हरिया कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फुलकांत झा ने अपने सहयोगियो के साथ झारखंड के माटी पुत्र एवं शिक्षाविद्य और संविधान सभा के सदस्य बिहार के मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय पंडित बिनोदानंद झा की 126वीं जयंती पर श्रद्धासुमन श्रद्धांजलि अर्पित किए। श्री झा ने कहा वे एक दूरदर्शी नेता और जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने कार्यों और विचारों से बिहार के विकास को नई दिशा दी।

उनका सादगीपूर्ण जीवन, उच्च आदर्श और समाज के प्रति अटूट समर्पण आज भी हमें प्रेरित करता है कि हम जनहित और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ें।
श्री फुलकांत झा ने सरकार से मांग की है मिथिला-मैथिल,मिथिली के वरदपुत्र झारखंड के गौरव के प्रति सच्ची श्रद्धांजली के रूप में देवघर एम्स (AIMs)का नाम बिनोदा बाबू के नाम पर रखा जाए।
जो हेमंत बाबू के सरकार के लिए गौरव का पल होगा।
बिनोदा बाबू अमर रहे।

ईचागढ़ में ‘स्कूल रुआर’ कार्यक्रम का आयोजन, शिक्षा की मुख्यधारा से बच्चों को जोड़ने पर जोर।

ईचागढ़ में ‘स्कूल रुआर’ कार्यक्रम का आयोजन, शिक्षा की मुख्यधारा से बच्चों को जोड़ने पर जोर।

सरायकेला/ईचागढ़

(मालखान महतो)

ईचागढ़ प्रखंड कार्यालय सभागार में शुक्रवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी एकता वर्मा की अध्यक्षता में ‘स्कूल रुआर’ (बैक टू स्कूल) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, ईचागढ़ की वार्डेन सुनीता महतो, शिक्षिका मल्लिका महतो एवं मौसमी महतो के नेतृत्व में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुआ। छात्राओं ने गीतों के माध्यम से बच्चों की अनिवार्य शिक्षा पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि शत-प्रतिशत नामांकन, 5 से 18 वर्ष की आयु के सभी बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित करना। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को चिन्हित कर उन्हें वापस शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना। नामांकित बच्चों की स्कूल में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना। बच्चों को सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं (पुस्तकों, पोशाक आदि) के प्रति जागरूक करना।

अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर उन्हें विद्यालय प्रबंधन से जोड़ना।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘स्कूल रुआर’ मात्र एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक अभियान है, ताकि ईचागढ़ प्रखंड का कोई भी बच्चा शिक्षा की रोशनी से वंचित न रहे।

इस अवसर पर अंचल अधिकारी दीपक प्रसाद, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी सुखदेव कुमार , शिक्षा विभाग के बीपीएम चंदन कुमार सिंह, जेएलएसपीएस बीपीएम मनोहर टोप्पो, महिला पर्यवेक्षिका कृष्णा देवी, संकुल साधन सेवी प्रकाश प्रमाणिक, शक्ति पद महतो, पद्म लोचन महतो, भूतेश महतो, बीआरसी कर्मचारी और प्रखंड की सभी आंगनबाड़ी सेविकाएं मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 7 युनिट सुकर का किया वितरण।

मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 7 युनिट सुकर का किया वितरण।

सरायकेला/ईचागढ़

सरायकेला-खरसावां जिला के ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय परिसर में गुरुवार को मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत पशुपालन विभाग द्वारा 7 लाभुको के बीच 7 युनिट सुकर का वितरण किया गया। वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी एकता वर्मा,जिला परिषद सदस्य जोतिलाल मांझी एवं पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो के द्वारा वितरण किया गया।

वहीं पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हरेलाल महतो ने बताया कि 7 लाभुको के बीच 35 सुकर का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में मुर्गा चूजा, बत्तख,बकरा, बकरी एवं गौ पालकों के बीच गाय का वितरण किया गया है। विभाग का उद्देश्य है कि किसानों को अनुदानित दर पर पशु धन उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा देना है।

15 वर्षों से महिला जलती आग पर चलकर कर रही शिव तपस्या, पति ने पीठ में हुक घोंपकर दिखाया आस्था का अद्भुत रूप।

15 वर्षों से महिला जलती आग पर चलकर कर रही शिव तपस्या, पति ने पीठ में हुक घोंपकर दिखाया आस्था का अद्भुत रूप।

सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत लाबा गांव में बुधवार को आस्था, भक्ति और तपस्या का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। चड़क पूजा के अवसर पर यहां एक महिला ने जलती व लहलहाती आग पर चलकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन किया, वहीं उनके पति ने अपनी पीठ में लोहे का हुक घोंपकर 40 फीट ऊंचाई पर चरखी से झूलते हुए भक्ति का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया।

करीब 50 वर्षीय बुटन ग्वालीन पिछले 15 वर्षों से लगातार इस कठिन तपस्या को करती आ रही हैं। हर वर्ष चड़क पूजा के दौरान वे लहलहाती आग में नंगे पैर चलती हैं, जिसे स्थानीय लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने का माध्यम मानते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बुटन ग्वालीन की यह साधना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनकी गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक है।

वहीं उनके पति सोमा गोप ने भी इस अवसर पर अपनी पीठ में लोहे का हुक घोंपकर लकड़ी से बने बल्ले पर लटकते हुए करीब 40 फीट ऊपर तक झूलकर भगवान शिव की आराधना की। यह दृश्य देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। पूरे क्षेत्र में “हर-हर महादेव” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।

ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की कठोर तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और परिवार तथा गांव पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।

हालांकि इस प्रकार की धार्मिक गतिविधियों को लेकर स्वास्थ्य और सुरक्षा के दृष्टिकोण से सवाल भी उठते हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं। बुटन ग्वालीन ने बताया कि लहलहाती आग पर भगवान शिव जी की असीम कृपा से चलती हूं, जिसमें न कपड़े और न ही कहीं आग से जलता है और लोहे का हुक पीठ के चमड़े पर घोंपा जाता है और रस्सी के सहारे चकरी में लटकाकर घूमते हैं,जिसमें न ही खुन निकलता है ओर न ही घाव पर मरहम पट्टी लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परम्परा सिर्फ भोले बाबा के कृपा से ही संभव है।

शिव गाजन के उपलक्ष्य में बाउल संगीत और छऊ कला ने बांधा समा।

शिव गाजन के उपलक्ष्य में बाउल संगीत और छऊ कला ने बांधा समा।

सरायकेला/ईचागढ़

यहां शिव मंदिर का है विशेष महत्व।

सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र के पुड़ीहेंसा गांव में शिव गाजन के उपलक्ष्य में श्री श्री शिव पुजा सोलोआना समिति द्वारा आयोजित शिव पुजा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। पटमदा व बंगाल के पुरूलिया, बांकुड़ा के बाउल कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भक्तिमय संगीत परिवेशन किया।

पटमदा के गौउर दास बाउल ,गम्हारिया के वन बिहारी बाबाजी, बांकुड़ा के अर्चना दास, पुरूलिया के बंदना एवं त्रिशा बनर्जी ने भक्ति मय संगीत प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं बंगाल के पुरूलिया बाघमुंडी के छऊ उस्ताद जलधर कुमार एवं बलरामपुर के उस्ताद सुदर्शन सिंह सरदार एवं दल द्वारा महाभारत पर आधारित मानभूम शैली का छऊ प्रदर्शन कर महफिल को चार चांद लगा दिया। पूजा समिति के फुलचांद महतो ने बताया कि पुरीहेंसा में आदि काल से बुड़ा बाबा के नाम से शिव मंदिर जगजाहिर है। दुर दराज से लोग अपने रोग मुक्ति के लिए शिवजी के मंदिर में धरना देते हैं और मन्नतें मांगते हैं।

उन्होंने कहा कि शिव गाजन में पारम्परिक नाया द्वारा पुजा अर्चना किया जाता है। मन्नत पूरी होने से सैकड़ों बकरे का बली भी चढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों द्वारा भव्य और विशाल मंदिर का भी निर्माण कराया जा रहा है।

मौके पर मुखिया प्रतिनिधि राम चरण सिंह मुण्डा, वार्ड सदस्य फुलचांद महतो, अधिवक्ता महेंद्र कुमार महतो, रेणुका महतो,आजसू प्रखंड अध्यक्ष गोपेश महतो, दिलीप कुमार दास ,परेश चन्द्र महतो, बुद्धेश्वर महतो, पूर्व मुखिया भिष्मदेव महतो, आशीष महतो आदि उपस्थित थे।

चांडिल-कांड्रा रोड की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन सौंपा ज्ञापन।

चांडिल-कांड्रा रोड की जर्जर स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन सौंपा ज्ञापन।

सरायकेला/चांडिल

चांडिल प्रखंड क्षेत्र के चांडिल-कांड्रा रोड की जर्जर एवं खस्ताहाल स्थिति को लेकर बुधवार को ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए प्रखंड कार्यालय तक रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया एवं बीडीओ के अनुपस्थित में सीओ को ज्ञापन सौंपा।ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों से चांडिल-कांड्रा सड़क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।

इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने खुदीराम बोस चौक चैनपुर से प्रखंड कार्यालय तक रैली निकाली पदयात्रा* निकाली और प्रखंड मुख्यालय पर प्रदर्शन किया । ग्रामीणों ने चांडिल-कांड्रा रोड के अधूरे मरम्मत कार्य को अविलंब पूरा करने ,तिदिन पानी का छिड़काव , स्पीड ब्रेकर लगाने , तत्काल भारी वाहनों का आवागमन पर रोक लगाने , 40 किमी प्रति घंटा की गति सीमा का साइन बोर्ड लगाने,चैनपुर मुख्य नहर पुल पर सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाने,स्कूली बच्चों और राहगीरों के लिए फुटपाथ का निर्माण किरने का मांग किया है।

आशुदेब महतो व राकेश रंजन व ज्योतीलाल महली ने कहा कि सड़क की जर्जर हालत के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं ।लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने पर मजबुर है। उन्होंने प्रशासन को जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत कराने की मांग किया । मौके पर ग्रामीण आंदोलनकारी एकता मंच के आशुदेब महतो, राकेश रंजन महतो, कृष्णा चंद्र महतो, नित्यानंद लायक, मनोरंजन कुम्भकार, जयदेव कुम्भकार, ज्योतिलाल महाली, मुखिया सुबोधनी माहली,धीरन गौड़, भुजंग माछुआ, कृष्णा कालिंदी, मंजू गोराई, बेबी दुबे,राजेश दुबे सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free