यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एस टाइप शाखा पर गंभीर आरोप : उद्यमी महिला को एक महीने तक दौड़ाया, फिर लोन देने से किया इनकार।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एस टाइप शाखा पर गंभीर आरोप : उद्यमी महिला को एक महीने तक दौड़ाया, फिर लोन देने से किया इनकार।

सरायकेला/आदित्यपुर

रेणु देवी इंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर रेणु देवी, निवासी आदित्यपुर, सरायकेला-खरसावां ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एस टाइप शाखा, आदित्यपुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़िता का आरोप है कि

उन्होंने अपने व्यापार के लिए लोन हेतु आवेदन किया था। बैंक ने उनसे सभी जरूरी दस्तावेज लिए, फिजिकल वेरिफिकेशन किया, दुकान/जगह का निरीक्षण किया और फोटो भी लिया।

इस प्रक्रिया में लगभग एक महीना बीत गया। इसके बाद बैंक की तरफ से कहा गया कि आपके CIBIL / eligibility में स्कोर कम दिख रहा है, इसलिए आपको कम लोन मिलेगा। रेणु देवी कम लोन के लिए भी तैयार हो गईं और फिर से सारे कागजात बनवाकर बैंक में जमा किए।

पहले लगभग 13 लाख का आवेदन किया गया था, जिसे बाद में घटाकर 3 लाख कर दिया गया।

इतना सब करने के बाद अब शाखा प्रबंधक श्रीमती मोनिका वर्मा द्वारा कहा जा रहा है कि “आपका एक लोन पहले से चल रहा है, वह खत्म होगा तभी दूसरा लोन मिलेगा।”

उठ रहे हैं बड़े सवाल

1.  अगर आवेदिका का पहले से लोन चल रहा था, तो यह जानकारी बैंक के सिस्टम में पहले दिन ही क्यों नहीं देखी गई?
2.  एक महीने तक वेरिफिकेशन, फोटो, डॉक्यूमेंट लेने का क्या मतलब था?
3.  क्या आम उद्यमियों, खासकर महिला उद्यमियों को इस तरह परेशान करना उचित है?

रेणु देवी का कहना है कि बैंक के इस रवैये से न सिर्फ उनका समय और पैसा बर्बाद हुआ, बल्कि मानसिक रूप से भी वे परेशान हुईं।

पीड़िता ने यूनियन बैंक के वरीय अधिकारियों और जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और जांच करने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई अन्य आम नागरिक इस तरह परेशान न हो।

बैंक प्रबंधक से पूछे जाने पर कहा कि जो प्रॉब्लम यहां आ रहा है वही सभी बैंकों में भी आएगा और मेरे ऊपर काम का प्रेशर है आपके इंतजार करना पड़ेगा।

आगामी दुर्गा पूजा एवं दशहरा पर्व को लेकर जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक सम्पन्न

आगामी दुर्गा पूजा एवं दशहरा पर्व को लेकर जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक सम्पन्न

सरायकेला-खरसावां

आगामी दुर्गा पूजा एवं दशहरा पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से आज दिनांक 17 सितम्बर 2026 को समहरणालय सभागार,सरायकेला में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक श्री मनोज सर्वंगीआरी की उपस्थिति में जिला स्तरीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा, अपर उपायुक्त श्री जयवर्धन कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी सरायकेला श्री अभिनव प्रकाश, अपर नगर आयुक्त, आदित्यपुर नगर निगम श्री एजाज अनवर, अनुमंडल पदाधिकारी चांडिल श्री नितिन शिवम गुप्ता, प्रभारी पदाधिकारी, सामान्य शाखा श्री अविनाश कुमार समेत विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, थाना प्रभारी तथा विभिन्न पूजा समितियों के सदस्यगण उपस्थित रहे।

बैठक में आगामी पर्व के दौरान विधि-व्यवस्था एवं शांति-व्यवस्था बनाए रखने, श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था, विसर्जन एवं रावण दहन की तैयारियों तथा आपातकालीन सेवाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को अपने-अपने दायित्व क्षेत्र में पूरी सतर्कता एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ शहर को जोड़ने वाले वैसे ग्रामीण मार्गों, जिन पर ग्रामीणों का नियमित आवागमन रहता है, वहां भी देर रात्रि तक पुलिस गश्ती एवं भ्रमण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया, ताकि पर्व के दौरान आमजनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा विधि-व्यवस्था प्रभावी रूप से बनी रहे।

पूजा पंडालों में सुरक्षा एवं जनसुविधा सुनिश्चित करने का निर्देश

पूजा समितियों को निर्देश दिया गया कि पंडालों का निर्माण सुरक्षित स्थान पर निर्धारित मानकों एवं सक्षम विभागों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जाए। पंडाल विद्युत तार, ट्रांसफॉर्मर, हाईटेंशन लाइन, गैस गोदाम अथवा अन्य संवेदनशील स्थानों से सुरक्षित दूरी पर बनाए जाएं। पंडाल निर्माण में ज्वलनशील एवं अत्यधिक आग पकड़ने वाली सामग्री के उपयोग से बचने तथा पंडाल की मजबूती एवं सुरक्षा से संबंधित आवश्यक प्रमाण-पत्र सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त करने का निर्देश दिया गया।

पंडालों में महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पृथक प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था, पर्याप्त चौड़ाई वाले द्वार तथा आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए वैकल्पिक निकास मार्ग सुनिश्चित करने को कहा गया। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया गया।

सभी पूजा पंडालों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता, प्राथमिक उपचार तथा आवश्यक जनसुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। पंडालों एवं उनके आसपास किसी भी प्रकार के ज्वलनशील पदार्थ का भंडारण नहीं करने तथा पर्याप्त संख्या में अग्निशमन यंत्र, पानी एवं सूखी बालू से भरी बाल्टियां आदि रखने का निर्देश दिया गया।

विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता

पूजा पंडालों में विद्युत वायरिंग सुरक्षित तरीके से करने, समुचित अर्थिंग की व्यवस्था रखने तथा विद्युत सजावट एवं अस्थायी कनेक्शन का कार्य संबंधित विद्युत विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप करने का निर्देश दिया गया। विद्युत नियंत्रण कक्ष को ऐसी जगह स्थापित करने को कहा गया, जहां आपात स्थिति में विद्युतकर्मी आसानी से पहुंच सकें।

संबंधित विभागों द्वारा दिए गए अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा आवश्यक सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्राप्त करने को कहा गया।

पूजा पंडालों एवं प्रमुख स्थलों पर चिकित्सा, अग्निशमन एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था

उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी प्रमुख पूजा पंडालों में आवश्यकतानुसार चिकित्सा दल एवं अग्निशमन व्यवस्था उपलब्ध रहे। सभी चिकित्सक एवं चिकित्सा पदाधिकारी अपने-अपने स्वास्थ्य केंद्रों में निर्धारित दायित्व के अनुसार उपस्थित रहेंगे, ताकि किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सेवा में व्यवधान उत्पन्न न हो।

उन्होंने सभी संबंधित स्वास्थ्य पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान एम्बुलेंस को सक्रिय मोड में रखा जाए तथा आकस्मिक स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

विसर्जन घाटों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश

प्रतिमा विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा चिन्हित विसर्जन घाटों पर पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। विसर्जन घाटों पर समतलीकरण, पर्याप्त विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था, आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती, पुलिस बल एवं दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति तथा चिकित्सा दल एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

विसर्जन घाटों पर प्रतिमा एवं अन्य सामग्री के आवागमन को सुगम बनाने के लिए आवश्यकता के अनुसार हाइड्रा/अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था समय से पूर्व सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

पूजा समितियों को निर्देश दिया गया कि प्रतिमाओं का विसर्जन प्रशासन द्वारा निर्धारित तिथि, समय एवं मार्ग के अनुसार ही करें तथा निर्धारित विसर्जन स्थल/घाट का ही उपयोग करें।

रावण दहन के दौरान सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश

दशहरा के अवसर पर आयोजित होने वाले रावण दहन कार्यक्रम के लिए सुरक्षा के सभी आवश्यक मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। रावण दहन स्थल पर दर्शकों एवं दहन स्थल के बीच निर्धारित एवं पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखने, भीड़ नियंत्रण एवं बैरिकेडिंग की समुचित व्यवस्था करने तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

संबंधित पदाधिकारियों एवं आयोजन समिति को निर्देश दिया गया कि रावण दहन से संबंधित सभी तैयारियां निर्धारित सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए समय से पूर्व पूर्ण कर लें, ताकि कार्यक्रम सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।

यातायात एवं नो-एंट्री व्यवस्था को लेकर निर्देश

पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने तथा निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया। अनधिकृत पार्किंग एवं आवागमन में बाधा उत्पन्न करने वाले अतिक्रमण पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।

आवश्यकतानुसार मुख्य बाजारों को जोड़ने वाले मार्गों पर नो-एंट्री व्यवस्था लागू करने तथा बड़े एवं वाणिज्यिक वाहनों के आवागमन को नियंत्रित करने का निर्देश दिया गया, ताकि श्रद्धालुओं एवं आमजनों के आवागमन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

रात्रि 10 बजे के बाद DJ एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर रोक

बैठक में ध्वनि प्रदूषण से संबंधित निर्धारित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी/माननीय न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। रात्रि 10:00 बजे के बाद DJ अथवा ध्वनि विस्तारक यंत्र पर किसी भी प्रकार का गाना या अन्य ध्वनि प्रसारण नहीं किया जाएगा।

इसका अनुपालन सभी थाना प्रभारी, अनुमंडल पदाधिकारी एवं अंचल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में सुनिश्चित करेंगे। निर्धारित ध्वनि सीमा एवं समय-सीमा का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अवैध शराब की बिक्री एवं परिचालन पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश

पर्व के दौरान किसी भी स्थिति में अवैध शराब की बिक्री एवं परिचालन पर पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। ड्राई-डे के दौरान निर्धारित प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

शराब दुकानों एवं उनके आसपास, विशेषकर मुख्य सड़कों तथा सार्वजनिक स्थलों पर शराब का सेवन नहीं हो, इसके लिए विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। सार्वजनिक स्थानों पर शराब सेवन अथवा किसी भी प्रकार के नशे का प्रयोग करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

CCTV एवं सोशल मीडिया निगरानी पर विशेष जोर

सभी प्रमुख पूजा पंडालों में CCTV कैमरों की व्यवस्था एवं उसकी प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही, मुख्य मार्गों एवं आवश्यकता वाले संवेदनशील स्थलों पर संबंधित पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया गया।

सोशल मीडिया एवं व्हाट्सऐप ग्रुपों पर भ्रामक, अफवाहजनक, आपत्तिजनक अथवा सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली सामग्री प्रसारित नहीं करने की अपील की गई। ऐसी किसी भी सामग्री की सूचना तत्काल निकटतम प्रशासनिक अथवा पुलिस पदाधिकारी को देने का निर्देश दिया गया।

पूजा समितियों से सुझाव आमंत्रित, प्राप्त सुझावों पर कार्रवाई के निर्देश

बैठक में पूजा समिति के सदस्यों एवं शांति समिति के सदस्यों से पर्व के दौरान जनसुविधा एवं आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित सुझाव एवं सलाह आमंत्रित किए गए। इस दौरान पूजा समितियों द्वारा सड़क निर्माण एवं मरम्मत, साफ-सफाई, अवैध पार्किंग पर नियंत्रण, खराब स्ट्रीट लाइट की मरम्मत, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, झूलते हुए विद्युत तारों एवं विद्युत खंभों की मरम्मत, विसर्जन घाटों पर हाइड्रा की व्यवस्था एवं समतलीकरण सहित विभिन्न बिंदुओं पर सुझाव दिए गए।

प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों एवं पदाधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा पर्व से पूर्व संबंधित व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त ने शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण आयोजन में पूजा समितियों से सहयोग की अपील

अपने संबोधन में उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह ने कहा कि जिले में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी दुर्गा पूजा एवं दशहरा पर्व शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं आपसी भाईचारे के वातावरण में संपन्न हो, इसके लिए सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी पूजा समितियों एवं शांति समिति के सदस्यों से प्रशासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करते हुए शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा संपन्न कराने तथा प्रशासन एवं पुलिस को आवश्यक सहयोग प्रदान करने की अपील की।

उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पूजा समितियों से प्राप्त जनसुविधा एवं आवश्यक व्यवस्थाओं से संबंधित सुझावों पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूर्व पूर्ण कराई जाएं। स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने, एम्बुलेंस को सक्रिय रखने तथा प्रमुख पूजा स्थलों पर आवश्यक चिकित्सा एवं अग्निशमन व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारियों को सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने का दिया निर्देश

पुलिस अधीक्षक मनोज सर्वंगीआरी ने अपने संबोधन में कहा कि दुर्गा पूजा एवं दशहरा के दौरान पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता शांति-व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुगम यातायात व्यवस्था बनाए रखना है।

उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्र के सभी पूजा पंडालों, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात व्यवस्था एवं पार्किंग के लिए चिन्हित स्थलों का पूर्व में ही भ्रमण कर आवश्यक तैयारियों का जायजा लें। पूजा समितियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सभी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण कराना सुनिश्चित करें।

उन्होंने पूजा समितियों को निर्देश दिया कि अपने स्तर से नियुक्त सभी स्वयंसेवकों की सूची संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध कराएं तथा स्वयंसेवकों को पहचान-पत्र उपलब्ध कराएं, ताकि भीड़ प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में उनका प्रभावी सहयोग लिया जा सके।

पुलिस अधीक्षक ने सभी थाना प्रभारियों को पूजा पंडालों एवं मुख्य मार्गों के आवश्यक स्थलों पर संबंधित पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर CCTV कैमरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, पर्व के दौरान ड्रंक एंड ड्राइव के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण एवं शहर को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर भी नियमित पुलिस गश्ती एवं भ्रमण सुनिश्चित करने को कहा। वरीय पुलिस पदाधिकारी एवं गश्ती दल लगातार भ्रमणशील रहेंगे तथा पूजा समितियों एवं आम नागरिकों के साथ समन्वय स्थापित कर किसी भी अप्रिय स्थिति की सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि रात्रि 10:00 बजे के बाद DJ एवं ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर रोक तथा अन्य निर्धारित ध्वनि नियंत्रण संबंधी प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।

पूजा समितियों ने प्रशासन को सहयोग का दिया आश्वासन

बैठक के दौरान उपस्थित पूजा समिति के प्रतिनिधियों एवं शांति समिति के सदस्यों ने प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करने तथा शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में दुर्गा पूजा एवं दशहरा पर्व संपन्न कराने में प्रशासन एवं पुलिस को पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पर्व के दौरान विधि-व्यवस्था, जनसुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की सुविधा से संबंधित सभी निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य होगा। किसी भी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा सभी संबंधित पदाधिकारियों, पूजा समितियों एवं शांति समिति के सदस्यों से अपील की गई कि सुरक्षा मानकों, विधि-व्यवस्था एवं जनसुविधाओं से संबंधित सभी तैयारियां पर्व प्रारंभ होने से पूर्व समय पर पूर्ण कर लें, ताकि दुर्गा पूजा एवं दशहरा पर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सके।

एनटीटीएफ में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा पूजा।

एनटीटीएफ में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा पूजा।

जमशेदपुर

एनटीटीएफ आर.डी. टाटा तकनीकी संस्थान, गोलमुरी में टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं अन्य सदस्य सभागार में एकत्रित हुए और भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना में शामिल हुए।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान विश्वकर्मा की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। भगवान विश्वकर्मा को वास्तुकला, शिल्पकला, निर्माण एवं तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है। तकनीकी शिक्षा संस्थान में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है, क्योंकि यह विद्यार्थियों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को मेहनत, कौशल, सृजनशीलता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का संदेश देती है।पूजा-अर्चना के दौरान संस्थान की सुख-समृद्धि, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा सभी के कल्याण की कामना की गई। पूजा के पश्चात उपस्थित सभी लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद सामूहिक भोज-प्रसाद का आयोजन हुआ।


पूरे कार्यक्रम के दौरान संस्थान परिसर में भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण बना रहा। संस्थान परिवार ने भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की कि उनका आशीर्वाद सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों पर बना रहे तथा संस्थान तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रगति करता रहे।

वरुण कुमार
प्रबंधन अधिकारी

हूती हमलों व अमेरिका-ईरान युद्ध का तेल पर महाविस्फोट! तेल के तीनों रास्ते बंद? -दुनियाँ में मच सकता है कोहराम? लेकिन भारत बना स्थिरता क़ी मिसाल! -समग्र व्यापक विश्लेषण।

हूती हमलों व अमेरिका-ईरान युद्ध का तेल पर महाविस्फोट! तेल के तीनों रास्ते बंद? -दुनियाँ में मच सकता है कोहराम? लेकिन भारत बना स्थिरता क़ी मिसाल! -समग्र व्यापक विश्लेषण।

क़्या वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ऑयल शॉक का सबसे बड़ा वार? क़्या दुनियाँ फिर ऑयल क्राइसिस की आग में झुलसने वाली है?- अमेरिका-ईरान जंग से होर्मुज संकट, हूती हमलों से लाल सागर अशांत, सऊदी पाइपलाइन बंद

क़्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों का अगला तूफान पूरी दुनियाँ को हिला देगा? – सऊदी अरब में तेल उत्पादन 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर! क़्या क्रूड ऑइल पर 120 डॉलर का खतरा मंडरा रहा है? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर दुनियाँ का ऊर्जा बाजार सितंबर 2026 में एक ऐसे दौर से गुजर रहा है,जिसमें तेल की आपूर्ति के कई महत्वपूर्ण रास्तों पर एक साथ दबाव बन गया है।अमेरिका- ईरान संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है,लाल सागर और बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती हमलों ने समुद्री परिवहन को जोखिम में डाल दिया है और अब सऊदी अरब की लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी ड्रोन हमलों के बाद अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है और प्रतिदिन लगभग 40-50 लाख बैरल तेल ले जाने की क्षमता रखती है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि इस घटनाक्रम की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि होर्मुज स्वयं दुनियाँ के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। सामान्य परिस्थितियों में इसके जरिए विश्व के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और एलएनजी का परिवहन होता है,लेकिन 17 सितंबर की रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार बुधवार को होर्मुज से केवल तीन कमोडिटी वैसेल्स गुजरे, जबकि 10-दिन का औसत करीब 17 था इसका अर्थ यह नहीं है कि वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है,परंतु सामान्य रूप से खुला तेल मार्ग कहना मुश्किल हैलेकिन यह अवश्य बताता है कि युद्ध ने ऊर्जा परिवहन की सामान्य व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।इसी के समानांतर बाब अल-मंदेब भी महत्वपूर्ण हो गया है।लाल सागर से होकर यूरोप और एशिया के बीच जाने वाले जहाजों के लिए यहरणनीतिक समुद्री मार्ग है।आज 17 सितंबर 2026 को उपलब्ध ताजा बाजार आंकड़ों में ब्रेंट क्रूड लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल और डब्लूटीआई लगभग 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था; यानी कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी हुई हैं।हूती हमलों और क्षेत्रीय सैन्य तनाव के कारण जहाजरानी कंपनियों को जोखिम, बीमा लागत और वैकल्पिक मार्गों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।ऐसे वातावरण में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का बंद होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पाइपलाइन होर्मुज से बचकर सऊदी तेल को लाल सागर तक पहुंचाने वाला प्रमुख वैकल्पिक मार्ग रही है।वैश्विक तेल संकट के बीच भारत सरकार ने 16 सितंबर से पेट्रोल,डीजल और एटीएफ़ के निर्यात पर लेवी घटाई है; हालांकि इसका घरेलू पेट्रोल- डीजल की खुदरा कीमतों पर सीधा असर नहीं है।

साथियों सऊदी अरब से सामने आए तेल उत्पादन के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। ओपेक को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार अगस्त में सऊदी अरब का कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 62.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो जुलाई के लगभग 81 लाख बैरल प्रतिदिन से करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन कम था।यह 1990 के बाद का सबसे निचला मासिक उत्पादन स्तर बताया गया है।हालांकि उत्पादन और बाजार में वास्तविक आपूर्ति अलग-  अलग अवधारणाएं हैं;इसलिए इन आंकड़ों को सीधे वैश्विक उपलब्ध तेल में उतनी ही मात्रा की कमी के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।सबसे बड़ा सवाल अब सऊदी अरब के निर्यात भंडार और पाइपलाइन की बहाली को लेकर है। रॉयटर्स के अनुसार, यदि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शीघ्र चालू नहीं होती तो सऊदी अरब के पास यानबू क्षेत्र में उपलब्ध निर्यात योग्य तेल का स्टॉक केवल लगभग पांच से सात दिनों के लिए पर्याप्त रह सकता है और लंबे व्यवधान की स्थिति में वैश्विक आपूर्ति का लगभग 4 प्रतिशत तक हिस्सा प्रभावित होने का जोखिम है।यह एक संभावित जोखिम का आकलन है, तत्काल 4 प्रतिशत की वास्तविक कमी नही।

साथियों तेल बाजार ने इस जोखिम पर तत्काल प्रतिक्रिया भी दिखाई।15 सितंबर को यानबू से तेल लदान रुकने और यूरोप के लिए कुछ शिपमेंट रद्द होने की खबरों के बीच ब्रेंट लगभग 108.75 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई करीब 105.83 डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि अगले दिन सऊदी अरब द्वारा ओमान के सोहार बंदरगाह के जरिए वैकल्पिक शिपमेंट बढ़ाने की खबर आने पर कीमतों में कुछ नरमी आई और 16 सितंबर को ब्रेंट करीब 105.83 डॉलर तथा डब्ल्यूटीआई करीब 102.43 डॉलर पर बंद हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि बाजार केवल युद्ध की खबर पर नहीं, बल्कि वैकल्पिक आपूर्ति उपलब्ध होने की संभावना पर भी तेजी से प्रतिक्रिया कर रहा है। यही कारण है कि 120 डॉलर प्रति बैरल का स्तर अभी एक संभावित जोखिम या बाजार- चर्चा का विषय है,निश्चित भविष्यवाणी नहीं। यदि होर्मुज में व्यवधान लंबा चलता है, बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हमले बढ़ते हैं और सऊदी पाइपलाइन की मरम्मत में लंबा समय लगता है, तो उपलब्ध वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत, यदि वैकल्पिक समुद्री मार्ग सक्रिय रहते हैं, सऊदी पाइपलाइन जल्दी बहाल होती है या अतिरिक्त उत्पादन बाजार में आता है, तो दबाव सीमित भी रह सकता है।

साथियों, इस संकट का असर केवल कच्चे तेल की कीमत तक सीमित नहीं है।महंगा क्रूड परिवहन,पेट्रोल-डीजल, विमानन ईंधन, पेट्रोकेमिकल, प्लास्टिक,उर्वरक और बिजली उत्पादन जैसी अनेक गतिविधियों की लागत बढ़ा सकता है।तेल आयात पर अत्यधिक निर्भर देशों में इसका असर चालू खाते,मुद्रा विनिमय दर, सरकारी सब्सिडी और महंगाई पर पड़ सकता है। पहले से ऊंची ऊर्जा लागत के बीच यदि डीजल और जेट फ्यूल की उपलब्धता भी प्रभावित होती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।विभिन्न देशों में इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। जहां सरकारें ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने या सब्सिडी देने की स्थिति में हैं, वहां तत्काल उपभोक्ता प्रभाव कुछ समय के लिए सीमित किया जा सकता है, लेकिन राजकोषीय बोझ बढ़ेगा। जिन देशों के पास सीमित विदेशी मुद्रा भंडार और कम रणनीतिक तेल भंडार हैं, उनके लिए महंगा तेल आयात अधिक कठिन हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए वैश्विक तेल कीमतों का लंबा उछाल विशेष चुनौती बन सकता है। अलग-अलग देशों में विरोध-प्रदर्शन की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन उनके कारण और स्थानीय परिस्थितियां सटिका से अलग-अलग हैं।

साथियों भारत के लिए तस्वीर अपेक्षाकृत अलग है, लेकिन जोखिम समाप्त नहीं हुआ है।भारत दुनियाँ के बड़े तेल आयातकों में है,इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों और समुद्री मालभाड़े में लंबे समय तक वृद्धि का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।दूसरी ओर भारत के पास विविध आयात स्रोत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, घरेलू रिफाइनिंग क्षमता और बड़ी सरकारी तेल कंपनियों का नेटवर्क है, जो अचानक आए बाहरी झटके को कुछ हद तक एबसोर्ब करने में मदद कर सकते हैं।फिर भी यदि 100-120 डॉलर के आसपास तेल लंबे समय तक बना रहता है तो महंगाई, व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव जैसे प्रभावों की निगरानी सटीकता से  महत्वपूर्ण होगी।

साथियों, दिलचस्प बात यह है कि संकट के बीच सऊदी अरब वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है। 16 सितंबर की रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने ओमान के सोहार बंदरगाह के पास शिप-टू-शिप ट्रांसफर्स के जरिए एशियाई खरीदारों को कच्चा तेल उपलब्ध कराने की कोशिश बढ़ाई है।साथ ही खाड़ी के भीतर स्थित रासतनुरा और जुयैमाह बंदरगाहों से लदान भी बढ़ा है। इससे संकेत मिलता है कि सऊदी अरब और बाजार के अन्य खिलाड़ी पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हैं, बल्कि आपूर्ति को वैकल्पिक मार्गों से बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा वैश्विक सबक ऊर्जा सुरक्षा है। जिस समय दुनिया तेल की स्थिर और सस्ती आपूर्ति पर निर्भर है, उसी समय एक युद्ध कई समुद्री चौकेपॉइंट्स और बुनियादी ऊर्जा ढांचे को एक साथ प्रभावित कर रहा है। होर्मुज, बाब अल-मंदेब और सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन अलग-अलग रास्ते हैं, लेकिन वर्तमान संकट में इनके जोखिम आपस में जुड़ गए हैं। यही इंटरकनेक्टेड रिस्क ऊर्जा बाजार के लिए सबसे गंभीर चुनौती है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि वर्तमान स्थिति को तत्काल वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप कहना सही नहीं होगा,लेकिन ऊर्जा बाजार में असाधारण अनिश्चितता जरूर बढ़ी है।सऊदी उत्पादन में भारी गिरावट,होर्मुज में बेहद कम जहाज आवाजाही,बाब अल -मंदेब में सुरक्षा संकट और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षति,ये सभी संकेत बताते हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्यतः तीन बातों पर निर्भर करेगी: युद्ध और समुद्री मार्गों की स्थिति, सऊदी पाइपलाइन की बहाली और वैकल्पिक तेल आपूर्ति की वास्तविक क्षमता। यदि इन तीनों मोर्चों पर सुधार नहीं हुआ तो महंगे तेल का असर ऊर्जा से निकलकर महंगाई, परिवहन, उद्योग और वैश्विक आर्थिक वृद्धि तक पहुंच सकता है; लेकिन वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग सक्रिय रहे तो बाजार इस झटके को धीरे-धीरे एबसोरब भी कर सकता है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

20 सितंबर को आदित्यपुर में श्रमिकों की बड़ी एकजुटता, बनेगी खरकई पुल से टायो गेट तक मानव श्रृंखला।

20 सितंबर को आदित्यपुर में श्रमिकों की बड़ी एकजुटता, बनेगी खरकई पुल से टायो गेट तक मानव श्रृंखला।

सरायकेला/आदित्यपुर

क्षेत्र के कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों के हितों और उनकी मूलभूत सुविधाओं को लेकर कोल्हान सह टायो मजदूर यूनियन ने बड़े आंदोलन की घोषणा की है। संगठन के अध्यक्ष और पूर्व विधायक अरविंद सिंह ने आदित्यपुर में पत्रकारों से बातचीत में जानकारी दी कि 20 सितंबर को खरकई पुल, आदित्यपुर से लेकर गम्हरिया के टायो गेट तक लंबी मानव श्रृंखला का आयोजन होगा। इसके बाद घोड़ा बाबा मंदिर प्रांगण में बड़ी जनसभा भी होगी।

अरविंद सिंह ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन किसी कंपनी या प्रबंधन के खिलाफ नहीं है, बल्कि मजदूरों के सम्मान और उनके अधिकारों को आवाज देने के लिए है। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य है — कारखाने तरक्की करें, कामगार सुरक्षित रहें और मेहनत का उचित सम्मान मिले।

उन्होंने श्रमिकों से जुड़े 18 प्रमुख मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि कई औद्योगिक इकाइयों में श्रम कानूनों का पालन नहीं हो रहा है। आरोप है कि अधिकांश फैक्ट्रियों में मजदूरों से 12 घंटे तक काम लिया जाता है, लेकिन साप्ताहिक छुट्टी, पीने का साफ पानी और आराम की व्यवस्था नहीं मिलती। यहां तक कि राष्ट्रीय व राजकीय छुट्टियों का लाभ भी नहीं दिया जाता।

उनके मुताबिक, कई मजदूर सुबह 4 बजे घर से निकलते हैं और प्रबंधन उनसे 16 घंटे तक काम कराता है, जिससे न उन्हें आराम मिल पाता है, न परिवार के लिए समय।

वेतन और सुविधाओं पर उठे सवाल
अरविंद सिंह ने कहा कि एक जैसा काम करने के बावजूद स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के वेतन व बोनस में भारी अंतर है। न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई और ओवरटाइम के नियमों को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए।

उन्होंने आरोप लगाया कि हक मांगने वाले श्रमिकों में नौकरी छूटने का डर बना रहता है। साथ ही, कुशल कारीगरों को अर्ध-कुशल या ठेका श्रेणी में दिखाकर उनका ग्रेड घटाने और आवाज उठाने वालों का तबादला कर परेशान करने की शिकायतें भी मिल रही हैं।

बुनियादी सुविधाओं की मांग
यूनियन अध्यक्ष ने श्रम विभाग की कार्यशैली पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट, अतिरिक्त पुलिस चौकी और मजदूरों के लिए सुरक्षित बस सेवा की मांग रखी।

उन्होंने बताया कि सरायकेला, खरसावां, चांडिल, ईचागढ़, राजनगर, हाता, हल्दीपोखर समेत आसपास के कई इलाकों से हजारों मजदूर रोजाना आते हैं, जिन्हें आवागमन में भारी दिक्कत होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों के मुद्दों पर जल्द ही खुली चर्चा आयोजित की जाएगी ताकि समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।

जुटान की अपील
अंत में अरविंद सिंह ने कोल्हान के मजदूरों और आम लोगों से 20 सितंबर के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।

पत्रकार वार्ता में यूनियन के महामंत्री अजय कुमार शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष बसंत कुमार, उपाध्यक्ष जगदीश नारायण चौबे, इन्द्र कांत झा उर्फ इशू झा और असंगठित मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पांडेय समेत कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

आदिवासियों को बांटने का आरोप: चंपाई सोरेन पर बरसे गणेश महाली, बोले- गुरुजी के नाम पर राजनीति चमकाने वाले कर रहे हैं भ्रम की सियासत।

आदिवासियों को बांटने का आरोप: चंपाई सोरेन पर बरसे गणेश महाली, बोले- गुरुजी के नाम पर राजनीति चमकाने वाले कर रहे हैं भ्रम की सियासत।

सरायकेला-खरसावां

बिरसा मुंडा स्टेडियम परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की मूर्ति लगाने को लेकर चल रहे विवाद पर झामुमो नेता गणेश महाली ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन पर तीखा हमला बोला है। झामुमो के केंद्रीय सदस्य और सरायकेला के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी महाली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि पार्टी का स्टेडियम का नाम बदलने का कोई इरादा कभी नहीं था।

झामुमो नेता गणेश महाली

उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए झामुमो ने स्टेडियम परिसर में प्रतिमा न लगाने का फैसला किया है। शिबू सोरेन की प्रतिमा के लिए अब कोई दूसरा उचित स्थान तलाशा जाएगा।

गणेश महाली ने कहा कि स्थानीय विधायक चंपाई सोरेन के पास उठाने लायक कोई बड़ा मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर लोगों में भ्रम फैला रहे हैं। उनका आरोप है कि इस बहाने कोल्हान के आदिवासी और मूलवासी समाज में फूट डालने का प्रयास हो रहा है।

उन्होंने दोहराया कि झामुमो ने हमेशा झारखंड के शहीदों और आंदोलनकारियों को सम्मान दिया है। स्टेडियम का नाम परिवर्तन को लेकर पार्टी की तरफ से न कोई प्रस्ताव आया था, न ही ऐसी कोई योजना थी।

2007 की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए महाली ने चंपाई सोरेन से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि मधु कोड़ा के शासनकाल में सरायकेला के एनआर हाई स्कूल के सामने वाले पार्क का नाम ‘बिरसा उद्यान’ से बदलकर ‘सिद्धू-कान्हू पार्क’ किया गया था, उस समय यह फैसला किसके स्तर से हुआ था, इसका जवाब देना चाहिए।

महाली ने कहा कि चंपाई सोरेन ने शिबू सोरेन के मार्गदर्शन और झामुमो के बैनर तले ही लंबा राजनीतिक सफर तय किया। कई बार विधायक, मंत्री बनने के बाद वे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। ऐसे में अब शिबू सोरेन की प्रतिमा का विरोध करना समझ से परे है।

उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के संघर्ष में दिशोम गुरु की भूमिका अतुलनीय रही है। अगर प्रतिमा लगाने के प्रस्ताव से आदिवासी समाज के किसी तबके की भावना आहत हुई है, तो इसके लिए पार्टी खेद जताती है।

महाली ने अंत में कहा कि इसी संवेदनशीलता को देखते हुए प्रतिमा स्थापना की जगह बदलने का निर्णय लिया गया है और जल्द ही किसी अन्य उपयुक्त स्थल पर इसे स्थापित किया जाएगा।

अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह की पहल से बरछाबांध में 12 वर्षों के जमीन विवाद के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक शुरुआत; पांच भाइयों के बीच बनी सहमति।

अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह की पहल से बरछाबांध में 12 वर्षों के जमीन विवाद के समाधान की दिशा में ऐतिहासिक शुरुआत; पांच भाइयों के बीच बनी सहमति।

बरछा बांध

बरछा बांध में वर्षों से चले आ रहे एक जटिल पारिवारिक और भूमि विवाद के समाधान की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत हुई है। पांच भाइयों के बीच पिछले 12 वर्षों से कुल 20 एकड़ जमीन को लेकर चला आ रहा यह पेचीदा विवाद—जिस पर 12 वर्षों से खेती भी बंद थी और थाने से लेकर सिविल कोर्ट तक कई मुकदमे दर्ज थे।

भाइयों ने आपसी लड़ाई में लाखों रुपए खर्च कर दिए साथ ही लाखों के उत्पादन के नुकसान भी हो चुकी है

आज सीओ प्रवीण कुमार सिंह की प्रेरणादायी पहल से सुलझने की राह पर आगे बढ़ा है।

सकारात्मक पहल और बैठक की शुरुआत
बीते शनिवार को जब बीडीओ सह सीओ प्रवीण कुमार सिंह अपनी टीम के साथ सुबह के पैदल भ्रमण पर निकले थे, तब ग्रामीणों ने उनसे इस जटिल मामले के समाधान का अनुरोध किया था। उनकी अपील पर आज बुधवार, 16 सितंबर को समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई।
ब्लॉक के इंजीनियर अनिल कुमार चौधरी और अंचल अमीन अमलेश यादव के साथ बरछाबांध पहुंचे और बैठक शुरू की। इस निष्पक्ष पहल से वर्षों से आमने-सामने खड़े भाइयों के बीच आपसी दूरियां कम होने लगीं।

समाधान और निष्पादन के मुख्य बिंदु
सर्वसम्मति: बैठक की शुरुआत में सभी पांचों भाइयों ने स्वेच्छा से स्वीकार किया कि जो भी पंच निर्णय होगा, वे उसे पूर्णतः स्वीकार करेंगे।
मापी कार्य की शुरुआत: आज से जमीन की मापी का कार्य शुरू हो गया है। कुल 20 एकड़ जमीन की मापी और बंटवारे में लगभग 4 से 5 दिन का समय लग सकता है।
अंतिम बैठक: कार्य पूरा होने के बाद पुनः 4 दिनों के बाद बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इस विवाद का अंतिम रूप से निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासनिक प्रक्रिया: अंचल अधिकारी ने बताया कि बंटवारे के बाद सभी की होल्डिंग अलग कर दी जाएगी और सबकी रसीद अलग-अलग काट दी जाएगी।

एक अनुकरणीय उदाहरण
यह घटना एक मजबूत संदेश देती है कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने और अनावश्यक खर्च करने से बेहतर है कि आपसी भाईचारे और सकारात्मक सोच के साथ बैठकर पंचायती की जाए। लोग आपस में बैठकर अपनी जमीन का सहजता से बंटवारा कर सकते हैं, जिससे बिना किसी बड़े खर्च के समाधान हो सकता  है। साथ ही आपसी सौहार्द भी बढ़ता है l

अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार सिंह का यह प्रयास समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच सितंबर 2026 -क्या प्लास्टिक, ई-कचरे क़ा कबाड़ बनेगा नई अर्थव्यवस्था की ताकत? -फेंकने की संस्कृति पर ब्रेक, कचरे से कमाई क़े नए चक्र का वैश्विक बिगुल! -समग्र व्यापक विश्लेषण

विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था मंच सितंबर 2026 -क्या प्लास्टिक, ई-कचरे क़ा कबाड़ बनेगा नई अर्थव्यवस्था की ताकत? -फेंकने की संस्कृति पर ब्रेक, कचरे से कमाई क़े नए चक्र का वैश्विक बिगुल! -समग्र व्यापक विश्लेषण

चक्रीय अर्थव्यवस्था: जनता और समृद्धि के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन कचरे को संसाधन, अपशिष्ट को अवसर और विकास को स्थायित्व में बदलने का वैश्विक अभियान

ई-कचरा,प्लास्टिक,पुराने कपड़े से लेकर बैटरी और निर्माण सामग्री तक,हर बेकार चीज में छिपी है,अरबों की अर्थव्यवस्था! -डब्लूसीईऐफ़ 2026 में भारत का सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल दुनियाँ के सामने -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर आज दुनियाँ के सामने आर्थिक विकास के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की कमी, बढ़ता कचरा, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और कच्चे माल की बढ़ती मांग जैसी अनेक चुनौतियां खड़ी हैं। ऐसे समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को केवल  उत्पादन-उपभोग- फेंकनें की रैखिक व्यवस्था से निकालकर ऐसी व्यवस्था की ओर ले जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है जिसमें वस्तुओं और सामग्रियों का जीवन अधिकतम समय तक बढ़ाया जाए। इसी सोच का नाम चक्रीय अर्थव्यवस्था यानी सर्कुलर इकोनॉमी है।इसका मूल मंत्र है,क्षतिग्रस्त वस्तु को बदलने से पहले उसकी मरम्मत करें,फेंकने से पहले उसका पुनःउपयोग करें औरअपशिष्ट को नष्ट करने से पहले उसमें से उपयोगी सामग्री वापस प्राप्त करें।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा क़ि भारत में यह विचार कोई पूरी तरह नया पश्चिमी आर्थिक सिद्धांत नहीं है; मरम्मत, पुनःउपयोग, पुनर्चक्रण, पुराने कपड़ों का दोबारा इस्तेमाल,कबाड़ से उपयोगी वस्तुएं बनाना और संसाधनों को व्यर्थ न जाने देना भारतीय सामाजिक व्यवहार में आदि अनादि काल से मुझे खुद अपने बुजुर्गों की पीढ़ी से लंबे समय से दिखाई देता रहा है।इसी वैश्विक सोच को नई तकनीक, वित्त और नीतिगत ढांचे से जोड़ने के लिए भारत पहली बार दक्षिण एशिया में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (डब्लूसीईऐफ़) 2026 की मेजबानी कर रहा है। गुजरात के गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में 15 से18 सितंबर 2026 से डब्लूसीईऐफ़ 2026 का आयोजन शुरू है।यह दक्षिण एशिया में इस वैश्विक मंच का पहला आयोजन है।इस वर्ष का विषय है,सर्कुलर इकोनॉमी: ट्रांसिशन फॉर पीपल एंड प्रोस्पेंरिटी यानें जनता और समृद्धि के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर परिवर्तन।भारत सरकार के अनुसार 65 से अधिक देशों के 2,000 से अधिक हितधारक इसमें भाग ले रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में 125 से अधिक प्रदर्शक चक्रीय समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। मंच का वास्तविक उद्देश्य केवल सम्मेलन करना नहीं,बल्कि सहयोग की नई अर्थव्यवस्था बनाना है।डब्लूसीईऐफ़ 2026 का प्रमुख लक्ष्य भारत की चक्रीय अर्थव्यवस्था संबंधी पहलों को वैश्विक मंच पर सामने लाना, ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाना,चक्रीय वित्त को गति देना, निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करना, नीतिगत संवाद को मजबूत करना तथा डिजिटल तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देना है। आयोजन में एआई,ऊर्जा,रोजगार,वित्त, शासन,टिकाऊ उत्पाद, औद्योगिक समाधान स्टार्टअप और युवा नेतृत्व जैसे क्षेत्रों पर भी चर्चा हो रही है।

साथियों बात अगर हम चक्रीय अर्थव्यवस्था आखिर है क्या? इसको समझने की करें तो सरल भाषा में कहा जाए तो चक्रीय अर्थव्यवस्था वह आर्थिक मॉडल है जिसमें किसी उत्पाद या सामग्री को इस्तेमाल के बाद कचरा मानकर समाप्त करने के बजाय उसकी उपयोगिता को यथासंभव लंबे समय तक बनाए रखा जाता है। इसमें रिडयूज़,रीयूज़ ,रिपेयर,रिफंरबिश,रेमैन्युफैक्चर,रेपरपोज़ और रिसाइकिल जैसे सिद्धांत महत्वपूर्ण हैं।यानेंमोबाइल फोन खराब हो जाए तो नया खरीदना ही एकमात्र रास्ता नहीं;मरम्मत और पुर्जों का पुनः उपयोग भी विकल्प है। वाहन के पुराने पुर्जों को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। निर्माण क्षेत्र में पुराने भवनों की सामग्री को पुनःउपयोग किया जा सकता है।कपड़ा उद्योग में पुराने वस्त्रों से नए उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक कचरे से मूल्यवान धातुएं वापस निकाली जा सकती हैं। खाद्य क्षेत्र में जैविक अपशिष्ट से कम्पोस्ट या बायोगैस बनाई जा सकती है।कृषि में फसल अवशेषों को जलाने के बजाय जैव-ऊर्जा, कम्पोस्ट या अन्य उपयोगी उत्पादों में बदला जा सकता है।इस तरह चक्रीय अर्थव्यवस्था केवल कचरा प्रबंधन नहीं बल्कि पूरी उत्पादन और उपभोग व्यवस्था को पुनः डिजाइन करने की शिक्षा क़ी सटीकता से अवधारणा है।
साथियों बात अगर हम भारत के लिए इसका आर्थिक महत्व क्या है? इसको समझने की करें तो चक्रीय अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने,संसाधनों की उत्पादकता बढ़ाने और उद्योगों के लिए नए व्यापार मॉडल विकसित करने में मदद कर सकती है।यदि किसी देश को हर बार नए लौह अयस्क,  तांबा,एल्युमिनियम,प्लास्टिक,इलेक्ट्रॉनिक धातु या अन्य कच्चे माल की आवश्यकता कम करनी पड़े और पुराने उत्पादों से ही कुछ सामग्री वापस अर्थव्यवस्था में आ जाए,तो संसाधनों पर दबाव घटता है।साथ ही रीसाइक्लिंग रिपेयर,रिफर्बिशिंग,री-मैन्युफैक्चरिंग, अपशिष्ट संग्रहण और नई तकनीकों में नए व्यवसाय और रोजगार पैदा हो सकते हैं।एक्सपर्ट के अनुसार डब्लूसीईऐफ़ का उद्देश्य ही ऐसी चक्रीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाना है जो नए व्यवसाय और रोजगार के अवसर पैदा करे तथा संसाधन-संकट और पर्यावरणीय दबाव से निपटने में मदद करे।

साथियों,चक्रीय अर्थव्यवस्था में वित्त सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।किसी विचार को प्रयोगशाला से बाजार तक पहुंचाने के लिए पूंजी चाहिए। इसलिए डब्लूसीईऐफ़ 2026 में सर्कुलर फाइनेंस और प्राइवेट-बसेक्टर इन्वेस्टमेंट को विशेष महत्व दिया जा रहा है।इसका अर्थ है कि बैंक, निवेशक,सरकारें,विकास वित्त संस्थान और निजी कंपनियां ऐसे व्यवसायों में पूंजी लगाएं जिनका मॉडल संसाधनों की बचत,पुनर्चक्रण,पुनः उपयोग और टिकाऊ उत्पादन पर आधारित हो। यदि किसी स्टार्टअप के पास प्लास्टिक को उच्च गुणवत्ता वाले पुनर्चक्रित कच्चे माल में बदलने की तकनीक है, लेकिन उसके पास उत्पादन बढ़ाने के लिए पूंजी नहीं है,तो चक्रीय वित्त उसके समाधान को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।ज्ञान और तकनीक की सीमाएं भी राष्ट्रीय सीमाओं से आगे जानी होंगी। चक्रीयता स्वभाव से सहयोगात्मक है।किसी देश के पास उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीक हो सकती है,दूसरे के पास कच्चा माल, तीसरे के पास निवेश और चौथे के पास नीति बनाने का अनुभव। इसलिए वैश्विक चक्रीय अर्थव्यवस्था के लिए ज्ञान,तकनीक,वित्त और उत्तरदायित्व का देशों तथा क्षेत्रों के बीच प्रवाह जरूरी है। यही कारण है कि डब्लूसीईऐफ़ जैसे मंच केवल
पर्यावरण विशेषज्ञों की बैठक नहीं हैं; इनमें सरकार, उद्योग, स्टार्टअप,निवेशक, शोधकर्ता, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठन एक साथ आते हैं।डब्लूसीईऐफ़ को सितरा ने 2017 में शुरू किया था और अब यह वार्षिक वैश्विक मंच बन चुका है।

साथियों, ऊर्जा से लेकर रोजगार तक चक्रीय अर्थव्यवस्था का दायरा बहुत व्यापक है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों का दूसरा उपयोग और अंततः उनमें मौजूद मूल्यवान धातुओं की रिकवरी, सौर पैनलों के जीवन के बाद उनकी सामग्री का पुनर्प्रयोग, निर्माण सामग्री का पुनर्चक्रण, टिकाऊ फैशन,प्लास्टिक का पुनर्चक्रण,औद्योगिक जल का पुनः उपयोग,कृषि अपशिष्ट से जैव-ऊर्जा और खाद्य अपशिष्ट से उपयोगी उत्पाद,ये सभी चक्रीय अर्थव्यवस्था के उदाहरण हैं। इस व्यवस्था में कचरा अंतिम मंजिल नहीं बल्कि अगले उत्पादन चक्र का संभावित कच्चा माल बन जाता है।भारत की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां विशाल उपभोक्ता बाजार, तेजी से बढ़ता विनिर्माण क्षेत्र और विविध प्रकार के संसाधनों की मांग है। भारत में एक्सटेंडेड प्रोडूसर रिस्पांसिबिलिटी जैसे तंत्रों के माध्यम से उत्पादकों को उनके उत्पादों के जीवन -चक्र के बाद की जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।डब्लूसीईऐफ़ 2026 में उत्पादों को शुरू से ही अधिक टिकाऊ, लंबे समय तक उपयोग योग्य और कम अपशिष्ट पैदा करने वाला बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे अर्थव्यवस्था में केवल ‘कितना उत्पादन हुआ’ नहीं बल्कि कितना मूल्य बचाया गया यह प्रश्न अधिक सटीकता से महत्वपूर्ण हो सकता है।

साथियों, 10-ईयर फ्रेमवर्क ऑफ़ प्रोग्रामस यानें 10 वायएफपी की बैठक भी महत्वपूर्ण कड़ी है। डब्लूसी ईऐफ़ के साथ 15 सितंबर को गांधीनगर में सस्टेनबल कन्सम्प्शन एंड प्रोडक्शन पैटरनस से संबंधित 10 वायएफपी बोर्ड की बैठक आयोजित हुई।भारत ने हाल में इस बोर्ड के को-चेयर की जिम्मेदारी संभाली है।यह इसलिएमहत्वपूर्ण है क्योंकि चक्रीय अर्थव्यवस्था तभी सफल होगी जब उत्पादन के साथ-साथ उपभोग की आदतों में भी बदलाव आए,कम संसाधन खर्च हों, उत्पादों का जीवन बढ़े और उपभोक्ता टिकाऊ विकल्पों को महत्व दें।15-16 सितंबर के मुख्य कार्यक्रम के बाद 17-18 सितंबर को 80 एक्सेलरेटर सेशनस वैश्विक सहयोगियों द्वारा ऑनलाइन हाइब्रिड और प्रत्यक्ष प्रारूप में आयोजित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य गांधीनगर की चर्चा को दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों और वास्तविक परियोजनाओं तक पहुंचाना है।उदाहरण के तौर पर यूएनडीपी के कार्यक्रमों में फैशन और निर्माण क्षेत्र की सर्कुलर सप्लाई चैनस,ग्लोबल साउथ में सर्कुलरबिज़नेस इकोसिस्टमस,बांग्लादेश की सर्कुलर ब्लू इकोनॉमी तथा एविडेंस-बेस्ड ट्रांसफार्मेशन जैसे विषय शामिल हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विषय कारण करें तो हम पाएंगे क़ि डब्लूसीईऐफ़ 15-18 सितंबर 2026 का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल अधिक उत्पादन और अधिकउपभोग पर आधारित नहीं हो सकती। संसाधनों का अधिकतम मूल्य बनाए रखना, उत्पादों का जीवन बढ़ाना, कचरे को संसाधन में बदलना, नई तकनीक को वित्त से जोड़ना और देशों के बीच ज्ञान साझा करना अब आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है। गांधीनगर में आयोजित यह मंच भारत के लिए केवल पर्यावरणीय कूटनीति का अवसर नहीं, बल्कि संसाधन दक्षता,निवेश,रोजगार,नवाचार औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और टिकाऊ विकास को एक ही आर्थिक ढांचे में जोड़ने का अंतरराष्ट्रीय मंच है।यदि मरम्मत,पुनः उपयोग, पुनर्निर्माण और पुनर्चक्रण को उद्योग, बाजार और उपभोक्ता व्यवहार का सामान्य हिस्सा बनाया जाता है, तो कचरा बोझ न रहकर अर्थव्यवस्था के अगले चक्र का संसाधन बन सकता है। यही चक्रीय अर्थव्यवस्था का मूल दर्शन है,फेंकने की संस्कृति से बचत की संस्कृति, अपशिष्ट से संसाधन और रैखिक विकास से चक्रीय समृद्धि की ओर परिवर्तन।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

सम्मान समारोह में सम्मानित होने पर श्री श्री गणेश पूजा समिति के प्रति आभार।

सम्मान समारोह में सम्मानित होने पर श्री श्री गणेश पूजा समिति के प्रति आभार।

जमशेदपुर

श्री श्री गणेश पूजा समिति, गम्हरिया द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर को सम्मानित किए जाने पर परिषद की ओर से समिति के प्रति आभार व्यक्त किया गया। परिषद ने कहा कि समाज एवं राष्ट्रहित में सक्रिय रूप से कार्य करने वाले लोगों और संगठनों को सम्मानित करना निश्चित रूप से प्रेरणादायी पहल है। ऐसे आयोजन सामाजिक सहभागिता, आपसी सहयोग और सेवा भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

परिषद की ओर से कहा गया कि श्री श्री गणेश पूजा समिति द्वारा जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ समारोह का आयोजन किया गया, वह सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की भावना को मजबूत करने वाला है। समिति द्वारा प्रदान किया गया स्नेह, सम्मान और सहयोग पूर्व सैनिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

इस अवसर पर कौशल जी एवं श्री श्री गणेश पूजा समिति, गम्हरिया के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया। परिषद ने कहा कि पूर्व सैनिकों ने अपने सेवाकाल में देश की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है तथा सेवानिवृत्ति के बाद भी समाजसेवा और राष्ट्रहित के कार्यों में अपनी भूमिका निभाने का प्रयास जारी रखते हैं। ऐसे में सामाजिक संस्थाओं द्वारा उनके प्रयासों को सम्मानित करना उनका उत्साह बढ़ाता है।

अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर की ओर से श्री श्री गणेश पूजा समिति, गम्हरिया के सभी सदस्यों एवं श्रद्धालुओं को गणेश उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं। परिषद ने भगवान श्री गणेश से कामना की कि समिति निरंतर धार्मिक, सामाजिक एवं जनसेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रहे तथा समाज में एकता, सद्भाव, सहयोग और सेवा की भावना को और मजबूत करे।

इस अवसर पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, झारखंड की ओर से सिद्धनाथ सिंह, युद्धवीर मानिक वर्धा, हवलदार जसवीर सिंह, अवधेश कुमार, राजीव कुमार, अनिल कुमार सिन्हा, गौतम लाल, संजय सिंह, मनोज कुमार सिंह, राम भजन राम, निर्मल कुमार, रमेश प्रसाद, नजीत झा एवं शैलेंद्र कुमार सिंह सहित अन्य सदस्यों ने श्री श्री गणेश पूजा समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियमितता के मामले में कार्रवाई, प्राथमिकी के अनुसंधान एवं सत्यापन के उपरांत पीडीएस डीलर विनोद नायक गिरफ्तार।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अनियमितता के मामले में कार्रवाई, प्राथमिकी के अनुसंधान एवं सत्यापन के उपरांत पीडीएस डीलर विनोद नायक गिरफ्तार।

सरायकेला-खरसावां

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न वितरण में अनियमितता के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में खरसावां थाना में दिनांक 29 मई 2026 को दर्ज कांड संख्या 25/26 में प्राथमिकी के अनुसंधान एवं तथ्यों के सत्यापन के उपरांत पीडीएस डीलर विनोद नायक, उम्र 45 वर्ष को आज गिरफ्तार किया गया है।

उल्लेखनीय है कि खरसावां प्रखंड अंतर्गत निलंबित जन वितरण प्रणाली दुकानों के खाद्यान्न स्टॉक एवं अभिलेखों के विशेष सत्यापन के दौरान ग्राम तेलीसाई के पीडीएस डीलर विनोद नायक के यहां स्टॉक में गंभीर अनियमितता पाई गई थी। अभिलेखों के अनुसार उनके यहां 15,142 किलोग्राम चावल एवं 3,892 किलोग्राम गेहूं अवशेष स्टॉक के रूप में उपलब्ध होना अपेक्षित था, जबकि भौतिक सत्यापन के दौरान चावल का स्टॉक शून्य पाया गया था।

उक्त अनियमितता के संबंध में दिनांक 29 मई 2026 को खरसावां थाना कांड संख्या 25/26 दर्ज किया गया था। उक्त कांड में BNS की धारा 316(5) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी के अनुसंधान एवं तथ्यों के सत्यापन के क्रम में पुलिस द्वारा विनोद नायक को आज गिरफ्तार किया गया है।

जिला प्रशासन द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न के स्टॉक, अभिलेखों एवं वितरण व्यवस्था की नियमित निगरानी एवं सत्यापन किया जा रहा है। जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता, खाद्यान्न के दुरुपयोग, गबन अथवा अभिलेखों में विसंगति पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली पात्र लाभुकों के खाद्य सुरक्षा अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी व्यवस्था है। इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं लाभुकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

यूपीआई पर 2,000 रूपए की सीमा के बाद क्यों मचा राजनीतिक घमासान? – सरकार का तर्क,विपक्ष का आरोप और आम जनता की जेब पर संभावित असर?

यूपीआई पर 2,000 रूपए की सीमा के बाद क्यों मचा राजनीतिक घमासान? – सरकार का तर्क,विपक्ष का आरोप और आम जनता की जेब पर संभावित असर?

यूपीआई (मोबाइल से भुगतान) पर फ़ीस का फूटा बम? -भुगतान व निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 की धारा 10ए में संशोधन से यूपीआई का नया अध्याय -2,000 तक जीरो चार्ज,ऊपर के मर्चेंट भुगतान पर एमडीआर का रास्ता क्यों खुला? -समग्र व्यापक विश्लेषण

मोबाइल से भुगतान करने वालों के लिए बड़ा सवाल- 2,000 तक यूपीआई फ्री रखने के बाद ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एमडीआर क्यों? दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? -कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से? -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

वैश्विक स्तरपर आज भारत में यूपीआई (मोबाइल से भुगतान) केवल भुगतान का माध्यम नहीं,बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक,सब्जी वाले से लेकर ऑनलाइन खरीदारी तक मोबाइल से कुछ सेकंड में भुगतान करना सामान्य बात हो गई है। ऐसे समय में केंद्र सरकार की 14 सितंबर 2026 की केंद्रीय वित्त मंत्रालय की नई अधिसूचना ने यूपीआई के भविष्य को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2,000 रूपए तक के यूपीआई भुगतान और रूपे डेबिट कार्ड भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रदातासीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकते। लेकिन 2,000 रूपए से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतान के लिए भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाए जाने की कानूनी संभावना अब खुल गई है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बताना चाहूंगा कि पहले समझिए, असल में सरकार ने किया क्या है?इसे बहुत आसान उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आपने किसी दुकानदार को 2000 रूपए यूपीआई से दिए। इसपर अभी कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकता। लेकिन यदि आपने किसी व्यापारी को 5,000 रूपए का भुगतान किया तो नई अधिसूचना यह नहीं कहती कि आज से आपसे 25 रूपए शुल्क लिया जाएगा। ऐसा कोई 0.5 प्रतिशत शुल्क अभी तय नहीं किया गया है।असल बदलाव यह है कि पहले यूपीआई पर शुल्क लगाने की मनाही का दायरा व्यापक था, जबकि नई व्यवस्था में 2,000 रूपए तक के भुगतान को स्पष्ट रूप से शुल्क-मुक्त सुरक्षा दी गई है।इससे 2,000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांसक्शयंस पर भविष्य में एमडीआर निर्धारित करने का रास्ता खुला है। अभी दर क्या होगी, कब से होगी और किन कारोबारों पर होगी,यह अलग प्रक्रिया में सटीकता से  तय होना है।

साथियों बात अगर हम एमडीआर आखिर होता क्या है? इसको समझने की करें तो मर्चेंट डिस्काउंट रेट को आसान भाषा में दुकानदार से लिया जाने वाला डिजिटल भुगतान का सेवा-शुल्क समझिए।उदाहरण के लिए,मान लीजिए किसी भविष्य की व्यवस्था में किसी व्यापारी के 10,000 रूपए के डिजिटल भुगतान पर 0.5 प्रतिशत एमडीआर तय होता है। तब शुल्क 50 रूपए होगा।इसका मतलब यह नहीं कि ग्राहक के यूपीआई ऐप से सरकार सीधे 50 रूपए काट लेगी। शुल्क भुगतान व्यवस्था में शामिल संबंधित पक्षों के बीच लागू होगा।यहीं से विवाद पैदा होता है।सरकार कहती है कि ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा,लेकिन विपक्ष का सवाल है कि यदि दुकानदार को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए खर्च करना पड़ेगा तो वह खर्च अंततः कैसे निकलेगा? दुकानदार चाहे तो अपने कारोबार की लागत में इसे शामिल कर सकता है और वस्तु या सेवा की कीमत बढ़ा सकता है।अर्थात ग्राहक को अलग से यूपीआई शुल्क दिखाई न दे, लेकिन यदि व्यापारी ने लागत कीमत में जोड़ दी तो अप्रत्यक्ष रूप से उसका बोझ ग्राहक तक पहुंच सकता है।यह विपक्ष की मुख्य चिंता है,हालांकि यह अभी संभावित प्रभाव है,कोई सटीकता से लागू उपभोक्ता शुल्क नहीं।
साथियों बात अगर हम फिर राजनीतिक घमासान क्यों शुरू हुआ? इसको समझने की करें तो,यही सबसे बड़ा सवाल है?मुख्य पक्षी पार्टी के युवा नेता ने आरोप लगाया है कि सरकार ने चुपचाप यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। उनका तर्क है कि 2,000 से अधिक के व्यापारी यूपीआई भुगतान संख्या में कम हो सकते हैं, लेकिन कुल लेन-देन मूल्य में उनका हिस्सा बहुत बड़ा है। इसलिए यदि भविष्य में इन पर एमडीआऱ लगाया गया तो उसका आर्थिक प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दुकानदार पर लगने वाला खर्च आखिरकार ग्राहक तक पहुंच सकता है।उन्होंने इससे आगे बढ़कर अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव का आरोप भी लगाया है।उनका दावा है कि अमेरिका की कुछ भुगतान कंपनियां भारत की ज़ीरो -एमडीआऱ व्यवस्था का लंबे समय से विरोध करती रही हैं और सरकार अब उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।उन्होंने इसे अमेरिकी दबाव के सामने सरकार के झुकने से जोड़कर राजनीतिक हमला किया है।लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है, अमेरिकी दबाव वाला आरोप विपक्ष का राजनीतिक आरोप है; इसे सरकार द्वारा स्वीकार किया गया तथ्य नहीं माना जा सकता।

साथियों बात अगर हम सरकार का जवाब क्या है? इसको समझने की करें तो सरकार और सत्ताधारी पार्टी की ओर से कहा गया है कि मुख्य विपक्षी पार्टी ने इस मुद्दे को गलत तरीके से पेश किया है।सत्ताधारी पार्टी मीडिया प्रभारी ने विशेष रूप से उस दावे को खारिज किया है कि 2,000 से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर तत्काल 0.5 प्रतिशत टैक्स या शुल्क लगा दिया गया है।उनके अनुसार, 5,000 पर 25 और 10,000 पर 50 वसूलने की गणना किसी सरकारी शुल्क-सूची से नहीं,बल्कि काल्पनिक 0.5 प्रतिशत दर मानकर की गई है। अभी ऐसी दर अधिसूचित नहीं हुई है।इसके अलावा पर्सन-टू -पर्सन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को यूपीआई भुगतान को व्यापारी भुगतान से अलग समझना होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार,नया बदलाव मुख्यतः मर्चेंट ट्रांसक्शयंस के संभावित एमडीआर ढांचे से जुड़ा है। कानून में बदलाव को भी सरल भाषा में समझिए इस पूरे मामले की जड़ पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टमस एक्ट, 2007 में है। सरल भाषा में कहें तो यह वह कानून है जो देश की भुगतान प्रणालियों को कानूनी और नियामकीय ढांचा देता है।हाल में इसमें बदलाव किया गया ताकि सरकार को यह स्पष्ट करने का अधिकार मिल सके कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क नहीं लगाया जा सकता और किन परिस्थितियों में शुल्कव्यवस्था बनाई जा सकती है। इसके बाद 14 सितंबर की अधिसूचना में 2,000 तक के यूपीआई और रूपए डेबिट कार्ड भुगतान को स्पष्ट रूप से शुल्क-मुक्त श्रेणी में रखा गया।अर्थात इसे ऐसे समझिए,कानून ने दर तय नहीं की है, बल्कि शुल्क व्यवस्था के लिए कानूनी दरवाजा खोला है; वास्तविक एमडीआर लागू करने के लिए आगे अलग निर्णय और नियम जरूरी होंगे।

साथियों बात अगर हम  सरकार ऐसा रास्ता क्यों चाहती है? इसको समझने की करें तो सरकार का सबसे बड़ा तर्क है कि यूपीआई अब बहुत विशाल व्यवस्था बन चुका है। इसकी सुरक्षा,सर्वर,तकनीकी क्षमता,साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था और लगातार तकनीकी अपग्रेड पर भारी खर्च होता है।यूपीआई की वृद्धि वास्तव में अभूतपूर्व रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार एफ़वाय 2016-17 में यूपीआई का वार्षिक लेन-देन मूल्य केवल ₹0.07 लाख करोड़ था,जो एफ़वाय 2025-26 में बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रूपए हो गया। इसी अवधि में वार्षिक लेन-देन संख्या 1.78 करोड़ से बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई। यूपीआई अब 11 देशों में भी परिचालन/स्वीकृति के स्तर तक पहुंच चुका है।इसलिए सरकार का तर्क है कि इतनी विशाल डिजिटल भुगतान व्यवस्था को हमेशा सरकारी प्रोत्साहन के सहारे चलाना लंबे समय में उचित नहीं होगा। एक ऐसा राजस्व मॉडल चाहिए जिससे भुगतान का पूरा इकोसिस्टम अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बन सके।लेकिन विपक्ष की चिंता को भी सटीकता से समझना जरूरी है,विपक्ष का सवाल सिर्फ शुल्क की राशि को लेकर नहीं है। असली चिंता यह है कि क्या आज व्यापारी पर लगने वाला खर्च कल वस्तुओं की कीमतों में दिखाई देगा?मान लीजिए किसी व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर अतिरिक्त लागत आती है। उसके सामने तीन रास्ते हो सकते हैं,वह खुद लागत उठाए, ग्राहक से अलग शुल्क मांगे या अपनी वस्तु/सेवा की कीमत में लागत जोड़ दे।सरकार यदि ग्राहक से सीधे शुल्क लेने की अनुमति नहीं देती, तब भी तीसरा रास्ता आर्थिक रूप से संभव है। यही कारण है कि विपक्ष कह रहा है कि ग्राहक से शुल्क नहीं लिया जाएगा और ग्राहक पर कोई आर्थिक प्रभाव नहीं पड़ेगा इन दोनों बातों को सटीकता से एक जैसा नहीं माना जाना चाहिए।

साथियों बात अगर हम असली तस्वीर क्या है? इसको समझने की करें तो,इस पूरे विवाद को तीन वाक्यों में समझा जा सकता है।पहला,2,000 तक का यूपीआई भुगतान अभी स्पष्ट रूप से शुल्क-मुक्त है।दूसरा 2,000 से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई ट्रांसक्शयंस पर अभी कोई निश्चित 0.5 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं हुआ है, लेकिन भविष्य में एमडीआऱ लगाने का कानूनी रास्ता खुला है। तीसरा राजनीतिक विवाद इस संभावित एमडीआर के आर्थिक बोझ को लेकर है कि उसका भार वास्तव में व्यापारी उठाएगा या किसी रूप में अंततः ग्राहक तक पहुंचेगा।यही इस पूरे मामले का केंद्रीय प्रश्न है। सरकार के सामने चुनौती है कि यूपीआई को दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लोकप्रिय रियल- टाइम भुगतान प्रणालियों में से एक बनाए रखते हुए उसका आर्थिक मॉडल भी टिकाऊ बनाया जाए। दूसरी ओर विपक्ष की चिंता है कि कहीं ग्राहक से शुल्क नहीं कहकर अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई या वस्तुओं की कीमतों के माध्यम से उसका बोझ जनता तक न पहुंच जाए।

अतः अगर हम उपयोग पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि फिलहाल इसे यूपीआई पर शुल्क लग गया कहना जल्दबाजी होगी। अधिक सटीक बात यह है कि सरकार ने 2,000 तक के भुगतान को स्पष्ट रूप सेशुल्क -मुक्त रखते हुए 2,000 से ऊपर के व्यापारी भुगतान पर भविष्य में एमडीआर लागू करने की कानूनी संभावना का रास्ता खोला है। अब असली परीक्षा आगे होने वाले निर्णयों की होगी, एमडीआर की दर कितनी तय होती है,किन व्यापारियों पर लागू होती है और सबसे महत्वपूर्ण,उसका अंतिम आर्थिक बोझ कौन उठाता है। इस विवाद का सबसे महत्वपूर्ण फर्क यही है कि एमडीआर लगाने का रास्ता खुलना और एमडीआर लग जाना दो अलग बातें हैं। अभी 2,000 से ऊपर के यूपीआई मर्चेंट ट्रांसक्शयंस पर कोई 0.5प्रतिशत शुल्क लागू नहीं हुआ है। आगे की नीति ही तय करेगी कि इसका वास्तविक प्रभाव व्यापारी, भुगतान कंपनियों और अंततः उपभोक्ता पर कितना पड़ता है।

क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

डॉ. रोनाल्ड रॉस पुण्यतिथि 16 सितम्बर

डॉ. रोनाल्ड रॉस पुण्यतिथि 16 सितम्बर

डॉ. रोनाल्ड रॉस एक प्रसिद्ध ब्रिटिश चिकित्सक, वैज्ञानिक और मलेरिया पर शोध करने वाले महान चिकित्सा विशेषज्ञ थे। उन्होंने यह सिद्ध करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई कि मलेरिया का परजीवी संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के माध्यम से मनुष्यों तक पहुँचता है।

संक्षिप्त परिचय

📅 जन्म: 13 मई 1857
📍 जन्मस्थान: अल्मोड़ा, उत्तराखंड, भारत
🕯️ निधन: 16 सितम्बर 1932
🔬 प्रमुख क्षेत्र: चिकित्सा एवं मलेरिया अनुसंधान
🏆 सम्मान: चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार, 1902

मलेरिया पर ऐतिहासिक खोज

डॉ. रोनाल्ड रॉस ने भारतीय चिकित्सा सेवा में कार्य करते हुए मलेरिया पर गहन शोध किया। 20 अगस्त 1897 को सिकंदराबाद में उन्होंने मच्छर के शरीर में मलेरिया परजीवी के विकास से जुड़े महत्त्वपूर्ण प्रमाण खोजे।

उनके शोध से यह समझने में सहायता मिली कि मलेरिया का संक्रमण कैसे फैलता है। इस खोज ने मच्छर नियंत्रण, साफ-सफाई और रोग-रोकथाम के प्रभावी उपाय विकसित करने का मार्ग प्रशस्त किया।

नोबेल पुरस्कार

मलेरिया के प्रसार से संबंधित उनके उल्लेखनीय अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 1902 में शरीर विज्ञान अथवा चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

योगदान और विरासत

डॉ. रोनाल्ड रॉस की खोज ने दुनिया भर में मलेरिया नियंत्रण अभियानों को वैज्ञानिक आधार दिया। प्रत्येक वर्ष 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस उनकी ऐतिहासिक खोज की स्मृति में मनाया जाता है।

पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

मानवता को मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाने की दिशा में अमूल्य योगदान देने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. रोनाल्ड रॉस को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।

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